विषय: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) + राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) [कुल ६० प्रश्न]
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अनुभाग १: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) — ३० प्रश्न
Q1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्ति अधिनियम, 2023 के तहत गठित 'चयन समिति' (Selection Committee) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस समिति के अध्यक्ष विधिक रूप से भारत के प्रधानमंत्री होते हैं।
2. लोकसभा में विपक्ष का नेता या सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता इसका अनिवार्य सदस्य होता है।
3. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को इस समिति में तीसरे विधिक सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: वर्ष 2023 के नए विधिक अधिनियम के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति हेतु ३-सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान है। इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, दूसरे सदस्य पीएम द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री होते हैं और तीसरे सदस्य लोकसभा में विपक्ष का नेता या सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023) वाद में आदेश दिया था कि चयन समिति में CJI होने चाहिए, परंतु संसद द्वारा पारित नए कानून में CJI के स्थान पर कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। अतः कथन 3 सर्वथा असत्य है।
Q2. भारतीय संविधान के भाग 15 के अंतर्गत निर्वाचन नामावली (Electoral Rolls) के संदर्भ में किस अनुच्छेद में यह विधिक गारंटी दी गई है कि किसी भी नागरिक को धर्म, नस्ल, जाति या लिंग के आधार पर नामावली में नाम जोड़ने से वंचित नहीं किया जाएगा?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 325 स्पष्ट रूप से यह अधिदेश जारी करता है कि कोई भी व्यक्ति केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या इनमें से किसी भी आधार पर किसी विशेष निर्वाचक नामावली में शामिल होने के लिए अपात्र नहीं होगा और न ही वह किसी विशेष नामावली में अलग से नाम जुड़वाने का दावा कर सकता है। अनुच्छेद 324 आयोग के गठन से, 326 वयस्क मताधिकार से तथा 327 संसद की विधायी शक्ति से संबंधित है।
Q3. निर्वाचन आयुक्तों के कार्यकाल और सेवा शर्तों के विधिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कालानुक्रमिक (Chronological) तथ्य पूर्णतः असत्य है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: जनवरी 1990 में जब दो अतिरिक्त निर्वाचन आयुक्तों के पदों को समाप्त कर आयोग को पुनः एकल-सदस्यीय बनाया गया था, तब केंद्र में **वी.पी. सिंह सरकार (नेशनल फ्रंट)** सत्ता में थी, न कि नरसिम्हा राव सरकार। नरसिम्हा राव सरकार ने अक्टूबर 1993 में अध्यादेश लाकर इसे स्थायी रूप से तीन-सदस्यीय (1 CEC + 2 EC) बनाया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने एस.एस. धनोआ वाद में विधिक रूप से वैध ठहराया था।
Q4. विधिक दृष्टिकोण से भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अंतर्गत किसके समरूप निर्धारित की गई है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 324(5) के परंतुक के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को उनके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जा सकता है, जिस रीति से और जिन आधारों पर **उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के किसी न्यायाधीश** को हटाया जाता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में 'सिद्ध कदाचार' या 'असमर्थता' के आधार पर उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 विशेष बहुमत द्वारा प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है। अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटाने के लिए राष्ट्रपति केवल CEC की लिखित सिफारिश पर कार्रवाई कर सकते हैं।
Q5. निर्वाचन क्षेत्रों की विधिक सीमाओं का निर्धारण करने वाले 'परिसिमन आयोग' (Delimitation Commission) के संदर्भ में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की क्या विधिक स्थिति होती है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: परिसिमन आयोग अधिनियम के तहत गठित होने वाले इस शक्तिशाली आयोग में **भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC)** पदेन सदस्य के रूप में अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं। इस आयोग की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाती है। यह एक अत्यंत स्वतंत्र विधिक निकाय है जिसके द्वारा जारी आदेशों को कानून के समान दर्जा प्राप्त होता है और इसे देश के किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
Q31. राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के विधिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन पूर्णतः सत्य है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) एक संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन ७३वें और ७४वें संविधान संशोधन अधिनियम, १९९२ के तहत किया गया है। विधिक रूप से यह **पूर्णतः एकल-सदस्यीय निकाय** है, अर्थात इसमें केवल एक ही सदस्य होता है जिन्हें 'राज्य निर्वाचन आयुक्त' कहा जाता है। इसमें भारत निर्वाचन आयोग की भांति अन्य कोई आयुक्त नहीं होते।
Q32. राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण करने के लिए किस विशिष्ट अनुच्छेद के तहत राज्य निर्वाचन आयोग का प्रावधान है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: भारतीय संविधान के **अनुच्छेद 243K** के तहत विशेष रूप से पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के चुनावों के संचालन हेतु राज्य निर्वाचन आयोग का विधिक प्रावधान किया गया है। शहरी निकायों (नगर पालिकाओं, नगर परिषदों, नगर निगमों) के चुनावों के लिए यही शक्ति **अनुच्छेद 243ZA** के तहत प्राप्त होती है।
Q33. राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की विधिवत स्थापना किस वर्ष और किस तिथि को अध्यादेश एवं अधिनियम के विधिक क्रियान्वयन के साथ संपन्न हुई थी?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: यद्यपि ७३वाँ और ७४वाँ संविधान संशोधन अधिनियम १९९३ में प्रभावी हुए थे, परंतु राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयोग का वास्तविक विधिक गठन **1 जुलाई 1994** को किया गया था। इसी तिथि को राज्य के प्रथम निर्वाचन आयुक्त (श्री अमर सिंह राठौड़) ने अपना पदभार ग्रहण किया था।
Q34. राजस्थान राज्य निर्वाचन आयुक्त (SEC) का विधिक 'कार्यकाल' भारतीय संविधान व राज्य अधिनियम के तहत कितना निर्धारित किया गया है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: राजस्थान राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल **5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु** (जो भी पहले हो) विधिक रूप से निर्धारित है। ध्यान दें कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में यह अवधि ६ वर्ष है, परंतु राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के प्रांतीय नियमों के तहत यह **५ वर्ष** ही मान्य है। आयु सीमा ६५ वर्ष ही है।
Q35. राजस्थान के राज्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की विधिक प्रक्रिया के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 243K(2) के विधिक परंतुक के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा, जिस रीति से और जिन आधारों पर **उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीश** को हटाया जाता है। अर्थात संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होने के बाद केवल भारत के राष्ट्रपति ही उन्हें हटा सकते हैं, राज्यपाल को यह विधिक अधिकार नहीं है।
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