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आरएएस मास्टर इंटरैक्टिव श्रृंखला — फ़ाइल-2

विषय: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) + राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) [कुल 40 प्रश्न]

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लोक सेवा भर्ती आयोगों का सम्पूर्ण वस्तुनिष्ठ ग्रन्थ

छात्र निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के सही विकल्प पर क्लिक करके अपना उत्तर जांचें। क्लिक करते ही सही/गलत उत्तर हाइलाइट होगा और विधिक व्याख्या स्वतः नीचे प्रकट हो जाएगी।

अनुभाग 1: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) — 15 प्रश्न

Q1. भारतीय संविधान के भाग 14 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों की विधिक 'योग्यता' के संदर्भ में कौन-सा कथन सर्वथा सत्य है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316(1) के विधिक परंतुक के अनुसार, यूपीएससी या राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष व सदस्यों के लिए कोई विशिष्ट शैक्षणिक या तकनीकी योग्यता का उल्लेख नहीं है। परंतु यह विधिक रूप से अधिदेशित है कि आयोग के यथाशक्य निकटतम **आधे (50%) सदस्य** ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्होंने भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन न्यूनतम **10 वर्ष** तक प्रशासनिक या लोक सेवा का कार्य किया हो। बाकी पद प्रख्यात शिक्षाविदों या कानूनविदों से भरे जा सकते हैं।
Q2. ब्रिटिश शासन काल के दौरान भारत में एक केंद्रीय लोक सेवा आयोग की स्थापना की पुरजोर विधिक सिफारिश किस ऐतिहासिक आयोग द्वारा वर्ष 1924 में की गई थी?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: भारत में सिविल सेवा सुधारों और एक स्वतंत्र भर्ती बोर्ड के गठन हेतु ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित **'ली आयोग' (Lee Commission)** ने वर्ष 1924 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें बिना किसी देरी के एक केंद्रीय लोक सेवा आयोग के गठन की सिफारिश की गई थी। इसी सिफारिश के आधार पर अंततः भारत सरकार अधिनियम 1919 के तहत **1 अक्टूबर 1926** को भारत के प्रथम 'केंद्रीय लोक सेवा आयोग' की स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष सर रॉस बार्कर (Sir Ross Barker) बने थे।
Q3. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष व सदस्यों का विधिक 'कार्यकाल' भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316(2) के तहत कितना निर्धारित किया गया है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 316(2) के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का अध्यक्ष या कोई भी सदस्य पद ग्रहण करने की तारीख से **6 वर्ष** की अवधि तक या **65 वर्ष** की आयु प्राप्त कर लेने तक (जो भी पहले हो) अपना पद धारण करेगा। वे किसी भी समय राष्ट्रपति को अपना लिखित इस्तीफा सौंप सकते हैं।
Q4. संविधान के किस अनुच्छेद के विधिक उपबंधों के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) प्रतिवर्ष अपने कार्यों की विस्तृत 'वार्षिक रिपोर्ट' (Annual Report) भारत के राष्ट्रपति को सौंपता है?
सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: भारतीय संविधान का **अनुच्छेद 323** स्पष्ट रूप से यह वैधानिक अधिदेश देता है कि संघ आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिवर्ष अपने द्वारा किए गए कार्यों की रिपोर्ट **भारत के राष्ट्रपति** को प्रस्तुत करे। राष्ट्रपति महोदय उस रिपोर्ट को एक स्पष्टीकरण ज्ञापन (Explanation Memo) के साथ संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के पटल पर रखवाते हैं। यदि सरकार आयोग की किसी विधिक सलाह को खारिज करती है, तो उसे संसद में उसका लिखित कारण बताना अनिवार्य होता है।
Q5. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष व सदस्यों को कार्यकाल के मध्य में 'पद से हटाने' (Removal) की अनन्य विधिक शक्ति अनुच्छेद 317 के तहत किसमें निहित है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अनुच्छेद 317(1) के अनुसार, यूपीएससी के अध्यक्ष या किसी भी सदस्य को केवल 'कदाचार' (Misbehaviour) के आधार पर ही पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए कड़ा नियम यह है कि राष्ट्रपति मामले को **उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)** को जांच हेतु भेजेंगे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 145 के तहत की गई विधिक जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो न्यायालय की सलाह पर **राष्ट्रपति** उन्हें पद से मुक्त कर सकते हैं। यह सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है।
Q6. संविधान के अनुच्छेद 318 के विधिक प्रावधानों के अनुसार, UPSC के सदस्यों की संख्या और उनके स्टाफ की सेवा शर्तों का निर्धारण करने की नियम बनाने की शक्ति किसमें निहित है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: भारतीय संविधान का **अनुच्छेद 318** स्पष्ट करता है कि संघ आयोग (UPSC) के संदर्भ में सदस्यों की संख्या तय करने तथा उनके सचिवालय स्टाफ की सेवा शर्तों के संबंध में नियम बनाने की संपूर्ण विधिक शक्ति **भारत के राष्ट्रपति** में निहित है। वर्तमान में राष्ट्रपति द्वारा जारी नियमों के अनुसार आयोग में 1 अध्यक्ष और अधिकतम 10 सदस्य (कुल 11 व्यक्ति) हो सकते हैं। विधिक सुरक्षा यह है कि नियुक्ति के पश्चात किसी सदस्य की सेवा शर्तों में कोई अलाभकारी (Disadvantageous) संशोधन नहीं किया जा सकता।
Q7. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष व सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन सहित संपूर्ण प्रशासनिक खर्च भारतीय संविधान के अनुसार किस पर भारित (Charged) होते हैं?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: संविधान के **अनुच्छेद 322** के तहत यह विशेष वित्तीय सुरक्षा प्रदान की गई है कि संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्ते, पेंशन तथा संपूर्ण प्रशासनिक खर्चे **भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India)** पर भारित होंगे। 'भारित' होने का विधिक अर्थ यह है कि इन खर्चों पर संसद में चर्चा तो हो सकती है, परंतु प्रतिवर्ष कोई मतदान (Voting) नहीं कराया जा सकता, जिससे आयोग की वित्तीय स्वतंत्रता अक्षुण्ण बनी रहती है।
Q8. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 319 के कड़े विधिक निषेधों के अनुसार, UPSC का 'अध्यक्ष' (Chairperson) सेवानिवृत्ति के पश्चात निम्नलिखित में से किस पद के लिए पात्र हो सकता है?
सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: आयोग को कार्यपालिका के अनुचित प्रभाव और लालच से मुक्त रखने के लिए **अनुच्छेद 319(a)** में बेहद कड़ा विधिक प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने पद पर न रहने के पश्चात, भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन **किसी भी अन्य नियोजन/नौकरी (Employment) के लिए विधिक रूप से पूर्णतः अपात्र** हो जाता है। वह दोबारा यूपीएससी का अध्यक्ष भी नहीं बन सकता।
Q9. यदि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के किसी 'सदस्य' (Member) का कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तो अनुच्छेद 319 के विधिक नियमों के अनुसार वह निम्नलिखित में से किस पद हेतु अर्ह (Eligible) माना जाएगा?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अनुच्छेद 319(b) के अनुसार, यूपीएससी का कोई भी **सदस्य** पद से हटने के बाद भारत सरकार या राज्य सरकार में किसी सामान्य नौकरी का पात्र तो नहीं होगा, परंतु वह **संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष** के रूप में अथवा किसी **राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष** के रूप में नियुक्त होने के लिए विधिक रूप से पूर्ण अर्ह (Eligible) माना जाता है। वह यूपीएससी के सामान्य सदस्य के रूप में दोबारा नियुक्त (Re-appointment) नहीं हो सकता।
Q10. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 320 के विधिक प्रावधानों के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा विषय UPSC के 'परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार' (Consultative Jurisdiction) के दायरे में अनिवार्य रूप से शामिल है?
सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: **अनुच्छेद 320(3)** आयोग के परामर्शदात्री कार्यों की विस्तृत सूची देता है। इसके तहत सिविल सेवाओं की भर्ती नियमावली, पदोन्नति, स्थानांतरण के विधिक सिद्धांत तथा लोक सेवकों पर की जाने वाली कडी **अनुशासनात्मक कार्रवाइयों (Disciplinary actions)** (जैसे पेंशन रोकना, पदावनति या बर्खास्तगी) के संदर्भ में सरकार के लिए आयोग से लिखित विधिक परामर्श लेना अनिवार्य होता है। हालांकि आयोग की प्रकृति मुख्य रूप से सलाहकार (Advisory) होती है।
Q11. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के विधिक अधिकारों के संदर्भ में, संसद को अनुच्छेद 321 के तहत कौन-सी विशिष्ट विधिक शक्ति प्रदान की गई है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: भारतीय संविधान का **अनुच्छेद 321** संसद को यह अनन्य विधिक शक्ति सौंपता है कि वह विधिक अधिनियम पारित करके संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के कार्यों व क्षेत्राधिकार का दायरा विस्तृत कर सकती है। इसके माध्यम से संसद किसी केंद्रीय लोक प्राधिकरण, निगम या सार्वजनिक संस्थान के स्टाफ की भर्ती का अतिरिक्त कार्य भी आयोग को विधिक रूप से सौंप सकती है।
Q12. यदि किसी आपातकालीन या आकस्मिक परिस्थिति के कारण UPSC के 'अध्यक्ष' का पद रिक्त हो जाता है, तो अनुच्छेद 316(1A) के तहत कार्यवाहक अध्यक्ष (Acting Chairman) की नियुक्ति कौन करता है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: संविधान के **अनुच्छेद 316(1A)** के तहत यह स्पष्ट विधिक प्रावधान है कि यदि अध्यक्ष का पद मृत्यु, इस्तीफे या अनुपस्थिति के कारण रिक्त होता है, तो **भारत के राष्ट्रपति** आयोग के अन्य सदस्यों में से किसी एक सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष (Acting Chairman) के रूप में कार्य करने के लिए विधिक रूप से नियुक्त करेंगे। जब तक नया नियमित अध्यक्ष पदभार ग्रहण नहीं कर लेता, तब तक कार्यवाहक अध्यक्ष के पास संपूर्ण विधिक शक्तियां प्राप्त होती हैं।
Q13. दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक ही 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (Joint State Public Service Commission - JSPSC) की स्थापना विधिक रूप से किसके द्वारा की जा सकती है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: अनुच्छेद 315(2) के अनुसार, दो या दो से अधिक राज्य आपसी सहमति से यह संकल्प ले सकते हैं कि उनके लिए एक ही संयुक्त आयोग (JSPSC) हो। इसके लिए विधिक नियम यह है कि संबंधित राज्यों के विधानमंडलों द्वारा ऐसा प्रस्ताव पास किए जाने के बाद **भारतीय संसद (Parliament) कानून बनाकर** संयुक्त लोक सेवा आयोग की स्थापना कर सकती है। यह एक **सांविधिक (Statutory) निकाय** होता है, न कि सीधे संवैधानिक। इसके अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
Q14. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के विधिक क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा प्रशासनिक अंग पूरी तरह से इसके दायरे से बाहर (Excluded) रखा गया है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: अनुच्छेद 320(4) स्पष्ट रूप से यह विधिक सीमा तय करता है कि नौकरियों में **आरक्षण (Reservation)** देने या पदों को अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए आरक्षित करने के विषय पर सरकार के लिए UPSC से परामर्श लेना विधिक रूप से आवश्यक नहीं है। आरक्षण नीति पूरी तरह कार्यपालिका (정부) और संसद के नीतिगत क्षेत्राधिकार में आती है, आयोग इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करता।
Q15. भारत के संवैधानिक इतिहास में, वर्ष 1950 में संविधान के लागू होने के पश्चात, UPSC के 'प्रथम भारतीय मुख्य अध्यक्ष' (First Indian Chairman) के रूप में किसने विधिक शपथ ली थी?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: 26 जनवरी 1950 को जब भारत का संविधान पूर्णतः प्रभावी हुआ, तब फेडेरल लोक सेवा आयोग का नाम बदलकर 'संघ लोक सेवा आयोग' (UPSC) किया गया। स्वतंत्र भारत के संविधान के तहत आयोग के **प्रथम भारतीय अध्यक्ष श्री एच.के. कृपलानी** बने थे। (ध्यान दें: आजादी से पूर्व वर्ष 1947 में फेडेरल कमीशन के प्रथम भारतीय अध्यक्ष एफ.डब्ल्यू. गॉलवे के बाद श्री एफ.एच. महोनी और फिर सर एच.जे. कानिया के दौर में बने थे, परंतु गणतंत्र भारत के पहले अध्यक्ष एच.के. कृपलानी थे)।

अनुभाग 2: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) — 25 प्रश्न

Q16. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ऐतिहासिक स्थापना और विधिक सुदृढ़ीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा विधिक एवं प्रशासनिक तथ्य पूर्णतः सत्य है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: राजस्थान के एकीकरण के समय तत्कालीन राजप्रमुख (सवाई मानसिंह II) द्वारा 16 अगस्त 1949 को एक अध्यादेश जारी किया गया था, जो 20 अगस्त 1949 को गजट में प्रकाशित हुआ। इसी तिथि (**20 अगस्त 1949**) को आरपीएससी की विधिवत स्थापना **जयपुर** में की गई थी। इसके प्रथम अध्यक्ष राजस्थान के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश **सर एस.के. घोष** बने थे। शुरुआत में आयोग में केवल 1 अध्यक्ष और 2 सदस्य थे। बाद में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर इसका मुख्यालय जयपुर से अजमेर स्थानांतरित किया गया था।
Q17. आरपीएससी (RPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों के 'कार्यकाल' और सेवानिवृत्ति की ऊपरी आयु सीमा के संदर्भ में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से मूलभूत विधिक भिन्नता क्या है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: मूल संविधान में राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के सदस्यों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष ही थी। परंतु **41वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976** द्वारा इस नियम को बदलकर ऊपरी आयु सीमा को 60 से बढ़ाकर **62 वर्ष** कर दिया गया। अतः वर्तमान विधिक नियमों के अनुसार, RPSC के अध्यक्ष व सदस्य **6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु** तक पद धारण कर सकते हैं, जबकि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में यह ऊपरी आयु सीमा **65 वर्ष** निर्धारित है। दोनों ही निकायों में कार्यकाल की अवधि 6 वर्ष समान है।
Q18. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष व सदस्यों की 'नियुक्ति' (Appointment) करने की अनन्य संवैधानिक शक्ति निम्नलिखित में से किसमें निहित है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: भारतीय संविधान के **अनुच्छेद 316(1)** के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति करने का अनन्य विधिक अधिकार **संबंधित राज्य के राज्यपाल (Governor)** को प्राप्त है। व्यावहारिक रूप से राज्यपाल महोदय राज्य के मुख्यमंत्री (CM) की अगुवाई वाली मंत्री परिषद की लिखित सलाह और सिफारिश पर ही यह नियुक्ति आदेश जारी करते हैं।
Q19. आरपीएससी के बदलते और आगामी एडवांस परीक्षा पैटर्न के अनुसार 'कूट आधारित' प्रश्न: RPSC के अध्यक्ष व सदस्यों को पद से हटाने (Removal) और निलंबन (Suspension) के संदर्भ में कौन-सा नियम संवैधानिक रूप से सत्य है?

1. RPSC के अध्यक्ष व सदस्यों को पद से हटाने का अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास सुरक्षित है।

2. कदाचार की जांच के दौरान आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को निलंबित (Suspend) करने की शक्ति राजस्थान के राज्यपाल के पास निहित है।

सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: यह संविधान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बारीक विधिक बिंदु है। अनुच्छेद 317 के अनुसार, यद्यपि आरपीएससी के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, परंतु उन्हें **हटाने (Removal) का अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति** के पास ही सुरक्षित है (सुप्रीम कोर्ट की विधिक जांच के बाद)। हालांकि, अनुच्छेद 317(2) के तहत यह कड़ा प्रावधान है कि जब तक उच्चतम न्यायालय की जांच की कार्यवाही लंबित है, तब तक उस अध्यक्ष या सदस्य को **निलंबित (Suspend) करने की शक्ति राज्य के राज्यपाल** के पास निहित होती है। अतः दोनों कथन पूर्णतः सत्य हैं।
Q20. वर्तमान नियमों और प्रशासनिक संशोधनों के पश्चात, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की 'कुल सदस्य संख्या' (अध्यक्ष सहित) विधिक रूप से कितनी निर्धारित की गई है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: स्थापना के समय (1949 में) आरपीएससी में केवल 1 अध्यक्ष और 2 सदस्य थे। समय-समय पर कार्यभार बढ़ने के कारण राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन करके सदस्यों की संख्या में वृद्धि की। वर्ष 2011 में किए गए नवीनतम प्रशासनिक संशोधन के पश्चात, वर्तमान में आरपीएससी की कुल सदस्य संख्या **1 अध्यक्ष और 7 सदस्य (कुल 8 व्यक्ति)** विधिक रूप से निश्चित की गई है।
Q21. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के इतिहास में 'सबसे लंबा कार्यकाल' (Longest Tenure) पूरा करने वाले अध्यक्ष निम्नलिखित में से कौन रहे हैं?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: आरपीएससी के इतिहास में **सबसे दीर्घकालीन कार्यकाल पूरा करने वाले अध्यक्ष श्री देवीशंकर तिवाड़ी (D.S. Tiwari)** रहे हैं। वे वर्ष 1951 से 1958 तक लगभग 7 वर्षों तक आयोग के स्थायी अध्यक्ष रहे थे। उनके कार्यकाल के दौरान ही आयोग की कई बुनियादी विधिक नियमावलियों को अमलीजामा पहनाया गया था।
Q22. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के इतिहास में 'सबसे न्यूनतम कार्यकाल' (Shortest Tenure) पूरा करने वाले अध्यक्ष का रिकॉर्ड किसके नाम दर्ज है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: आरपीएससी के प्रशासनिक इतिहास में **सबसे कम अवधि (न्यूनतम कार्यकाल) तक अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड श्री पी.एस. यादव (P.S. Yadav)** के नाम है। वे अक्टूबर 1997 में मात्र **12 दिन** के लिए आयोग के अध्यक्ष पद पर कार्यरत रहे थे। तथ्यों की बारीकी हेतु इसे कंठस्थ रखें।
Q23. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 319 के विधिक उपबंधों के अनुसार, RPSC का कोई 'सदस्य' (Member) सेवानिवृत्ति के पश्चात निम्नलिखित में से किस पद हेतु अर्ह (Eligible) माना जाएगा?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अनुच्छेद 319(c) और (d) के अनुसार, किसी राज्य लोक सेवा आयोग (जैसे RPSC) का सदस्य सेवामुक्ति के बाद सामान्य नौकरियों के लिए तो अपात्र होता है, परंतु वह उच्च संवैधानिक पदों की सीढ़ी चढ़ सकता है। वह **आरपीएससी का अध्यक्ष** नियुक्त हो सकता है, **यूपीएससी का अध्यक्ष या सदस्य** बन सकता है, अथवा **किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का अध्यक्ष** विधिक रूप से मनोनीत हो सकता है।
Q24. आरपीएससी के आगामी कठिन परीक्षा पैटर्न के अनुसार 'कथन एवं कारण' आधारित प्रश्न:

कथन (A): राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) राज्य में सिविल सेवकों की भर्ती करने वाला एक शीर्ष स्वायत्त संवैधानिक थिंक-टैंक निकाय है।

कारण (R): आयोग द्वारा राज्य सरकार को दी जाने वाली सभी विधिक व अनुशासनात्मक सलाहें सरकार के लिए विधिक रूप से पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती हैं।

सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: आरपीएससी मुख्य परीक्षा के विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए यह प्रश्न कोर है। कथन (A) बिल्कुल सही है कि यह एक संवैधानिक स्वायत्त निकाय है। परंतु कारण (R) पूरी तरह असत्य है क्योंकि **RPSC की प्रकृति मुख्य रूप से सलाहकारी (Advisory) होती है**, इसके सुझाव सरकार पर कानूनी रूप से 'बाध्यकारी' नहीं होते हैं। राज्य सरकार आयोग की सलाह को अस्वीकार कर सकती है, बशर्ते उसे इसका लिखित कारण विधानसभा के पटल पर वार्षिक रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत करना होगा। अतः विकल्प (C) सत्य है।
Q25. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) प्रतिवर्ष अपने समस्त विधिक कार्यों और परीक्षाओं की प्रगति रिपोर्ट (Annual Report) वैधानिक रूप से किसे सौंपता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: भारतीय संविधान के **अनुच्छेद 323(2)** के कड़े नियमों के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC) का यह वैधानिक कर्तव्य है कि वह प्रतिवर्ष आयोग द्वारा किए गए कार्यों की रिपोर्ट **राज्य के राज्यपाल** को प्रस्तुत करे। राज्यपाल महोदय उस रिपोर्ट को राज्य मंत्री परिषद के स्पष्टीकरण ज्ञापन के साथ **राज्य विधानमंडल (विधानसभा)** के पटल पर रखवाते हैं।
Q26. यदि राज्य सरकार आरपीएससी (RPSC) के किसी सदस्य के विरुद्ध अनुच्छेद 317(1) के तहत कदाचार का आरोप लगाती है, तो जांच लंबित रहने के दौरान सदस्य को 'निलंबित' (Suspend) करने की शक्ति किसमें निहित है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अनुच्छेद 317(2) स्पष्ट रूप से यह सुरक्षात्मक और नियंत्रणकारी विधिक अधिकार देता है कि जब तक राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए कदाचार के मामले की जांच **उच्चतम न्यायालय** में चल रही है, तब तक संबंधित राज्य का **राज्यपाल (Governor)** उस आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को उसके पद से **निलंबित (Suspend)** कर सकता है ताकि जांच निष्पक्ष रीति से संपन्न हो सके।
Q27. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के कुशल आंतरिक प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन के लिए तैनात होने वाले 'सचिव' (Secretary) के पद पर किसे विधिक रूप से नियुक्त किया जाता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: आरपीएससी का **सचिव (Secretary)** इसका सर्वोच्च प्रशासनिक विंग प्रमुख होता है जो परीक्षाओं के आयोजन, गोपनीयता और बजट का नियंत्रण करता है। विधिक व्यवस्था के अनुसार, यह पद **भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)** कैडर के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा भरा जाता है, जिसे राज्य सरकार प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आयोग मुख्यालय अजमेर में तैनात करती है।
Q28. वर्ष 1956 में राज्य पुनर्गठन के पश्चात, किस उच्च स्तरीय विधिक समिति की सिफारिश के आधार पर RPSC का मुख्यालय जयपुर से अजमेर स्थानांतरित किया गया था?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: 1 नवंबर 1956 को जब राजस्थान का एकीकरण पूर्ण हुआ, तब विभिन्न प्रांतीय संस्थाओं के संतुलन हेतु केंद्र सरकार द्वारा **सत्यनारायण राव समिति** का गठन किया गया था। इस समिति की ऐतिहासिक विधिक सिफारिशों के तहत ही राजस्थान उच्च न्यायालय को जोधपुर, राजस्व मंडल और **RPSC के मुख्यालय को अजमेर** स्थानांतरित करने का विधिक फैसला लिया गया था। तब से ही आयोग अजमेर के घूघरा घाटी से लाइव संचालित हो रहा है।
Q29. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315(1) के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा। RPSC के विधिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा वर्गीकरण सर्वथा सत्य माना जाएगा?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: चूंकि राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) का उल्लेख सीधे भारत के मूल संविधान के भाग 14 के अनुच्छेद 315 में स्पष्ट रूप से किया गया है, इसलिए विधिक और तकनीकी रूप से यह एक **संवैधानिक निकाय (Constitutional Body)** है। इसे किसी साधारण सरकारी आदेश या सामान्य कानून द्वारा समाप्त या संशोधित नहीं किया जा सकता; इसके नियमों में बड़े बदलाव हेतु संविधान संशोधन की आवश्यकता होती है।
Q30. यदि RPSC का कोई सदस्य दिवालिया (Insolvent) घोषित हो जाता है या अपने कार्यकाल के दौरान किसी अन्य वैतनिक रोजगार में लग जाता है, तो अनुच्छेद 317(3) के तहत राष्ट्रपति उसे किस रीति से हटा सकते हैं?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: यह अनुच्छेद 317 का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अपवाद (Exception) है। अनुच्छेद 317(3) स्पष्ट विधिक उपबंध करता है कि यदि कोई सदस्य: 1. दिवालिया घोषित हो जाता है, 2. अपने कार्यकाल के दौरान अपने पद के कर्तव्यों के बाहर किसी वैतनिक रोजगार (Paid Employment) में लग जाता है, या 3. मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है; तो इन परिस्थितियों में **भारत के राष्ट्रपति बिना उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की विधिक जांच के भी उसे सीधे पद से हटा सकते हैं**। सुप्रीम कोर्ट की जांच केवल कदाचार (Misbehaviour) के आरोपों के लिए ही अनिवार्य होती है।
Q31. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के प्रथम महिला सदस्य (First Woman Member) नियुक्त होने का गौरवमयी विधिक कीर्तिमान किसके नाम दर्ज है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: आरपीएससी के सांगठनिक इतिहास में **श्रीमती कांता खतूरिया (Smt. Kanta Kathuria)** आयोग की **प्रथम महिला सदस्य** नियुक्त की गई थीं। वे बाद में राजस्थान राज्य महिला आयोग की प्रथम अध्यक्ष भी मनोनीत हुई थीं। अतः जेंडर संतुलन की दृष्टि से यह प्रांतीय तथ्य परीक्षाओं हेतु कंठस्थ होना चाहिए।
Q32. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315(1) के तहत स्थापित RPSC एक स्वतंत्र संस्था है। परंतु क्या इसके क्षेत्राधिकार को कम या सीमित करने की विधिक शक्ति राज्य सरकार के पास सुरक्षित है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अनुच्छेद 320(3) के परंतुक के तहत कार्यपालिका को यह विधिक शक्ति प्राप्त है कि **राज्यपाल** ऐसे नियम (Regulations) बना सकते हैं जिनके माध्यम से राज्य की कुछ विशिष्ट सेवाओं, पदों या अस्थाई नियुक्तियों को आरपीएससी के परामर्श के दायरे से पूर्णतः बाहर रखा जा सकता है। इन नियमों को कम से कम 14 दिनों के लिए राज्य विधानसभा के पटल पर रखना विधिक रूप से अनिवार्य होता है।
Q33. आरपीएससी (RPSC) के अध्यक्ष व सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन सहित संपूर्ण खर्च राज्य के स्तर पर विधिक रूप से किस पर भारित (Charged) होते हैं?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: भारतीय संविधान के **अनुच्छेद 322** के कड़े उपबंधों के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष, सदस्यों व स्टाफ के वेतन, भत्ते और सेवा काल के पश्चात देय पेंशन सहित संपूर्ण खर्चे **राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State)** पर अनिवार्य रूप से भारित होते हैं। संचित निधि पर भारित होने के कारण प्रांतीय विधानसभा में इस पर कोई सालाना कटौती प्रस्ताव या मतदान नहीं कराया जा सकता, जो आयोग की वित्तीय अखंडता को सुरक्षा प्रदान करता है।
Q34. क्या RPSC का कोई सदस्य अपने 6 वर्ष या 62 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के पश्चात, उसी पद पर दोबारा 'पुनर्नियुक्ति' (Re-appointment) का विधिक पात्र हो सकता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: संविधान का **अनुच्छेद 316(3)** यह स्पष्ट और कड़ा विधिक निषेध लागू करता है कि कोई भी व्यक्ति जो लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में एक बार अपना कार्यकाल पूरा कर चुका है, वह अपने मूल पद पर **दोबारा नियुक्ति (Re-appointment) का पात्र नहीं होगा**। अर्थात आरपीएससी का सदस्य दोबारा आरपीएससी का सामान्य सदस्य नहीं बन सकता (हालांकि वह अध्यक्ष या यूपीएससी का सदस्य बनने हेतु स्वतंत्र है)।
Q35. आरपीएससी (RPSC) के सांगठनिक इतिहास में, आयोग के निम्नलिखित अध्यक्षों में से क्रमिक वरीयता (Chronological Order) के अनुसार सही विधिक अनुक्रम कौन-सा युग्म दर्शाता है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: आरपीएससी के शुरुआती विधिक इतिहास के क्रमानुसार: वर्ष 1949 में प्रथम अध्यक्ष **सर एस.के. घोष** बने, उनके पश्चात वर्ष 1950-51 के दौरान **श्री एस.सी. त्रिपाठी** ने कमान संभाली, और अंततः वर्ष 1951 से 1958 तक **श्री डी.एस. तिवाड़ी** आयोग के अध्यक्ष रहे। अतः विकल्प (A) कालानुक्रमिक दृष्टिकोण से शत-प्रतिशत सत्य युग्म है।
Q36. आरपीएससी (RPSC) के विधिक क्षेत्राधिकार के विस्तार और सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा तकनीकी तथ्य भारतीय संविधान के अनुसार सर्वथा सत्य माना जाएगा?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: भारतीय संविधान का **अनुच्छेद 321** राज्य स्तर पर स्थानीय विधानमंडल को यह अनन्य विधिक शक्ति प्रदान करता है कि **राजस्थान विधानसभा कानून बनाकर** आरपीएससी के क्षेत्राधिकार का विस्तार कर सकती है। इसके माध्यम से राज्य सरकार के किसी स्थानीय प्राधिकारी, नगर निगम, बोर्ड या सार्वजनिक उपक्रम (जैसे RSEB या RSMM) के स्टाफ की भर्ती का दायित्व भी आयोग को विधिक रूप से सौंपा जा सकता है।
Q37. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की विधिक गरिमा और स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने हेतु भारतीय संविधान के अनुच्छेद 318 के विधिक परंतुक में कौन-सा कड़ा सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अनुच्छेद 318 के विधिक परंतुक (Proviso) में यह कड़ा सुरक्षा कवच अंकित है कि यद्यपि राज्यपाल आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें तय करने के नियम बनाते हैं, परंतु **किसी सदस्य की नियुक्ति के पश्चात उसके कार्यकाल के दौरान उसकी सेवा शर्तों में कोई भी ऐसा बदलाव नहीं किया जाएगा जो उसके लिए अलाभकारी (To his disadvantage) हो**। यह नियम कार्यपालिका को बदला लेने की भावना से की जाने वाली किसी भी दंडात्मक वित्तीय कार्रवाई से रोकता है।
Q38. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के इतिहास में वह कौन-से एकमात्र विशिष्ट कानूनविद अध्यक्ष रहे हैं, जो बाद में राजस्थान राज्य के 'लोकायुक्त' (Lokayukta) के पद पर भी विधिक रूप से आसीन हुए थे?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: आरपीएससी और राजस्थान प्रशासनिक इतिहास के अंतर्संबंधों का यह अत्यंत अनूठा विधिक रिकॉर्ड है। **जस्टिस एम.बी. शर्मा (M.B. Sharma)** उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहने के साथ-साथ आरपीएससी के कार्यवाहक/स्थायी अध्यक्ष के रूप में भी जुड़े रहे और बाद में वे राज्य शुचिता के शीर्ष ओम्बुड्समैन अर्थात् **राजस्थान के लोकायुक्त** पद का दायित्व संभालने वाले एकमात्र विशिष्ट कानूनविद बने। अतः विकल्प (C) पूर्णतः सत्य है।
Q39. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के विधिक नियमों के अनुसार, यदि RPSC के किसी 'सदस्य' को कार्यवाहक अध्यक्ष (Acting Chairman) बनाया जाता है, तो उसकी विधिक शक्तियों और अधिकारों का दायरा क्या होता है?