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आरएएस मास्टर इंटरैक्टिव श्रृंखला — फ़ाइल-४

विषय: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) + राजस्थान राज्य महिला आयोग (RSCW) [कुल ४० प्रश्न]

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मानव अधिकार एवं महिला कल्याण का सम्पूर्ण वस्तुनिष्ठ ग्रन्थ

छात्र निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के सही विकल्प पर क्लिक करके अपना उत्तर जांचें। क्लिक करते ही सही/गलत उत्तर हाइलाइट होगा और विधिक व्याख्या स्वतः नीचे प्रकट हो जाएगी।

अनुभाग १: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) — १५ प्रश्न

Q1. मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने के पश्चात, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के 'अध्यक्ष' पद की विधिक योग्यता के संदर्भ में कौन-सा तथ्य सर्वथा सत्य है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: मूल अधिनियम १९९३ के अनुसार केवल सेवानिवृत्त CJI ही एनएचआरसी के अध्यक्ष बन सकते थे। परंतु **मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019** द्वारा विधिक योग्यता का दायरा विस्तृत किया गया है। अब कोई भी व्यक्ति जो भारत का मुख्य न्यायाधीश रहा हो या **उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश** रहा हो, आयोग का अध्यक्ष नियुक्त होने के लिए विधिक रूप से पात्र है। यह कड़ा बदलाव परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Q2. मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की सांगठनिक योजना के अनुसार, NHRC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति हेतु गठित ६-सदस्यीय 'उच्च स्तरीय चयन समिति' का सदस्य निम्नलिखित में से कौन नहीं होता है?
सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ४ के अनुसार, चयन समिति में ६ सदस्य होते हैं: १. प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), २. लोकसभा अध्यक्ष, ३. केंद्रीय गृह मंत्री, ४. लोकसभा में विपक्ष का नेता, ५. राज्यसभा में विपक्ष का नेता, और ६. राज्यसभा के **उपसभापति** (ध्यान दें: राज्यसभा के सभापति अर्थात् उपराष्ट्रपति इसमें शामिल नहीं होते)। इस समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या यूपीएससी के अध्यक्ष शामिल नहीं होते हैं। अतः विकल्प (D) सत्य है।
Q3. वर्ष 2019 के विधिक संशोधन के पश्चात, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों का 'कार्यकाल' (Tenure) कितना निर्धारित किया गया है, जो पूर्व नियमों से भिन्न है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: यह आरपीएससी पैटर्न का सबसे पसंदीदा विधिक प्रश्न है। २०१९ के संशोधन से पूर्व एनएचआरसी का कार्यकाल ५ वर्ष या ७0 वर्ष था। परंतु **२०१९ के संशोधन अधिनियम की धारा ६** के तहत कार्यकाल को घटाकर **3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु** (जो भी पहले हो) कर दिया गया है। साथ ही, पहले सदस्य पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं थे, परंतु अब अध्यक्ष व सदस्यों को **पुनर्नियुक्ति का विधिक पात्र** बनाया गया है।
Q4. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सांगठनिक ढांचे में कड़ाई से विधिक संतुलन स्थापित करने हेतु निम्नलिखित में से किसे आयोग का 'पदेन सदस्य' (Ex-Officio Member) स्वीकार किया गया है?
सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: वर्ष २०१९ के संशोधन के बाद पदेन सदस्यों (Ex-officio Members) की संख्या बढ़कर **७** हो गई है। अब इसमें: १. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, २. राष्ट्रीय महिला आयोग, ३. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, ४. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, ५. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (२०१९ में शामिल), ६. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (२०१९ में शामिल), तथा ७. दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त (२०१९ में शामिल) के अध्यक्ष पदेन सदस्य के रूप में विधिक रूप से शामिल हैं।
Q5. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के विधिक क्षेत्राधिकार और सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा तकनीकी नियम सर्वथा सत्य माना जाता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा 36(2)** स्पष्ट रूप से यह विधिक सीमा (Limitation Period) तय करती है कि आयोग ऐसे किसी भी मामले की जांच नहीं करेगा जो उस तारीख से **1 वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद** दर्ज कराया गया हो, जिस तिथि को मानव अधिकारों का उल्लंघन हुआ था। अर्थात १ वर्ष से अधिक पुराने मामले 'काल-बाधित' (Time-barred) माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त आयोग की प्रकृति पूर्णतः परामर्शदात्री (Advisory) होती है।
Q6. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) को अपनी विधिक जांच (Inquiry) के दौरान निम्नलिखित में से किस कानून के तहत सिविल न्यायालय (Civil Court) की पूर्ण शक्तियां प्राप्त होती हैं?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा १३ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, शिकायतों की जांच करते समय एनएचआरसी को **सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908** के तहत एक दीवानी अदालत (Civil Court) की संपूर्ण शक्तियां प्राप्त होती हैं, जिसके तहत वह गवाहों को समन कर सकता है, हलफनामे पर गवाही ले सकता है और किसी भी सरकारी कार्यालय से सार्वजनिक दस्तावेज़ मँगा सकता है।
Q7. सशस्त्र बलों (Armed Forces) के सदस्यों द्वारा मानव अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों के संदर्भ में, अधिनियम की धारा १९ के तहत NHRC की विधिक कार्यप्रणाली पर क्या विशिष्ट प्रतिबंध लागू होता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा 19** सैन्य बलों (जैसे सेना, नौसेना, वायुसेना और अर्धसैनिक बलों) के संदर्भ में आयोग की शक्तियों को सीमित करती है। इन मामलों में आयोग अपनी मर्जी से जांच दल नहीं भेज सकता। वह केवल केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांग सकता है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आयोग अपनी सिफारिश केंद्र को सौंपता है, और केंद्र सरकार को ३ महीने के भीतर यह बताना होता है कि उसने उन सिफारिशों पर क्या विधिक कार्रवाई की है।
Q8. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष व सदस्यों को 'सिद्ध कदाचार' या असमर्थता के आधार पर पद से हटाने (Removal) की अनन्य विधिक शक्ति किसमें निहित है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ५ के अनुसार, यद्यपि चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति इनकी नियुक्ति करते हैं, परंतु इन्हें हटाने की एक कड़ी विधिक प्रक्रिया है। यदि राष्ट्रपति के पास कदाचार या असमर्थता का आरोप आता है, तो राष्ट्रपति उस मामले को **उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)** को जांच हेतु संदर्भित करेंगे। उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई विधिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर ही राष्ट्रपति उन्हें पद से हटा सकते हैं।
Q9. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के प्रशासनिक इतिहास के संदर्भ में, १२ अक्टूबर १९९३ को आयोग के 'प्रथम आधिकारिक अध्यक्ष' बनने का गौरव किसे प्राप्त हुआ था?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: १२ अक्टूबर १९९३ को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के गठन के पश्चात भारत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश **जस्टिस रंगनाथ मिश्रा** को आयोग का **प्रथम अध्यक्ष** विधिक रूप से नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल आयोग की शुरुआती नियमावली को सुदृढ़ करने में ऐतिहासिक माना जाता है।
Q10. मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा २१ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, क्या भारत का कोई राज्य अपने यहाँ 'राज्य मानव अधिकार आयोग' (SHRC) का गठन करने के लिए विधिक रूप से बाध्य है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा २१(१) स्पष्ट करती है कि "कोई राज्य सरकार, इस भाग के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने के लिए एक निकाय का गठन **कर सकेगी** (State Government 'may' constitute a body)." विधिक शब्दावली में 'May' का अर्थ वैकल्पिक या स्वैच्छिक होता है, न कि 'Shall' (अनिवार्य)। हालांकि वर्तमान में अधिकांश बड़े राज्यों (जैसे राजस्थान) ने अपने यहाँ SHRC का गठन विधिक रूप से कर लिया है।
Q11. मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा १२ के अंतर्गत आयोग के प्रमुख 'कार्यों' (Functions) की सूची में निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य विधिक रूप से शामिल नहीं है?
सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: आरपीएससी मुख्य परीक्षा के विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए यह बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण है। एनएचआरसी के पास **स्वयं किसी भी दोषी को आर्थिक जुर्माना लगाने या जेल भेजने की कोई दंडात्मक शक्ति विधिक रूप से नहीं है**। यह केवल पीड़ित को अंतरिम सहायता देने की सिफारिश सरकार से कर सकता है या कोर्ट में मुकदमा चलाने की अनुमति दे सकता है। विकल्प (A), (B) और (C) इसके मूल विधिक कार्यों में शामिल हैं।
Q12. मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 के द्वारा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में 'महिला सदस्यों' की अनिवार्य भागीदारी के विधिक नियमों में क्या कड़ा बदलाव किया गया है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: मूल अधिनियम १९९३ के तहत, मानव अधिकारों का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले २ सदस्यों में से १ महिला का होना आवश्यक था। परंतु **२०१९ के संशोधन** द्वारा अनुभवी सदस्यों की संख्या २ से बढ़ाकर ३ कर दी गई, और यह कड़ा नियम बनाया गया कि इन ३ सदस्यों में से **न्यूनतम एक महिला सदस्य (At least one woman member)** का होना विधिक रूप से अनिवार्य होगा। वर्तमान में जेंडर संतुलन हेतु इसे कड़ाई से लागू किया गया है।
Q13. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) प्रतिवर्ष अपनी संपूर्ण विधिक गतिविधियों और कार्यात्मक प्रतिवेदनों की 'वार्षिक रिपोर्ट' (Annual Report) वैधानिक रूप से किसे सौंपता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: यह आरपीएससी जाल बिछाने वाला प्रश्न है! सामान्यतः छात्र सोचते हैं कि सभी आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपते हैं। परंतु मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम की **धारा २०** के अनुसार, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग अपनी वार्षिक या विशेष रिपोर्ट **केंद्र सरकार** को तथा संबंधित राज्य सरकारों को सौंपता है। केंद्र सरकार उस रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाती है।
Q14. विधिक नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष व सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें सेवानिवृत्ति के पश्चात या सेवाकाल के दौरान किसके समरूप विधिक रूप से निर्धारित की गई हैं?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: वर्ष २०१9 के विधिक संशोधन से पूर्व, अध्यक्ष का वेतन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समान था। परंतु **मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) नियम, २०१९** के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि एनएचआरसी के **अध्यक्ष** को मिलने वाले वेतन-भत्ते **मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC)** के समान तथा **सदस्यों** के वेतन-भत्ते **निर्वाचन आयुक्तों (ECs)** के समान विधिक रूप से देय होंगे।
Q15. यदि कोई मानव अधिकार उल्लंघन का मामला किसी 'न्यायालय में पहले से ही लंबित' (Sub-judice) है, तो उस मामले में NHRC की विधिक हस्तक्षेप करने की क्या शक्ति होती है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा 12(b)** स्पष्ट अधिदेश देती है कि यदि मानव अधिकारों के उल्लंघन की कोई शिकायत किसी न्यायालय के समक्ष विचाराधीन (Pending) है, तो एनएचआरसी उस मामले में सीधे अपनी मर्जी से हस्तक्षेप नहीं करेगा। आयोग को **उस संबंधित न्यायालय की पूर्व अनुमति/मंजूरी** लेनी होगी, जिसके पश्चात ही वह विधिक कार्यवाही का हिस्सा बन सकता है।

अनुभाग २: राजस्थान राज्य महिला आयोग (RSCW) — २५ प्रश्न

Q16. राजस्थान राज्य महिला आयोग (RSCW) की विधिक और विधायी स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा ऐतिहासिक एवं विधिक तथ्य सर्वथा सत्य है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: राजस्थान राज्य महिला आयोग (RSCW) कोई संवैधानिक (Constitutional) संस्था नहीं है, बल्कि यह राजस्थान विधानसभा के एक विशेष कानून द्वारा निर्मित एक **सांविधिक (Statutory) निकाय** है। इस हेतु *राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999* (1999 का अधिनियम संख्या 7) पारित किया गया था, जिसके तहत **15 मई 1999** को आयोग अस्तित्व में आया। इसका स्थायी मुख्यालय **जयपुर** में संचालित है।
Q17. राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा ३ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, आयोग की कुल 'सदस्य संरचना' (Member Structure) अधिकतम कितनी निर्धारित की गई है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ३ के विधिक उपबंधों के अनुसार, राजस्थान राज्य महिला आयोग का ढांचा **५-सदस्यीय** (अध्यक्ष सहित) है। इसमें **१ अध्यक्ष** (जो महिलाओं के कल्याण के लिए समर्पित प्रख्यात महिला हो), **३ अशासकीय सदस्य** (जिन्हें राज्य सरकार मनोनीत करती है) तथा **१ सदस्य सचिव** (जो राज्य सरकार का वरिष्ठ IAS या RAS प्रशासनिक अधिकारी होता है) शामिल होते हैं।
Q18. आरपीएससी के आगामी पैटर्न के अनुसार कूट आधारित प्रश्न: राजस्थान राज्य महिला आयोग में सदस्यों के मनोनयन और जेंडर संतुलन के संदर्भ में कौन-सा विधिक नियम अनिवार्य रूप से लागू होता है?

1. मनोनीत ३ सदस्यों में से न्यूनतम १ सदस्य अनिवार्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से होनी चाहिए।

2. मनोनीत सदस्यों में से न्यूनतम १ सदस्य पिछड़े वर्ग (OBC) से होनी विधिक रूप से आवश्यक है।

सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ३(१)(b) के विधिक परंतुक के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किए जाने वाले ३ अशासकीय सदस्यों में से **न्यूनतम एक सदस्य ऐसी महिला होगी जो अनुसूचित जातियों (SC) या अनुसूचित जनजातियों (ST)** से संबंधित हो। इस कानून में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अनिवार्य कोटे का अलग से कोई विधिक उल्लेख नहीं है। अतः केवल कथन १ सर्वथा सत्य है।
Q19. राजस्थान राज्य महिला आयोग (RSCW) के अध्यक्ष एवं अशासकीय सदस्यों का विधिक 'कार्यकाल' (Tenure) अधिनियम की धारा ४ के तहत कितना निर्धारित किया गया है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ४(१) के विधिक नियमानुसार, अध्यक्ष और प्रत्येक अशासकीय सदस्य अपने पद ग्रहण की तारीख से **3 वर्ष की अवधि** तक अपना पद धारण करेंगे। आरपीएससी परीक्षा की दृष्टि से ध्यान रखें कि आरपीएससी (६ वर्ष) और लोकायुक्त (५ वर्ष) से अलग, राज्य महिला आयोग का कार्यकाल **मात्र ३ वर्ष** का ही होता है।
Q20. राजस्थान राज्य महिला आयोग के इतिहास के संदर्भ में, आयोग की 'प्रथम आधिकारिक अध्यक्ष' नियुक्त होने का गौरव किसे प्राप्त हुआ था?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: वर्ष १९९९ में जब राजस्थान राज्य महिला आयोग का विधिक गठन हुआ, तब राज्य की प्रख्यात सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता **श्रीमती कांता खतूरिया** को आयोग की **प्रथम अध्यक्ष** विधिक रूप से मनोनीत किया गया था। वे आरपीएससी की प्रथम महिला सदस्य भी रही थीं।
Q21. राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा ४(२) के विधिक प्रावधानों के अनुसार, कोई भी अशासकीय सदस्य या अध्यक्ष अपना लिखित 'त्यागपत्र' (Resignation) किसे संबोधित करेगा?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: चूंकि यह एक राज्य स्तरीय सांविधिक (Statutory) निकाय है जिसका पूर्ण नियंत्रण कार्यपालिका के पास है, इसलिए अधिनियम की धारा ४(२) स्पष्ट करती है कि अध्यक्ष या कोई सदस्य, **राज्य सरकार को संबोधित** अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा किसी भी समय अपने पद से इस्तीफा दे सकेगा। यहाँ राज्यपाल विकल्प विधिक रूप से गलत माना जाता है।
Q22. अधिनियम की धारा ४(३) के विधिक नियमों के अनुसार, राज्य सरकार किस गंभीर परिस्थिति के आधार पर किसी सदस्य या अध्यक्ष को उसकी ३ वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पहले भी सीधे पद से हटा (Removal) सकती है?
सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ४(३) के विधिक खंडों (a) से (f) के अनुसार, राज्य सरकार को किसी भी सदस्य को हटाने का पूर्ण विधिक अधिकार प्राप्त है यदि वह: दिवालिया हो जाए, किसी नैतिक अधमता वाले अपराध में दोषी सिद्ध हो जाए, मानसिक रूप से विकृत हो जाए, या आयोग की लगातार **३ बैठकों में बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित** रहे। अतः विकल्प (D) सत्य है।
Q23. राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की कौन-सी विशिष्ट 'धारा' आयोग के प्रमुख कार्यों और कर्तव्यों (Functions of the Commission) का विस्तृत विधिक विवरण प्रस्तुत करती है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: आरपीएससी के आधुनिक और भविष्य के ट्रेंड के अनुसार धाराओं पर सवाल पूछे जाते हैं। इस अधिनियम की **धारा 11** आयोग के कर्तव्यों को रेखांकित करती है, जिसके तहत महिलाओं के संवैधानिक संरक्षणों की समीक्षा करना, राज्य में महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों की जांच करना और जेंडर संवेदीकरण को बढ़ावा देना आयोग का विधिक दायित्व है।
Q24. महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों (जैसे घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न) की विधिक जांच करते समय अधिनियम की धारा १२ के तहत RSCW को निम्नलिखित में से किस कोड के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियां प्राप्त होती हैं?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा 12** स्पष्ट विधिक अधिकार देती है कि महिलाओं के अधिकारों के हनन से जुड़े किसी मामले की जांच करते समय आयोग को **सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908** के तहत एक दीवानी अदालत की शक्तियां प्राप्त होंगी, जिसके माध्यम से वह किसी भी गवाह या दोषी अधिकारी को समन जारी कर तलब कर सकता है।
Q25. राजस्थान राज्य महिला आयोग द्वारा वर्ष भर संपादित किए जाने वाले कार्यों का विस्तृत 'वार्षिक प्रतिवेदन' (Annual Report) अधिनियम की धारा १३ के तहत किसे सौंपा जाता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा 13** के अनुसार, आयोग प्रतिवर्ष अपनी वार्षिक विधिक गतिविधियों की रिपोर्ट तैयार करके **राज्य सरकार** को सौंपता है। राज्य सरकार इस रिपोर्ट को प्राप्त होने के पश्चात, इसके साथ एक स्पष्टीकरण ज्ञापन (Explanation Memo) संलग्र करके, राज्य विधानमंडल (विधानसभा) के समक्ष पटल पर प्रस्तुत करने के लिए विधिक रूप से बाध्य होती है।
Q26. यदि राज्य महिला आयोग की विधिक जांच में किसी महिला के साथ गंभीर अन्याय या उत्पीड़न का मामला सिद्ध हो जाता है, तो आयोग के पास कौन-सा अंतिम विधिक अधिकार प्राप्त होता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: आरएएस मुख्य परीक्षा (Mains 5-Marks) के विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए यह कोर सीमा है। राज्य महिला आयोग एक **परामर्शदात्री और अर्ध-न्यायिक जांच संस्था** है, न कि दंडात्मक न्यायालय। यह किसी भी दोषी को जेल भेजने या आर्थिक दंड लगाने की शक्ति नहीं रखता। यह केवल जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार या पुलिस को विधिक कार्रवाई की सिफारिश सौंप सकता है।
Q27. राजस्थान राज्य महिला आयोग के सुचारू और पारदर्शी प्रशासनिक कामकाज के लिए 'सदस्य सचिव' (Member Secretary) के पद पर किसे तैनात विधिक रूप से किया जाता है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम के अनुसार, आयोग का **सदस्य सचिव** इसका मुख्य प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारी होता है। यह पद कार्यपालिका द्वारा भरा जाता है, जिसके तहत **वरिष्ठ IAS या वरिष्ठतम RAS अधिकारी** को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाता है जो आयोग के सचिवालय के दैनिक कार्यों, बजट नियंत्रण और आधिकारिक पत्रों का नियमन करता है।
Q28. राजस्थान राज्य महिला आयोग (RSCW) के वर्तमान सांगठनिक इतिहास में, आयोग के अध्यक्षों के निम्नलिखित चर्चित युग्मों में से हाल के आधुनिक वर्षों (2015 से 2024 के मध्य) के क्रमिक कार्यकाल को कौन-सा अनुक्रम सही दर्शाता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: आरपीएससी के आधुनिक कालक्रम के अनुसार, वर्ष २०१५ से २०१८ के दौरान **श्रीमती सुमन शर्मा** आयोग की स्थायी अध्यक्ष रहीं। उनके पश्चात, वर्ष २०२२ से २०२४ के मध्य **श्रीमती रेहाना रियाज चिश्ती** को राजस्थान राज्य महिला आयोग का स्थायी अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। अतः विकल्प (B) सर्वथा सत्य अनुक्रम है।
Q29. राज्य महिला आयोग के विधिक बजट और वित्तीय प्रबंधन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा नियम अधिनियम के तहत पूर्णतः सत्य है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ८ और ९ के अनुसार, **राज्य सरकार** विधानमंडल द्वारा पारित बजट विधियों के तहत आयोग को ऐसी धनराशियां अनुदान (Grants) के रूप में सौंपती है, जो इस कानून के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए आवश्यक हों। आयोग का अपना एक 'राज्य महिला आयोग कोष' होता है जिसका ऑडिट प्रतिवर्ष सीएजी (CAG) या राज्य के स्थानीय निधि अंकेक्षक द्वारा विधिक रूप से किया जाता है।
Q30. यदि राजस्थान राज्य महिला आयोग का कोई अशासकीय सदस्य बिना किसी वैध कारण के या लगातार अनुपस्थिति के आधार पर धारा ४(३) के तहत हटाया जाता है, तो उसे हटाने से पूर्व राज्य सरकार द्वारा कौन-सा विधिक नियम पूरा करना अनिवार्य है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ४(३) के परंतुक में **प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice)** को अक्षुण्ण रखा गया है। इसके अनुसार, "इस उपधारा के अधीन किसी भी अध्यक्ष या सदस्य को तब तक पद से नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उसे उस मामले में **सुनवाई का एक उचित अवसर (Opportunity of being heard)** न दे दिया गया हो।" अतः विकल्प (A) पूर्णतः सत्य है।
Q31. राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की किस विशिष्ट 'धारा' के तहत यह प्रावधान किया गया है कि आयोग के अध्यक्ष, सदस्य और कर्मचारी 'लोक सेवक' (Public Servant) माने जाएंगे?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा 15** स्पष्ट विधिक संरक्षण प्रदान करती है। इसके अनुसार, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में कार्य करने वाले आयोग के सभी सदस्य, अध्यक्ष और अधिकारी **भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा २१** के अर्थ के भीतर 'लोक सेवक' (Public Servant) समझे जाएंगे, जो उन्हें शासकीय कार्यों के संपादन के दौरान विधिक सुरक्षा कवच देता है।
Q32. यदि राजस्थान राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष का पद उनकी मृत्यु, इस्तीफे या आकस्मिक निष्कासन के कारण रिक्त हो जाता है, तो नए अध्यक्ष के मनोनयन तक विधिक रूप से कार्यवाहक अध्यक्ष कौन बन सकता है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ५ के विधिक उपबंधों के अनुसार, आकस्मिक रिक्ति (Casual Vacancy) होने की दशा में **राज्य सरकार** को यह अनन्य विधिक अधिकार है कि वह आयोग के मौजूदा सदस्यों में से किसी एक उपयुक्त सदस्य को तब तक के लिए अध्यक्ष के रूप में कार्य करने का निर्देश दे सकती है, जब तक कि नया अध्यक्ष नियमित रूप से मनोनीत न हो जाए।
Q33. राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा ६ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, आयोग की 'बैठकें' (Meetings) बुलाने और उनके स्थान व समय निर्धारण के संदर्भ में कौन-सा नियम अनिवार्य है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ६(१) यह स्पष्ट विधिक शक्ति **आयोग की अध्यक्ष** को सौंपती है। अध्यक्ष जब भी और जहाँ भी उचित समझे, आयोग की बैठकें आयोजित कर सकती है। बैठकों के संचालन के नियम और प्रक्रियाएं आयोग की आंतरिक विधिक नियमावली (Regulations) के अनुसार विनियमित की जाती हैं।
Q34. आरपीएससी का आधुनिक कथन/कारण आधारित एडवांस पैटर्न प्रश्न:

कथन (A): राजस्थान राज्य महिला आयोग एक स्वतंत्र अर्ध-न्यायिक निकाय है जिसके विधिक परामर्शों को मानना राज्य सरकार के लिए विधिक रूप से बाध्यकारी है।

कारण (R): आयोग के पास अपनी विधिक जांच के दौरान गवाहों को समन करने हेतु सिविल प्रक्रिया संहिता, १९0८ की पूर्ण विधिक शक्तियां प्राप्त होती हैं।

सही उत्तर: (D)
गहन व्याख्या: आरपीएससी के नए और आगामी परीक्षा पैटर्न के अनुसार यह सवाल अत्यंत महत्वपूर्ण है। कथन (A) गलत है क्योंकि आयोग की प्रकृति **परामर्शदात्री (Advisory)** है, इसके सुझाव सरकार पर 'बाध्यकारी' (Binding) नहीं होते। परंतु कारण (R) बिल्कुल सही है क्योंकि अधिनियम की धारा १२ के तहत आयोग को गवाहों को बुलाने और समन करने के लिए **सिविल प्रक्रिया संहिता, १९0८** की शक्तियां विधिक रूप से प्राप्त हैं। अतः विकल्प (D) सत्य है।
Q35. राजस्थान राज्य महिला आयोग द्वारा महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण हेतु जिला स्तर पर जन-सुनवाई करने के लिए गठित की जाने वाली विशेष विधिक समितियों को क्या कहा जाता है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा ११ के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, आयोग राजस्थान के विभिन्न जिलों में विकेंद्रीकृत रूप से **महिला सहायता समितियों** और जन-सुनवाई मंचों का गठन करता है। इन मंचों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की पीड़ित महिलाओं की शिकायतों का जिला स्तर पर ही त्वरित विधिक समाधान सुनिश्चित किया जाता है।
Q36. राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा ११(१)(d) के विधिक प्रावधानों के अनुसार, राज्य सरकार के अधीन आने वाले किन स्थानों का स्वतः निरीक्षण (Inspection) करने का अधिकार आयोग को प्राप्त है?
सही उत्तर: (C)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा ११(१)(d)** आयोग को यह विशेष सुरक्षात्मक अधिकार देती है कि वह राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन आने वाली किसी भी **जेल (Prison), सुधार गृह, महिला हॉस्टल या रिमांड होम** का स्वतः संज्ञान लेकर या पूर्व सूचना देकर निरीक्षण कर सकता है, ताकि वहाँ रहने वाली महिला कैदियों या आवासियों की विधिक और मानवीय दशाओं को सुधारा जा सके।
Q37. अधिनियम की धारा १६ के विधिक उपबंधों के अनुसार, यदि राज्य सरकार महिलाओं को प्रभावित करने वाले किसी अत्यंत महत्वपूर्ण 'नीतिगत मामले' (Policy Matter) पर कानून बनाना चाहती है, तो उसके लिए क्या विधिक नियम है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा 16** यह वैधानिक अधिदेश लागू करती है कि "राज्य सरकार महिलाओं को प्रभावित करने वाले बड़े नीतिगत मामलों (Major Policy Matters) पर **आयोग से अनिवार्य रूप से परामर्श करेगी**।" यद्यपि परामर्श को अंतिम रूप से मानना या न मानना सरकार का विधायी विशेषाधिकार है, परंतु लोकतांत्रिक परंपरा के तहत परामर्श की यह प्रक्रिया अनिवार्य की गई है।
Q38. राजस्थान राज्य महिला आयोग के सांगठनिक इतिहास में, निम्नलिखित में से किस एकमात्र अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान आयोग द्वारा राज्य में 'महिला लोक अदालतों' (Mahila Lok Adalats) का क्रांतिकारी विधिक प्रयोग प्रारंभ किया गया था?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: राजस्थान में महिलाओं के पारिवारिक और वैवाहिक मुकदमों के त्वरित निस्तारण हेतु **श्रीमती पवन सुराणा** के कार्यकाल के दौरान **'महिला लोक अदालतों'** का अभिनव विधिक प्रयोग शुरू किया गया था। इन अदालतों के माध्यम से बिना किसी अदालती फीस के, सौहार्दपूर्ण वातावरण में सैकड़ों जेंडर विवादों को सुलझाया गया था, जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई थी।
Q39. राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा ११(१)(a) के विधिक प्रावधानों के अनुसार, आयोग का मुख्य वैधानिक दायित्व निम्नलिखित में से क्या माना जाता है?
सही उत्तर: (A)
गहन व्याख्या: अधिनियम की **धारा ११(१)(a)** आयोग को यह बुनियादी दायित्व सौंपती है कि वह महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सभी संवैधानिक सुरक्षा उपायों (जैसे मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व) और विभिन्न प्रांतीय व केंद्रीय कानूनों के जमीनी क्रियान्वयन की कड़ाई से मॉनिटरिंग करे और उनमें आने वाली कमियों को दूर करने हेतु अपनी वार्षिक विधिक सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपे।
Q40. राजस्थान राज्य महिला आयोग (Conditions of Service) Rules के विधिक प्रावधानों के अनुसार, पद पर रहते हुए किसी अशासकीय सदस्य के विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितता या कदाचार की शिकायत प्राप्त होने पर अंतिम विधिक निर्णय लेने की शक्ति किसमें निहित है?
सही उत्तर: (B)
गहन व्याख्या: यह आरपीएससी जाल बिछाने वाला अंतिम प्रश्न है। चूंकि यह राज्य विधानसभा के अधिनियम से बना सांविधिक निकाय है (आरपीएससी या लोकायुक्त की भांति सीधे राष्ट्रपति/सुप्रीम कोर्ट के अधीन नहीं), इसलिए इसके सदस्यों को हटाने, उनकी विधिक जांच कराने या उनके विरुद्ध अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनन्य और संपूर्ण विधिक क्षेत्राधिकार **राज्य सरकार** के पास ही सुरक्षित है।
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