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भाग 1: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) — [10 प्रश्न]
प्रश्न 1. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की स्थापना और इसके वैधानिक आधार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस आयोग की स्थापना बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CPCR) अधिनियम, 2005 की धारा 3 के तहत मार्च 2007 में की गई थी.
2. यह आयोग महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन एक संवैधानिक (Constitutional) निकाय है.
3. आयोग का मुख्य अधिदेश यह सुनिश्चित करना है कि देश के समस्त कानून, नीतियां और प्रशासनिक तंत्र भारत के संविधान और UNCRC के सिद्धांतों के अनुरूप हों.
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: कथन 2 गलत है क्योंकि NCPCR एक वैधानिक (Statutory) निकाय है, न कि संवैधानिक। इसकी स्थापना संसद के अधिनियम (CPCR Act, 2005) द्वारा हुई है। यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करता है। भारत ने 1992 में संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन (UNCRC) को महाधिवेशन में स्वीकार किया था, जिसे लागू करना इस आयोग का मूल उद्देश्य है।
प्रश्न 2. CPCR अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की संरचना (Composition) के बारे में कौन सा विकल्प पूर्णतः सही है?
- (A) एक अध्यक्ष और 5 सदस्य (जिनमें कम से कम दो महिलाएं अनिवार्य हैं)।
- (B) एक अध्यक्ष और 6 सदस्य (जिनमें कम से कम दो महिलाएं अनिवार्य हैं)।
- (C) एक अध्यक्ष और 7 सदस्य (जिनमें कम से कम तीन महिलाएं अनिवार्य हैं)।
- (D) एक अध्यक्ष और 6 सदस्य (जिनमें महिलाओं का कोई निश्चित कोटा नहीं है)।
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा 3(2) के अनुसार, आयोग में एक अध्यक्ष (जिन्होंने बाल कल्याण के लिए असाधारण कार्य किया हो) और 6 सदस्य होते हैं। इन 6 सदस्यों में से कम से कम दो महिला सदस्य होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इन सदस्यों को शिक्षा, बाल स्वास्थ्य, बाल विकास, किशोर न्याय, उपेक्षित/उत्पीड़ित बच्चों के कल्याण या बाल मनोविज्ञान का विशेषज्ञ होना चाहिए।
प्रश्न 3. NCPCR के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए गठित "चयन समिति" (Selection Committee) की अध्यक्षता किसके द्वारा की जाती है?
- (A) भारत के प्रधानमंत्री
- (B) केंद्रीय गृह मंत्री
- (C) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रभारी मंत्री
- (D) भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश
गहन व्याख्या: धारा 4 के तहत, अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा एक त्रि-सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है। इस समिति के अध्यक्ष केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री होते हैं। सदस्यों की नियुक्ति भी केंद्र सरकार द्वारा एक निर्दिष्ट चयन समिति के माध्यम से की जाती है।
प्रश्न 4. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल (Tenure) और सेवा शर्तों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान सही नहीं है?
- (A) अध्यक्ष का कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।
- (B) सदस्यों का कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से 3 वर्ष या 60 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।
- (C) कोई भी अध्यक्ष या सदस्य अधिकतम तीन कार्यकालों (Terms) के लिए पद पर पुनर्नियुक्त किया जा सकता है।
- (D) अध्यक्ष या सदस्य केंद्र सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लिखित नोटिस द्वारा इस्तीफा दे सकते हैं।
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा 6 के तहत, कोई भी व्यक्ति दो से अधिक कार्यकालों (Maximum 2 terms) के लिए आयोग में पद धारण नहीं कर सकता। कथन A और B बिल्कुल सही हैं (अध्यक्ष के लिए अधिकतम आयु 65 वर्ष और सदस्यों के लिए 60 वर्ष है, जबकि दोनों का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है)।
प्रश्न 5. CPCR अधिनियम, 2005 की धारा 13 के तहत, NCPCR को निम्नलिखित में से कौन से विशिष्ट कार्य सौंपे गए हैं?
1. किसी कानून के तहत प्रदत्त सुरक्षा उपायों की जांच व समीक्षा करना और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की सिफारिश करना.
2. आतंकवाद, साम्प्रदायिक हिंसा, दंगों, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित बच्चों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले कारकों की जांच करना.
3. संकटग्रस्त, वंचित और हाशिए पर मौजूद बच्चों से संबंधित मामलों को देखना और उपचारात्मक उपायों का सुझाव देना.
4. बाल विवाह, बाल श्रम और बाल तस्करी के मामलों में स्वतः संज्ञान (Suo-Motu) लेकर जांच शुरू करना.
- (A) केवल 1, 2 और 3
- (B) केवल 2, 3 और 4
- (C) केवल 1 और 4
- (D) 1, 2, 3 और 4
गहन व्याख्या: धारा 13 आयोग को व्यापक शक्तियां देती है। आयोग न केवल मौजूदा कानूनों की समीक्षा करता है, बल्कि आतंकवाद, घरेलू हिंसा, एचआईवी/एड्स या तस्करी से प्रभावित बच्चों के संरक्षण के लिए स्वतः संज्ञान (Suo-Motu) भी ले सकता है। यह बाल अधिकारों के क्षेत्र में जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय संधियों का अध्ययन भी करता है।
प्रश्न 6. बाल अधिकारों के उल्लंघन की जांच करते समय, NCPCR को CPCR अधिनियम की धारा 14 के तहत "सिविल कोर्ट" (Civil Court) की शक्तियां प्राप्त होती हैं। इसके तहत आयोग को कौन सा अधिकार प्राप्त नहीं है?
- (A) किसी व्यक्ति को समन जारी करना, हाजिर कराना और शपथ पर उसकी जांच करना।
- (B) किसी भी दस्तावेज को खोजने और पेश करने की आवश्यकता का आदेश देना।
- (C) दोषी पाए गए लोक सेवक को सीधे कारावास या आर्थिक दंड की सजा सुनाना।
- (D) किसी भी अदालत या कार्यालय से किसी भी सार्वजनिक रिकॉर्ड की प्रति मांगना।
गहन व्याख्या: आयोग के पास दीवानी अदालत (Civil Court) की शक्तियां (सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत) हैं, जिसके माध्यम से वह सबूत जुटा सकता है, हलफनामे पर गवाही ले सकता है और समन जारी कर सकता है। लेकिन आयोग एक न्यायिक अदालत नहीं है, यह स्वयं किसी को सीधे जेल या जुर्माने की सजा नहीं दे सकता। यह केवल सक्षम प्राधिकारी या अदालत को अभियोजन (Prosecution) शुरू करने की सिफारिश करता है।
प्रश्न 7. निम्नलिखित में से किस विशेष अधिनियम/अधिनियमों के कार्यान्वयन की निगरानी (Monitoring) का प्रभार विशिष्ट रूप से NCPCR को सौंपा गया है?
1. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act)
2. लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act)
3. किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice Act)
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: NCPCR को RTE अधिनियम, 2009 की धारा 31 और POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 44 के तहत इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष रूप से नामित किया गया है। इसके अलावा, किशोर न्याय (JJ) अधिनियम के तहत भी यह देश भर में बाल गृहों और सुधार गृहों की निगरानी का शीर्ष निकाय है।
प्रश्न 8. यदि NCPCR अपनी जांच के दौरान किसी निष्कर्ष पर पहुंचता है कि बाल अधिकारों का व्यवस्थित उल्लंघन हुआ है, तो वह धारा 15 के तहत निम्नलिखित में से कौन सा कदम उठा सकता है?
1. संबंधित सरकार या प्राधिकारी को दोषी व्यक्ति के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश करना.
2. पीड़ित बच्चे को तत्काल अंतरिम सहायता (Interim Relief) प्रदान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट या संबंधित हाई कोर्ट में याचिका दायर करना.
3. दोषी विभाग पर सीधे प्रशासनिक जुर्माना आरोपित करना.
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: जांच पूरी होने के बाद, आयोग धारा 15 के तहत सरकार को कानूनी कार्यवाही या पीड़ित को अंतरिम राहत देने की सिफारिश कर सकता है। वह स्वयं अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट या अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकता है। हालांकि, इसे किसी विभाग पर सीधे प्रशासनिक या वित्तीय जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं है।
प्रश्न 9. NCPCR की वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report) के प्रस्तुतीकरण के संदर्भ में वैधानिक प्रक्रिया क्या है?
- (A) आयोग अपनी रिपोर्ट सीधे भारत के राष्ट्रपति को सौंपता है, जो इसे संसद में रखवाते हैं।
- (B) आयोग अपनी रिपोर्ट केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (केंद्र सरकार) को सौंपता है, जो इसे संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाती है।
- (C) आयोग अपनी रिपोर्ट नीति आयोग को सौंपता है।
- (D) आयोग इसे सीधे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपता है।
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा 16 के अनुसार, आयोग अपनी वार्षिक या विशेष रिपोर्ट केंद्र सरकार (and यदि मामला किसी राज्य से संबंधित है, तो संबंधित राज्य सरकार) को प्रस्तुत करता है। केंद्र सरकार इस रिपोर्ट को, उस पर की गई कार्रवाई के स्पष्टीकरण ज्ञापन (Action Taken Memorandum) के साथ संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखने के लिए बाध्य है।
प्रश्न 10. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) द्वारा हाल ही में संचालित ऑनलाइन पोर्टल्स और पहलों के युग्मों पर विचार कीजिए:
1. बाल स्वराज पोर्टल: कोविड-19 से प्रभावित और सड़क पर रहने वाले बच्चों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और पुनर्वास के लिए.
2. घार पोर्टल (GHAR): किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों के डिजिटल रूप से बहाली और स्वदेश वापसी की निगरानी के लिए.
3. मासी पोर्टल (MASI): देश भर के बाल देखभाल संस्थानों (CCIs) के निरीक्षण तंत्र को डिजिटल और सुव्यवस्थित करने के लिए.
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: ये तीनों डिजिटल पहलें NCPCR की समकालीन कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। 'बाल स्वराज' को बच्चों के ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए विकसित किया गया था। 'GHAR' पोर्टल का उद्देश्य उन बच्चों की ट्रैकिंग करना है जिन्हें उनके परिवारों से दोबारा मिलाना है। 'MASI' (Monitoring App for Seamless Inspection) बाल गृहों के वास्तविक समय पर निरीक्षण के लिए है।
भाग 2: राजस्थान राजस्व मण्डल (Board of Revenue for Rajasthan) — [15 प्रश्न]
प्रश्न 11. राजस्थान राजस्व मण्डल (Board of Revenue) की स्थापना, इतिहास और वैधानिक स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजस्थान राजस्व मण्डल की स्थापना 1 नवंबर 1949 को 'राजस्थान राजस्व मण्डल अध्यादेश, 1949' के तहत अजमेर में की गई थी.
2. स्वाधीनता और रियासतों के एकीकरण के समय जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और मत्स्य संघ के अपने अलग-अलग राजस्व बोर्ड थे, जिन्हें समाहित किया गया.
3. भारतीय संविधान के लागू होने के बाद, इसे राजस्थान राजस्व अधिनियम, 1956 (Land Revenue Act) के तहत एक स्थायी वैधानिक स्वरूप प्रदान किया गया.
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: राजस्थान में एकीकरण के तत्काल बाद 7 अप्रैल 1949 को अध्यादेश लाया गया और 1 नवंबर 1949 को अजमेर में इसकी विधिवत स्थापना हुई। अजमेर को राजस्व मण्डल का मुख्यालय बनाए रखने का निर्णय बाद में सत्यनारायण राव समिति (1956) की सिफारिशों के तहत स्थायी किया गया। यह राजस्थान में भू-राजस्व और काश्तकारी मामलों का सर्वोच्च अपीलीय और निरीक्षण न्यायालय है।
प्रश्न 12. राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की किस विशिष्ट धारा के तहत राजस्व मण्डल के गठन (Constitution of the Board) का वैधानिक प्रावधान किया गया है?
- (A) धारा 3
- (B) धारा 4
- (C) धारा 7
- (D) धारा 11
गहन व्याख्या: धारा 4 स्पष्ट रूप से राजस्थान राजस्व मण्डल के गठन का प्रावधान करती है। इसके अनुसार, मण्डल में एक अध्यक्ष और उतने न्यायिक व प्रशासनिक सदस्य होंगे जितने राज्य सरकार समय-समय पर नियुक्त करना उचित समझे।
प्रश्न 13. राजस्व मण्डल के संगठनात्मक ढांचे और सदस्यों की योग्यता के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
- (A) मण्डल के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है, जो आमतौर पर वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी होता है।
- (B) मण्डल के प्रशासनिक सदस्य अनिवार्य रूप से केवल राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) से ही प्रतिनियुक्त किए जाते हैं।
- (C) मण्डल के गैर-सरकारी या वकील सदस्यों के रूप में उन अधिवक्ताओं को नियुक्त किया जा सकता है जिन्हें उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष वकालत का अनुभव हो।
- (D) वर्तमान में मण्डल में अध्यक्ष के अतिरिक्त स्वीकृत पदों की संख्या में प्रशासनिक एवं न्यायिक दोनों प्रकार के सदस्य शामिल होते हैं।
गहन व्याख्या: कथन B गलत है। मण्डल के सदस्यों में दो श्रेणियां होती हैं: प्रशासनिक सदस्य (जो वरिष्ठ IAS और वरिष्ठ RAS संवर्ग के अधिकारी होते हैं) और न्यायिक/वकील सदस्य (जिन्हें उच्च न्यायालय में वकालत का लंबा अनुभव हो या जो राजस्व न्यायशास्त्र के ज्ञाता हों)। इसमें RJS (सिविल ज्यूडिशियरी) का अनिवार्य कोटा प्रशासनिक सदस्यों के रूप में नहीं होता।
प्रश्न 14. राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 7 के तहत निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्राधिकार 'प्रशासनिक नियंत्रण' (Administrative Control) के संदर्भ में सही है?
- (A) मण्डल को राज्य के समस्त अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों और राजस्व अधिकारियों पर नियंत्रण और अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है।
- (B) मण्डल का प्रशासनिक नियंत्रण केवल अजमेर संभाग के राजस्व मामलों तक सीमित है, शेष संभागों पर उच्च न्यायालय का सीधा नियंत्रण है।
- (C) राजस्व मण्डल केवल एक न्यायिक निकाय है, इसका अधीनस्थ अधिकारियों पर कोई प्रशासनिक या स्थानांतरण संबंधी नियंत्रण नहीं होता।
- (D) मण्डल सीधे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करता है।
गहन व्याख्या: धारा 7 के तहत, राजस्व मण्डल को राजस्थान राज्य के भीतर सभी अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों (जैसे- राजस्व अपील अधिकारी, कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार) पर व्यापक अधीक्षण और नियंत्रण (Superintendence and Control) की शक्तियां प्राप्त हैं।
प्रश्न 15. काश्तकारी और भू-राजस्व के विवादों में, राजस्थान राजस्व मण्डल के पास मुख्य रूप से कौन सी न्यायिक शक्तियां (Judicial Powers) सुरक्षित हैं?
1. यह राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 के तहत प्रथम अपीलीय न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध द्वितीय अपील सुनता है.
2. इसे अपने स्वयं के निर्णयों या अपने अधीनस्थ किसी राजस्व न्यायालय के निर्णयों की 'पुनरीक्षण' (Revision) और 'पुनरावलोकन' (Review) करने की असाधारण शक्ति प्राप्त है.
3. यह राजस्व अधिकारियों द्वारा पारित अवैध या अधिकारिता से बाहर के आदेशों की जांच के लिए 'रेफरेंस' (Reference) ले सकता है.
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 and 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: राजस्व मण्डल राज्य का सर्वोच्च राजस्व न्यायालय है। यह डिक्री या आदेशों के खिलाफ द्वितीय अपील सुनता है। धारा 84 (भू-राजस्व अधिनियम) के तहत इसे पुनरीक्षण (Revision) की और धारा 86 के तहत पुनरावलोकन (Review) की व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं, जिससे यह अपने ही फसलों को बदल या संशोधित कर सकता है।
प्रश्न 16. राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (Rajasthan Tenancy Act, 1955) के तहत निम्नलिखित में से कौन सा मामला सीधे राजस्व मण्डल के अपीलीय क्षेत्राधिकार में आता है?
- (A) खातेदारी अधिकारों की घोषणा और म्यूटेशन (नामांतरण) के सामान्य विवाद।
- (B) राजस्व अपील अधिकारी (RAA) द्वारा पारित मूल या अपीलीय डिक्री के विरुद्ध द्वितीय अपील।
- (C) तहसीलदार द्वारा सीमा विवाद (Boundaries) पर दिए गए प्रारंभिक निर्णय।
- (D) ग्राम पंचायत द्वारा चरागाह भूमि के आवंटन का प्रारंभिक आदेश।
गहन व्याख्या: सामान्यतः म्यूटेशन या सीमा विवाद के मामलों की प्रारंभिक सुनवाई तहसीलदार या एसडीएम स्तर पर होती है। उनकी प्रथम अपील 'कलेक्टर' या 'राजस्व अपील अधिकारी (RAA)' के पास जाती है। RAA के फैसले के खिलाफ द्वितीय अपील सीधे राजस्व मण्डल (Board of Revenue) में दायर की जाती है।
प्रश्न 17. राजस्थान राजस्व मण्डल द्वारा आयोजित की जाने वाली विभागीय परीक्षाओं (Departmental Examinations) और प्रशिक्षण के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
- (A) यह केवल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की भू-राजस्व परीक्षा आयोजित करता है।
- (B) यह राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS), तहसीलदार सेवा (RTS) और नायब-तहसीलदारों, कानूनगो व पटवारियों के लिए विभागीय परीक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण नियमों का संचालन व नियमन करता है।
- (C) इसका प्रशिक्षण से कोई संबंध नहीं है, यह कार्य पूर्णतः HCM RIPA (जयपुर) द्वारा किया जाता है।
- (D) यह केवल आरएएस अधिकारियों की न्यायिक परीक्षाओं का समन्वय करता है।
गहन व्याख्या: राजस्व मण्डल के पास एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य राज्य के राजस्व अधिकारियों (RAS, RTS, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक/कानूनगो और पटवारी) की विभागीय परीक्षाओं का आयोजन और उनके प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम तय करना है। यह मण्डल के निबंधक (Registrar) कार्यालय के माध्यम से संचालित होता है।
प्रश्न 18. भू-राजस्व अभिलेखों (Land Records) के आधुनिकीकरण के संबंध में, राजस्व मण्डल राजस्थान में किस केंद्रीय योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है?
- (A) डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP)
- (B) पीएम-किसान सम्मान निधि योजना
- (C) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
- (D) स्वामित्व योजना (केवल ग्रामीण आबादी के लिए)
गहन व्याख्या: DILRMP (Digital India Land Records Modernization Programme) के तहत भू-राजस्व मण्डल, राजस्थान ने राज्य के समस्त जमाबंदी, म्यूटेशन और कैडस्ट्रल मैप्स (भू-नक्शा) के कंप्यूटरीकरण, डिजिटल हस्ताक्षर और ऑनलाइन उपलब्धता (जैसे 'अपना खाता' पोर्टल) का पूरा जिम्मा संभाला है।
प्रश्न 19. राजस्व मण्डल के दैनंदिन प्रशासनिक कार्यों को संभालने और मण्डल के निर्णयों को रिकॉर्ड करने के लिए नियुक्त 'निबंधक' (Registrar) के संबंध में क्या सत्य है?
- (A) निबंधक अनिवार्य रूप से उच्च न्यायालय का एक सेवारत न्यायाधीश होता है।
- (B) वह आमतौर पर एक वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या चयन वेतनमान का आरएएस (RAS) अधिकारी होता है, जो मण्डल का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में कार्य करता है।
- (C) वह मण्डल के न्यायिक निर्णयों को बदलने का अधिकार रखता है।
- (D) उसकी नियुक्ति भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा की जाती.
गहन व्याख्या: राजस्व मण्डल का प्रशासनिक ढांचा चलाने के लिए राज्य सरकार एक निबंधक (Registrar) की नियुक्ति करती है, जो IAS या वरिष्ठ RAS अधिकारी होता है। वह मण्डल की स्थापना, बजट, अधीनस्थ न्यायालयों के निरीक्षण और स्थापना संबंधी कार्यों का नियंत्रण करता है, लेकिन उसे न्यायिक निर्णय देने का अधिकार नहीं होता।
प्रश्न 20. राजस्थान राजस्व मण्डल द्वारा प्रकाशित की जाने वाली उस प्रसिद्ध त्रैमासिक विधिक पत्रिका (Quarterly Legal Journal) का नाम क्या है, जिसमें राजस्व न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णय प्रकाशित होते हैं?
- (A) राजस्थान राजस्व दर्पण
- (B) राविरा (Revenue Decisions)
- (C) राजस्थान लैंड लॉ रिपोर्टर
- (D) अजमेर रेवेन्यू जर्नल
गहन व्याख्या: राजस्व मण्डल द्वारा "राविरा" (RRA - Rajasthan Revenue Decisions) का प्रकाशन किया जाता है। इसमें मण्डल और उच्च न्यायालय द्वारा भू-राजस्व और काश्तकारी कानूनों पर दिए गए नजीर (Precedents) और महत्वपूर्ण निर्णयों को संकलित किया जाता है, जो अधीनस्थ राजस्व अधिकारियों के लिए मार्गदर्शिका का काम करते हैं।
प्रश्न 21. राजस्व मण्डल के 'निरीक्षण क्षेत्राधिकार' (Inspecting Jurisdiction) के तहत, मण्डल के अध्यक्ष या सदस्यों द्वारा अधीनस्थ न्यायालयों के निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- (A) यह देखना कि क्या अधीनस्थ न्यायालय दीवानी प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर रहे हैं।
- (B) राजस्व मुकदमों के त्वरित निस्तारण (Disposal), बकाया राजस्व की वसूली, नामांतरण (Mutation) के मामलों की लंबित स्थिति और अभिलेखों के रख-रखाव की जांच करना।
- (C) पटवारियों के व्यक्तिगत चरित्र प्रमाण पत्रों की जांच करना।
- (D) तहसीलदारों के वेतन भत्तों का निर्धारण करना।
गहन व्याख्या: मण्डल प्रतिवर्ष अधीनस्थ न्यायालयों (कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार कार्यालयों) के निरीक्षण का रोस्टर जारी करता है। इसका मुख्य उद्देश्य 'राजस्व मुकदमों की पेंडेंसी' को कम करना, 'कृषि सांख्यिकी' की सत्यता परखना और यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को 'जмаबंदी' और 'नक्शा' समय पर मिल रहा है या नहीं।
प्रश्न 22. भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 23 और 24 के तहत, यदि राजस्व मण्डल के दो सदस्यों की पीठ (Bench) के बीच किसी विधिक प्रश्न पर मतभेद हो जाता है, तो निर्णय की प्रक्रिया क्या होगी?
- (A) अध्यक्ष का निर्णय अंतिम माना जाएगा।
- (B) मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा और याचिका खारिज समझी जाएगी।
- (C) उस प्रश्न को निर्णय के लिए अध्यक्ष द्वारा किसी अन्य सदस्य या सदस्यों की बड़ी पीठ (Larger Bench/Full Bench) के समक्ष संदर्भित किया जाएगा और बहुमत का निर्णय मान्य होगा।
- (D) मामले को तुरंत राजस्थान उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
गहन व्याख्या: कानूनन, यदि किसी खंडपीठ (Division Bench) के दो सदस्यों में मतभेद होता है, तो वे अपने अलग-अलग मत लिखकर मामले को अध्यक्ष को सौंपते हैं। अध्यक्ष उस मामले को तीसरे सदस्य या एक पूर्ण पीठ (Full Bench) के पास भेजते हैं। अंतिम निर्णय बहुमत (Majority Opinion) के आधार पर ही होता है।
प्रश्न 23. राजस्थान राजस्व मण्डल द्वारा संकलित और तैयार की जाने वाली 'कृषि सांख्यिकी' (Agricultural Statistics) में मुख्य रूप से कौन से आंकड़े शामिल होते हैं?
1. प्रत्येक फसल सीजन (खरीफ, रबी, जायद) के तहत बोया गया वास्तविक क्षेत्रफल.
2. 'भू-उपयोग' (Land Use Classification) के आंकड़े (जैसे- वन, बंजर भूमि, चरागाह).
3. राज्य में संचालित विभिन्न उद्योगों द्वारा उत्सर्जित प्रदूषण का स्तर.
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: राजस्व मण्डल राज्य का 'Land Records' और 'Agricultural Statistics' का मुख्य संकलनकर्ता है। पटवारियों द्वारा किए जाने वाले 'गिरदावरी' (Crop Inspection) के आंकड़ों के आधार पर मण्डल यह तय करता है कि किस फसल की कितनी बुआई हुई है। प्रदूषण का डेटा पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का काम है।
प्रश्न 24. राजस्थान राजस्व मण्डल द्वारा 'राजस्व अदालतों के कम्प्यूटरीकरण' के लिए विकसित किया गया "RCCMS" पोर्टल का पूर्ण रूप क्या है?
- (A) Rajasthan Corporate Crime Management System
- (B) Revenue Court Case Management System
- (C) Rajasthan Cotton Crop Monitoring System
- (D) Regional Collector Control and Monitoring System
गहन व्याख्या: RCCMS (Revenue Court Case Management System) एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जिसके माध्यम से राजस्थान की सभी राजस्व अदालतों (नायब तहसीलदार से लेकर राजस्व मण्डल तक) के मुकदमों की स्थिति, वाद सूची (Cause List), स्थगन और अंतिम निर्णय को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकता है।
प्रश्न 25. यदि कोई व्यक्ति राजस्व मण्डल (Board of Revenue) के किसी अंतिम न्यायिक निर्णय से असंतुष्ट है, तो उसके पास वैधानिक रूप से आगे क्या उपाय उपलब्ध है?
- (A) वह भारत के केंद्रीय राजस्व मंत्री के समक्ष प्रशासनिक अपील कर सकता है।
- (B) वह राजस्व मण्डल के निर्णय के विरुद्ध केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय में जा सकता है।
- (C) वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 या 227 के तहत राजस्थान उच्च न्यायालय (जयपुर/जोधपुर) में रिट याचिका (Writ Petition) दायर कर सकता है।
- (D) राजस्व मण्डल का निर्णय पूर्णतः अंतिम होता है और इसे कहीं चुनौती नहीं दी जा सकती।
गहन व्याख्या: यद्यपि राजस्व मण्डल राजस्व मामलों का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है, लेकिन यह संविधान से ऊपर नहीं है। इसके किसी भी आदेश या डिक्री को अनुच्छेद 226 (रिट क्षेत्राधिकार) या अनुच्छेद 227 (उच्च न्यायालय की अधीक्षण की शक्ति) के तहत राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।
भाग 3: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) — [10 प्रश्न]
प्रश्न 26. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना और विधिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
1. इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (PHRA, 1993) के तहत 12 अक्टूबर 1993 को एक स्वायत्त वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी.
2. यह पेरिस सिद्धांतों (Paris Principles) के अनुरूप है, जिन्हें अक्टूबर 1991 में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में अपनाया गया था.
3. आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत काम करता है.
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 and 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: NHRC एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है जिसकी स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को संसद के अधिनियम द्वारा हुई। यह पूरी तरह से 'पेरिस सिद्धांतों' पर आधारित है जो राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों (NHRIs) की स्वतंत्रता और स्वायत्तता सुनिश्चित करते हैं। इसका नोडल मंत्रालय केंद्रीय गृह मंत्रालय है।
प्रश्न 27. मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 (PHRA Amendment Act, 2019) के बाद, NHRC के 'अध्यक्ष' (Chairperson) की योग्यता के संबंध में क्या बड़ा बदलाव किया गया है?
- (A) केवल भारत का कोई सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (Retired CJI) ही अध्यक्ष बन सकता है।
- (B) भारत का कोई सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का कोई सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसका अध्यक्ष बन सकता है।
- (C) केवल उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश ही अध्यक्ष बन सकता है।
- (D) कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS) अध्यक्ष बन सकता है।
गहन व्याख्या: 2019 के संशोधन से पहले, केवल भारत का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) ही NHRC का अध्यक्ष बनने के योग्य था। लेकिन 2019 के संशोधन द्वारा इस दायरे को बढ़ाया गया; अब CJI के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट का कोई भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है।
प्रश्न 28. NHRC की पूर्णकालिक संरचना (Full-time Composition) के संबंध में 2019 के संशोधन के बाद निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयोग में एक अध्यक्ष के अतिरिक्त 5 पूर्णकालिक सदस्य होते हैं.
2. इन 5 सदस्यों में से कम से कम एक महिला सदस्य होना अनिवार्य है.
3. मानवाधिकारों का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से नियुक्त होने वाले सदस्यों की संख्या 2 से बढ़ाकर 3 कर दी गई है.
- (A) केवल 1 और 2
- (B) केवल 2 और 3
- (C) केवल 1 और 3
- (D) 1, 2 और 3
गहन व्याख्या: 2019 के संशोधन के बाद पूर्णकालिक संरचना इस प्रकार है: 1 अध्यक्ष + 5 सदस्य। इन 5 सदस्यों में: (i) एक सदस्य जो सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश है/रहा है, (ii) एक सदस्य जो हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश है/रहा है, और (iii) तीन सदस्य (जिनमें से कम से कम एक महिला होनी चाहिए) जिन्हें मानवाधिकारों का व्यावहारिक अनुभव हो।
प्रश्न 29. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में 'पदेन सदस्यों' (Ex-officio Members) की सूची में 2019 के संशोधन के बाद, वर्तमान में निम्नलिखित में से कौन-कौन शामिल हैं?
1. राष्ट्रीय SC, ST, महिला और अल्पसंख्यक आयोगों के अध्यक्ष.
2. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के अध्यक्ष.
3. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष.
4. दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त.
- (A) केवल 1, 2 और 3
- (B) केवल 2, 3 और 4
- (C) केवल 1 और 4
- (D) 1, 2, 3 और 4
गहन व्याख्या: 2019 के संशोधन से पहले केवल 4 पदेन सदस्य थे। लेकिन 2019 के संशोधन द्वारा तीन नए पदेन सदस्यों को जोड़ा गया: (1) पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के अध्यक्ष, (2) बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष, और (3) दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त। अतः अब कुल 7 पदेन सदस्य हैं।
प्रश्न 30. NHRC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए गठित 6-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति (High-Level Selection Committee) में कौन शामिल नहीं होता है?
- (A) भारत के प्रधानमंत्री (समिति के अध्यक्ष)
- (B) लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker) और केंद्रीय गृह मंत्री
- (C) राज्यसभा के सभापति (भारत के उपराष्ट्रपति)
- (D) लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता
गहन व्याख्या: चयन समिति में 6 सदस्य होते हैं: 1. प्रधानमंत्री, 2. लोकसभा अध्यक्ष, 3. केंद्रीय गृह मंत्री, 4. लोकसभा में विपक्ष का नेता, 5. राज्यसभा में विपक्ष का नेता, और 6. राज्यसभा के उपसभापति (Deputy Chairman)। ध्यान रहे, राज्यसभा का सभापति (उपराष्ट्रपति) इस समिति का हिस्सा नहीं होता है।
प्रश्न 31. मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अनुसार, NHRC के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल (Tenure) अब कितना निर्धारित किया गया है?
- (A) 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, और वे पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं हैं।
- (B) 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो), और वे पुनर्नियुक्ति (Re-appointment) के पात्र हैं।
- (C) 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, और वे पुनर्नियुक्ति के पात्र हैं।
- (D) 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, और वे पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं हैं।
गहन व्याख्या: 2019 के संशोधन से पहले कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष था। संशोधन द्वारा कार्यकाल को घटाकर 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु कर दिया गया है। साथ ही, अब वे पुनर्नियुक्ति (Re-appointment) के लिए पात्र हैं।
प्रश्न 32. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के क्षेत्राधिकार और शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन पूर्णतः सत्य है?
- (A) आयोग किसी भी मानवाधिकार उल्लंघन के मामले की जांच घटना घटित होने के 5 वर्ष के भीतर कभी भी कर सकता है।
- (B) अधिनियम की धारा 36(2) के अनुसार, आयोग किसी ऐसे मामले की जांच नहीं कर सकता जो घटना घटित होने की तिथि से 1 वर्ष (One Year) से अधिक पुराना हो।
- (C) आयोग के पास दोषियों को सीधे आर्थिक दंड देने और जेल भेजने का पूर्ण न्यायिक अधिकार है।
- (D) आयोग राज्य सूची (State List) के विषयों पर मानवाधिकार उल्लंघन की जांच करने के लिए अधिकृत नहीं है।
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा 36(2) एक अत्यंत महत्वपूर्ण सीमा तय करती है। इसके अनुसार, NHRC या SHRC किसी भी ऐसे मामले की जांच नहीं कर सकते जो घटना होने के 1 वर्ष के बाद संज्ञान में लाया गया हो (Time-barred)। इसके अलावा, आयोग की भूमिका मुख्य रूप से सलाहकारी (Recommendatory) है।
प्रश्न 33. 'सशस्त्र बलों' (Armed Forces) द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों के संदर्भ में NHRC की प्रक्रिया (अधिनियम की धारा 19) किस प्रकार भिन्न है?
- (A) आयोग को सशस्त्र बलों के मामलों में सामान्य नागरिकों की तरह ही स्वतः संज्ञान लेकर पूर्ण जांच करने की शक्ति है।
- (B) आयोग ऐसे मामलों में स्वयं जांच नहीं करता, बल्कि वह केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांग सकता है और रिपोर्ट मिलने के बाद केवल अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपता है।
- (C) सशस्त्र बल पूरी तरह से NHRC के दायरे से बाहर हैं, आयोग उनसे रिपोर्ट भी नहीं मांग सकता।
- (D) आयोग सशस्त्र बलों के अधिकारियों को सीधे समन जारी कर अपनी अदालत में तलब कर सकता है।
गहन व्याख्या: धारा 19 के तहत, सशस्त्र बलों के मामले में आयोग की शक्तियां सीमित हैं। वह सीधे अपनी जांच टीम नहीं भेज सकता। वह केंद्र सरकार से रिपोर्ट मंगवाता है और उस रिपोर्ट के आधार पर अपनी सिफारिशें देता है। केंद्र सरकार को 3 महीने के भीतर की गई कार्रवाई की सूचना देनी होती है।
प्रश्न 34. मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत, NHRC को निम्नलिखित में से कौन-कौन से मुख्य कार्य सौंपे गए हैं?
1. स्वतः संज्ञान (Suo-motu) से मानवाधिकार उल्लंघन की जांच करना.
2. किसी न्यायालय के समक्ष लंबित कार्यवाही में उस न्यायालय की अनुमति से हस्तक्षेप (Intervene) करना.
3. जेलों (Jails) और हिरासत केंद्रों का दौरा कर वहां बंदियों के मानवाधिकारों की स्थिति का अध्ययन करना.
4. मानवाधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देना.
- (A) केवल 1, 2 और 3
- (B) केवल 2, 3 और 4
- (C) केवल 1 और 4
- (D) 1, 2, 3 और 4
गहन व्याख्या: धारा 12 आयोग के व्यापक अधिदेश को दर्शाती है। आयोग स्वतः संज्ञान ले सकता है, जेलों का निरीक्षण कर सुधारों की सिफारिश कर सकता है, अंतरराष्ट्रीय संधियों का अध्ययन कर उनके प्रभावी कार्यान्वयन के उपाय सुझा सकता है और अदालती मामलों में कोर्ट की अनुमति से हस्तक्षेप कर सकता है।
प्रश्न 35. मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए अधिनियम की धारा 30 के तहत "मानवाधिकार न्यायालयों" (Human Rights Courts) की स्थापना के संबंध में कौन सा प्रावधान सही है?
- (A) प्रत्येक जिले में मानवाधिकार मामलों के त्वरित विचारण के लिए राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, एक सत्र न्यायालय (Sessions Court) को मानवाधिकार न्यायालय के रूप में निर्दिष्ट कर सकती है।
- (B) इन न्यायालयों की स्थापना सीधे केंद्र सरकार द्वारा की जाती है और इसमें केवल सुप्रीम कोर्ट के जज बैठते हैं।
- (C) मानवाधिकार न्यायालय स्थापित करने का अधिकार केवल NHRC के अध्यक्ष के पास सुरक्षित है।
- (D) भारत में मानवाधिकार न्यायालयों की स्थापना के लिए किसी विशेष सरकारी वकील की नियुक्ति का प्रावधान नहीं है।
गहन व्याख्या: अधिनियम की धारा 30 राज्यों को यह शक्ति देती है कि वे प्रत्येक जिले में मानवाधिकार मामलों की स्पीडी ट्रायल के लिए संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की सहमति से किसी मौजूदा सत्र न्यायालय (Sessions Court) को 'मानवाधिकार न्यायालय' के रूप में अधिसूचित कर सकते हैं।