राजस्थान में 11वीं कृषि गणना (2021-22) नवीनतम है। इस गणना (2016-17 के अनुसार) के अनुसार, राज्य में परिचालन भूमि जोतों का औसत आकार 2.73 हेक्टेयर है, जो 2011 में 3.07 हेक्टेयर था[cite: 7]। इसके साथ ही, राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, राज्य की जीडीपी (GSVA) में कृषि क्षेत्र का योगदान 25.74% है[cite: 7]।
📌 महत्वपूर्ण प्रशासनिक विधिक स्थिति:
आधिकारिक तौर पर सरकार द्वारा जारी 10वीं कृषि गणना (2015-16) के पूर्ण तुलनात्मक आंकड़े ही वर्तमान में मान्य हैं, क्योंकि 11वीं कृषि गणना (2021-22) के अंतिम विस्तृत राज्य-वार खंड अभी प्रक्रिया में हैं[cite: 7]।
राजस्थान कृषि नवीनतम आंकड़े (2025-26 / 2024-25):
- कृषि क्षेत्र का योगदान: राजस्थान के सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का योगदान प्रचलित मूल्यों पर 25.74% (2025-26) और स्थिर मूल्यों (2011-12) पर 25.33% है[cite: 7]।
- खाद्यान्न उत्पादन (2025-26): राज्य का कुल खाद्याnn उत्पादन 283.98 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया है, जिसमें से 47.13 लाख मीट्रिक टन दलहन शामिल है[cite: 7]।
- कृषि बजट (2026-27): आगामी वित्तीय वर्ष में 35 लाख से अधिक किसानों को ₹25,000 करोड़ के ब्याज मुक्त फसली ऋण बांटे जाएंगे[cite: 7]।
- पशुधन अर्थव्यवस्था: 20वीं पशुधन जनगणना (2019) के अनुसार, राजस्थान का देश की कुल पशुधन अर्थव्यवस्था में 10.60% योगदान है[cite: 7]।
मूलभूत आधारभूत सांख्यिकी बिंदु:
- कृषि गणना आवृति: प्रत्येक 5 वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है (11वीं गणना 2021-22 में शुरू हुई)[cite: 7]।
- कृषि योग्य भूमि: राजस्थान में कुल कृषि योग्य भूमि का आकार 17.4 मिलियन हेक्टेयर है[cite: 7]।
- कृषि जलवायु प्रदेश: राज्य के विस्तृत भौगोलिक क्षेत्रफल को कुल 10 कृषि-जलवायु खंडों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया गया है[cite: 7]।
- कृषि यंत्रों पर सब्सिडी: राज्य के कृषकों को आधुनिक कृषि उपकरणों और यंत्रों की खरीद पर 40% से 50% तक सब्सिडी प्रदान की जाती है[cite: 7]।
📊 प्रचालित भूमि जोतों की संख्या (Number of Operational Holdings)
राजस्थान में संयुक्त परिवारों के टूटने और भूमि के निरंतर पारिवारिक विभाजन के कारण कुल भूमि जोतों (Operational Holdings) की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है[cite: 7]।
- कुल भूमि जोतों की संख्या: 76.55 लाख (यह पिछली गणना के 68.88 लाख से 11.14% की कुल वृद्धि को दर्शाता है)[cite: 7]।
- पुरुष जोत धारक: 68.66 लाख (इसमें 8.48% की वृद्धि दर्ज की गई)[cite: 7]।
- महिला जोत धारक: 7.75 लाख (पिछली गणना के 5.46 लाख से 41.94% की रिकॉर्ड भारी वृद्धि दर्ज, जो महिला सशक्तिकरण और भूमि स्वामित्व को दर्शाता है)[cite: 7]।
- संस्थागत जोतें (Institutional Holdings): 0.14 लाख[cite: 7]।
📐 कुल प्रचालित क्षेत्रफल एवं औसत आकार (Operated Area & Average Size)
- कुल प्रचालित क्षेत्रफल (Total Operated Area): 208.73 लाख हेक्टेयर है[cite: 7]। क्षेत्रफल के मामले में पूरे देश में सर्वाधिक प्रचालित क्षेत्रफल राजस्थान का ही है[cite: 7]। हालांकि, इसमें पिछले आंकड़ों/वर्ष (211.36 लाख हेक्टेयर) की तुलना में 2.24% की कमी आई है[cite: 7]।
- औसत जोत का आकार (Average Holding Size): प्रति व्यक्ति औसत जोत का आकार घटकर 2.73 हेक्टेयर रह गया है, जो कि पूर्व की गणना (2010-11) में 3.07 हेक्टेयर था[cite: 7]।
राजस्थान के कुल 76.55 लाख किसानों या प्रचालित जोतों का उनके भूमि आकार के आधार पर 5 विशिष्ट श्रेणियों में प्रतिशत विभाजन एवं रुझान निम्नलिखित तालिका के अनुसार है[cite: 7]:
| श्रेणी (Category) |
जोत का आकार (Size) |
कुल जोतों में प्रतिशत (%) |
स्थिति / रुझान (Trend) |
| 1. सीमांत (Marginal) |
1 हेक्टेयर से कम |
40.12% |
संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज[cite: 7] |
| 2. लघु (Small) |
1 से 2 हेक्टेयर |
21.90% |
संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज[cite: 7] |
| 3. अर्ध-मध्यम (Semi-Medium) |
2 से 4 हेक्टेयर |
18.50% |
संख्या में वृद्धि जारी[cite: 7] |
| 4. मध्यम (Medium) |
4 से 10 हेक्टेयर |
14.79% |
संख्या में गिरावट/कमी दर्ज[cite: 7] |
| 5. बड़ी जोतें (Large) |
10 हेक्टेयर या अधिक |
4.69% |
संख्या में भारी गिरावट दर्ज[cite: 7] |
💡 विशेष उल्लेखनीय बिंदु:
राजस्थान के कुल कृषकों में से लगभग 62.02% किसान केवल सीमांत और लघु श्रेणी (Small & Marginal Farmers) के अंतर्गत आते हैं[cite: 7]। यह दर्शाता है कि राज्य की बहुसंख्यक कृषि आबादी छोटे भूखंडों पर जीवन-यापन कर रही है[cite: 7]।
🌾 नवीनतम कृषि उपयोग आंकड़े (Land Use Pattern)
राज्य के कुल रिपोर्टिंग भौगोलिक क्षेत्रफल (342.89 लाख हेक्टेयर) के उपयोग की वर्तमान वास्तविक स्थिति निम्नलिखित है[cite: 7]:
- शुद्ध बोया गया क्षेत्र (Net Area Sown): 181.30 लाख हेक्टेयर (यह कुल रिपोर्टिंग क्षेत्रफल का लगभग 52.87% है)[cite: 7]।
- कुल बोया गया क्षेत्र (Gross Area Sown): 274.42 लाख हेक्टेयर[cite: 7]।
- एक से अधिक बार बोया गया क्षेत्र: 93.12 लाख हेक्टेयर[cite: 7]।
- वानिकी (Forests): कुल रिपोर्टिंग क्षेत्रफल का लगभग 8.08% हिस्सा[cite: 7]।
- कृषि के लिए अनुपलब्ध भूमि: कुल क्षेत्रफल का लगभग 5.85% हिस्सा[cite: 7]।
🏆 देश में राजस्थान का स्थान (Production Ranking)
राजस्थान निम्नलिखित प्रमुख फसलों और कृषि उत्पादों के कुल देशव्यापी उत्पादन में पूरे भारत में प्रथम (1st) स्थान पर बना हुआ है[cite: 7]:
- बाजरा (Pearl Millet)[cite: 7]
- राई और सरसों (Mustard & Rapeseed)[cite: 7]
- कुल तिलहन (Total Oilseeds)[cite: 7]
- ग्वार (Guar)[cite: 7]
- ऊन उत्पादन (Wool Production)[cite: 7]
जिलावार कृषि एवं आर्थिक प्रदर्शन प्रवृत्तियाँ:
- सकल जिला घरेलू उत्पाद (District GSDP):
• अधिकतम क्रमशः: जयपुर (राजधानी होने के कारण प्रथम), अलवर, जोधपुर, अजमेर[cite: 7]।
• न्यूनतम: प्रतापगढ़[cite: 7]।
- जिला प्रति व्यक्ति आय (District PCI):
• अधिकतम क्रमशः: अलवर (प्रथम स्थान), जयपुर, जैसलमेर, राजसमंद[cite: 7]।
• न्यूनतम: डूंगरपुर[cite: 7]।
🧠 मेंटर्स विजनरी गाइड (Logic Notes):
• अलवर बनाम जयपुर: यद्यपि जयपुर का कुल GSDP सर्वाधिक है, किंतु प्रति व्यक्ति आय में अलवर प्रथम स्थान पर है[cite: 7]। इसका कारण अलवर का सघन औद्योगिक केंद्र (Industrial Hub) होना और जयपुर की तुलना में वहां जनसंख्या का कम दबाव होना है[cite: 7]।
• जैसलमेर एवं राजसमंद: इन जिलों का कुल उत्पादन कम होने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय रैंकिंग में ऊपर आने का मुख्य कारण वहां का कम जनसंख्या घनत्व है, जिससे जिला उत्पाद कम लोगों में विभाजित होता है[cite: 7]।
✅ निष्कर्ष
समग्र विश्लेषण के अनुसार, राजस्थान में कुल प्रचालित भूमि जोतों की संख्या 76.55 लाख है और प्रति व्यक्ति औसत भूमि जोत का आकार लगातार घटकर 2.73 हेक्टेयर रह गया है[cite: 7]। आर्थिक समीक्षा के अनुसार सेवा क्षेत्र (47.71%) के बाद कृषि क्षेत्र देशव्यापी उत्पादन (बाजरा, सरसों, ग्वार, ऊन) में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जिसमें फसलों की तुलना में पशुधन का योगदान अब एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है[cite: 7]।