1. बजट 2026-27 की निम्नलिखित घोषणाओं और उनके परिव्यय पर विचार कीजिए:
1. बायोफार्मा शक्ति (SHAKTI) - पाँच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये
2. इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम - परिव्यय बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये
3. कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) - पाँच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये
4. सिटी इकोनॉमिक रीजन - प्रति क्षेत्र पाँच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये
5. नगरपालिका बॉन्ड प्रोत्साहन - 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के एकल निर्गम पर 100 करोड़ रुपये
उपर्युक्त में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
✅ सही उत्तर: (D) योजना परिव्यय (बजट 2026-27): बायोफार्मा शक्ति: जैव-औषधि पारितंत्र हेतु 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS): परिव्यय 22,919 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये (असेंबली से कंपोनेंट तक PLI/ISM तर्क का विस्तार)। CCUS: कठिन-से-कम-होने वाले क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर हेतु 5 वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये। सिटी इकोनॉमिक रीजन: प्रति क्षेत्र 5 वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये। नगरपालिका बॉन्ड प्रोत्साहन: 1,000 करोड़ रुपये (10,000 नहीं) से अधिक के एकल निर्गम पर 100 करोड़ रुपये, इसलिए मद 5 गलत सुमेलित है। अन्य घोषणाएँ: 10,000 करोड़ रुपये का SME ग्रोथ फंड, आत्मनिर्भर भारत कोष में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये, 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की कंटेनर निर्माण योजना, और 2047 तक तटीय नौवहन व अंतर्देशीय जलमार्ग का माल-ढुलाई हिस्सा 6% से 12% करने का लक्ष्य। स्रोत: PIB / PRS।
2. संविधान में विशेष वित्तीय प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 116 के अंतर्गत लेखानुदान, बजट प्रक्रिया पूरी होने तक वित्तीय वर्ष के एक भाग के व्यय हेतु संसद द्वारा अग्रिम स्वीकृति है।
2. प्रत्ययानुदान भारत के संसाधनों पर अप्रत्याशित माँग के लिए दिया जाता है, जब उसका ब्योरा नहीं दिया जा सकता।
3. असाधारण अनुदान ऐसे विशेष प्रयोजन के लिए दिया जाता है जो किसी वित्तीय वर्ष की चालू सेवा का भाग नहीं है।
4. अनुच्छेद 267 के अंतर्गत भारत की आकस्मिकता निधि वित्त मंत्री के अधीन रखी जाती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) विशेष अनुदान: अनु. 116 के तीन साधन: (क) लेखानुदान - वर्ष के एक भाग के लिए अग्रिम, सामान्यतः चुनावी वर्ष में (अंतरिम बजट); (ख) प्रत्ययानुदान - अप्रत्याशित, विशाल और अनिश्चित माँग (जैसे युद्ध) के लिए खुला चेक, जिसका ब्योरा नहीं दिया जा सकता; (ग) असाधारण अनुदान - किसी वर्ष की चालू सेवा से बाहर विशेष प्रयोजन हेतु। अनु. 115 पूरक, अतिरिक्त और आधिक्य अनुदानों से संबंधित है। आकस्मिकता निधि (अनु. 267) राष्ट्रपति के अधीन रहती है (वित्त मंत्री के नहीं) और उसकी ओर से वित्त सचिव (आर्थिक कार्य विभाग) संचालित करता है; अप्रत्याशित आवश्यकताओं पर उससे व्यय बाद में संसद से अनुमोदित कराया जाता है और राशि संचित निधि से वापस भरी जाती है। राज्यों में समकक्ष निधि राज्यपाल के अधीन होती है। अतः कथन 4 गलत है।
3. अभिकथन (A): केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए उपकर (cess) और अधिभार (surcharge) करों के विभाज्य पूल के रूप में राज्यों के साथ साझा नहीं किए जाते।
कारण (R): अनुच्छेद 270 अनुच्छेद 271 के अधिभार और विशिष्ट प्रयोजनों के लिए लगाए गए उपकर को उन करों से बाहर रखता है जो संघ और राज्यों के बीच वितरित होते हैं।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) विभाज्य पूल और उपकर: अनु. 270 (80वें और 101वें संशोधन से संशोधित) के अनुसार संघ सूची के कर संघ द्वारा लगाए और वसूले जाते हैं तथा वित्त आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति के आदेश से संघ-राज्यों में बँटते हैं - सिवाय: अनु. 268 के शुल्क (स्टाम्प शुल्क, औषधीय/प्रसाधन वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क; संघ लगाता है पर राज्य वसूल कर रखते हैं), अनु. 269 और 269A के कर (अंतर-राज्यीय बिक्री/परेषण और IGST), अनु. 271 का अधिभार और विशिष्ट प्रयोजनों के लिए लगाया गया कोई भी उपकर। इसीलिए सकल कर राजस्व - उपकर/अधिभार - संग्रहण लागत = विभाज्य पूल। राज्यों की शिकायत है कि बढ़ता उपकर-अधिभार वास्तविक हस्तांतरण को घोषित हिस्से से कम कर देता है (15वें वित्त आयोग ने 2021-26 के लिए 41% की सिफारिश की थी)। अतः R सही है और A की सही व्याख्या करता है।
4. खाद्य सब्सिडी और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अधिनियम में ग्रामीण जनसंख्या के 75 प्रतिशत और शहरी जनसंख्या के 50 प्रतिशत तक पात्र व्यक्ति शामिल हैं।
2. प्राथमिकता वाले परिवार प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किग्रा खाद्यान्न के हकदार हैं।
3. अंत्योदय अन्न योजना के परिवार प्रति परिवार प्रति माह 35 किग्रा खाद्यान्न के हकदार हैं।
4. केंद्रीय बजट में खाद्य सब्सिडी पूँजीगत व्यय के रूप में वर्गीकृत है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) NFSA 2013: लगभग दो-तिहाई जनसंख्या (75% ग्रामीण, 50% शहरी) के लिए विधिक पात्रता (अधिकार-आधारित दृष्टिकोण); प्राथमिकता परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किग्रा, 3 रुपये (चावल), 2 रुपये (गेहूँ), 1 रुपये (मोटा अनाज) पर - अब प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (1 जनवरी 2024 से पाँच वर्ष के लिए बढ़ी) के अंतर्गत निःशुल्क; AAY परिवारों (सबसे गरीब) को 35 किग्रा प्रति परिवार; गर्भवती-स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भोजन/6,000 रुपये मातृत्व लाभ और बच्चों को पोषण; राशन कार्ड हेतु 18+ सबसे वयोवृद्ध महिला परिवार की मुखिया है। खाद्य सब्सिडी खाद्यान्न की आर्थिक लागत (MSP + खरीद आनुषंगिक + वितरण) और निर्गम मूल्य के अंतर की राशि है जो भारतीय खाद्य निगम को दी जाती है; यह राजस्व व्यय है (कोई परिसंपत्ति नहीं बनती), अतः कथन 4 गलत है। सब्सिडी (खाद्य, उर्वरक, पेट्रोलियम) राजस्व व्यय की प्रमुख मदें हैं; राजकोषीय सुदृढ़ीकरण में रिसाव घटाने हेतु प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (JAM) पर ज़ोर है।
5. संविधान के अंतर्गत संघ और राज्यों की उधार लेने की शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 292 संघ सरकार को संसद द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर भारत की संचित निधि की प्रतिभूति पर उधार लेने की शक्ति देता है।
2. अनुच्छेद 293 के अंतर्गत राज्य अपने विधानमंडल द्वारा निर्धारित सीमाओं में अपनी संचित निधि की प्रतिभूति पर भारत के भीतर उधार ले सकता है।
3. यदि केंद्र द्वारा दिया गया कोई ऋण बकाया है, तो राज्य संघ सरकार की सहमति के बिना ऋण नहीं ले सकता।
4. राज्य बिना संघ सरकार की किसी भागीदारी के विदेशी सरकारों से सीधे उधार ले सकता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) उधार लेने की शक्तियाँ: अनु. 292: संसद द्वारा निर्धारित सीमाओं में भारत की संचित निधि पर संघ का उधार (व्यवहार में सीमा कानून से तय नहीं; संसद वित्त/विनियोग अधिनियम से अधिकृत करती है)। अनु. 293: राज्य केवल भारत के भीतर (विदेश में नहीं) अपनी संचित निधि की प्रतिभूति पर, राज्य विधानमंडल की सीमाओं में उधार ले सकते हैं; अनु. 293(3): संघ द्वारा दिया या गारंटीकृत कोई ऋण बकाया हो तो संघ की सहमति के बिना राज्य ऋण नहीं ले सकता। बाह्य उधार संघ सूची (प्रविष्टि 37) का विशिष्ट विषय है - राज्य विदेशी ऋण केवल संघ के माध्यम से ही ले सकते हैं (जैसे विश्व बैंक या ADB ऋण केंद्र के माध्यम से), अतः कथन 4 गलत है। केंद्र अब राज्यों के शुद्ध उधार को GSDP के 3% तक सीमित करता है (पूर्व में विद्युत क्षेत्र सुधारों से जुड़े अतिरिक्त 0.5% सहित) और 15वें वित्त आयोग ने ढाँचा सुझाया। कथन 3 व्यावहारिक साधन है जो केंद्र को राज्यों की राजकोषीय नीति पर प्रभाव देता है।
6. अभिकथन (A): सरकारी राजस्व में ब्याज भुगतान का उच्च हिस्सा विकासात्मक और पूँजीगत व्यय के लिए उपलब्ध राजकोषीय गुंजाइश घटाता है।
कारण (R): ब्याज भुगतान प्रतिबद्ध व्यय हैं जो सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं से निरपेक्ष चुकाने ही होते हैं, और बजट 2026-27 में वे राजस्व प्राप्तियों का लगभग 40 प्रतिशत अवशोषित करते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) राजकोषीय गुंजाइश: प्रतिबद्ध व्यय (ब्याज भुगतान, वेतन-पेंशन, रक्षा राजस्व व्यय, प्रमुख सब्सिडी) नई योजनाओं हेतु सीमित विवेकाधीन गुंजाइश छोड़ता है; ऊँचा ब्याज बोझ राजकोषीय घाटे की 'गुणवत्ता' पर चिंता बढ़ाता है क्योंकि उधारी का बड़ा भाग पुराने ऋण की सेवा में जाता है। बजट 2026-27 में ब्याज भुगतान कुल व्यय का लगभग 26% और राजस्व प्राप्तियों का 40% हैं, इसीलिए ऋण आधार (घटता ऋण-GDP), घटता राजस्व घाटा (GDP का लगभग 1.5%) और बढ़ा पूँजीगत व्यय हिस्सा (सार्वजनिक पूँजीगत व्यय लगभग 12.2 लाख करोड़) केंद्रीय स्तंभ हैं। ब्याज लागत घटाने हेतु कम घाटे, उधार की कम औसत लागत (मुद्रास्फीति नियंत्रण और संप्रभु रेटिंग उन्नयन से सहायता) और लंबी परिपक्वता चाहिए। अतः A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या करता है। [प्रतिशत PRS बजट 2026-27 विश्लेषण पर दोबारा जाँचें।]
7. भारत के लोक लेखा (Public Account) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अनुच्छेद 266(2) के अंतर्गत गठित है और इसमें लघु बचत, भविष्य निधि तथा जमाएँ शामिल हैं।
2. इससे व्यय के लिए लोकसभा का वार्षिक मतदान आवश्यक है।
3. इसे कार्यपालिका संसदीय विनियोग के बिना संचालित करती है।
4. केंद्र सरकार को प्राप्त सभी राजस्व और उसके द्वारा लिए गए ऋण भारत की संचित निधि में जमा होते हैं, लोक लेखा में नहीं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) तीन निधियाँ: (i) भारत की संचित निधि (अनु. 266(1)): सभी राजस्व, ऋण और ऋण-वापसी की प्राप्तियाँ; संसद के विनियोग (अनु. 114) के बिना धन नहीं निकाला जा सकता। (ii) लोक लेखा (अनु. 266(2)): सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त अन्य सार्वजनिक धन - लघु बचत, भविष्य निधि, आरक्षित निधियाँ, जमाएँ; यहाँ सरकार बैंकर की तरह है, धन लौटाना होता है और इससे भुगतान पर संसदीय मतदान आवश्यक नहीं, पर CAG लेखा-परीक्षा करता है। (iii) आकस्मिकता निधि (अनु. 267): 500 करोड़ रुपये का कोष, राष्ट्रपति के अधीन। कथन 2 गलत है क्योंकि लोक लेखा मतदेय नहीं है। बजट पढ़ते समय 'कुल व्यय' केवल संचित निधि का होता है।
8. FRBM अधिनियम पर एन.के. सिंह समिति (2017) की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसने संयुक्त (केंद्र और राज्य) ऋण-GDP की 60 प्रतिशत सीमा की सिफारिश की।
2. इसमें से केंद्र के लिए 40 प्रतिशत और राज्यों के लिए 20 प्रतिशत सुझाया गया।
3. इसने स्वतंत्र राजकोषीय परिषद (Fiscal Council) के गठन की सिफारिश की।
4. इसने केंद्र के लिए GDP के 4 प्रतिशत की स्थायी राजकोषीय घाटा सीमा की सिफारिश की।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) FRBM ढाँचा: FRBM अधिनियम 2003 राजकोषीय अनुशासन और अंतर-पीढ़ीगत समानता के लिए बना; एन.के. सिंह समिति (2017) ने केवल राजकोषीय घाटे की जगह ऋण-आधारित लक्ष्य की सिफारिश की: सामान्य सरकार का ऋण GDP का 60%, जिसमें केंद्र 40% और राज्य 20% (संशोधित अधिनियम में केंद्र का ऋण लक्ष्य 2024-25 तक 40%)। समिति ने राजकोषीय घाटे का मार्ग GDP का 3% (4% नहीं), राजस्व घाटा लक्ष्य, स्वतंत्र राजकोषीय परिषद और एस्केप क्लॉज़ (राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा, कृषि का पतन, गंभीर आपूर्ति झटके, संरचनात्मक सुधार, वास्तविक उत्पादन वृद्धि में तेज गिरावट) सुझाए। राजकोषीय परिषद का गठन नहीं हुआ। क्रम याद रखें: FRBM 2003 -> नियम 2004 -> संशोधन 2018 (ऋण आधार, एस्केप क्लॉज़) -> 2020-21 में महामारी छूट -> 2025-26 तक 4.5% -> 2026-27 से ऋण आधार। अतः कथन 4 गलत है।
9. बजट 2026-27 के कुल व्यय लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपये और गैर-ऋण प्राप्तियाँ लगभग 36.5 लाख करोड़ रुपये के आधार पर राजकोषीय घाटा निरपेक्ष रूप में निम्नलिखित में से किसके सबसे निकट है?
✅ सही उत्तर: (C) रुपये में राजकोषीय घाटा: राजकोषीय घाटा = कुल व्यय - गैर-ऋण प्राप्तियाँ = 53.5 - 36.5 = लगभग 17 लाख करोड़ रुपये, जिसकी पूर्ति मुख्यतः बाज़ार उधारी (सकल बाज़ार उधारी लगभग 17.2 लाख करोड़, जिसमें दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध लगभग 11.7 लाख करोड़ - शेष परिपक्व ऋण चुकाने में) तथा लघु बचत व अन्य देयताओं से होती है। 12.2 लाख करोड़ रुपये सार्वजनिक पूँजीगत व्यय है, घाटा नहीं। प्रतिशत से जाँच: GDP का 4.3% = 17 लाख करोड़ का अर्थ है नाममात्र GDP लगभग 395 लाख करोड़ रुपये, जो बजट की लगभग 10% नाममात्र वृद्धि की धारणा से मेल खाता है। त्वरित जाँच तकनीक: निरपेक्ष घाटे को सदैव प्रतिशत और GDP से मिलाकर देखें।
10. केंद्रीय बजट 2026-27 (बजट अनुमान) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकोषीय घाटा GDP का 4.3 प्रतिशत अनुमानित है, जबकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह 4.4 प्रतिशत है।
2. 2026-27 के लिए केंद्र की बकाया देनदारियाँ GDP की 60 प्रतिशत अनुमानित हैं।
3. सार्वजनिक पूँजीगत व्यय लगभग 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है।
4. सरकार का लक्ष्य मार्च 2031 तक ऋण-GDP अनुपात को लगभग 50 प्रतिशत तक लाना है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) बजट 2026-27 का राजकोषीय आधार: 2025-26 से सरकार ने केवल राजकोषीय घाटे के लक्ष्य की जगह ऋण-GDP अनुपात को मुख्य आधार बनाया है (31 मार्च 2031 तक लगभग 50 ± 1 प्रतिशत), जबकि राजकोषीय घाटा वार्षिक मार्ग है: 4.4% (RE 2025-26) से घटकर 4.3% (BE 2026-27)। 2026-27 की बकाया देनदारियाँ GDP की 55.6% हैं (RE 2025-26 में 56.1%), 60% नहीं, इसलिए कथन 2 गलत है। सार्वजनिक पूँजीगत व्यय लगभग 11.2 से बढ़कर लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कुल व्यय लगभग 53.5 लाख करोड़ और गैर-ऋण प्राप्तियाँ लगभग 36.5 लाख करोड़ हैं; लगभग 17 लाख करोड़ का अंतर उधारी से पूरा होता है (सकल बाज़ार उधारी लगभग 17.2 लाख करोड़, शुद्ध लगभग 11.7 लाख करोड़)। सूत्र याद रखें: गैर-ऋण प्राप्तियाँ - कुल व्यय = राजकोषीय घाटा = शुद्ध उधारी + अन्य देयताएँ। स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज़ / PIB।
11. भारत के बजटीय और राजकोषीय ढाँचे के निम्नलिखित सुधारों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए:
A. राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम का पारित होना
B. केंद्रीय बजट में जेंडर बजट विवरण की शुरुआत
C. रेल बजट का आम बजट में विलय और बजट तिथि का 1 फरवरी को आगे बढ़ाया जाना
D. आयकर अधिनियम, 2025 का प्रभावी होना
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (D) ढाँचे की समयरेखा: FRBM अधिनियम 2003 में पारित (नियम 2004) राजकोषीय अनुशासन हेतु; जेंडर बजट विवरण पहली बार केंद्रीय बजट 2005-06 में शामिल हुआ; 2017 में रेल बजट (1924 से अलग, एकवर्थ समिति की सिफारिश पर) आम बजट में मिला और बजट फरवरी के अंतिम कार्यदिवस से 1 फरवरी को आया, ताकि 1 अप्रैल से पहले विनियोग पूरा हो; 2017-18 से योजना/गैर-योजना वर्गीकरण हटा। आयकर अधिनियम 2025, जो आयकर अधिनियम 1961 का स्थान लेता है, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ। अतः क्रम A-B-C-D।
12. बजट निर्माण की पद्धतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शून्य-आधारित बजट में प्रत्येक बजट चक्र में हर व्यय मद को शून्य से पुनः उचित ठहराना आवश्यक है।
2. परिणाम बजट (Outcome Budgeting) बजट परिव्यय को केवल उत्पादों (outputs) से नहीं, बल्कि मापने योग्य परिणामों से जोड़ता है।
3. जेंडर बजटिंग में बजट का महिलाओं पर प्रभाव आँककर संसाधन आवंटित किए जाते हैं, और 2005-06 से केंद्रीय बजट में जेंडर बजट विवरण शामिल है।
4. प्रदर्शन बजट की सिफारिश भारत के लिए प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग, 1966 ने की थी।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) बजट के प्रकार: पारंपरिक (लाइन-आइटम) बजट आगतों की सूची देता है; प्रदर्शन बजट (प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग 1966 की सिफारिश; अमेरिका का हूवर आयोग 1949) व्यय को कार्यक्रमों-गतिविधियों में वर्गीकृत कर प्रदर्शन संकेतकों से जोड़ता है; कार्यक्रम बजट (PPBS) उद्देश्यों से जोड़ता है; शून्य-आधारित बजट (ZBB), जिसे पीटर पायर और अमेरिकी राष्ट्रपति कार्टर ने लोकप्रिय किया, हर वर्ष प्रत्येक कार्यक्रम का पूर्ण औचित्य माँगता है; भारत में 1980 के दशक की शुरुआत (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, 1983) में आज़माया गया; परिणाम बजट (भारत में 2005 में वित्त मंत्रालय द्वारा) परिव्यय के सापेक्ष परिणाम मापता है; जेंडर बजटिंग (2005-06 से विवरण) और हरित बजटिंग भी हैं। अतः चारों कथन सही हैं।
13. संघीय बजट प्रक्रिया के निम्नलिखित चरणों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
A. बजट पर सामान्य चर्चा
B. अनुदान माँगों पर मतदान
C. विनियोग विधेयक का पारित होना
D. वित्त विधेयक का पारित होना
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (C) बजट प्रक्रिया: (1) वार्षिक वित्तीय विवरण (अनु. 112) की प्रस्तुति, वित्त मंत्री का भाषण और वित्त विधेयक; (2) पूरे बजट पर सामान्य चर्चा (मतदान या कटौती प्रस्ताव नहीं); (3) अवकाश में विभागीय स्थायी समितियों द्वारा जाँच; (4) लोकसभा में अनुदान माँगों पर मतदान (राज्यसभा केवल चर्चा करती है) - यहाँ कटौती प्रस्ताव आते हैं और अंतिम दिन शेष माँगों पर 'गिलोटिन' लगता है; (5) विनियोग विधेयक (अनु. 114) - इसके बिना संचित निधि से धन नहीं निकाला जा सकता; (6) वित्त विधेयक - कर प्रस्तावों को प्रभावी करता है, प्रस्तुति के 75 दिनों में पारित होना चाहिए। विनियोग विधेयक वित्त विधेयक से पहले आता है। दोनों धन विधेयक हैं, इसलिए राज्यसभा उन्हें 14 दिनों में सिफारिशों सहित लौटा सकती है।
14. FRBM ढाँचे में एस्केप क्लॉज़ (निकासी खंड) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. निर्दिष्ट आधारों पर केंद्र सरकार वार्षिक राजकोषीय घाटा लक्ष्य से GDP के 0.5 प्रतिशत तक विचलन कर सकती है।
2. एक आधार यह है कि वास्तविक उत्पादन वृद्धि पिछली चार तिमाहियों के औसत से कम से कम तीन प्रतिशत अंक गिर जाए।
3. राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय आपदा भी इसे लागू करने के आधार हैं।
4. एस्केप क्लॉज़ को भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) लागू कर सकता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) एस्केप क्लॉज़: वित्त अधिनियम 2018 द्वारा FRBM संशोधन केंद्र सरकार को युद्ध, राष्ट्रीय सुरक्षा, दैवी आपदा/राष्ट्रीय आपदा, कृषि के पतन से उत्पादन पर गंभीर असर, अप्रत्याशित राजकोषीय प्रभाव वाले संरचनात्मक सुधार, या वास्तविक उत्पादन वृद्धि के पिछली चार तिमाहियों के औसत से कम से कम तीन प्रतिशत अंक गिरने पर वार्षिक राजकोषीय घाटा लक्ष्य से GDP के 0.5% तक अधिक जाने की छूट देता है। इसे केंद्र सरकार लागू करती है, CAG नहीं - CAG राजकोषीय अनुपालन की लेखा-परीक्षा करता है, और सरकार बजट के साथ मध्यकालीन राजकोषीय नीति-सह-रणनीति वक्तव्य, राजकोषीय नीति रणनीति वक्तव्य और समष्टि-आर्थिक ढाँचा वक्तव्य संसद में रखती है। इसका उपयोग 2020-21 (कोविड-19) में हुआ, जब घाटा सामान्य सीमा से कहीं अधिक रहा; बाद में 2025-26 तक 4.5% का मार्ग और 2026-27 से ऋण आधार घोषित हुआ।
15. एक काल्पनिक सरकार के बजट में राजस्व प्राप्तियाँ 30 इकाई, गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ 2 इकाई, राजस्व व्यय 42 इकाई, पूँजीगत व्यय 8 इकाई, ब्याज भुगतान 8 इकाई और पूँजीगत परिसंपत्ति सृजन हेतु अनुदान 4 इकाई हैं। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकोषीय घाटा 18 इकाई है।
2. प्राथमिक घाटा 10 इकाई है।
3. राजस्व घाटा 8 इकाई है।
4. प्रभावी राजस्व घाटा 8 इकाई है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) घाटों का गणित: कुल व्यय = 42 + 8 = 50। राजकोषीय घाटा = कुल व्यय - (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ) = 50 - 32 = 18। प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज = 18 - 8 = 10। राजस्व घाटा = राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ = 42 - 30 = 12 (8 नहीं), इसलिए कथन 3 गलत है। प्रभावी राजस्व घाटा = राजस्व घाटा - परिसंपत्ति सृजन अनुदान = 12 - 4 = 8, इसलिए कथन 4 सही है। मुख्य बातें: राजकोषीय घाटा कुल उधार आवश्यकता दर्शाता है; प्राथमिक घाटा ब्याज को छोड़कर उधार की आवश्यकता बताता है (शून्य प्राथमिक घाटे का अर्थ है कि उधारी केवल ब्याज चुकाने हेतु है); राजस्व घाटा उपभोग हेतु उधारी बताता है; प्रभावी राजस्व घाटा (FRBM 2012 संशोधन के बाद) उन अनुदानों को घटाता है जो वास्तव में परिसंपत्तियाँ बनाते हैं। बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा 4.3% और राजस्व घाटा लगभग 1.5% है।
16. सार्वजनिक ऋण और ऋण-संधारणीयता की शर्त के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अन्य बातें समान रहने पर सार्वजनिक ऋण दीर्घकाल में संधारणीय है यदि उस पर चुकाई जाने वाली ब्याज दर GDP की नाममात्र वृद्धि दर से कम हो।
2. जब ब्याज दर वृद्धि दर से अधिक हो, तब ऋण-GDP अनुपात स्थिर करने के लिए प्राथमिक अधिशेष आवश्यक है।
3. बजट 2026-27 में ब्याज भुगतान राजस्व प्राप्तियों के लगभग 40 प्रतिशत हैं।
4. प्राथमिक घाटे में वृद्धि सदैव ऋण-GDP अनुपात घटाती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) ऋण गतिकी (डोमर शर्त): ऋण अनुपात में परिवर्तन = (r - g) x (ऋण अनुपात) + प्राथमिक घाटा अनुपात, जहाँ r प्रभावी ब्याज दर और g नाममात्र GDP वृद्धि है। यदि g > r, तो मामूली प्राथमिक घाटे के साथ भी ऋण अनुपात स्थिर या कम हो सकता है; यदि r > g, तो सरकार को प्राथमिक अधिशेष चलाना होगा अन्यथा अनुपात बर्फ के गोले की तरह बढ़ता है ('ऋण जाल')। प्राथमिक घाटा बढ़ने से ऋण अनुपात बढ़ता है, घटता नहीं, अतः कथन 4 गलत है। भारत का लाभ: नाममात्र वृद्धि (बजट धारणाओं में लगभग 10%) केंद्र की औसत उधार लागत से अधिक है, जिससे ऋण-GDP घटने का मार्ग (2026-27 में 55.6%, मार्च 2031 तक लगभग 50% का लक्ष्य) संभव है। ब्याज भुगतान व्यय का लगभग 26% और राजस्व प्राप्तियों का लगभग 40% खाते हैं, जिससे पूँजीगत व्यय की गुंजाइश घटती है। [स्रोत: बजट 2026-27 पर PRS विश्लेषण; अनुपात बजट एट अ ग्लांस से दोबारा जाँचें।]
17. भारत में विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वित्त मंत्रालय के अंतर्गत निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) केंद्र सरकार के विनिवेश का प्रशासन करता है।
2. 2021 में घोषित राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन में चार वर्षों में ब्राउनफील्ड अवसंरचना परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से लगभग 6 लाख करोड़ रुपये जुटाने की परिकल्पना थी।
3. पाइपलाइन के अंतर्गत परिसंपत्ति मुद्रीकरण में भूमि और परिसंपत्तियों का स्वामित्व स्थायी रूप से निजी पक्षों को हस्तांतरित होता है।
4. रणनीतिक विनिवेश के बाद एयर इंडिया जनवरी 2022 में टाटा समूह को हस्तांतरित हुई।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) विनिवेश बनाम मुद्रीकरण: विनिवेश = PSU में सरकारी इक्विटी की बिक्री (अल्पांश बिक्री/OFS, प्रबंधन हस्तांतरण सहित रणनीतिक बिक्री, IPO)। इसे DIPAM (2016 में विनिवेश विभाग से पुनर्नामित) देखता है; आय संचित निधि में जाती है और गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्ति गिनी जाती है (राजकोषीय घाटा घटाती है)। परिसंपत्ति मुद्रीकरण = संचालित सार्वजनिक परिसंपत्तियों (सड़क, रेल, विद्युत पारेषण, पाइपलाइन, हवाई अड्डे) को निश्चित अवधि के लिए निजी संचालकों को पट्टे/लाइसेंस पर देना (TOT, InvIT, REIT जैसे मॉडल), जिसमें स्वामित्व सरकार के पास रहता है और अवधि पूरी होने पर लौट आता है, अतः कथन 3 गलत है। राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2021-22 से 2024-25 का लक्ष्य 6 लाख करोड़ रुपये था। एयर इंडिया की रणनीतिक बिक्री (टाटा संस, तलेस प्रा. लि.) 27 जनवरी 2022 को पूरी हुई। 'आत्मनिर्भर भारत' नीति PSU को रणनीतिक क्षेत्रों तक सीमित कर शेष को निजीकरण की ओर ले जाती है।
18. सोलहवें वित्त आयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसके अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया हैं।
2. यह 2026-27 से आरंभ होने वाले पाँच वर्षों के लिए सिफारिशें करता है।
3. इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत हुआ है।
4. यह एक सांविधिक निकाय है और इसकी सिफारिशें केंद्र सरकार पर बाध्यकारी हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) वित्त आयोग: यह संवैधानिक निकाय (अनु. 280) है, जिसे राष्ट्रपति प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले नियुक्त करता है; इसकी सिफारिशें सलाहकारी हैं, बाध्यकारी नहीं - सरकार उन्हें कार्रवाई-ज्ञापन के साथ संसद में रखती है। इसमें एक अध्यक्ष और चार सदस्य होते हैं; डॉ. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाला 16वाँ आयोग 2026-27 से 2030-31 की अवधि को कवर करता है। मुख्य कार्य: (i) संघ-राज्यों में शुद्ध कर आय का ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण, (ii) राज्यों में क्षैतिज वितरण, (iii) अनु. 275 के सहायता अनुदान, (iv) पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधन बढ़ाने हेतु राज्य संचित निधि के उपाय। बजट 2026-27 में राज्यों को वित्त आयोग अनुदान लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये हैं। कथन 4 दोनों तरह से गलत है - यह संवैधानिक है और बाध्यकारी नहीं। तुलना: 15वें आयोग (एन.के. सिंह) ने 2021-26 के लिए 41%, 14वें (वाई.वी. रेड्डी) ने 32% से 42% किया था।
19. एक अर्थव्यवस्था की नाममात्र GDP 10 प्रतिशत बढ़ती है जबकि उसी वर्ष सकल कर राजस्व 12 प्रतिशत बढ़ता है। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कर उछाल (buoyancy) 1.2 है।
2. कर उछाल GDP वृद्धि के प्रति कर राजस्व की संवेदनशीलता मापता है, जिसमें विवेकाधीन कर परिवर्तनों का प्रभाव शामिल है।
3. कर लोच (elasticity) उछाल से इस मायने में भिन्न है कि वह कर दरों और आधार में विवेकाधीन परिवर्तनों का प्रभाव बाहर रखती है।
4. 1 से अधिक उछाल का अर्थ है कि कर-GDP अनुपात घट गया है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) उछाल बनाम लोच: उछाल = कर राजस्व में % परिवर्तन / GDP में % परिवर्तन = 12/10 = 1.2। इसमें विवेकाधीन उपाय (नए कर, दर परिवर्तन, बेहतर अनुपालन) शामिल हैं; लोच विवेकाधीन परिवर्तनों के लिए समायोजित कर स्वचालित प्रतिक्रिया अलग करती है। 1 से अधिक उछाल का अर्थ है कि कर राजस्व GDP से तेज़ बढ़ा, इसलिए कर-GDP अनुपात बढ़ता है, घटता नहीं; कथन 4 गलत है। कर-GDP अनुपात (केंद्र का सकल कर राजस्व GDP का लगभग 11-12%) कर क्षमता का माप है; GST, डिजिटलीकरण (ई-इनवॉइस, फेसलेस आकलन) और विस्तृत आधार ने उछाल बढ़ाया है। बजट 2026-27 में केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियाँ लगभग 28.7 लाख करोड़ रुपये हैं और कर राजस्व में संशोधित अनुमान की तुलना में लगभग 8% वृद्धि का अनुमान है जबकि नाममात्र GDP 10% बढ़ेगी, यानी निहित उछाल 1 से कम - रूढ़िवादी अनुमान। [PRS/बजट आँकड़े दोबारा जाँचें।]
20. निम्नलिखित में से कौन-से व्यय अनुच्छेद 112(3) के अंतर्गत भारत की संचित निधि पर भारित हैं और इसलिए लोकसभा में मतदान के अधीन नहीं हैं?
1. राष्ट्रपति के उपलब्धियाँ और भत्ते
2. राज्यसभा के सभापति व उपसभापति तथा लोकसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते
3. केंद्रीय मंत्रियों के वेतन
4. भारत सरकार के ऋण भार, जिनमें ब्याज शामिल है
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (A) भारित बनाम मतदेय व्यय: भारित व्यय (अनु. 112(3)) पर लोकसभा में चर्चा हो सकती है पर मतदान नहीं होता; इसमें राष्ट्रपति की उपलब्धियाँ और कार्यालय व्यय, राज्यसभा सभापति/उपसभापति व लोकसभा अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के वेतन, ऋण भार (ब्याज, निक्षेप निधि, मोचन), सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते-पेंशन, CAG, UPSC का व्यय (अनु. 322) तथा न्यायालय के निर्णयों या मध्यस्थ पंचाटों की पूर्ति हेतु राशि शामिल हैं। केंद्रीय मंत्रियों के वेतन मतदेय व्यय हैं, क्योंकि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है - लोकसभा कटौती प्रस्तावों (नीति कटौती, मितव्ययिता कटौती, सांकेतिक कटौती) से माँग घटा सकती है। इससे स्वतंत्र संवैधानिक पदों को वार्षिक राजनीतिक मतदान से सुरक्षा मिलती है और राजनीतिक कार्यपालिका जवाबदेह रहती है।
21. सूची-I (संवैधानिक अनुच्छेद) को सूची-II (विषय) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. अनुच्छेद 110 B. अनुच्छेद 112 C. अनुच्छेद 267 D. अनुच्छेद 280
सूची-II: 1. वार्षिक वित्तीय विवरण 2. भारत की आकस्मिकता निधि 3. वित्त आयोग 4. धन विधेयक की परिभाषा
✅ सही उत्तर: (C) वित्तीय अनुच्छेदों का मानचित्र: अनु. 110 धन विधेयक को परिभाषित करता है (लोकसभा अध्यक्ष प्रमाणित करता है; राज्यसभा 14 दिनों में केवल सिफारिश कर सकती है)। अनु. 112 के तहत राष्ट्रपति प्रतिवर्ष वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) संसद में रखवाता है; अनु. 113 अनुमानों पर प्रक्रिया, अनु. 114 विनियोग विधेयक, अनु. 115 अनुपूरक/अतिरिक्त अनुदान, अनु. 116 लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और असाधारण अनुदान से संबंधित हैं। अनु. 266 भारत की संचित निधि और लोक लेखा बनाता है; अनु. 267 आकस्मिकता निधि बनाता है, जो अप्रत्याशित व्यय के लिए राष्ट्रपति के अधीन रहती है और बाद में संसद से नियमित कराई जाती है। अनु. 280 में प्रत्येक पाँचवें वर्ष (या पहले) वित्त आयोग का प्रावधान है और अनु. 270 में विभाज्य करों का वितरण। सही कूट: A-4, B-1, C-2, D-3।
22. राजकोषीय नीति के उपकरणों और उनके समष्टि-आर्थिक प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रगतिशील आयकर और बेरोज़गारी लाभ जैसे स्वचालित स्थिरीकारक बिना नए नीतिगत निर्णय के उत्पादन के उतार-चढ़ाव को कम करते हैं।
2. उधार से वित्तपोषित विस्तारकारी राजकोषीय नीति ब्याज दरें बढ़ाकर निजी निवेश को बाहर कर (crowd out) सकती है।
3. संतुलित बजट गुणक एक के बराबर होता है।
4. 'जुड़वाँ घाटे' (twin deficits) का अर्थ है कि राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा साथ-साथ चलें।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) राजकोषीय नीति की अवधारणाएँ: स्वचालित स्थिरीकारक: कर और अंतरण चक्र के साथ समायोजित होते हैं (तेज़ी में अधिक कर संग्रह, मंदी में अधिक अंतरण)। विवेकाधीन नीति: कर कटौती, प्रोत्साहन व्यय। क्राउडिंग आउट: सरकारी उधार ब्याज दरें बढ़ाकर निजी निवेश को विस्थापित करता है - अर्थव्यवस्था में सुस्ती या केंद्रीय बैंक के अनुकूल रुख होने पर कमज़ोर; 'क्राउडिंग इन' तब होता है जब सार्वजनिक पूँजीगत व्यय निजी प्रतिफल बढ़ाता है (12.2 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक पूँजीगत व्यय का तर्क)। संतुलित बजट गुणक (हावेल्मो प्रमेय) = 1: व्यय और कर में समान वृद्धि आय को उतना ही बढ़ाती है। जुड़वाँ घाटा परिकल्पना: ऊँचा राजकोषीय घाटा घरेलू माँग व आयात बढ़ाकर चालू खाता घाटा बढ़ाता है (रिकार्डियन तुल्यता के तर्कों में केवल कुछ शर्तों पर)। पूँजीगत व्यय का राजकोषीय गुणक आम तौर पर राजस्व व्यय से अधिक होता है - इसीलिए सरकार व्यय की गुणवत्ता सुधारना चाहती है। चारों कथन सही हैं।
23. पंद्रहवें वित्त आयोग (2021-26) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसने विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा 41 प्रतिशत अनुशंसित किया।
2. 14वें आयोग के 42 प्रतिशत से 1 प्रतिशत अंक की कमी नवगठित केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए प्रावधान हेतु थी।
3. क्षैतिज हस्तांतरण में इसने आय दूरी को 45 प्रतिशत तथा जनसंख्या (2011) और क्षेत्रफल को 15-15 प्रतिशत भार दिया।
4. इसने कर प्रयास को सर्वाधिक 50 प्रतिशत भार दिया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) 15वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष एन.के. सिंह, 2020-21 और 2021-26 अवधि की रिपोर्ट): ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण 41% (14वाँ आयोग: 42%; अतिरिक्त 1% जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों हेतु संघ की आवश्यकता दर्शाता है)। क्षैतिज मानदंड: आय दूरी 45%, जनसंख्या (2011) 15%, क्षेत्रफल 15%, वन व पारिस्थितिकी 10%, जनांकिकीय प्रदर्शन 12.5%, कर व राजकोषीय प्रयास 2.5% - कर प्रयास का भार केवल 2.5% है, अतः कथन 4 गलत है। अन्य सिफारिशें: 17 राज्यों हेतु राजस्व घाटा अनुदान, क्षेत्र-विशेष अनुदान (स्वास्थ्य, विद्यालयी शिक्षा, कृषि सुधार, विद्युत क्षेत्र, पोषण), स्थानीय सरकारों को अनुदान (लगभग 4.36 लाख करोड़ रुपये) और ऋण/राजकोषीय रूपरेखा। 2026-31 के लिए 16वाँ आयोग (पनगढ़िया) है। याद रखें: विभाज्य पूल में उपकर, अधिभार और संग्रहण लागत शामिल नहीं, इसलिए सकल कर राजस्व के हिस्से के रूप में प्रभावी हस्तांतरण कम (लगभग एक-तिहाई) है।
24. केंद्रीय बजट 2026-27 में निम्नलिखित में से कौन-से कर परिवर्तन घोषित किए गए?
1. न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) को 14 प्रतिशत पर अंतिम कर बनाया गया, और 1 अप्रैल 2026 से नई MAT क्रेडिट जमा नहीं होगी।
2. वायदा (futures) पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया गया।
3. उदारीकृत विप्रेषण योजना (LRS) के तहत शिक्षा और चिकित्सा हेतु विप्रेषण पर स्रोत पर संग्रहित कर (TCS) 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया।
4. नई कर व्यवस्था में व्यक्तिगत आयकर स्लैब का व्यापक पुनर्गठन किया गया।
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (A) बजट 2026-27 के कर उपाय: प्रत्यक्ष कर: MAT अब 14% (पहले 15%) पर अंतिम कर है और 1 अप्रैल 2026 से नई MAT क्रेडिट जमा नहीं होगी; बायबैक की राशि सभी शेयरधारकों के लिए पूँजीगत लाभ के रूप में कर योग्य है, प्रवर्तकों पर अतिरिक्त बायबैक कर (प्रभावी दर कॉर्पोरेट प्रवर्तक 22%, गैर-कॉर्पोरेट 30%); नया आयकर अधिनियम 2025 अप्रैल 2026 से लागू। बाज़ार कर: STT वायदा 0.02% -> 0.05%, ऑप्शन प्रीमियम 0.1% -> 0.15%, ऑप्शन एक्सरसाइज 0.125% -> 0.15%। विप्रेषण: LRS में शिक्षा और चिकित्सा पर TCS 5% से 2%। सीमा शुल्क: व्यक्तिगत उपयोग की शुल्कयोग्य वस्तुओं पर शुल्क 20% से 10%। व्यक्तिगत आयकर स्लैब अपरिवर्तित रहे, इसलिए कथन 4 गलत है। अवधारणा: MAT (धारा 115JB) शून्य-कर कंपनियों से बही लाभ पर न्यूनतम कर सुनिश्चित करता है; इसे अंतिम बनाने से क्रेडिट आगे ले जाने का लाभ समाप्त होता है।
25. बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.3 प्रतिशत और राजस्व घाटा लगभग 1.5 प्रतिशत है। लगभग 2.8 प्रतिशत अंकों के अंतर की सर्वश्रेष्ठ व्याख्या निम्नलिखित में से कौन-सी है?
✅ सही उत्तर: (B) राजकोषीय घाटे का विश्लेषण: राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + (पूँजीगत व्यय - गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ)। अतः FD - RD = शुद्ध पूँजीगत परिव्यय (पूँजीगत व्यय में से वसूली और विनिवेश घटाकर)। FD 4.3% और RD लगभग 1.5% होने पर GDP का लगभग 2.8% उधार पूँजी निर्माण, ऋण-अग्रिम में जा रहा है और लगभग 1.5% उधार राजस्व घाटा (चालू व्यय) पूरा करता है। यही 'घाटे की गुणवत्ता' है। प्राथमिक घाटा FD - ब्याज होता है, FD - RD नहीं; इस बजट में ब्याज भुगतान अकेले व्यय का लगभग 26% और राजस्व प्राप्तियों का लगभग 40% है। प्रभावी राजस्व घाटा RD को परिसंपत्ति-सृजन अनुदानों से समायोजित करता है, जो अलग गणना है। RD का घटता हिस्सा और बढ़ता पूँजीगत व्यय (सार्वजनिक पूँजीगत व्यय लगभग 12.2 लाख करोड़) राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की बेहतर गुणवत्ता दर्शाते हैं।