1. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के वास्तविक और नाममात्र GDP आँकड़ों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.8 प्रतिशत और नाममात्र GDP वृद्धि लगभग 10.3 प्रतिशत रही।
2. इसलिए निहित GDP अपस्फीतक (deflator) मुद्रास्फीति लगभग 2.3 प्रतिशत रही।
3. वास्तविक GDP वृद्धि एक वर्ष पहले (लगभग 6.9 प्रतिशत) से कम रही।
4. लगभग 8.2 प्रतिशत की वास्तविक GVA वृद्धि, वास्तविक GDP वृद्धि से अधिक रही।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) तिमाही आँकड़ों को पढ़ना: MoSPI ने 31 अगस्त 2026 को 2026-27 की पहली तिमाही के अनुमान जारी किए: वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.8% (एक वर्ष पहले लगभग 6.9%, यानी बढ़ी, इसलिए कथन 3 गलत), नाममात्र GDP लगभग 10.3%, वास्तविक GVA लगभग 8.2%, नाममात्र GVA लगभग 11.5%। GDP अपस्फीतक = (नाममात्र GDP / वास्तविक GDP) x 100, अतः अपस्फीतक मुद्रास्फीति = (1.103/1.078) - 1 = लगभग 2.3%। क्षेत्रवार वास्तविक GVA वृद्धि: कृषि व संबद्ध लगभग 3.6%, उद्योग लगभग 8.6%, सेवाएँ लगभग 10%, जिनमें वित्तीय, रियल एस्टेट व व्यावसायिक सेवाएँ लगभग 12.1%। सबक: अपस्फीतक CPI/WPI से व्यापक है (सभी उत्पादित वस्तुएँ-सेवाएँ), इसलिए खुदरा मुद्रास्फीति से बहुत भिन्न हो सकता है। [आँकड़े 31 अगस्त 2026 की MoSPI विज्ञप्ति के अनुसार; mospi.gov.in पर दोबारा जाँचें।]
2. सूची-I (सांख्यिकीय शृंखला) को सूची-II (संकलक एजेंसी) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त) B. थोक मूल्य सूचकांक C. औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक D. खाद्यान्न उत्पादन के अनुमान
सूची-II: 1. श्रम ब्यूरो, श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय 2. आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT 3. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, MoSPI 4. अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
✅ सही उत्तर: (B) कौन क्या संकलित करता है: CPI (संयुक्त, ग्रामीण, शहरी): NSO (MoSPI), माह की 12 तारीख को जारी। WPI और आठ प्रमुख उद्योगों का सूचकांक: आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय), WPI 14 तारीख को जारी। CPI-IW (केंद्रीय कर्मचारियों का महँगाई भत्ता संशोधित करने हेतु) और CPI-AL/RL: श्रम ब्यूरो। IIP, GDP/GVA, PLFS, NSS सर्वेक्षण: NSO (MoSPI)। कृषि उत्पादन अनुमान (खाद्यान्न, तिलहन, दलहन के अग्रिम और अंतिम अनुमान): अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग। RBI मुद्रा आपूर्ति, भुगतान संतुलन और विदेशी मुद्रा आँकड़े संकलित करता है। सही कूट: A-3, B-2, C-1, D-4।
3. राष्ट्रीय आय के अनुमान की विधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल्य-संवर्धन (उत्पाद) विधि उत्पादन मूल्य की जगह प्रत्येक चरण का मूल्य संवर्धन जोड़कर दोहरी गणना से बचाती है।
2. आय विधि में कर्मचारी क्षतिपूर्ति, परिचालन अधिशेष, मिश्रित आय और शुद्ध उत्पादन कर जोड़कर GVA निकाला जाता है।
3. GDP की व्यय विधि = PFCE + GFCE + GFCF + स्टॉक परिवर्तन + मूल्यवान वस्तुएँ + (निर्यात - आयात)।
4. भारत में कृषि क्षेत्र के अनुमान के लिए आय विधि का उपयोग होता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) तीन विधियाँ: (i) उत्पादन/मूल्य-संवर्धन: GVA = उत्पादन मूल्य - मध्यवर्ती उपभोग; प्रत्येक चरण का मूल्य संवर्धन जोड़ने पर अंतिम उत्पाद मूल्य मिलता है और दोहरी गणना हटती है। (ii) आय: GVA = कर्मचारी क्षतिपूर्ति + परिचालन अधिशेष + मिश्रित आय (किसान, छोटे व्यापारी जैसे स्वरोज़गार) + स्थिर पूँजी उपभोग + शुद्ध उत्पादन कर। (iii) व्यय: GDP = PFCE + GFCE + GFCF + स्टॉक परिवर्तन + मूल्यवान वस्तुएँ + शुद्ध निर्यात (+ विसंगतियाँ)। भारत में व्यवहार में विधि क्षेत्र के अनुसार बदलती है: कृषि, वानिकी, मत्स्य, खनन, विनिर्माण में उत्पादन विधि और सेवाओं व असंगठित क्षेत्र में काफी हद तक आय विधि; कृषि में 'उत्पादन मूल्य' (क्षेत्रफल x उपज x कीमत) अपनाया जाता है, अतः कथन 4 गलत है। व्यय पक्ष की सटीकता उत्पादन पक्ष से मिलाई जाती है और अंतर 'विसंगतियाँ' दिखाया जाता है।
4. राष्ट्रीय लेखों में प्रयुक्त कीमत अवधारणाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाज़ार कीमतों पर GDP = मूल कीमतों पर GVA + उत्पाद कर - उत्पाद सब्सिडी।
2. साधन लागत पर GDP = बाज़ार कीमतों पर GDP - शुद्ध अप्रत्यक्ष कर।
3. 2011-12 श्रृंखला से क्षेत्रीय उत्पादन के मुख्य माप के रूप में साधन लागत पर GVA का स्थान मूल कीमतों पर GVA ने ले लिया है।
4. साधन लागत पर GDP में सरकार द्वारा लगाए गए उत्पादन कर और उत्पाद कर शामिल हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) कीमत अवधारणाएँ: साधन लागत = उत्पादन साधनों को चुकाई आय (मज़दूरी, किराया, ब्याज, लाभ) का योग - इसमें सभी अप्रत्यक्ष कर शामिल नहीं और सब्सिडी शामिल है; मूल कीमत = उत्पादक को मिलने वाली कीमत, यानी साधन लागत + उत्पादन पर अन्य कर (संपत्ति कर, स्टाम्प शुल्क) - सब्सिडी, पर उत्पाद कर (GST, सीमा शुल्क) अपवर्जित; बाज़ार कीमत = क्रेता द्वारा चुकाई कीमत = मूल कीमत + उत्पाद कर - उत्पाद सब्सिडी। शृंखला: साधन लागत -> (+ उत्पादन कर - उत्पादन सब्सिडी) -> मूल कीमत -> (+ उत्पाद कर - उत्पाद सब्सिडी) -> बाज़ार कीमत। CSO के 2015 संशोधन (आधार 2011-12) ने संयुक्त राष्ट्र SNA 2008 परिपाटी अपनाकर मूल कीमतों पर GVA और बाज़ार कीमतों पर GDP बताना शुरू किया, और साधन लागत पर GDP का मुख्य माप छोड़ दिया। कथन 4 गलत है क्योंकि साधन लागत में उत्पादन कर और उत्पाद कर दोनों शामिल नहीं हैं।
5. भारतीय अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक रूपांतरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फिशर-क्लार्क परिकल्पना के अनुसार, अर्थव्यवस्था के विकास के साथ कार्यबल का हिस्सा प्राथमिक से द्वितीयक और फिर तृतीयक क्षेत्र की ओर जाता है।
2. भारत की कृषि कार्यबल का GVA में अपने हिस्से से बहुत बड़ा भाग रोज़गार देती है, जो निम्न श्रम उत्पादकता दर्शाता है।
3. भारत में सेवा क्षेत्र का GVA में हिस्सा उसके रोज़गार हिस्से से अधिक है।
4. भारत ने शास्त्रीय मार्ग अपनाया है जिसमें विनिर्माण का GVA में हिस्सा लगातार बढ़कर सेवाओं से आगे निकल गया है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) संरचनात्मक रूपांतरण: फिशर-क्लार्क (साथ ही कुज़नेट्स, रोस्टो के चरण) आय बढ़ने पर उत्पादन और रोज़गार दोनों में प्राथमिक -> द्वितीयक -> तृतीयक क्रम बताते हैं। भारत इससे भिन्न है: सेवाओं ने GVA वृद्धि का नेतृत्व किया (GVA के आधे से अधिक), बड़े विनिर्माण चरण को लगभग छोड़ते हुए, जबकि लगभग 45% कार्यबल कृषि में है जो GVA का लगभग छठा भाग उत्पन्न करता है (अतः कृषि में प्रति श्रमिक उत्पादकता सेवाओं/उद्योग का मात्र एक अंश है) और विनिर्माण दशकों से GVA के लगभग 13-17% पर अटका है, इसीलिए सरकार मेक इन इंडिया, PLI, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) और ECMS से श्रम-प्रधान विनिर्माण बढ़ाना चाहती है। कथन 3 सही है (सेवाएँ GVA में आधे से अधिक पर रोज़गार केवल लगभग एक-तिहाई), जबकि कथन 4 गलत है। [परिमाण आर्थिक समीक्षा/PLFS से; नवीनतम हिस्से दोबारा जाँचें।]
6. आर्थिक समीक्षा 2025-26 और 2025-26 के समष्टि-आर्थिक अनुमानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रथम अग्रिम अनुमान में 2025-26 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.4 प्रतिशत रखी गई।
2. प्रथम अग्रिम अनुमान में 2025-26 के लिए वास्तविक GVA वृद्धि लगभग 7.3 प्रतिशत रखी गई।
3. समीक्षा ने 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच लगाया।
4. आर्थिक समीक्षा संविधान के अंतर्गत सांविधिक आवश्यकता के रूप में बजट के दिन वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत की जाती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) आर्थिक समीक्षा: यह वित्त मंत्रालय (आर्थिक कार्य विभाग, आर्थिक प्रभाग) की मुख्य आर्थिक सलाहकार के अधीन तैयार वार्षिक रिपोर्ट है; यह बजट से एक दिन (या कुछ दिन) पहले प्रस्तुत होती है और संवैधानिक या सांविधिक अनिवार्यता नहीं है - संविधान केवल वार्षिक वित्तीय विवरण (अनु. 112) अनिवार्य करता है। यह पहली बार 1950-51 में आई और 1964 में बजट से अलग हुई। 2025-26 की समीक्षा (जनवरी 2026) में 2025-26 के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान 7.4% वास्तविक GDP और लगभग 7.3% वास्तविक GVA रहा तथा 2026-27 के लिए 6.8-7.2% का अनुमान दिया गया। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय प्रथम अग्रिम अनुमान जनवरी के प्रारंभ में, द्वितीय अग्रिम अनुमान फरवरी के अंत में, अनंतिम अनुमान 31 मई को और संशोधित अनुमान अगले वर्ष जनवरी में जारी करता है। कथन 4 गलत है: यह संवैधानिक नहीं है और बजट के दिन नहीं, उससे पहले प्रस्तुत होती है।
7. सरकारी क्षेत्र वाली खुली अर्थव्यवस्था के आय के वृत्तीय प्रवाह के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बचत, कर और आयात वृत्तीय प्रवाह से रिसाव (leakages) हैं।
2. निवेश, सरकारी व्यय और निर्यात वृत्तीय प्रवाह में अंतःक्षेप (injections) हैं।
3. संतुलन राष्ट्रीय आय के लिए कुल रिसाव का कुल अंतःक्षेप के बराबर होना आवश्यक है।
4. अन्य बातें समान रहने पर आयात में वृद्धि संतुलन राष्ट्रीय आय का स्तर बढ़ाती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) वृत्तीय प्रवाह: परिवारों की अर्जित आय व्यय के रूप में फर्मों तक जाती है और साधन भुगतान के रूप में लौटती है। रिसाव: बचत (S), कर (T), आयात (M)। अंतःक्षेप: निवेश (I), सरकारी व्यय (G), निर्यात (X)। संतुलन: S + T + M = I + G + X। यदि अंतःक्षेप रिसाव से अधिक हो, तो गुणक के माध्यम से आय तब तक बढ़ती है जब तक रिसाव बराबर न हो जाए; सीमांत उपभोग प्रवृत्ति c, कर दर t और आयात प्रवृत्ति m पर गुणक = 1/(1 - c(1 - t) + m)। आयात में वृद्धि बड़ा रिसाव है जो संतुलन आय को घटाती है (बढ़ाती नहीं) और गुणक छोटा करती है; इसीलिए उच्च आयात-निर्भरता राजकोषीय प्रोत्साहन के घरेलू प्रभाव को कुंद करती है। सर्वसमिका: Y = C + I + G + (X - M)।
8. भारतीय अर्थव्यवस्था की क्षेत्रीय संरचना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेवा क्षेत्र भारत के सकल मूल्य संवर्धन (GVA) में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
2. कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ प्राथमिक क्षेत्र हैं, जबकि खनन एवं उत्खनन द्वितीयक क्षेत्र में शामिल है।
3. राष्ट्रीय लेखों में निर्माण तथा विद्युत, गैस व जल आपूर्ति द्वितीयक क्षेत्र का भाग हैं।
4. रियल एस्टेट, आवासों का स्वामित्व और व्यावसायिक सेवाएँ तृतीयक क्षेत्र में वर्गीकृत हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) क्षेत्रीय वर्गीकरण: राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी में प्राथमिक क्षेत्र = कृषि, वानिकी, मत्स्य तथा खनन एवं उत्खनन; द्वितीयक = विनिर्माण, विद्युत-गैस-जल आपूर्ति व अन्य उपयोगिता सेवाएँ और निर्माण; तृतीयक (सेवाएँ) = व्यापार, होटल, परिवहन व संचार, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, आवासों का स्वामित्व, व्यावसायिक सेवाएँ, लोक प्रशासन, रक्षा व अन्य सेवाएँ। अतः कथन 2 गलत है क्योंकि खनन एवं उत्खनन प्राथमिक क्षेत्र में है। सेवाएँ GVA में आधे से अधिक योगदान देती हैं और मुख्य वृद्धि चालक हैं; 2026-27 की पहली तिमाही में सेवाएँ लगभग 10% (वित्तीय, रियल एस्टेट व व्यावसायिक लगभग 12.1%), उद्योग लगभग 8.6% और कृषि व संबद्ध लगभग 3.6% बढ़े। संरचनात्मक नोट: भारत में सेवाओं का हिस्सा उद्योग से तेज़ बढ़ा है, जो कृषि -> उद्योग -> सेवा के शास्त्रीय मार्ग से भिन्न है, इसीलिए विनिर्माण पर बल (PLI, ISM, ECMS) नीतिगत फोकस है।
9. एक अर्थव्यवस्था में: निजी उपभोग = 600, सकल निवेश (स्टॉक परिवर्तन सहित) = 200, सरकारी उपभोग = 150, निर्यात = 100, आयात = 50, मूल्यह्रास = 80, विदेशों से शुद्ध कारक आय = -10, और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = 100 (सभी एक ही इकाई में)। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाज़ार कीमतों पर GDP 1,000 है।
2. शुद्ध निर्यात 50 है।
3. बाज़ार कीमतों पर NNP 910 है।
4. साधन लागत पर GDP 1,100 है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) व्यय विधि: GDP(mp) = C + I + G + (X - M) = 600 + 200 + 150 + 50 = 1,000। शुद्ध निर्यात = 100 - 50 = 50। GNP(mp) = GDP + NFIA = 990। NNP(mp) = 990 - 80 = 910। राष्ट्रीय आय (साधन लागत पर NNP) = 910 - 100 = 810। साधन लागत पर GDP = 1,000 - 100 = 900, न कि 1,100 (NIT घटाने के बजाय जोड़ना सबसे आम त्रुटि है), अतः कथन 4 गलत है। याद रखें: बाज़ार कीमत से साधन लागत पर जाने में सदैव शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (कर - सब्सिडी) घटाया जाता है, क्योंकि बाज़ार कीमतों में कर का वह अंतर शामिल होता है जो उत्पादन साधनों को नहीं मिलता।
10. अभिकथन (A): भारत में बाज़ार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) सामान्यतः बाज़ार कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से कम होता है।
कारण (R): भारत की विदेशों से शुद्ध कारक आय सामान्यतः ऋणात्मक रहती है, क्योंकि विदेशी साधनों को भुगतान भारतीयों की विदेशों में अर्जित आय से अधिक होता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) GDP बनाम GNP: GDP घरेलू क्षेत्र में उत्पादित अंतिम वस्तुओं-सेवाओं का मूल्य है (साधनों का स्वामी कोई भी हो); GNP = GDP + NFIA, यानी राष्ट्रिकों की आय, चाहे वे कहीं भी काम करें। NFIA = विदेशों से प्राप्त साधन आय - विदेशों को भुगतान की गई साधन आय (कर्मचारी क्षतिपूर्ति, ब्याज, लाभांश, लाभ)। भारत को भारी विप्रेषण मिलते हैं, पर वे मुख्यतः अंतरण (द्वितीयक आय) हैं, कारक आय नहीं, जबकि विदेशी निवेशकों और ऋणदाताओं को लाभ-लाभांश-ब्याज भुगतान कारक भुगतान हैं। इसलिए NFIA ऋणात्मक, GNP < GDP और R, A की सही व्याख्या है। जापान जैसे देशों में, जिनकी विदेशी परिसंपत्तियाँ अधिक हैं, GNP > GDP होता है।
11. एक अर्थव्यवस्था में वर्ष 1 में नाममात्र GDP 200 रुपये और वास्तविक GDP (आधार वर्ष कीमतों पर) 160 रुपये है। वर्ष 2 में नाममात्र GDP 264 रुपये और वास्तविक GDP 176 रुपये है। GDP अपस्फीतक और वृद्धि के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) अपस्फीतक का गणित: अपस्फीतक(वर्ष 1) = 200/160 x 100 = 125; अपस्फीतक(वर्ष 2) = 264/176 x 100 = 150। अपस्फीतक से मापी गई मुद्रास्फीति = 150/125 - 1 = 20%। वास्तविक वृद्धि = 176/160 - 1 = 10%। नाममात्र वृद्धि = 264/200 - 1 = 32%। सत्यापन: (1 + वास्तविक वृद्धि) x (1 + अपस्फीतक मुद्रास्फीति) = 1.10 x 1.20 = 1.32 = 1 + नाममात्र वृद्धि। अपस्फीतक पाशे (Paasche) प्रकार का है (चालू वर्ष भार), जबकि CPI लासपेयर (Laspeyres) प्रकार का (आधार वर्ष टोकरी), इसीलिए दोनों में अंतर आता है। वास्तविक मूल्य नाममात्र मूल्य को मूल्य सूचकांक से अपस्फीत करके मिलते हैं, इसलिए वास्तविक GDP वृद्धि ही उत्पादन विस्तार का सही माप है।
12. निम्नलिखित में से कौन-से भारत की GDP की गणना में शामिल हैं?
1. स्वयं के आवास का आरोपित किराया
2. किसानों द्वारा कृषि उपज का स्व-उपभोग
3. सरकार द्वारा दी गई पेंशन और बेरोज़गारी लाभ
4. पुरानी वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त राशि
5. परिवार के सदस्यों द्वारा की गई अवैतनिक घरेलू सेवाएँ
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (D) GDP में क्या गिना जाता है: GDP एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं-सेवाओं का बाज़ार मूल्य (या आरोपित मूल्य) है। शामिल: स्वयं के आवास का आरोपित किराया (मालिक को आवास सेवाओं का उत्पादक मानने की परिपाटी), किसानों का स्व-उत्पादन व स्व-उपभोग (बाज़ार भाव पर), और सरकारी अंतिम उपभोग। अपवर्जित: पेंशन, बेरोज़गारी लाभ जैसे अंतरण भुगतान (बदले में कोई उत्पादन नहीं), पुरानी वस्तुओं की बिक्री (मूल मूल्य उत्पादन वर्ष में गिना जा चुका; केवल डीलर का कमीशन चालू सेवा है), शेयर खरीद जैसे वित्तीय लेनदेन और अवैतनिक घरेलू सेवाएँ (खाना पकाना, बच्चों की देखभाल) क्योंकि न बाज़ार लेनदेन है न आरोपण - कल्याण माप के रूप में GDP की मान्य सीमा। अतः केवल 1 और 2।
13. भारत के राष्ट्रीय लेखों में GDP और GVA के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कीमतों पर GVA = बाज़ार कीमतों पर GDP - (उत्पाद कर - उत्पाद सब्सिडी)।
2. यदि किसी अवधि में वास्तविक GVA, वास्तविक GDP से तेज़ बढ़ता है, तो इसका अर्थ है कि शुद्ध उत्पाद कर GVA से धीमे बढ़े।
3. मूल कीमतों पर GVA में उत्पादन कर (जैसे संपत्ति कर) शामिल होते हैं, पर उत्पाद कर (जैसे GST) शामिल नहीं होते।
4. GVA केवल व्यय विधि से निकाला जाता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) GVA बनाम GDP: बाज़ार कीमतों पर GDP = मूल कीमतों पर GVA + उत्पाद कर - उत्पाद सब्सिडी (2011-12 आधार श्रृंखला ने संयुक्त राष्ट्र SNA 2008 के अनुरूप मूल कीमतों पर GVA को उद्योग-वार उत्पादन का मुख्य माप बनाया)। उत्पाद कर (GST, सीमा शुल्क) प्रति इकाई उत्पाद पर लगते हैं; उत्पादन कर (संपत्ति कर, पंजीकरण पर स्टाम्प शुल्क, मोटर वाहन कर) उत्पादन प्रक्रिया पर लगते हैं, उत्पादन की मात्रा से स्वतंत्र, इसलिए मूल कीमत में शामिल हैं जबकि उत्पाद कर बाहर रहते हैं। यदि GVA, GDP से तेज़ बढ़ता है (जैसे 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GVA लगभग 8.2% और GDP लगभग 7.8%), तो शुद्ध उत्पाद कर धीमे बढ़े। GVA उद्योग-वार उत्पादन (मूल्य संवर्धन) विधि से निकलता है; GDP व्यय पक्ष से भी निकलता है (PFCE, GFCE, GFCF, स्टॉक परिवर्तन, शुद्ध निर्यात), अतः कथन 4 गलत है।
14. भारतीय अर्थव्यवस्था में बचत और निवेश के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सकल घरेलू बचत परिवार क्षेत्र, निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र की बचतों का योग है।
2. परिवार की बचत में भौतिक परिसंपत्तियाँ और वित्तीय परिसंपत्तियाँ दोनों शामिल हैं।
3. निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र सकल घरेलू बचत में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
4. सकल पूँजी निर्माण = सकल घरेलू बचत + शुद्ध विदेशी बचत, जो चालू खाता घाटे से व्यक्त होती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) बचत-निवेश सर्वसमिका: सकल घरेलू बचत (GDS) = परिवार क्षेत्र + निजी कॉर्पोरेट + सार्वजनिक क्षेत्र (सरकार और सार्वजनिक उद्यम) की बचत। परिवार की बचत (अब तक का सबसे बड़ा घटक) भौतिक बचत (मकान, भूमि, सोना, मशीनरी) और वित्तीय बचत (जमाएँ, बीमा, पेंशन, शेयर, म्यूचुअल फंड) के रूप में रखी जाती है; हाल के वर्षों में भौतिक से वित्तीय बचत की ओर झुकाव और परिवारों की वित्तीय देनदारियों (ऋण) में वृद्धि दिखी है। राष्ट्रीय लेखों की सर्वसमिका: सकल पूँजी निर्माण (निवेश) = GDS + विदेशी बचत का शुद्ध प्रवाह, जहाँ विदेशी बचत = चालू खाता घाटा। अतः निवेश घरेलू बचत से अधिक हो तो अंतर CAD है, जिसकी पूर्ति पूँजी प्रवाह से होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि कॉर्पोरेट नहीं, परिवार बचत में प्रमुख हैं; राजस्व घाटे के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की बचत प्रायः कम या ऋणात्मक रही है।
15. भारत की राष्ट्रीय आय के मापन के निम्नलिखित पड़ावों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए:
A. दादाभाई नौरोजी का 1867-68 की प्रति व्यक्ति आय का अनुमान
B. वी.के.आर.वी. राव के 1931-32 की राष्ट्रीय आय के अनुमान
C. पी.सी. महालनोबिस की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आय समिति का गठन
D. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय का राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय में विलय
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (B) राष्ट्रीय आय मापन: दादाभाई नौरोजी ('पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया', 1901) ने 1867-68 की प्रति व्यक्ति आय लगभग 20 रुपये आँकी। वी.के.आर.वी. राव ने 1931-32 का पहला वैज्ञानिक अनुमान (उत्पादन और आय विधियों से) लगाया। सरकार ने 1949 में पी.सी. महालनोबिस की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आय समिति नियुक्त की (सदस्य: डी.आर. गाडगिल, वी.के.आर.वी. राव आदि), जिसने 1948-49 से अनुमान दिए और केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO, 1951) आधिकारिक संकलक बना। मई 2019 में CSO और NSSO का विलय कर MoSPI के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) बना; 2011-12 आधार श्रृंखला ने जनवरी 2015 में 2004-05 श्रृंखला का स्थान लिया, और 2022-23 श्रृंखला ने 2026 से उसकी जगह ली। अतः क्रम A-B-C-D।
16. MoSPI द्वारा 2026 में की गई भारत के समष्टि-आर्थिक आँकड़ों के आधार वर्ष संशोधन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. GDP श्रृंखला का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है।
2. संशोधित श्रृंखला में GST, UPI और ई-कॉमर्स जैसे प्रशासनिक आँकड़ों का अधिक उपयोग हुआ है।
3. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष भी संशोधित हुआ है, जो 2012 से बदला है।
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (A) आधार वर्ष संशोधन: आधार वर्ष वह संदर्भ वर्ष है जिसकी कीमतों से 'वास्तविक' (स्थिर कीमत) मूल्य निकलते हैं; यह सामान्य वर्ष होना चाहिए जिसके विश्वसनीय आँकड़े हों। GDP का आधार 2011-12 (2015 में अपनाया) से 2022-23 हुआ, और CPI (आधार 2012 से 2024) तथा IIP की नई श्रृंखलाएँ भी 2026 की शुरुआत से आईं। नई GDP श्रृंखला प्रशासनिक और बिग-डेटा स्रोतों (GST रिटर्न, UPI/डिजिटल भुगतान, MCA21 कंपनी फाइलिंग, ई-कॉमर्स) और स्थिर कीमत अनुमानों में दोहरे अपस्फीतन (double deflation) से कवरेज सुधारती है, जो बड़ी औपचारिक और डिजिटल अर्थव्यवस्था को दर्शाती है। महत्व: आधार बदलने पर वृद्धि दर, GDP का स्तर और राजकोषीय घाटा/GDP, ऋण/GDP जैसे अनुपात यांत्रिक रूप से बदल जाते हैं, इसलिए श्रृंखलाओं की तुलना में सावधानी चाहिए। [सटीक जारी तिथियाँ और CPI आधार वर्ष mospi.gov.in पर दोबारा जाँचें।]
17. UNDP द्वारा प्रकाशित मानव विकास सूचकांक (HDI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह तीन आयामों में उपलब्धि मापता है: दीर्घ और स्वस्थ जीवन, ज्ञान और सम्मानजनक जीवन स्तर।
2. 2010 से तीनों आयाम सूचकांकों को ज्यामितीय माध्य से संयोजित किया जाता है।
3. आय आयाम क्रय शक्ति समता में प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के लघुगणक से मापा जाता है।
4. HDI विश्व बैंक द्वारा प्रतिवर्ष प्रकाशित किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) HDI: महबूब-उल-हक और अमर्त्य सेन की परिकल्पना (प्रथम मानव विकास रिपोर्ट 1990, UNDP)। आयाम और संकेतक: स्वास्थ्य - जन्म पर जीवन प्रत्याशा; शिक्षा - औसत स्कूली वर्ष (25+ वयस्क) और अपेक्षित स्कूली वर्ष (बच्चे); जीवन स्तर - प्रति व्यक्ति GNI (PPP, आय की घटती सीमांत उपयोगिता दर्शाने हेतु लघुगणक रूप में)। ज्यामितीय माध्य (2010 से) असंतुलन को दंडित करता है - एक आयाम का निम्न अंक दूसरे के उच्च अंक से पूरी तरह पूरा नहीं हो सकता; पहले अंकगणितीय माध्य था। HDI का मान 0 से 1 है। संबंधित UNDP सूचकांक: असमानता-समायोजित HDI (IHDI), लैंगिक विकास सूचकांक (GDI), लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) और वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (OPHI के साथ)। HDI का प्रकाशक UNDP है, विश्व बैंक नहीं, अतः कथन 4 गलत है।
18. अभिकथन (A): GDP में वृद्धि का अनिवार्यतः लोगों के कल्याण में तदनुरूप सुधार नहीं होता।
कारण (R): GDP में अवैतनिक घरेलू कार्य जैसी गैर-बाज़ार गतिविधियाँ शामिल नहीं होतीं, यह प्राकृतिक पूँजी के क्षरण का हिसाब नहीं रखती, और यह नहीं बताती कि आय का वितरण कैसा है।
निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) GDP और कल्याण: GDP बाज़ार उत्पादन का माप है, कल्याण का नहीं। सीमाएँ: (i) अवैतनिक देखभाल और घरेलू कार्य (अधिकांशतः महिलाओं द्वारा) तथा अनौपचारिक/छाया अर्थव्यवस्था केवल आंशिक रूप से शामिल; (ii) पर्यावरणीय क्षरण की अनदेखी (इसीलिए 'हरित GDP' = GDP - पर्यावरणीय लागत; संयुक्त राष्ट्र का SEEA ढाँचा); (iii) वितरण पर मौन (औसत असमानता छिपाते हैं - गिनी, IHDI और पाल्मा अनुपात का कारण); (iv) 'रक्षात्मक' व्यय (जैसे प्रदूषण के बाद चिकित्सा व्यय) को उत्पादन गिनना; (v) अवकाश और जीवन की गुणवत्ता की अनदेखी। विकल्प: HDI, वास्तविक प्रगति सूचकांक, सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (भूटान), सामाजिक प्रगति सूचकांक और बहुआयामी गरीबी सूचकांक। चूँकि R ठीक वे अंतराल बताता है जो GDP और कल्याण के संबंध को तोड़ते हैं, R, A की सही व्याख्या करता है।
19. एक अर्थव्यवस्था की नाममात्र GDP वर्ष 1 में 250 रुपये है जिसका GDP अपस्फीतक 125 है, और वर्ष 2 में 330 रुपये है जिसका अपस्फीतक 132 है। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (C) नाममात्र GDP का अपस्फीतन: वास्तविक GDP = नाममात्र GDP / अपस्फीतक x 100। वर्ष 1: 250/125 x 100 = 200। वर्ष 2: 330/132 x 100 = 250। वास्तविक वृद्धि = 250/200 - 1 = 25%। नाममात्र वृद्धि = 330/250 - 1 = 32%। अपस्फीतक मुद्रास्फीति = 132/125 - 1 = 5.6%। जाँच: 1.25 x 1.056 = 1.32। आम भूल है नाममात्र वृद्धि को वास्तविक मान लेना या अनुपात की जगह वृद्धि दरों का अंतर (32 - 25 = 7) लेना; सटीक संबंध (1 + g नाममात्र) = (1 + g वास्तविक) x (1 + मुद्रास्फीति) है। वर्षों की तुलना के लिए वास्तविक GDP प्रयुक्त होती है क्योंकि वह कीमत परिवर्तन हटाती है; श्रृंखला का आधार वर्ष (नई श्रृंखला में 2022-23) स्थिर कीमतें तय करता है।
20. एक काल्पनिक अर्थव्यवस्था में: बाज़ार कीमतों पर GDP = 1,000; मूल्यह्रास = 100; विदेशों से शुद्ध कारक आय (NFIA) = -20; अप्रत्यक्ष कर = 120; सब्सिडी = 20। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाज़ार कीमतों पर GNP 980 है।
2. बाज़ार कीमतों पर NNP 880 है।
3. साधन लागत पर NNP (राष्ट्रीय आय) 780 है।
4. साधन लागत पर GDP 900 है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) राष्ट्रीय आय के सूत्र: GNP(mp) = GDP(mp) + NFIA = 1,000 - 20 = 980। NNP(mp) = GNP(mp) - मूल्यह्रास = 880। शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT) = अप्रत्यक्ष कर - सब्सिडी = 100। NNP(fc) = NNP(mp) - NIT = 780, और साधन लागत पर NNP ही राष्ट्रीय आय है। GDP(fc) = GDP(mp) - NIT = 1,000 - 100 = 900, अतः कथन 4 भी सही है। मुख्य शृंखला: GDP(mp) -> (+NFIA) GNP(mp) -> (-मूल्यह्रास) NNP(mp) -> (-NIT) NNP(fc) = राष्ट्रीय आय। भारत की NFIA ऋणात्मक रहती है (विदेशी साधनों को भुगतान अधिक, आय कम), इसलिए GNP, GDP से कम होता है।
21. लोरेंज वक्र और गिनी गुणांक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोरेंज वक्र आय के संचयी प्रतिशत को जनसंख्या के संचयी प्रतिशत के विरुद्ध आलेखित करता है।
2. गिनी गुणांक 0 और 1 के बीच होता है।
3. लोरेंज वक्र समानता रेखा से जितना दूर होता है, असमानता उतनी अधिक होती है।
4. शून्य गिनी गुणांक पूर्ण असमानता दर्शाता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) असमानता के माप: लोरेंज वक्र (मैक्स लोरेंज, 1905) निचले x% जनसंख्या का संचयी आय हिस्सा दिखाता है; 45 अंश की रेखा पूर्ण समानता है। गिनी गुणांक = समानता रेखा और लोरेंज वक्र के बीच का क्षेत्र / समानता रेखा के नीचे का क्षेत्र (A/(A + B)); गिनी = 0 का अर्थ पूर्ण समानता है, गिनी = 1 (या 100%) पूर्ण असमानता (एक व्यक्ति के पास सारी आय), अतः कथन 4 गलत है। अन्य माप: पाल्मा अनुपात (शीर्ष 10% हिस्सा / निचले 40% हिस्सा), कुज़नेट्स अनुपात और दशमक अनुपात। गिनी उपभोग (NSO उपभोग व्यय आँकड़े लेता है, इसलिए आय गिनी से कम मान), आय और संपत्ति के लिए निकाला जा सकता है; भारत की उपभोग गिनी निम्न 25-35 के दायरे में उद्धृत है, पर आय और संपत्ति असमानता कहीं अधिक है। [किसी विशेष गिनी मान को स्रोत से दोबारा जाँचें।]
22. मूल्य सूचकांक निर्माण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लासपेयर सूचकांक आधार वर्ष की मात्राओं को भार के रूप में प्रयोग करता है।
2. पाशे सूचकांक चालू वर्ष की मात्राओं को भार के रूप में प्रयोग करता है।
3. लासपेयर सूचकांक मुद्रास्फीति को अधिक आँकने की प्रवृत्ति रखता है क्योंकि उपभोक्ता कीमत बढ़ने वाली वस्तुओं से हटकर प्रतिस्थापन करते हैं।
4. GDP अपस्फीतक लासपेयर प्रकार का सूचकांक है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) सूचकांक संख्याएँ: लासपेयर: भार = आधार अवधि की मात्राएँ (निश्चित टोकरी); पाशे: भार = चालू अवधि की मात्राएँ; फिशर का आदर्श सूचकांक = दोनों का ज्यामितीय माध्य। लासपेयर में प्रतिस्थापन-पक्षपात होता है (वह मानता है कि सापेक्ष कीमतें बदलने पर भी उपभोक्ता वही टोकरी खरीदते रहते हैं), इसलिए जीवन-निर्वाह लागत वृद्धि को अधिक आँकता है; पाशे कम आँकता है। भारत के CPI और WPI लासपेयर प्रकार के निश्चित-भार सूचकांक हैं, जिनका आधार समय-समय पर बदला जाता है (2024 आधार वाली नई CPI श्रृंखला टोकरी अद्यतन करती है)। GDP अपस्फीतक = नाममात्र GDP / वास्तविक GDP, चालू वर्ष की मात्राओं के भार के साथ, अतः पाशे प्रकार का है; कथन 4 गलत है। उत्पादन की संरचना बदलने पर अपस्फीतक स्वतः बदलता है, इसीलिए वह CPI से भिन्न हो सकता है।
23. सूची-I (समुच्चय) को सूची-II (परिभाषा) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. GDP अपस्फीतक B. साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद C. सकल स्थिर पूँजी निर्माण D. प्रति व्यक्ति आय
सूची-II: 1. राष्ट्रीय आय 2. नाममात्र GDP और वास्तविक GDP का अनुपात गुणा 100 3. मशीनरी और निर्माण जैसी टिकाऊ पूँजीगत परिसंपत्तियों पर व्यय 4. राष्ट्रीय आय को जनसंख्या से भाग देना
✅ सही उत्तर: (B) परिभाषाएँ: GDP अपस्फीतक = (नाममात्र GDP / वास्तविक GDP) x 100, सभी घरेलू उत्पादन को समेटने वाला निहित मूल्य सूचकांक। साधन लागत पर NNP ही राष्ट्रीय आय है (निवासियों की कुल साधन आय)। सकल स्थिर पूँजी निर्माण (GFCF) स्थिर परिसंपत्तियों (मशीनरी, भवन, अवसंरचना, सॉफ्टवेयर, R&D) में वृद्धि है और निवेश का मुख्य माप है; GDP से इसका अनुपात निवेश दर है, जबकि 'सकल पूँजी निर्माण' = GFCF + स्टॉक परिवर्तन + मूल्यवान वस्तुएँ। प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय / जनसंख्या (व्यवहार में MoSPI चालू कीमतों पर प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय बताता है, जो प्रति व्यक्ति GDP से निवासियों को उपलब्ध आय का बेहतर संकेतक है)। सही कूट: A-2, B-1, C-3, D-4।
24. हैरोड-डोमर ढाँचे में एक अर्थव्यवस्था की निवेश दर GDP की 32 प्रतिशत और वृद्धिशील पूँजी-उत्पाद अनुपात (ICOR) 4 है। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्पादन की अपेक्षित वृद्धि दर 8 प्रतिशत है।
2. यदि समान निवेश दर पर ICOR बढ़कर 4.5 हो जाए, तो वृद्धि दर घटकर लगभग 7.1 प्रतिशत रह जाती है।
3. उच्च ICOR पूँजी की उत्पादन सृजन में कम दक्षता दर्शाता है।
4. ICOR को उत्पादन में परिवर्तन को निवेश से भाग देकर परिभाषित किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) हैरोड-डोमर: वृद्धि दर g = s/ICOR, जहाँ s निवेश (बचत) दर और ICOR = निवेश / उत्पादन में परिवर्तन (एक अतिरिक्त इकाई उत्पादन हेतु आवश्यक पूँजी की इकाइयाँ)। g = 32%/4 = 8%। ICOR 4.5 पर: 32/4.5 = 7.11%। बढ़ता ICOR पूँजी उत्पादकता में गिरावट (खराब परियोजना चयन, विलंब, लागत वृद्धि, अप्रयुक्त क्षमता) दर्शाता है; घटता ICOR दक्षता। व्युत्क्रम (प्रति इकाई पूँजी उत्पादन) पूँजी उत्पादकता है। कथन 4 गलत है - यह परिभाषा उलट देता है। नीतिगत सार: वृद्धि निवेश दर बढ़ाकर (बचत जुटाना, FDI) या ICOR घटाकर (परियोजना क्रियान्वयन, अवसंरचना, सुधार) बढ़ाई जा सकती है, यही सरकार के पूँजीगत व्यय और अवसंरचना निगरानी (प्रगति, पीएम गति शक्ति) का तर्क है।
25. बाज़ार कीमतों पर GDP से राष्ट्रीय आय निकालते समय पहले NFIA जोड़ा जाता है, फिर मूल्यह्रास घटाया जाता है और फिर शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटाया जाता है। निम्नलिखित समुच्चयों को उनके प्राप्त होने के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
A. बाज़ार कीमतों पर GNP
B. साधन लागत पर NNP
C. बाज़ार कीमतों पर GDP
D. बाज़ार कीमतों पर NNP
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (B) समुच्चयों का क्रम: शुरुआत GDP(mp) से। NFIA जोड़ने पर GNP(mp); मूल्यह्रास (स्थिर पूँजी उपभोग) घटाने पर NNP(mp); शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (अप्रत्यक्ष कर - सब्सिडी) घटाने पर NNP(fc) = राष्ट्रीय आय। अतः C-A-D-B। 'सकल' और 'शुद्ध' मूल्यह्रास से संबंधित हैं (सकल में शामिल, शुद्ध में घटा हुआ); 'घरेलू' और 'राष्ट्रीय' NFIA से (घरेलू में नहीं, राष्ट्रीय में शामिल); 'बाज़ार कीमत' और 'साधन लागत' का अंतर शुद्ध अप्रत्यक्ष कर है। यह तीन-तरफा ग्रिड (सकल/शुद्ध, घरेलू/राष्ट्रीय, mp/fc) आठों समुच्चय बनाता है।