1. अभिकथन (A): मौद्रिक नीति समिति सब्ज़ियों की कीमतों में अस्थायी उछाल के जवाब में नीतिगत दर न बढ़ाने का विकल्प चुन सकती है।
कारण (R): नीतिगत दर में वृद्धि नाशवान खाद्य पदार्थों की आपूर्ति नहीं बढ़ा सकती, और MPC सामान्यतः आपूर्ति झटकों को तब तक नज़रअंदाज़ करती है जब तक वे मूल मुद्रास्फीति और मुद्रास्फीति अपेक्षाओं में न फैलें।
निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) आपूर्ति झटकों को नज़रअंदाज़ करना: मौद्रिक नीति समग्र माँग पर काम करती है; मौसम या लॉजिस्टिक के कारण सब्ज़ी (प्याज, टमाटर) की कीमतों में उछाल सापेक्ष कीमत परिवर्तन है जो आपूर्ति सुधरने पर पलट जाता है, इसलिए दर वृद्धि कीमतें घटाए बिना वृद्धि को नुकसान पहुँचाएगी। इसीलिए आर्थिक समीक्षा और RBI समग्र और मूल मुद्रास्फीति में अंतर करते हैं। परंतु यदि खाद्य झटके बार-बार आएँ, तो अपेक्षाएँ अस्थिर हो जाती हैं, मज़दूरी और अन्य वस्तुओं की कीमतें साथ बढ़ती हैं ('द्वितीयक प्रभाव'), और MPC को कार्रवाई करनी पड़ती है; सितंबर 2026 में खाद्य मुद्रास्फीति लगभग 7.7% थी और MPC ने अक्टूबर में रेपो बढ़ाते समय द्वितीयक प्रभाव तथा मानसून/तेल जोखिमों का हवाला दिया। आपूर्ति-पक्ष उपाय: बफर स्टॉक जारी करना, आयात शुल्क कटौती, भंडारण सीमा, निर्यात पर अंकुश (जिनकी अपनी व्यापार लागत है)। अतः A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या करता है।
2. अक्टूबर 2026 में घोषित RBI की मौद्रिक नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नीतिगत रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत की गई।
2. रुख 'तटस्थ' से बदलकर 'मापित कसाव' (calibrated tightening) किया गया।
3. SDF दर 5.25 प्रतिशत तथा MSF दर और बैंक दर 5.75 प्रतिशत रखी गई।
4. बैंक दर को रेपो दर के बराबर 5.50 प्रतिशत रखा गया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) अक्टूबर 2026 की नीति (5-7 अक्टूबर, 63वीं MPC बैठक, गवर्नर संजय मल्होत्रा): रेपो 5.25% से 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% हुआ (2025 की कटौतियों ने इसे 5.25% तक घटाया था; अगस्त 2026 की नीति में 5.25% और तटस्थ रुख बरकरार रहा)। रुख 'तटस्थ' से 'मापित कसाव' हुआ, जो संकेत देता है कि आगे की वृद्धि आँकड़ों, मुख्यतः मुद्रास्फीति, पर निर्भर है। गलियारा स्वतः समायोजित हुआ: SDF 5.25%, MSF 5.75%, बैंक दर 5.75% - बैंक दर सदैव MSF के बराबर रहती है, रेपो के नहीं, अतः कथन 4 गलत है। RBI के अनुमानों में 2026-27 के लिए CPI मुद्रास्फीति लगभग 5.2% और वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.1% बताई गई, जोखिम: कच्चा तेल, कमज़ोर मानसून/अल नीनो, भू-राजनीति और वैश्विक वित्तीय स्थितियाँ। 'रुख' दरों और चलनिधि की दिशा बताता है: समायोजी (कटौती/पर्याप्त चलनिधि), तटस्थ (दोनों ओर), समायोजन वापसी (कसाव), मापित कसाव (धीमा)। [rbi.org.in पर दोबारा जाँचें; यह 7 अक्टूबर 2026 के वक्तव्य की समाचार रिपोर्टों पर आधारित है।]
3. अभिकथन (A): नीतिगत रेपो दर में वृद्धि संकुचनकारी मौद्रिक नीति कार्रवाई है जो मुद्रास्फीति घटाने की प्रवृत्ति रखती है।
कारण (R): ऊँची रेपो दर RBI से चलनिधि उधार लेने की बैंकों की लागत बढ़ाती है, जिससे उधार दरें बढ़ती हैं और ऋण-जनित समग्र माँग घटती है।
निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) रेपो का तर्क: रेपो (पुनर्क्रय) दर वह दर है जिस पर RBI सरकारी प्रतिभूतियों के बदले, पुनर्क्रय समझौते के तहत, बैंकों को अल्पकालिक धन उधार देता है। दर बढ़ने पर बैंकों की सीमांत निधि लागत बढ़ती है, संचरण से उधार दरें बढ़ती हैं और ऋण माँग घटती है, जिससे समग्र माँग और माँग-जनित मुद्रास्फीति कम होती है: यह संकुचनकारी (महँगी मुद्रा) कार्रवाई है। कटौती इसके विपरीत (सस्ती मुद्रा, विस्तारकारी) है। सावधानी: आपूर्ति झटकों (खाद्य, कच्चा तेल) से उपजी मुद्रास्फीति पर असर कमज़ोर होता है, और बड़े असंगठित व नकदी-आधारित क्षेत्र वाली अर्थव्यवस्था में संचरण अपूर्ण रहता है। वास्तविक नीतिगत दर = रेपो - अपेक्षित/वास्तविक मुद्रास्फीति: रेपो 5.50% और सितंबर 2026 की CPI 5.54% पर वास्तविक रेपो दर लगभग शून्य (करीब -0.04 प्रतिशत अंक) है, इसीलिए MPC कसाव के रुख की ओर गई।
4. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत मौद्रिक नीति समिति (MPC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसमें छह सदस्य हैं, तीन RBI से और तीन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त बाह्य सदस्य।
2. RBI का गवर्नर MPC का पदेन अध्यक्ष है।
3. बाह्य सदस्य चार वर्ष के लिए पद धारण करते हैं और पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं हैं।
4. निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से होते हैं तथा बराबर मत होने पर गवर्नर का निर्णायक मत होता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) MPC ढाँचा: वित्त अधिनियम 2016 से (RBI अधिनियम धारा 45ZB) बनी छह-सदस्यीय MPC में गवर्नर (पदेन अध्यक्ष), मौद्रिक नीति के प्रभारी डिप्टी गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित RBI का एक अधिकारी और केंद्र सरकार द्वारा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली खोज समिति की सिफारिश पर नियुक्त तीन बाह्य सदस्य होते हैं। बाह्य सदस्य चार वर्ष कार्य करते हैं, पुनर्नियुक्ति नहीं होती। गणपूर्ति चार है, वर्ष में कम से कम चार बैठकें अनिवार्य हैं, प्रत्येक सदस्य का एक मत है और बराबरी पर गवर्नर का निर्णायक मत होता है। MPC मुद्रास्फीति लक्ष्य के लिए नीतिगत रेपो दर तय करती है; RBI 14 दिन बाद कार्यवृत्त और वर्ष में दो बार मौद्रिक नीति रिपोर्ट प्रकाशित करता है। 2016 से पहले गवर्नर तकनीकी सलाहकार समिति की सलाह पर अकेले निर्णय करता था (उर्जित पटेल समिति 2014 ने MPC की सिफारिश की)। चारों कथन सही हैं।
5. भारत में मुद्रा आपूर्ति समुच्चयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरक्षित मुद्रा (M0) में परिसंचरण में मुद्रा, RBI के पास बैंकों की जमाएँ और RBI के पास अन्य जमाएँ शामिल हैं।
2. आरक्षित मुद्रा को उच्च शक्ति मुद्रा भी कहा जाता है।
3. मुद्रा गुणक व्यापक मुद्रा (M3) और आरक्षित मुद्रा का अनुपात है।
4. डाकघर बचत बैंक जमाएँ व्यापक मुद्रा (NM3) में शामिल हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) मुद्रा समुच्चय: आरक्षित मुद्रा (M0, उच्च शक्ति मुद्रा) = परिसंचरण में मुद्रा + RBI के पास बैंकों की जमाएँ + RBI के पास 'अन्य' जमाएँ; यह RBI की मौद्रिक देयताएँ हैं और वह आधार है जिस पर बैंक जमा सृजित करते हैं। मुद्रा गुणक = M3 / M0 (या पाठ्यपुस्तकीय सूत्र (1 + c)/(c + r), जहाँ c मुद्रा-जमा अनुपात और r आरक्षित-जमा अनुपात)। RBI के वर्तमान मुद्रा माप: NM1 = जनता के पास मुद्रा + माँग जमाएँ + RBI के पास अन्य जमाएँ; NM2 = NM1 + अल्पकालिक मियादी जमाएँ (एक वर्ष तक); NM3 (व्यापक मुद्रा) = NM2 + दीर्घकालिक मियादी जमाएँ + जमा प्रमाणपत्र + वित्तीय संस्थाओं से कॉल/मियादी उधार। डाकघर बचत जमाएँ NM3 में नहीं हैं - वे व्यापक चलनिधि मापों (L1, L2, L3) में हैं। अतः कथन 4 गलत है।
6. RBI की चलनिधि प्रबंधन रूपरेखा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थायी जमा सुविधा बैंकों को बिना किसी जमानत के RBI के पास अधिशेष धन रखने की अनुमति देती है।
2. रेपो संक्रिया बैंकिंग प्रणाली में चलनिधि डालती है, जबकि रिवर्स रेपो उसे सोखती है।
3. परिवर्तनीय दर रेपो और परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो नीलामियाँ विभिन्न अवधियों पर चलनिधि के सूक्ष्म समायोजन के लिए प्रयुक्त होती हैं।
4. MSF दर रेपो दर से नीचे रखी जाती है ताकि बैंक RBI से उधार लेने को प्रोत्साहित हों।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) चलनिधि उपकरण: बैंकों में प्रतिदिन चलनिधि अधिशेष या कमी होती है; RBI भारित औसत कॉल दर को रेपो के निकट रखता है। स्थायी सुविधाएँ: SDF (निचली सीमा, बिना जमानत, अप्रैल 2022 में स्थायी दर रिवर्स रेपो का स्थान लेकर निचली सीमा बनी) और MSF (ऊपरी सीमा, रेपो + 25 आधार अंक पर, सरकारी प्रतिभूतियों की जमानत, SLR होल्डिंग सहित)। मुख्य संक्रियाएँ: स्थिर दर रेपो, 7/14/28 दिन की अवधि पर चलनिधि डालने हेतु परिवर्तनीय दर रेपो (VRR), सोखने हेतु परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR), स्थायी चलनिधि हेतु OMO खरीद/बिक्री, डॉलर खरीद-बिक्री स्वैप और CRR परिवर्तन। चलनिधि अधिशेष में SDF दर प्रभावी निचली सीमा बनती है और कॉल दर रेपो से नीचे रहती है; कमी में कॉल दर MSF की ओर बढ़ती है। कथन 4 गलत है: MSF रेपो से ऊपर (रेपो + 25 आधार अंक) है क्योंकि यह अंतिम आश्रय खिड़की है जिसे महँगा होना चाहिए।
7. भारत में विदेशी मुद्रा व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रुपया अगस्त 1994 से चालू खाते पर पूर्णतः परिवर्तनीय है, जब भारत ने IMF समझौते के अनुच्छेद VIII को स्वीकार किया।
2. भारत में पूँजी खाता परिवर्तनीयता आंशिक है।
3. विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 ने विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 का स्थान लिया।
4. पूँजी खाता परिवर्तनीयता पर तारापोर समिति का गठन 1997 में हुआ।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) विदेशी मुद्रा व्यवस्था: 1991 के भुगतान संतुलन संकट के बाद भारत ने उदारीकृत विनिमय दर प्रबंधन प्रणाली (LERMS, 1992, द्वैत दर) लागू की और मार्च 1993 में दर एकीकृत कर बाज़ार-निर्धारित दरें अपनाईं; अगस्त 1994 में IMF अनुच्छेद VIII दायित्व (चालू खाता परिवर्तनीयता) स्वीकार किए। FERA 1973 (प्रतिबंधात्मक, आपराधिक प्रकृति) का स्थान FEMA 1999 (दीवानी प्रकृति, 1 जून 2000 से प्रभावी) ने लिया, जो विदेशी मुद्रा का 'नियमन' नहीं 'प्रबंधन' करता है। तारापोर समिति (1997, एस.एस. तारापोर) ने पूर्ण पूँजी खाता परिवर्तनीयता की पूर्व शर्तें (GDP का 3.5% राजकोषीय घाटा, 3-5% मुद्रास्फीति, NPA में कमी, CRR कटौती) बताईं; 2006 की दूसरी समिति ने रूपरेखा दोहराई। पूँजी खाता आंशिक रूप से खुला है: FDI अधिकांशतः स्वचालित, FPI सीमाएँ, ECB मानदंड, ODI और प्रति निवासी व्यक्ति प्रति वर्ष 2,50,000 अमेरिकी डॉलर की LRS सीमा। चारों कथन सही हैं।
8. भारत में सरकारी प्रतिभूतियों (G-sec) और बॉन्ड प्रतिफल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बॉन्ड की कीमत और उसका प्रतिफल विपरीत दिशाओं में चलते हैं।
2. राज्य विकास ऋण (SDL) राज्य सरकारों द्वारा जारी दिनांकित प्रतिभूतियाँ हैं।
3. ट्रेज़री बिल अंकित मूल्य पर बट्टे से जारी होते हैं और सममूल्य पर मोचित होते हैं।
4. सरकारी प्रतिभूतियों में समान अवधि के कॉर्पोरेट बॉन्ड जितना ही ऋण चूक जोखिम होता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) G-sec: दिनांकित G-sec (परिपक्वता 5 से 40 वर्ष, स्थिर या अस्थिर कूपन) और T-बिल RBI केंद्र सरकार की ओर से नीलामी द्वारा जारी करता है; राज्य विकास ऋण (SDL) राज्य। बॉन्ड कीमत और प्रतिफल में विपरीत संबंध है: प्रतिफल बढ़ने पर (जैसे रेपो वृद्धि के बाद) कम कूपन वाले मौजूदा बॉन्ड की कीमत गिरती है। घरेलू मुद्रा में संप्रभु प्रतिभूतियों को चूक (ऋण) जोखिम से मुक्त माना जाता है क्योंकि सरकार मुद्रा छाप/कर लगा सकती है, यद्यपि उनमें ब्याज दर जोखिम है; ऋण जोखिम वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड G-sec प्रतिफल पर 'स्प्रेड' देते हैं; अतः कथन 4 गलत है। 10-वर्षीय G-sec प्रतिफल बेंचमार्क है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को पूर्णतः सुलभ मार्ग (FAR) बॉन्ड तक पहुँच दी गई, जिससे जून 2024 से भारतीय G-sec JP मॉर्गन के GBI-EM ग्लोबल सूचकांक में शामिल हुए। 'प्रतिफल वक्र' प्रतिफल को परिपक्वता से जोड़ता है; उलटा वक्र कम दरों/मंदी की अपेक्षा दर्शाता है।
9. एक अर्थव्यवस्था में मुद्रा-जमा अनुपात 0.2 और आरक्षित-जमा अनुपात 0.1 है। यदि केंद्रीय बैंक आरक्षित मुद्रा में 100 करोड़ रुपये की वृद्धि करता है, तो (सरल मुद्रा गुणक के अनुसार) मुद्रा आपूर्ति में कितनी वृद्धि होगी?
✅ सही उत्तर: (A) मुद्रा गुणक: मुद्रा आपूर्ति M = मुद्रा + जमाएँ; आरक्षित मुद्रा H = मुद्रा + आरक्षित निधियाँ। c = मुद्रा/जमा = 0.2 और r = आरक्षित/जमा = 0.1 पर: M/H = (c + 1)/(c + r) = 1.2/0.3 = 4। अतः H में 100 करोड़ की वृद्धि से M में 4 x 100 = 400 करोड़ रुपये की वृद्धि। '1,000 करोड़' का विकल्प 1/r (10) लेता है और नकदी रिसाव को अनदेखा करता है, जो केवल c = 0 पर वैध है; गुणक इसलिए छोटा है क्योंकि जनता कुछ धन नकद रखती है जो पुनः उधार नहीं दिया जाता। RBI गुणक को परोक्ष रूप से CRR (जो r बढ़ाता है) और नकदी के प्रति जन-वरीयता (c) से प्रभावित करता है। ऊँचा CRR गुणक घटाता है, यानी संकुचनकारी।
10. निम्नलिखित में से कौन-से RBI द्वारा प्रयुक्त मौद्रिक नियंत्रण के गुणात्मक (चयनात्मक) उपकरण हैं?
1. प्रतिभूतियों के बदले ऋण पर मार्जिन आवश्यकताएँ
2. नैतिक दबाव (moral suasion)
3. चयनात्मक ऋण नियंत्रण
4. नकद आरक्षित अनुपात
5. खुले बाज़ार के संचालन
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (B) मात्रात्मक बनाम गुणात्मक: मात्रात्मक (सामान्य) उपकरण अर्थव्यवस्था में ऋण/मुद्रा की कुल मात्रा नियंत्रित करते हैं: CRR, SLR, रेपो/रिवर्स रेपो तथा LAF/MSF/SDF, बैंक दर, OMO, MSS। गुणात्मक (चयनात्मक) उपकरण ऋण की दिशा या उपयोग नियंत्रित करते हैं: मार्जिन आवश्यकताएँ (जमानत पर कटौती, जैसे शेयरों या जिंसों के बदले), चयनात्मक ऋण नियंत्रण (संवेदनशील जिंसों जैसे विशेष क्षेत्रों को ऋण पर रोक), ऋण राशनिंग, नैतिक दबाव (पत्रों, बैठकों से मनाना), प्रत्यक्ष कार्रवाई और प्रचार। अतः 1, 2 और 3 गुणात्मक हैं; CRR और OMO मात्रात्मक हैं। चयनात्मक उपकरण तब प्रयुक्त होते हैं जब सामान्य उपकरण उन क्षेत्रों को चोट पहुँचाएँ जो समस्या का स्रोत नहीं हैं।
11. भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI अधिनियम, 1934 के अंतर्गत हुई।
2. हिल्टन यंग आयोग (1926) ने भारत के लिए केंद्रीय बैंक की स्थापना की सिफारिश की।
3. इसका राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को हुआ।
4. सी.डी. देशमुख RBI के पहले गवर्नर थे।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) RBI का इतिहास: भारतीय मुद्रा एवं वित्त पर रॉयल आयोग (हिल्टन यंग आयोग, 1926) ने केंद्रीय बैंक की सिफारिश की, जिससे RBI अधिनियम 1934 बना; RBI ने 1 अप्रैल 1935 को कार्य शुरू किया (आरंभ में मुख्यालय कलकत्ता, 1937 में मुंबई स्थानांतरित), आरंभ में अंशधारकों का बैंक था, और 1 जनवरी 1949 को राष्ट्रीयकृत हुआ। पहले गवर्नर सर ऑस्बोर्न स्मिथ (1935-37) थे; सी.डी. देशमुख (1943-49) पहले भारतीय गवर्नर थे, इसलिए कथन 4 गलत है। कार्य: नोट निर्गमन (एक रुपये के नोट और सिक्कों को छोड़कर, जो सरकार जारी करती है), सरकार व बैंकों का बैंकर, बैंकों व भुगतान प्रणालियों का नियामक, विदेशी मुद्रा प्रबंधक (FEMA 1999) और मौद्रिक प्राधिकरण। गवर्नर की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है; केंद्रीय बोर्ड में गवर्नर, अधिकतम चार डिप्टी गवर्नर और अन्य निदेशक होते हैं।
12. भारत में लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुद्रास्फीति लक्ष्य केंद्र सरकार द्वारा RBI के परामर्श से प्रत्येक पाँच वर्ष में अधिसूचित किया जाता है।
2. लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त) के रूप में परिभाषित है।
3. लक्ष्य 4 प्रतिशत है, जिसमें धन-ऋण 2 प्रतिशत अंक की सहनीय सीमा है।
4. यदि मुद्रास्फीति एक तिमाही के लिए भी ऊपरी सीमा से अधिक हो जाए तो RBI को विफल माना जाता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण: RBI अधिनियम (धारा 45ZA) के अनुसार केंद्र RBI के परामर्श से प्रत्येक पाँच वर्ष में लक्ष्य अधिसूचित करता है; पहली अधिसूचना (अगस्त 2016, 2016-21) में CPI-संयुक्त पर 4% और 2-6% की सीमा तय हुई, जो 2021-26 के लिए भी जारी रही। विफलता की शर्त (धारा 45ZN) एक तिमाही नहीं है: यदि औसत मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक ऊपरी सीमा (6%) से अधिक या निचली सीमा (2%) से कम रहे तो RBI विफल माना जाता है, और उसे सरकार को कारण, उपचारात्मक कदम और लक्ष्य तक लौटने का समय बताते हुए रिपोर्ट भेजनी होती है। 2016 से पहले RBI बहु-संकेतक दृष्टिकोण अपनाता था (उर्जित पटेल समिति 2014)। सितंबर 2026 में CPI मुद्रास्फीति लगभग 5.54% रही, जो 2-6% की सीमा के भीतर पर 4% के मध्य-बिंदु से ऊपर है। [अप्रैल 2026 से शुरू अवधि की लक्ष्य अधिसूचना rbi.org.in / राजपत्र पर दोबारा जाँचें।]
13. सूची-I (समिति) को सूची-II (विषय) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. चक्रवर्ती समिति (1985) B. तारापोर समिति (1997) C. उर्जित पटेल समिति (2014) D. नचिकेत मोर समिति (2013)
सूची-II: 1. मौद्रिक प्रणाली की समीक्षा, प्रतिक्रिया सहित मौद्रिक लक्ष्यीकरण का पक्ष 2. पूँजी खाता परिवर्तनीयता 3. संशोधित मौद्रिक नीति ढाँचा, जिसमें CPI नाममात्र आधार और MPC हो 4. छोटे व्यवसायों और निम्न-आय परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवाएँ
✅ सही उत्तर: (D) समितियाँ: चक्रवर्ती समिति (मौद्रिक प्रणाली की कार्यप्रणाली समीक्षा समिति, 1985, सुखमय चक्रवर्ती): प्रतिक्रिया सहित मौद्रिक लक्ष्यीकरण (अपेक्षित वास्तविक वृद्धि और स्वीकार्य मुद्रास्फीति पर आधारित मुद्रा आपूर्ति वृद्धि) और लचीली दरों वाले सरकारी प्रतिभूति बाज़ार की सिफारिश। तारापोर समिति (1997, 2006): पूँजी खाता परिवर्तनीयता की रूपरेखा। उर्जित पटेल समिति (मौद्रिक नीति ढाँचे के संशोधन व सुदृढ़ीकरण की विशेषज्ञ समिति, 2014): नई CPI को नाममात्र आधार बनाकर लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण, 2018 तक 4% (±2% सीमा) का मार्ग और छह-सदस्यीय MPC का गठन - जिसे 2016 में कानून बनाया गया। नचिकेत मोर समिति (2013): वित्तीय समावेशन - भुगतान बैंक, लघु वित्त बैंक, सार्वभौमिक बैंक खाता और आधार-संबद्ध समावेशन। अन्य: नरसिंहम I और II (बैंकिंग), रघुराम राजन समिति (वित्तीय क्षेत्र सुधार, 2008), वाई.एच. मालेगाम समिति (सूक्ष्म वित्त, 2011)। सही कूट: A-1, B-2, C-3, D-4।
14. मौद्रिक नीति समिति की पारदर्शिता और जवाबदेही व्यवस्थाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. MPC बैठक का कार्यवृत्त बैठक के 14वें दिन प्रकाशित किया जाता है।
2. RBI प्रत्येक छह माह में एक मौद्रिक नीति रिपोर्ट प्रकाशित करता है जो मुद्रास्फीति के स्रोत और पूर्वानुमान बताती है।
3. MPC को वर्ष में कम से कम चार बैठकें करना आवश्यक है।
4. MPC का निर्णय भारत सरकार पर बाध्यकारी है और उस पर संसद में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) MPC की पारदर्शिता: RBI अधिनियम धारा 45ZL: प्रत्येक बैठक के चौदहवें दिन कार्यवृत्त प्रकाशित होता है (संकल्प, प्रत्येक सदस्य का मत व वक्तव्य); धारा 45ZM: RBI प्रत्येक छह माह में मौद्रिक नीति रिपोर्ट प्रकाशित करता है जिसमें मुद्रास्फीति के स्रोत और 6-18 माह आगे का पूर्वानुमान होता है; MPC को वर्ष में कम से कम चार बैठकें करनी हैं (व्यवहार में छह, कार्यक्रम पहले से घोषित)। जवाबदेही लक्ष्य-विफलता खंड (धारा 45ZN), सरकार को RBI की रिपोर्ट और लक्ष्य अधिसूचित करने की सरकार की शक्ति से चलती है - सरकार पर MPC के निर्णय बाध्यकारी होने से नहीं। MPC के रेपो निर्णय RBI के परिचालन पर बाध्यकारी हैं, सरकार पर नहीं, और RBI का शासन वित्त मंत्रालय के माध्यम से संसद के प्रति जवाबदेह रहता है; कथन 4 का दावा अधिनियम में नहीं है।
15. RBI के विदेशी मुद्रा बाज़ार संक्रियाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब RBI बाज़ार से विदेशी मुद्रा खरीदता है, तो प्रणाली में रुपया चलनिधि बढ़ती है।
2. बंध्याकरण (sterilisation) में OMO बिक्री या MSS जैसे उपकरणों से विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप के मौद्रिक प्रभाव को निष्प्रभावी किया जाता है।
3. विदेशी मुद्रा की अबंध्यकृत खरीद मुद्रा आपूर्ति बढ़ाती है और मुद्रास्फीति दबाव बढ़ा सकती है।
4. भारत स्थिर विनिमय दर व्यवस्था अपनाता है जिसमें रुपया अमेरिकी डॉलर से बँधा है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप: भारत बाज़ार-निर्धारित, प्रबंधित अस्थिर (managed float) विनिमय दर व्यवस्था अपनाता है: RBI कोई स्तर लक्षित नहीं करता, पर अत्यधिक अस्थिरता रोकने हेतु हाज़िर, वायदा और स्वैप में हस्तक्षेप करता है, अतः कथन 4 गलत है (ब्रेटन वुड्स काल में 1971-75 तक रुपया पाउंड/डॉलर से बँधा था, फिर बास्केट-संबद्ध और बाद में प्रबंधित अस्थिर; 1993 में दरों के एकीकरण और 1994 में IMF अनुच्छेद VIII के अंतर्गत चालू खाता परिवर्तनीयता के बाद बाज़ार-निर्धारित)। डॉलर खरीदने पर RBI रुपये देता है, इसलिए रुपया चलनिधि और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ते हैं; अबंध्यकृत होने पर आरक्षित मुद्रा और मुद्रा आपूर्ति बढ़ती है। बंध्याकरण (मुद्रास्फीति से बचाव): सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचना (OMO), MSS बिल जारी करना, रिवर्स रेपो/VRRR का प्रयोग, या CRR बढ़ाना। रुपये की रक्षा में डॉलर बेचने पर उलटा होता है: रुपया चलनिधि घटती है। 'असंभव त्रिमूर्ति' (मंडेल-फ्लेमिंग): कोई देश स्थिर विनिमय दर, मुक्त पूँजी गतिशीलता और स्वतंत्र मौद्रिक नीति एक साथ नहीं रख सकता।
16. भारत में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डिजिटल रुपया भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी विधिक मुद्रा (legal tender) है।
2. थोक खंड का पायलट नवंबर 2022 में और खुदरा खंड का दिसंबर 2022 में शुरू हुआ।
3. CBDC संप्रभु मुद्रा का डिजिटल रूप है, जबकि क्रिप्टोकरेंसी निजी रूप से जारी होती हैं।
4. डिजिटल रुपया बैंक जमा की तरह धारकों को ब्याज देता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) ई-रुपया (e₹): बजट 2022-23 में घोषित (2022-23 में ब्लॉकचेन आदि प्रौद्योगिकी से डिजिटल रुपया) और वित्त अधिनियम 2022 द्वारा RBI अधिनियम संशोधन से सक्षम ('बैंक नोट' में अब डिजिटल रूप शामिल)। e₹-W (थोक) पायलट 1 नवंबर 2022 को सरकारी प्रतिभूतियों के अंतर-बैंक निपटान हेतु शुरू; e₹-R (खुदरा) पायलट 1 दिसंबर 2022 को चुनिंदा शहरों में। विशेषताएँ: संप्रभु, केंद्रीय बैंक की देयता, नकद के साथ एक-से-एक विनिमेय, टोकन/वॉलेट-आधारित, ऑफ़लाइन कार्यक्षमता का पायलट, और ब्याज-रहित क्योंकि यह भौतिक नकद का विकल्प है - अतः कथन 4 गलत है। क्रिप्टोकरेंसी निजी, अस्थिर और विधिक मुद्रा नहीं हैं; सरकार क्रिप्टो लाभ पर 30% कर (धारा 115BBH) और 1% TDS लेती है, पर उन्हें विनियमित या प्रतिबंधित नहीं किया है। RBI के उद्देश्य: मुद्रा प्रबंधन लागत घटाना, भुगतान दक्षता, सीमा-पार निपटान।
17. फिलिप्स वक्र और बलिदान अनुपात (sacrifice ratio) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल्पकालिक फिलिप्स वक्र मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी के बीच विपरीत संबंध दर्शाता है।
2. 1970 के दशक की स्टैगफ्लेशन ने मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी के बीच स्थिर दीर्घकालिक विनिमय के पक्ष को कमज़ोर किया।
3. मिल्टन फ्रीडमैन और एडमंड फेल्प्स ने तर्क दिया कि दीर्घकालिक फिलिप्स वक्र बेरोज़गारी की प्राकृतिक दर पर ऊर्ध्वाधर है।
4. बलिदान अनुपात मुद्रास्फीति में प्रत्येक प्रतिशत अंक की कमी के लिए खोए उत्पादन का प्रतिशत मापता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) फिलिप्स वक्र: ए.डब्ल्यू. फिलिप्स (1958) ने ब्रिटेन में मज़दूरी मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी में विपरीत संबंध पाया; सैम्युलसन और सोलो ने इसे कीमत मुद्रास्फीति तक बढ़ाया। नीति-निर्माताओं ने मुद्रास्फीति-बेरोज़गारी संयोजनों का 'मेनू' देखा। 1970 के तेल झटकों ने ऊँची मुद्रास्फीति और ऊँची बेरोज़गारी साथ-साथ (स्टैगफ्लेशन) पैदा की, और फ्रीडमैन (1968) तथा फेल्प्स ने तर्क दिया कि अनुकूली अपेक्षाओं के साथ दीर्घकाल में यह विनिमय समाप्त हो जाता है: दीर्घकालिक फिलिप्स वक्र बेरोज़गारी की प्राकृतिक दर (NAIRU) पर ऊर्ध्वाधर है, अतः विस्तार केवल मुद्रास्फीति बढ़ाता है। बलिदान अनुपात = वार्षिक उत्पादन में खोए प्रतिशत अंक / मुद्रास्फीति में प्रतिशत अंक की कमी; केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता और स्थिर अपेक्षाओं में यह कम होता है - मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का पक्ष। तर्कसंगत अपेक्षाएँ (लुकास) कहती हैं कि प्रत्याशित नीति अल्पकाल में भी अप्रभावी है। भारत में खाद्य आपूर्ति झटकों, बड़े अनौपचारिक रोज़गार (साफ़ बेरोज़गारी माप नहीं) और उत्पादन अंतराल की भूमिका से यह विनिमय जटिल है। चारों कथन सही हैं।
18. सूची-I (मौद्रिक उपकरण) को सूची-II (विशेषता) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
सूची-I: A. नकद आरक्षित अनुपात B. सांविधिक चलनिधि अनुपात C. खुले बाज़ार के संचालन D. बाज़ार स्थिरीकरण योजना
सूची-II: 1. NDTL का वह हिस्सा जो RBI के पास बिना ब्याज नकद रखा जाता है 2. NDTL का वह हिस्सा जो बैंक स्वयं सोना, नकद या अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखते हैं 3. RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों की प्रत्यक्ष खरीद या बिक्री 4. अधिशेष चलनिधि सोखने हेतु सरकारी प्रतिभूतियाँ/T-बिल जारी करना, जिनकी आय अलग खाते में रखी जाती है
✅ सही उत्तर: (C) मात्रात्मक उपकरण: CRR (RBI अधिनियम धारा 42): बैंक निवल माँग एवं मियादी देयताओं (NDTL) का निर्धारित हिस्सा RBI के पास शेष के रूप में रखते हैं, ब्याज नहीं मिलता; 3% की सांविधिक निचली सीमा 2006 में हटाई गई, अतः RBI कोई भी दर तय कर सकता है। SLR (बैंकिंग विनियमन अधिनियम धारा 24): बैंक NDTL का हिस्सा नकद, सोना या अभारित अनुमोदित प्रतिभूतियों में स्वयं रखते हैं; सांविधिक ऊपरी सीमा 40%। OMO: RBI द्वारा G-sec की प्रत्यक्ष बिक्री/खरीद से स्थायी चलनिधि घटाना/बढ़ाना (बिक्री = संकुचनकारी)। MSS (2004): पूँजी प्रवाह के बंध्याकरण हेतु सरकार T-बिल और दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी करती है, आय अलग अव्ययनीय खाते में रखी जाती है - सरकार और RBI का संयुक्त बंध्याकरण उपकरण। गुणात्मक उपकरणों की तुलना: मार्जिन आवश्यकताएँ, चयनात्मक ऋण नियंत्रण, नैतिक दबाव। सही कूट: A-1, B-2, C-3, D-4।
19. रेपो दर में वृद्धि के बाद मौद्रिक नीति संचरण तंत्र के निम्नलिखित चरणों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
A. MPC नीतिगत रेपो दर बढ़ाती है
B. बैंकों की रेपो-संबद्ध और MCLR-आधारित उधार दरें बढ़ती हैं
C. उपभोग और निवेश हेतु उधार महँगा होता है और ऋण माँग कमज़ोर पड़ती है
D. समग्र माँग धीमी पड़ती है और मुद्रास्फीति दबाव घटता है
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (B) संचरण: (1) नीतिगत संकेत: रेपो बढ़ता है। (2) मुद्रा-बाज़ार व बॉन्ड प्रतिफल तथा बैंक जमा/उधार दरें समायोजित होती हैं। अक्टूबर 2019 से सभी नए अस्थिर-दर खुदरा व MSME ऋण बाह्य बेंचमार्क (अधिकांश बैंकों में रेपो दर, EBLR) से जुड़ने चाहिए, इसलिए रेपो परिवर्तन MCLR की तुलना में उधारकर्ताओं तक बहुत तेज़ पहुँचते हैं; पुराने ऋणों में MCLR से धीमा संचरण होता है। (3) महँगा ऋण उपभोग और निवेश माँग घटाता है। (4) कम समग्र माँग माँग-जनित मुद्रास्फीति घटाती है; साथ में विनिमय दर व परिसंपत्ति कीमत माध्यम भी काम करते हैं (ऊँची दरें पूँजी खींचती हैं, रुपया मज़बूत होता है, आयात सस्ता होता है)। विलंब सामान्यतः 2-4 तिमाही का होता है और खाद्य/ईंधन आपूर्ति झटके, जिन्हें मौद्रिक नीति ठीक नहीं कर सकती, इसीलिए MPC उन्हें तब तक नज़रअंदाज़ करती है जब तक वे मूल मुद्रास्फीति और अपेक्षाओं में न फैलें।
20. सितंबर 2026 में भारत की CPI खुदरा मुद्रास्फीति लगभग 5.54 प्रतिशत रही, जो अगस्त 2026 के लगभग 4.8 प्रतिशत से अधिक है, और खाद्य मुद्रास्फीति लगभग 7.7 प्रतिशत थी। निम्नलिखित में से सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष कौन-सा है?
✅ सही उत्तर: (C) मुद्रास्फीति आँकड़ा पढ़ना: सहनीय सीमा 2-6% है; 5.54% इसके भीतर है (विफलता नहीं, और विफलता के लिए वैसे भी लगातार तीन तिमाहियाँ सीमा के बाहर चाहिए) पर 4% लक्ष्य से काफी ऊपर है। खाद्य मुद्रास्फीति लगभग 7.7% और CPI टोकरी में खाद्य का भार बड़ा (2012 की श्रृंखला में लगभग 46%; नई श्रृंखला में भार संशोधित) होने से वृद्धि खाद्य-प्रेरित है, और आपूर्ति-जनित खाद्य उछाल (प्याज, सब्ज़ियाँ) आंशिक रूप से अस्थायी होते हैं, इसीलिए MPC समग्र और मूल (खाद्य-ईंधन रहित) मुद्रास्फीति में अंतर करती है। फिर भी अक्टूबर 2026 में MPC ने द्वितीयक प्रभावों, तेल और कमज़ोर मानसून के जोखिमों का हवाला देकर कसाव किया। याद रखें: CPI में लासपेयर टोकरी (आधार वर्ष के निश्चित भार) है, WPI थोक कीमतें (आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT) मापता है और GDP अपस्फीतक अधिक व्यापक है। [स्रोत: 12 अक्टूबर 2026 की MoSPI CPI विज्ञप्ति (रिपोर्ट के अनुसार); mospi.gov.in पर दोबारा जाँचें।]
21. एक सरल मात्रा-सिद्धांत अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति M = 500, परिसंचरण वेग V = 4 और वास्तविक उत्पादन Y = 1,000 है। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कीमत स्तर P = 2 है।
2. यदि V और Y अपरिवर्तित रहने पर मुद्रा आपूर्ति दोगुनी होकर 1,000 हो जाए, तो कीमत स्तर दोगुना होकर 4 हो जाता है।
3. विनिमय समीकरण MV = PY है।
4. कठोर मात्रा सिद्धांत के अनुसार, मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि वास्तविक उत्पादन बढ़ाती है और दीर्घकाल में कीमत स्तर अपरिवर्तित छोड़ती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) मात्रा सिद्धांत: इरविंग फिशर का विनिमय समीकरण: MV = PT (या MV = PY, Y वास्तविक उत्पादन)। P = MV/Y = (500 x 4)/1,000 = 2। V और Y स्थिर रहने पर M दोगुना करने से P = (1,000 x 4)/1,000 = 4। शास्त्रीय/मौद्रिकवादी निष्कर्ष (मिल्टन फ्रीडमैन: 'मुद्रास्फीति सदैव और सर्वत्र मौद्रिक परिघटना है') है कि दीर्घकाल में मुद्रा तटस्थ है: M में परिवर्तन P को अनुपात में बदलता है और वास्तविक उत्पादन अपरिवर्तित रहता है - अतः कथन 4 सिद्धांत को उलट देता है। कैम्ब्रिज संस्करण (मार्शल, पीगू): M = kPY, जहाँ k = 1/V वांछित नकद शेष का अंश है। कीन्सवादी मानते हैं कि V अस्थिर है और सुस्त अर्थव्यवस्था में M बढ़ने से Y बढ़ सकता है; भारत में डिजिटल भुगतान से वेग में बदलाव और खाद्य कीमतों के आपूर्ति झटकों से मुद्रा वृद्धि और मुद्रास्फीति का संबंध ढीला है, इसीलिए RBI सीधे मुद्रास्फीति को लक्षित करता है।
22. भारत में मुद्रा बाज़ार के लिखतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ट्रेज़री बिल 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन की परिपक्वता वाली अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियाँ हैं।
2. वाणिज्यिक पत्र (Commercial Paper) कॉर्पोरेट द्वारा जारी बिना जमानत का मुद्रा बाज़ार लिखत है जिसकी परिपक्वता 7 दिन से एक वर्ष तक है।
3. जमा प्रमाणपत्र (Certificates of Deposit) अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और कुछ वित्तीय संस्थाओं द्वारा जारी किए जाते हैं।
4. कॉल मनी 15 दिन से एक वर्ष की अवधि के लिए उधार लेना-देना है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) मुद्रा बाज़ार: मुद्रा बाज़ार में एक वर्ष तक की अवधि का धन लेन-देन होता है। कॉल मनी: रातोंरात; नोटिस मनी: 2 से 14 दिन; मियादी मनी: 15 दिन से एक वर्ष - अतः कथन 4 का वर्णन मियादी मनी का है, कॉल मनी का नहीं। T-बिल (शून्य कूपन, बट्टे पर जारी, सममूल्य पर मोचन; सरकार का अल्पकालिक उधार; 91/182/364 दिन; और छोटी आवश्यकताओं हेतु नकद प्रबंधन बिल)। वाणिज्यिक पत्र: उच्च रेटिंग वाले कॉर्पोरेट, प्राथमिक डीलर और वित्तीय संस्थाओं के बिना जमानत के वचन-पत्र (7 दिन से 1 वर्ष)। जमा प्रमाणपत्र: बैंकों द्वारा जारी परक्राम्य मियादी जमा लिखत (7 दिन से 1 वर्ष) और चुनिंदा अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं द्वारा (1 से 3 वर्ष)। अन्य: रेपो/रिवर्स रेपो, संपार्श्विक उधार एवं ऋण दायित्व (CBLO/TREPS, CCIL द्वारा संचालित)। पूँजी बाज़ार दीर्घकालिक प्रतिभूतियों (इक्विटी, डिबेंचर, एक वर्ष से अधिक की G-sec) का लेन-देन करता है।
23. भारत में मुद्रा निर्गम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 2 रुपये और उससे अधिक मूल्यवर्ग के बैंक नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार भारतीय रिज़र्व बैंक को है।
2. एक रुपये के नोट और सभी सिक्के भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं।
3. RBI न्यूनतम आरक्षित प्रणाली अपनाता है, जिसके अंतर्गत नोट निर्गम के समर्थन में उसे 200 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखनी होती हैं, जिनमें सोना कम से कम 115 करोड़ रुपये हो।
4. एक रुपये के नोट पर RBI के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) मुद्रा निर्गम: RBI अधिनियम 1934 की धारा 22 के अंतर्गत बैंक नोट (2 रुपये और अधिक) जारी करने का एकमात्र अधिकार RBI को है। एक रुपये के नोट और सिक्के सरकार जारी करती है (सिक्का निर्माण अधिनियम 2011; एक रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं, जबकि अन्य नोटों पर गवर्नर के हस्ताक्षर और 'मैं धारक को... अदा करने का वचन देता हूँ' खंड होता है, जो RBI की देयता है)। समर्थन प्रणाली: न्यूनतम आरक्षित प्रणाली (1957 से) के अनुसार जारी नोटों की किसी भी मात्रा के बदले RBI को 200 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखनी हैं - कम से कम 115 करोड़ रुपये सोना और 85 करोड़ रुपये विदेशी प्रतिभूतियाँ; इससे पहले (1934-1956) आनुपातिक आरक्षित प्रणाली थी। नोट नासिक और देवास (सिक्योरिटी प्रिंटिंग कॉर्पोरेशन/बैंक नोट प्रेस) तथा भारतीय रिज़र्व बैंक नोट मुद्रण (मैसूरु और सालबोनी) में छपते हैं; सिक्के मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और नोएडा में ढलते हैं। भंडार मुद्रा तिजोरियों (currency chests) में रहता है। कथन 4 गलत है (एक रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं)।
24. RBI द्वारा रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाने के परिणामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल सामान्यतः बढ़ते हैं और बॉन्ड कीमतें घटती हैं।
2. EBLR से जुड़े अस्थिर-दर आवास ऋण लगभग तुरंत महँगे हो जाते हैं।
3. बैंकों की जमा दरें विलंब से बढ़ने की प्रवृत्ति रखती हैं।
4. रुपया कमज़ोर होने की प्रवृत्ति रखता है क्योंकि अन्य बातें समान रहने पर ऊँची दरें भारतीय परिसंपत्तियों का विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण घटाती हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) दर वृद्धि के प्रभाव: (1) बॉन्ड बाज़ार: रेपो वृद्धि नए बॉन्ड का प्रतिफल बढ़ाती और मौजूदा की कीमत घटाती है (विपरीत संबंध); (2) ऋण: EBLR से जुड़े ऋण अगले रीसेट पर लगभग तुरंत, MCLR से जुड़े विलंब से महँगे होते हैं; (3) जमा: बैंक जमा दरें विलंब से बढ़ाते हैं, जिससे बचतकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों को लाभ होता है; (4) विनिमय दर: अन्य बातें समान रहने पर ऊँची घरेलू ब्याज दर ब्याज अंतर बढ़ाकर पोर्टफोलियो पूँजी खींचती है, जिससे रुपया मज़बूत होता है, कमज़ोर नहीं (अनावृत ब्याज समता का तर्क), अतः कथन 4 गलत है। अन्य प्रभाव: ऋण वृद्धि में कमी, उपभोग/निवेश माँग में कमज़ोरी, मुद्रास्फीति में कमी, सरकार की अपनी उधार लागत में वृद्धि (ऊँचे G-sec प्रतिफल), NBFC/आवास क्षेत्रों पर दबाव। अक्टूबर 2026 में रेपो 25 आधार अंक बढ़कर 5.50% हुआ - इसलिए प्रथम तीन प्रभाव उसी तिथि से शुरू हुए।
25. RBI का चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) गलियारा नीतिगत रेपो दर के आसपास सममित है। यदि नीतिगत रेपो दर 5.50 प्रतिशत है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा समूह सही है?
✅ सही उत्तर: (C) LAF गलियारा: अप्रैल 2022 से गलियारा है: स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर = रेपो - 25 आधार अंक (निचली सीमा, जो बिना जमानत अधिशेष चलनिधि सोखती है), रेपो (सरकारी प्रतिभूतियों के बदले चलनिधि देता है), और सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) = रेपो + 25 आधार अंक (ऊपरी सीमा, जहाँ बैंक अपनी SLR प्रतिभूतियों में से NDTL की निर्धारित सीमा तक रातोंरात उधार ले सकते हैं)। बैंक दर MSF के समान रखी जाती है (CRR/SLR की कमी पर दंडात्मक दर और कुछ कर-विधिक ब्याज दरों का संदर्भ)। रेपो 5.50% पर: SDF 5.25%, MSF 5.75%, बैंक दर 5.75% - अक्टूबर 2026 की नीति के बाद यही व्यवस्था है, जब रेपो 5.25% से 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% किया गया। स्थायी दर रिवर्स रेपो (FRRR) अलग उपकरण के रूप में RBI के विवेक पर रहता है पर वह निचली सीमा नहीं; निचली सीमा SDF है। [अक्टूबर 2026 की दरें rbi.org.in पर दोबारा जाँचें।]