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टॉपिक 04 – मुद्रास्फीति और GST

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1. कराधान पर संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 265 कहता है कि कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर न लगाया जाएगा, न वसूला जाएगा। 2. अनुच्छेद 246A संसद और राज्य विधानमंडलों को GST पर कानून बनाने की समवर्ती शक्ति देता है, और अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर संसद की अनन्य शक्ति है। 3. अनुच्छेद 269A कहता है कि अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर GST भारत सरकार द्वारा लगाया और वसूला जाता है तथा संघ और राज्यों में बाँटा जाता है। 4. अनुच्छेद 246A संघ सरकार को अंतः-राज्यीय आपूर्ति पर GST लगाने की अनन्य शक्ति देता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) कराधान के संवैधानिक प्रावधान: अनु. 265: कराधान में विधि का शासन। अनु. 246A (101वें संशोधन से): संसद और राज्य विधानमंडल दोनों संघ या राज्य द्वारा लगाए जाने वाले वस्तु एवं सेवा कर पर कानून बना सकते हैं, पर अंतर-राज्यीय वस्तु/सेवा आपूर्ति पर GST पर संसद की अनन्य शक्ति है। अंतः-राज्यीय आपूर्ति पर केंद्र (CGST) और राज्य (SGST) समवर्ती रूप से कर लगाते हैं, अतः कथन 4 गलत है। अनु. 269A: अंतर-राज्यीय व्यापार का GST (IGST) भारत सरकार लगाती और वसूलती है, परिषद की सिफारिश पर संसद के कानून के अनुसार बाँटा जाता है; अनु. 279A: GST परिषद; अनु. 268A (सेवा कर, 2003 में जोड़ा) हटाया गया। अनु. 268, 269, 270, 271 क्रमशः संघ द्वारा लगाए पर राज्यों द्वारा वसूले/विनियोजित शुल्क, अंतर-राज्यीय व्यापार में माल की बिक्री-क्रय पर कर, करों की शुद्ध आय का वितरण और अधिभार से संबंधित हैं। सातवीं अनुसूची: संघ सूची (गैर-कृषि आय पर आयकर, सीमा शुल्क, निगम कर), राज्य सूची (कृषि आय कर, भू-राजस्व, शराब पर उत्पाद शुल्क, स्थानीय निकायों का मनोरंजन कर)।
2. GST के अंतर्गत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ITC सामान्यतः व्यवसाय के क्रम में या उसके विस्तार में प्रयुक्त वस्तुओं और सेवाओं पर उपलब्ध है। 2. निर्दिष्ट अपवादों के साथ, निजी उपयोग के मोटर वाहन, बाह्य खानपान तथा क्लब या स्वास्थ्य केंद्र की सदस्यता पर ITC अवरुद्ध है। 3. पूँजीगत वस्तुओं पर ITC शर्तों के अधीन अन्य आगतों की ही तरह लिया जा सकता है। 4. पूँजीगत वस्तुओं पर ITC किसी भी परिस्थिति में उपलब्ध नहीं है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) ITC: GST का मूल: पंजीकृत करदाता व्यवसाय में प्रयुक्त आगतों (वस्तुएँ, सेवाएँ और पूँजीगत वस्तुएँ) पर चुकाए कर का क्रेडिट शर्तों के अधीन ले सकता है: कर इनवॉइस या डेबिट नोट का कब्ज़ा, वस्तु/सेवा की प्राप्ति, आपूर्तिकर्ता द्वारा सरकार को वास्तव में कर जमा, और रिटर्न दाखिल (GSTR-2B पर मिलान)। अवरुद्ध क्रेडिट (CGST अधिनियम धारा 17(5)): व्यक्तियों के परिवहन हेतु मोटर वाहन (टैक्सी, ड्राइविंग स्कूल जैसे अपवादों सहित), खाद्य एवं पेय, बाह्य खानपान, सौंदर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवाएँ, कॉस्मेटिक व प्लास्टिक सर्जरी, क्लब और स्वास्थ्य/फिटनेस केंद्र की सदस्यता, रेंट-ए-कैब और जीवन/स्वास्थ्य बीमा (कानूनन अनिवार्य न हो तो), संविदा कार्य और अचल संपत्ति का निर्माण (संयंत्र-मशीनरी को छोड़कर), खोई या चोरी वस्तुएँ तथा निःशुल्क नमूने या उपहार। पूँजीगत वस्तुओं पर ITC अनुमत है (कथन 3 सही), पर कर घटक पर आयकर अधिनियम में मूल्यह्रास का दावा हुआ हो तो नहीं। कथन 4 गलत है। अवधारणा: ITC GST को मूल्य-वर्धित कर बनाता है और कर-पर-कर रोकता है।
3. अन्य बातें समान रहने पर GST दरों में कटौती के मूल्य सूचकांकों पर प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपभोक्ता वस्तुओं पर GST दर में कटौती CPI मुद्रास्फीति घटाने की प्रवृत्ति रखती है क्योंकि CPI अप्रत्यक्ष करों सहित कीमतें मापता है। 2. WPI GST दरों में कटौती से सीधे प्रभावित नहीं होता क्योंकि वह अप्रत्यक्ष करों से पहले मापा जाता है। 3. GST दर कटौती WPI मुद्रास्फीति बढ़ाती है क्योंकि उत्पादकों की लागत बढ़ती है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) कर कटौती और सूचकांक: CPI उपभोक्ता द्वारा चुकाई कीमत दर्ज करता है, जिसमें GST शामिल है; इसलिए पैकेज्ड खाद्य, प्रसाधन या उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं पर दर कटौती (संचरण होने पर) मापी गई खुदरा कीमत और इस तरह CPI मुद्रास्फीति घटाती है - सितंबर 2025 के GST युक्तिकरण के बाद मुद्रास्फीति कम रहने का एक कारण। WPI कर-रहित थोक चरण की लेनदेन कीमतें दर्ज करता है, इसलिए GST दर परिवर्तन से काफी हद तक अप्रभावित रहता है; कटौती उत्पादकों की लागत नहीं बढ़ाती (आगत कर घटता है और ITC के साथ कर उत्पादक की लागत नहीं), अतः कथन 3 गलत है। संचरण अपूर्ण होता है: कंपनियाँ कटौती का कुछ हिस्सा रख सकती हैं (CGST अधिनियम धारा 171 में मुनाफाखोरी-विरोधी प्रावधान), और राजस्व हानि की राजकोषीय लागत को माँग प्रोत्साहन से तौलना होता है। अतः केवल 1 और 2 सही हैं।
4. कराधान के सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एडम स्मिथ के कराधान के चार सिद्धांत समता, निश्चितता, सुविधा और मितव्ययिता हैं। 2. प्रगतिशील कर उच्च-आय वालों से आय का अधिक प्रतिशत लेता है। 3. प्रतिगामी कर निम्न-आय वालों से उच्च-आय वालों की तुलना में आय का बड़ा अनुपात लेता है। 4. लैफर वक्र के अनुसार कर दर बढ़ाने पर कर राजस्व सदैव बढ़ता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) कराधान के सिद्धांत: एडम स्मिथ ('द वेल्थ ऑफ नेशंस', 1776): समता (भुगतान क्षमता), निश्चितता (मनमाना नहीं), सुविधा (भुगतान का समय और ढंग), मितव्ययिता (कम संग्रहण लागत)। प्रगतिशील: आय के साथ औसत दर बढ़ती है (आयकर स्लैब); आनुपातिक: स्थिर हिस्सा; प्रतिगामी: आय बढ़ने पर हिस्सा घटता है (आवश्यक वस्तुओं पर GST जैसे अप्रत्यक्ष कर गरीबों पर भारी पड़ते हैं क्योंकि वे आय का बड़ा भाग उपभोग पर खर्च करते हैं)। लाभ सिद्धांत बनाम भुगतान क्षमता सिद्धांत। लैफर वक्र (आर्थर लैफर) दिखाता है कि कर दर 100% की ओर जाने पर राजस्व पहले बढ़ता, फिर घटता है, इसलिए इष्टतम दर होती है; बहुत ऊँची दरों पर परिहार और घटा कार्य-प्रयास राजस्व घटाते हैं - कथन 4 ('सदैव बढ़ता है') गलत है। अन्य शब्द: कर भार (अंततः कौन वहन करे) बनाम कर प्रभाव (पहले कौन चुकाए), कर वंचन (अवैध) बनाम परिहार (कमियों का वैध लाभ), कर उछाल और पिगूवियन कर (बाह्यताएँ सुधारने हेतु, जैसे कार्बन कर)।
5. भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यूज़ीलैंड 1990 में औपचारिक मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण अपनाने वाला पहला देश था। 2. भारत ने फरवरी 2015 में सरकार और RBI के बीच मौद्रिक नीति ढाँचा समझौते के माध्यम से लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण अपनाया। 3. ढाँचे को 2016 में RBI अधिनियम में संशोधन से सांविधिक आधार दिया गया। 4. मुद्रास्फीति लक्ष्य थोक मूल्य सूचकांक के रूप में परिभाषित है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण की समयरेखा: न्यूज़ीलैंड के रिज़र्व बैंक अधिनियम 1989 और 1990 के नीतिगत लक्ष्य समझौते ने उसे पहला मुद्रास्फीति लक्ष्यक बनाया; ब्रिटेन, कनाडा, स्वीडन आदि ने अनुसरण किया। भारत: उर्जित पटेल समिति (2014) -> 20 फरवरी 2015 को हस्ताक्षरित मौद्रिक नीति ढाँचा समझौता (2018 तक 4% लक्ष्य और ±2% सीमा, जनवरी 2016 तक 6% का मार्ग) -> वित्त अधिनियम 2016 ने RBI अधिनियम संशोधित कर सांविधिक MPC (सितंबर 2016) बनाई -> 2016-21 और 2021-26 के लिए लक्ष्य (4% ±2%, CPI-संयुक्त) की अधिसूचना। लक्ष्य CPI (संयुक्त) पर है, WPI पर नहीं, क्योंकि CPI परिवारों की जीवन-निर्वाह लागत दर्शाता है और मुद्रास्फीति अपेक्षाओं के लिए प्रासंगिक है; WPI में सेवाएँ नहीं। कथन 4 गलत है। नाममात्र आधार क्यों: यह अपेक्षाओं को स्थिर करता है, बलिदान अनुपात घटाता है और पारदर्शिता व जवाबदेही देता है।
6. 1 जुलाई 2017 से वस्तु एवं सेवा कर में निम्नलिखित में से कौन-से कर समाहित किए गए? 1. केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर 2. राज्य मूल्य वर्धित कर और चुंगी/प्रवेश कर 3. मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों के अतिरिक्त) और विलासिता कर 4. मूल सीमा शुल्क 5. संपत्ति पंजीकरण पर स्टाम्प शुल्क नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (A) GST का दायरा: GST ने केंद्रीय कर (केंद्रीय उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, सेवा कर, आयात पर प्रतिकारी शुल्क (CVD) और विशेष अतिरिक्त शुल्क (SAD), आपूर्ति पर केंद्रीय अधिभार व उपकर) और राज्य कर (VAT/बिक्री कर, स्थानीय निकायों के अतिरिक्त मनोरंजन कर, केंद्रीय बिक्री कर, चुंगी व प्रवेश कर, क्रय कर, विलासिता कर, लॉटरी-सट्टा-जुआ पर कर, राज्य उपकर व अधिभार) समाहित किए। समाहित नहीं: मूल सीमा शुल्क (आयात पर IGST के साथ अब भी लगता है), संपत्ति पंजीकरण पर स्टाम्प शुल्क, संपत्ति कर, व्यवसाय कर, पथकर, बिजली शुल्क, शराब पर राज्य उत्पाद शुल्क और पाँच पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क/VAT। अतः केवल 1, 2 और 3। परिणाम: गंतव्य-आधारित उपभोग कर और निर्बाध क्रेडिट शृंखला के साथ एकल राष्ट्रीय बाज़ार, जिससे कर-पर-कर और चेक पोस्ट घटे।
7. 22 सितंबर 2025 से लागू GST दर युक्तिकरण ('GST 2.0') के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पूर्व की बहु-स्लैब संरचना को सरल बनाकर 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो मुख्य दरें की गईं। 2. कुछ अवगुण (demerit) और विलासिता वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की विशेष उच्च दर रखी गई। 3. 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत के स्लैब प्रायः नई संरचना में मिला दिए गए। 4. यह निर्णय GST परिषद की 56वीं बैठक में लिया गया। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) GST 2.0: GST परिषद की 56वीं बैठक (3 सितंबर 2025) ने अगली पीढ़ी का सुधार मंज़ूर किया: 5%, 12%, 18% और 28% के स्लैब को दो दरों की संरचना - 5% (आवश्यक/योग्य वस्तुएँ-सेवाएँ) और 18% (मानक) - में समेटा गया, तथा तंबाकू उत्पाद, पान मसाला, वातित पेय और महँगी कारों जैसी कुछ 'अवगुण' और विलासिता वस्तुओं पर 40% दर रखी गई (सटीक सूची अधिसूचना से देखें)। पुराने 12% स्लैब की अधिकांश वस्तुएँ 5% में आईं, और 28% की अधिकांश 18% या 40% में गईं। व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम छूट प्राप्त हुए तथा अनेक दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर दर 5% या शून्य हुई। उद्देश्य: सरलीकरण, वर्गीकरण विवाद कम करना, उलटी शुल्क संरचना का सुधार और माँग को प्रोत्साहन। चारों कथन सही हैं। अवधारणा: 'उलटी शुल्क संरचना' तब बनती है जब आगत पर कर निर्गत पर कर से अधिक हो, जिससे अनुपयोगी इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा होता है। [स्रोत: GST परिषद के निर्णय / CBIC; वस्तु सूचियाँ दोबारा जाँचें।]
8. एक राज्य में एक विनिर्माता उसी राज्य के भीतर 18 प्रतिशत GST दर पर 1,000 रुपये (कर रहित) में माल बेचता है। उसने राज्य के भीतर 18 प्रतिशत पर 600 रुपये (कर रहित) के आगत खरीदे थे। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के बाद उसकी शुद्ध GST देयता 72 रुपये है। 2. इस शुद्ध देयता में से 36 रुपये CGST और 36 रुपये SGST के रूप में देय हैं। 3. यदि बिक्री अंतर-राज्यीय आपूर्ति होती, तो कर IGST के रूप में लगता। 4. आगत पर चुकाए गए पूरे 108 रुपये, यदि वे निर्गत कर से अधिक हों, तो नकद वापसी (refund) के रूप में माँगे जा सकते हैं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) GST का गणित: निर्गत कर = 1,000 का 18% = 180; इनपुट टैक्स क्रेडिट = 600 का 18% = 108; शुद्ध देयता = 180 - 108 = 72 रुपये। अंतः-राज्यीय आपूर्ति में CGST 9% + SGST 9%, इसलिए शुद्ध 72 का विभाजन 36 + 36 (क्रेडिट का समायोजन निर्धारित क्रम में: IGST क्रेडिट पहले IGST, फिर CGST, फिर SGST से)। अंतर-राज्यीय आपूर्ति में IGST (अनु. 269A) लगता है, जिसे केंद्र वसूलता है और गंतव्य राज्य को बाँटता है। कथन 4 गलत है: अनुपयोगी इनपुट क्रेडिट की वापसी केवल विशेष मामलों में - शून्य-दर आपूर्ति (निर्यात) और उलटी शुल्क संरचना - मिलती है, हर उस स्थिति में नहीं जब आगत कर निर्गत से अधिक हो; अन्यथा अधिशेष क्रेडिट आगे ले जाया जाता है। कर का भार अंतिम उपभोक्ता पर पड़ता है; प्रणाली मूल्य संवर्धन पर कर लगाती है (400 x 18% = 72), जो ठीक शुद्ध देयता है - यही मूल्य-वर्धित कर का तर्क है जो कर-पर-कर समाप्त करता है।
9. अभिकथन (A): पेट्रोलियम उत्पादों के GST से बाहर रहने के कारण, उन्हें आगत के रूप में प्रयोग करने वाले व्यवसाय ईंधन पर चुकाए गए करों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकते। कारण (R): पेट्रोल और डीज़ल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य VAT लगते रहते हैं, जो GST क्रेडिट शृंखला का भाग नहीं हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) कर-पर-कर (cascading): GST इनपुट टैक्स क्रेडिट की निर्बाध शृंखला से चलता है: प्रत्येक चरण आगत पर चुकाया GST अपने निर्गत GST से घटाता है। GST शृंखला से बाहर के कर - पेट्रोल/डीज़ल/ATF/प्राकृतिक गैस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क व राज्य VAT, और शराब पर राज्य उत्पाद शुल्क - GST देयता से समायोजित नहीं हो सकते, इसलिए वे उत्पादन लागत में समाहित हो जाते हैं और अंतिम कीमत में फिर कर लगता है। उद्योग ईंधन को GST में लाने की माँग करता है, जबकि राज्य विरोध करते हैं क्योंकि ईंधन पर VAT उनके स्वयं के कर राजस्व का बड़ा स्रोत है और केंद्र उत्पाद शुल्क (गैर-साझा उपकर/अधिभार घटक) पर निर्भर है। अतः A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या करता है। आर्थिक प्रभाव: ईंधन कीमतें परिवहन लागत और WPI से होकर व्यापक मुद्रास्फीति में पहुँचती हैं।
10. खाद्य कीमत मुद्रास्फीति रोकने के निम्नलिखित में से कौन-से आपूर्ति-पक्ष उपाय हैं? 1. दालों और अनाज के बफर स्टॉक को खुले बाज़ार में जारी करना 2. आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत व्यापारियों पर भंडारण सीमा लगाना 3. खाद्य तेलों और दालों पर आयात शुल्क घटाना 4. नीतिगत रेपो दर बढ़ाना 5. समग्र माँग घटाने के लिए सरकारी व्यय घटाना नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (B) माँग बनाम आपूर्ति उपाय: माँग-प्रबंधन उपकरण समग्र माँग पर काम करते हैं: मौद्रिक (रेपो वृद्धि, CRR वृद्धि, खुले बाज़ार की बिक्री) और राजकोषीय (कम सरकारी व्यय, अधिक कर)। आपूर्ति-पक्ष उपाय उपलब्धता बढ़ाते या लागत घटाते हैं: बफर स्टॉक जारी करना (भारतीय खाद्य निगम, दालों-प्याज़ हेतु नैफेड), आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत भंडारण सीमा व जमाखोरी विरोधी कार्रवाई, आयात शुल्क कटौती और टैरिफ-दर कोटा, निर्यात अंकुश (घरेलू भंडार पर बाहरी माँग रोकना), बेहतर भंडारण, मंडी और लॉजिस्टिक (ई-नाम), मूल्य स्थिरीकरण कोष और रणनीतिक 'भारत' ब्रांड बिक्री। खाद्य मुद्रास्फीति में आपूर्ति उपाय तेज़ काम करते हैं; मौद्रिक नीति केवल द्वितीयक प्रभावों पर। अतः 1, 2 और 3 आपूर्ति-पक्ष हैं; 4 और 5 माँग-प्रबंधन। आवश्यक वस्तु अधिनियम घोषित आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण पर नियंत्रण रखता है।
11. भारत में सीमा शुल्क और व्यापार उपचारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पाटन-रोधी शुल्क (anti-dumping duty) उन आयातों पर लगता है जो निर्यातक देश में अपने सामान्य मूल्य से कम पर बिकते हैं, जाँच और व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) की अनुशंसा के बाद। 2. प्रतिकारी शुल्क (countervailing duty) निर्यातक देश द्वारा अपने उत्पादकों को दी गई सब्सिडी को निष्प्रभावी करने के लिए लगता है। 3. रक्षोपाय शुल्क (safeguard duty) निर्यातक देश की अनुचित व्यापार प्रथाओं के विरुद्ध लगता है। 4. सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 सीमा शुल्क के उद्ग्रहण और संग्रहण को नियंत्रित करता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) व्यापार उपचार: पाटन-रोधी शुल्क (WTO पाटन-रोधी समझौता): भौतिक क्षति पहुँचाने वाले पाटन (निर्यात मूल्य सामान्य मूल्य से कम) को निष्प्रभावी करता है; DGTR (वाणिज्य मंत्रालय) जाँच कर अनुशंसा करता है, पर शुल्क वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) लगाता है। प्रतिकारी शुल्क: निर्यातक देश की विशिष्ट निर्यात/कार्रवाई योग्य सब्सिडी निष्प्रभावी करता है। रक्षोपाय शुल्क (WTO रक्षोपाय समझौता): आयात की बाढ़ से घरेलू उत्पादकों को गंभीर क्षति होने पर अस्थायी उपाय, आयात अनुचित हो या नहीं; इसलिए इसे अनुचित व्यापार प्रथाओं से जोड़ने वाला कथन 3 गलत है। सीमा शुल्क सीमा शुल्क अधिनियम 1962 और सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम 1975 के अंतर्गत लगते हैं: मूल सीमा शुल्क (BCD), सामाजिक कल्याण अधिभार, निर्दिष्ट वस्तुओं पर कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC), और आयात पर IGST। बजट 2026-27 ने व्यक्तिगत उपयोग की शुल्कयोग्य वस्तुओं पर टैरिफ 20% से 10% किया और कूरियर निर्यात की 10 लाख रुपये प्रति खेप सीमा हटाई।
12. GST क्षतिपूर्ति उपकर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह तंबाकू उत्पाद और वातित पेय जैसी अवगुण और विलासिता वस्तुओं पर लगाया गया। 2. इसका उद्देश्य GST क्रियान्वयन से राजस्व हानि की भरपाई राज्यों को करना था, जिसमें पाँच वर्ष तक आधार वर्ष 2015-16 की तुलना में 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की गारंटी थी। 3. कोविड-19 काल में केंद्र ने GST परिषद की ओर से उधार लेकर राशि राज्यों को बैक-टू-बैक ऋण के रूप में दी ताकि क्षतिपूर्ति की कमी पूरी हो। 4. क्षतिपूर्ति व्यवस्था 101वें संविधान संशोधन के साथ स्थायी रूप से बढ़ा दी गई। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) क्षतिपूर्ति उपकर: 101वें संशोधन (अनु. 279A(4)) और GST (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम 2017 ने राज्यों को पहले पाँच वर्ष (1 जुलाई 2017 से 30 जून 2022) 2015-16 आधार पर SGST राजस्व में 14% वार्षिक वृद्धि की गारंटी दी, जिसका वित्तपोषण अवगुण वस्तुओं (तंबाकू, पान मसाला, वातित पेय, कोयला, निर्दिष्ट आकार से बड़े मोटर वाहन आदि) पर उपकर से हुआ और राशि लोक लेखा के क्षतिपूर्ति कोष में जमा हुई। 2020-21 और 2021-22 में महामारी और राजस्व कमी के कारण केंद्र ने विशेष उधार खिड़कियों से धन जुटाकर बैक-टू-बैक ऋण के रूप में दिया, जिसे चुकाने के लिए उपकर संग्रह मार्च 2026 तक बढ़ाया गया। क्षतिपूर्ति की गारंटी 30 जून 2022 को समाप्त हुई और स्थायी नहीं की गई, अतः कथन 4 गलत है। ऋण चुकने के बाद उपकर सामान्य लेवी के रूप में जारी रहना अपेक्षित नहीं। [उपकर की वर्तमान स्थिति नवीनतम GST परिषद अधिसूचनाओं में दोबारा जाँचें।]
13. भारत में मज़दूरी और भत्तों के मुद्रास्फीति से सूचकांकन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महँगाई भत्ता औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जुड़ा है। 2. महँगाई भत्ता वर्ष में दो बार, 1 जनवरी और 1 जुलाई से प्रभावी, संशोधित होता है। 3. मनरेगा मज़दूरी दरें प्रतिवर्ष कृषि श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के संदर्भ में संशोधित होती हैं। 4. औद्योगिक श्रमिकों का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा संकलित होता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) सूचकांकन: CPI-IW (औद्योगिक श्रमिक) श्रम ब्यूरो (श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय) द्वारा संकलित होता है, NSO द्वारा नहीं, अतः कथन 4 गलत है। यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के DA (महँगाई राहत) के लिए प्रयुक्त होता है, जो CPI-IW के 12 माह के औसत के आधार पर वर्ष में दो बार संशोधित होता है; तथा अनुसूचित रोज़गारों में राष्ट्रीय न्यूनतम मज़दूरी और परिवर्तनशील महँगाई भत्ते के लिए। CPI-AL और CPI-RL (कृषि/ग्रामीण श्रमिक) भी श्रम ब्यूरो संकलित करता है; मनरेगा मज़दूरी (प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की अधिसूचित दर) 2009 से हर वर्ष CPI-AL के संदर्भ में संशोधित होती है। सूचकांकन निश्चित आय वर्गों को मुद्रास्फीति से बचाता है, पर मज़दूरी-कीमत सर्पिल पैदा कर सकता है; वेतन आयोग (2016 में 7वाँ, और अगले चक्र हेतु 8वाँ गठित) DA को 50% पर मूल वेतन में मिलाने वाले वेतन मैट्रिक्स सुझाते हैं। [8वें वेतन आयोग की वर्तमान स्थिति दोबारा जाँचें।]
14. भारत में मूल्य सूचकांकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (MoSPI) द्वारा संकलित और सामान्यतः प्रत्येक माह की 12 तारीख को जारी किया जाता है। 2. थोक मूल्य सूचकांक आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT द्वारा संकलित होता है और सामान्यतः प्रत्येक माह की 14 तारीख को जारी होता है। 3. WPI थोक स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं दोनों को कवर करता है। 4. CPI में उपभोक्ता द्वारा चुकाई गई कीमतें अप्रत्यक्ष करों सहित होती हैं, जबकि WPI अप्रत्यक्ष करों से पहले मापा जाता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) CPI बनाम WPI: CPI (ग्रामीण + शहरी का संयुक्त; अलग से CPI-ग्रामीण, CPI-शहरी) परिवारों द्वारा चुकाई गई निश्चित टोकरी की खुदरा कीमतें मापता है, उसमें सेवाएँ (शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास) और अप्रत्यक्ष कर शामिल हैं, और यही RBI के मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का आधार है। 2012 आधार में CPI के खाद्य एवं पेय समूह का भार लगभग 46% था (2024 आधार की संशोधित श्रृंखला में भार बदलते हैं - दोबारा जाँचें)। WPI व्यवसायों के बीच थोक में बिकने वाली वस्तुओं की कीमतें मापता है; इसमें सेवाएँ और अप्रत्यक्ष कर शामिल नहीं हैं, और विनिर्मित उत्पादों का भार सबसे अधिक (लगभग 64%) है, उसके बाद प्राथमिक वस्तुएँ और ईंधन-बिजली। अन्य सूचकांक: CPI-IW (श्रम ब्यूरो, महँगाई भत्ते हेतु), CPI-AL/RL (श्रम ब्यूरो, कृषि/ग्रामीण श्रमिक), और GDP अपस्फीतक (सबसे व्यापक)। दोनों सूचकांक लासपेयर प्रकार (आधार वर्ष के निश्चित भार) के हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि WPI में सेवाएँ नहीं हैं।
15. सितंबर 2026 में WPI मुद्रास्फीति लगभग 11.4 प्रतिशत (अगस्त में लगभग 9.9 प्रतिशत) रिपोर्ट की गई, जबकि CPI मुद्रास्फीति लगभग 5.5 प्रतिशत थी। WPI मुद्रास्फीति के CPI से इतना अधिक होने की व्याख्या में निम्नलिखित में से क्या सहायक है? 1. WPI में सेवाएँ शामिल नहीं हैं, जबकि CPI में हैं। 2. WPI में विनिर्मित उत्पादों और ईंधन-बिजली का भार बहुत अधिक है, जबकि CPI में खाद्य का भार ऊँचा है। 3. WPI अप्रत्यक्ष करों से पहले मापा जाता है, इसलिए वह उत्पादक लागत दबाव को अधिक सीधे दर्शाता है। 4. RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य WPI के रूप में परिभाषित है, इसलिए ऊँचा WPI स्वतः CPI बढ़ा देता है। नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (C) सूचकांक क्यों भिन्न होते हैं: टोकरी, भार और कीमत-बिंदु अलग हैं। WPI वस्तुओं की उत्पादक-स्तर कीमतें मापता है (विनिर्मित वस्तुएँ, धातु, रसायन, ईंधन में भारी), इसलिए लागत या आयातित जिंस झटका (कच्चा तेल, धातु, रुपया) पहले यहाँ दिखता है; CPI खुदरा है, उसमें सेवाएँ (किराया, शिक्षा, स्वास्थ्य - जो चिपचिपी होती हैं और धीमे बढ़ती हैं) शामिल हैं और वह खाद्य-प्रधान है। इसलिए बड़ा अंतर पाइपलाइन में लागत दबाव का संकेत है जो कंपनियों के मार्जिन और माँग पर निर्भर कर खुदरा कीमतों तक पहुँच भी सकता है और नहीं भी - अक्टूबर 2026 की MPC के कसाव का एक कारण। कथन 4 गलत है: लक्ष्य CPI (संयुक्त) पर है, WPI स्वतः CPI में नहीं बदलता; संचरण आंशिक और विलंबित होता है। [सितंबर 2026 में WPI लगभग 11.39% और अगस्त में 9.92% DPIIT की 14 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार रिपोर्ट हुए; eaindustry.nic.in पर दोबारा जाँचें।]
16. CPI (संयुक्त) सूचकांक सितंबर 2025 में 120.0 और सितंबर 2026 में 126.6 था। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सितंबर 2026 के लिए वर्ष-दर-वर्ष CPI मुद्रास्फीति 5.5 प्रतिशत है। 2. यदि सूचकांक अगस्त 2026 में 126.6 और सितंबर 2026 में 128.0 होता, तो सितंबर की माह-दर-माह मुद्रास्फीति लगभग 1.1 प्रतिशत होती। 3. ऊँचा आधार (पिछले वर्ष के संबंधित माह में कीमतों में तेज़ वृद्धि) चालू वर्ष-दर-वर्ष मुद्रास्फीति दर को घटाने की प्रवृत्ति रखता है। 4. वर्ष-दर-वर्ष मुद्रास्फीति चालू सूचकांक और पिछले माह के सूचकांक के अंतर के रूप में निकाली जाती है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) मुद्रास्फीति की गणना: वर्ष-दर-वर्ष मुद्रास्फीति = (CPI_t / CPI_(t-12) - 1) x 100 = (126.6/120.0 - 1) = 5.5% (कथन 1 सही)। माह-दर-माह = (128.0/126.6 - 1) = 1.1% (कथन 2 सही; 1.1% मासिक को वार्षिक करने पर बहुत ऊँची वार्षिक दर आती है, इसीलिए एक बार का मासिक उछाल सावधानी से देखा जाता है)। आधार प्रभाव: यदि एक वर्ष पहले कीमतें तेज़ी से बढ़ी थीं, तो हर (denominator) बड़ा होता है, इसलिए वही कीमत स्तर कम वर्ष-दर-वर्ष दर दिखाता है; इसके विपरीत नीचा आधार दर को फुला देता है। कथन 4 दोनों में से कुछ नहीं बताता: YoY पिछले वर्ष के उसी माह से तुलना है, पिछले माह से नहीं। इसीलिए RBI समग्र YoY, मौसम-समायोजित MoM प्रवृत्ति और मूल मुद्रास्फीति (खाद्य-ईंधन रहित CPI) तीनों देखता है। सितंबर 2026 में भारत की CPI मुद्रास्फीति लगभग 5.54% और खाद्य मुद्रास्फीति लगभग 7.7% (आंशिक रूप से सब्ज़ी और प्याज़) रही। [यहाँ प्रयुक्त सूचकांक मान उदाहरण-मात्र हैं।]
17. भारत की GST यात्रा की निम्नलिखित घटनाओं को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए: A. 101वें संविधान संशोधन अधिनियम (GST) को स्वीकृति B. पूरे देश में GST का शुभारंभ C. राज्यों को GST क्षतिपूर्ति की पाँच वर्षीय अवधि की समाप्ति D. दो-दर संरचना ('GST 2.0') का क्रियान्वयन नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (B) GST की समयरेखा: 101वें संविधान संशोधन अधिनियम को सितंबर 2016 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली (अनु. 246A, 269A, 279A जोड़े गए; अनु. 268A सेवा कर हटा) और उसी माह GST परिषद गठित हुई। GST 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ (जम्मू-कश्मीर जुलाई 2017 में बाद में जुड़ा)। GST (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम 2017 ने पाँच वर्ष तक राज्य GST राजस्व में 14% वार्षिक वृद्धि की गारंटी दी, इसलिए क्षतिपूर्ति 30 जून 2022 को समाप्त हुई (क्षतिपूर्ति उपकर कोविड-19 के दौरान लिए गए बैक-टू-बैक ऋणों के भुगतान हेतु मार्च 2026 तक जारी रहा)। सुधारित दो-दर संरचना 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुई। अतः क्रम A-B-C-D है।
18. अभिकथन (A): पूर्व की मूल-आधारित कर व्यवस्था की तुलना में GST के अंतर्गत उच्च उपभोग पर कम विनिर्माण वाले राज्य विनिर्माण राज्यों की तुलना में लाभ की स्थिति में रहते हैं। कारण (R): GST गंतव्य-आधारित कर है जिसमें अंतर-राज्यीय आपूर्तियों पर IGST राजस्व उस राज्य को बाँटा जाता है जहाँ वस्तुओं या सेवाओं का अंततः उपभोग होता है। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) विजेता और पराजित: VAT/CST में विनिर्माण राज्य अन्य राज्यों को बिक्री पर मूल-आधारित केंद्रीय बिक्री कर लगाकर राजस्व रखते थे। GST में राजस्व उपभोग के साथ चलता है, इसलिए अधिक उपभोग वाले घनी आबादी के राज्य (बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, जो निर्यात से अधिक आयात करते हैं) सघन विनिर्माण वाले राज्यों (महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक) की तुलना में लाभ में रहते हैं, जिनका कुछ राजस्व घटता है। इसीलिए पाँच वर्ष के लिए 14% वृद्धि गारंटी और क्षतिपूर्ति उपकर रखे गए, और अब क्षतिपूर्ति तथा GST परिषद के मतदान भार को लेकर विवाद उठते हैं। A और R दोनों सही हैं और R वह तंत्र बताता है जिससे A होता है।
19. निम्नलिखित में से कौन-से भारत में प्रत्यक्ष कर के रूप में वर्गीकृत हैं? 1. आयकर 2. निगम कर 3. प्रतिभूति लेनदेन कर 4. सीमा शुल्क 5. वस्तु एवं सेवा कर नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (A) प्रत्यक्ष बनाम अप्रत्यक्ष: प्रत्यक्ष कर वह है जिसका बोझ स्थानांतरित नहीं हो सकता: जिस पर लगता है वही चुकाता है (आयकर, निगम कर, पूँजीगत लाभ कर, प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) - CBDT द्वारा प्रत्यक्ष कर के रूप में वर्गीकृत, और न्यूनतम वैकल्पिक कर)। अप्रत्यक्ष कर उपभोक्ता पर स्थानांतरित हो सकते हैं: GST, सीमा शुल्क, पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क आदि। संपत्ति कर 2015-16 में समाप्त हुआ (वित्त अधिनियम 2015) और अति धनवानों पर 2% अधिभार लगाया गया; लाभांश वितरण कर अप्रैल 2020 से समाप्त। प्रत्यक्ष कर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और अप्रत्यक्ष कर CBIC (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड) देखता है; दोनों राजस्व विभाग के अंतर्गत हैं। आयकर अधिनियम 2025 1 अप्रैल 2026 से 1961 के अधिनियम की जगह लेता है; बजट 2026-27 ने वायदा पर STT 0.05% और ऑप्शन प्रीमियम पर 0.15% किया। प्रत्यक्ष कर प्रगतिशील होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कर प्रभाव में प्रतिगामी।
20. वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अनुच्छेद 279A के अंतर्गत स्थापित संवैधानिक निकाय है, जो 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा जोड़ा गया। 2. केंद्रीय वित्त मंत्री इसके अध्यक्ष हैं। 3. केंद्र सरकार के पास भारित मतों का एक-तिहाई और सभी राज्यों के पास कुल मिलाकर दो-तिहाई है। 4. निर्णयों के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के भारित मतों का कम से कम तीन-चौथाई बहुमत आवश्यक है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) GST परिषद: अनुच्छेद 246A संसद और राज्य विधानमंडलों को GST पर समवर्ती कानून बनाने की शक्ति देता है (अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर केवल संसद, अनु. 269A); अनुच्छेद 279A GST परिषद बनाता है: अध्यक्ष - केंद्रीय वित्त मंत्री; सदस्य - राजस्व या वित्त के प्रभारी केंद्रीय राज्य मंत्री तथा राज्यों/विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त या कराधान प्रभारी मंत्री। मतदान: केंद्र के मत का भार कुल मतों का एक-तिहाई और सभी राज्यों का मिलाकर दो-तिहाई; प्रत्येक निर्णय को उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के भारित मतों का कम से कम तीन-चौथाई चाहिए, जिससे केंद्र को प्रभावी वीटो मिलता है और राज्य केंद्र के बिना, तथा केंद्र बड़े राज्य-बहुमत के बिना, निर्णय नहीं कर सकते। गणपूर्ति कुल सदस्यों का आधा है। परिषद दरों, छूटों, सीमाओं, मॉडल कानूनों और कुछ राज्यों के विशेष प्रावधानों की सिफारिश करती है। GST 1 जुलाई 2017 से शुरू हुआ।
21. GST के अंतर्गत पंजीकरण और अनुपालन प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अधिकांश राज्यों में वस्तुओं के आपूर्तिकर्ताओं के अनिवार्य पंजीकरण की मूल कुल कारोबार सीमा 40 लाख रुपये और सेवाओं के आपूर्तिकर्ताओं के लिए 20 लाख रुपये है। 2. कंपोज़िशन योजना पात्र छोटे करदाताओं को कारोबार के निश्चित प्रतिशत पर कर चुकाने देती है, जिसमें वस्तु आपूर्तिकर्ताओं के लिए कारोबार सीमा 1.5 करोड़ रुपये है। 3. कंपोज़िशन योजना के अंतर्गत करदाता इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकता है। 4. GST नेटवर्क (GSTN) पंजीकरण, रिटर्न और भुगतान के लिए साझा आईटी मंच प्रदान करता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) GST अनुपालन: पंजीकरण: कुल कारोबार 40 लाख रुपये (वस्तुएँ; कुछ राज्यों में 20 लाख) और 20 लाख रुपये (सेवाएँ; विशेष श्रेणी राज्यों में 10 लाख) से अधिक होने पर पंजीकरण अनिवार्य; अंतर-राज्यीय आपूर्तिकर्ता और ई-कॉमर्स विक्रेता कारोबार की परवाह किए बिना पंजीकरण कराते हैं (निर्दिष्ट अपवादों सहित)। कंपोज़िशन योजना: पात्र करदाता (वस्तुओं हेतु 1.5 करोड़ रुपये तक का कारोबार; कुछ विशेष श्रेणी राज्यों में 75 लाख; सेवा प्रदाताओं हेतु 50 लाख तक की अलग योजना) कारोबार का छोटा प्रतिशत (प्रायः विनिर्माता/व्यापारी 1%, रेस्तराँ 5%, सेवा प्रदाता 6%) चुकाते हैं और सरल रिटर्न भरते हैं - पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले सकते, अंतर-राज्यीय आपूर्ति नहीं कर सकते और ग्राहकों से कर नहीं वसूल सकते, अतः कथन 3 गलत है। GSTN एक गैर-लाभकारी (धारा 8) कंपनी है जो रिटर्न (GSTR-1, GSTR-3B), ई-इनवॉइस और ई-वे बिल की आईटी रीढ़ चलाती है। [सीमा राशियाँ cbic-gst.gov.in पर दोबारा जाँचें।]
22. गंतव्य-आधारित उपभोग कर के रूप में GST के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कर राजस्व उस राज्य को मिलता है जहाँ वस्तुओं या सेवाओं का उपभोग होता है। 2. अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर IGST केंद्र द्वारा वसूला जाता है और संघ तथा गंतव्य राज्य के बीच बाँटा जाता है। 3. निर्यात शून्य-दर पर होते हैं, और चुकाए गए आगत कर की वापसी मिलती है। 4. शून्य-दर आपूर्तियाँ निर्यात पर कर वहन करती हैं पर आगत कर की वापसी उपलब्ध नहीं होती। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) गंतव्य सिद्धांत: मूल-आधारित बिक्री कर व्यवस्था में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु जैसे विनिर्माण राज्य राज्य से बाहर जाने वाले माल पर CST वसूलते थे। GST (अनु. 269A) में अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर IGST केंद्र लगाता है और राशि गंतव्य (उपभोग) राज्य को बाँटी जाती है, क्रेडिट शृंखला में आगे जाता है। फलस्वरूप उपभोग-प्रधान और कम उद्योग वाले राज्य (जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश) सापेक्ष लाभ में रहते हैं, जबकि विनिर्माण राज्यों का कुछ राजस्व घटता है, इसीलिए क्षतिपूर्ति अधिनियम आवश्यक था। निर्यात 'शून्य-दर' हैं: निर्यात पर कर नहीं लगता और निर्यातक को इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी मिलती है (या बॉन्ड/LUT पर बिना IGST चुकाए निर्यात), ताकि कर का निर्यात न हो; आयात पर CIF मूल्य पर IGST के साथ सीमा शुल्क लगता है। कथन 4 गलत है क्योंकि शून्य दर का अर्थ है कि वापसी मिलती है।
23. सूची-I (मुद्रास्फीति का प्रकार या संबंधित अवधारणा) को सूची-II (विवरण) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए: सूची-I: A. माँग-जनित मुद्रास्फीति B. लागत-जनित मुद्रास्फीति C. मुद्रास्फीतिजनित मंदी (स्टैगफ्लेशन) D. विस्फीति (डिसइन्फ्लेशन) सूची-II: 1. समग्र माँग के समग्र आपूर्ति से अधिक होने के कारण कीमतों में वृद्धि 2. मजदूरी और कच्चे माल जैसी उच्च आगत लागत के कारण कीमतों में वृद्धि 3. ऊँची मुद्रास्फीति के साथ ऊँची बेरोज़गारी और कम वृद्धि 4. मुद्रास्फीति दर में गिरावट, बिना कीमतों के वास्तव में घटे
✅ सही उत्तर: (D) मुद्रास्फीति के प्रकार: माँग-जनित: 'कम वस्तुओं के पीछे अधिक मुद्रा' - ऊँची ब्याज दरों और कम व्यय से उपचार। लागत-जनित: आपूर्ति झटके (तेल, मजदूरी, आयातित जिंस) - मौद्रिक उपकरण कमज़ोर, आपूर्ति-पक्ष उपाय (बफर स्टॉक, आयात शुल्क कटौती) बेहतर। स्टैगफ्लेशन: ऊँची मुद्रास्फीति + ठहराव + बेरोज़गारी (1970 के तेल झटके) - यह साधारण फिलिप्स वक्र व्यापार-विनिमय का खंडन करता है। विस्फीति: मुद्रास्फीति दर घटती है पर कीमतें फिर भी बढ़ती हैं (जैसे 7% से 5%); अपस्फीति (डिफ्लेशन) सामान्य कीमत स्तर में गिरावट है (ऋणात्मक मुद्रास्फीति); पुनर्स्फीति (रिफ्लेशन) अपस्फीति के बाद कीमत/उत्पादन बहाल करने का नीतिगत प्रयास; अति मुद्रास्फीति अत्यंत तीव्र कीमत वृद्धि (परंपरागत रूप से मासिक 50% से अधिक); मूल मुद्रास्फीति खाद्य-ईंधन को छोड़ती है; 'स्क्यूफ्लेशन' (भारतीय नीति बहसों में प्रयुक्त शब्द) कुछ कीमतों के बढ़ने और अन्य के स्थिर रहने को दर्शाता है। सही कूट: A-1, B-2, C-3, D-4।
24. वर्तमान संवैधानिक और विधिक स्थिति के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-से GST के दायरे से बाहर हैं? 1. मानव उपभोग हेतु मादक शराब 2. पेट्रोल और डीज़ल 3. बिजली 4. सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (B) GST अपवर्जन: संविधान (अनु. 366(12A), संशोधित) के अनुसार GST सभी वस्तुओं-सेवाओं पर लागू है सिवाय मानव उपभोग की मादक शराब के (जो राज्य उत्पाद शुल्क और VAT के अधीन रहती है)। कच्चा पेट्रोलियम, हाई-स्पीड डीज़ल, मोटर स्पिरिट (पेट्रोल), प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन संवैधानिक रूप से GST के अंतर्गत हैं पर उन पर कर लगने की तिथि परिषद की सिफारिश पर अधिसूचित होनी है; इसलिए व्यवहार में वे GST से बाहर हैं और उन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क व राज्य VAT लगता है। बिजली की आपूर्ति GST से छूट प्राप्त है (राज्य बिजली शुल्क लगाते हैं)। IT सेवाएँ मानक दर पर कर योग्य हैं (निर्यात शून्य-दर)। अतः 1, 2 और 3 GST से बाहर हैं। प्रभाव: ईंधन GST से बाहर होने से उद्योग द्वारा प्रयुक्त आगत पर चुकाए कर का क्रेडिट नहीं मिलता, जिससे कर-पर-कर (cascading) बनता है।
25. यदि किसी जमा पर नाममात्र ब्याज दर 10.5 प्रतिशत वार्षिक और वार्षिक मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत है, तो फिशर संबंध के अनुसार सटीक वास्तविक प्रतिफल दर निम्नलिखित में से क्या होगी?
✅ सही उत्तर: (C) फिशर संबंध: सटीक सूत्र: (1 + नाममात्र) = (1 + वास्तविक) x (1 + मुद्रास्फीति)। अतः 1 + वास्तविक = 1.105/1.05 = 1.05238, यानी वास्तविक दर लगभग 5.24%। प्रचलित सन्निकटन वास्तविक = नाममात्र - मुद्रास्फीति = 5.5% इसे थोड़ा अधिक आँकता है, और मुद्रास्फीति अधिक होने पर अंतर बढ़ता है। ऋणात्मक वास्तविक दर का अर्थ है कि बचतकर्ताओं की क्रय शक्ति घटती है; इसीलिए RBI 'वास्तविक नीतिगत दर' (रेपो - मुद्रास्फीति) को नीति की कसावट के सूचक के रूप में देखता है: रेपो 5.50% और CPI लगभग 5.54% (सितंबर 2026) पर यह लगभग शून्य है। मुद्रास्फीति के अन्य प्रभाव: अप्रत्याशित मुद्रास्फीति में देनदार लाभ में और लेनदार हानि में रहते हैं, निश्चित आय वाले और बचतकर्ता हारते हैं, निर्यात की प्रतिस्पर्धा घटती है, और कर स्लैब सूचकांकित न हों तो 'ब्रैकेट क्रीप' से कर बोझ बढ़ता है।