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टॉपिक 05 – बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र

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1. 2019-2020 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समेकन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक में विलय हुआ। 2. सिंडिकेट बैंक का कैनरा बैंक में विलय हुआ। 3. आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय हुआ। 4. इलाहाबाद बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय हुआ। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) PSB समेकन: 2017: SBI के पाँच सहयोगी बैंक और भारतीय महिला बैंक SBI में मिले। 2019: विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय। 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी: ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स + यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया -> पंजाब नेशनल बैंक (दूसरा सबसे बड़ा PSB); सिंडिकेट बैंक -> कैनरा बैंक; आंध्रा बैंक + कॉर्पोरेशन बैंक -> यूनियन बैंक ऑफ इंडिया; इलाहाबाद बैंक -> इंडियन बैंक (बैंक ऑफ बड़ौदा नहीं, अतः कथन 4 गलत है)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 (2017) से घटकर 12 रह गई। कारण: पैमाने की अर्थव्यवस्था, मज़बूत तुलन-पत्र, वैश्विक आकार के ऋणदाता (नरसिंहम-II के तर्क और पी.जे. नायक समिति से अनुशंसित)। बैंक बोर्ड ब्यूरो (2016) 2022 में वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो बना, जो PSB और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों का चयन करता है।
2. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे अप्रैल 2015 में आरंभ किया गया। 2. शिशु ऋण 50,000 रुपये तक के होते हैं। 3. किशोर ऋण 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक के होते हैं। 4. मुद्रा अपनी शाखाओं से सीधे व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को ऋण देती है। 5. पूर्व के तरुण ऋण चुकाने वाले उद्यमियों के लिए 10 लाख से 20 लाख रुपये की 'तरुण प्लस' श्रेणी जोड़ी गई। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) मुद्रा: सूक्ष्म इकाई विकास एवं पुनर्वित्त एजेंसी (MUDRA) अप्रैल 2015 में SIDBI की सहायक/NBFC-MFI के रूप में बनी और यह पुनर्वित्त संस्था है: ऋण बैंक, NBFC, MFI और लघु वित्त बैंक ('सदस्य ऋणदाता संस्थाएँ') देते हैं, मुद्रा सीधे नहीं - अतः कथन 4 गलत है। 10 लाख रुपये तक के गैर-कृषि आय-सृजक सूक्ष्म/लघु उद्यमों को बिना जमानत ऋण तीन श्रेणियों में: शिशु (50,000 तक), किशोर (50,000-5 लाख), तरुण (5-10 लाख); केंद्रीय बजट 2024-25 ने पूर्व तरुण ऋण चुकाने वालों के लिए तरुण प्लस (10-20 लाख) जोड़ा। मुद्रा ऋण प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में गिने जाते हैं। स्टैंड-अप इंडिया (SC/ST व महिला उद्यमियों को 10 लाख से 1 करोड़ रुपये का ऋण, 2016) के साथ ये 'असहायित' लघु व्यवसाय क्षेत्र को लक्षित करते हैं।
3. भारत के पूँजी बाज़ार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) प्राथमिक बाज़ार में होता है, जबकि पहले से सूचीबद्ध शेयरों का व्यापार द्वितीयक बाज़ार में होता है। 2. बिक्री के लिए प्रस्ताव (OFS) सूचीबद्ध कंपनियों के प्रवर्तकों को स्टॉक एक्सचेंज तंत्र के माध्यम से शेयर बेचने की अनुमति देता है। 3. इक्विटी लेनदेन के लिए T+1 निपटान चक्र लागू किया गया है। 4. निफ्टी 50 बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क सूचकांक है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) पूँजी बाज़ार: प्राथमिक बाज़ार: नई प्रतिभूतियाँ जारी होती हैं (IPO - जनता को पहली बार; FPO - अनुवर्ती सार्वजनिक प्रस्ताव; राइट्स इश्यू; QIP - योग्य संस्थागत नियोजन; अधिमान्य आवंटन); कंपनी को धन मिलता है। द्वितीयक बाज़ार: निवेशकों के बीच मौजूदा प्रतिभूतियों का एक्सचेंजों (NSE, BSE) पर व्यापार - कंपनी को धन नहीं मिलता। OFS (2012): सूचीबद्ध कंपनियों के प्रवर्तक/बड़े शेयरधारक एक्सचेंज की OFS खिड़की से पारदर्शी रूप से शेयर बेचते हैं (सरकार के लिए भी विनिवेश मार्ग)। T+1 निपटान (व्यापार तिथि + एक कार्यदिवस) फरवरी 2022 से चरणबद्ध और 27 जनवरी 2023 तक सभी इक्विटी पर पूर्णतः लागू हुआ - भारत प्रमुख बाज़ारों में अग्रणी रहा। निक्षेपागार (NSDL 1996, CDSL 1999) प्रतिभूतियाँ डीमैट रूप में रखते हैं। सेंसेक्स BSE का सूचकांक है; निफ्टी 50 NSE का, अतः कथन 4 गलत है।
4. भारत में भुगतान और निपटान प्रणालियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 RBI को भुगतान प्रणालियों के नियमन का प्राधिकारी बनाता है। 2. राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), खुदरा भुगतान की एक छत्र संस्था, 2008 में स्थापित हुआ और UPI 2016 में आरंभ हुआ। 3. RTGS उच्च-मूल्य लेनदेन के लिए प्रयुक्त होता है, जिसका न्यूनतम मूल्य 2 लाख रुपये है। 4. NEFT प्रत्येक लेनदेन का निपटान वास्तविक समय में अलग-अलग करता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) भुगतान प्रणालियाँ: PSS अधिनियम 2007 RBI (भुगतान एवं निपटान प्रणालियों के नियमन व पर्यवेक्षण बोर्ड के माध्यम से) को भुगतान प्रणालियों को प्राधिकृत और विनियमित करने की शक्ति देता है। NPCI (लाभ-निरपेक्ष, RBI और भारतीय बैंक संघ द्वारा 2008 में प्रवर्तित) RuPay, IMPS, UPI (2016), BHIM, भारत बिलपे, NETC (FASTag) और NACH संचालित करता है। RTGS: वास्तविक समय सकल निपटान, प्रत्येक लेनदेन अलग से निपटता है, न्यूनतम 2 लाख रुपये। NEFT: आस्थगित शुद्ध निपटान - लेनदेन आधे-आधे घंटे के बैचों में निपटते हैं (दिसंबर 2019 से 24x7), न्यूनतम-अधिकतम सीमा नहीं; अतः कथन 4 गलत है। UPI तात्कालिक, वास्तविक समय, अंतर-संचालनीय मोबाइल भुगतान प्रणाली है; RBI का ई-रुपया (CBDC) पायलट दिसंबर 2022 में शुरू हुआ। सरकार का कहना है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन के लिए UPI निःशुल्क रहेगा।
5. भारत में विदेशी निवेश के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी भारतीय कंपनी में एकल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक की हिस्सेदारी निर्गम-पश्चात चुकता इक्विटी पूँजी के 10 प्रतिशत से कम तक सीमित है। 2. सीमा पार होने पर हिस्सेदारी को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में पुनर्वर्गीकृत करना या बेचना होता है। 3. FDI नीति DPIIT बनाता है, जबकि RBI विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के अंतर्गत प्रवाहों का नियमन करता है। 4. सहभागी नोट (P-Notes) पंजीकृत FPI द्वारा उन विदेशी निवेशकों को जारी किए जाते हैं जो सीधे SEBI में पंजीकृत नहीं हैं। 5. सभी क्षेत्रों में FDI के लिए सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) विदेशी निवेश: FDI: स्थायी हित, चुकता इक्विटी का 10% या अधिक, प्रबंधन नियंत्रण सहित; FPI: सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में पोर्टफोलियो निवेश, प्रत्येक निवेशक 10% से कम (और कुल FPI सीमा क्षेत्रीय सीमा से जुड़ी); उल्लंघन पर हिस्सेदारी FDI में बदलती है या निर्धारित समय में बेचनी पड़ती है। P-Notes (ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट) SEBI-पंजीकृत FPI द्वारा विदेशी ग्राहकों को जारी होते हैं। FDI मार्ग: स्वचालित (पूर्व अनुमति नहीं; अधिकांश क्षेत्र) और सरकारी (DPIIT पोर्टल से अनुमोदन, रक्षा के कुछ भाग, प्रिंट मीडिया, बहु-ब्रांड खुदरा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों हेतु); अतः कथन 5 गलत है। DPIIT (वाणिज्य मंत्रालय) समेकित FDI नीति परिपत्र से नीति बनाता है; RBI FEMA 1999 (जिसने FERA 1973 को प्रतिस्थापित किया) के अंतर्गत विप्रेषण और रिपोर्टिंग का नियमन करता है। FPI, FDI की तुलना में अधिक अस्थिर ('हॉट मनी') है।
6. भारत में भुगतान बैंकों और लघु वित्त बैंकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भुगतान बैंक ऋण नहीं दे सकते और क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते। 2. भुगतान बैंक प्रति व्यक्तिगत ग्राहक 2 लाख रुपये की सीमा तक जमा स्वीकार कर सकता है। 3. लघु वित्त बैंकों को अपने समायोजित शुद्ध बैंक ऋण (ANBC) का 75 प्रतिशत प्राथमिकता क्षेत्र को देना आवश्यक है। 4. दोनों श्रेणियों की सिफारिश नचिकेत मोर समिति ने की थी। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) विभेदित बैंक: नचिकेत मोर समिति (छोटे व्यवसायों व निम्न-आय परिवारों हेतु व्यापक वित्तीय सेवाएँ, 2013-14) ने वित्तीय समावेशन गहरा करने हेतु भुगतान बैंक और लघु वित्त बैंक की सिफारिश की। भुगतान बैंक (न्यूनतम पूँजी 100 करोड़ रुपये; पहले लाइसेंस 2015 में, जैसे इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, एयरटेल, पेटीएम): माँग जमा (चालू/बचत) प्रति ग्राहक 2 लाख रुपये तक (2021 में 1 लाख से बढ़ी) स्वीकार करते हैं, भुगतान व प्रेषण सेवाएँ देते हैं, पर ऋण नहीं दे सकते और क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते; धन सरकारी प्रतिभूतियों में लगाते हैं और CRR/SLR रखते हैं। लघु वित्त बैंक (न्यूनतम पूँजी 200 करोड़ रुपये): वंचित वर्गों को सेवा देते हैं, ANBC का 75% प्राथमिकता क्षेत्र को और कम से कम 50% ऋण 25 लाख रुपये तक के होते हैं; वे ऋण दे सकते हैं और बाद में सार्वभौमिक बैंक बन सकते हैं। चारों कथन सही हैं।
7. भारतीय बैंकिंग के निम्नलिखित पड़ावों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए: A. इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर भारतीय स्टेट बैंक का गठन B. 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण C. छह और वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण D. वित्तीय प्रणाली पर पहली नरसिंहम समिति की रिपोर्ट नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (C) बैंकिंग के पड़ाव: 1955: इंपीरियल बैंक का अधिग्रहण कर भारतीय स्टेट बैंक बना (SBI अधिनियम 1955)। 19 जुलाई 1969: 50 करोड़ रुपये से अधिक जमा वाले 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण (बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अर्जन एवं अंतरण) अधिनियम 1969), जो 1967 के 'सामाजिक नियंत्रण' से जुड़ा कदम था और जिसका उद्देश्य कृषि व लघु उद्योग को ऋण देना था। 15 अप्रैल 1980: 200 करोड़ से अधिक जमा वाले 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण। 1991: नरसिंहम समिति I से उदारीकरण का दौर। 1993: नए निजी बैंकों को अनुमति। बाद में: 2017 में SBI के सहयोगी बैंकों का विलय; 2019-20 के समेकन से PSB की संख्या 12 रह गई। अतः क्रम A-B-C-D।
8. अभिकथन (A): सरकार द्वारा किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में नई पूँजी डालने से उसका पूँजी पर्याप्तता अनुपात बढ़ सकता है, भले ही उसका ऋण न बढ़े। कारण (R): पूँजी-से-जोखिम-भारित-परिसंपत्ति अनुपात पात्र विनियामक पूँजी और जोखिम-भारित परिसंपत्तियों का अनुपात है, अतः अतिरिक्त पूँजी अंश (numerator) बढ़ाती है। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
✅ सही उत्तर: (A) पुनर्पूँजीकरण का तर्क: CRAR = (टियर 1 + टियर 2 पूँजी) / जोखिम-भारित परिसंपत्तियाँ। टियर 1 (चालू-संस्था पूँजी): CET1 (इक्विटी पूँजी, प्रतिधारित आय, आरक्षित निधियाँ) + अतिरिक्त टियर 1 (शाश्वत लिखत); टियर 2 (समापन-स्थिति पूँजी): अधीनस्थ ऋण, पुनर्मूल्यांकन आरक्षित निधि, सीमित सामान्य प्रावधान। पूँजी डालने से अंश बढ़ता है जबकि RWA अपरिवर्तित, इसलिए CRAR सुधरता है; अन्य उपाय हैं जोखिम घटाना (कम जोखिम की परिसंपत्तियों से RWA घटाना) और NPA बट्टे खाते डालना। सरकार ने बजटीय सहायता और पुनर्पूँजीकरण बॉन्ड (इंद्रधनुष योजना 2015, 2017 का 2.11 लाख करोड़ रुपये का पैकेज) से PSB का पुनर्पूँजीकरण किया। जोखिम-भार: नकद 0%, सरकारी प्रतिभूतियाँ 0%, आवास ऋण LTV के अनुसार 35-75%, कॉर्पोरेट ऋण 100% या रेटिंग से, अरेटेड अधिक - अतः कॉर्पोरेट ऋण से G-sec की ओर जाने पर नई पूँजी बिना RWA घटता है।
9. भारत में सहकारी ऋण संरचना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अल्पकालिक ग्रामीण सहकारी ऋण संरचना त्रि-स्तरीय है: राज्य सहकारी बैंक, ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक और प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ। 2. शहरी सहकारी बैंकों पर दोहरा नियंत्रण है, जिसमें RBI बैंकिंग कार्यों का और सहकारी समितियों का रजिस्ट्रार प्रबंधन का नियमन करता है। 3. बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 ने सहकारी बैंकों के प्रबंधन और शासन पर RBI की शक्तियाँ बढ़ाईं। 4. नाबार्ड की स्थापना शिवरामन समिति की सिफारिश पर 1969 में हुई। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) सहकारी बैंकिंग: अल्पकालिक ग्रामीण: राज्य सहकारी बैंक (शीर्ष) -> ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक -> PACS (ग्राम); दीर्घकालिक: राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक। NABARD राज्य सहकारी बैंकों को, वे ज़िला बैंकों को और वे PACS को वित्त देते हैं। शहरी सहकारी बैंक: दोहरा नियमन - RBI (बैंकिंग: लाइसेंस, CRR/SLR, ब्याज दरें, विवेकपूर्ण मानदंड) और सहकारी समितियों का रजिस्ट्रार (पंजीकरण, प्रबंधन, लेखा परीक्षा, परिसमापन)। PMC बैंक की विफलता के बाद बना बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम 2020 बोर्ड अधिक्रमण, CEO अनुमोदन, शासन के नियमन और पुनर्निर्माण/समामेलन योजनाओं की RBI की शक्तियाँ सहकारी बैंकों पर लागू करता है (PACS या केवल सदस्यों को कृषि ऋण देने वाली समितियों पर नहीं)। नाबार्ड की स्थापना जुलाई 1982 में (1969 नहीं) शिवरामन समिति की सिफारिश पर हुई, अतः कथन 4 गलत है। सहकारिता मंत्रालय (जुलाई 2021) अब सहकारिता नीति देखता है।
10. भारत में बेसल III मानदंडों के क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. RBI द्वारा निर्धारित जोखिम-भारित परिसंपत्तियों से कुल पूँजी का न्यूनतम अनुपात 9 प्रतिशत है। 2. न्यूनतम अनुपात के ऊपर जोखिम-भारित परिसंपत्तियों का 2.5 प्रतिशत पूँजी संरक्षण बफर (जिसे कॉमन इक्विटी टियर 1 से पूरा करना है) निर्धारित है, जिससे कुल आवश्यकता 11.5 प्रतिशत हो जाती है। 3. बेसल III ने चलनिधि कवरेज अनुपात और शुद्ध स्थिर वित्तपोषण अनुपात प्रस्तुत किए। 4. पंजाब नेशनल बैंक को घरेलू व्यवस्थागत रूप से महत्वपूर्ण बैंक (D-SIB) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) भारत में बेसल III: बेसल बैंकिंग पर्यवेक्षण समिति (BIS) के मानक पूँजी और चलनिधि के मानक तय करते हैं। RBI बेसल के न्यूनतम 8% से कठोर है: कुल पूँजी (CRAR) 9%, टियर 1 7%, कॉमन इक्विटी टियर 1 (CET1) 5.5%, साथ में 2.5% पूँजी संरक्षण बफर (CET1) यानी कुल 11.5%। स्तंभ 1: ऋण, बाज़ार व परिचालन जोखिम हेतु न्यूनतम पूँजी; स्तंभ 2: पर्यवेक्षी समीक्षा (ICAAP); स्तंभ 3: बाज़ार अनुशासन (प्रकटीकरण)। बेसल III ने लीवरेज अनुपात, प्रति-चक्रीय बफर, LCR (30 दिन के दबावपूर्ण बहिर्प्रवाह हेतु उच्च-गुणवत्ता तरल परिसंपत्तियाँ, न्यूनतम 100%) और NSFR (एक वर्ष से अधिक का स्थिर वित्त) जोड़े। D-SIB ('बहुत बड़े ताकि विफल न हों') पर अतिरिक्त CET1 अधिभार होता है; RBI की सूची में SBI, ICICI बैंक और HDFC बैंक हैं - PNB नहीं, अतः कथन 4 गलत है।
11. एक बैंक की कॉमन इक्विटी टियर 1 पूँजी 400 करोड़ रुपये, अतिरिक्त टियर 1 पूँजी 200 करोड़ रुपये, टियर 2 पूँजी 200 करोड़ रुपये और जोखिम-भारित परिसंपत्तियाँ 8,000 करोड़ रुपये हैं। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बैंक का पूँजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात 10 प्रतिशत है। 2. बैंक RBI के न्यूनतम CRAR 9 प्रतिशत को पूरा करता है। 3. CET1 अनुपात 5 प्रतिशत है, जो RBI की न्यूनतम CET1 आवश्यकता 5.5 प्रतिशत को पूरा करता है। 4. टियर 1 अनुपात 7.5 प्रतिशत है, जो न्यूनतम टियर 1 आवश्यकता 7 प्रतिशत को पूरा करता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) पूँजी अनुपात: टियर 1 = CET1 + AT1 = 400 + 200 = 600; कुल पूँजी = 600 + 200 (टियर 2) = 800। CRAR = 800/8,000 = 10% (कथन 1 सही; 9% न्यूनतम से अधिक, कथन 2 सही)। CET1 अनुपात = 400/8,000 = 5%, जो RBI के न्यूनतम 5.5% से कम है, इसलिए कथन 3 गलत है - कुल CRAR पर्याप्त होने पर भी बैंक CET1 न्यूनतम का उल्लंघन करता है (वह 2.5% पूँजी संरक्षण बफर सहित निहित 11.5% से भी कम होगा, जिससे लाभांश पर रोक लगती है)। टियर 1 अनुपात = 600/8,000 = 7.5%, 7% न्यूनतम से अधिक (कथन 4 सही)। सबक: हर स्तर अलग जाँचें - कुल अनुपात पूरा होने पर भी घटक अनुपात विफल हो सकता है क्योंकि टियर 2, CET1 का विकल्प नहीं बन सकता, और PCA में CET1 या CRAR का उल्लंघन कार्रवाई ट्रिगर करता है।
12. RBI के परिसंपत्ति वर्गीकरण मानदंडों के अनुसार सूची-I (श्रेणी) को सूची-II (विवरण) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए: सूची-I: A. अवमानक (Sub-standard) परिसंपत्ति B. संदिग्ध (Doubtful) परिसंपत्ति C. SMA-1 D. हानि (Loss) परिसंपत्ति सूची-II: 1. 12 माह से अधिक न होने वाली अवधि के लिए NPA 2. ऐसी परिसंपत्ति जो 12 माह तक अवमानक श्रेणी में रही है 3. विशेष उल्लेख खाता जिसमें मूलधन या ब्याज 31 से 60 दिन से अतिदेय है 4. ऐसी परिसंपत्ति जिसे वसूल न होने योग्य पहचाना गया है और पूर्णतः या अंशतः बट्टे खाते डालनी है
✅ सही उत्तर: (D) परिसंपत्ति वर्गीकरण: जब मूलधन या ब्याज 90 दिन से अधिक अतिदेय रहे तो परिसंपत्ति अनर्जक परिसंपत्ति (NPA) बनती है (मियादी ऋण)। अवमानक: 12 माह तक NPA; संदिग्ध: 12 माह या अधिक अवमानक (अवधि के अनुसार D1, D2, D3, अधिक प्रावधान); हानि: बैंक, लेखा परीक्षक या RBI द्वारा वसूल न होने योग्य पहचानी गई। NPA बनने से पहले खाते विशेष उल्लेख खातों में चिह्नित होते हैं: SMA-0 (1-30 दिन अतिदेय), SMA-1 (31-60 दिन), SMA-2 (61-90 दिन) - ये पूर्व-चेतावनी श्रेणियाँ हैं। गंभीरता के साथ प्रावधान बढ़ता है (सुरक्षित अवमानक पर लगभग 15%, हानि पर 100%)। मुख्य अनुपात: सकल NPA अनुपात = सकल NPA / सकल अग्रिम; शुद्ध NPA = सकल NPA - प्रावधान; प्रावधान कवरेज अनुपात = प्रावधान / सकल NPA। सही कूट: A-1, B-2, C-3, D-4।
13. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी स्थापना 1988 में गैर-सांविधिक निकाय के रूप में हुई और SEBI अधिनियम, 1992 द्वारा इसे सांविधिक शक्तियाँ मिलीं। 2. इसके आदेशों के विरुद्ध अपील प्रतिभूति अपीलीय अधिकरण (SAT) और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में होती है। 3. यह म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो प्रबंधकों और स्टॉक एक्सचेंजों का विनियमन करता है। 4. इसके अध्यक्ष की नियुक्ति भारतीय रिज़र्व बैंक का गवर्नर करता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) SEBI: अप्रैल 1988 में वित्त मंत्रालय के अधीन प्रशासनिक रूप से स्थापित, SEBI को 1992 के प्रतिभूति घोटाले के बाद SEBI अधिनियम 1992 से सांविधिक दर्जा मिला। त्रिविध भूमिका: निवेशक हितों की रक्षा, प्रतिभूति बाज़ार का विकास और उसका विनियमन। इसके पास अर्ध-विधायी (विनियम), अर्ध-न्यायिक (न्यायनिर्णयन, दंड) और कार्यकारी (निरीक्षण, प्रवर्तन) शक्तियाँ हैं। बोर्ड में अध्यक्ष, वित्त मंत्रालय के दो सदस्य, RBI का एक सदस्य और पाँच अन्य सदस्य होते हैं, सभी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त। आदेशों की अपील प्रतिभूति अपीलीय अधिकरण (SAT) और फिर सर्वोच्च न्यायालय में होती है। यह निक्षेपागार (NSDL, CDSL), म्यूचुअल फंड, FPI, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और 2015 में FMC के विलय के बाद जिंस डेरिवेटिव का भी नियमन करता है। अध्यक्ष की नियुक्ति सरकार करती है, RBI गवर्नर नहीं, इसलिए कथन 4 गलत है।
14. सूची-I (विधान) को सूची-II (उद्देश्य) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए: सूची-I: A. SARFAESI अधिनियम, 2002 B. ऋण वसूली एवं दिवालिया अधिनियम, 1993 (RDDBFI) C. दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 D. बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 सूची-II: 1. ऋण वसूली अधिकरणों की स्थापना 2. NCLT के माध्यम से समयबद्ध दिवाला समाधान 3. बैंकिंग कंपनियों का लाइसेंस और विनियमन 4. न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना बैंकों द्वारा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन
✅ सही उत्तर: (C) वसूली का ढाँचा: SARFAESI अधिनियम 2002 सुरक्षित ऋणदाताओं को 60 दिन के नोटिस (धारा 13(2)) के बाद, 1 लाख रुपये से अधिक के ऋण पर, न्यायालय गए बिना सुरक्षित परिसंपत्तियों का कब्ज़ा लेने और बेचने देता है, और परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (ARC) को NPA खरीदने की अनुमति देता है; अपील DRT में होती है। RDDBFI अधिनियम 1993 ने 20 लाख रुपये से अधिक की बकाया राशि के लिए ऋण वसूली अधिकरण (और अपीलीय DRAT) बनाए। IBC 2016 NCLT के अधीन समयबद्ध, ऋणदाता-संचालित समाधान (CIRP) देती है, जिसका नियामक भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) है। बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 (2020 संशोधन से सहकारी बैंकों पर भी लागू) लाइसेंस, शाखा, पूँजी, प्रबंधन और बोर्ड अधिक्रमण की RBI शक्ति से संबंधित है। NARCL ('बैड बैंक', 2021) तनावग्रस्त परिसंपत्तियाँ खरीदता है और IDRCL उनका प्रबंधन करता है। सही कूट: A-4, B-1, C-2, D-3।
15. भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वे माँग जमा स्वीकार नहीं कर सकतीं। 2. वे स्वयं पर आहरित चेक जारी नहीं कर सकतीं। 3. DICGC की जमा बीमा सुविधा NBFC के जमाकर्ताओं को उपलब्ध नहीं है। 4. NBFC की जमाएँ प्रति जमाकर्ता 5 लाख रुपये तक बीमित होती हैं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) NBFC बनाम बैंक: NBFC कंपनी अधिनियम 1956/2013 के अंतर्गत पंजीकृत और RBI अधिनियम 1934 (धारा 45-IA) के अंतर्गत RBI में पंजीकृत कंपनी है, जो ऋण, किराया-क्रय, पट्टा, प्रतिभूतियों में निवेश आदि करती है; वह माँग जमा स्वीकार नहीं कर सकती, भुगतान-निपटान प्रणाली में आहरिती के रूप में भाग नहीं लेती (स्वयं पर चेक जारी नहीं कर सकती), उसे DICGC जमा बीमा उपलब्ध नहीं है, और उसे CRR नहीं रखना पड़ता। बैंक माँग जमा स्वीकार करता है, चेक जारी करता है और DICGC (5 लाख रुपये तक) से आच्छादित है। NBFC की श्रेणियाँ: निवेश एवं ऋण कंपनियाँ, अवसंरचना वित्त कंपनियाँ, कोर निवेश कंपनियाँ, सूक्ष्म वित्त संस्थाएँ और आवास वित्त कंपनियाँ (NHB की शक्तियाँ 2019-2020 में RBI को मिलने के बाद अब RBI-विनियमित)। NBFC गतिविधियों में स्वचालित मार्ग से 100% तक FDI की अनुमति है। कथन 4 गलत है।
16. NBFC के लिए RBI के पैमाना-आधारित विनियमन (SBR) ढाँचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. NBFC को चार स्तरों में वर्गीकृत किया गया है: आधार, मध्य, ऊपरी और शीर्ष। 2. शीर्ष स्तर सामान्यतः रिक्त रहता है और तभी भरा जाता है जब RBI को ऊपरी स्तर के NBFC के संभावित प्रणालीगत जोखिम में उल्लेखनीय वृद्धि दिखे। 3. ऊपरी स्तर में चिह्नित NBFC को निर्धारित समय में स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होना आवश्यक है। 4. शीर्ष स्तर में परिसंपत्ति आकार के आधार पर दस सबसे बड़े NBFC होते हैं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) पैमाना-आधारित विनियमन (अक्टूबर 2022 से प्रभावी): RBI गतिविधि-आधारित से आकार/जोखिम-आधारित व्यवस्था में गया: आधार स्तर (छोटे, गैर-जमा NBFC, P2P मंच, खाता एग्रीगेटर, NBFC-MFI); मध्य स्तर (जमा स्वीकार करने वाले NBFC, स्टैंडअलोन प्राथमिक डीलर, आवास वित्त कंपनियाँ, 1,000 करोड़ रुपये या अधिक परिसंपत्ति वाले NBFC); ऊपरी स्तर (परिसंपत्ति आकार में शीर्ष 50 NBFC और RBI द्वारा स्कोरिंग पद्धति से चिह्नित अन्य; इन पर उन्नत पूँजी, शासन और चिह्नित होने के तीन वर्ष में सूचीबद्ध होने की आवश्यकता); शीर्ष स्तर (RBI को प्रणालीगत जोखिम में तीव्र वृद्धि दिखे तभी भरा जाता है, कठोर नियमों सहित)। कथन 4 का 'शीर्ष 10' गलत है; शीर्ष स्तर आकस्मिक श्रेणी है। कारण: IL&FS (2018) संकट ने दिखाया कि बड़े 'शैडो बैंक' प्रणालीगत जोखिम फैला सकते हैं।
17. RBI के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (PCA) ढाँचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह वित्तीय कमज़ोरी के संकेत दिखाने वाले बैंकों पर लागू एक पूर्व पर्यवेक्षी हस्तक्षेप है। 2. इसके ट्रिगर में पूँजी अनुपात, शुद्ध NPA स्तर और लगातार वर्षों तक ऋणात्मक आस्ति प्रतिफल का उल्लंघन शामिल हैं। 3. इसके अंतर्गत लाभांश वितरण, शाखा विस्तार और प्रबंधन पारिश्रमिक पर रोक लगाई जा सकती है। 4. इस ढाँचे को वित्त मंत्रालय की सिफारिश पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) लागू करता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) PCA: PCA ढाँचा (अप्रैल 2017 में संशोधित) RBI का पूर्व पर्यवेक्षी हस्तक्षेप उपकरण है: RBI पूँजी (CRAR/CET1), परिसंपत्ति गुणवत्ता (शुद्ध NPA), लाभप्रदता (आस्ति प्रतिफल) और लीवरेज की निगरानी करता है; निर्धारित जोखिम सीमाओं के उल्लंघन पर अनिवार्य कार्रवाइयाँ (लाभांश, शाखा विस्तार, निदेशकों के पारिश्रमिक पर रोक और गंभीर मामलों में नए ऋण पर अंकुश) और विवेकाधीन कार्रवाइयाँ (विशेष लेखा परीक्षा, परिचालन पुनर्गठन, प्रबंधन परिवर्तन) होती हैं। 2017-2019 में कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक PCA में थे और सुधार के बाद बाहर आए। बैंकिंग नियामक RBI है, SEBI नहीं, इसलिए कथन 4 गलत है। NBFC के लिए समान ढाँचा है (NBFC हेतु PCA, 2022)।
18. भारत में जमा बीमा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (DICGC) प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक 5 लाख रुपये तक की बैंक जमाओं का बीमा करता है। 2. DICGC भारतीय रिज़र्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। 3. बीमा प्रीमियम बीमित बैंक चुकाते हैं, जमाकर्ता नहीं। 4. 2021 के संशोधन के अंतर्गत अधिस्थगन में गए बैंक के जमाकर्ताओं को बीमित राशि 90 दिनों में मिल सकती है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) DICGC: 1978 में जमा बीमा निगम और भारतीय ऋण गारंटी निगम के विलय से स्थापित, यह सभी वाणिज्यिक बैंकों (विदेशी बैंक शाखाएँ, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक सहित) और पात्र सहकारी बैंकों की बचत, सावधि, चालू और आवर्ती जमाओं का प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक 5 लाख रुपये (मूलधन + ब्याज) तक बीमा करता है; PMC बैंक संकट के बाद फरवरी 2020 में सीमा 1 लाख से 5 लाख रुपये हुई। DICGC (संशोधन) अधिनियम 2021 ने अधिस्थगन के 90 दिनों के भीतर अंतरिम भुगतान सुनिश्चित किया (45 दिन में दावा सूची + 45 दिन में भुगतान)। प्रीमियम (प्रति 100 रुपये आकलनीय जमा पर निश्चित दर) बैंक चुकाता है। अपवर्जित: विदेशी सरकारों की जमाएँ, अंतर-बैंक जमाएँ, केंद्र/राज्य सरकारों की जमाएँ। चारों कथन सही हैं। [किसी हालिया परिवर्तन के लिए सीमा दोबारा जाँचें।]
19. भारत में बैंक उधार दरों के बेंचमार्क के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आधार दर प्रणाली ने जुलाई 2010 में बेंचमार्क प्रधान ऋण दर प्रणाली का स्थान लिया। 2. सीमांत निधि लागत आधारित उधार दर (MCLR) अप्रैल 2016 में आंतरिक बेंचमार्क के रूप में लागू हुई। 3. 1 अक्टूबर 2019 से नए अस्थिर-दर खुदरा और MSME ऋण नीतिगत रेपो दर जैसे बाह्य बेंचमार्क से जुड़े होने चाहिए। 4. बाह्य बेंचमार्क से जुड़े ऋणों में बैंक किसी भी समय बिना शर्त बेंचमार्क के ऊपर स्प्रेड बदल सकते हैं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) उधार बेंचमार्क: BPLR (1970 के दशक-2010, अपारदर्शी, उप-BPLR ऋण आम) -> आधार दर (जुलाई 2010, इससे नीचे ऋण नहीं) -> MCLR (अप्रैल 2016, आंतरिक लागत-आधारित, अवधि-वार MCLR और रीसेट खंड) -> बाह्य बेंचमार्क उधार दर (EBLR) (अक्टूबर 2019, नीतिगत परिवर्तनों का संचरण सुधारने हेतु)। अनुमत बाह्य बेंचमार्क: नीतिगत रेपो दर, FBIL द्वारा प्रकाशित 91-दिवसीय या 182-दिवसीय T-बिल प्रतिफल, या अन्य FBIL बेंचमार्क। EBLR में स्प्रेड (ऋण जोखिम और परिचालन लागत दर्शाने वाला) केवल उधारकर्ता के ऋण आकलन में भौतिक परिवर्तन पर बदला जा सकता है, इसलिए कथन 4 गलत है; बेंचमार्क कम से कम हर तीन माह में रीसेट होना चाहिए। EBLR में रेपो वृद्धि लगभग तुरंत उधारकर्ताओं तक पहुँचती है, जो अक्टूबर 2026 की दर वृद्धि के लिए प्रासंगिक है।
20. सूची-I (नियामक/संस्था) को सूची-II (क्षेत्र) से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए: सूची-I: A. SEBI B. IRDAI C. PFRDA D. NABARD सूची-II: 1. कृषि और ग्रामीण ऋण का पुनर्वित्त और विकास 2. प्रतिभूति बाज़ार का विनियमन 3. राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली सहित पेंशन क्षेत्र का विनियमन 4. बीमा क्षेत्र का विनियमन
✅ सही उत्तर: (B) वित्तीय नियामक: SEBI (SEBI अधिनियम 1992 से सांविधिक): प्रतिभूति बाज़ार, म्यूचुअल फंड, मध्यस्थ और निवेशक संरक्षण। IRDAI (IRDA अधिनियम 1999): बीमा का विनियमन और विकास। PFRDA (PFRDA अधिनियम 2013): NPS व अन्य पेंशन योजनाओं का नियामक। NABARD (1982, शिवरामन समिति की सिफारिश पर; RBI के कृषि ऋण विभाग और कृषि पुनर्वित्त एवं विकास निगम के पुनर्वित्त कार्य इसे मिले): कृषि और ग्रामीण ऋण की शीर्ष संस्था, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का पर्यवेक्षण करती है। RBI बैंकों, NBFC, भुगतान प्रणालियों और विदेशी मुद्रा का नियमन करता है। वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC, 2010, अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री) अंतर-नियामक समन्वय और वित्तीय स्थिरता हेतु गैर-सांविधिक निकाय है। सही कूट: A-2, B-4, C-3, D-1।
21. दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) कॉर्पोरेट दिवाला समाधान के लिए न्यायनिर्णायक प्राधिकारी है। 2. कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया 180 दिनों में पूरी होनी चाहिए, जो एक बार 90 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है। 3. समाधान योजना के लिए लेनदार समिति के कम से कम 66 प्रतिशत मतदान हिस्से का अनुमोदन आवश्यक है। 4. भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड की अध्यक्षता RBI का गवर्नर करता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) IBC 2016: संहिता (टी.के. विश्वनाथन / दिवालिया कानून सुधार समिति की अनुशंसा) ने कॉर्पोरेट, साझेदारी और व्यक्तिगत दिवाला कानूनों को एकीकृत किया। कॉर्पोरेट देनदार के लिए ऋणदाता-नियंत्रित CIRP वित्तीय ऋणदाता, परिचालन ऋणदाता (2020 के बाद 1 करोड़ रुपये का डिफ़ॉल्ट) या स्वयं देनदार के आवेदन के स्वीकार होने पर शुरू होती है; अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त होता है और अधिस्थगन (धारा 14) मुकदमे व वसूली रोक देता है। लेनदार समिति (वित्तीय ऋणदाता) 66% मतदान हिस्से से योजना पारित करती है (2018 में 75% से घटाया); धारा 29A जानबूझकर चूककर्ताओं और संबंधित व्यक्तियों को बोली से रोकती है। योजना पारित न होने पर कंपनी परिसमापन में जाती है (धारा 53 की प्राथमिकता क्रम)। IBBI सांविधिक नियामक है जिसका अध्यक्ष सरकार नियुक्त करती है - RBI गवर्नर नहीं। कथन 4 गलत है।
22. भारत सरकार की वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रधानमंत्री जन धन योजना 28 अगस्त 2014 को बैंकिंग तक सार्वभौमिक पहुँच पर ध्यान के साथ आरंभ हुई। 2. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा देती है। 3. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 20 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का दुर्घटना मृत्यु और विकलांगता कवर देती है। 4. अटल पेंशन योजना 60 वर्ष के बाद 1,000 से 5,000 रुपये मासिक गारंटीकृत पेंशन देती है। 5. जन धन खातों पर RuPay डेबिट कार्ड नहीं दिए जा सकते। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) सामाजिक सुरक्षा त्रयी + APY: PMJDY (2014): शून्य शेष बुनियादी बचत खाता, 2 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा वाला RuPay डेबिट कार्ड (अगस्त 2018 से पहले खुले खातों पर 1 लाख), ओवरड्राफ्ट सुविधा और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण हेतु 'JAM त्रयी' (जन धन-आधार-मोबाइल) - अतः कथन 5 गलत है। PMJJBY (2015): जीवन कवर 2 लाख रुपये, आयु 18-50, वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये (2022 में 330 से बढ़ा)। PMSBY (2015): दुर्घटना मृत्यु/पूर्ण विकलांगता पर 2 लाख और आंशिक विकलांगता पर 1 लाख रुपये, आयु 18-70, प्रीमियम 20 रुपये (2022 में 12 से बढ़ा)। APY (2015): 18-40 आयु के असंगठित श्रमिकों के लिए, अंशदान के अनुसार 60 वर्ष के बाद 1,000-5,000 रुपये मासिक गारंटीकृत पेंशन, और 2016 से पहले जुड़े पात्र अभिदाताओं हेतु सरकारी सह-अंशदान। आर्थिक समीक्षा 2025-26 में लगभग 55 करोड़ जन धन खाते दर्ज हैं। [प्रीमियम और खाता आँकड़े pmjdy.gov.in / jansuraksha.gov.in पर दोबारा जाँचें।]
23. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इनकी स्थापना नरसिंहम कार्य समूह की सिफारिशों के आधार पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के अंतर्गत हुई। 2. इनकी अंश पूँजी का 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, 15 प्रतिशत राज्य सरकार और 35 प्रतिशत प्रायोजक बैंक के पास है। 3. पहले RRB 2 अक्टूबर 1975 को स्थापित हुए। 4. इनका नियमन SEBI करता है और पर्यवेक्षण ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) RRB: सहकारी संस्थाओं की स्थानीय निकटता और वाणिज्यिक बैंकों की व्यावसायिकता को जोड़ने, छोटे-सीमांत किसानों, कारीगरों और ग्रामीण श्रमिकों की सेवा हेतु बने। नरसिंहम कार्य समूह (1975) ने सिफारिश की; 2 अक्टूबर 1975 को पाँच RRB बने (पहला मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश), फिर RRB अधिनियम 1976। स्वामित्व: केंद्र 50%, राज्य 15%, प्रायोजक बैंक 35%। इनका नियमन RBI और पर्यवेक्षण नाबार्ड करता है (SEBI नहीं), और ये प्राथमिकता क्षेत्र मानदंडों के अधीन हैं; 2005-06 से हुए समामेलनों ने इनकी संख्या काफी घटाई। कथन 4 गलत है।
24. बैंकिंग क्षेत्र सुधारों पर नरसिंहम समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पहली समिति (1991) ने सांविधिक चलनिधि अनुपात (SLR) को चरणबद्ध रूप से घटाकर 25 प्रतिशत करने की सिफारिश की। 2. पहली समिति ने बकाया की त्वरित वसूली के लिए विशेष अधिकरण स्थापित करने की सिफारिश की। 3. दूसरी समिति (1998) ने पहली समिति से अधिक पूँजी पर्याप्तता की सिफारिश की। 4. पहली समिति ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का लक्ष्य 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की सिफारिश की। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) नरसिंहम समितियाँ: समिति I (वित्तीय प्रणाली, 1991, एम. नरसिंहम) ने 1991 के वित्तीय क्षेत्र सुधारों की रूपरेखा दी: SLR को चरणबद्ध ढंग से 25% और CRR को 3-5% तक लाना; आय पहचान, परिसंपत्ति वर्गीकरण व प्रावधान के विवेकपूर्ण मानदंड; बेसल मानक के अनुरूप मार्च 1996 तक 8% पूँजी पर्याप्तता; ब्याज दरों का विनियमन-मुक्ति; निजी बैंक खोलने की स्वतंत्रता; निर्देशित ऋण में कमी (प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लगभग 10% तक घटाना, बढ़ाना नहीं); और विशेष अधिकरण - जिनसे ऋण वसूली अधिकरण (RDDBFI अधिनियम 1993) बने। समिति II (बैंकिंग क्षेत्र सुधार, 1998) ने पूँजी पर्याप्तता 2000-01 तक 9% और 2002 तक 10%, मज़बूत बैंकों के विलय, कमज़ोर बैंकों के लिए 'संकीर्ण बैंकिंग' और PSB में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की सिफारिश की। अतः कथन 4 गलत है - समिति कम निर्देशित ऋण चाहती थी।
25. घरेलू वाणिज्यिक बैंकों के लिए RBI के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) मानदंडों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कुल PSL लक्ष्य समायोजित शुद्ध बैंक ऋण या तुलन-पत्र-बाह्य जोखिम के ऋण समतुल्य, जो भी अधिक हो, का 40 प्रतिशत है। 2. कृषि के लिए उप-लक्ष्य 18 प्रतिशत है। 3. कमज़ोर वर्गों को ऋण का उप-लक्ष्य 12 प्रतिशत है। 4. किसी भी राशि के आवास ऋण प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के रूप में पात्र हैं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) PSL: प्राथमिकता क्षेत्र (1972 से, बैंकों हेतु 1980 में 40% लक्ष्य के साथ औपचारिक) हैं: कृषि, MSME, निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और कमज़ोर वर्ग। घरेलू वाणिज्यिक बैंकों के लक्ष्य: कुल 40% ANBC/CEOBSE (जो अधिक हो); कृषि 18% (छोटे-सीमांत किसानों हेतु 10% उप-लक्ष्य); सूक्ष्म उद्यम 7.5%; कमज़ोर वर्ग 12%। लघु वित्त बैंक: 75%; 20 या अधिक शाखाओं वाले विदेशी बैंक: 40%। लक्ष्य से चूकने वाले बैंक कमी की राशि NABARD के ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (RIDF) जैसे कोषों में जमा करते हैं; PSL प्रमाणपत्र (PSLC) अधिशेष उपलब्धि के व्यापार की अनुमति देते हैं। आवास ऋण केवल निर्धारित सीमाओं तक (शहर श्रेणी और राशि पर निर्भर) पात्र हैं, इसलिए कथन 4 गलत है।