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टॉपिक 01 – वृहद अवलोकन GSDP विकसित राजस्थान

55 प्रश्न · विकल्प पर क्लिक करें, उत्तर व व्याख्या दिखेगी
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1. राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रचलित मूल्यों पर राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग कितना है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर ₹18.75 लाख करोड़ (₹18,75,413 करोड़) है। 📘 विस्तार से समझें: अन्य विकल्प भी वास्तविक आँकड़े हैं, इसलिए यह प्रश्न भ्रम पैदा करता है: – ₹16.85 लाख करोड़ = 2025-26 का प्रचलित मूल्यों पर NSDP (शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद); – ₹17.01 लाख करोड़ = 2024-25 (संशोधित अनुमान-I) का प्रचलित GSDP; – ₹21.52 लाख करोड़ = बजट 2026-27 में 2026-27 के लिए अनुमानित GSDP (लगभग 15% वृद्धि मानकर)। स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 2025-26 का GSDP ₹9.82 लाख करोड़ (₹9,81,807 करोड़) है। प्रचलित मूल्यों में मूल्य-वृद्धि (मुद्रास्फीति) शामिल होती है, स्थिर मूल्यों में नहीं; इसलिए वास्तविक आर्थिक वृद्धि स्थिर मूल्यों से मापी जाती है। GSDP की श्रृंखला: 2021-22 – ₹11.96 लाख करोड़; 2022-23 – ₹13.49; 2023-24 – ₹15.22; 2024-25 – ₹17.01; 2025-26 – ₹18.75 लाख करोड़ (प्रचलित)। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर GSDP? – ₹9,81,807 करोड़ • 2025-26 में प्रचलित मूल्यों पर NSDP? – ₹16,85,118 करोड़ • बजट 2026-27 में अनुमानित GSDP? – ₹21,52,100 करोड़
2. राजस्थान की आर्थिक वृद्धि (आर्थिक समीक्षा 2025-26) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: वर्ष 2025-26 में स्थिर (2011-12) मूल्यों पर राज्य की GSDP वृद्धि दर 8.66% अनुमानित है, जो इसी वर्ष की राष्ट्रीय वास्तविक GDP वृद्धि दर (लगभग 7.4%) से अधिक है। कथन II: प्रचलित मूल्यों पर GSDP की वृद्धि दर 2021-22 से 2025-26 के बीच प्रत्येक वर्ष घटी है या लगभग स्थिर रही है – 17.46% से घटकर 10.24%। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C) 📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: स्थिर मूल्यों पर वृद्धि-दर की श्रृंखला: 2021-22 – 8.93%; 2022-23 – 6.36%; 2023-24 – 7.66%; 2024-25 – 8.77%; 2025-26 – 8.66%। प्रचलित मूल्यों पर: 17.46% → 12.80% → 12.85% → 11.77% → 10.24% (2022-23 से 2023-24 में मामूली वृद्धि, शेष वर्षों में गिरावट; समग्र प्रवृत्ति घटती)। प्रचलित वृद्धि-दर में गिरावट का एक बड़ा कारण मुद्रास्फीति का घटना है – राज्य का थोक मूल्य सूचकांक (आधार 1999-2000) में परिवर्तन 2021-22 के 9.93% से घटकर 2025-26 में केवल 0.76% रह गया। अर्थात् 'नाममात्र' (nominal) वृद्धि धीमी हुई, किंतु 'वास्तविक' (real) वृद्धि 8.5% के आसपास बनी रही। प्रचलित वृद्धि – स्थिर वृद्धि ≈ अंतर्निहित मूल्य-अपस्फीतिक (GSDP deflator) में परिवर्तन; 2025-26 में यह अंतर लगभग 1.6 प्रतिशत अंक है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2022-23 में स्थिर मूल्यों पर वृद्धि-दर? – 6.36% (पाँच वर्षों में न्यूनतम) • 2025-26 में राज्य WPI में परिवर्तन? – 0.76% • प्रचलित व स्थिर वृद्धि-दर के अंतर को क्या दर्शाता है? – मूल्य-स्तर में परिवर्तन (अपस्फीतिक)
3. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में प्रचलित मूल्यों पर राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय कितनी है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर ₹2,02,349 है – पहली बार ₹2 लाख की सीमा पार। 📘 विस्तार से समझें: प्रति व्यक्ति आय = प्रचलित/स्थिर मूल्यों पर NSDP ÷ वर्ष के मध्य (1 अक्टूबर) की अनुमानित जनसंख्या। 2025-26 के लिए राज्य की अनुमानित जनसंख्या (1 अक्टूबर 2025) लगभग 8.33 करोड़ है। आँकड़े: प्रचलित मूल्यों पर – 2024-25 में ₹1,85,095, 2025-26 में ₹2,02,349 (लगभग 9.3% वृद्धि); स्थिर (2011-12) मूल्यों पर – 2024-25 में ₹95,762, 2025-26 में ₹1,03,189 (पहली बार ₹1 लाख पार)। राष्ट्रीय औसत से तुलना: भारत की प्रति व्यक्ति आय 2025-26 में प्रचलित मूल्यों पर लगभग ₹2.20 लाख और स्थिर मूल्यों पर लगभग ₹1.22 लाख है; अर्थात राजस्थान अब भी राष्ट्रीय औसत से नीचे है। प्रति व्यक्ति आय NSDP (GSDP नहीं) से निकाली जाती है, क्योंकि NSDP में से स्थायी पूँजी का उपभोग (घिसावट) घटा दिया जाता है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय? – ₹1,03,189 • प्रति व्यक्ति आय निकालने में किस समुच्चय का उपयोग? – NSDP • राज्य की अनुमानित जनसंख्या (1 अक्टूबर 2025)? – लगभग 8.33 करोड़
4. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार स्थिर (2011-12) मूल्यों पर राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में 2025-26 के दौरान निम्नलिखित क्षेत्रों के हिस्से को घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए: 1. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र 2. उद्योग क्षेत्र 3. सेवा क्षेत्र नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही क्रम: सेवा (46.46%) > उद्योग (28.21%) > कृषि (25.33%)। 📘 विस्तार से समझें: दोनों मूल्य-आधारों पर हिस्सा अलग है – यही परीक्षा का जाल है: – स्थिर मूल्यों पर (2025-26): कृषि 25.33%, उद्योग 28.21%, सेवा 46.46%; – प्रचलित मूल्यों पर (2025-26): कृषि 25.74%, उद्योग 26.55%, सेवा 47.71%। दोनों में क्रम सेवा > उद्योग > कृषि ही रहता है, किंतु प्रचलित मूल्यों पर उद्योग व कृषि का अंतर बहुत कम (0.81 अंक) है। प्रवृत्ति: 2021-22 में स्थिर मूल्यों पर कृषि 28.18%, उद्योग 28.62%, सेवा 43.20% थे; अर्थात् 5 वर्षों में कृषि का हिस्सा लगभग 3 अंक घटा और सेवा का लगभग 3 अंक बढ़ा – संरचनात्मक परिवर्तन (structural transformation) का संकेत। फिर भी राज्य की आधी से अधिक कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर है – अर्थात् उत्पादकता का अंतर। उद्योग में विनिर्माण, खनन, निर्माण (construction) व विद्युत-गैस-जलापूर्ति शामिल हैं; सेवा में व्यापार, होटल, परिवहन, वित्त, स्थावर संपदा, लोक प्रशासन आदि। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में प्रचलित मूल्यों पर सेवा क्षेत्र का हिस्सा? – 47.71% • 2021-22 में स्थिर मूल्यों पर कृषि का हिस्सा? – 28.18% • निर्माण (construction) किस क्षेत्र में? – उद्योग (द्वितीयक)
5. अभिकथन (A): वर्ष 2025-26 में राज्य के GSVA में कृषि क्षेत्र का हिस्सा प्रचलित मूल्यों पर (25.74%) स्थिर मूल्यों (25.33%) की तुलना में अधिक, जबकि उद्योग का हिस्सा प्रचलित मूल्यों पर (26.55%) स्थिर मूल्यों (28.21%) की तुलना में कम है। कारण (R): आधार वर्ष 2011-12 के बाद से कृषि उत्पादों की कीमतें औद्योगिक उत्पादों की कीमतों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ी हैं।
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। 📘 विस्तार से समझें: किसी क्षेत्र का प्रचलित-मूल्य हिस्सा = (स्थिर-मूल्य उत्पादन × उस क्षेत्र का मूल्य-सूचकांक)। यदि किसी क्षेत्र की कीमतें औसत से अधिक बढ़ीं (सापेक्ष कीमत बढ़ी), तो प्रचलित मूल्यों पर उसका हिस्सा स्थिर मूल्यों से अधिक दिखेगा। कृषि व पशुधन उत्पादों (दूध, सब्ज़ियाँ, दालें, तिलहन) की कीमतें 2011-12 के बाद तेज़ी से बढ़ीं, जबकि अनेक विनिर्मित वस्तुओं की कीमतें अपेक्षाकृत धीमी बढ़ीं – इसलिए उद्योग का प्रचलित हिस्सा कम दिखता है ('व्यापार की शर्तें' – terms of trade – कृषि के पक्ष में)। इसी तरह सेवा क्षेत्र का हिस्सा प्रचलित मूल्यों पर (47.71%) स्थिर (46.46%) से अधिक है। परीक्षा-सूत्र: 'स्थिर मूल्य = वास्तविक मात्रा; प्रचलित मूल्य = मात्रा × वर्तमान कीमत'। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर उद्योग का हिस्सा? – 28.21% • प्रचलित व स्थिर हिस्से का अंतर किस कारण? – सापेक्ष कीमतों में परिवर्तन • स्थिर मूल्यों का आधार वर्ष? – 2011-12
6. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राज्य के कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के मूल्य वर्धन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रचलित मूल्यों पर पशुधन उप-क्षेत्र का हिस्सा (लगभग 49%) फसल उप-क्षेत्र (लगभग 43%) से अधिक है। 2. स्थिर मूल्यों पर 2025-26 में फसल उप-क्षेत्र की वृद्धि ऋणात्मक रही, जिससे कृषि क्षेत्र की कुल वृद्धि घटकर मात्र 0.22% रह गई। 3. मत्स्य उप-क्षेत्र का हिस्सा सभी उप-क्षेत्रों में न्यूनतम है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: तीनों कथन सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: 2025-26 (प्रचलित मूल्य) में कृषि GVA (लगभग ₹4.41 लाख करोड़) का उप-क्षेत्रवार हिस्सा: पशुधन 49.35%, फसल 42.61%, वानिकी 7.49%, मत्स्य 0.54%। स्थिर मूल्यों पर वृद्धि: पशुधन +5.20% (सर्वाधिक), वानिकी +2.67%, मत्स्य +0.87%, फसल −5.01%; परिणामस्वरूप पूरे कृषि क्षेत्र की वृद्धि 2024-25 के 7.56% से घटकर 2025-26 में 0.22% रह गई। कारण: खरीफ अनाज उत्पादन में लगभग 21.6% गिरावट (खाद्यान्न 309.62 से घटकर 283.98 लाख टन)। पशुधन उत्पादों में दूध का हिस्सा लगभग 79.6%, मांस 7.46%, अंडा 0.67%। निष्कर्ष: राजस्थान में पशुपालन फसल-जोखिम (सूखा/अनियमित वर्षा) के विरुद्ध 'बीमा' की तरह कार्य करता है – इसी कारण 'विविधीकरण' (डेयरी, बागवानी, मत्स्य) राज्य की कृषि-नीति का केंद्र है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में कृषि क्षेत्र की स्थिर मूल्य वृद्धि? – 0.22% • पशुधन उत्पादों में दूध का हिस्सा? – लगभग 79.6% • 2024-25 में कुल खाद्यान्न उत्पादन? – 309.62 लाख मीट्रिक टन (रिकॉर्ड)
7. राज्य आय की अवधारणाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. GSDP = GSVA (मूल कीमतों पर) + उत्पाद कर − उत्पाद सब्सिडी। 2. NSDP = GSDP − स्थायी पूँजी का उपभोग (घिसावट)। 3. प्रति व्यक्ति आय की गणना GSDP को राज्य की कुल जनसंख्या से भाग देकर की जाती है। 4. राजस्थान में स्थिर मूल्यों के अनुमान का वर्तमान आधार वर्ष 2011-12 है। 5. राज्य आय के अनुमान राजस्थान में आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (आयोजना विभाग) द्वारा तैयार किए जाते हैं। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) 📌 विश्लेषण: केवल चार कथन (1, 2, 4 और 5) सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: कथन 3 गलत है – प्रति व्यक्ति आय = NSDP (प्रचलित/स्थिर) ÷ वर्ष के मध्य की अनुमानित जनसंख्या; GSDP से नहीं। मूल अवधारणाएँ: (1) GVA (मूल कीमतों पर) = उत्पादन का मूल्य − मध्यवर्ती उपभोग; (2) GSDP (बाज़ार कीमतों पर) = GSVA + उत्पाद कर − उत्पाद सब्सिडी; (3) NSDP = GSDP − स्थायी पूँजी उपभोग; (4) 'राज्य आय' सामान्यतः NSDP को कहा जाता है। अनुमान-चक्र: अग्रिम अनुमान (AE – बजट के साथ) → संशोधित अनुमान-I → संशोधित अनुमान-II → अंतिम। आर्थिक समीक्षा 2025-26 में 2025-26 AE, 2024-25 RE-I और 2023-24 RE-II है। केंद्र स्तर पर राष्ट्रीय लेखा का संकलन NSO (MoSPI) करता है; केंद्र ने GDP का नया आधार वर्ष 2022-23 अपनाने की प्रक्रिया आरंभ की है, किंतु राज्य समीक्षा 2025-26 में आधार 2011-12 ही है। ध्यान दें: राज्य का थोक मूल्य सूचकांक (WPI) अलग आधार 1999-2000 पर और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) आधार 2011-12 पर है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • राज्य आय सामान्यतः किसे कहते हैं? – NSDP • आर्थिक समीक्षा 2025-26 में 2023-24 के आँकड़े किस स्तर के? – संशोधित अनुमान-II • राज्य WPI का आधार वर्ष? – 1999-2000
8. राज्य की निवेश व साख संबंधी स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: वर्ष 2024-25 में प्रचलित मूल्यों पर राज्य का सकल स्थायी पूँजी निर्माण (GFCF) GSDP का लगभग 29.5% रहा, और 2021-22 से यह अनुपात लगातार बढ़ा है। कथन II: 30 सितंबर 2025 तक राज्य में वाणिज्यिक बैंकों की कुल साख (ऋण) ₹10 लाख करोड़ से अधिक हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है। 📘 विस्तार से समझें: GFCF (प्रचलित): 2021-22 – ₹3.42 लाख करोड़ (GSDP का 28.64%); 2022-23 – ₹3.90 लाख करोड़ (28.94%); 2023-24 – ₹4.49 लाख करोड़ (29.52%); 2024-25 – ₹5.02 लाख करोड़ (29.53%)। GFCF अर्थव्यवस्था में मशीनरी, भवन, अवसंरचना आदि पर नए निवेश को मापता है; 25-30% का अनुपात उच्च निवेश-दर माना जाता है, जो भावी वृद्धि का आधार है। कथन II गलत: वाणिज्यिक बैंक साख 30 सितंबर 2025 तक लगभग ₹6.92 लाख करोड़ (₹6,91,943 करोड़) थी; 2024-25 में ₹6.12 लाख करोड़ और 2023-24 में ₹5.38 लाख करोड़। राज्य में साख-जमा (CD) अनुपात राष्ट्रीय औसत के आसपास/ऊपर रहता है – अर्थात् जमा का बड़ा भाग राज्य में ही ऋण के रूप में लगता है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) का संयोजक बैंक ऑफ़ बड़ौदा है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2021-22 में GFCF/GSDP अनुपात? – 28.64% • 30 सितंबर 2025 तक वाणिज्यिक बैंक साख? – ₹6,91,943 करोड़ • राजस्थान SLBC का संयोजक बैंक? – बैंक ऑफ़ बड़ौदा
9. सूची-I (आर्थिक सूचक) को सूची-II (आर्थिक समीक्षा 2025-26 में प्रयुक्त/संदर्भित आधार) से सुमेलित कीजिए: सूची-I: (अ) राजस्थान का थोक मूल्य सूचकांक (WPI) (ब) राजस्थान का कृषि उत्पादन सूचकांक (स) स्थिर मूल्यों पर राज्य आय (GSDP) व औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (द) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (राष्ट्रीय पुरानी श्रृंखला) सूची-II: (1) 2012 = 100 (2) 1999-2000 = 100 (3) त्रैवार्षिक औसत 2005-06 से 2007-08 = 100 (4) 2011-12
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही सुमेल: राज्य WPI – 1999-2000; कृषि उत्पादन सूचकांक – TE 2007-08; GSDP व IIP – 2011-12; CPI (पुरानी राष्ट्रीय श्रृंखला) – 2012। 📘 विस्तार से समझें: मूल्य: राज्य IIP (आधार 2011-12) – 2024-25 में 154.38, 2025-26 (नवंबर 2025 तक, अनंतिम) में 153.29, अर्थात् मामूली गिरावट। राज्य WPI – 2024-25 में 396.72, 2025-26 में 399.74 (वृद्धि 0.76%); 2023-24 में WPI में −0.09% (ऋणात्मक) परिवर्तन रहा था। कृषि उत्पादन सूचकांक – 2021-22 में 201.57, 2024-25 में 243.55 (रिकॉर्ड खाद्यान्न वर्ष)। भेद याद रखें: राष्ट्रीय WPI का आधार 2011-12 है, जबकि राजस्थान का अपना WPI 1999-2000 आधार पर आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय संकलित करता है – परीक्षा में यह भेद पूछा जाता है। CPI की पुरानी राष्ट्रीय श्रृंखला का आधार 2012 है (MoSPI नई श्रृंखला की ओर अग्रसर)। राज्य की खुदरा मुद्रास्फीति 2023-24 के लगभग 6.4% से घटकर 2024-25 में लगभग 4.3% रही। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 (नवंबर तक) राज्य IIP? – 153.29 • किस वर्ष राज्य WPI में ऋणात्मक परिवर्तन? – 2023-24 (−0.09%) • 2024-25 में कृषि उत्पादन सूचकांक? – 243.55
10. अभिकथन (A): वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में राज्य का कुल खाद्यान्न उत्पादन 2024-25 की तुलना में घटा है। कारण (R): वर्ष 2025-26 में राज्य में तिलहन उत्पादन 2024-25 की तुलना में बढ़ा है।
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है। 📘 विस्तार से समझें: खाद्यान्न: 2024-25 – 309.62 लाख मीट्रिक टन (अब तक का रिकॉर्ड) → 2025-26 – 283.98 लाख टन (लगभग 8.3% कमी); कारण – खरीफ अनाज में लगभग 21.6% गिरावट (114.24 से 89.55 लाख टन), जबकि रबी अनाज लगभग स्थिर (195.38 → 194.43)। तिलहन: 93.73 → 100.46 लाख टन (लगभग 7.2% वृद्धि) – सरसों व मूँगफली के कारण। तिलहन वृद्धि खाद्यान्न में गिरावट का कारण नहीं है (दोनों भिन्न फसल-समूह हैं), इसलिए R, A की व्याख्या नहीं करता। अन्य: गन्ना 4.65 → 3.61 लाख टन (−22%); कपास 17.88 → 17.94 लाख गाँठ (+0.34%)। 2023-24 में राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान प्रथम – बाजरा (41.34%), रेपसीड-सरसों (43.43%), कुल तिलहन (23.61%), मोटे अनाज (14.21%), ग्वार (88.80%); मूँगफली में द्वितीय; चना, कुल दलहन, सोयाबीन में तृतीय। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन? – 309.62 लाख टन • 2025-26 में तिलहन उत्पादन? – 100.46 लाख टन • ग्वार उत्पादन में राजस्थान का राष्ट्रीय हिस्सा (2023-24)? – 88.80%
11. राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: इसे विभागवार ढाँचे के स्थान पर 'विकसित राजस्थान @2047' विज़न के अनुरूप 13 परिणाम-आधारित विषयगत अध्यायों में तैयार किया गया है। कथन II: इसका पहला अध्याय 'कृषि-खाद्य प्रणालियों में रूपांतरण' तथा अंतिम अध्याय 'वित्तीय प्रबंधन एवं आर्थिक नीति' से संबंधित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C) 📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: 13 अध्याय: (1) कृषि-खाद्य प्रणालियों में रूपांतरण, (2) स्वास्थ्य एवं कल्याण, (3) शिक्षा एवं ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था, (4) सामाजिक सशक्तीकरण एवं समावेशन, (5) औद्योगिक, खनन एवं आर्थिक वृद्धि, (6) पर्यटन एवं सांस्कृतिक विकास, (7) आधारभूत अवसंरचना, (8) जल सुरक्षा एवं अनुकूलता, (9) पर्यावरणीय स्थायित्व एवं जलवायु अनुकूलता, (10) ग्रामीण विकास, (11) शहरी विकास, (12) प्रभावी शासन एवं सार्वजनिक सेवाएँ, (13) वित्तीय प्रबंधन एवं आर्थिक नीति। समीक्षा आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (आयोजना विभाग) तैयार करता है और यह बजट (11 फरवरी 2026) से पूर्व विधानसभा में प्रस्तुत की गई। प्रत्येक अध्याय में 'विकसित राजस्थान @2047' विज़न, मध्यम-अवधि (2030) व दीर्घकालिक (2047) कार्य-योजना तथा उपलब्धियाँ दी गई हैं। इसमें 'सर्वोत्तम प्रथाएँ' (best practices) भी हैं, जैसे – मातृ-शिशु पोषण हेतु 'कैश प्लस मॉडल', 'समग्र कैरियर शिक्षा कार्यक्रम'। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • आर्थिक समीक्षा कौन तैयार करता है? – आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय • अध्याय 8 का विषय? – जल सुरक्षा एवं अनुकूलता • समीक्षा किस विज़न से संरेखित? – विकसित राजस्थान @2047
12. 'विकसित राजस्थान @2047' विज़न दस्तावेज़ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसमें वर्ष 2047 तक राज्य को 4.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 2. इसे वर्ष 2025 में राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया, और इसमें 2030, 2035 व 2040 के मध्यवर्ती पड़ाव निर्धारित हैं। 3. इसके लक्ष्य केवल आर्थिक संकेतकों (GSDP, निवेश) तक सीमित हैं; सामाजिक संकेतक (शिशु मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा) इसमें सम्मिलित नहीं हैं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 2 सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: विज़न दस्तावेज़ अगस्त 2025 में मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित और अक्टूबर 2025 में जारी हुआ; यह 'विकसित भारत @2047' से संरेखित है। प्राथमिकता-वर्ग: युवा, महिला, किसान, वंचित (गरीब)। चार विषय-समूह: (1) जन-कल्याण एवं सामाजिक सशक्तीकरण, (2) तीव्र विकास, समृद्धि एवं रोजगार, (3) अवसंरचना एवं सतत विकास, (4) नीति, वित्त एवं सुशासन – जिनके अंतर्गत 13 क्षेत्र (आर्थिक समीक्षा के 13 अध्याय इन्हीं पर आधारित)। कथन 3 गलत – सामाजिक लक्ष्य भी हैं: जीवन प्रत्याशा 77 वर्ष, शिशु मृत्यु दर 10 से कम, MMR लगभग 15, 100% नामांकन, महिला कार्य-भागीदारी में भारी वृद्धि, GSVA में विनिर्माण का हिस्सा 20%, घरेलू पर्यटक आगमन में राज्य का हिस्सा 15%। मध्यावधि लक्ष्य: 2029-30 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था (नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत)। बजट 2026-27 'विकसित राजस्थान' के 10 स्तंभों पर आधारित था। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • विकसित राजस्थान का मध्यावधि आर्थिक लक्ष्य? – 2029-30 तक 350 बिलियन डॉलर • 2047 तक जीवन प्रत्याशा का लक्ष्य? – 77 वर्ष • बजट 2026-27 कितने स्तंभों पर आधारित? – 10
13. वर्ष 2025-26 में राजस्थान के GSDP की वृद्धि दर प्रचलित मूल्यों पर 10.24% और स्थिर मूल्यों पर 8.66% है। इस आधार पर GSDP अंतर्निहित मूल्य-अपस्फीतिक (implicit deflator) में लगभग कितनी वृद्धि हुई?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर लगभग 1.45% है। 📘 विस्तार से समझें: अपस्फीतिक = (प्रचलित GSDP ÷ स्थिर GSDP) × 100। वृद्धि-दरों से: (1 + प्रचलित वृद्धि) = (1 + स्थिर वृद्धि) × (1 + अपस्फीतिक वृद्धि) ⇒ अपस्फीतिक वृद्धि = 1.1024 ÷ 1.0866 − 1 ≈ 0.0145 = 1.45%। सरल अनुमान (10.24 − 8.66 = 1.58 अंक) भी इसके निकट है। सीधी गणना से जाँच: अपस्फीतिक 2024-25 = 17,01,190 ÷ 9,03,564 ≈ 1.883 और 2025-26 = 18,75,413 ÷ 9,81,807 ≈ 1.910; वृद्धि ≈ 1.45%। अर्थ: 2011-12 की तुलना में राज्य में कीमत-स्तर लगभग 1.91 गुना है। विकल्प 0.76% राज्य WPI में परिवर्तन है – WPI केवल थोक वस्तुओं को मापता है, जबकि GSDP अपस्फीतिक संपूर्ण अर्थव्यवस्था (सेवाओं सहित) का व्यापकतम मूल्य-सूचक है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में GSDP अपस्फीतिक (2011-12=1)? – लगभग 1.91 • संपूर्ण अर्थव्यवस्था का व्यापकतम मूल्य-सूचक? – GDP/GSDP अपस्फीतिक • 2025-26 में राज्य WPI परिवर्तन? – 0.76%
14. स्थिर (2011-12) मूल्यों पर राजस्थान की GSDP वृद्धि दर के आधार पर निम्नलिखित वर्षों को घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए: 1. 2021-22 2. 2023-24 3. 2024-25 4. 2025-26 नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही क्रम: 2021-22 (8.93%) > 2024-25 (8.77%) > 2025-26 (8.66%) > 2023-24 (7.66%)। 📘 विस्तार से समझें: पूर्ण श्रृंखला (स्थिर मूल्य): 2021-22 – 8.93%; 2022-23 – 6.36%; 2023-24 – 7.66%; 2024-25 – 8.77%; 2025-26 – 8.66%। 2021-22 की ऊँची वृद्धि आंशिक रूप से कोविड-19 के 2020-21 के निम्न आधार (base effect) का परिणाम थी। 2022-23 पाँच वर्षों में न्यूनतम रहा। 2024-25 में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन (309.62 लाख टन) से कृषि वृद्धि 7.56% रही, जबकि 2025-26 में कृषि वृद्धि केवल 0.22% होने पर भी सेवा क्षेत्र (हिस्सा 44.74% से बढ़कर 46.46%) ने कुल वृद्धि को 8.66% पर बनाए रखा। राज्य की वृद्धि 2025-26 में राष्ट्रीय वास्तविक वृद्धि (लगभग 7.4%) से अधिक है। स्थिर-मूल्य GSDP: ₹7.25 लाख करोड़ (2021-22) से बढ़कर ₹9.82 लाख करोड़ (2025-26)। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • पाँच वर्षों में न्यूनतम वृद्धि वाला वर्ष? – 2022-23 (6.36%) • 2021-22 की ऊँची वृद्धि का एक कारण? – निम्न आधार प्रभाव (कोविड) • 2021-22 में स्थिर GSDP? – ₹7,25,464 करोड़
15. आर्थिक समीक्षा 2025-26 में प्रति व्यक्ति आय की गणना हेतु प्रयुक्त राजस्थान की अनुमानित जनसंख्या (1 अक्टूबर 2025) लगभग कितनी है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर लगभग 8.33 करोड़ है। 📘 विस्तार से समझें: जनगणना 2011 में राज्य की जनसंख्या 6.85 करोड़ थी (देश का 5.66%, 8वाँ स्थान)। 2011 के बाद जनगणना न होने से आर्थिक समीक्षा 'राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग' के तकनीकी समूह के प्रक्षेपण (projection) पर आधारित अनुमानित वर्ष-मध्य जनसंख्या का उपयोग करती है; 1 अक्टूबर 2025 के लिए यह लगभग 8.33 करोड़ है और राज्य जनसंख्या में देश में लगभग छठे स्थान पर अनुमानित है। जाँच: प्रचलित NSDP ₹16,85,118 करोड़ ÷ 8.33 करोड़ ≈ ₹2.02 लाख (प्रति व्यक्ति आय ₹2,02,349)। अगली जनगणना 2027 (संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027; हिमाच्छादित क्षेत्रों हेतु 1 अक्टूबर 2026) डिजिटल होगी और इसमें जातिगत गणना भी शामिल है। राज्य का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किमी (देश का 10.41%) है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • जनगणना 2011 में राज्य की जनसंख्या? – 6.85 करोड़ • अगली जनगणना की संदर्भ तिथि? – 1 मार्च 2027 • राज्य का क्षेत्रफल-हिस्सा? – 10.41%
16. सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में राजस्थान की स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: नीति आयोग के SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 में राजस्थान 'फ्रंट रनर' (65-99 अंक) श्रेणी में है। कथन II: राजस्थान SDG इंडेक्स 5.0 (मार्च 2024) में जैसलमेर सर्वोच्च और झुंझुनूं निम्नतम अंक वाला जिला रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन II उलटा है – राजस्थान SDG इंडेक्स 5.0 (जिला-स्तरीय) में झुंझुनूं प्रथम (लगभग 66.44), उसके बाद नागौर व सीकर रहे, जबकि जैसलमेर अंतिम (लगभग 50.63) रहा; राज्य का समग्र अंक लगभग 59.11 ('परफ़ॉर्मर')। SDG श्रेणियाँ (नीति आयोग): एचीवर – 100; फ्रंट रनर – 65-99; परफ़ॉर्मर – 50-64; एस्पिरेंट – 0-49। राज्य में SDG समन्वय का नोडल विभाग आयोजना विभाग का आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय है, जिसने जिलों हेतु 'जिला SDG सूचकांक' विकसित किया। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार SDG इंडिया इंडेक्स 2020-21 से 2023-24 के बीच राज्य के अंक लक्ष्य-1 (गरीबी उन्मूलन) में 19, लक्ष्य-5 (लैंगिक समानता) में 13 और लक्ष्य-2 (शून्य भुखमरी) में 11 अंक सुधरे। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • राजस्थान SDG इंडेक्स 5.0 में प्रथम जिला? – झुंझुनूं • SDG 'परफ़ॉर्मर' श्रेणी की सीमा? – 50-64 • 2020-21 से 2023-24 में सर्वाधिक सुधार वाला लक्ष्य? – लक्ष्य-1 (+19)
17. अभिकथन (A): राज्य के GSVA में कृषि क्षेत्र का घटता हिस्सा यह दर्शाता है कि कृषि पर निर्भर कार्यबल का अनुपात भी उसी अनुपात में तेज़ी से घट गया है। कारण (R): राज्य के GSVA में कृषि क्षेत्र का हिस्सा (प्रचलित मूल्यों पर) 2011-12 के लगभग 28.6% से घटकर 2025-26 में लगभग 25.7% रह गया है।
✅ सही उत्तर: (C) 📌 विश्लेषण: A गलत है, परंतु R सही है। 📘 विस्तार से समझें: उत्पादन में हिस्सा घटने का अर्थ यह नहीं कि रोजगार में भी उतनी ही तेज़ी से कमी आई। आर्थिक समीक्षा के अनुसार कृषि का GSVA-हिस्सा लगभग एक-चौथाई है, किंतु राज्य की आधी से अधिक (लगभग 60%) कार्यशील जनसंख्या आज भी कृषि व पशुपालन पर निर्भर है। इसका अर्थ है कृषि में प्रति श्रमिक उत्पादकता अन्य क्षेत्रों से बहुत कम है ('छिपी बेरोज़गारी')। यही असंतुलन ग्रामीण आय की कमी का मूल कारण है और इसी कारण नीतियाँ (कौशल विकास, MSME, ग्रामीण गैर-कृषि रोजगार, खाद्य प्रसंस्करण) श्रम को कृषि से अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित करने पर केंद्रित हैं। लुईस मॉडल के अनुसार विकास के साथ अधिशेष कृषि श्रम उद्योग/सेवा में जाता है। 83% कृषि वर्षा-आधारित है, जिससे फसल उत्पादन अत्यधिक अस्थिर (2024-25: +; 2025-26: फसल −5%) रहता है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2011-12 में कृषि का GSVA हिस्सा (प्रचलित)? – लगभग 28.56% • कृषि पर निर्भर कार्यबल लगभग? – 60% • वर्षा-आधारित कृषि का अनुपात? – लगभग 83%
18. आर्थिक समीक्षा 2025-26 में दिए गए 'आर्थिक विकास के मुख्य सूचकों' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दिसंबर 2025 तक राज्य की अधिष्ठापित विद्युत क्षमता 31,000 मेगावाट से अधिक हो गई। 2. 2025-26 में राज्य का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (नवंबर तक) 2024-25 की तुलना में बढ़ा है। 3. 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय पहली बार ₹1 लाख से अधिक हुई। 4. 2025-26 में प्रचलित मूल्यों पर NSDP ₹16 लाख करोड़ से अधिक है। 5. 2025-26 का अग्रिम खाद्यान्न उत्पादन अनुमान 2024-25 के अंतिम उत्पादन से अधिक है। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: केवल तीन कथन (1, 3 और 4) सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: कथन 2 गलत – IIP 154.38 (2024-25) से घटकर 153.29 (2025-26, नवंबर तक) हुआ। कथन 5 गलत – खाद्यान्न 309.62 लाख टन (2024-25, रिकॉर्ड) से घटकर 283.98 लाख टन (2025-26 AE)। सही कथन: अधिष्ठापित क्षमता 31,556 MW (दिसंबर 2025; 2024-25 में 27,284 MW – एक वर्ष में 4,000 MW से अधिक वृद्धि, अधिकांश सौर ऊर्जा से); स्थिर प्रति व्यक्ति आय ₹95,762 से बढ़कर ₹1,03,189; प्रचलित NSDP ₹16,85,118 करोड़। अन्य सूचक: GSDP (प्रचलित) ₹18,75,413 करोड़; GFCF/GSDP 29.53% (2024-25); वाणिज्यिक बैंक साख ₹6,91,943 करोड़ (30 सितंबर 2025); राज्य WPI परिवर्तन 0.76%। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • दिसंबर 2025 तक अधिष्ठापित विद्युत क्षमता? – 31,556 MW • 2024-25 में अधिष्ठापित क्षमता? – 27,284 MW • 2025-26 में प्रचलित NSDP? – ₹16,85,118 करोड़
19. वर्ष 2025-26 के राज्य आय अनुमानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: प्रचलित मूल्यों पर GSDP और NSDP का अंतर (लगभग ₹1.90 लाख करोड़) राज्य को प्राप्त शुद्ध कारक आय (विदेश/अन्य राज्यों से) को दर्शाता है। कथन II: स्थिर मूल्यों पर NSDP, GSDP का लगभग 75% है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: दोनों कथन गलत हैं। 📘 विस्तार से समझें: GSDP और NSDP का अंतर 'स्थायी पूँजी का उपभोग' (घिसावट/मूल्यह्रास) है, न कि शुद्ध कारक आय। प्रचलित: 18,75,413 − 16,85,118 = ₹1,90,295 करोड़ (GSDP का लगभग 10.1%)। स्थिर: NSDP ₹8,59,333 करोड़ ÷ GSDP ₹9,81,807 करोड़ ≈ 87.5% (75% नहीं)। राज्य लेखा 'घरेलू' (domestic) अवधारणा पर आधारित है – अर्थात् राज्य की भौगोलिक सीमा में उत्पन्न आय; इसलिए GSDP से 'राष्ट्रीय/राज्य उत्पाद' (product) की तरह शुद्ध कारक आय का समायोजन राज्य स्तर पर सामान्यतः नहीं किया जाता। प्रवासी राजस्थानियों द्वारा भेजी गई आय (remittances) GSDP में शामिल नहीं होती, किंतु परिवारों की उपभोग-क्षमता बढ़ाती है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • GSDP − NSDP = ? – स्थायी पूँजी का उपभोग • 2025-26 में स्थिर NSDP? – ₹8,59,333 करोड़ • राज्य लेखा किस अवधारणा पर? – घरेलू (भौगोलिक सीमा)
20. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राजस्थान के थोक मूल्य सूचकांक (WPI, आधार 1999-2000) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: 2021-22 से 2025-26 के बीच प्रत्येक वर्ष WPI में धनात्मक वृद्धि दर्ज हुई। कथन II: 2021-22 में WPI में वृद्धि (9.93%) इस अवधि में सर्वाधिक थी, जबकि 2025-26 में यह केवल 0.76% रही। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन I गलत – 2023-24 में WPI में −0.09% (ऋणात्मक) परिवर्तन हुआ (सूचकांक 388.45 → 388.09)। श्रृंखला: 2021-22 – 371.22 (+9.93%); 2022-23 – 388.45 (+4.64%); 2023-24 – 388.09 (−0.09%); 2024-25 – 396.72 (+2.18%); 2025-26 – 399.74 (+0.76%)। राज्य का WPI आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES) संकलित करता है और इसका आधार वर्ष अभी 1999-2000 है, जबकि भारत का WPI आधार 2011-12 है; राष्ट्रीय CPI का आधार फरवरी 2026 से 2024 (पूर्व 2012) तथा राष्ट्रीय GDP श्रृंखला का आधार 27 फरवरी 2026 से 2022-23 किया गया, जबकि आर्थिक समीक्षा 2025-26 में राज्य GSDP 2011-12 आधार पर है। थोक मुद्रास्फीति कम रहने से उत्पादकों की लागत-स्थिरता, परंतु कृषि उपज मूल्यों में कमज़ोरी का संकेत भी। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • राज्य WPI का आधार वर्ष? – 1999-2000 • राज्य WPI किसने संकलित किया? – आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय • किस वर्ष WPI परिवर्तन ऋणात्मक? – 2023-24
21. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार स्थिर (2011-12) मूल्यों पर GSVA में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का हिस्सा 2021-22 से 2025-26 की अवधि में किस वर्ष सर्वाधिक था?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 2021-22 (28.18%)। 📘 विस्तार से समझें: स्थिर मूल्यों पर हिस्सा (कृषि/उद्योग/सेवा): 2021-22 – 28.18/28.62/43.20; 2022-23 – 27.62/28.12/44.26; 2023-24 – 27.05/28.66/44.29; 2024-25 – 27.05/28.21/44.74; 2025-26 – 25.33/28.21/46.46। प्रवृत्ति – कृषि का हिस्सा क्रमशः घटा, सेवा का बढ़ा (संरचनात्मक परिवर्तन); 2025-26 में कृषि वृद्धि मात्र 0.22% (फसल उप-क्षेत्र −5.01%) होने से कृषि हिस्सा तेज़ी से गिरा। उद्योग का हिस्सा लगभग 28% के आसपास स्थिर। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में स्थिर मूल्यों पर सेवा हिस्सा? – 46.46% • 2025-26 में फसल उप-क्षेत्र की वृद्धि? – −5.01% • स्थिर मूल्यों पर उद्योग हिस्सा 2025-26? – 28.21%
22. राज्य आय की अवधारणाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. GSDP = मूल कीमतों पर GSVA + उत्पाद कर − उत्पाद सब्सिडी। 2. NSDP = GSDP − स्थिर पूँजी का उपभोग (घिसावट)। 3. प्रति व्यक्ति आय की गणना NSDP को अनुमानित मध्य-वर्ष जनसंख्या से भाग देकर की जाती है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: तीनों कथन सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: राज्य आय का अनुमान आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES), राजस्थान – केंद्रीय सांख्यिकी के दिशानिर्देशों के अनुसार; आधार वर्ष 2011-12। 2025-26 (AE): GSDP प्रचलित ₹18,75,413 करोड़, NSDP प्रचलित ₹16,85,118 करोड़ (अंतर ≈10% – घिसावट); प्रति व्यक्ति आय प्रचलित ₹2,02,349, स्थिर ₹1,03,189 (जनसंख्या अनुमान 1 अक्टूबर 2025 – 8.33 करोड़)। प्रचलित मूल्य – उसी वर्ष की क़ीमतें (मुद्रास्फीति सहित); स्थिर मूल्य – आधार वर्ष की क़ीमतें (वास्तविक वृद्धि)। GSDP अपस्फीतिक = (प्रचलित ÷ स्थिर) × 100। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • राज्य आय कौन आकलित करता है? – आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय • NSDP प्रचलित 2025-26? – ₹16,85,118 करोड़ • GSDP अपस्फीतिक का सूत्र? – (प्रचलित ÷ स्थिर) × 100
23. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के कृषि उत्पादन सूचकांक (आधार त्रैवार्षिक औसत 2007-08 = 100) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: सूचकांक 2021-22 के 201.57 से बढ़कर 2024-25 में 243.55 हो गया। कथन II: 2024-25 में राज्य का खाद्यान्न उत्पादन 309.62 लाख टन था, जो 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में घटकर 283.98 लाख टन रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C) 📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: कृषि उत्पादन सूचकांक: 2021-22 – 201.57; 2022-23 – 209.63; 2023-24 – 214.92; 2024-25 – 243.55 (उत्कृष्ट मानसून वर्ष)। खाद्यान्न (लाख टन): 2021-22 – 231.92; 2022-23 – 252.80; 2023-24 – 240.92; 2024-25 – 309.62 (रिकॉर्ड); 2025-26 AE – 283.98 (−8.28%)। तिलहन 2025-26 – 100.46 लाख टन (+7.18%)। इसी कारण 2024-25 में कृषि GVA वृद्धि 7.56% और 2025-26 में केवल 0.22% – उच्च आधार प्रभाव (base effect) तथा मानसून-निर्भरता (~83% क्षेत्र वर्षा-आधारित)। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में खाद्यान्न गिरावट? – 8.28% • 2025-26 में तिलहन उत्पादन? – 100.46 लाख टन • कृषि उत्पादन सूचकांक का आधार? – TE 2007-08
24. अभिकथन (A): 2025-26 में राजस्थान के कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की वास्तविक वृद्धि दर (0.22%) 2024-25 (7.56%) की तुलना में बहुत कम रही। कारण (R): 2024-25 में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन (309.62 लाख टन) से ऊँचा आधार बना, और 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन घटकर 283.98 लाख टन रह गया।
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। 📘 विस्तार से समझें: वृद्धि दर पिछले वर्ष के स्तर के सापेक्ष मापी जाती है; रिकॉर्ड वर्ष के बाद उत्पादन घटने से फसल उप-क्षेत्र में −5.01% गिरावट आई और कृषि GVA वृद्धि लगभग शून्य रह गई – R, A की व्याख्या है। फिर भी पशुधन (+5.20%), वानिकी (+2.67%) व मत्स्य (+0.87%) की धनात्मक वृद्धि ने कुल कृषि वृद्धि को ऋणात्मक होने से बचाया – पशुधन का हिस्सा (49.35%) फसल (42.61%) से अधिक होना राज्य की 'जोखिम-विविधीकरण' विशेषता। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में पशुधन उप-क्षेत्र वृद्धि? – +5.20% • कृषि GVA में पशुधन हिस्सा? – 49.35% • आधार प्रभाव का अर्थ? – पिछले वर्ष के ऊँचे/नीचे स्तर का वृद्धि दर पर प्रभाव
25. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के प्रचलित मूल्यों पर GSDP आँकड़ों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: 2021-22 से 2025-26 के बीच प्रचलित मूल्यों पर GSDP की सर्वाधिक वृद्धि दर 2021-22 (17.46%) में रही। कथन II: 2025-26 में प्रचलित मूल्यों पर GSDP वृद्धि (10.24%) स्थिर मूल्यों पर वृद्धि (8.66%) से कम रही। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – 10.24% > 8.66%; प्रचलित वृद्धि स्थिर वृद्धि से अधिक है, अंतर ≈ 1.45% (अपस्फीतिक वृद्धि/मूल्य प्रभाव)। प्रचलित वृद्धि: 2021-22 – 17.46% (कोविड के बाद पुनरुद्धार व उच्च मुद्रास्फीति); 2022-23 – 12.80%; 2023-24 – 12.85%; 2024-25 – 11.77%; 2025-26 – 10.24%। प्रचलित GSDP: ₹11,95,641 करोड़ (2021-22) → ₹18,75,413 करोड़ (2025-26)। बजट 2026-27 का अनुमान ₹21,52,100 करोड़ (+15%)। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 में मूल्य प्रभाव लगभग? – 1.45% • प्रचलित GSDP 2021-22? – ₹11,95,641 करोड़ • बजट 2026-27 का GSDP अनुमान? – ₹21,52,100 करोड़
26. आर्थिक समीक्षा 2025-26 की मुख्य सूचक तालिका में वर्ष 2024-25 के GSDP आँकड़े किस अनुमान-स्तर के हैं?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – प्रथम संशोधित अनुमान (RE-I)। 📘 विस्तार से समझें: तालिका में – 2025-26: अग्रिम अनुमान (AE); 2024-25: प्रथम संशोधित (RE-I); 2023-24: द्वितीय संशोधित (RE-II); 2021-22 व 2022-23: अंतिम/तृतीय संशोधित स्तर। कारण – प्रारंभिक अनुमान अधूरे आँकड़ों (कृषि अग्रिम अनुमान, IIP, कर-संग्रह) पर आधारित; जैसे-जैसे पूर्ण आँकड़े (ASI, वार्षिक लेखे) मिलते हैं, संशोधन होता है। इसलिए वृद्धि-दरें बाद में बदल सकती हैं – उदा. 2024-25 की स्थिर वृद्धि 8.77%, 2025-26 AE 8.66%। आकलन – आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (आयोजना विभाग), केंद्रीय NSO के दिशानिर्देश। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2025-26 के आँकड़ों का स्तर? – अग्रिम अनुमान • 2024-25 की स्थिर वृद्धि? – 8.77% • राज्य आय का आकलन करने वाला विभाग? – आयोजना (DES)
27. आर्थिक समीक्षा में GSVA के क्षेत्रीय वर्गीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: उद्योग क्षेत्र में खनन, विनिर्माण, विद्युत-गैस-जल आपूर्ति व अन्य उपयोगिताएँ तथा निर्माण (construction) सम्मिलित हैं। कथन II: परिवहन, भंडारण व संचार को उद्योग क्षेत्र में तथा निर्माण को सेवा क्षेत्र में रखा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – परिवहन-भंडारण-संचार सेवा क्षेत्र में तथा निर्माण उद्योग क्षेत्र में। तीन क्षेत्र – कृषि एवं संबद्ध (फ़सल, पशुधन, वानिकी, मत्स्य); उद्योग (खनन, विनिर्माण, उपयोगिताएँ, निर्माण); सेवा (व्यापार-होटल-रेस्तराँ, परिवहन-भंडारण-संचार, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट-पेशेवर सेवाएँ, लोक प्रशासन, अन्य सेवाएँ)। 2025-26 (प्रचलित) – सेवा 47.71%, उद्योग 26.55%, कृषि 25.74%; उद्योग में विनिर्माण 40.52%, निर्माण 35.02%, खनन 12.42%, उपयोगिताएँ 12.04%। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • निर्माण किस क्षेत्र में? – उद्योग • परिवहन-संचार किस क्षेत्र में? – सेवा • उद्योग में निर्माण का हिस्सा? – 35.02%
28. अभिकथन (A): पिछले दशक में राजस्थान के GSVA में कृषि का हिस्सा घटा है और सेवा क्षेत्र का हिस्सा बढ़ा है। कारण (R): आर्थिक विकास के साथ आय बढ़ने पर सेवाओं (व्यापार, परिवहन, वित्त, पर्यटन, शिक्षा-स्वास्थ्य) की माँग तेज़ी से बढ़ती है, जबकि कृषि उत्पादों की माँग अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ती है।
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। 📘 विस्तार से समझें: यह 'संरचनात्मक परिवर्तन' (Kuznets/Clark-Fisher प्रतिरूप) है – आय-लोच का अंतर (एंगेल का नियम: आय बढ़ने पर भोजन पर व्यय का अनुपात घटता है) ही R, A की व्याख्या है। राजस्थान – प्रचलित मूल्यों पर कृषि हिस्सा 28.56% (2011-12) → 25.74% (2025-26); सेवा 47.71% (2025-26)। विशेषता – कृषि का GVA हिस्सा घटने के बावजूद 60% से अधिक जनसंख्या की आजीविका कृषि पर – 'प्रच्छन्न बेरोज़गारी', कम उत्पादकता; अतः कौशल, विनिर्माण व सेवा रोज़गार आवश्यक। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • भोजन-व्यय अनुपात संबंधी नियम? – एंगेल का नियम • 2011-12 में कृषि हिस्सा (प्रचलित)? – 28.56% • क्षेत्रीय परिवर्तन का प्रतिरूप? – क्लार्क-फ़िशर/कुज़नेट्स
29. मूल्य सूचकांकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) खुदरा क़ीमतों को मापता है और इसमें सेवाएँ (शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि) भी सम्मिलित हैं। 2. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में भी सेवाओं को प्रमुख भार दिया जाता है। 3. RBI की मौद्रिक नीति हेतु मुद्रास्फीति लक्ष्य CPI पर आधारित 4% (±2%) है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 3 सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: कथन 2 गलत – WPI में केवल वस्तुएँ (प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन-विद्युत, विनिर्मित उत्पाद) – सेवाएँ नहीं। CPI – MoSPI/NSO; फरवरी 2026 से नया आधार 2024 (पूर्व 2012); मौद्रिक नीति समिति (MPC) – लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (2016 से)। राज्य स्तर – राज्य का WPI (आधार 1999-2000) DES द्वारा; 2025-26 में राज्य WPI वृद्धि मात्र 0.76%। GSDP अपस्फीतिक – समग्र मूल्य-स्तर का सबसे व्यापक माप। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • राष्ट्रीय CPI का नया आधार वर्ष? – 2024 • मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण कब से? – 2016 • राज्य WPI वृद्धि 2025-26? – 0.76%
30. राजस्थान का भौगोलिक क्षेत्रफल देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग कितना प्रतिशत है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 10.41% (3,42,239 वर्ग किमी; क्षेत्रफल में सबसे बड़ा राज्य)। 📘 विस्तार से समझें: आर्थिक महत्त्व – विशाल क्षेत्रफल पर लगभग 5.7% जनसंख्या (2011 – 5.66%), कम जनसंख्या घनत्व (2011 – 200 व्यक्ति/वर्ग किमी; भारत 382); सेवाओं (सड़क, बिजली, पेयजल) की प्रति-व्यक्ति लागत अधिक; पर सौर-पवन ऊर्जा, खनिज व भूमि-आधारित निवेश हेतु लाभ। अन्य विकल्प: 5.67% – जनसंख्या हिस्सा (लगभग); 9.65% – राज्य के भौगोलिक क्षेत्र में अभिलेखित वन; 8.30% – भूमि-उपयोग में वन। 15वें वित्त आयोग के क्षैतिज सूत्र में 'क्षेत्रफल' का भार 15% – बड़े क्षेत्रफल वाले राज्यों को लाभ। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2011 में राज्य का जनसंख्या घनत्व? – 200 व्यक्ति/वर्ग किमी • 15वें FC सूत्र में क्षेत्रफल का भार? – 15% • राज्य का क्षेत्रफल? – 3,42,239 वर्ग किमी
31. नीति आयोग की 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: प्रगति समीक्षा 2023' के अनुसार 2019-21 (NFHS-5) में राजस्थान में बहुआयामी रूप से गरीब जनसंख्या का अनुपात कितना था?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 15.31%। 2015-16 (NFHS-4) में यह 28.86% था, यानी लगभग 13.55 प्रतिशत अंक की कमी। 📘 विस्तार से समझें: प्रगति समीक्षा 2023 (17 जुलाई 2023) – राष्ट्रीय स्तर पर बहुआयामी गरीबी 24.85% (2015-16) से घटकर 14.96% (2019-21) हुई और लगभग 13.5 करोड़ लोग इससे बाहर निकले। सर्वाधिक गरीबी वाले राज्य – बिहार (33.76%), झारखंड, मेघालय, उत्तर प्रदेश (22.93%), मध्य प्रदेश (20.63%)। राजस्थान (15.31%) अभी भी राष्ट्रीय औसत (14.96%) से थोड़ा ऊपर है। विकल्प 11.28% – नीति आयोग के जनवरी 2024 के चर्चा-पत्र में 2022-23 के लिए राष्ट्रीय अनुमान (2013-14 के 29.17% से), जिसमें 9 वर्षों में 24.82 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा है। गरीबी में कमी के प्रमुख कारक – स्वच्छता (SBM), रसोई ईंधन (उज्ज्वला), बैंक खाते (जनधन), पेयजल, आवास, पोषण। राजस्थान में दक्षिणी जनजातीय जिले (बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर) व बाराँ (सहरिया) अधिक वंचना वाले क्षेत्र हैं, इसलिए कैश प्लस मॉडल, PM-JANMAN जैसे लक्षित कार्यक्रम यहीं केंद्रित हैं। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • भारत में बहुआयामी गरीबी 2019-21? – 14.96% • 2022-23 का राष्ट्रीय अनुमान (चर्चा-पत्र 2024)? – 11.28% • सर्वाधिक बहुआयामी गरीबी वाला राज्य? – बिहार
32. भारत के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसमें तीन समान भार वाले आयाम हैं – स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर। 2. इसमें 12 संकेतक हैं; वैश्विक MPI के 10 संकेतकों के अतिरिक्त मातृ स्वास्थ्य और बैंक खाता जोड़े गए हैं। 3. यह एल्काइर-फ़ॉस्टर पद्धति पर आधारित है, जिसमें भारित संकेतकों के कम से कम एक-तिहाई में वंचित व्यक्ति को गरीब माना जाता है। 4. इसका आँकड़ा-स्रोत आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) है। 5. व्यक्ति की आय या उपभोग व्यय इसका एक प्रमुख संकेतक है। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: केवल तीन कथन (1, 2, 3) सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: कथन 4 गलत – आँकड़ा-स्रोत राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-4 व NFHS-5) है। कथन 5 गलत – MPI गैर-मौद्रिक वंचनाओं को मापता है; आय/उपभोग आधारित गरीबी अलग पद्धति है (तेंदुलकर/रंगराजन गरीबी रेखा, HCES)। संकेतक – स्वास्थ्य: पोषण, बाल-किशोर मृत्यु, मातृ स्वास्थ्य; शिक्षा: स्कूली शिक्षा के वर्ष, विद्यालय उपस्थिति; जीवन स्तर: रसोई ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, परिसंपत्तियाँ, बैंक खाता। MPI = H (गरीबी का प्रसार/हेडकाउंट) × A (गरीबों की औसत वंचना-तीव्रता)। वैश्विक MPI UNDP व ऑक्सफ़ोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) तैयार करते हैं; भारत में नीति आयोग नोडल एजेंसी है। पहला राष्ट्रीय MPI – नवंबर 2021 (आधार रिपोर्ट, NFHS-4)। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • MPI का सूत्र? – H × A • वैश्विक MPI कौन बनाता है? – UNDP व OPHI • पहला राष्ट्रीय MPI? – नवंबर 2021
33. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान के जनांकिकीय आँकड़ों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: राज्य का लिंगानुपात राष्ट्रीय लिंगानुपात (940) से अधिक था। कथन II: 2001-11 के दशक में राज्य की जनसंख्या वृद्धि दर (21.31%) राष्ट्रीय दशकीय वृद्धि दर (17.7%) से अधिक थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन I गलत – राजस्थान का लिंगानुपात 928 (राष्ट्रीय 940 से कम); शिशु लिंगानुपात (0-6 वर्ष) 888 (राष्ट्रीय 918)। सर्वाधिक लिंगानुपात – डूंगरपुर (994), न्यूनतम – धौलपुर (846)। जनगणना 2011 की अन्य प्रमुख बातें – जनसंख्या 6.85 करोड़ (भारत का 5.66%), घनत्व 200 व्यक्ति/वर्ग किमी (भारत 382), साक्षरता 66.11%, नगरीकरण 24.87%, SC 17.8%, ST 13.5%। ऊँची दशकीय वृद्धि का अर्थ – जनांकिकीय संक्रमण देर से, अधिक आश्रित-अनुपात, परंतु भविष्य में लंबी अवधि तक 'जनांकिकीय लाभांश' की संभावना। आर्थिक नियोजन में इसका महत्त्व – प्रति व्यक्ति आय वृद्धि GSDP वृद्धि से कम रहती है, क्योंकि जनसंख्या भी बढ़ती है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • राजस्थान का शिशु लिंगानुपात 2011? – 888 • सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला? – डूंगरपुर (994) • राजस्थान का जनसंख्या घनत्व 2011? – 200
34. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में स्थिर (2011-12) मूल्यों पर राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय कितनी है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – ₹1,03,189। 📘 विस्तार से समझें: प्रति व्यक्ति आय = शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP) ÷ अनुमानित जनसंख्या। स्थिर मूल्यों पर – 2024-25: ₹95,762 → 2025-26: ₹1,03,189 (वृद्धि लगभग 7.76%; पहली बार स्थिर मूल्यों पर ₹1 लाख पार)। प्रचलित मूल्यों पर – 2024-25: ₹1,85,095 → 2025-26: ₹2,02,349 (वृद्धि लगभग 9.32%)। स्थिर मूल्य 'वास्तविक' (मुद्रास्फीति-रहित) सुधार दिखाते हैं, इसलिए जीवन-स्तर की तुलना हेतु अधिक उपयुक्त हैं। NSDP स्थिर मूल्यों पर 2025-26 – ₹8,59,333 करोड़; प्रचलित – ₹16,85,118 करोड़। ध्यान दें – GSDP वृद्धि (8.66%) से प्रति व्यक्ति आय वृद्धि कम है, क्योंकि (i) घिसावट घटाकर NSDP बनता है और (ii) जनसंख्या लगभग 1% वार्षिक बढ़ रही है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • प्रचलित मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय 2025-26? – ₹2,02,349 • प्रति व्यक्ति आय किस समुच्चय पर आधारित? – NSDP • स्थिर मूल्य PCI 2024-25? – ₹95,762
35. राष्ट्रीय/राज्य लेखा (आधार 2011-12) में करों के वर्गीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: GST, उत्पाद शुल्क व सीमा शुल्क 'उत्पाद कर' हैं; मूल कीमतों पर GSVA में शुद्ध उत्पाद कर (उत्पाद कर − उत्पाद सब्सिडी) जोड़ने पर बाज़ार कीमतों पर GSDP प्राप्त होता है। कथन II: भू-राजस्व, स्टांप व पंजीयन शुल्क तथा व्यवसाय कर 'उत्पादन कर' हैं, जो मूल कीमतों पर GSVA में पहले से सम्मिलित रहते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C) 📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: तीन मूल्यांकन स्तर – (1) साधन लागत पर GVA = कर्मचारी पारिश्रमिक + परिचालन अधिशेष/मिश्रित आय + घिसावट; (2) मूल कीमत पर GVA = साधन लागत GVA + उत्पादन कर − उत्पादन सब्सिडी; (3) बाज़ार कीमत पर GDP/GSDP = मूल कीमत GVA + उत्पाद कर − उत्पाद सब्सिडी। उत्पाद कर प्रति इकाई उत्पाद/लेन-देन पर लगते हैं (GST, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क); उत्पादन कर उत्पादन की मात्रा से स्वतंत्र, उत्पादन प्रक्रिया पर लगते हैं (भू-राजस्व, स्टांप-पंजीयन, व्यवसाय कर)। उत्पाद सब्सिडी के उदाहरण – खाद्य, उर्वरक, LPG सब्सिडी; उत्पादन सब्सिडी के उदाहरण – रेलवे, ग्रामोद्योग, किसानों को ब्याज अनुदान। CSO ने जनवरी 2015 में आधार 2011-12 की नई शृंखला में अंतरराष्ट्रीय SNA-2008 के अनुरूप 'मूल कीमत GVA' को क्षेत्रीय वृद्धि का मुख्य माप बनाया। राजस्थान आर्थिक समीक्षा में भी क्षेत्रवार हिस्सा GSVA (मूल कीमत) पर दिया जाता है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • साधन लागत GVA में क्या जोड़कर मूल कीमत GVA बनता है? – शुद्ध उत्पादन कर • नई शृंखला किस अंतरराष्ट्रीय प्रणाली पर? – SNA 2008 • उर्वरक सब्सिडी किस प्रकार की? – उत्पाद सब्सिडी
36. सूची-I (आर्थिक माप) को सूची-II (तैयार करने वाली संस्था) से सुमेलित कीजिए: सूची-I: (अ) राजस्थान का GSDP (ब) अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) (स) अखिल भारतीय थोक मूल्य सूचकांक (WPI) (द) राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक सूची-II: (1) नीति आयोग (2) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), MoSPI (3) आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान (4) आर्थिक सलाहकार कार्यालय, DPIIT
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – GSDP: आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES), राजस्थान; IIP: NSO; WPI: आर्थिक सलाहकार कार्यालय; MPI: नीति आयोग। 📘 विस्तार से समझें: राजस्थान का DES (आयोजना विभाग के अधीन) GSDP, NSDP, प्रति व्यक्ति आय, राज्य का WPI (आधार 1999-2000), 'आर्थिक समीक्षा' व 'मूलभूत सांख्यिकी' (Basic Statistics) तैयार करता है; राष्ट्रीय पद्धति NSO देता है। IIP – NSO मासिक जारी करता है (आधार 2011-12); राजस्थान का राज्य-स्तरीय IIP DES बनाता है। WPI – आर्थिक सलाहकार कार्यालय, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य मंत्रालय (आधार 2011-12)। CPI (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त) – NSO, अब आधार 2024; CPI-औद्योगिक श्रमिक व कृषि/ग्रामीण श्रमिक – श्रम ब्यूरो (शिमला)। MPI – नीति आयोग (NFHS आँकड़ों पर, UNDP-OPHI सहयोग)। RBI मौद्रिक नीति में CPI संयुक्त मुद्रास्फीति को लक्ष्य (4% ± 2%) बनाता है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • CPI-IW कौन जारी करता है? – श्रम ब्यूरो • राजस्थान का राज्य WPI आधार वर्ष? – 1999-2000 • राष्ट्रीय WPI आधार वर्ष? – 2011-12
37. राष्ट्रीय/राज्य आय मापन की विधियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. GDP मापन की तीन विधियाँ हैं – उत्पादन (मूल्य-वर्धन) विधि, आय विधि और व्यय विधि। 2. राज्य अपना GSDP मुख्यतः उत्पादन (आय-उद्गम) विधि से अनुमानित करते हैं। 3. आय विधि में GDP = निजी अंतिम उपभोग + सकल पूँजी निर्माण + सरकारी अंतिम उपभोग + (निर्यात − आयात)। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 2 सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: कथन 3 गलत – C + I + G + (X − M) व्यय विधि का सूत्र है; आय विधि में कर्मचारी पारिश्रमिक + परिचालन अधिशेष + मिश्रित आय (+ घिसावट, शुद्ध उत्पादन कर) जोड़े जाते हैं। उत्पादन विधि में प्रत्येक क्षेत्र का उत्पादन मूल्य − मध्यवर्ती उपभोग = मूल्य-वर्धन, जिससे 'दोहरी गणना' से बचा जाता है। राज्य उत्पादन विधि क्यों अपनाते हैं – राज्यों की सीमाओं के आर-पार वस्तुओं, सेवाओं व आय का प्रवाह (अंतर-राज्यीय निर्यात-आयात) मापना कठिन है, इसलिए व्यय पक्ष का पूर्ण अनुमान संभव नहीं। इसी कारण राज्य 'घरेलू उत्पाद' (GSDP) बनाते हैं, 'राज्य राष्ट्रीय आय' नहीं। राजस्थान में DES, NSO की एकरूप पद्धति (Source and Methods) के अनुसार कृषि, उद्योग व सेवा उप-क्षेत्रों का मूल्य-वर्धन जोड़कर GSVA निकालता है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • व्यय विधि का सूत्र? – C + I + G + (X − M) • मूल्य-वर्धन विधि किस दोष से बचाती है? – दोहरी गणना • राज्य 'राज्य राष्ट्रीय आय' क्यों नहीं बनाते? – अंतर-राज्यीय प्रवाह मापना कठिन
38. UNDP की मानव विकास रिपोर्ट 2025 (मई 2025) में 193 देशों में भारत का स्थान क्या रहा?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 130वाँ (HDI मान 0.685, 'मध्यम मानव विकास' श्रेणी)। 📘 विस्तार से समझें: मानव विकास रिपोर्ट 2025 का विषय – 'A matter of choice: People and possibilities in the age of AI'; यह 2023 के आँकड़ों पर आधारित है। शीर्ष – आइसलैंड। पूर्ववर्ती रिपोर्टें – 2023-24 में भारत 134वाँ (HDI 0.644), 2021-22 में 132वाँ, 2020 में 131वाँ (तुलना के लिए हर रिपोर्ट पिछली शृंखला भी संशोधित करती है)। HDI के तीन आयाम – दीर्घ व स्वस्थ जीवन (जन्म पर जीवन प्रत्याशा), ज्ञान (स्कूली शिक्षा के अपेक्षित व औसत वर्ष), सभ्य जीवन स्तर (प्रति व्यक्ति GNI, PPP डॉलर)। 2010 से गुणोत्तर माध्य (geometric mean) प्रयुक्त। पहली रिपोर्ट – 1990, महबूब-उल-हक़ (अमर्त्य सेन की क्षमता अवधारणा)। राजस्थान का संदर्भ – जीवन प्रत्याशा 70.4 वर्ष (SRS 2019-23), साक्षरता 66.11% (2011), जिनके सुधार हेतु शिक्षा-स्वास्थ्य पर बजट का बड़ा भाग (2026-27 में शिक्षा ₹68,989 करोड़ – सर्वाधिक) खर्च होता है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • HDI 2010 से किस माध्य से? – गुणोत्तर माध्य • मानव विकास रिपोर्ट के जनक? – महबूब-उल-हक़ • HDR 2023-24 में भारत? – 134वाँ
39. आय/उपभोग असमानता मापन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: गिनी गुणांक का मान 1 होना पूर्ण समानता को दर्शाता है। कथन II: लॉरेंज वक्र समानता-रेखा (45° रेखा) से जितना अधिक दूर होगा, असमानता उतनी ही अधिक होगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन I गलत – गिनी गुणांक 0 = पूर्ण समानता, 1 = पूर्ण असमानता। गिनी = समानता-रेखा व लॉरेंज वक्र के बीच का क्षेत्रफल ÷ समानता-रेखा के नीचे का कुल क्षेत्रफल। लॉरेंज वक्र – जनसंख्या के संचयी प्रतिशत (x-अक्ष) के सापेक्ष आय/उपभोग का संचयी प्रतिशत (y-अक्ष)। भारत में असमानता का आधिकारिक माप – NSO का घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES 2022-23 व 2023-24); इसके अनुसार उपभोग का गिनी गुणांक ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में घटा है और शहरी-ग्रामीण MPCE अंतर 2011-12 के 84% से घटकर लगभग 70% रह गया। संबंधित अवधारणाएँ – कुज़नेट्स वक्र (विकास के साथ असमानता पहले बढ़ती फिर घटती – उल्टा U), पाल्मा अनुपात (शीर्ष 10% ÷ निचले 40%)। राज्य स्तर पर असमानता घटाने के उपकरण – DBT पेंशन, NFSA, MAA योजना जैसी स्वास्थ्य सुरक्षा। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • गिनी 0 का अर्थ? – पूर्ण समानता • पाल्मा अनुपात? – शीर्ष 10% ÷ निचले 40% • उल्टा U वक्र? – कुज़नेट्स
40. सूची-I (पंचवर्षीय योजना) को सूची-II (मॉडल/मुख्य उद्देश्य) से सुमेलित कीजिए: सूची-I: (अ) प्रथम योजना (1951-56) (ब) द्वितीय योजना (1956-61) (स) पाँचवीं योजना (1974-79) (द) बारहवीं योजना (2012-17) सूची-II: (1) हैरोड-डोमर मॉडल – कृषि प्राथमिकता (2) तीव्र, अधिक समावेशी एवं सतत विकास (3) पी.सी. महालनोबिस मॉडल – भारी उद्योग (4) गरीबी हटाओ व आत्मनिर्भरता
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – प्रथम: हैरोड-डोमर; द्वितीय: महालनोबिस; पाँचवीं: गरीबी हटाओ; बारहवीं: तीव्र, अधिक समावेशी एवं सतत विकास। 📘 विस्तार से समझें: योजना आयोग – 15 मार्च 1950 (अध्यक्ष – प्रधानमंत्री); 1 जनवरी 2015 से नीति आयोग ने इसका स्थान लिया। अन्य योजनाएँ – तीसरी (1961-66): आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था, युद्ध व सूखे से विफल; योजना अवकाश 1966-69; चौथी (1969-74): स्थिरता के साथ विकास व आत्मनिर्भरता; छठी (1980-85): गरीबी उन्मूलन, IRDP; आठवीं (1992-97): उदारीकरण, मानव संसाधन विकास; ग्यारहवीं (2007-12): तीव्र एवं अधिक समावेशी विकास; बारहवीं – अंतिम पंचवर्षीय योजना। 'समावेशी विकास' का राज्य-स्तरीय रूप – राजस्थान में 'अंत्योदय' आधारित योजनाएँ, जनजातीय उपयोजना (TSP), अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP)। योजना युग के बाद राज्य में भी दीर्घकालीन दृष्टि-पत्र (विकसित राजस्थान @2047) व वार्षिक बजट-आधारित नियोजन अपनाया गया। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • योजना आयोग की स्थापना? – 15 मार्च 1950 • ग्यारहवीं योजना का विषय? – तीव्र एवं अधिक समावेशी विकास • योजना अवकाश? – 1966-69
41. आर्थिक समीक्षा के अनुसार 2024-25 में राजस्थान में सकल स्थायी पूँजी निर्माण (GFCF) GSDP का 29.53% तथा स्थिर मूल्यों पर GSDP वृद्धि दर 8.77% रही। इन आँकड़ों से वृद्धिशील पूँजी-उत्पाद अनुपात (ICOR) लगभग कितना निकलता है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – लगभग 3.4 (29.53 ÷ 8.77 ≈ 3.37)। 📘 विस्तार से समझें: ICOR = निवेश दर ÷ वृद्धि दर, अर्थात् उत्पादन में 1 इकाई अतिरिक्त वृद्धि हेतु कितनी इकाई पूँजी निवेश चाहिए। यह हैरोड-डोमर मॉडल (g = s/v) से निकला है – वृद्धि दर = बचत/निवेश दर ÷ पूँजी-उत्पाद अनुपात। कम ICOR = पूँजी का अधिक कुशल उपयोग। यहाँ गणना अनुमानित है, क्योंकि GFCF अनुपात प्रचलित मूल्यों पर है और वृद्धि स्थिर मूल्यों पर; परीक्षा में ऐसे 'लगभग' प्रश्नों में यही सरल सूत्र प्रयुक्त होता है। भारत का ICOR प्रायः 4 के आसपास माना जाता है। राजस्थान में GFCF अनुपात लगातार बढ़ा – 2021-22: 28.64%, 2022-23: 28.94%, 2023-24: 29.52%, 2024-25: 29.53%; प्रचलित मूल्यों पर GFCF ₹3.42 लाख करोड़ (2021-22) से ₹5.02 लाख करोड़ (2024-25)। निहितार्थ – विकसित राजस्थान @2047 के ऊँचे लक्ष्य हेतु निवेश दर बढ़ाने के साथ ICOR घटाना (परियोजनाएँ समय पर, लॉजिस्टिक्स सुधार) आवश्यक है; इसी हेतु राइजिंग राजस्थान MoU की 'ग्राउंडिंग' निगरानी व पूँजीगत व्यय पर ज़ोर। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • ICOR का सूत्र? – निवेश दर ÷ वृद्धि दर • g = s/v किस मॉडल का? – हैरोड-डोमर • GFCF 2024-25 प्रचलित मूल्यों पर? – ₹5.02 लाख करोड़
42. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार स्थिर मूल्यों पर राजस्थान का NSDP ₹7,89,133 करोड़ (2024-25) से बढ़कर ₹8,59,333 करोड़ (2025-26) तथा प्रति व्यक्ति आय ₹95,762 से बढ़कर ₹1,03,189 हुई। इनसे निहित जनसंख्या वृद्धि दर लगभग कितनी है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – लगभग 1.1% (NSDP वृद्धि ≈ 8.90%, PCI वृद्धि ≈ 7.76%)। 📘 विस्तार से समझें: चरण – (1) NSDP वृद्धि = 8,59,333 ÷ 7,89,133 = 1.0890 → 8.90%; (2) PCI वृद्धि = 1,03,189 ÷ 95,762 = 1.0776 → 7.76%; (3) PCI = NSDP ÷ जनसंख्या, अतः जनसंख्या वृद्धि = 1.0890 ÷ 1.0776 − 1 ≈ 1.06%। जाँच – निहित जनसंख्या = 8,59,333 करोड़ ÷ 1,03,189 ≈ 8.33 करोड़, जो आर्थिक समीक्षा की अनुमानित जनसंख्या (1 अक्टूबर 2025 – 8.33 करोड़) से मेल खाती है; 2024-25 में ≈ 8.24 करोड़। सामान्य नियम – प्रति व्यक्ति आय वृद्धि ≈ NSDP वृद्धि − जनसंख्या वृद्धि। राजस्थान की जनसंख्या 2001-11 में 21.31% (लगभग 1.9% वार्षिक) बढ़ी थी; प्रजनन दर घटने (TFR 2.0, NFHS-5) से अब वार्षिक वृद्धि लगभग 1% रह गई है। यह प्रवृत्ति जनांकिकीय संक्रमण के अगले चरण की ओर संकेत करती है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • PCI वृद्धि का सन्निकट सूत्र? – NSDP वृद्धि − जनसंख्या वृद्धि • अनुमानित जनसंख्या 1 अक्टूबर 2025? – 8.33 करोड़ • राजस्थान की TFR (NFHS-5)? – 2.0
43. 28 दिसंबर 2024 के राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद राजस्थान में जिलों और संभागों की संख्या क्रमशः कितनी है, जिनके आधार पर अब जिला-स्तरीय आँकड़े व नियोजन किए जाते हैं?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 41 जिले और 7 संभाग। 📘 विस्तार से समझें: अगस्त 2023 में 17 नए जिले (कुल 50) और 3 नए संभाग (बाँसवाड़ा, पाली, सीकर; कुल 10) बने थे। 28 दिसंबर 2024 को 9 जिले (दूदू, केकड़ी, सांचौर, अनूपगढ़, नीम का थाना, गंगापुर सिटी, शाहपुरा, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण) तथा तीनों नए संभाग समाप्त किए गए। बने रहे 8 नए जिले – बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, फलौदी, सलूंबर। 7 संभाग – जयपुर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भरतपुर। आर्थिक महत्त्व – आर्थिक समीक्षा, जिला सांख्यिकी रूपरेखा, कृषि-जलवायु खंड, NFSA आवंटन, पंचायती राज इकाइयाँ (41 जिला परिषदें) इसी ढाँचे पर; जैसे कृषि में फलौदी व बालोतरा को खंड IA तथा खैरथल-तिजारा व कोटपूतली-बहरोड़ को खंड IIIA में रखा गया। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • अगस्त 2023 में बने नए संभाग? – बाँसवाड़ा, पाली, सीकर • समाप्त जिलों की संख्या? – 9 • जिला परिषदें? – 41
44. अभिकथन (A): राजस्थान में कार्यशील आयु (15-64 वर्ष) जनसंख्या का अनुपात दक्षिणी राज्यों की तुलना में अधिक लंबी अवधि तक बढ़ता रहेगा, जिससे 'जनांकिकीय लाभांश' की खिड़की देर तक खुली रहेगी। कारण (R): राजस्थान की कुल प्रजनन दर (TFR) प्रतिस्थापन स्तर के निकट (2.0, NFHS-5) दक्षिणी राज्यों की तुलना में काफ़ी देर से पहुँची है।
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। 📘 विस्तार से समझें: जनांकिकीय संक्रमण के चरण – उच्च जन्म-उच्च मृत्यु → मृत्यु दर में गिरावट (जनसंख्या विस्फोट) → जन्म दर में गिरावट → निम्न जन्म-निम्न मृत्यु। जन्म दर घटने के 15-20 वर्ष बाद कार्यशील आयु वर्ग का अनुपात बढ़ता है और आश्रित-अनुपात घटता है – यही जनांकिकीय लाभांश है। केरल व तमिलनाडु प्रतिस्थापन TFR (2.1) पर 1990 के दशक में पहुँच गए, अतः वहाँ वृद्धावस्था (ageing) आरंभ हो चुकी है; राजस्थान में TFR NFHS-3 (2005-06) में 3.2, NFHS-4 में 2.4 और NFHS-5 में 2.0 हुई, इसलिए यहाँ यह खिड़की 2040 के दशक तक खुली रहने की संभावना है। लाभांश स्वतः नहीं मिलता – इसके लिए शिक्षा, कौशल (RSLDC, ITI), महिला श्रम भागीदारी व रोज़गार-सृजन (MSME, पर्यटन, उद्योग नीतियाँ) आवश्यक हैं; अन्यथा यह 'जनांकिकीय बोझ' बन सकता है। SRS के अनुसार राजस्थान की अशोधित जन्म दर (CBR) अभी भी राष्ट्रीय से ऊँची (22.9) है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • प्रतिस्थापन स्तर TFR? – 2.1 • राजस्थान TFR NFHS-4? – 2.4 • जनांकिकीय लाभांश का आधार? – घटता आश्रित-अनुपात
45. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: राज्य की जनसंख्या लगभग 6.85 करोड़ थी, जो भारत की जनसंख्या का लगभग 5.66% थी। कथन II: जनसंख्या की दृष्टि से राजस्थान देश में सातवें स्थान पर था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – जनगणना 2011 में राजस्थान आठवें स्थान पर था (क्रम – उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, अविभाजित आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान)। 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद राजस्थान का क्रम ऊपर हुआ। सटीक जनसंख्या – 6,85,48,437 (पुरुष 3.55 करोड़, महिला 3.30 करोड़)। क्षेत्रफल में प्रथम (10.41%) परंतु जनसंख्या में केवल 5.66% – अर्थात् घनत्व राष्ट्रीय औसत का लगभग आधा (200 बनाम 382)। आर्थिक निहितार्थ – विरल बसावट (विशेषकर पश्चिमी मरुस्थल) के कारण सड़क, बिजली, पेयजल जैसी सेवाओं की प्रति व्यक्ति लागत अधिक; इसी कारण वित्त आयोग के क्षेत्रफल मानदंड से राजस्थान को लाभ मिलता है। सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला जयपुर (66.26 लाख), न्यूनतम जैसलमेर (6.70 लाख)। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • जनगणना 2011 में सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला? – जयपुर • न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला? – जैसलमेर • भारत का जनसंख्या घनत्व 2011? – 382
46. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में सर्वाधिक और न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले जिले (घनत्व सहित) कौन-से थे?
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – जयपुर (595 व्यक्ति/वर्ग किमी) और जैसलमेर (17 व्यक्ति/वर्ग किमी)। 📘 विस्तार से समझें: घनत्व = जनसंख्या ÷ क्षेत्रफल। राज्य औसत 200; जयपुर के बाद भरतपुर (503) व दौसा (476) अधिक घनत्व वाले। न्यूनतम – जैसलमेर (17), फिर बीकानेर (78) व बाड़मेर (92)। जैसलमेर क्षेत्रफल में सबसे बड़ा जिला है परंतु जनसंख्या में सबसे छोटा। कारण – पूर्वी मैदानी भाग (बनास-चंबल बेसिन) में उपजाऊ मिट्टी, नहर/कुआँ सिंचाई, नगरीकरण व उद्योग; पश्चिम में अल्प वर्षा (100-250 मिमी), रेतीले टिब्बे, भू-जल कमी। आर्थिक नियोजन में प्रभाव – विरल क्षेत्रों हेतु पशुपालन-आधारित आजीविका, सौर/पवन ऊर्जा पार्क (भूमि उपलब्धता), मोबाइल वेटरनरी यूनिट व दूरस्थ सेवाएँ (ई-संजीवनी) विशेष महत्त्व रखती हैं। ध्यान दें – 2023-24 के नए जिलों के कारण पुराने जिलों का घनत्व-क्रम बदल सकता है, परंतु जनगणना 2011 के आँकड़े पुराने 33 जिलों पर आधारित हैं। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • राज्य का औसत घनत्व 2011? – 200 • क्षेत्रफल में सबसे बड़ा जिला? – जैसलमेर • जनगणना 2011 किस ढाँचे पर? – 33 जिले
47. राष्ट्रीय/राज्य आय लेखांकन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) को 'राष्ट्रीय आय' कहा जाता है। 2. घिसावट को 'स्थायी पूँजी का उपभोग' भी कहते हैं। 3. वृद्धावस्था पेंशन व छात्रवृत्ति जैसे हस्तांतरण भुगतान GDP में सम्मिलित किए जाते हैं। 4. स्वामी-अधिवासित मकानों का आरोपित (imputed) किराया GDP में सम्मिलित होता है। 5. पुरानी (second-hand) वस्तुओं की बिक्री का पूरा मूल्य चालू वर्ष के GDP में जोड़ा जाता है। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: केवल तीन कथन (1, 2, 4) सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: कथन 3 गलत – हस्तांतरण भुगतान किसी उत्पादक सेवा के बदले नहीं होते, अतः GDP/राष्ट्रीय आय में नहीं जुड़ते (केवल आय का पुनर्वितरण); परंतु ये 'व्यक्तिगत आय' व 'प्रयोज्य आय' में सम्मिलित होते हैं। कथन 5 गलत – पुरानी वस्तु का उत्पादन पिछले वर्ष में गिना जा चुका है; चालू वर्ष में केवल दलाली/कमीशन (सेवा) जुड़ता है। अन्य नियम – मध्यवर्ती वस्तुएँ नहीं गिनी जातीं (दोहरी गणना); गृहिणियों की घरेलू सेवाएँ नहीं गिनी जातीं; स्व-उपभोग हेतु कृषि उत्पादन गिना जाता है; शेयर/बॉन्ड की ख़रीद-बिक्री वित्तीय लेन-देन है, उत्पादन नहीं। राजस्थान आर्थिक समीक्षा में 'शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद' (NSDP) = GSDP − घिसावट, और प्रति व्यक्ति आय इसी पर आधारित। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • हस्तांतरण भुगतान किसमें जुड़ते हैं? – व्यक्तिगत आय • पुरानी वस्तु की बिक्री में GDP में क्या जुड़ता है? – दलाली/कमीशन • गृहिणी की घरेलू सेवाएँ GDP में? – नहीं
48. घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2023-24 के अखिल भारतीय निष्कर्षों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE, बिना आरोपण) ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग ₹4,122 और शहरी क्षेत्रों में लगभग ₹6,996 रहा। कथन II: शहरी-ग्रामीण MPCE अंतर 2011-12 की तुलना में बढ़ गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – शहरी-ग्रामीण अंतर 2011-12 में 84% था, जो 2022-23 में 71% और 2023-24 में लगभग 70% रह गया, अर्थात् घटा है (ग्रामीण उपभोग तेज़ी से बढ़ा)। HCES (NSO, MoSPI) – उपभोग आधारित गरीबी व असमानता का मुख्य स्रोत; 2011-12 के बाद 2017-18 का सर्वेक्षण गुणवत्ता कारणों से जारी नहीं हुआ, फिर 2022-23 व 2023-24 के सर्वेक्षण आए। प्रमुख प्रवृत्तियाँ – कुल व्यय में भोजन का हिस्सा घट रहा है (एंगेल का नियम), गैर-खाद्य (परिवहन, चिकित्सा, टिकाऊ वस्तुएँ) का बढ़ रहा है; उपभोग असमानता (गिनी) ग्रामीण व शहरी दोनों में घटी। 'आरोपण सहित' MPCE में मुफ़्त राशन (PMGKAY), मुफ़्त लैपटॉप/साइकिल जैसी सरकारी सामाजिक कल्याण वस्तुओं का मूल्य जोड़ा जाता है। राज्य स्तर पर – राज्यवार MPCE आँकड़ों से राजस्थान की ग्रामीण-शहरी स्थिति की तुलना होती है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • शहरी-ग्रामीण MPCE अंतर 2011-12? – 84% • भोजन हिस्सा घटने का नियम? – एंगेल का नियम • HCES कौन करता है? – NSO, MoSPI
49. 'कुज़नेट्स वक्र' (उल्टा U आकार) किन दो चरों के बीच संबंध दर्शाता है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – प्रति व्यक्ति आय और आय-असमानता। 📘 विस्तार से समझें: साइमन कुज़नेट्स (1955) – विकास के आरंभिक चरण में (कृषि से उद्योग की ओर संक्रमण) असमानता बढ़ती है, फिर एक सीमा के बाद (शिक्षा प्रसार, कल्याणकारी राज्य, श्रम का पुनर्वितरण) घटती है। अन्य विकल्प – फिलिप्स वक्र: मुद्रास्फीति बनाम बेरोज़गारी (व्युत्क्रम संबंध); लैफ़र वक्र: कर दर बनाम कर राजस्व (एक बिंदु के बाद दर बढ़ाने पर राजस्व घटता है); एंगेल वक्र/नियम: आय बढ़ने पर भोजन पर व्यय का अनुपात घटता है। पर्यावरणीय कुज़नेट्स वक्र – प्रति व्यक्ति आय बनाम प्रदूषण (पहले बढ़ता, फिर घटता)। कुज़नेट्स को राष्ट्रीय आय लेखांकन के अग्रदूत के रूप में 1971 का अर्थशास्त्र नोबेल मिला। राजस्थान के संदर्भ में – तीव्र GSDP वृद्धि के साथ क्षेत्रीय (पूर्व-पश्चिम, जनजातीय-गैर जनजातीय) असमानता घटाने हेतु आकांक्षी जिला/ब्लॉक कार्यक्रम, TSP व मरु विकास कार्यक्रम जैसे लक्षित उपाय। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • फिलिप्स वक्र? – मुद्रास्फीति बनाम बेरोज़गारी • लैफ़र वक्र? – कर दर बनाम कर राजस्व • कुज़नेट्स नोबेल वर्ष? – 1971
50. सूची-I (आर्थिक वक्र/नियम) को सूची-II (संबंध) से सुमेलित कीजिए: सूची-I: (अ) लैफ़र वक्र (ब) फिलिप्स वक्र (स) लॉरेंज वक्र (द) एंगेल का नियम सूची-II: (1) आय/संपत्ति वितरण की असमानता (2) कर की दर और कर राजस्व (3) मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी का व्युत्क्रम संबंध (4) आय बढ़ने पर भोजन पर व्यय का अनुपात घटना
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – लैफ़र: कर दर-राजस्व; फिलिप्स: मुद्रास्फीति-बेरोज़गारी; लॉरेंज: वितरण की असमानता; एंगेल: भोजन व्यय का घटता अनुपात। 📘 विस्तार से समझें: लैफ़र वक्र (आर्थर लैफ़र) – शून्य व 100% कर दर दोनों पर राजस्व शून्य; बीच में अधिकतम राजस्व वाली दर; 'आपूर्ति-पक्ष अर्थशास्त्र' का आधार – GST दरों के युक्तिकरण (GST 2.0, सितंबर 2025 – 5% व 18% के दो मुख्य स्लैब) जैसे निर्णयों में यह तर्क दिया जाता है कि कम दरें अनुपालन व आधार बढ़ाती हैं। फिलिप्स वक्र (ए.डब्ल्यू. फिलिप्स, 1958) – अल्पकाल में व्युत्क्रम संबंध; दीर्घकाल में ऊर्ध्वाधर (प्राकृतिक बेरोज़गारी दर)। लॉरेंज वक्र (मैक्स लॉरेंज, 1905) – गिनी गुणांक का आधार। एंगेल का नियम (अर्नेस्ट एंगेल, 1857) – HCES में भोजन हिस्सा घटने से भारत में जीवन-स्तर सुधार का संकेत। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • लैफ़र वक्र किस अर्थशास्त्र से जुड़ा? – आपूर्ति-पक्ष • दीर्घकालीन फिलिप्स वक्र? – ऊर्ध्वाधर • गिनी गुणांक किस वक्र पर? – लॉरेंज
51. राजस्थान का प्रचलित मूल्यों पर GSDP 2025-26 में लगभग ₹18.75 लाख करोड़ अनुमानित है। ₹87.5 प्रति अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर मानें तो यह लगभग कितना होगा?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – लगभग 214 अरब डॉलर। 📘 विस्तार से समझें: गणना – ₹18.75 लाख करोड़ = ₹18.75 × 10¹² ; ÷ 87.5 = 0.2143 × 10¹² = 214 अरब (0.214 ट्रिलियन) डॉलर। स्मरण – 1 लाख करोड़ = 10¹² (1 ट्रिलियन) रुपये; 1 अरब = 10⁹। विकसित राजस्थान @2047 का लक्ष्य 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है, अर्थात् वर्तमान आकार का लगभग 20 गुना; 2025-26 से 2047 (21 वर्ष) में इसके लिए डॉलर में लगभग 15% वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) चाहिए (20^(1/21) ≈ 1.153)। डॉलर-वृद्धि = वास्तविक वृद्धि + मुद्रास्फीति − रुपये का अवमूल्यन, इसलिए लक्ष्य हेतु ऊँची वास्तविक वृद्धि, नियंत्रित मुद्रास्फीति व स्थिर विनिमय दर तीनों आवश्यक। '72 का नियम' – 15% CAGR पर आकार लगभग 4.8 वर्ष में दोगुना। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 1 लाख करोड़ रुपये = ? – 10¹² रुपये • 4.3 ट्रिलियन लक्ष्य हेतु डॉलर CAGR लगभग? – 15% • 72 का नियम? – दोगुना होने का समय ≈ 72 ÷ वृद्धि दर
52. राष्ट्रीय व राज्य आय की अवधारणाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन I: सकल राष्ट्रीय आय (GNI) = GDP + विदेशों से शुद्ध साधन आय। कथन II: राज्य का NSDP निकालने के लिए 'राज्य के बाहर से शुद्ध साधन आय' नियमित रूप से जोड़ी जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A) 📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है। 📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – NSDP = GSDP − घिसावट (स्थायी पूँजी का उपभोग)। राज्य आय अनुमान 'घरेलू' (domestic) अवधारणा पर आधारित हैं – राज्य की भौगोलिक सीमा में उत्पन्न आय, चाहे उत्पादक कहीं के निवासी हों। राज्य सीमाओं के आर-पार साधन आय (जैसे प्रवासी राजस्थानियों द्वारा भेजी गई आय, बाहरी कंपनियों का लाभ) का विश्वसनीय आँकड़ा उपलब्ध नहीं, इसलिए 'राज्य राष्ट्रीय आय' नहीं बनाई जाती। राष्ट्रीय स्तर पर – GDP (घरेलू) + विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) = GNP/GNI; भारत में NFIA ऋणात्मक है (विदेशी निवेश पर ब्याज/लाभांश बहिर्गमन अधिक), अतः GNI < GDP। विदेश से भेजी गई धनराशि (remittances) मुख्यतः 'चालू हस्तांतरण' है, साधन आय नहीं; भारत विश्व में सर्वाधिक प्रेषण प्राप्त करने वाला देश है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • NSDP का सूत्र? – GSDP − घिसावट • भारत में NFIA का चिह्न? – ऋणात्मक • प्रेषण (remittance) किस श्रेणी में? – चालू हस्तांतरण
53. भारत में गरीबी आकलन की समितियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. तेंदुलकर समिति की पद्धति से 2011-12 में भारत में गरीबी अनुपात 21.9% आँका गया। 2. रंगराजन समिति (2014) ने 2011-12 के लिए गरीबी अनुपात 37.2% आँका। 3. लकड़ावाला समिति (1993) ने राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखाओं के प्रयोग की अनुशंसा की। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C) 📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 3 सही हैं। 📘 विस्तार से समझें: कथन 2 गलत – रंगराजन समिति ने 2011-12 के लिए 29.5% गरीबी आँकी; 37.2% तेंदुलकर पद्धति से 2004-05 का अनुपात था। तेंदुलकर समिति (2009) – कैलोरी आधार छोड़कर स्वास्थ्य-शिक्षा व्यय सहित उपभोग टोकरी; ग्रामीण-शहरी समान टोकरी। 2011-12 में राजस्थान का तेंदुलकर गरीबी अनुपात लगभग 14.7% (ग्रामीण ~16.1%, शहरी ~10.7%), जो राष्ट्रीय (21.9%) से कम था। रंगराजन समिति ने प्रतिदिन लगभग ₹32 (ग्रामीण) व ₹47 (शहरी) की रेखा सुझाई, जिसे सरकार ने औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। अन्य – अलघ कार्य दल (1979): कैलोरी मानक 2,400 ग्रामीण, 2,100 शहरी। वर्तमान में आधिकारिक उपभोग-गरीबी रेखा नहीं; नीति आयोग का बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) प्रमुख माप बन गया है। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • 2004-05 तेंदुलकर गरीबी? – 37.2% • अलघ कार्य दल के कैलोरी मानक? – 2,400 ग्रामीण, 2,100 शहरी • राजस्थान 2011-12 तेंदुलकर गरीबी? – लगभग 14.7%
54. सूची-I (सतत विकास लक्ष्य संख्या) को सूची-II (लक्ष्य) से सुमेलित कीजिए: सूची-I: (अ) SDG 2 (ब) SDG 6 (स) SDG 7 (द) SDG 13 सूची-II: (1) जलवायु कार्रवाई (2) शून्य भुखमरी (3) स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (4) सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा
✅ सही उत्तर: (B) 📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – SDG 2: शून्य भुखमरी; SDG 6: स्वच्छ जल एवं स्वच्छता; SDG 7: सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा; SDG 13: जलवायु कार्रवाई। 📘 विस्तार से समझें: संयुक्त राष्ट्र एजेंडा 2030 (सितंबर 2015) – 17 लक्ष्य, 169 उद्देश्य (targets); MDGs (2000-2015, 8 लक्ष्य) का उत्तराधिकारी। अन्य – SDG 1 गरीबी उन्मूलन, 3 उत्तम स्वास्थ्य, 4 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, 5 लैंगिक समानता, 8 उत्कृष्ट कार्य व आर्थिक वृद्धि, 9 उद्योग-नवाचार-अवसंरचना, 10 असमानता में कमी, 11 सतत शहर, 12 उत्तरदायी उपभोग-उत्पादन, 14 जलीय जीवन, 15 स्थलीय जीवन, 16 शांति-न्याय-संस्थाएँ, 17 लक्ष्यों हेतु साझेदारी। नीति आयोग का SDG इंडिया इंडेक्स (पहला 2018) – राज्यों का 0-100 अंक; श्रेणियाँ – आकांक्षी (0-49), प्रदर्शक (50-64), अग्रणी/फ्रंट रनर (65-99), लक्ष्य प्राप्तकर्ता (100)। राजस्थान का संबंधित योगदान – SDG 7 हेतु 125 GW नवीकरणीय लक्ष्य (ICEP 2024), SDG 6 हेतु जल जीवन मिशन व रामजल सेतु, SDG 2 हेतु NFSA व श्री अन्नपूर्णा रसोई। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • SDG की कुल संख्या? – 17 • SDG के उद्देश्य (targets)? – 169 • SDG इंडेक्स में 'फ्रंट रनर' अंक सीमा? – 65-99
55. राष्ट्रीय लेखा में 'सकल स्थायी पूँजी निर्माण' (GFCF) में निम्नलिखित में से क्या सम्मिलित है?
✅ सही उत्तर: (D) 📌 विश्लेषण: सही उत्तर – एक नए कारख़ाना भवन का निर्माण। 📘 विस्तार से समझें: GFCF = नई स्थायी परिसंपत्तियों (भवन, सड़क-पुल जैसे निर्माण, मशीनरी-उपकरण, परिवहन उपकरण, बौद्धिक संपदा उत्पाद जैसे सॉफ़्टवेयर/R&D) पर व्यय। सकल पूँजी निर्माण (GCF) = GFCF + स्टॉक में परिवर्तन (CIS) + बहुमूल्य वस्तुएँ (valuables); अतः स्टॉक वृद्धि GCF का अंग है परंतु GFCF का नहीं। शेयर ख़रीद – केवल वित्तीय परिसंपत्ति का हस्तांतरण, वास्तविक पूँजी निर्माण नहीं। पुराने मकान की पुनर्बिक्री – स्वामित्व हस्तांतरण, नया उत्पादन नहीं। भूमि – उत्पादित परिसंपत्ति नहीं, अतः उसकी ख़रीद GFCF में नहीं (केवल भूमि सुधार व हस्तांतरण लागत)। राजस्थान में GFCF/GSDP अनुपात लगभग 29.5% (2024-25), जिसमें सरकार का पूँजीगत व्यय (सड़क, सिंचाई, बिजली) व निजी निवेश (राइजिंग राजस्थान, RIPS 2024) दोनों सम्मिलित। 🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न: • GCF का सूत्र? – GFCF + स्टॉक परिवर्तन + बहुमूल्य वस्तुएँ • भूमि ख़रीद GFCF में? – नहीं • राजस्थान GFCF अनुपात 2024-25? – 29.53%