1. राजस्थान बजट 2026-27 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: यह बजट 11 फरवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया।
कथन II: ऋण-पुनर्भुगतान सहित कुल व्यय लगभग ₹6.11 लाख करोड़ है, जिसमें से ऋण-पुनर्भुगतान घटाने पर शुद्ध व्यय लगभग ₹4.06 लाख करोड़ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: बजट 2026-27 के मुख्य आँकड़े (₹ करोड़): कुल व्यय 6,10,956 (ऋण-पुनर्भुगतान 2,05,324 सहित); शुद्ध व्यय 4,05,632 (2025-26 संशोधित अनुमान से लगभग 13% अधिक); कुल प्राप्तियाँ 6,01,480 (उधार सहित); शुद्ध प्राप्तियाँ (उधार रहित) 3,26,140; राजस्व प्राप्तियाँ 3,25,740; राजस्व व्यय 3,50,054; उधार 2,75,340 (शुद्ध उधार 70,017)। यह भजनलाल शर्मा सरकार का तीसरा पूर्ण बजट था, जो 'विकसित राजस्थान @2047' के 10 स्तंभों पर आधारित रहा, और साथ में पृथक कृषि बजट (₹1,19,408 करोड़) भी प्रस्तुत हुआ। राजस्थान विधानसभा में बजट अनुच्छेद 202 (वार्षिक वित्तीय विवरण) के अंतर्गत रखा जाता है; अनुदान-माँगें अनुच्छेद 203 और विनियोग विधेयक अनुच्छेद 204 के अधीन पारित होते हैं।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राज्य बजट किस अनुच्छेद के अंतर्गत? – अनुच्छेद 202
• बजट 2026-27 में ऋण-पुनर्भुगतान? – ₹2,05,324 करोड़
• बजट 2026-27 में राजस्व व्यय? – ₹3,50,054 करोड़
2. सूची-I (बजट 2026-27 का राजकोषीय संकेतक) को सूची-II (GSDP के प्रतिशत के रूप में अनुमान) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (बजट 2026-27 का राजकोषीय संकेतक)
सूची-II (GSDP के प्रतिशत के रूप में अनुमान)
(अ)राजकोषीय घाटा
(1)1.7%
(ब)राजस्व घाटा
(2)3.7%
(स)प्राथमिक घाटा
(3)36.8%
(द)कुल बकाया देयताएँ (ऋण), वर्ष के अंत में
(4)1.1%
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही सुमेल: राजकोषीय घाटा 3.7%; राजस्व घाटा 1.1%; प्राथमिक घाटा 1.7%; ऋण 36.8%।
📘 विस्तार से समझें: राशियाँ (₹ करोड़): राजकोषीय घाटा 79,492 (3.69%); राजस्व घाटा 24,314; प्राथमिक घाटा 35,817। परिभाषाएँ: राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ) = सरकार की शुद्ध उधारी-आवश्यकता; राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ (3,50,054 − 3,25,740 ≈ 24,314); प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान (अर्थात् ब्याज भुगतान लगभग ₹43,675 करोड़)। तुलना: 2025-26 में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान 4.3% → संशोधित 3.9%; राजस्व घाटा संशोधित 1.8%; ऋण 2025-26 (संशोधित) 38% → 2026-27 में 36.8% – अर्थात् राजकोषीय समेकन (consolidation)। बकाया गारंटियाँ (31 दिसंबर 2025) ₹1,27,210 करोड़ (GSDP का 6.8%)। 16वें वित्त आयोग ने राज्यों के लिए राजकोषीय घाटे की सीमा 3% रखी है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• प्राथमिक घाटा = ? – राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान
• 2025-26 में राजकोषीय घाटा (संशोधित)? – GSDP का 3.9%
• राज्य की बकाया गारंटियाँ (दिसंबर 2025)? – ₹1,27,210 करोड़
3. बजट 2026-27 में निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए किए गए आवंटन को घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
2. ऊर्जा
3. शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति
4. ग्रामीण विकास
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही क्रम: शिक्षा (₹68,989 करोड़) > ऊर्जा (₹42,752 करोड़) > ग्रामीण विकास (₹32,948 करोड़) > स्वास्थ्य (₹32,526 करोड़)।
📘 विस्तार से समझें: प्रमुख क्षेत्रवार आवंटन (₹ करोड़, बजट अनुमान 2026-27; कोष्ठक में 2025-26 संशोधित की तुलना में परिवर्तन): शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति 68,989 (+6%); ऊर्जा 42,752 (+24%); ग्रामीण विकास 32,948 (+24%); स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण 32,526 (+8%); समाज कल्याण एवं पोषण 26,495 (+10%); शहरी विकास 20,184 (+58% – सर्वाधिक प्रतिशत वृद्धि); कृषि एवं संबद्ध 18,212 (+10%); परिवहन 16,639 (+13%); जलापूर्ति एवं स्वच्छता 14,288 (+34%); पुलिस 11,729 (+10%)। ये 10 क्षेत्र कुल क्षेत्रीय व्यय का लगभग 70% हैं। ध्यान दें: ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य के आवंटन बहुत निकट हैं (अंतर केवल ₹422 करोड़)। ऊर्जा का बड़ा भाग विद्युत दरें न बढ़ाने हेतु अनुदान (₹29,432 करोड़) है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• सर्वाधिक प्रतिशत वृद्धि वाला क्षेत्र? – शहरी विकास (+58%)
• विद्युत दरें न बढ़ाने हेतु अनुदान? – ₹29,432 करोड़
• कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का (बजट-क्षेत्रीय) आवंटन? – ₹18,212 करोड़
4. अभिकथन (A): बजट 2026-27 के साथ प्रस्तुत पृथक कृषि बजट का आकार (लगभग ₹1.19 लाख करोड़) बजट के क्षेत्रवार विवरण में 'कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ' मद के आवंटन (लगभग ₹18,212 करोड़) से कई गुना अधिक है।
कारण (R): राजस्थान में पृथक कृषि बजट प्रस्तुत करने की परंपरा वर्ष 2022-23 से आरंभ हुई।
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
📘 विस्तार से समझें: अंतर का कारण परिभाषा है: पृथक कृषि बजट में कृषि से संबंधित सभी विभागों/मदों का व्यय (कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य, सहकारिता, सिंचाई-जल संसाधन, कृषि बिजली सब्सिडी, ब्याज अनुदान, कृषि विपणन, ग्रामीण विकास के कृषि-सम्बद्ध घटक आदि) तथा बजट-बाह्य/निगम संसाधन भी जोड़े जाते हैं; जबकि क्षेत्रवार सारणी में केवल 'कृषि एवं संबद्ध' प्रमुख शीर्ष आता है। कृषि बजट 2026-27: कुल ₹1,19,408.11 करोड़, जिसमें समेकित निधि से ₹69,422.99 करोड़ (राज्य बजट का लगभग 11.36%); पिछले वर्ष से लगभग 7.59% अधिक; GSDP का लगभग 5.55%। प्रमुख घोषणाएँ: शून्य-ब्याज फसली ऋण ₹25,000 करोड़ (35 लाख+ किसान), 50,000 सौर पंप (₹1,500 करोड़), 20,000 किमी तारबंदी (₹228 करोड़), 500 कस्टम हायरिंग केंद्र, कृषि उपकरण अनुदान ₹160 करोड़, गोपाल क्रेडिट कार्ड ₹150 करोड़, दुग्ध उत्पादक संबल ₹700 करोड़। पृथक कृषि बजट की परंपरा 2022-23 से है, पर यह तथ्य A में आकार-अंतर की व्याख्या नहीं करता।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• कृषि बजट 2026-27 का कुल आकार? – ₹1,19,408.11 करोड़
• कृषि बजट में समेकित निधि का अंश? – ₹69,422.99 करोड़
• शून्य-ब्याज फसली ऋण वितरण लक्ष्य? – ₹25,000 करोड़
5. 16वें वित्त आयोग (2026-31) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा 41% पर यथावत रखा।
2. इसमें राजस्थान का हिस्सा 5.93% है, जो 15वें वित्त आयोग (लगभग 6.03%) से कम है।
3. इसने क्षैतिज वितरण में 'कर एवं राजकोषीय प्रयास' मानदंड का भार बढ़ाकर 10% कर दिया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: 16वाँ वित्त आयोग – अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया; रिपोर्ट 1 फरवरी 2026 को संसद में प्रस्तुत; अवधि 2026-27 से 2030-31। कथन 3 गलत – 'कर एवं राजकोषीय प्रयास' (15वें में 2.5%) हटा दिया गया और नया मानदंड 'GDP में योगदान' (10%) जोड़ा गया। क्षैतिज मानदंड (16वाँ; कोष्ठक में 15वाँ): आय-दूरी 42.5% (45), जनसंख्या 2011 – 17.5% (15), जनसांख्यिकीय प्रदर्शन 10% (12.5), क्षेत्रफल 10% (15), वन 10% (10), GDP योगदान 10% (नया)। क्षेत्रफल का भार घटना (15→10) सबसे बड़े राज्य राजस्थान के हिस्से में मामूली कमी का एक प्रमुख कारण माना जाता है। राजस्व-घाटा अनुदान और क्षेत्र/राज्य-विशिष्ट अनुदान बंद; राज्यों का राजकोषीय घाटा 3% GSDP; केंद्र 2030-31 तक 3.5% GDP। राजस्थान हेतु अनुदान (2026-31): ग्रामीण स्थानीय निकाय मूल ₹25,173 करोड़; शहरी मूल ₹10,145 करोड़; आपदा प्रबंधन ₹9,211 करोड़। 14वें वित्त आयोग में राजस्थान का हिस्सा 5.495% था।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष? – डॉ. अरविंद पनगढ़िया
• 16वें वित्त आयोग में जोड़ा गया नया मानदंड? – GDP में योगदान (10%)
• राज्यों की राजकोषीय घाटा सीमा? – GSDP का 3%
6. बजट 2026-27 में राजस्व प्राप्तियों की संरचना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा राज्य के स्वयं के कर राजस्व से अधिक अनुमानित है।
कथन II: राज्य के स्वयं के कर राजस्व में राज्य GST, स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क, राज्य उत्पाद शुल्क व वाहन कर प्रमुख स्रोत हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है।
📘 विस्तार से समझें: राजस्व प्राप्तियाँ (लगभग ₹3.26 लाख करोड़) के चार घटक: (1) राज्य का स्वयं का कर राजस्व – ₹1.62 लाख करोड़ से अधिक (सबसे बड़ा); (2) केंद्रीय करों में हिस्सा – ₹90,000 करोड़ से अधिक; (3) केंद्र से अनुदान व सहायता – ₹44,000 करोड़ से अधिक; (4) स्वयं का गैर-कर राजस्व – खनन रॉयल्टी (पेट्रोलियम सहित), ब्याज प्राप्तियाँ, सेवा शुल्क आदि। अतः कथन I गलत। स्वयं के कर राजस्व में SGST (GST का राज्य-अंश व IGST निपटान) सबसे बड़ा, उसके बाद पेट्रोल-डीज़ल पर VAT (GST से बाहर), राज्य उत्पाद शुल्क (मदिरा), स्टाम्प-पंजीयन, वाहन कर, विद्युत शुल्क। गैर-कर राजस्व में राजस्थान की विशेषता – बाड़मेर के कच्चे तेल की रॉयल्टी तथा खनिज (सीसा-जस्ता, चूना पत्थर आदि) की रॉयल्टी। बजट 2026-27 के कर-प्रस्ताव: MSME ऋण-दस्तावेज़ों पर स्टाम्प शुल्क 0.125% (अधिकतम ₹10 लाख), ऋण-दस्तावेज़ पंजीयन शुल्क 1% से घटाकर 0.5% (अधिकतम ₹1 लाख), VAT/भू-राजस्व/मंडी शुल्क हेतु एमनेस्टी योजनाएँ।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजस्व प्राप्तियों का सबसे बड़ा घटक? – राज्य का स्वयं का कर राजस्व
• GST के बाहर किन ईंधनों पर राज्य VAT? – पेट्रोल-डीज़ल
• ऋण-दस्तावेज़ों पर पंजीयन शुल्क (2026-27)? – 0.5% (अधिकतम ₹1 लाख)
7. बजट 2026-27 में निम्नलिखित योजनाओं/मदों के लिए किए गए प्रावधानों पर विचार कीजिए:
1. मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना – लगभग ₹10,411 करोड़
2. समग्र शिक्षा अभियान – लगभग ₹13,768 करोड़
3. ग्रामीण रोजगार गारंटी – लगभग ₹7,481 करोड़
4. अमृत (AMRUT) मिशन 2.0 – लगभग ₹6,766 करोड़
5. कृषि (फसल) बीमा – लगभग ₹5,988 करोड़
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सभी पाँच प्रावधान सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: PRS बजट विश्लेषण के अनुसार प्रमुख योजनावार प्रावधान (₹ करोड़, 2026-27 BE): समग्र शिक्षा 13,768; मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन 10,411; ग्रामीण रोजगार गारंटी 7,481; AMRUT 2.0 – 6,766; कृषि बीमा 5,988; NRHM 4,854; राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) 3,817; मध्याह्न भोजन (PM पोषण) 2,092; सड़क-पुल पूँजीगत परिव्यय 12,038; ग्रामीण जलापूर्ति 5,747; शहरी जलापूर्ति 3,934; विद्युत दरें न बढ़ाने हेतु अनुदान 29,432; जिला पुलिस 8,526। अन्य घोषणाएँ: मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार – ₹1,000 करोड़ (लगभग 1 लाख युवा, ₹10 लाख तक के ऋण पर 100% ब्याज अनुदान); लखपति दीदी ऋण-सीमा ₹1 लाख से ₹1.5 लाख; नारी शक्ति उद्यम ऋण-सीमा ₹50 लाख से ₹1 करोड़; सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष ₹1,000 करोड़ से ₹2,000 करोड़।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• युवा स्वरोजगार योजना में ब्याज अनुदान? – ₹10 लाख तक ऋण पर 100%
• डेयरी अवसंरचना विकास कोष (2026-27)? – ₹2,000 करोड़
• RGHS हेतु प्रावधान? – ₹3,817 करोड़
8. अभिकथन (A): राजस्व घाटे को कम करना राजकोषीय गुणवत्ता की दृष्टि से राजकोषीय घाटा कम करने से भी अधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
कारण (R): राजस्व घाटे का अर्थ है कि सरकार उधार ली गई राशि का उपयोग परिसंपत्ति-निर्माण के स्थान पर चालू व्यय (वेतन, ब्याज, सब्सिडी) में कर रही है।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: 'स्वर्णिम नियम' (golden rule): सरकार को केवल पूँजीगत (उत्पादक) व्यय हेतु उधार लेना चाहिए। यदि राजस्व घाटा शून्य हो, तो पूरा राजकोषीय घाटा पूँजीगत परिसंपत्तियाँ बनाता है, जो भविष्य में आय/वृद्धि देकर ऋण-चुकौती में सहायक होती हैं। राजस्थान राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम 2005 का मूल लक्ष्य भी राजस्व घाटा समाप्त करना और राजकोषीय घाटा 3% तक रखना है। राज्य का राजस्व घाटा: 2023-24 में लगभग ₹38,954 करोड़; 2025-26 संशोधित 1.8% GSDP; 2026-27 बजट अनुमान ₹24,314 करोड़ (1.1%) – निरंतर कमी। 'प्रभावी राजस्व घाटा' = राजस्व घाटा − पूँजीगत परिसंपत्ति निर्माण हेतु अनुदान। बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा (₹79,492 करोड़) का लगभग 30% राजस्व घाटा है, शेष पूँजीगत व्यय को वित्तपोषित करता है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजस्थान FRBM अधिनियम का वर्ष? – 2005
• 2026-27 में राजस्व घाटा? – ₹24,314 करोड़ (GSDP का 1.1%)
• 'स्वर्णिम नियम' क्या? – केवल पूँजीगत व्यय हेतु उधार
9. राजस्थान राज्य वित्त आयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: अगस्त 2025 में पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
कथन II: राज्य वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: राज्य वित्त आयोग (SFC) का गठन राज्यपाल करते हैं – पंचायतों हेतु अनुच्छेद 243-I (73वाँ संशोधन) तथा नगरपालिकाओं हेतु अनुच्छेद 243-Y (74वाँ संशोधन) के अंतर्गत, प्रत्येक पाँच वर्ष में; अनुच्छेद 280 केंद्रीय वित्त आयोग (राष्ट्रपति द्वारा) से संबंधित है। अगस्त 2025 में गठित आयोग: अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, सदस्य-सचिव नरेश कुमार ठकराल (सेवानिवृत्त IAS), कार्यकाल 18 माह। पूर्ववर्ती छठा SFC (अप्रैल 2021) – अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह। SFC की सिफ़ारिशें: राज्य के कर/शुल्क/टोल का राज्य और स्थानीय निकायों (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद, नगर निकाय) के बीच बँटवारा; स्थानीय निकायों को समेकित निधि से अनुदान; उनकी वित्तीय स्थिति सुधारने के उपाय। राज्यपाल रिपोर्ट को कार्यवाही-प्रतिवेदन सहित विधानमंडल में रखवाते हैं। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग ने राजस्थान के स्थानीय निकायों हेतु 2026-31 में ग्रामीण मूल अनुदान ₹25,173 करोड़ व शहरी मूल अनुदान ₹10,145 करोड़ सुझाए हैं।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राज्य वित्त आयोग का गठन कौन करता है? – राज्यपाल
• छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष? – प्रद्युम्न सिंह
• नगरपालिकाओं हेतु SFC का अनुच्छेद? – 243-Y
10. बजट 2026-27 के कर एवं राजस्व संबंधी प्रस्तावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सरकारी निर्माण कार्यों में M-सैंड (निर्मित रेत) के उपयोग का अनुपात 25% से बढ़ाकर 50% करने का प्रस्ताव है।
2. खातेदारी भूमि पर खनन पट्टों हेतु प्रीमियम 40% से घटाकर 30% किया गया।
3. अन्य राज्यों से लाए गए गैर-परिवहन वाहनों पर मोटर वाहन कर में 50% तक की छूट का प्रावधान किया गया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: तीनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: बजट 2026-27 के राजस्व/सुधार प्रस्ताव: (1) खनन – 10 प्रमुख खनिज ब्लॉक व 100 अप्रधान खनिज प्लॉटों की नीलामी; M-सैंड उपयोग 25% → 50% (नदियों से बजरी-दोहन व अवैध खनन घटाने हेतु; राज्य M-सैंड नीति 2020 से प्रोत्साहन); खातेदारी पट्टा प्रीमियम 40% → 30%। (2) परिवहन – 16.5 टन से अधिक माल-वाहनों हेतु एकमुश्त कर का विकल्प; हरित कर (green tax) की दरें संशोधित; अन्य राज्यों से लाए निजी वाहनों पर 50% तक कर छूट। (3) पंजीयन-स्टाम्प – MSME ऋण-दस्तावेज़ों पर 0.125% स्टाम्प (अधिकतम ₹10 लाख); ऋण-दस्तावेज़ पंजीयन शुल्क 0.5% (अधिकतम ₹1 लाख); 106 उप-पंजीयक कार्यालय 'मॉडल कार्यालय' बनेंगे। (4) एमनेस्टी योजनाएँ – VAT, भू-राजस्व, परिवहन, खनन, मंडी शुल्क व कृषक कल्याण शुल्क के बकाया पर ब्याज-शास्ति में छूट। (5) GST 2.0 के बाद आवश्यक वस्तुओं पर कर-भार में कमी; अपीलीय प्राधिकारियों हेतु ऑनलाइन सुनवाई।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• बजट 2026-27 में नीलाम होने वाले प्रमुख खनिज ब्लॉक? – 10
• उप-पंजीयक कार्यालय जो मॉडल बनेंगे? – 106
• M-सैंड उपयोग का नया लक्ष्य? – 50%
11. सूची-I (बजट 2026-27 की घोषणा) को सूची-II (उसका संबंधित 'विकसित राजस्थान' स्तंभ/क्षेत्र) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (बजट 2026-27 की घोषणा)
सूची-II (उसका संबंधित 'विकसित राजस्थान' स्तंभ/क्षेत्र)
(अ)250 अटल प्रगति पथ
(1)हरित विकास एवं पर्यावरण
(ब)राज-सेतु (RAJ-SETU) कोष
(2)अवसंरचना (ग्रामीण सड़क) विस्तार
(स)400 विद्यालयों का CM-RISE में उन्नयन
(3)शहरी अवसंरचना वित्तपोषण
(द)'हरित राजस्थान' – 10 करोड़ पौधे
(4)मानव संसाधन विकास
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही सुमेल: अटल प्रगति पथ – अवसंरचना; राज-सेतु – शहरी अवसंरचना वित्तपोषण; CM-RISE – मानव संसाधन; हरित राजस्थान – हरित विकास।
📘 विस्तार से समझें: बजट 2026-27 'विकसित राजस्थान' के 10 स्तंभों पर आधारित था: (1) अवसंरचना विस्तार – राज्य राजमार्ग, ROB/RUB व पुलों हेतु ₹1,800 करोड़; 250 अटल प्रगति पथ (₹500 करोड़); पेयजल अवसंरचना ₹5,000 करोड़+; बीकानेर-जैसलमेर में 4,830 MW सौर पार्क। (2) नागरिक सुविधाएँ – 7 लाख स्ट्रीट लाइट, राज-सेतु शहरी अवसंरचना कोष। (3) उद्योग एवं निवेश – संभाग स्तर पर MSME प्लग-एंड-प्ले सुविधा (₹350 करोड़), ICD व मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, राजस्थान फाउंडेशन के 14 नए चैप्टर। (4) मानव संसाधन – 1 लाख युवाओं को ब्याज अनुदान (₹1,000 करोड़), 400 विद्यालय CM-RISE (₹1,000 करोड़), 1,000 विद्यालयों में AI-लैब, राज-सवेरा (नशा-मुक्ति), राज-सुरक्षा (आपात चिकित्सा), राज-ममता (मानसिक स्वास्थ्य)। (5) सामाजिक सुरक्षा – लखपति दीदी ऋण ₹1.5 लाख, 11,000 अमृत पोषण वाटिका, 7,500 आंगनबाड़ी 'नंदघर'। (6) पर्यटन-कला-संस्कृति – खुहड़ी (जैसलमेर) विशेष पर्यटन क्षेत्र, शेखावाटी हवेली संरक्षण ₹200 करोड़। (7) सुशासन व डिजिटल – नई IT नीति, ड्रोन नीति, WhatsApp पर 100 नागरिक सेवाएँ। (8) कृषि व किसान कल्याण। (9) हरित विकास – हरित राजस्थान (10 करोड़ पौधे), MJSA 2.0 (₹2,500 करोड़), PRITHWI वन्यजीव परियोजना (₹1,500 करोड़)। (10) आर्थिक विज़न – 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• बजट 2026-27 में अटल प्रगति पथ हेतु प्रावधान? – ₹500 करोड़
• बीकानेर-जैसलमेर में घोषित सौर पार्क क्षमता? – 4,830 MW
• PRITHWI परियोजना का क्षेत्र? – वन्यजीव संरक्षण (₹1,500 करोड़)
12. बजट 2026-27 के राजकोषीय अनुपातों की गणना हेतु वर्ष 2026-27 का प्रचलित मूल्यों पर GSDP कितना अनुमानित किया गया है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर ₹21,52,100 करोड़ है।
📘 विस्तार से समझें: बजट 2026-27 में GSDP ₹21,52,100 करोड़ अनुमानित किया गया – 2025-26 के संशोधित अनुमान पर लगभग 15% नाममात्र (nominal) वृद्धि। इसी के आधार पर राजकोषीय घाटा 3.69% (79,492 ÷ 21,52,100), राजस्व घाटा 1.1%, ऋण 36.8% निकले हैं। ध्यान दें: आर्थिक समीक्षा में 2025-26 का अग्रिम अनुमान ₹18,75,413 करोड़ है (10.24% वृद्धि); बजट दस्तावेज़ प्रायः भिन्न (संशोधित) आधार प्रयोग करते हैं, इसलिए अनुपात-गणना में 'हर' (denominator) का अंतर परीक्षा में प्रश्न बनता है। उच्च नाममात्र-वृद्धि अनुमान घाटे/ऋण अनुपात को कम दिखाता है – इसलिए विश्लेषक (जैसे PRS) अनुमानों की यथार्थता पर टिप्पणी करते हैं।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा की गणना? – 79,492 ÷ 21,52,100 ≈ 3.69%
• आर्थिक समीक्षा में 2025-26 का GSDP? – ₹18,75,413 करोड़
• बजट में GSDP की मानी गई नाममात्र वृद्धि? – लगभग 15%
13. अभिकथन (A): बजट 2026-27 में ऊर्जा क्षेत्र का आवंटन (लगभग ₹42,752 करोड़) शिक्षा के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्रीय आवंटन है।
कारण (R): ऊर्जा आवंटन का बड़ा भाग विद्युत दरें न बढ़ाने के बदले वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को दिए जाने वाले अनुदान (लगभग ₹29,432 करोड़) का है।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: राज्य सरकार कृषि उपभोक्ताओं को अनुदानित/निःशुल्क बिजली और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देती है (जैसे घरेलू उपभोक्ताओं को निर्धारित यूनिट तक निःशुल्क/रियायती बिजली)। विद्युत विनियामक आयोग (RERC) द्वारा तय लागत-आधारित दर व उपभोक्ता से वसूली जाने वाली दर के अंतर की भरपाई सरकार डिस्कॉम्स (जयपुर, अजमेर, जोधपुर विद्युत वितरण निगम) को अनुदान से करती है। यही अनुदान ऊर्जा आवंटन का लगभग 69% है, इसलिए ऊर्जा का आवंटन इतना बड़ा है (2025-26 संशोधित से 24% अधिक)। डिस्कॉम्स का संचित घाटा राज्य की राजकोषीय स्थिरता का बड़ा जोखिम है; पूर्व में UDAY (2015) के अंतर्गत राज्य ने डिस्कॉम ऋण अपने ऊपर लिए थे। सुधार: स्मार्ट मीटर, PM-कुसुम (किसानों को सौर पंप – दिन में बिजली), कृषि फीडर पृथक्करण, संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजस्थान की तीन डिस्कॉम? – जयपुर, अजमेर, जोधपुर विद्युत वितरण निगम
• विद्युत दरें तय करने वाली संस्था? – RERC
• डिस्कॉम ऋण अधिग्रहण की केंद्रीय योजना (2015)? – UDAY
14. राजस्थान में विशेष बजट-विवरणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: राजस्थान ने अपना पहला 'ग्रीन बजट' (हरित बजट) वर्ष 2020-21 के बजट के साथ प्रस्तुत किया था।
कथन II: राज्य बजट के साथ 'जेंडर बजट' विवरण प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें महिलाओं हेतु योजनाओं के व्यय को श्रेणीबद्ध किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है।
📘 विस्तार से समझें: राजस्थान का पहला 'ग्रीन बजट' (पर्यावरण-हितैषी व्यय का पृथक विवरण) बजट 2025-26 के साथ प्रस्तुत हुआ – उसमें पर्यावरण, जलवायु-अनुकूलन, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण आदि से जुड़े व्यय को चिह्नित किया गया; अतः कथन I गलत। जेंडर बजटिंग: राज्य में जेंडर बजट विवरण प्रस्तुत किया जाता है जिसमें योजनाओं को महिलाओं हेतु 100% व 30-99% लाभ वाली श्रेणियों में बाँटा जाता है; इसकी निगरानी हेतु जेंडर बजटिंग प्रकोष्ठ है। इसी प्रकार 'बाल बजट' विवरण (0-18 वर्ष के बच्चों पर व्यय) तथा अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना (SCSP/TSP) के प्रावधान भी बजट के साथ आते हैं। बजट 2026-27 में भी हरित बजट के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण व हरित शहरी-ग्रामीण विकास पहलें शामिल रहीं।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजस्थान का पहला ग्रीन बजट? – 2025-26
• SC/ST हेतु बजट-उप-योजनाएँ? – SCSP व TSP
• बाल बजट किस आयु-वर्ग से संबंधित? – 0-18 वर्ष
15. राज्य बजट से संबंधित संवैधानिक अनुच्छेदों (सूची-I) को उनके विषय (सूची-II) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
सूची-II
(अ)अनुच्छेद 202
(1)अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान
(ब)अनुच्छेद 204
(2)वार्षिक वित्तीय विवरण
(स)अनुच्छेद 205
(3)विनियोग विधेयक
(द)अनुच्छेद 206
(4)लेखानुदान (vote on account)
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही सुमेल: 202 – वार्षिक वित्तीय विवरण; 204 – विनियोग विधेयक; 205 – अनुपूरक अनुदान; 206 – लेखानुदान।
📘 विस्तार से समझें: अनुच्छेद 202 – राज्यपाल प्रत्येक वित्त वर्ष हेतु विधानमंडल के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) रखवाता है; 'भारित' व्यय (राज्यपाल के वेतन-भत्ते, उच्च न्यायालय न्यायाधीशों के वेतन, ऋण-ब्याज आदि) पर मतदान नहीं। 203 – अनुदान माँगों पर मतदान (केवल विधानसभा)। 204 – विनियोग विधेयक (संचित निधि से निकासी)। 205 – अनुपूरक/अतिरिक्त/अधिक अनुदान। 206 – लेखानुदान, प्रत्ययानुदान, अपवादानुदान। 207 – धन विधेयक हेतु राज्यपाल की पूर्व सिफ़ारिश। 266 – संचित निधि व लोक लेखा; 267 – आकस्मिकता निधि। राजस्थान बजट 2026-27 – 11 फरवरी 2026 को प्रस्तुत; FRBM अधिनियम 2005 के अंतर्गत मध्यावधि राजकोषीय नीति विवरण भी।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• अनुदान माँगों पर मतदान का अनुच्छेद? – 203
• आकस्मिकता निधि का अनुच्छेद? – 267
• राजस्थान FRBM अधिनियम? – 2005
16. विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत (फरवरी 2026) राजकोषीय आँकड़ों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: राजस्व घाटा 2023-24 के ₹38,954 करोड़ से घटकर 2025-26 (बजट अनुमान) में ₹31,009 करोड़ रहा, अर्थात लगभग ₹8,000 करोड़ की कमी।
कथन II: 2024-25 में राज्य का पूँजीगत व्यय ₹30,700 करोड़ से अधिक रहा, जिसे अब तक का सर्वाधिक बताया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: अन्य दावे (राज्यपाल अभिभाषण पर बहस का उत्तर, 5 फरवरी 2026): विरासत में ऋण ₹5,79,781 करोड़; केंद्रीय करों में हिस्सा इस वर्ष ₹90,445 करोड़ (पिछले वर्ष से ₹6,505 करोड़ अधिक); पूँजी निवेश हेतु विशेष केंद्रीय सहायता (SASCI) – ₹19,000 करोड़+ दो वर्षों में। बजट 2026-27: राजस्व घाटा ₹24,314 करोड़ (GSDP का 1.1%), राजकोषीय घाटा ~₹79,492 करोड़ (3.69%), ऋण-GSDP 36.8%। अवधारणा – राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्ति; इसका अर्थ है उधार का उपयोग चालू उपभोग में, जबकि पूँजीगत व्यय परिसंपत्ति-निर्माण करता है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• बजट 2026-27 में राजस्व घाटा? – ₹24,314 करोड़ (1.1%)
• केंद्रीय करों में हिस्सा (2025-26)? – ₹90,445 करोड़
• राजस्व घाटे का सूत्र? – राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्ति
17. राजकोषीय अवधारणाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + ग़ैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ)।
2. प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान।
3. प्रभावी राजस्व घाटा = राजस्व घाटा − पूँजीगत परिसंपत्तियों के सृजन हेतु दिए गए अनुदान।
4. राजकोषीय घाटा शून्य होने का अर्थ है कि सरकार पर कोई बकाया ऋण नहीं है।
5. राजस्व घाटा हमेशा राजकोषीय घाटे से अधिक होता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल तीन कथन (1, 2 और 3) सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 4 गलत – शून्य राजकोषीय घाटे का अर्थ केवल इतना है कि उस वर्ष नया शुद्ध उधार नहीं लिया गया; पूर्व का संचित ऋण (स्टॉक) बना रहता है। कथन 5 गलत – सामान्यतः राजकोषीय घाटा राजस्व घाटे से बड़ा होता है क्योंकि उसमें पूँजीगत व्यय हेतु उधार भी शामिल है (राजस्थान 2026-27: RD 1.1% बनाम FD 3.69%)। राजकोषीय घाटा = सरकार की कुल उधार आवश्यकता। प्राथमिक घाटा – वर्तमान नीतियों से उत्पन्न घाटा (पुराने ऋण के ब्याज को छोड़कर)। FRBM लक्ष्य – राजस्व घाटा शून्य, राजकोषीय घाटा 3% (विद्युत क्षेत्र सुधारों पर अतिरिक्त 0.5% तक की छूट – 15वें वित्त आयोग/केंद्र की अनुमति से)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजकोषीय घाटा किसका सूचक? – कुल उधार आवश्यकता
• प्राथमिक घाटे में किसे घटाया जाता है? – ब्याज भुगतान
• विद्युत सुधारों हेतु अतिरिक्त उधार सीमा? – GSDP का 0.5%
18. अभिकथन (A): राज्य के राजस्व व्यय का बड़ा भाग 'प्रतिबद्ध व्यय' होने से विकास योजनाओं हेतु राजकोषीय गुंजाइश सीमित होती है।
कारण (R): वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे प्रतिबद्ध व्यय को अल्पकाल में घटाया नहीं जा सकता।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: प्रतिबद्ध व्यय (वेतन + पेंशन + ब्याज; कुछ परिभाषाओं में सब्सिडी भी) अनिवार्य/कानूनी दायित्व हैं; राजस्व प्राप्तियों का बड़ा भाग इनमें जाने से शेष 'विवेकाधीन' राशि कम रह जाती है – अतः R, A का कारण है। राजस्थान में दबाव के कारक – पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, ऊँचा ब्याज भार (ऋण-GSDP 36.8%), विद्युत टैरिफ़ अनुदान (बजट 2026-27 में ₹29,432 करोड़)। उपाय – कर-आधार विस्तार, ग़ैर-कर राजस्व (खनन), व्यय की गुणवत्ता, पूँजीगत व्यय पर बल।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• प्रतिबद्ध व्यय के घटक? – वेतन, पेंशन, ब्याज
• बजट 2026-27 में विद्युत टैरिफ़ अनुदान? – ₹29,432 करोड़
• बजट 2026-27 में ऋण-GSDP अनुपात? – 36.8%
19. केंद्रीय वित्त आयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: 15वें वित्त आयोग (2021-26) ने विभाज्य केंद्रीय कर पूल का 41% राज्यों को देने की अनुशंसा की थी।
कथन II: 15वें वित्त आयोग के क्षैतिज वितरण में राजस्थान का हिस्सा लगभग 6.026% था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: 15वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष एन.के. सिंह) – ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण 41% (14वें में 42%; जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश बनने से 1% कम); क्षैतिज मापदंड – आय-अंतर 45%, जनसंख्या (2011) 15%, क्षेत्रफल 15%, वन व पारिस्थितिकी 10%, जनसांख्यिकीय निष्पादन 12.5%, कर प्रयास 2.5%। राजस्थान का हिस्सा ~6.026% (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र के बाद)। 16वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया; 2026-31) – 41% ही बनाए रखा। अनुच्छेद 280 – वित्त आयोग; अनुच्छेद 275 – अनुदान।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष? – एन.के. सिंह
• 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष? – अरविंद पनगढ़िया
• वित्त आयोग का अनुच्छेद? – 280
20. राज्यों को 'पूँजी निवेश हेतु विशेष सहायता' (SASCI) योजना के अंतर्गत केंद्र किस रूप में सहायता देता है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 50 वर्ष हेतु ब्याज-मुक्त ऋण।
📘 विस्तार से समझें: SASCI (2020-21 से; प्रत्येक केंद्रीय बजट में प्रावधान) – राज्यों के पूँजीगत व्यय को प्रोत्साहन; सामान्य उधार सीमा के अतिरिक्त; एक भाग 'अनटाइड', शेष सुधार-आधारित (भूमि सुधार, शहरी नियोजन, पुलिस आवास, पुराने वाहन स्क्रैपिंग, राज्य स्तरीय PSU विनिवेश आदि से जुड़ा)। राजस्थान – मुख्यमंत्री के अनुसार 2020-21 से 2023-24 तक ₹15,803 करोड़ व पिछले दो वर्षों में ₹19,000 करोड़ से अधिक प्राप्त। GST क्षतिपूर्ति – जून 2022 में समाप्त (उपकर ऋण चुकाने हेतु 2026 तक)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• SASCI कब से? – 2020-21
• GST क्षतिपूर्ति समाप्त? – जून 2022
• SASCI में राजस्थान को 2020-21 से 2023-24 तक? – ₹15,803 करोड़
21. बजट 2026-27 के अनुसार राज्य सरकार द्वारा दी गई बकाया गारंटियाँ लगभग कितनी हैं?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – ₹1,27,210 करोड़ (GSDP का लगभग 6.8%)।
📘 विस्तार से समझें: गारंटी – राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों (विशेषकर विद्युत डिस्कॉम्स, निगमों) के ऋणों हेतु दी गई प्रतिभूति; 'आकस्मिक देयता' – उपक्रम के चूकने पर बजट पर भार। अन्य बजट 2026-27 आँकड़े: राजस्व घाटा ₹24,314 करोड़ (1.1%), राजकोषीय घाटा ~₹79,492 करोड़ (3.69%), प्राथमिक घाटा ~1.7%, बकाया देयताएँ GSDP का 36.8% (2025-26 RE में 38%), कुल व्यय ₹6,10,956 करोड़। RBI व वित्त आयोग – ऑफ़-बजट उधार व गारंटियों को राजकोषीय जोखिम मानकर पारदर्शी प्रकटीकरण की अनुशंसा।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• बजट 2026-27 में प्राथमिक घाटा? – ~1.7%
• 2025-26 (RE) में बकाया देयताएँ? – GSDP का 38%
• गारंटी किस प्रकार की देयता? – आकस्मिक देयता
22. वस्तु एवं सेवा कर (GST) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: GST 1 जुलाई 2017 से लागू है; GST परिषद का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 279A में है (101वाँ संशोधन 2016)।
कथन II: 22 सितंबर 2025 से लागू 'अगली पीढ़ी के GST सुधारों' में मुख्य दरें 5% व 18% की दो स्लैब तथा कुछ विलासिता/हानिकारक वस्तुओं पर 40% की विशेष दर निर्धारित की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: GST परिषद – केंद्रीय वित्त मंत्री (अध्यक्ष) व राज्यों के वित्त मंत्री; निर्णय में केंद्र का 1/3 व राज्यों का 2/3 भार; 3/4 बहुमत। राज्य हेतु – SGST व IGST में हिस्सा राज्य के स्वयं के कर राजस्व का सबसे बड़ा घटक; GST क्षतिपूर्ति (5 वर्ष, जून 2022 तक)। GST से बाहर – पेट्रोलियम उत्पाद (पेट्रोल, डीज़ल, ATF, प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल) व मानव उपभोग हेतु मदिरा – इन पर राज्य VAT/आबकारी लगाते हैं। बजट 2026-27 – राज्य का स्वयं कर राजस्व ₹1.62 लाख करोड़ से अधिक अनुमानित।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• GST परिषद का अनुच्छेद? – 279A
• GST परिषद में राज्यों का मत-भार? – 2/3
• GST से बाहर ईंधन? – पेट्रोल, डीज़ल, ATF, प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल
23. राजस्थान सरकार के स्वयं के कर राजस्व के स्रोतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्टांप शुल्क व पंजीकरण शुल्क, राज्य आबकारी (मानव उपभोग की मदिरा), वाहन कर व विद्युत शुल्क राज्य के कर स्रोत हैं।
2. व्यक्तिगत आयकर राज्य सरकार द्वारा लगाया व संग्रहित किया जाता है।
3. पेट्रोल-डीज़ल पर बिक्री कर/VAT राज्य का महत्त्वपूर्ण कर-स्रोत है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 2 गलत – आयकर (कृषि आय को छोड़कर) संघ सूची का विषय (प्रविष्टि 82), केंद्र लगाता है; वित्त आयोग के माध्यम से विभाज्य पूल से राज्यों को हिस्सा (15वें FC में 41%; राजस्थान ~6.026%)। राज्य सूची (सातवीं अनुसूची) के कर – भू-राजस्व, कृषि आय कर, मदिरा पर उत्पाद शुल्क, स्टांप शुल्क (कुछ दस्तावेज़ों को छोड़कर), वाहन कर, विद्युत उपभोग कर, मनोरंजन कर (स्थानीय)। राज्य का बड़ा ग़ैर-कर राजस्व – खनन (रॉयल्टी; 2024-25 में ₹9,202.50 करोड़)। बजट 2026-27 – केंद्रीय करों में हिस्सा ₹90,000 करोड़+, केंद्रीय अनुदान ₹44,000 करोड़+।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• आयकर किस सूची का विषय? – संघ सूची
• राज्य का प्रमुख ग़ैर-कर राजस्व? – खनन रॉयल्टी
• बजट 2026-27 में केंद्रीय अनुदान? – ₹44,000 करोड़+
24. अभिकथन (A): राजस्थान जैसे राज्य, जिन पर केंद्र का ऋण बकाया है, नया उधार लेने हेतु केंद्र सरकार की सहमति लेते हैं।
कारण (R): संविधान के अनुच्छेद 293(3) के अनुसार यदि किसी राज्य पर केंद्र का पूर्व ऋण बकाया हो तो वह केंद्र की सहमति के बिना उधार नहीं ले सकता।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: अनुच्छेद 293(1) – राज्य अपनी संचित निधि की प्रतिभूति पर भारत के भीतर उधार ले सकता है (विधानमंडल की सीमाओं में); 293(3) – केंद्र का ऋण बकाया होने पर केंद्र की सहमति आवश्यक; 293(4) – सहमति शर्तों सहित दी जा सकती है। इसी से केंद्र प्रतिवर्ष शुद्ध उधार सीमा (Net Borrowing Ceiling – सामान्यतः GSDP का 3% + विद्युत सुधार आदि से जुड़ी अतिरिक्त गुंजाइश) तय करता है – R, A की व्याख्या है। राज्य विदेशी स्रोतों से सीधे उधार नहीं ले सकते (बाह्य सहायता केंद्र के माध्यम से)। बजट 2026-27 – राजकोषीय घाटा 3.69%।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राज्य की उधार शक्ति का अनुच्छेद? – 293
• केंद्र द्वारा तय वार्षिक सीमा? – शुद्ध उधार सीमा (NBC)
• क्या राज्य सीधे विदेश से उधार ले सकते हैं? – नहीं
25. राज्य की निधियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: राज्य की आकस्मिकता निधि राज्य विधानमंडल के नियंत्रण में होती है और इससे व्यय हेतु प्रत्येक बार विधानसभा की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
कथन II: राज्य की संचित निधि से कोई भी राशि विधानमंडल द्वारा पारित विनियोग के बिना नहीं निकाली जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन I गलत – आकस्मिकता निधि (अनुच्छेद 267(2)) राज्यपाल के अधीन होती है; अप्रत्याशित व्यय हेतु राज्यपाल अग्रिम दे सकता है, बाद में विधानमंडल की स्वीकृति लेकर निधि की प्रतिपूर्ति की जाती है। संचित निधि (अनुच्छेद 266(1)) – सभी राजस्व, उधार व ऋण-वसूली; निकासी हेतु विनियोग अधिनियम (अनुच्छेद 204)। लोक लेखा (266(2)) – भविष्य निधि, जमा आदि जिनमें सरकार 'बैंकर' की भूमिका में; इससे निकासी हेतु विधानमंडल की स्वीकृति आवश्यक नहीं। लेखा-परीक्षा – CAG (अनुच्छेद 151 – राज्य के लेखों पर प्रतिवेदन राज्यपाल को, जो विधानमंडल में रखवाते हैं)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• आकस्मिकता निधि किसके अधीन? – राज्यपाल
• लोक लेखा का अनुच्छेद? – 266(2)
• CAG प्रतिवेदन (राज्य) का अनुच्छेद? – 151
26. बजट प्राप्तियों के वर्गीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केंद्र से प्राप्त अनुदान (grants-in-aid) राज्य की राजस्व प्राप्तियाँ हैं।
2. बाज़ार उधार व केंद्र से लिए गए ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ हैं।
3. दिए गए ऋणों की वसूली तथा विनिवेश से प्राप्त राशि 'ग़ैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ' हैं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: तीनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: राजस्व प्राप्तियाँ – स्वयं का कर राजस्व (SGST, VAT, आबकारी, स्टांप, वाहन कर), ग़ैर-कर राजस्व (खनन रॉयल्टी, ब्याज, लाभांश, शुल्क), केंद्रीय करों में हिस्सा, केंद्रीय अनुदान – देनदारी नहीं बनातीं/परिसंपत्ति नहीं घटातीं। पूँजीगत प्राप्तियाँ – देनदारी बनाती (उधार) या परिसंपत्ति घटाती (ऋण-वसूली, विनिवेश) हैं। राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + ग़ैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ)। बजट 2026-27 – राजस्व प्राप्तियाँ ₹3,25,740 करोड़; स्वयं कर ₹1.62 लाख करोड़+, केंद्रीय कर-हिस्सा ₹90,000 करोड़+, अनुदान ₹44,000 करोड़+।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• बजट 2026-27 में राजस्व प्राप्तियाँ? – ₹3,25,740 करोड़
• पूँजीगत प्राप्ति की पहचान? – देनदारी बनाए या परिसंपत्ति घटाए
• खनन रॉयल्टी किस प्रकार की प्राप्ति? – ग़ैर-कर राजस्व
27. राजस्थान राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम 2005 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: अधिनियम का मूल लक्ष्य राजस्व घाटे को समाप्त करना तथा राजकोषीय घाटे को GSDP के 3% तक सीमित करना था।
कथन II: इसके अंतर्गत बजट के साथ मध्यावधि राजकोषीय नीति विवरण विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: FRBM – 12वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर राज्यों ने अधिनियम बनाए (केंद्र का FRBM 2003)। समय-समय पर संशोधन/छूट – कोविड काल व विद्युत क्षेत्र सुधारों हेतु अतिरिक्त उधार-गुंजाइश। स्थिति – 2025-26: FD BE 4.3%, RE 3.9%; RD RE 1.8%; बजट 2026-27: FD 3.69%, RD 1.1%, बकाया देयताएँ 36.8%। वित्तीय अनुशासन के साधन – मध्यावधि व्यय ढाँचा, गारंटी-सीमा, आकस्मिक देयता प्रकटीकरण।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• केंद्र का FRBM अधिनियम? – 2003
• राज्य FRBM किस वित्त आयोग की अनुशंसा पर? – 12वाँ
• 2025-26 RE में राजकोषीय घाटा? – 3.9%
28. अभिकथन (A): राज्य बजटों में विकास-गति बढ़ाने हेतु पूँजीगत व्यय (सड़क, सिंचाई, ऊर्जा, भवन) पर बल दिया जाता है।
कारण (R): पूँजीगत व्यय का अर्थव्यवस्था पर गुणक (multiplier) प्रभाव राजस्व व्यय की तुलना में अधिक होता है और इससे दीर्घकालिक उत्पादक परिसंपत्तियाँ बनती हैं।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: RBI व अन्य अध्ययनों के अनुसार पूँजीगत व्यय का गुणक (दीर्घकाल में 2 से अधिक) राजस्व व्यय (≈1 से कम) से अधिक – R, A का कारण है। राजस्थान – 2024-25 में ₹30,700 करोड़+ पूँजीगत व्यय (सर्वाधिक, मुख्यमंत्री); केंद्र की SASCI (50 वर्ष ब्याज-मुक्त ऋण) से समर्थन; बजट 2026-27 – अटल प्रगति पथ, सोलर पार्क, RAJ-SETU, नहर आधुनिकीकरण। FRBM दृष्टि – उधार का उपयोग पूँजीगत व्यय में हो, राजस्व घाटे में नहीं ('स्वर्णिम नियम')।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 2024-25 में राज्य पूँजीगत व्यय (दावा)? – ₹30,700 करोड़+
• उधार केवल निवेश हेतु – किस नियम से जाना जाता है? – स्वर्णिम नियम
• SASCI ऋण की अवधि? – 50 वर्ष
29. बजट से संबंधित दस्तावेज़ों (सूची-I) को उनके उद्देश्य (सूची-II) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
सूची-II
(अ)वार्षिक वित्तीय विवरण
(1)विभागवार व्यय-माँगों पर विधानसभा का मतदान
(ब)अनुदान माँगें
(2)वर्ष की अनुमानित प्राप्तियों व व्यय का समग्र विवरण
(स)विनियोग विधेयक
(3)कर प्रस्तावों (नए कर/दरों में परिवर्तन) को विधिक रूप देना
(द)वित्त विधेयक
(4)संचित निधि से राशि निकालने का विधिक अधिकार
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही सुमेल: वार्षिक वित्तीय विवरण – समग्र प्राप्ति-व्यय; अनुदान माँगें – विभागवार मतदान; विनियोग विधेयक – संचित निधि से निकासी; वित्त विधेयक – कर प्रस्ताव।
📘 विस्तार से समझें: वार्षिक वित्तीय विवरण – अनुच्छेद 202; अनुदान माँगें – अनुच्छेद 203 (कटौती प्रस्ताव – नीति अनुमोदन, आर्थिक, सांकेतिक); विनियोग विधेयक – अनुच्छेद 204; वित्त विधेयक – धन विधेयक (अनुच्छेद 199), राज्यपाल की पूर्व सिफ़ारिश (अनुच्छेद 207)। राजस्थान बजट 2026-27 – 11 फरवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी द्वारा; साथ में पृथक कृषि बजट (₹1,19,408.11 करोड़), जेंडर बजट विवरण। कर प्रस्ताव 2026-27 – M-सैंड, खातेदारी आदि संबंधी रियायतें/संशोधन।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• धन विधेयक की परिभाषा का अनुच्छेद (राज्य)? – 199
• कटौती प्रस्ताव के प्रकार? – नीति अनुमोदन, आर्थिक, सांकेतिक
• बजट 2026-27 में पृथक कृषि बजट? – ₹1,19,408.11 करोड़
30. राज्यों के बजटों का वार्षिक विश्लेषण करने वाला भारतीय रिज़र्व बैंक का प्रकाशन कौन-सा है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – राज्य वित्त: बजटों का एक अध्ययन।
📘 विस्तार से समझें: RBI का वार्षिक प्रकाशन – राज्यों के घाटे (RD, FD, PD), ऋण-स्थिति, व्यय की गुणवत्ता (पूँजीगत/राजस्व), प्रतिबद्ध व्यय, सब्सिडी, ऑफ़-बजट उधार, पुरानी पेंशन योजना जैसे जोखिमों का तुलनात्मक विश्लेषण। अन्य: मौद्रिक नीति रिपोर्ट – अर्धवार्षिक, मुद्रास्फीति-वृद्धि आकलन; वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट – बैंकिंग प्रणाली के जोखिम; हैंडबुक – समग्र सांख्यिकी (राज्यवार तालिकाएँ भी)। राज्य स्तर – PRS की 'राज्य बजट विश्लेषण' व CAG की 'राज्य वित्त लेखा-परीक्षा रिपोर्ट'।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राज्य वित्त पर CAG की रिपोर्ट? – राज्य वित्त लेखा-परीक्षा रिपोर्ट
• मौद्रिक नीति रिपोर्ट की आवृत्ति? – अर्धवार्षिक
• राज्य बजटों का स्वतंत्र विश्लेषण करने वाली संस्था? – PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च
31. 16वें वित्त आयोग (2026-31) के क्षैतिज हस्तांतरण सूत्र में सर्वाधिक भार किस मानदंड को और कितना दिया गया है?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – आय दूरी (income distance) – 42.5%।
📘 विस्तार से समझें: 16वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष – डॉ. अरविंद पनगढ़िया; रिपोर्ट संसद में 1 फ़रवरी 2026) के मानदंड – आय दूरी 42.5% (15वें में 45%), जनसंख्या 2011 – 17.5% (15%), जनांकिकीय प्रदर्शन 10% (12.5%), क्षेत्रफल 10% (15%), वन 10% (10%), GDP में योगदान 10% (नया), कर एवं राजकोषीय प्रयास – हटाया गया (15वें में 2.5%)। आय दूरी – किसी राज्य की प्रति व्यक्ति GSDP की सर्वाधिक आय वाले राज्य(ों) से दूरी; जितनी अधिक दूरी, उतना अधिक हिस्सा (समता सिद्धांत)। 'GDP में योगदान' नया मानदंड अधिक उत्पादक राज्यों (मुख्यतः दक्षिणी व पश्चिमी) को पुरस्कृत करता है – इसे दक्षता बनाम समता संतुलन कहा गया। राजस्थान पर प्रभाव – क्षेत्रफल का भार 15% से घटकर 10% होने तथा आय दूरी का भार घटने से हिस्सा 6.03 से घटकर 5.93 हुआ; ऊर्ध्वाधर हिस्सा 41% अपरिवर्तित।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• हटाया गया मानदंड? – कर एवं राजकोषीय प्रयास
• नया मानदंड? – GDP में योगदान (10%)
• 16वें FC में जनसंख्या भार? – 17.5%
32. 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी अवधि 2026-27 से 2030-31 है।
2. राजस्व घाटा अनुदान तथा क्षेत्र-विशिष्ट व राज्य-विशिष्ट अनुदान बंद कर दिए गए हैं।
3. 'GDP में योगदान' को 10% भार के साथ नया मानदंड बनाया गया है।
4. स्थानीय निकाय अनुदान में मूल अनुदान 60% और प्रदर्शन अनुदान 40% है।
5. 15वें वित्त आयोग की तुलना में राजस्थान का हिस्सा बढ़ गया है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल तीन कथन (1, 2, 3) सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 4 गलत – स्थानीय निकाय अनुदान में मूल अनुदान 80% और प्रदर्शन अनुदान 20%; मूल अनुदान का 50% अबद्ध (untied)। तीन प्रवेश-शर्तें – निकायों का विधिवत गठन, लेखों का सार्वजनिक प्रकटीकरण, राज्य वित्त आयोग का समय पर गठन। कथन 5 गलत – राजस्थान का हिस्सा 6.03 (15वाँ FC) से घटकर 5.93 (16वाँ FC); 14वें FC में 5.5 था। कुल अनुदान ₹9,47,409 करोड़ – स्थानीय निकाय ₹7,91,493 करोड़ (ग्रामीण ₹4,35,236 करोड़; शहरी ₹3,56,257 करोड़ – जिसमें विशेष अवसंरचना ₹56,100 करोड़ व शहरीकरण प्रीमियम ₹10,000 करोड़), आपदा प्रबंधन ₹1,55,916 करोड़ (केंद्रीय अंश)। आपदा कोष में लागत-साझेदारी – पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य 90:10, अन्य (राजस्थान सहित) 75:25।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• कुल अनुदान? – ₹9,47,409 करोड़
• 14वें FC में राजस्थान का हिस्सा? – 5.5
• राजस्थान हेतु आपदा कोष लागत-साझेदारी? – 75:25
33. 16वें वित्त आयोग के राजकोषीय मार्गदर्शन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: आयोग ने राज्यों के लिए वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा GSDP का 3% रखने तथा बजटेतर (off-budget) उधार बंद कर उसे घाटे व ऋण की परिभाषा में सम्मिलित करने की सिफ़ारिश की है।
कथन II: आपदा प्रबंधन कोष में सभी राज्यों के लिए केंद्र-राज्य लागत-साझेदारी 90:10 रखी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – 90:10 केवल पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों हेतु; अन्य राज्यों (राजस्थान सहित) हेतु 75:25। SDRF व SDMF (राज्य आपदा शमन कोष) का कुल कोष ₹2,04,401 करोड़। अन्य राजकोषीय सिफ़ारिशें – केंद्र का राजकोषीय घाटा 2030-31 तक GDP के 3.5% तक; संयुक्त (केंद्र + राज्य) ऋण 77.3% (2026-27) से 73.1% (2030-31); सब्सिडी की समीक्षा, स्पष्ट बहिष्करण मानदंड व एकरूप लेखांकन; घाटे वाले राज्य सार्वजनिक उपक्रमों की समीक्षा व 308 निष्क्रिय उपक्रम बंद करना; DISCOMs का निजीकरण, उनके ऋण हेतु SPV, जिसे SASCI राशि से पूर्व-भुगतान किया जा सके। राजस्थान हेतु प्रासंगिकता – बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा 3.69% (3% से अधिक), ऋण 36.8% GSDP तथा डिस्कॉम्स को ₹29,432 करोड़ विद्युत दर अनुदान – अतः राजकोषीय समेकन व डिस्कॉम सुधार दोनों आवश्यक।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• केंद्र का घाटा लक्ष्य 2030-31? – 3.5%
• SDRF + SDMF कुल कोष? – ₹2,04,401 करोड़
• बंद करने योग्य निष्क्रिय SPSE? – 308
34. सूची-I (15वें वित्त आयोग का क्षैतिज मानदंड) को सूची-II (भार) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (15वें वित्त आयोग का क्षैतिज मानदंड)
सूची-II (भार)
(अ)आय दूरी
(1)45%
(ब)जनांकिकीय प्रदर्शन
(2)12.5%
(स)वन एवं पारिस्थितिकी
(3)2.5%
(द)कर एवं राजकोषीय प्रयास
(4)10%
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – आय दूरी 45%; जनांकिकीय प्रदर्शन 12.5%; वन एवं पारिस्थितिकी 10%; कर एवं राजकोषीय प्रयास 2.5%।
📘 विस्तार से समझें: 15वाँ वित्त आयोग (अध्यक्ष – एन.के. सिंह; अवधि 2021-26; 2020-21 हेतु अंतरिम रिपोर्ट) – शेष मानदंड: जनसंख्या 2011 – 15%, क्षेत्रफल 15%। पहली बार 1971 के स्थान पर 2011 की जनसंख्या प्रयुक्त; दक्षिणी राज्यों के नुकसान की भरपाई हेतु 'जनांकिकीय प्रदर्शन' (कम प्रजनन दर को पुरस्कार) जोड़ा गया। ऊर्ध्वाधर हिस्सा 41% (14वें में 42% – जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश बनने से 1% कम)। राजस्थान का हिस्सा 6.026% (देश में छठा सर्वाधिक – उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र के बाद)। 16वें FC में बदलाव – आय दूरी 42.5%, जनसंख्या 17.5%, जनांकिकीय प्रदर्शन 10%, क्षेत्रफल 10%, कर प्रयास हटाकर GDP योगदान 10%।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 15वें FC अध्यक्ष? – एन.के. सिंह
• 14वें FC ऊर्ध्वाधर हिस्सा? – 42%
• 15वें FC में राजस्थान हिस्सा? – 6.026%
35. राजस्थान बजट 2026-27 में राजस्व घाटा ₹24,314 करोड़ तथा राजकोषीय घाटा लगभग ₹79,492 करोड़ अनुमानित है। राजकोषीय घाटे का लगभग कितना भाग राजस्व घाटे के कारण है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – लगभग 31% (24,314 ÷ 79,492 ≈ 0.306)।
📘 विस्तार से समझें: राजस्व घाटा/राजकोषीय घाटा अनुपात बताता है कि उधार ली गई राशि का कितना भाग चालू (राजस्व) व्यय – वेतन, पेंशन, ब्याज, सब्सिडी – में जा रहा है। शेष लगभग 69% पूँजीगत व्यय (परिसंपत्ति निर्माण) व ऋण-अग्रिम हेतु। आदर्श – यह अनुपात शून्य हो ('स्वर्णिम नियम' – उधार केवल निवेश हेतु)। 2026-27 के अन्य आँकड़े – राजस्व प्राप्तियाँ ₹3,25,740 करोड़, राजस्व व्यय ₹3,50,054 करोड़ (अंतर = ₹24,314 करोड़ = GSDP का 1.1%); राजकोषीय घाटा 3.69%; प्राथमिक घाटा 1.7%। सुधार की प्रवृत्ति – 2025-26 (RE) में राजस्व घाटा 1.8% GSDP था, जो 2026-27 में 1.1% अनुमानित। राजस्थान FRBM अधिनियम 2005 का मूल लक्ष्य राजस्व घाटा शून्य था।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजस्व घाटा 2026-27 GSDP का? – 1.1%
• उधार केवल निवेश हेतु – किस नियम का? – स्वर्णिम नियम
• राजस्व व्यय 2026-27? – ₹3,50,054 करोड़
36. राजस्थान बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा GSDP का 3.69%, प्राथमिक घाटा 1.7% तथा GSDP ₹21,52,100 करोड़ अनुमानित है। इनसे ब्याज भुगतान लगभग कितना निकलता है?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – लगभग ₹43,000 करोड़ (3.69% − 1.7% ≈ 1.99% × ₹21,52,100 करोड़ ≈ ₹42,800 करोड़)।
📘 विस्तार से समझें: प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान; अतः ब्याज भुगतान = राजकोषीय घाटा − प्राथमिक घाटा। प्राथमिक घाटा दर्शाता है कि पुराने ऋणों का ब्याज छोड़कर चालू नीतियों से कितना नया उधार हो रहा है; प्राथमिक घाटा शून्य होने पर भी उधार केवल ब्याज चुकाने हेतु होता है। ब्याज 'प्रतिबद्ध व्यय' का अंग है (वेतन, पेंशन के साथ), जो विकास व्यय की गुंजाइश घटाता है। ऋण स्थिरता का संकेतक – ब्याज/राजस्व प्राप्तियाँ अनुपात; यहाँ लगभग 43,000 ÷ 3,25,740 ≈ 13%। बकाया देयताएँ 2026-27 में GSDP का 36.8% (2025-26 RE – 38%) – घटती प्रवृत्ति।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• ब्याज = ? – राजकोषीय घाटा − प्राथमिक घाटा
• ब्याज/राजस्व प्राप्ति अनुपात लगभग? – 13%
• बकाया देयताएँ 2026-27? – 36.8% GSDP
37. वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: परिषद में केंद्र के मत का भार कुल मतों का एक-तिहाई और सभी राज्यों का संयुक्त भार दो-तिहाई है; निर्णय कम से कम तीन-चौथाई भारित बहुमत से होते हैं।
कथन II: GST परिषद का गठन संविधान के अनुच्छेद 246A के अंतर्गत किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – GST परिषद अनुच्छेद 279A के अंतर्गत; अनुच्छेद 246A संसद व राज्य विधानमंडलों को GST पर कानून बनाने की समवर्ती शक्ति देता है; अनुच्छेद 269A अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर IGST। 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 2016; GST लागू – 1 जुलाई 2017। परिषद – अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री, सदस्य केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री व प्रत्येक राज्य के वित्त/कराधान मंत्री; गणपूर्ति – कुल सदस्यों का आधा। इस भार-व्यवस्था के कारण न केंद्र अकेले निर्णय ले सकता है, न राज्य केंद्र के बिना – 'सहकारी संघवाद'। GST गंतव्य-आधारित कर है, अतः उपभोक्ता राज्य राजस्थान को लाभ; राज्य का SGST स्वयं कर राजस्व का सबसे बड़ा घटक है। GST 2.0 (22 सितंबर 2025) – मुख्यतः 5% व 18% के दो स्लैब, विलासिता/हानिकारक वस्तुओं पर 40%।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• GST किस संशोधन से? – 101वाँ (2016)
• IGST किस अनुच्छेद में? – 269A
• GST परिषद अध्यक्ष? – केंद्रीय वित्त मंत्री
38. सूची-I (संविधान का अनुच्छेद) को सूची-II (विषय) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (संविधान का अनुच्छेद)
सूची-II (विषय)
(अ)अनुच्छेद 268
(1)किसी भी लोक प्रयोजन हेतु विवेकाधीन अनुदान
(ब)अनुच्छेद 269A
(2)अंतर-राज्यीय व्यापार में GST का उद्ग्रहण व संग्रहण (IGST)
(स)अनुच्छेद 275
(3)राज्यों को वैधानिक सहायता अनुदान
(द)अनुच्छेद 282
(4)संघ द्वारा उद्गृहीत परंतु राज्यों द्वारा संगृहीत व विनियोजित शुल्क (जैसे कुछ स्टांप शुल्क)
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – 268: संघ द्वारा उद्गृहीत, राज्यों द्वारा संगृहीत शुल्क; 269A: IGST; 275: वैधानिक अनुदान; 282: विवेकाधीन अनुदान।
📘 विस्तार से समझें: अनुच्छेद 268 – विनिमय-पत्र, चेक, बीमा पॉलिसी आदि पर स्टांप शुल्क (संघ सूची में वर्णित) संघ लगाता है, पर राज्य संग्रहण कर अपने पास रखते हैं (101वें संशोधन से औषधीय-प्रसाधन उत्पाद शुल्क हटा)। 269 – संघ द्वारा उद्गृहीत व संगृहीत परंतु राज्यों को सौंपे गए कर (अंतर-राज्यीय बिक्री/प्रेषण कर)। 270 – विभाज्य पूल; केंद्रीय करों का राज्यों से बँटवारा, वित्त आयोग की सिफ़ारिश पर (राजस्थान – 16वें FC में 5.93%)। 275 – वित्त आयोग की सिफ़ारिश पर भारत की संचित निधि पर भारित सहायता अनुदान; अनुसूचित जनजाति कल्याण हेतु विशेष अनुदान भी इसी में। 282 – केंद्र/राज्य किसी भी लोक प्रयोजन हेतु अनुदान दे सकते हैं, अपनी विधायी क्षमता से बाहर भी – केंद्र प्रायोजित योजनाएँ (जैसे समग्र शिक्षा 60:40) इसी के अंतर्गत; SASCI (50 वर्षीय ब्याज-मुक्त ऋण) – अनुच्छेद 293 के उधार ढाँचे से जुड़ी।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• विभाज्य पूल किस अनुच्छेद में? – 270
• केंद्र प्रायोजित योजनाओं का आधार? – अनुच्छेद 282
• अनुसूचित जनजाति कल्याण विशेष अनुदान? – अनुच्छेद 275
39. अभिकथन (A): यदि किसी राज्य की नाममात्र GSDP वृद्धि दर उसके ऋण पर औसत ब्याज दर से अधिक हो, तो छोटे प्राथमिक घाटे के बावजूद ऋण-GSDP अनुपात घट सकता है।
कारण (R): ऋण-GSDP अनुपात में परिवर्तन मुख्यतः (ब्याज दर − वृद्धि दर) के अंतर तथा प्राथमिक शेष (primary balance) पर निर्भर करता है।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: ऋण गतिकी का सूत्र (सरल रूप) – Δd ≈ [(r − g) ÷ (1 + g)] × d + प्राथमिक घाटा, जहाँ d = ऋण-GSDP अनुपात, r = नाममात्र ब्याज दर, g = नाममात्र वृद्धि दर। जब g > r, पहला पद ऋणात्मक होता है – अर्थात् अर्थव्यवस्था ऋण से तेज़ बढ़ती है और अनुपात स्वतः घटता है; यदि प्राथमिक घाटा इस कमी से छोटा हो तो कुल अनुपात घटेगा। इसे 'डोमर स्थिरता शर्त' (एवसे डोमर) कहते हैं। राजस्थान – प्रचलित GSDP वृद्धि 2025-26 में 10.24% व 2026-27 बजट अनुमान 15%, जबकि राज्य विकास ऋणों (SDL) की ब्याज दर लगभग 7% के आसपास; इसलिए बकाया देयताएँ 38% (2025-26 RE) से 36.8% (2026-27 BE) घटने का अनुमान। जोखिम – वृद्धि धीमी पड़ने या ब्याज दर बढ़ने पर अनुपात फिर बढ़ सकता है; इसलिए FRBM में ऋण व घाटा दोनों की सीमाएँ।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• डोमर शर्त? – g > r
• d का अर्थ? – ऋण-GSDP अनुपात
• राजस्थान बकाया देयताएँ 2026-27 BE? – 36.8%
40. राज्यों के नकदी प्रबंधन में भारतीय रिज़र्व बैंक की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: RBI राज्यों को प्राप्तियों व भुगतानों के अस्थायी असंतुलन को पाटने हेतु अर्थोपाय अग्रिम (WMA) तथा विशेष आहरण सुविधा (SDF) देता है।
कथन II: कोई राज्य बिना किसी समय-सीमा के लगातार ओवरड्राफ्ट में रह सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – RBI के नियमों के अनुसार कोई राज्य लगातार 14 कार्यदिवसों से अधिक ओवरड्राफ्ट में नहीं रह सकता; सीमा पार होने पर RBI उस राज्य के भुगतान रोक देता है। आधार – RBI अधिनियम 1934 की धारा 21A के अंतर्गत समझौते से RBI राज्यों का बैंकर व ऋण प्रबंधक है। SDF – राज्य द्वारा रखी गई केंद्रीय प्रतिभूतियों/ट्रेज़री बिल के समर्थन से; WMA – राज्य के कुल राजस्व व पूँजीगत व्यय पर आधारित सीमा; दोनों पर रेपो-आधारित ब्याज। अधिशेष नकदी 14-दिवसीय ट्रेज़री बिल में निवेश होती है। इसके अतिरिक्त राज्य समेकित निक्षेप निधि (CSF) व गारंटी मोचन निधि (GRF) RBI के पास रखते हैं – ऋण व गारंटी भुगतान के जोखिम से बचाव हेतु।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राज्य RBI से किस धारा के अंतर्गत जुड़े? – धारा 21A
• लगातार ओवरड्राफ्ट सीमा? – 14 कार्यदिवस
• अधिशेष नकदी निवेश? – 14-दिवसीय ट्रेज़री बिल
41. राज्य विकास ऋण (State Development Loans – SDL) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: SDL राज्य सरकारों द्वारा जारी दिनांकित प्रतिभूतियाँ हैं, जो RBI द्वारा आयोजित नीलामी से जारी होती हैं।
कथन II: बैंक SDL को अपने वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) की पूर्ति हेतु रख सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: SDL राज्यों के राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण का सबसे बड़ा स्रोत है (कुल उधार का अधिकांश भाग)। RBI प्रत्येक तिमाही का सांकेतिक उधार कैलेंडर जारी करता है; नीलामी प्रायः साप्ताहिक (मंगलवार)। SDL पर प्रतिफल (yield) केंद्र सरकार की समान अवधि की प्रतिभूतियों (G-Sec) से कुछ अधिक होता है – इसे 'SDL स्प्रेड' कहते हैं, जो राज्य की राजकोषीय साख दर्शाता है। उधार सीमा – अनुच्छेद 293(3) के अंतर्गत केंद्र की सहमति आवश्यक (राज्य केंद्र का ऋणी होने पर); केंद्र वार्षिक 'शुद्ध उधार सीमा' (NBC) तय करता है, जिसमें 2022-23 से राज्य के उपक्रमों के बजटेतर उधार भी गिने जाते हैं। अन्य स्रोत – केंद्र से ऋण (SASCI सहित), लोक लेखा (भविष्य निधि, जमाएँ), NABARD (RIDF)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• SDL स्प्रेड किसकी तुलना में? – केंद्रीय G-Sec
• उधार हेतु केंद्र की सहमति किस अनुच्छेद में? – 293(3)
• बजटेतर उधार NBC में कब से? – 2022-23
42. सूची-I (राज्य वित्त से संबंधित अनुच्छेद) को सूची-II (विषय) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (राज्य वित्त से संबंधित अनुच्छेद)
सूची-II (विषय)
(अ)अनुच्छेद 199
(2)
(ब)अनुच्छेद 203
(1)धन विधेयक की परिभाषा
(स)अनुच्छेद 207
(2)विधानमंडल में प्राक्कलनों (अनुदान माँगों) की प्रक्रिया
(द)अनुच्छेद 151
(3)राज्य के लेखाओं पर CAG प्रतिवेदन राज्यपाल को प्रस्तुत
(4)वित्त विधेयकों के संबंध में विशेष उपबंध
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – 199: धन विधेयक की परिभाषा; 203: प्राक्कलनों की प्रक्रिया; 207: वित्त विधेयक; 151(2): CAG प्रतिवेदन राज्यपाल को।
📘 विस्तार से समझें: अनुच्छेद 199 – धन विधेयक की परिभाषा (कर, उधार, संचित निधि आदि); विधानसभा अध्यक्ष का प्रमाणन अंतिम; अनुच्छेद 198 – धन विधेयक केवल विधानसभा में, विधान परिषद (राजस्थान में नहीं) केवल 14 दिन रोक सकती है। अनुच्छेद 203 – भारित व्यय पर मतदान नहीं, केवल चर्चा; अन्य व्यय अनुदान माँगों के रूप में विधानसभा स्वीकृत/कम/अस्वीकृत कर सकती है; माँग राज्यपाल की सिफ़ारिश पर ही। अनुच्छेद 207 – वित्त विधेयक राज्यपाल की सिफ़ारिश से विधानसभा में। अनुच्छेद 151(2) – CAG के राज्य लेखा प्रतिवेदन राज्यपाल को, जो विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं; इनकी जाँच लोक लेखा समिति (PAC) करती है। अन्य – 202: वार्षिक वित्तीय विवरण; 204: विनियोग विधेयक; 205: अनुपूरक अनुदान; 206: लेखानुदान।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• धन विधेयक प्रमाणित कौन करता है? – विधानसभा अध्यक्ष
• भारित व्यय पर? – केवल चर्चा, मतदान नहीं
• CAG प्रतिवेदन की जाँच? – लोक लेखा समिति
43. राजस्थान के स्वयं कर राजस्व (State's Own Tax Revenue) का सबसे बड़ा घटक निम्नलिखित में से कौन-सा है?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST)।
📘 विस्तार से समझें: राज्य के स्वयं कर राजस्व (2026-27 में ₹1.62 लाख करोड़ से अधिक) के प्रमुख घटक – SGST (IGST निपटान सहित) सबसे बड़ा; फिर पेट्रोलियम उत्पादों (पेट्रोल, डीज़ल, ATF) पर बिक्री कर/VAT – ये GST से बाहर हैं; राज्य आबकारी (मानव उपभोग की मदिरा – GST से बाहर); स्टांप एवं पंजीयन; वाहन कर; विद्युत शुल्क; भू-राजस्व। गैर-कर राजस्व में खनिज रॉयल्टी (खान विभाग राजस्व 2024-25 में ₹9,202.50 करोड़) सबसे महत्त्वपूर्ण। स्वयं राजस्व के अतिरिक्त – केंद्रीय करों में हिस्सा (₹90,000 करोड़ से अधिक) व केंद्रीय अनुदान (₹44,000 करोड़ से अधिक)। GST के बाद राज्यों की कराधान स्वायत्तता घटी, अतः GST से बाहर की मदों (पेट्रोलियम, मदिरा, स्टांप) पर राज्यों की निर्भरता अधिक है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• GST से बाहर पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्य कर? – VAT/बिक्री कर
• मानव उपभोग की मदिरा GST में? – नहीं
• मुख्य गैर-कर राजस्व स्रोत? – खनिज रॉयल्टी
44. राजस्थान बजट 2026-27 में राजस्व प्राप्तियाँ ₹3,25,740 करोड़, केंद्रीय करों में हिस्सा लगभग ₹90,000 करोड़ तथा केंद्रीय अनुदान लगभग ₹44,000 करोड़ अनुमानित हैं। राजस्व प्राप्तियों में केंद्रीय हस्तांतरणों का हिस्सा लगभग कितना है?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – लगभग 41% [(90,000 + 44,000) ÷ 3,25,740 ≈ 0.41]।
📘 विस्तार से समझें: राजस्व प्राप्तियों के चार घटक – (1) स्वयं कर राजस्व (₹1.62 लाख करोड़ से अधिक, लगभग आधा), (2) स्वयं गैर-कर राजस्व (खनिज रॉयल्टी, ब्याज, लाभांश, शुल्क), (3) केंद्रीय करों में हिस्सा (अनुच्छेद 270), (4) केंद्र से सहायता अनुदान (अनुच्छेद 275 व 282 – केंद्र प्रायोजित योजनाएँ)। लगभग 41% केंद्रीय निर्भरता 'ऊर्ध्वाधर राजकोषीय असंतुलन' दर्शाती है – राज्यों पर व्यय दायित्व अधिक (स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, कृषि) पर राजस्व के बड़े स्रोत (आयकर, निगम कर, सीमा शुल्क) केंद्र के पास। 16वें वित्त आयोग से राजस्थान का हिस्सा 6.03 से 5.93 होने व राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से स्वयं राजस्व बढ़ाने (कर अनुपालन, खनिज नीलामी, M-सैंड, स्टांप सुधार) का दबाव बढ़ा है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• ऊर्ध्वाधर राजकोषीय असंतुलन? – व्यय दायित्व व राजस्व क्षमता का अंतर
• केंद्रीय करों में हिस्सा किस अनुच्छेद से? – 270
• स्वयं कर राजस्व 2026-27? – ₹1.62 लाख करोड़ से अधिक
45. बजट निर्माण की विभिन्न पद्धतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शून्य आधारित बजट में प्रत्येक व्यय को पिछले वर्ष के आवंटन के आधार पर नहीं, बल्कि हर वर्ष नए सिरे से औचित्य सिद्ध करना पड़ता है।
2. परिणाम (आउटकम) बजट व्यय को मापने योग्य भौतिक परिणामों/लक्ष्यों से जोड़ता है।
3. निष्पादन बजट केवल आवंटन (इनपुट) पर केंद्रित होता है, कार्यक्रमों के परिणामों पर नहीं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 3 गलत – निष्पादन (परफ़ॉर्मेंस) बजट कार्यक्रमों, गतिविधियों व उनकी उपलब्धियों (कार्य-निष्पादन) के आधार पर व्यय प्रस्तुत करता है; भारत में प्रशासनिक सुधार आयोग (1968) ने इसकी अनुशंसा की। शून्य आधारित बजट – पीटर पायर (अमेरिका, 1970 के दशक); भारत में 1987-88 के आसपास अपनाने का प्रयास। परिणाम बजट – केंद्र में पहली बार 2005-06; अब 'आउटपुट-आउटकम निगरानी ढाँचा' (OOMF) नीति आयोग के DMEO द्वारा। पारंपरिक/वृद्धिशील (incremental) बजट – पिछले वर्ष के आवंटन में कुछ प्रतिशत वृद्धि। विशेष बजट विवरण – जेंडर बजट (राजस्थान में 2012-13 से), बाल बजट, ग्रीन बजट (राजस्थान 2025-26 से)। 16वें वित्त आयोग ने भी 'परिणाम-आधारित व्यय' (output-linked spending) पर बल दिया है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• शून्य आधारित बजट के प्रवर्तक? – पीटर पायर
• केंद्र में पहला परिणाम बजट? – 2005-06
• निष्पादन बजट की अनुशंसा? – प्रशासनिक सुधार आयोग (1968)
46. यदि किसी वर्ष राज्य की नाममात्र GSDP 10% बढ़े और उसका स्वयं कर राजस्व 12% बढ़े, तो कर उत्प्लावकता (tax buoyancy) कितनी होगी?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 1.2 (12 ÷ 10)।
📘 विस्तार से समझें: कर उत्प्लावकता = कर राजस्व में % परिवर्तन ÷ GDP/GSDP में % परिवर्तन; इसमें दर-परिवर्तन व नए कर जैसे विवेकाधीन उपायों का प्रभाव भी सम्मिलित रहता है। कर लोच (tax elasticity) – विवेकाधीन परिवर्तनों का प्रभाव हटाकर केवल आय-वृद्धि के प्रति कर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया। उत्प्लावकता > 1 – कर राजस्व अर्थव्यवस्था से तेज़ बढ़ रहा है, अतः कर-GSDP अनुपात बढ़ेगा; < 1 – अनुपात घटेगा। राजस्थान हेतु महत्त्व – 16वें वित्त आयोग से हिस्सा घटने व राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर स्वयं कर राजस्व की ऊँची उत्प्लावकता आवश्यक; GST 2.0 की दर-कटौती (सितंबर 2025) अल्पकाल में उत्प्लावकता घटा सकती है, पर अनुपालन व उपभोग वृद्धि से दीर्घकाल में आधार बढ़ने की आशा।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• कर उत्प्लावकता सूत्र? – कर % परिवर्तन ÷ GDP % परिवर्तन
• विवेकाधीन उपाय हटाकर माप? – कर लोच
• उत्प्लावकता > 1 का अर्थ? – कर-GDP अनुपात बढ़ेगा
47. अभिकथन (A): राज्यों को GST क्षतिपूर्ति का भुगतान 30 जून 2022 के बाद की अवधि हेतु बंद हो गया।
कारण (R): GST (राज्यों को प्रतिकर) अधिनियम 2017 में आधार वर्ष 2015-16 के राजस्व पर 14% वार्षिक वृद्धि मानकर केवल पाँच वर्षों के लिए क्षतिपूर्ति की गारंटी दी गई थी।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: GST 1 जुलाई 2017 से लागू; पाँच वर्ष = जून 2022 तक। क्षतिपूर्ति हेतु तंबाकू, पान मसाला, विलासी कारों, वातित पेय आदि पर 'क्षतिपूर्ति उपकर' (compensation cess) लगाया गया। कोविड काल (2020-21, 2021-22) में उपकर संग्रह कम होने पर केंद्र ने राज्यों के स्थान पर ऋण लेकर 'बैक-टू-बैक' ऋण (लगभग ₹2.69 लाख करोड़) दिए; इनके पुनर्भुगतान हेतु उपकर की अवधि मार्च 2026 तक बढ़ाई गई। GST 2.0 (22 सितंबर 2025) में अधिकांश वस्तुओं से उपकर हटाकर 40% विशेष दर में समाहित किया गया। राजस्थान जैसे राज्यों के लिए 14% सुनिश्चित वृद्धि की समाप्ति से राजस्व अनिश्चितता बढ़ी; राज्यों ने क्षतिपूर्ति अवधि बढ़ाने की माँग भी की थी।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• क्षतिपूर्ति गारंटी दर? – 14% वार्षिक
• आधार वर्ष? – 2015-16
• बैक-टू-बैक ऋण क्यों? – कोविड में उपकर कमी
48. 16वें वित्त आयोग की राज्य सार्वजनिक क्षेत्र संबंधी सिफ़ारिशों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: आयोग ने राज्यों को बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के निजीकरण की दिशा में बढ़ने तथा उनके ऋण हेतु एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) बनाने का सुझाव दिया है।
कथन II: आयोग ने देश के 308 निष्क्रिय राज्य सार्वजनिक उपक्रमों की समीक्षा कर उन्हें बंद करने की सिफ़ारिश की है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: DISCOM सुधार – SPV में डिस्कॉम का ऋण स्थानांतरित कर SASCI (पूँजी निवेश हेतु विशेष सहायता) राशि से पूर्व-भुगतान संभव; यह सहायता निजीकरण पूर्ण होने के बाद ही प्रयुक्त हो। सार्वजनिक उपक्रम – राज्य स्तरीय विनिवेश नीति; लगातार चार में से तीन वर्ष घाटे वाले उपक्रम संबंधित मंत्रिमंडल के समक्ष – बंद, निजीकरण या जारी रखने का निर्णय। राजस्थान का संदर्भ – 19 जुलाई 2000 को RSEB का पाँच कंपनियों में विघटन (उत्पादन, प्रसारण, तीन डिस्कॉम – जयपुर, अजमेर, जोधपुर); डिस्कॉम्स के पुराने घाटे के लिए UDAY (2015) में राज्य ने ऋण अपने ऊपर लिया; RDSS (2021) – AT&C हानि 12-15% व ACS-ARR अंतर शून्य करने का लक्ष्य; बजट 2026-27 में विद्युत दर अनुदान ₹29,432 करोड़।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजस्थान डिस्कॉम्स की संख्या? – तीन
• RSEB विघटन? – 19 जुलाई 2000
• डिस्कॉम ऋण अधिग्रहण योजना 2015? – UDAY
49. सूची-I (वित्त आयोग) को सूची-II (अध्यक्ष) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (वित्त आयोग)
सूची-II (अध्यक्ष)
(अ)12वाँ वित्त आयोग
(1)वाई.वी. रेड्डी
(ब)13वाँ वित्त आयोग
(2)सी. रंगराजन
(स)14वाँ वित्त आयोग
(3)विजय केलकर
(द)15वाँ वित्त आयोग
(4)एन.के. सिंह
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – 12वाँ: सी. रंगराजन; 13वाँ: विजय केलकर; 14वाँ: वाई.वी. रेड्डी; 15वाँ: एन.के. सिंह।
📘 विस्तार से समझें: ऊर्ध्वाधर हिस्सा – 12वाँ (2005-10): 30.5%; 13वाँ (2010-15): 32%; 14वाँ (2015-20): 42% (सबसे बड़ी छलांग, साथ ही योजना/गैर-योजना भेद समाप्त); 15वाँ (2021-26): 41%; 16वाँ (2026-31, डॉ. अरविंद पनगढ़िया): 41%। प्रथम वित्त आयोग – के.सी. नियोगी (1951)। वित्त आयोग – अनुच्छेद 280, अर्ध-न्यायिक सलाहकारी निकाय; अध्यक्ष + 4 सदस्य; योग्यता – वित्त आयोग (प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम 1951। 13वें FC ने GST व राजकोषीय समेकन रोडमैप पर बल दिया; 14वें ने बड़े हस्तांतरण से राज्यों को 'अबद्ध' संसाधन दिए; 15वें ने पहली बार 2011 की जनसंख्या व रक्षा-आंतरिक सुरक्षा आधुनिकीकरण कोष का प्रस्ताव किया।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 13वें FC में ऊर्ध्वाधर हिस्सा? – 32%
• 14वें FC में ऊर्ध्वाधर हिस्सा? – 42%
• प्रथम वित्त आयोग अध्यक्ष? – के.सी. नियोगी
50. 14वें, 15वें और 16वें वित्त आयोगों में से किसमें केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राजस्थान का हिस्सा सर्वाधिक रहा?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 15वाँ वित्त आयोग (6.026%)।
📘 विस्तार से समझें: राजस्थान का हिस्सा – 14वाँ FC: 5.5% (5.495); 15वाँ FC: 6.026%; 16वाँ FC: 5.93%। 15वें FC में बढ़त के कारण – 2011 की जनसंख्या (राजस्थान की ऊँची वृद्धि) व क्षेत्रफल (15%) का अधिक भार। 16वें FC में कमी के कारण – क्षेत्रफल का भार 15% से 10%, आय दूरी 45% से 42.5% तथा नया 'GDP योगदान' मानदंड (10%) जिसमें बड़े औद्योगिक राज्यों को लाभ। ध्यान दें – हिस्से में 0.1 प्रतिशत अंक की कमी भी बड़े राशि-अंतर में बदलती है, क्योंकि विभाज्य पूल लाखों करोड़ रुपये का है; ऊपर से राजस्व घाटा अनुदान भी बंद। सर्वाधिक हिस्सा – उत्तर प्रदेश (लगभग 17-18%), फिर बिहार।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 14वें FC में राजस्थान? – 5.5%
• 16वें FC में राजस्थान? – 5.93%
• विभाज्य पूल में सर्वाधिक हिस्सा? – उत्तर प्रदेश
51. राजस्थान बजट 2026-27 के अनुमानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: राजस्व व्यय (₹3,50,054 करोड़) राजस्व प्राप्तियों (₹3,25,740 करोड़) से ₹24,314 करोड़ अधिक है।
कथन II: 2026-27 में बकाया देयताओं का GSDP से अनुपात 2025-26 (संशोधित अनुमान) की तुलना में बढ़ने का अनुमान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – बकाया देयताएँ 2025-26 (RE) में GSDP का 38% थीं, जो 2026-27 (BE) में 36.8% अनुमानित, अर्थात् घटेंगी। बजट 2026-27 (11 फ़रवरी 2026, उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी) – कुल व्यय ₹6,10,956 करोड़; शुद्ध व्यय ₹4,05,632 करोड़; राजस्व घाटा ₹24,314 करोड़ (1.1%); राजकोषीय घाटा ₹79,492 करोड़ (3.69%); प्राथमिक घाटा 1.7%; गारंटियाँ ₹1,27,210 करोड़ (6.8%); GSDP अनुमान ₹21,52,100 करोड़ (+15%)। 2025-26 – राजकोषीय घाटा BE 4.3%, RE 3.9%; राजस्व घाटा RE 1.8%। प्रवृत्ति – सभी घाटा संकेतकों में समेकन, परंतु राजकोषीय घाटा 16वें FC की 3% सीमा से अभी अधिक।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• बकाया देयताएँ 2025-26 RE? – 38%
• राजकोषीय घाटा 2025-26 RE? – 3.9%
• कुल व्यय 2026-27? – ₹6,10,956 करोड़
52. संविधान के अनुच्छेद 276 के अनुसार किसी व्यक्ति पर राज्य द्वारा लगाए जाने वाले व्यवसाय, व्यापार, आजीविका और नियोजन पर कर (व्यवसाय कर) की वार्षिक अधिकतम सीमा क्या है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – ₹2,500 प्रति वर्ष।
📘 विस्तार से समझें: मूल संविधान में सीमा ₹250 थी; 60वें संविधान संशोधन (1988) से ₹2,500 की गई। यह राज्य सूची की प्रविष्टि 60 का कर है; राज्य इसे स्थानीय निकायों को भी सौंप सकते हैं। आयकर अधिनियम में भुगतान किया गया व्यवसाय कर कटौती योग्य है। राज्य सूची के अन्य प्रमुख कर – कृषि आय पर कर (प्रविष्टि 46), भूमि व भवन (49), खनिज अधिकार (50, संसद द्वारा निर्धारित सीमाओं के अधीन), मानव उपभोग की मदिरा पर उत्पाद शुल्क (51), पेट्रोलियम उत्पादों व मदिरा की बिक्री पर कर (54), वाहन (57), विलासिता/मनोरंजन (62)। GST (101वाँ संशोधन) के बाद राज्य सूची की कई कर प्रविष्टियाँ (जैसे प्रवेश कर, विज्ञापन कर) हटाई या सीमित की गईं।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• मूल संविधान में व्यवसाय कर सीमा? – ₹250
• सीमा किस संशोधन से ₹2,500? – 60वाँ (1988)
• कृषि आय पर कर किस प्रविष्टि में? – राज्य सूची 46
53. निम्नलिखित करों पर विचार कीजिए और बताइए कि इनमें से कितने संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में हैं:
1. कृषि आय पर कर
2. भूमि और भवनों पर कर
3. वाहनों पर कर
4. निगम कर
5. सीमा शुल्क
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल तीन (कृषि आय पर कर, भूमि-भवन कर, वाहन कर) राज्य सूची में हैं।
📘 विस्तार से समझें: निगम कर (संघ सूची प्रविष्टि 85) व सीमा शुल्क (प्रविष्टि 83) संघ के कर हैं। राज्य सूची – कृषि आय कर (46), भूमि-भवन (49), वाहन (57)। कृषि आय पर कर राज्य लगा सकते हैं, परंतु अधिकांश राज्य (राजस्थान सहित) व्यवहार में नहीं लगाते; केंद्र का आयकर अधिनियम कृषि आय को छूट देता है, पर 'आंशिक एकीकरण' (1973-74 से) के अंतर्गत गैर-कृषि आय पर कर दर निर्धारण में उसे गिनता है। समवर्ती सूची (प्रविष्टि 44) में स्टांप शुल्क आता है – परंतु न्यायिक स्टांप व स्टांप शुल्क की दरें इसमें नहीं; GST अनुच्छेद 246A की विशेष समवर्ती शक्ति पर आधारित है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• निगम कर प्रविष्टि? – संघ सूची 85
• कृषि आय का आंशिक एकीकरण? – 1973-74 से
• GST किस अनुच्छेद की शक्ति से? – 246A
54. अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित प्रथम वित्त आयोग (1951) के अध्यक्ष कौन थे?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – के.सी. नियोगी।
📘 विस्तार से समझें: प्रथम वित्त आयोग (1951; अवधि 1952-57) ने आयकर का 55% राज्यों को देने की सिफ़ारिश की। अन्य विकल्प – के. संथानम: द्वितीय वित्त आयोग (1956) के अध्यक्ष; ए.के. चंदा: तृतीय वित्त आयोग (1960); सी.डी. देशमुख: प्रथम केंद्रीय वित्त मंत्री नहीं (प्रथम – आर.के. षणमुखम चेट्टी), बल्कि 1950-56 के वित्त मंत्री। वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति हर पाँच वर्ष (या पहले) करते हैं; कार्य – (1) केंद्र-राज्य करों का ऊर्ध्वाधर व राज्यों में क्षैतिज बँटवारा, (2) अनुच्छेद 275 के सहायता अनुदान के सिद्धांत, (3) राज्य वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर पंचायतों/नगरपालिकाओं के संसाधन बढ़ाने के उपाय (73वें/74वें संशोधन से 280(3)(bb), (c)), (4) राष्ट्रपति द्वारा सौंपा अन्य विषय। सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं, परंतु व्यवहार में सामान्यतः स्वीकार।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• द्वितीय वित्त आयोग अध्यक्ष? – के. संथानम
• प्रथम केंद्रीय वित्त मंत्री? – आर.के. षणमुखम चेट्टी
• स्थानीय निकायों संबंधी कार्य किस उपबंध में? – 280(3)(bb), (c)
55. कृषि आय के कराधान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: कृषि आय पर कर लगाने की शक्ति केवल राज्यों को है।
कथन II: केंद्रीय आयकर अधिनियम कृषि आय को कर-मुक्त रखता है, परंतु 'आंशिक एकीकरण' के अंतर्गत गैर-कृषि आय पर कर की दर निर्धारित करने में कृषि आय को सम्मिलित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: संविधान – राज्य सूची प्रविष्टि 46 (कृषि आय पर कर), जबकि संघ सूची प्रविष्टि 82 'कृषि आय के अतिरिक्त आय पर कर' है; अनुच्छेद 366(1) में कृषि आय की परिभाषा आयकर कानूनों के अनुसार। आंशिक एकीकरण (1973-74 से) – यदि शुद्ध कृषि आय ₹5,000 से अधिक हो और गैर-कृषि आय मूल छूट सीमा से अधिक, तो दोनों जोड़कर दर निकाली जाती है, जिससे ऊँची दर (slab) लागू होती है; इसका उद्देश्य कृषि आय दिखाकर कर-बचत रोकना है। व्यवहार – अधिकांश राज्य राजनीतिक व प्रशासनिक कारणों से कृषि आय कर नहीं लगाते; राजस्थान जैसे वर्षा-आधारित राज्य में अधिकांश सीमांत-लघु किसान (जोतों का 62%) हैं, अतः आधार भी सीमित। विभिन्न समितियों (जैसे के.एन. राज समिति 1972) ने बड़े किसानों पर कर की चर्चा की।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• कृषि आय कर – राज्य सूची प्रविष्टि? – 46
• आंशिक एकीकरण सीमा? – ₹5,000 शुद्ध कृषि आय
• कृषि कराधान पर 1972 की समिति? – के.एन. राज समिति