आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: विस्तृत विश्लेषण
नोट: यह दस्तावेज़ RASA2Z द्वारा तैयार किया गया है। यह एक वार्षिक सरकारी रिपोर्ट है जिसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार के अधीन तैयार किया जाता है। इसे 1950-51 में पहली बार प्रस्तुत किया गया था और 1964 में एक स्वतंत्र दस्तावेज़ बना।
1. अर्थव्यवस्था की स्थिति
वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की आर्थिक दृढ़ता बनी हुई है। प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार:
- FY26 में वास्तविक GDP वृद्धि: 7.4%
- GVA वृद्धि: 7.3%
- FY27 का अनुमान: 6.8% से 7.2% (लगातार चौथे वर्ष विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था)।
- निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE): GDP का 61.5% (2012 के बाद उच्चतम स्तर)।
- सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF): 7.8% की वृद्धि, GDP में 30% हिस्सेदारी।
- सेवा क्षेत्र GVA वृद्धि: 9.1% (विकास का मुख्य चालक)।
2. राजकोषीय घटनाक्रम
विवेकपूर्ण प्रबंधन के कारण राजस्व प्राप्तियाँ GDP का 9.2% हो गई हैं।
- प्रत्यक्ष कर आधार: आयकर रिटर्न 6.9 करोड़ (FY22) से बढ़कर 9.2 करोड़ (FY25) हुए।
- GST संग्रह: अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान ₹17.4 लाख करोड़ (+6.7% वृद्धि)।
- पूंजीगत व्यय (Capex): केंद्र का प्रभावी कैपेक्स GDP के 4% तक पहुँचा।
- राज्यों की राजकोषीय स्थिति: राज्यों का राजकोषीय घाटा GDP का 3.2% रहा, जबकि SASCI योजना ने राज्यों को 2.4% तक पूंजीगत व्यय बनाए रखने में मदद की।
3. GST 2.0 सुधार
- दो-दर संरचना: 18% मानक और 5% योग्यता दर।
- अहितकर वस्तुएं: 40% (उपकर सहित)।
- अपेक्षित लाभ: खपत में वृद्धि, विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार और छोटे व्यवसायों का औपचारिकरण।
4. मौद्रिक प्रबंधन और वित्तीय मध्यस्थता
- बैंकिंग गुणवत्ता: सकल NPA 2.2% और शुद्ध NPA 0.5% (सितंबर 2025)।
- ऋण वृद्धि: 14.5% (दिसंबर 2025 तक)।
- वित्तीय समावेशन: PMJDY खाते 55.02 करोड़ तक।
- पूजी बाज़ार: डीमैट खाते 21.6 करोड़ (12 करोड़ अनन्य निवेशक, जिनमें 25% महिलाएं)।
- नियामक गुणवत्ता: FSAP 2025 में वित्तीय प्रणाली GDP का 187% आंकी गई।
5. बाह्य क्षेत्र (External Sector)
- निर्यात: वैश्विक वस्तु निर्यात में हिस्सेदारी 1.8% और सेवाओं में 4.3%।
- व्यापार विविधीकरण: भारत 'ग्लोबल साउथ' में व्यापारिक विविधीकरण में तीसरे स्थान पर (UNCTAD रिपोर्ट)।
- निर्यात रिकॉर्ड: कुल निर्यात USD 825.3 अरब।
- विदेशी मुद्रा भंडार: USD 701.4 अरब (11 महीने का आयात कवर)।
6. कृषि एवं खाद्य प्रबंधन
- पशुधन/मत्स्य विकास: FY15-FY24 के बीच पशुधन GVA 195% और मत्स्य उत्पादन 140% बढ़ा।
- खाद्यान्न उत्पादन: 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (LMT) का रिकॉर्ड।
- विविधीकरण: बागवानी अब कृषि GVA का 33% है, जो खाद्यान्न उत्पादन से अधिक है।
7. सेवा एवं उद्योग
- सेवा क्षेत्र: FDI का 80% हिस्सा प्राप्त किया। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईकोसिस्टम।
- नवाचार: ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में रैंक 81 (2015) से 38 (2025)।
- PLI योजना: 2.0 लाख करोड़ का निवेश, 12.6 लाख नौकरियां।
8. बुनियादी ढाँचा (Infrastructure)
- राजमार्ग: 1,46,572 किमी (FY26)।
- ऊर्जा: क्षमता 509.74 GW, ऊर्जा मांग-आपूर्ति अंतर शून्य (नवंबर 2025)।
- कनेक्टिविटी: 5G सेवाएं 99.9% जिलों में उपलब्ध।
9. शिक्षा एवं स्वास्थ्य
- शिक्षा: NEP 2020 के तहत NCrF और APAAR ID का एकीकरण।
- स्वास्थ्य: MMR 86%, U5MR 78% और NMR 70% कम हुआ।
- डिजिटल स्वास्थ्य: 1.8 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित।
10. मुख्य चुनौतियां एवं उपाय
चुनौतियां:
- वैश्विक भू-राजनीतिक विखंडन और संसाधन राष्ट्रवाद।
- कमज़ोर राज्य क्षमता (नौकरशाही जोखिम परिहार)।
- राजकोषीय स्थिरता पर बिना शर्त नकद हस्तांतरण का जोखिम।
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निजी क्षेत्र का कम निवेश।
उपाय:
- PLI के माध्यम से विनिर्माण को बढ़ावा।
- जलवायु-संवेदनशील कृषि पद्धतियों को अपनाना।
- 'फूगल AI' (Frugal AI) दृष्टिकोण पर ध्यान।
- रणनीतिक लचीलेपन से सामरिक अपरिहार्यता की ओर बढ़ना।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिये क्या उपाय किये जा सकते हैं?
विनिर्माण को बढ़ावा
इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और फार्मास्यूटिकल्स में मज़बूत गति के साथ PLI योजनाओं द्वारा समर्थित मध्यम और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण की ओर संक्रमण को तीव्र करना।
कृषि पुनर्रचना
सर्वेक्षण वैश्विक औसत की तुलना में उपज-अंतर को रेखांकित करता है तथा बेहतर बीज, फसल विविधीकरण, सुदृढ़ विस्तार सेवाओं, FPO–PACS–SHG एकीकरण और जलवायु-संवेदनशील (नम्य) कृषि पद्धतियों के माध्यम से उत्पादकता एवं स्थिरता बढ़ाने का आह्वान करता है।
अवसंरचना-आधारित निवेश:
<1i>निजी निवेश को आकर्षित करने के लिये उच्च सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बनाए रखना, जिसे राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स दक्षता के तीव्र विस्तार द्वारा समर्थित करन।1i>
मानव पूंजी और कौशल विकास: PMKVY 4.0, स्किल इंपैक्ट बॉण्डस, शिक्षुता और NEP के नेतृत्व में अनुकूल, क्रेडिट-आधारित शिक्षण मार्गों के साथ व्यवसायीकरण के माध्यम से शिक्षा एवं कौशल को उद्योग की आवश्यकताओं के साथ संरेखित करना।
ऊर्जा संक्रमण एवं धारणीयता: राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा मिशन को आगे बढ़ाना, बैटरी ऊर्जा भंडारण का विस्तार करना तथा EPR और अपशिष्ट कार्ययोजनाओं के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना।
शहरी परिवर्तन: शहरी उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिये FSI को बढ़ाना, ULB के वित्त को मज़बूत करना, जाम और शहरी विस्तार से निपटने के लिये सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो, ई-बस) का विस्तार करना।
AI एवं डिजिटल रणनीति: एप्लीकेशन-विशिष्ट AI पर केंद्रित “फ्रूगल AI” दृष्टिकोण अपनाना, घरेलू मूल्य संरक्षण के साथ विश्वसनीय सीमा-पार डेटा प्रवाह से समर्थन देना, ताकि भारतीय डेटा स्थानीय नवाचार एवं अनुसंधान एवं विकास (R&D) को सुदृढ़ करे।
जलवायु रणनीति: सर्वेक्षण विकास-संरेखित जलवायु रणनीति का समर्थन करता है, जिसमें निकट अवधि के शमन की तुलना में अनुकूलन को प्राथमिकता दी गई है तथा विकास को समुत्थानशीलता के एक मुख्य माध्यम के रूप में देखा गया है।
यह तेज़, अवसंरचना-उपेक्षित ऊर्जा संक्रमण के विरुद्ध चेतावनी देता है, यूरोप में ग्रिड पर पड़े दबाव का उल्लेख करता है तथा नवाचार, संस्थागत क्षमता और परमाणु ऊर्जा जैसी विश्वसनीय गैर-जीवाश्म ऊर्जा की आवश्यकता पर ज़ोर देता है।
मानसिक स्वास्थ्य: सर्वेक्षण में डिजिटल आदत और स्क्रीन से संबंधित मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों को उजागर किया गया है, विशेष रूप से बच्चों में एवं स्कूल-संबंधित उपायों तथा संकटकालीन देखभाल से परे टेली मानस (Tele MANAS) के विस्तार का आह्वान किया गया है।
दृष्टि मेन्स प्रश्न:
प्रश्न: विश्लेषण कीजिये कि रणनीतिक लचीलेपन से सामरिक अपरिहार्यता की ओर भारत का बदलाव वैश्विक मूल्य शृंखलाओं और औद्योगिक नीति के प्रति उसके दृष्टिकोण को किस प्रकार नया आकार देता है?