अध्याय 1: राजस्थान का सामान्य परिचय
मरूप्रदेश, राजपूताना एवं राजस्थली जैसे नामों से प्रसिद्ध राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ भूगोल एवं इतिहास एकाकार हो गया है।
यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों ने न केवल यहाँ के इतिहास को एक दिशा दी है अपितु यहाँ के सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश को निर्धारित एवं नियंत्रित करने में भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में राजस्थान की विशिष्ट पहचान बनायी है।
राजस्थान की भू-गर्भिक संरचना
राजस्थान का भू-आकृतिक स्वरूप अत्यधिक विशिष्ट एवं विविधताओं से युक्त है। यहाँ आकियन एवं प्री-केन्द्रियन युग की संरचनाएँ साथ-साथ दृष्टिगत होती हैं।
(1) आद्य महाकल्प
| क्र. | उपविभाग | विवरण |
| 1 | अरावली पूर्व | कैन्धियन से पहले आद्य महाकल्प के शैल पूर्वोत्तर में दिल्ली के उत्तर व दक्षिण-पश्चिम में खम्भात की खाड़ी तक अरावली पर्वतमाला के रूप में विस्तृत है। भीलवाड़ा सुपर ग्रुप (110 किमी) प्रसिद्ध है। |
| 2 | प्री-केन्धियन | अरावली महासमूह व देहली महासमूह का निर्माण। अरावली महासमूह—फायलाइट्स, क्वार्टिजाइट व डोलोमाइट्स। देहली महासमूह—अजमेर व पश्चिम मेवाड़ में। |
(2) पुराजीवी महाकल्प
- विध्यन महासमूह: पूर्वी राजस्थान के विध्य बेसिन में। पश्चिमी राजस्थान में नागौर व बिरमानिया बेसिन।
- परिमयन कार्बोनिफेरस: बाप बोल्डर बेड (जोधपुर/फलौदी), भादुरा बालूकाश्म।
(3) मध्यजीवी महाकल्प
- क्रिटेशियस युग: आबू, पारवार, फतेहगढ़ श्रेणी।
- जुरैसिक युग: बेडेसर, बैशाखी, जैसलमेर, लाठी श्रेणी।
(4) नवजीवी महाकल्प
- तृतीयक कल्प: नागौर, बीकानेर, जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर।
- चतुर्थ कल्प: जलोढ़ व बालू रेत का निर्माण।
राजस्थान का उच्चावच / धरातल
| भौगोलिक प्रदेश | निर्माण काल |
| अरावली पर्वतीय प्रदेश | आद्य महाकल्प के प्री-कैम्ब्रियन काल में |
| दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश | क्रिटेशियस काल में ज्वालामुखी उदगार से |
| पूर्वी मैदानी प्रदेश | चतुर्थ महाकल्प में प्लेस्टोसिन काल में |
| पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश | चतुर्थ महाकल्प के प्लेस्टोसिन कल्प में |
🔹 विशेषज्ञ जोड़: अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धान्त के अनुसार सम्पूर्ण विश्व एक पिण्ड के समान था जिसे पैंजिया कहा जाता था, जो चारों ओर से पेंथालासा महासागर से घिरा हुआ था। कालान्तर में पेंजिया के टूटने पर 2 भाग बने—उत्तरी भाग अंगारालेण्ड व दक्षिणी भाग गौडवाना लैण्ड तथा दोनों के बीच टेथिस महासागर का निर्माण हुआ।
राजस्थान का निर्माण
राजस्थान प्राचीन काल से मानव को आकर्षित करता रहा है तथा विभिन्न प्राचीन सभ्यताओं जैसे—कालीबंगा, रंगमहल, बागौर, नगरी, आहड़, बैराठ व बालाथल आदि से जुड़ा हुआ है।
प्राचीन नाम व वर्तमान नाम
| प्राचीन नाम | वर्तमान नाम | प्राचीन नाम | वर्तमान नाम |
| यौद्धेय | गंगानगर के आसपास | विराट | जयपुर-टोंक |
| कुरु | अलवर का समीपवर्ती क्षेत्र | चन्द्रावती/अबुद | सिरोही-आबू क्षेत्र |
| शौरसेन | भरतपुर, करौली, धौलपुर | शिवि | मेवाड़/उदयपुर |
| जांगल | बीकानेर क्षेत्र | हयहय | कोटा-बूँदी |
| अहिच्छत्रपुर | नागौर | जाबालीपुर/स्वर्णगिरी | जालौर |
| गुजर प्रदेश | जोधपुर-पाली | पाल्लन | झालावाड़ |
| श्रीमाल/भीनमाल | जालौर | कांठल | प्रतापगढ़ |
| वल्ल प्रदेश/दुंगल | जैसलमेर | व्याघ्रघाट | बाँसवाड़ा |
📌 नवीनतम अपडेट: 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ तब राजस्थान में 19 रियासतें, 3 देशी ठिकाने (लावा, नीमराना, कुशलगढ़) एवं 1 केन्द्रशासित प्रदेश अजमेर-मेरवाड़ा था। राजस्थान का निर्माण 7 चरणों में 1 नवम्बर 1956 को पूरा हुआ।
राजस्थान एकीकरण (7 चरण)
| चरण | नाम | तिथि | सम्मिलित रियासतें | राजधानी | प्रधानमंत्री |
| 1 | मत्स्य संघ | 18 मार्च 1948 | अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर | अलवर | शोभाराम कुमावत |
| 2 | पूर्व राजस्थान संघ | 25 मार्च 1948 | झुंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़, बूँदी, टोंक, कोटा, झालावाड़, शाहपुरा | कोटा | गोकुल लाल असावा |
| 3 | संयुक्त राजस्थान | 18 अप्रैल 1948 | पूर्व राजस्थान + उदयपुर | उदयपुर | माणिक्यलाल वर्मा |
| 4 | वृहत राजस्थान | 30 मार्च 1949 | संयुक्त राजस्थान + जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर | जयपुर | हीरालाल शास्त्री |
| 5 | संयुक्त वृहत राजस्थान | 15 मई 1949 | वृहत राजस्थान + मत्स्य संघ | जयपुर | हीरालाल शास्त्री |
| 6 | राजस्थान | 26 जनवरी 1950 | सिरोही (दिलवाड़ा व आबूरोड छोड़कर) | जयपुर | हीरालाल शास्त्री |
| 7 | पुनर्गठित राजस्थान | 1 नवम्बर 1956 | उपर्युक्त सभी + अजमेर, आबूरोड, सुनेल टप्पा | जयपुर | हीरालाल शास्त्री |
अध्याय 2: राजस्थान का नामकरण
- ऋग्वेद में — ब्रह्मवर्त
- वाल्मीकि द्वारा — मरूकान्तार
- बसंतगढ़ शिलालेख में — राजस्थानादित्य (625 ई./682 विक्रम संवत, खीमत माता मंदिर, सिरोही)
- सर्वप्रथम 'राजस्थान' शब्द का उल्लेख — मुहणोत नैणसी री ख्यात में
- जॉर्ज थॉमस द्वारा — राजपूताना (1805 ई., विलियम फ्रेकलिन की पुस्तक "मिल्ट्री मेमोयर्स ऑफ मिस्टर जार्ज थॉमस")
- कर्नल जेम्स टॉड द्वारा — राजस्थान (पुस्तक: "द एनाल्स एण्ड एन्टीक्विटीज ऑफ राजस्थान", 1829 ई., लंदन)
- संवैधानिक मान्यता — 26 जनवरी 1950
- वर्तमान स्वरूप — 1 नवम्बर 1956
अध्याय 3: राजस्थान की स्थिति
सूर्य के सापेक्ष स्थिति
- कर्क संक्रांति (21 जून): सबसे बड़ा दिन, सबसे छोटी रात, सबसे छोटी परछाई।
- मकर संक्रांति (22 दिसम्बर): सबसे बड़ी रात, सबसे छोटा दिन, सबसे लम्बी परछाई।
- सूर्योदय एवं अस्त सबसे पहले सिलाना (धौलपुर) में, सबसे अन्त में कटरा (जैसलमेर) में।
- दिन में सूर्य सर्वाधिक सीधा जोधपुर में चमकता है।
- सबसे सीधा सूर्य बाँसवाड़ा में, सबसे तिरछा गंगानगर में।
अक्षांशीय विस्तार
- 23°03' से 30°12' उत्तरी अक्षांश
- उत्तरी बिन्दु: कोणा गांव (श्रीगंगानगर)
- दक्षिणी बिन्दु: बोरकुण्डा (बाँसवाड़ा)
- उत्तर से दक्षिण की दूरी: 826 किमी
- अक्षांशीय विस्तार: 7°9'
- कर्क रेखा 2 जिलों से गुजरती है (बाँसवाड़ा 25 किमी + डूंगरपुर 1 किमी) = कुल 26 किमी
- छौछ गांव (बाँसवाड़ा) पूर्णतः कर्क रेखा पर स्थित
देशान्तरीय विस्तार
- 69°30' से 78°17' पूर्वी देशान्तर
- पश्चिमी बिन्दु: कटरा गांव (जैसलमेर)
- पूर्वी बिन्दु: सिलाना गांव (धौलपुर)
- पश्चिम से पूर्व की दूरी: 869 किमी
- देशान्तरीय विस्तार: 8°47'
- पूर्व एवं पश्चिम में समय का अंतर: 35 मिनट 8 सेकण्ड
राजस्थान की आकृति
- विषमकोणीय चतुर्भुज या पतंगाकार
- T.H. हेण्डले के अनुसार — Rhombus के समान
- मध्य गाँव: लाम्पोलाई (नागौर)
- सैटेलाइट सर्वे के अनुसार मध्य गाँव: गगराना (नागौर)
राजस्थान का क्षेत्रफल
- कुल क्षेत्रफल: 3,42,239 वर्ग किमी
- भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.41% (सबसे बड़ा राज्य)
- विश्व के क्षेत्रफल का 0.25%
- क्षेत्रफल की दृष्टि से तुलना: कांगो, जर्मनी, नॉर्वे, पोलैण्ड, वियतनाम, फिनलैण्ड, जापान के बराबर
- ब्रिटेन से दोगुना, श्रीलंका से 5 गुणा, इजराइल से 17 गुणा बड़ा
राजस्थान की सीमा
- कुल स्थलीय सीमा: 5920 किमी
- अन्तर्राष्ट्रीय सीमा: 1070 किमी (रेडक्लिफ रेखा, 17 अगस्त 1947)
- अन्तर्राज्यीय सीमा: 4850 किमी
- सर्वाधिक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा: जैसलमेर
- न्यूनतम अन्तर्राष्ट्रीय सीमा: फलौदी
- सर्वाधिक अन्तर्राज्यीय सीमा: झालावाड़ (मध्यप्रदेश, 520 किमी)
- न्यूनतम अन्तर्राज्यीय सीमा: बाड़मेर (गुजरात, 14 किमी)
अध्याय 4: राजस्थान के जिले एवं संभाग
रामलुभाया समिति (21 मार्च 2022)
गहलोत सरकार द्वारा 17 नवीन जिलों और 3 संभागों का सृजन किया गया। जिसके पश्चात् राजस्थान में जिलों की संख्या 33 से बढ़कर 50 तथा संभागों की संख्या 7 से बढ़कर 10 हो गयी।
ललित के पंवार समिति (28 जून 2024)
- अध्यक्ष: ललित के. पंवार
- कार्य: 17 जिलों व 3 संभाग की समीक्षा
- 28 दिसम्बर 2024 को 9 जिलों के सृजन को रद्द किया गया
📌 नवीनतम स्थिति (2025): वर्तमान में राजस्थान में 41 जिले और 7 संभाग हैं। रद्द किये गये 9 जिले: अनूपगढ़, दूदू, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, केकड़ी, नीम का थाना, सांचौर, शाहपुरा।
राजस्थान में संभागीय व्यवस्था
| क्र. | संभाग | जिले |
| 1 | कोटा | कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ (4) |
| 2 | बीकानेर | बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू (4) |
| 3 | उदयपुर | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, राजसमंद, झूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर (7) |
| 4 | जोधपुर | जोधपुर, पाली, जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही, बालोतरा, फलौदी (8) — सर्वाधिक जिलों वाला संभाग |
| 5 | भरतपुर | भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर (5) |
| 6 | अजमेर | अजमेर, नागौर, टोंक, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, ब्यावर (6) |
| 7 | जयपुर | जयपुर, दौसा, अलवर, सीकर, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड (7) |
अध्याय 5: राजस्थान के भू-आकृतिक प्रदेश
महाद्वीपीय विस्थापन का सिद्धान्त (वेगनर, 1912)
अल्फ्रेड वेगनर (जर्मनी) — पैंजिया, पेंथालासा, अंगारालेण्ड, गौडवाणालेण्ड, टेथिस सागर।
राजस्थान का सर्वप्रथम भौतिक विभाजन
- प्रो. वी.सी. मिश्रा (1968): 7 भाग
- ए.के. सेन (1968)
- रामलोचन सिंह (1971)
- हरिमोहन सक्सेना (1994): 4 भाग — पुस्तक "राजस्थान का भूगोल"
भौतिक प्रदेशों का तुलनात्मक अध्ययन
| भौतिक प्रदेश | निर्माण काल | क्षेत्रफल | जनसंख्या | जिले |
| पश्चिमी मरूस्थलीय | प्लीस्टोसीन काल | 61.11% | 40% | 16 |
| अरावली | प्री-कैम्प्रियन काल | 9% | 10% | 13 |
| पूर्वी मैदानी | प्लीस्टोसीन काल | 23% | 39% | 13 |
| हाड़ौती पठार | क्रिटेशियस काल | 6.89% | 11% | 7 |
पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश
- अरावली के पश्चिम में विस्तृत, थार मरूस्थल (टेथिस सागर का अवशेष)
- क्षेत्रफल: 61.11% (2,38,254 वर्ग किमी)
- लम्बाई: 640 किमी, चौड़ाई: ~300 किमी, औसत ऊँचाई: 200-300 मीटर
- प्रमुख नदी: लूनी
- मृदा: रेतीली/बालू
- वनस्पति: जिरोपाईट (मरुद्भिद व काँटेदार)
- खनिज: अधात्विक व ऊर्जा खनिज (पेट्रोलियम गैस)
- प्रमुख चट्टानें: अवसादी
मरूस्थल का विभाजन (बनावट के आधार पर)
| प्रकार | विवरण | विस्तार |
| रेतीला/महान मरूस्थल | अत्यधिक बालूका स्तूप, 'धोरा' कहलाते हैं | जैसलमेर (सर्वाधिक) |
| पथरीला मरूस्थल | चट्टानों व शुष्कता के कारण बालूका स्तूप नहीं, 'हम्माद/हम्मादा' | फलौदी, पोकरण, छप्पन की पहाड़ी |
| मिश्रित मरूस्थल | बालूका स्तूपों के साथ कंकड़-पत्थर, 'रैग' | जालौर, बाड़मेर, झुंझुनूं, सीकर |
अर्द्ध शुष्क मरूस्थल (बांगर प्रदेश)
औसत वर्षा: 25-50 सेमी, जलवायु: अर्द्धउष्ण
- घग्घर बेसिन: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ (हरित घाटी प्रदेश)
- शेखावाटी प्रदेश: चूरू, सीकर, झुंझुनूं, डीडवाना-कुचामन उत्तरी भाग
- नागौर उच्च भूमि: नागौर व डीडवाना-कुचामन (खारे पानी की झीलें)
- लूनी बेसिन: अजमेर, नागौर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौर (गोडवाड़ बेसिन/नेहड़ रण)
अरावली पर्वतीय प्रदेश
- निर्माण: प्री-कैम्ब्रियन काल (आद्य महाकल्प)
- विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत शृंखला
- गुजरात के पालनपुर से दिल्ली की रायसीना हिल्स तक 692 किमी
- राजस्थान में कुल लम्बाई: 550 किमी (79.48%)
- औसत ऊँचाई: 930 मीटर
- सर्वोच्च चोटी: गुरुशिखर (1722 मीटर, सिरोही)
- सबसे ऊँचा शहर: माउंट आबू (1200 मीटर)
- निम्नतम पॉइंट: पुष्कर घाटी, अजमेर
- दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व
- तुलना: USA के अप्लेशियन पर्वत से
अरावली के अन्य नाम
| नाम | द्वारा/क्षेत्र |
| हिन्दू ओलम्पस | जेम्स टॉड |
| आबू-गुलाब | सिरोही में |
| आडावाला | बूँदी में |
| उक्तंट की गर्दन | अबुल फजल |
| आड़ा-वटा | उदयपुर में |
| परिपत्र | विष्णुपुराण |
अरावली की प्रमुख चोटियाँ
| क्र. | चोटी | जिला | ऊँचाई (मीटर) |
| 1 | गुरुशिखर | सिरोही | 1722 |
| 2 | सेर | सिरोही | 1597 |
| 3 | दिलवाड़ा | सिरोही | 1442 |
| 4 | जरगा | उदयपुर | 1431 |
| 5 | अचलगढ़ | सिरोही | 1380 |
| 6 | आबू | सिरोही | 1295 |
| 7 | कुंभलगढ़ | राजसमंद | 1224 |
| 8 | घोलिया | उदयपुर | 1183 |
| 9 | जय | सिरोही | 1090 |
| 10 | रघुनाथगढ़ | सीकर | 1055 |
अरावली का विभाजन
| भाग | विस्तार | सर्वोच्च शिखर | चट्टानें |
| उत्तरी अरावली | सिंधाना (झुंझुनूं) से सांभर (जयपुर) | रघुनाथगढ़ (1055 मी.) | क्वार्टजाइट व फाईलाइट |
| मध्य अरावली | सांभर से देवगढ़ (राजसमंद) | मालखेत (1052 मी.) | संगमरमर, क्वार्टजाइट |
| दक्षिणी अरावली | देवगढ़ से सिरोही तक | गुरुशिखर (1722 मी.) | ग्रेनाइट |
पूर्वी मैदानी प्रदेश
- निर्माणकाल: प्लीस्टोसीन काल (नदियों द्वारा जमा अवसादों से)
- विस्तार: अरावली एवं हाड़ौती पठार के मध्य
- क्षेत्रफल: 23%, जनसंख्या: 39%
- मृदा: जलोढ़ (दोमट)
- जलवायु: आर्द्र
- राजस्थान का सर्वाधिक उपजाऊ प्रदेश
चम्बल बेसिन
चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, कोटा, बूँदी — बीहड़/डांग क्षेत्र (खादर)
- सर्वाधिक अवनालिका अपरदन: कोटा (1,32,600 हेक्टेयर)
- बीहड़ की रानी: करौली, डांग का राजा: धौलपुर
बनास-बाणगंगा बेसिन
- मेवाड़ का मैदान (चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा) — मक्का सर्वाधिक
- मालपुरा-करीली का मैदान (अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर)
- बाणगंगा का मैदान: जयपुर, दौसा, भरतपुर (रोही का मैदान)
माही बेसिन
बाँसवाड़ा, झूंगरपुर, प्रतापगढ़ — छप्पन का मैदान, भाटी का मैदान, कांठल का मैदान। मृदा: लाल चिकनी (लेटेराइट)। फसलें: मक्का (माही कंचन, माही धवल), चावल (माही सुगंधा)।
दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश / हाड़ौती पठार
- अन्य नाम: हाड़ौती पठार, माल प्रदेश, संक्रांति प्रदेश
- निर्माण: क्रिटेशियस काल (गोंडवाना लैंड में ज्वालामुखी के दरारी उदगार से)
- औसत ऊँचाई: 500 मीटर
- क्षेत्रफल: 6.89%, जनसंख्या: 11%
- मृदा: काली, सर्वोच्च भाग: चाँदखेड़ी (झालावाड़) 517 मीटर
- जिले: कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़
- प्रमुख नदियाँ: चंबल, कालीसिंध, पावती, परवन
- प्रमुख पहाड़ियाँ: मुकंदरा हिल्स, बूँदी हिल्स
हाड़ौती पठार के भाग
- दक्कन लावा पठार: बिजौलिया (भीलवाड़ा) से भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) के मध्य — ऊपरमाल का पठार
- विध्यन कगार: चूना-पत्थर सम्पन्न (कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़)
- शाहबाद उच्च क्षेत्र: बारां जिले का पूर्वी भाग, सर्वोच्च शिखर: कस्बा थाना (456 मी.)
- डग-गंगाधर क्षेत्र: झालावाड़ जिला, औसत ऊँचाई 450 मीटर
- अर्द्धचन्द्राकार पहाड़ियाँ: बूँदी हिल्स (सर्वोच्च: सतूर 353 मी.), मुकंदरा हिल्स (सर्वोच्च: चाँदखेड़ी 517 मी.)
राजस्थान के प्रमुख पठार
| क्र. | पठार | जिला | ऊँचाई | विशेष |
| 1 | उड़िया पठार | सिरोही | 1360 मी. | राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार |
| 2 | भोराट का पठार | उदयपुर-राजसमंद | 1225 मी. | दूसरा सबसे ऊँचा |
| 3 | आबू का पठार | सिरोही | 1200 मी. | गुम्बदाकार, बैथोलिश संरचना |
| 4 | लसाड़िया का पठार | सलूम्बर | — | जयसमंद झील के पूर्व |
| 5 | मेसा का पठार | चित्तौड़गढ़ | — | चित्तौड़गढ़ दुर्ग |
| 6 | मानदेसरा का पठार | चित्तौड़गढ़ | — | भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य |
| 7 | कांकणबाड़ी व क्रास्का | अलवर | — | सरिस्का अभयारण्य |
| 8 | ऊपरमाल का पठार | चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा | — | भैंसरोड़गढ़ से बिजौलिया |
| 9 | धीराजी का पठार | चित्तौड़गढ़ | — | — |
अध्याय 6: राजस्थान की जलवायु
राजस्थान में उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु पाई जाती है। राजस्थान की स्थिति शीतोष्ण कटिबंध में है तथा 2 जिले बाँसवाड़ा एवं डूंगरपुर उष्ण कटिबंध में आते हैं।
जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
- अक्षांशीय स्थिति: 23°3' से 30°12' उत्तरी अक्षांश
- समुद्र से दूरी: अरब सागर से ~350 किमी दूर, महाद्वीपीय जलवायु
- उच्चावच: अधिकांश भाग समुद्रतल से 370 मी. से ऊँचा
- पर्वतों की दिशा: अरावली दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व (मानसून के समानान्तर)
- धरातल की ऊँचाई: माउंट आबू का तापमान जमाव बिंदु तक
जलवायु का वर्गीकरण (सामान्य)
| प्रदेश | विस्तार | वर्षा | तापमान (ग्रीष्म/शीत) | वनस्पति | प्रतिनिधि नगर |
| शुष्क | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, फलौदी, गंगानगर | 0-20 सेमी | 45-50°C / 0-8°C | मरुद्भिद | जैसलमेर |
| अर्द्ध शुष्क | अरावली के पश्चिम | 20-40 सेमी | 36-42°C / 10-17°C | स्टेपी | जोधपुर |
| उप आर्द्र | अरावली पर्वतीय | 40-60 सेमी | 28-36°C / 12-18°C | मिश्रित पतझड़ | जयपुर |
| आर्द्र | दक्षिणी पूर्वी मैदानी | 60-80 सेमी | 30-34°C / 14-17°C | मानसूनी/पतझड़ | सवाई माधोपुर |
| अति आर्द्र | दक्षिणी व दक्षिण पूर्वी (हाड़ौती) | 80-100 सेमी | 30-40°C / 12-18°C | सवाना | झालावाड़ |
कोपेन द्वारा वर्गीकरण
| प्रदेश | विस्तार | प्रतिनिधि नगर | वनस्पति |
| BWhw (उष्ण शुष्क) | जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, फलौदी | बीकानेर | मरुद्भिद |
| BShw (अर्द्ध शुष्क) | लूनी बेसिन, घग्घर बेसिन, नागौर, शेखावाटी | नागौर | स्टेपी |
| Cwg (उपआर्द्र) | अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, डीग, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, दौसा, राजसमंद, सवाई माधोपुर, टोंक, उदयपुर | टोंक | मानसूनी/पतझड़ |
| Aw (उष्ण कटिबंधीय आर्द्र) | कोटा, बारां, झालावाड़, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, सलूम्बर, माउंट आबू | डूंगरपुर | सवाना |
थॉनवेट द्वारा वर्गीकरण
| प्रदेश | विस्तार | वर्षा | वनस्पति |
| CA'w (उपआर्द्र) | डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, कोटा, बारां, झालावाड़, सलूम्बर, पूर्वी उदयपुर | 80-100 सेमी | सवाना व पतझड़ |
| DA'w (उष्ण आर्द्र) | अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, डीग, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, दौसा, ब्यावर, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, सिरोही, पाली, सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, राजसमंद, सवाई माधोपुर, टोंक, उदयपुर, नागौर, बूँदी, जोधपुर | 50-80 सेमी | अर्द्ध मरूस्थलीय |
| DB'w (अर्द्ध मरूस्थलीय) | बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, उत्तरी झुंझुनूं | 20-40 सेमी | कंटीली |
| EA'd (उष्ण मरूस्थलीय) | जैसलमेर, बाड़मेर, पश्चिमी जोधपुर, पश्चिमी बीकानेर, फलौदी | 10-20 सेमी | मरुद्भिद |
ऋतुओं के आधार पर जलवायु
ग्रीष्म ऋतु (मार्च से मध्य जून)
- औसत तापमान: 30-40°C
- लू: गर्म एवं शुष्क हवाएँ
- आंधी: धूलभरी एवं नमीयुक्त हवाएँ (सर्वाधिक: श्रीगंगानगर, 27 दिन)
- भभूल्या/फुटाल्या: धूलभरी एवं चक्रवातीय हवाएँ (सर्वाधिक: बीकानेर)
- सर्वाधिक तापमान वाला जिला: चूरू (50°C)
- सर्वाधिक तापमान वाला स्थान: फलौदी (52°C)
- न्यूनतम तापमान: माउंट आबू
वर्षा ऋतु (मध्य जून से सितम्बर)
- दक्षिण-पश्चिम मानसून की 2 शाखाएँ: अरब सागर शाखा (10% वर्षा) व बंगाल की खाड़ी शाखा (90% वर्षा)
- मानसून का प्रवेश: बाँसवाड़ा (15 जून)
- सर्वाधिक वर्षा वाला जिला: झालावाड़ (राजस्थान का चेरापूँजी)
- सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान: माउंट आबू (150 सेमी)
- न्यूनतम वर्षा वाला जिला: जैसलमेर (10 सेमी)
- न्यूनतम वर्षा वाला स्थान: सम (जैसलमेर) — 0 सेमी
- औसत वार्षिक वर्षा: 57.5 सेमी (575 मिमी)
शरद ऋतु (अक्टूबर-नवम्बर)
- मानसून प्रत्यावर्तन की ऋतु
- अक्टूबर क्यार: उमस भरी गर्मी
- कार्तिक मास की उष्मा
शीत ऋतु (मध्य नवम्बर से मध्य मार्च)
- सबसे ठण्डा जिला: चूरू
- सबसे ठण्डी एवं बड़ी रात: 22 दिसम्बर
- सबसे ठण्डा स्थान: माउंट आबू (राजस्थान का शिमला)
- मावठ: शीत ऋतु में अल्पवर्षा (गोल्डन ड्राप्स) — रबी फसल के लिए लाभदायक
- शीतलहर: साइबेरिया से आने वाली शुष्क शीत पवनें (सर्वाधिक प्रभावित: चूरू, सीकर, बीकानेर)
🔹 विशेषज्ञ जोड़ (परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण):
- समवर्षा रेखाएँ: 25 सेमी (मरूस्थल को 2 भागों में), 50 सेमी (अरावली पर — पश्चिमी मरूस्थल एवं पूर्वी मैदान को अलग करती है)
- मानसून प्रस्फोट: मानसून के शुरूआत में तेज वर्षा (जुलाई)
- मानसून प्रतिष्ठेदन: प्रस्फोट के बाद 2-3 सप्ताह वर्षा न होना (अगस्त-सितम्बर)
- प्री-मानसून: मानसून से पहले वर्षा (दोगड़ा)
- अनावृद्धि: वर्षा का कम होना (हर 4-5 वर्ष में)
- अतिवृद्धि: 24 घंटे में 20-25 सेमी वर्षा
- ओलावृद्धि: चक्रवातों के प्रभाव से ओले (सर्वाधिक: जयपुर)
- अलनीनो: प्रशान्त महासागर का सतही जल गर्म — मानसून कमजोर
- ला-निनो: प्रशान्त महासागर का सतही जल ठण्डा — अधिक वर्षा
जलवायु की विशेषताएँ
- उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु
- 90% से अधिक वर्षा मानसून काल में
- दैनिक एवं वार्षिक तापान्तर अधिक (सर्वाधिक वार्षिक: चूरू, सर्वाधिक दैनिक: जैसलमेर)
- वर्षा का असमान वितरण
- अनिश्चितता एवं अपर्याप्त वर्षा
- खण्ड वृष्टि
अध्याय 7: राजस्थान की नदियाँ
राजस्थान के अपवाह तंत्र में 15 मुख्य बेसिन एवं 58 उप बेसिन सम्मिलित हैं। भारत के कुल सतही जल एवं नदियों के जल में राजस्थान का योगदान 1.16% है। भूमिगत जल में 1.72%।
अपवाह तंत्र का वर्गीकरण
| अपवाह तंत्र | प्रतिशत | प्रमुख नदियाँ |
| अरब सागरीय | 17% | लूनी, माही, पश्चिमी बनास, साबरमती |
| बंगाल की खाड़ी | 23% | चम्बल, बनास, बेडच, गंभीर |
| अंतः प्रवाह | 60% | घग्घर, कांतली, काकनी, साबी, रूपारेल, रूपनगढ़, बाणगंगा, मेथा |
अरब सागरीय अपवाह तंत्र
(1) लूनी नदी
- अन्य नाम: सागरमती (अजमेर), सरस्वती, लवणमती, मारवाड़ की गंगा, आधी मीठी-आधी खारी, साक्री (पुष्कर में), अंतः सलिला (कालीदास)
- उद्गम: नाग पहाड़ (अजमेर)
- संगम: कच्छ रन (गुजरात)
- कुल लम्बाई: 495 किमी (राजस्थान में 330 किमी)
- प्रवाह क्षेत्र: 7 जिले (अजमेर, नागौर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौर)
- लूनी बेसिन का विस्तार 13 जिलों में (सर्वाधिक: पाली > जालौर > बाड़मेर)
- पश्चिमी राजस्थान की सबसे लम्बी नदी
- प्रवाह क्षेत्र: गोडवाड़ प्रदेश
- सर्वाधिक सहायक नदियाँ पाली जिले से
- राजस्थान की सर्वाधिक जल ग्रहण क्षेत्र वाली नदी (69302 वर्ग किमी)
लूनी की सहायक नदियाँ
| नदी | उद्गम | संगम |
| जोजड़ी | पुंदलू गाँव (नागौर) | खेजड़ली खुद (जोधपुर) — दायीं ओर से, अरावली से नहीं |
| जवाई (सबसे बड़ी) | गोरिया गाँव (पाली) | हेमगुढ़ा (जालौर) |
| बांडी | फुलाद गाँव (पाली) | लाखर गाँव — सबसे प्रदूषित नदी (रासायनिक नदी) |
| लीलड़ी | जवाजा (अजमेर/ब्यावर) | पाली |
| खारी | शेरगाँव की पहाड़ी (सिरोही) | सायला (जालौर) — जवाई में |
| सूकड़ी | देसूरी (पाली) | समदड़ी (बालोतरा) — बांकली बाँध |
| मीठड़ी | पाली | मंगला (बालोतरा) |
| सागी | जसवंतपुरा की पहाड़ी (जालौर) | गाधव (बालोतरा) |
| गुहिया | सोजत (पाली) | बांडी में |
लूनी की बाँध परियोजनाएँ
| बाँध | जिला | नदी |
| जसवंत सागर (पिचियाक) | जोधपुर | लूनी |
| जवाई बाँध | पाली | जवाई (मारवाड़ का अमृत सरोवर) |
| हेमावास बाँध | पाली | बांडी |
| बांकली बाँध | जालौर | सूकड़ी |
(2) माही नदी
- अन्य नाम: वागड़ की गंगा, कांठल की गंगा, आदिवासियों की गंगा, दक्षिण राजस्थान की स्वर्ण रेखा
- उद्गम: मेहन्द द्रौल (धार, मध्यप्रदेश)
- संगम: खम्भात की खाड़ी (गुजरात)
- प्रवाह क्षेत्र: डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा (उल्टे U आकार)
- राजस्थान में प्रवेश: खांदू गाँव (बाँसवाड़ा)
- कुल लम्बाई: 576 किमी (राजस्थान में 171 किमी)
- कर्क रेखा को 2 बार काटती है
- एकमात्र नदी जिसका प्रवेश व निकास दक्षिण से
- माही बेसिन: 6 जिले (सर्वाधिक: बाँसवाड़ा > उदयपुर-सलूम्बर > प्रतापगढ़)
- त्रिवेणी संगम: बेणेश्वर (नवाटापरा गाँव, डूंगरपुर) — सोम, माही, जाखम
- बेणेश्वर धाम: आदिवासियों का कुम्भ
- 100 टापुओं का शहर: बाँसवाड़ा
माही की सहायक नदियाँ
| नदी | उद्गम | संगम |
| सोम | — | — |
| जाखम | — | सीतामाता अभयारण्य से गुजरती |
| ऐराव | प्रतापगढ़ की पहाड़ियाँ | सेमेलियां गाँव (बाँसवाड़ा) |
| अनास | आम्बेर गाँव (MP) | गलियाकोट के बाद |
| चाप | कालिंजरा पहाड़ियाँ (बाँसवाड़ा) | बाँसवाड़ा |
| मोरेन | झूंगरपुर | गलियाकोट के निकट |
| भादर | झूंगरपुर | कडाना बाँध के बाद |
| ईरू | — | माही बजाज सागर बाँध के पास |
माही की बाँध परियोजना
- माही बजाज सागर: बोरखेड़ा (बाँसवाड़ा) — राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध (3109 मी.)
- कागदी पिकअप: बाँसवाड़ा
- कडाना बाँध: रामपुर (माहीसागर, गुजरात)
- माही परियोजना में हिस्सेदारी: राजस्थान 45% + गुजरात 55%
- कुल जल विद्युत उत्पादन: 140 MW, राजस्थान 100% प्राप्त करता है
(3) पश्चिमी बनास
- उद्गम: नया सनवारा की पहाड़ियाँ (सिरोही), अरावली के पश्चिमी ढाल
- संगम: कच्छ का रन (गुजरात)
- कुल लम्बाई: 266 किमी (राजस्थान में 50 किमी)
- सहायक नदी: सूकली/सीपू
- सूकड़ी सेलवाड़ा बाँध परियोजना: सिरोही
(4) साबरमती नदी
- उद्गम: पदराना पहाड़ी (उदयपुर) — वाकल व सेंई धाराओं के मिलने से
- संगम: खम्भात की खाड़ी (गुजरात)
- कुल लम्बाई: 416 किमी (राजस्थान में 45 किमी)
- भारत की सर्वाधिक प्रदूषित नदी
- फुलवारी की नाल के मध्य 5 सरिताओं में विभक्त
- राजस्थान की प्रथम नदी जिस पर रिवर फ्रंट (अहमदाबाद) बना
साबरमती की सहायक नदियाँ
| नदी | उद्गम | संगम |
| वाकल | गोरा गाँव (गोगुन्दा, उदयपुर) | मऊ पीपली (गुजरात) |
| सेई | पादरना गाँव (उदयपुर) | गुजरात में साबरमती में |
देवास सुरंग: उदयपुर की झीलों में साबरमती का जल पहुँचाने के लिए 11.6 किमी लम्बी जल सुरंग — राजस्थान की सबसे लम्बी जल सुरंग।
बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र
(1) चम्बल नदी
- अन्य नाम: कामधेनू, चमण्यवती, नित्यवाही, बारहमासी, मालवगंगा
- उद्गम: जनापावा की पहाड़ियाँ (महू, मध्यप्रदेश)
- संगम: मुरादगंज (औरिया, उत्तरप्रदेश) — यमुना में
- राजस्थान में प्रवेश: चौरासीगढ़ (MP) किले के निकट, चित्तौड़गढ़
- कुल लम्बाई: 1051 किमी (राजस्थान में 322 किमी)
- प्रवाह क्षेत्र: चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर
- सबसे लम्बी अन्तर्राज्यीय सीमा (राजस्थान-MP, 252 किमी)
- कोटा-बूँदी एवं कोटा-सवाई माधोपुर की सीमा
- प्रमुख जलप्रपात: चूलिया (भैंसरोड़गढ़, चित्तौड़गढ़) — 18 मीटर, राजस्थान का सबसे ऊँचा
- चम्बल बेसिन: 12 जिलों में (सर्वाधिक: बारां > झालावाड़ > बूँदी)
- सर्वाधिक अवनालिका अपरदन, उत्खात भूमि, बीहड़/डांग
- गुंजाली नदी: चम्बल के राजस्थान में प्रवेश के बाद मिलने वाली प्रथम सहायक
- बनास: चम्बल की सबसे लम्बी सहायक
- हैंगिंग ब्रिज: चम्बल पर राज्य का प्रथम (1.40 किमी, 6 लेन, NH-27)
- त्रिवेणी संगम: रामेश्वर घाट (पदरा गाँव, सवाई माधोपुर) — चम्बल, बनास, सीप
- संरक्षित जीव: गांगेय सूंस डॉल्फिन (2009), घड़ियाल, उदबिलाव
- सर्वाधिक V शेप गॉर्ज वैली: चम्बल नदी पर
चम्बल की सहायक नदियाँ
| नदी | उद्गम | संगम | विशेष |
| गुंजाली | — | चम्बल (राजस्थान में प्रवेश के बाद प्रथम) | — |
| छोटी कालीसिंध | MP | माकेरिया गाँव | दायीं ओर से प्रथम |
| कालीसिंध | बागली गाँव (देवास, MP) | नवसेरा (कोटा) | राजस्थान में प्रवेश: बिन्दा गाँव (झालावाड़) |
| आलनिया | मुकुंदरा (कोटा) | नोटना गाँव (कोटा) | चन्द्रलोही नदी, कैथून शहर |
| पार्वती | सेहोर क्षेत्र (MP) | पाल घाट (सवाई माधोपुर) | करियाहट (बारां) से प्रवेश, किशनगंज शहर |
| सीप | MP | रामेश्वरम त्रिवेणी संगम | — |
| कुन | शिवपुरी पठार (MP) | मुरैना पठार के पास | मुसेरी गाँव (बारां) से प्रवेश, शाहबाद शहर |
| बामनी | हरिपुरा की पहाड़ियाँ (बेंगू, चित्तौड़गढ़) | भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) | भैंसरोड़गढ़ दुर्ग चम्बल+बामनी संगम पर |
| ईज | भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) | डाबी (बूँदी) | — |
| कुराल | ऊपरमाल (भीलवाड़ा) | बूँदी | — |
| मेज | बिजौलिया (भीलवाड़ा) | सीनपुर, लाखेरी (बूँदी) | गुढ़ा बाँध, भीमतल जल प्रपात (मांगली नदी पर) |
| चाकण | बूँदी | करमापुर (सवाई माधोपुर) | चाकण बाँध (बूँदी) |
| चन्द्रभागा | सेमली (झालावाड़) | खाड़िया (झालावाड़) — कालीसिंध में | चंद्रभागा पशुमेला |
| परवन | MP | पलायता (बारां) — कालीसिंध में | खरीबोर (झालावाड़) से प्रवेश, शेरगढ़ अभयारण्य, मनोहरथाना दुर्ग |
| आहू | सुसनेर (MP) | गागरोण (झालावाड़) — कालीसिंध में | नन्दपुर (झालावाड़) से प्रवेश, मुकुन्दरा नेशनल पार्क, सामेला संगम |
| पीपलाज | पंचपहाड़ (झालावाड़) | चाखेली गाँव (झालावाड़) — कालीसिंध में | — |
| मांगली | भीमतल जल प्रपात (भीलवाड़ा) | बूँदी — मेज नदी में | मेज की सहायक, घोड़ा पछाड़ नदी |
| नेवज/निवाज | राजगढ़ (MP) | मवासा (झालावाड़) — परवन में | कोलूखेडी (झालावाड़) से प्रवेश |
| काली खाड़ | झालावाड़ | झालावाड़ — परवन में | मनोहरथाना दुर्ग के पास संगम |
| घोड़ा पछाड़ | बिजौलिया झील | बूँदी — मांगली में | — |
चम्बल की बाँध परियोजनाएँ (3 चरण, 4 बाँध)
| चरण | बाँध | स्थान | विशेष |
| प्रथम | गांधी सागर | मन्दसौर (MP) | चम्बल पर प्रथम, एकमात्र बाँध जो राजस्थान से बाहर |
| प्रथम | कोटा बैराज | कोटा | सिंचाई बाँध, 16 द्वार, बांगी नहर (178 किमी), दांगी नहर (248 किमी) |
| द्वितीय | राणा प्रताप सागर | रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) | राजस्थान का सबसे बड़ा, विश्व का सबसे सस्ता (131 करोड़), सर्वाधिक भराव क्षमता |
| तृतीय | जवाहर सागर | बोरावास (कोटा) | पिकअप बाँध, प्रथम बार हाइड्रो पम्प स्टोरेज |
जल विद्युत: गांधी सागर 115 MW + राणा प्रताप सागर 172 MW + जवाहर सागर 99 MW = 386 MW (राजस्थान 50% + MP 50%)
चम्बल की लिप्ट नहरें
- कोटा बैराज दायीं नहर से 8 लिप्ट: जालीपुरा, दीगोद (कोटा), अंता लिप्ट माईनर, अंता लिप्ट स्कीम, पचेल, कचारी, सोरखण्ड, गणेशगंज (बारां)
- इंदिरा लिप्ट नहर: कसोड़ गाँव (करौली) — राजस्थान की सबसे ऊँची (125 मीटर)
- पीपलदा लिप्ट स्कीम (सवाई माधोपुर) — प्रस्तावित
- कालातीर परियोजना: धौलपुर
(2) बनास नदी
- अन्य नाम: वशिष्टी, वन की आशा, वर्णाशा
- उद्गम: वेरों का मठ (खमनीर पहाड़ियाँ, राजसमंद)
- संगम: रामेश्वर घाट (सवाई माधोपुर) — चम्बल में
- कुल लम्बाई: 512 किमी — पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे बड़ी नदी
- दूसरे सर्वाधिक जल ग्रहण वाली नदी (47060 वर्ग किमी)
- प्रवाहित जिले: राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर
- बनास बेसिन: 17 जिलों में (सर्वाधिक: भीलवाड़ा > टोंक > जयपुर)
- टोंक में सर्पाकार बहती है, टोंक को 2 भागों में बाँटती है
- सर्वाधिक त्रिवेणी संगम: 1. रामेश्वर घाट (बनास, चम्बल, सीप), 2. राजमहल (बनास, डाई, खारी), 3. बीगोद (बनास, बेडच, मेनाल)
बनास की बाँध परियोजनाएँ
| बाँध | स्थिति |
| बीसलपुर बाँध | देवली (टोंक) — राजस्थान का सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध, सबसे बड़ी पेयजल परियोजना |
| ईसरदा बाँध | सवाई माधोपुर (ERCP का हिस्सा) |
| बाघेरी का नाका बाँध | राजसमंद |
| मातृकुण्डिया बाँध | चित्तौड़गढ़ |
| नंदसमंद बाँध | राजसमंद |
बनास की सहायक नदियाँ
- बायीं ओर से: कोठारी, खारी, डाई, मांशी, बांडी, मोरेल
- दायीं ओर से: बेडच (सबसे लम्बी), मेनाल
- बनास की सबसे लम्बी सहायक: खारी नदी
| नदी | उद्गम | संगम | विशेष |
| कोठारी | दिवेर की पहाड़ियाँ (राजसमंद) | नन्दराय (भीलवाड़ा) | मेजा बाँध, बागोर सभ्यता |
| खारी | बीजराल पहाड़ियाँ (राजसमंद) | राजमहल (टोंक) | सबसे लम्बी सहायक, नारायण सागर बाँध (ब्यावर की जीवन रेखा) |
| मानसी | करणगढ़ (मांडलगढ़, भीलवाड़ा) | फूलिया गाँव (भीलवाड़ा) — खारी में | अडवान बाँध |
| मांशी | सिलोरा पहाड़ियाँ (किशनगढ़, अजमेर) | देवधाम (टोंक) | सहोदरा नदी |
| डाई | किशनगढ़ पहाड़ियाँ (अजमेर) | राजमहल (टोंक) — त्रिवेणी | — |
| सहोदरा | अराय गाँव की पहाड़ी (अजमेर) | डुहिया गाँव (टोंक) — मांशी में | टोरडीसागर बाँध |
| बांडी | सामोद व आमलोद की पहाड़ियाँ (जयपुर) | देवधाम (टोंक) | 3 बांडी नदियाँ हैं |
| मोरेल | चेनपुरा की पहाड़ियाँ (जयपुर) | खंडार (सवाई माधोपुर) | मोरेल बाँध (दौसा), ढूंढ व कालीसिल नदी |
| मेनाल | मेनाल (भीलवाड़ा) | बीगोद (भीलवाड़ा) | — |
| ढील | बावली (टोंक) | सवाई माधोपुर — बनास में | — |
(3) बेडच/आयड़ नदी
- उद्गम: गोगुन्दा पहाड़ी (उदयपुर)
- संगम: बीगोद (भीलवाड़ा) — बनास में
- आयड़ के किनारे सभ्यता: आहड़ (उदयपुर)
- बेडच के किनारे सभ्यता: बालाथल (उदयपुर), नगरी (चित्तौड़गढ़)
- आयड़ नदी उदयसागर झील में गिरने के बाद बेडच कहलाती है
- बनास में दायीं ओर से मिलने वाली सबसे लम्बी सहायक
- प्रवाह: उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा
- सहायक: गम्भीरी नदी, औराई नदी
- मदार बाँध (आयड़ पर, उदयपुर), घोसून्दा बाँध (बेडच पर, चित्तौड़गढ़)
(4) गम्भीरी नदी
- उद्गम: जावद गाँव की पहाड़ियाँ (रतलाम, MP)
- संगम: चित्तौड़गढ़ — बेडच में
- निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) से राजस्थान में प्रवेश
- केवल चित्तौड़गढ़ में बहती है
- गम्भीरी + बेडच संगम पर चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित
- गम्भीरी बाँध (निम्बाहेड़ा)
- अन्य नाम: उटैगन (UP में), पार्वती (धौलपुर में)
- उद्गम: नादौती की पहाड़ियाँ (स्पोटरा, करौली)
- संगम: रीठई गाँव (आगरा, UP) — यमुना में
- प्रवाह: करौली, भरतपुर — कुल लम्बाई: 288 किमी
- भरतपुर-UP एवं धौलपुर-UP की सीमा
- श्री महावीर जी मंदिर (करौली) इसके किनारे
- सहायक: सेसा, पार्वती, खेर, जगर, भद्रावती, भैसावट, माची, अटा, बरखेड़ा
- पाँचना बाँध (करौली): गम्भीर की 5 सहायक नदियों पर, अमेरिका के सहयोग से, राजस्थान का मिट्टी का सबसे बड़ा बाँध
- अजान बाँध (भरतपुर): गंभीर व बाणगंगा के संगम पर
(5) पावती नदी
- उद्गम: छावर पहाड़ियाँ (करौली)
- संगम: खरगपुर (धौलपुर) — गम्भीर में
- पावती बाँध (अगाई गाँव, धौलपुर)
- राजस्थान में 2 पावती नदियाँ: 1. गम्भीर की सहायक (करौली, धौलपुर), 2. चम्बल की सहायक (कोटा, बारां)
(6) जगर नदी
- उद्गम: डांग पहाड़ियाँ (करौली)
- संगम: गम्भीर नदी में
- जगर बाँध (करौली)
अलवर की प्रमुख नदियाँ
| नदी | उद्गम | संगम | विशेष |
| सरसा | थानागाजी (अलवर) | बाणगंगा में | सावा नदी, सहायक: सरवरी, भगाणी, तिलदह |
| भगाणी | कांकनबाड़ी किले के पास | — | मानसरोवर बाँध (अलवर) |
| अरवरी | सकरा बाँध (थानागाजी, अलवर) | सरसा नदी में | तरुण भारत संघ द्वारा पुनर्जीवित |
अंतः प्रवाह अपवाह तंत्र
(1) घग्घर नदी
- कुल लम्बाई: 465 किमी (राजस्थान में 100 किमी) — आन्तरिक प्रवाह की सबसे लम्बी
- उपनाम: प्राचीन सरस्वती, दृष्ट्वती, मृत नदी, सोतर, वाहिन्द, नट नदी, राजस्थान का शोक
- उद्गम: कालका पहाड़ी (शिवालिक श्रेणी, शिमला, हिमाचल प्रदेश)
- प्रवाह क्षेत्र: हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पाकिस्तान
- राजस्थान में: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़
- तलवाड़ा गाँव (टिब्बी, हनुमानगढ़) से राजस्थान में प्रवेश
- राजस्थान की एकमात्र नदी जो उत्तर दिशा से प्रवेश करती है
- अपवाह क्षेत्र: हनुमानगढ़ — नाली/पाट, पाकिस्तान — हकरा
- प्राचीन सभ्यताएँ: कालीबंगा, पीलबंगा, रंगमहल (हनुमानगढ़)
- तलवाड़ा झील: हनुमानगढ़ — राजस्थान की सबसे नीची झील (7 किमी)
- हिमालय से राजस्थान में आने वाली एकमात्र नदी
(2) कांतली नदी
- उद्गम: खण्डेला पहाड़ी (सीकर)
- प्रवाह: सीकर, झुंझुनूं — लम्बाई: 100 किमी
- पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली आंतरिक प्रवाह की सबसे लम्बी
- झुंझुनूं को 2 भागों में बाँटती है
- सहायक: साप, मावत
- सभ्यताएँ: गणेश्वर (ताम्रयुगीन, नीम का थाना, सीकर), सुनारी (लौहयुगीन, खेतड़ी, झुंझुनूं)
- अपवाह: तोरावाटी
(3) काकनी नदी
- अन्य नाम: काकनेय, मसूरदी
- उद्गम: कोटरी गाँव की पहाड़ी (जैसलमेर)
- मीठा खाड़ी (जैसलमेर) में विलुप्त
- राजस्थान में सर्वाधिक मार्ग बदलने वाली नदी
- आंतरिक प्रवाह की सबसे छोटी नदी (17 किमी)
- बुझ झील (रूपसी गाँव, जैसलमेर) — मीठे पानी की झील
(4) साबी/साहिबी नदी
- उद्गम: सेवर पहाड़ी (शाहपुरा, जयपुर)
- पटौदी (हरियाणा) में विलुप्त
- अपवाह: जयपुर, कोटपूतली-बहरोड, खैरथल-तिजारा
- सहायक: सोटा नदी
- जोधपुरा सभ्यता (कोटपूतली-बहरोड) इसके किनारे
- अकबर ने पुल बनाने का असफल प्रयास किया
(5) रूपारेल नदी
- उद्गम: उदयनाथ पहाड़ी (थानागाजी, अलवर)
- कुशलपुर गाँव (भरतपुर) में विलुप्त
- उपनाम: लसवाड़ी नदी, वराह नदी
- सीकरी बाँध (भरतपुर) — मोती झील को जलापूर्ति
- मोती झील: भरतपुर की जीवनरेखा
- सुजानगंगा नहर मोती झील से निकलती है — लोहागढ़ दुर्ग की खाई भरती है
(6) रूपनगढ़ नदी
- उद्गम: किशनगढ़ (अजमेर)
- संगम: सांभर झील (दक्षिण दिशा से)
- प्रवाह: अजमेर, जयपुर
- निम्बार्क पीठ (सलेमाबाद, अजमेर) इसके किनारे
(7) बाणगंगा
- उपनाम: अर्जुन की गंगा, ताला नदी, रुण्डित नदी
- उद्गम: बैराठ की पहाड़ी (कोटपूतली-बहरोड)
- विलीन: भरतपुर के मैदान में
- प्राचीन सभ्यता: बैराठ (कोटपूतली-बहरोड)
- सहायक: गुमटीनाला, पालोसन, सूरी
- प्रवाह: कोटपूतली-बहरोड, जयपुर, दौसा, भरतपुर
- नहरें: उचेनी, पथेनी
- लालपुर बाँध (भरतपुर), जमुवारामगढ़ (जयपुर) — ढूंढाड़ का पुष्कर
- बाणगंगा बेसिन: 8 जिले (सर्वाधिक: भरतपुर > अलवर > दौसा)
(8) कुकुन्द नदी
- उद्गम: मनोहरपुरा की पहाड़ी (जयपुर)
- संगम: सांभर झील (उत्तर दिशा में)
- प्रवाह: जयपुर, डीडवाना-कुचामन, पुनः जयपुर
- 1897 में महाराजा रामसिंह (भरतपुर) ने बंध बारेठा बाँध बनवाया
- बंध बारेठा अभयारण्य इसके किनारे
(9) मेथा नदी
- उद्गम: मनोहरपुरा की पहाड़ी (जयपुर)
- संगम: सांभर झील (उत्तर दिशा में)
- प्रवाह: जयपुर, डीडवाना-कुचामन, पुनः जयपुर
- प्रसिद्ध जैन तीर्थ लूणवां (कुचामन-डीडवाना) मेथा नदी के किनारे
(10) द्रव्यवती नदी
- उद्गम: आधुनी कुण्ड (नाहरगढ़ पहाड़ी, जयपुर)
- संगम: कानोता बाँध (जयपुर)
- द्रव्यवती/अमानीशाह नदी परियोजना: गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के तर्ज पर रिवरफ्रन्ट
- प्रोजेक्ट कंपनी: टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड
- NGT ने प्रदूषण के कारण 100 करोड़ का जुमाना लगाया
राजस्थान की अन्य नदियाँ
- रोहिनी नदी: जैसलमेर
- नीमड़ा नदी: बाड़मेर (2006 कवास बाढ़)
- बुझाड़ा व सीसारमा नदी: पिछोला झील में गिरती हैं
नदियों के किनारे सभ्यताएँ
| सभ्यता | जिला | नदी |
| तिलवाड़ा | बालोतरा | लूनी |
| गणेश्वर | सीकर | कांतली |
| सुनारी | झुंझुनूं | कांतली |
| बागोर | भीलवाड़ा | कोठारी |
| आहड़ | उदयपुर | आयड़ |
| बालाथल | उदयपुर | बेडच |
| नगरी | चित्तौड़गढ़ | बेडच |
| कालीबंगा | हनुमानगढ़ | घग्घर |
| रंगमहल | हनुमानगढ़ | घग्घर |
| बैराठ | कोटपूतली-बहरोड | बाणगंगा |
| जोधपुरा | कोटपूतली-बहरोड | साबी |
| गिलुण्ड | राजसमंद | बनास |
| गरदड़ा | बूँदी | छाजा |
नदियों के किनारे स्थित दुर्ग
| दुर्ग | जिला | नदी |
| भैंसरोड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ | चम्बल व बामनी |
| कोटा दुर्ग | कोटा | चम्बल |
| शेरगढ़ दुर्ग | धौलपुर | चम्बल |
| चित्तौड़गढ़ दुर्ग | चित्तौड़गढ़ | बेडच व गम्भीरी |
| मनोहरथाना दुर्ग | झालावाड़ | परवन व कालीखाड़ |
| शेरगढ़ दुर्ग | बारां | परवन |
| भटनेर दुर्ग | हनुमानगढ़ | घग्घर |
| गागरोण दुर्ग | झालावाड़ | कालीसिंध व आहु |
अभयारण्यों से गुजरने वाली नदियाँ
| अभयारण्य | स्थान | नदी |
| राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल | जवाहर सागर से मुरादगंज | चम्बल |
| जवाहर सागर | कोटा | चम्बल |
| शेरगढ़ | बारां | परवन |
| बस्सी | चित्तौड़गढ़ | औराई व बामनी का उद्गम |
| भैंसरोड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ | चम्बल व बामनी |
| केवलादेव | भरतपुर | बाणगंगा |
| दरा/मुकुन्दरा हिल्स | कोटा | आहु व कालीसिंध |
अध्याय 8: राजस्थान की झीलें
झीलों के प्रकार
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
| बालसन झील | पहाड़ियों से घिरा अभिकेन्द्रीय अपवाह वाला विस्तृत समतल गर्त | सांभर झील |
| प्लाया झीलें | मरूस्थलीय क्षेत्रों में चौरस सतह और अनप्रवाहित झोणी वाली खारे पानी की छोटी झीलें | डीडवाना झील |
| विवर्तनिका झील | पृथ्वी में होने वाली आंतरिक हलचलों के कारण | नक्की झील |
| काल्डेरा/कोल्डिलेरा | ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा के प्रवाह से | पुष्कर झील |
खारे पानी की झीलें
कारण: (1) टेथिस सागर का अवशेष, (2) दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ कच्छ की खाड़ी से सोडियम क्लोराइड के कण लाती हैं, (3) माइका शिष्ट चट्टानों से केशकर्षण पद्धति से नमक ऊपर आना।
ये झीलें मुख्यतः उत्तर पश्चिमी मरूस्थलीय भाग में पायी जाती हैं। खारे पानी की सर्वाधिक झीलें डीडवाना-कुचामन में।
सांभर झील
- अन्य नाम: देवयानी झील, तीथर की नानी, कुष्ठ निवारक झील
- विस्तार: जयपुर, डीडवाना-कुचामन, अजमेर — अपवाह क्षेत्र: 500 वर्ग किमी
- भारत की खारे पानी की सबसे प्राचीन एवं तीसरी सबसे बड़ी झील (प्रथम: चिल्का, द्वितीय: पुलिकट)
- भारत की अंतः प्रवाह की सबसे बड़ी झील
- राजस्थान की खारे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील
- क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी झील (~500 वर्ग किमी)
- आयताकार, लम्बाई: 32 किमी, चौड़ाई: 3-15 किमी
- सर्वाधिक नमक लाने वाली नदी: मेथा नदी
- नमक उत्पादन: भारत के कुल उत्पादन का 8.7%
- नालीसर मस्जिद, शाकम्भरी माता मंदिर
- बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) — वासुदेव चौहान ने निर्माण करवाया
- अकबर का विवाह (6 फरवरी 1562, हरकाबाई/मर्यम उज्जमानी)
- 1709 से 1949 तक मारवाड़ व जयपुर के मध्य 50-50% बंटी
- 1869 में अंग्रेजों को लीज पर
- सांभर साल्ट लिमिटेड (30 सितम्बर 1964) — केन्द्र 60% : राज्य 40%
- साल्ट म्यूजियम (1870) — राजस्थान का एकमात्र
- रामसर साइट (23 मार्च 1990)
- राजस्थान की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी (नवम्बर 2019) — एवियन बोटुलिज्म
डीडवाना झील
- डीडवाना-कुचामन जिले में, ~4 किमी लम्बाई
- नमक खाने योग्य नहीं (सोडियम सल्फेट), स्थानीय लोग 'खाल्डा' कहते हैं
- ब्राइट नमक: लवणीय पानी की क्यारियाँ बनाकर सुखाकर प्राप्त
पचपदरा झील
- बालोतरा में, ~25 वर्ग किमी — राजस्थान की खारे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झील
- पंचा नामक भील ने (400 वर्ष पूर्व) दलदल सुखाकर बनाया
- सर्वोच्च कोटि एवं सबसे खारा नमक — 98% तक NaCl
- कोशिया/कोशलू: कुएँ बनाकर नमक उत्पादन
- राजस्थान स्टेट साल्ट वर्क्स (1960)
- खारवाल जाति: मोरली झाड़ी की टहनी से वायु प्रवाह पद्धति — स्पेटिक नमक (रेस्तां)
राजस्थान की अन्य खारे पानी की झीलें
| झील | जिला | विशेष |
| लूणकरणसर | बीकानेर | उत्तरी राजस्थान की एकमात्र खारे पानी की झील |
| तालछापर | चूरू | काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध |
| रैवासा | सीकर | कर्नल टॉड ने उल्लेख किया |
| कावोद | जैसलमेर | — |
| बाप | फलौदी | रेग्ता (वायु प्रवाह), क्यार (क्यारी बनाकर) |
| काछोर | सीकर | — |
| पोकरण | जैसलमेर | — |
| फलौदी | फलौदी | — |
| बाड़ासर | बाड़मेर | — |
| नावां | डीडवाना-कुचामन | — |
| डेगाना | नागौर | — |
मीठे पानी की झीलें
जयसमंद झील/ढेबर झील
- स्थिति: सलूम्बर — ~55 वर्ग किमी
- राजस्थान की मीठे पानी की झीलों में मानव निर्मित सबसे बड़ी
- निर्माण: महाराजा जयसिंह (1685-1691 ई.)
- जलापूर्ति: गोमती नदी (अन्य: झांवरी, बागर)
- 7 टापू — सबसे बड़ा: बाबा का भाखड़ा/मगरा, सबसे छोटा: प्यारी
- आइसलैंड रिसोर्ट: टापू पर होटल
- श्यामपुरा व भाट नहरें: उदयपुर एवं सलूम्बर में सिंचाई
- औदियाँ: 6 अवलोकन सम्भ
- लसाड़िया पठार: पूर्व में कटा-फटा पठार
- नमदेश्वर शिवालय, चित्रित हवामहल, रूठी रानी का महल, फतेह सिंह महल, राजकुमार के महल
- राजस्थान के 26 अभयारण्यों में शामिल — 'जलचरों की बस्ती'
उदयपुर जिले की झीलें (झीलों की नगरी)
प्रमुख 5 झीलें: पिछोला, फतेहसागर, उदयसागर, स्वरूपसागर, जियान सागर/बड़ी झील
| झील | निर्माण | विशेष |
| पिछोला | 1382-1421, राणा लाखा (छीतर/पिछू बंजारा द्वारा) | सिसारमा व बुझाड़ा नदियों से जलापूर्ति, प्रथम सौर नाव एवं इलेक्ट्रिक नाव, जगमंदिर, जगनिवास (होटल ताज लेक पैलेस), बागोर की हवेली, नटनी का चबूतरा |
| फतेहसागर | 1688, महाराणा जयसिंह | देवाली तालाब/कनॉट बाँध, ड्यूक ऑफ कनॉट (1878), सहेलियों की बाड़ी, हवाला शिल्पग्राम, मोती महल, नीमच माता मंदिर, सौर वैधशाला (1976, डॉ. अरविंद भटनागर), सज्जनगढ़ किला, नेहरू आईलैंड उद्यान, मदार बाँध से जलापूर्ति |
| उदयसागर | 1559-1565, महाराणा उदयसिंह | आयड़ नदी को रोककर, अकबर के दूत मानसिंह की भेंट |
| स्वरूपसागर | 1857, महाराजा स्वरूप सिंह | पिछोला व फतेहसागर को जोड़ती है, टेलीस्कोप (बेल्लियम सहयोग) |
| जियान सागर/बड़ी झील | महाराणा राजसिंह (माता ज्ञान कंवर की याद में) | राजस्थान का प्रथम मत्स्य अभयारण्य, महासीर मछली, बाहुबली हिल्स |
राजसमंद झील
- एकमात्र झील जिसके नाम पर जिले का नामकरण
- निर्माण: 1662-1676, महाराणा राजसिंह (अकाल राहत कार्यक्रम)
- राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील (प्रथम: जयसमंद)
- राज्य सरकार द्वारा पवित्र झील घोषित
- आधारशिला: घेवर माता (दयालशाह की पत्नी)
- जलापूर्ति: गोमती, ताल, केलवा नदियाँ
- घेवर माता मंदिर, दयालशाह का महल/किला, नौ चौकी पाल (संगमरमर), महाराणा राजसिंह पेनोरमा
- राजसिंह प्रशस्ति: काले संगमरमर पर संस्कृत का सबसे बड़ा शिलालेख (रचयिता: रणछोड़ भट्ट तैलंग)
- द्वारिकाधीश मंदिर
गैब सागर झील — डूंगरपुर
- उपनाम: एडवर्डसागर
- निर्माण: महारावल गोपीनाथ
- राजराजेश्वर शिवालय, काली बाई स्मारक (रास्तापाल हत्याकांड), बादल महल (महारावल पुंजराज), पुंजेला तालाब
किशोर सागर झील — कोटा
- निर्माण: 1346, देहरा देह (बूँदी राजकुमार)
- जगमंदिर महल मध्य में (राजस्थान में 2 जगमंदिर: पिछोला व किशोरसागर)
बूँदी जिले की झीलें
| झील | विवरण |
| दुगारी/कनक सागर | दुगारी गाँव में |
| नवल सागर/नवलखा | गढ़ पैलेस के पास |
| जैतसागर | तारागढ़ किले के पास, जैता मीणा द्वारा निर्मित, सुख महल, रूडयार्ड किपलिंग |
| फूल सागर | राव राजा भोज की पत्नी फूल लता द्वारा |
रामगढ़ झील — बारां
- उल्का पिंड से निर्मित, यूरेनियम और सारस क्रेन के लिए प्रसिद्ध
- GSI द्वारा 12 नवम्बर 2016 को भू-पर्यटन स्थल घोषित
- राजस्थान में 12 राष्ट्रीय भू समारक
भरतपुर जिले की झीलें
| झील | विवरण |
| मोती झील | महाराजा सूरजमल, भरतपुर की जीवन रेखा, रूपारेल नदी, सुजानगंगा नहर, कारागिल उद्यान पार्क |
| झील का बारां | बयाना (भरतपुर) |
| सुजानगंगा झील | वास्तव में नहर, महाराजा सूरजमल, लोहागढ़ दुर्ग की खाई |
धौलपुर जिले की झीलें
- तालाब शाही झील: सलेह खाँ (जहाँगीर का मनसबदार), 1617 ई.
- रामसागर झील: रामसागर अभयारण्य
सिलीसेढ़ झील — अलवर
- राजस्थान का नन्दनकानन
- महाराजा विनयसिंह (पत्नी शीला की याद में), 1845 में 6 मंजिला शाही महल, RTDC होटल लेक पैलेस
- भर्तृहरि का मंदिर व गुफा (नाथपंथियों का तीर्थ)
मानसरोवर झील — झालावाड़
- रातेड़ी (झालावाड़), काड़ला झील भी कहा जाता है
जयपुर जिले की झीलें
| झील | निर्माण | विशेष |
| मानसागर | मानसिंह प्रथम (1610), गर्भावती नदी पर | जलमहल (सवाई जयसिंह), नाहरगढ़ पहाड़ी |
| मावठा | प्राकृतिक | आमेर किले के पास |
शेखावटी की झीलें
- पन्नालालशाह का तालाब: खेतड़ी-झुंझुनूं (स्वामी विवेकानन्द)
- पीथमपूरी झील: सीकर
अजमेर जिले की झीलें
पुष्कर, आनासागर, बीसलसागर, फॉयसागर
| झील | विवरण |
| पुष्कर | काल्डेरा झील, हिन्दुओं का पाँचवा तीर्थ, तीर्थों का मामा, 52 घाट, अर्द्धचन्द्राकार, राजस्थान की मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील, सबसे प्राचीन एवं सबसे प्रदूषित, नाहर राव परिहार, जनाना घाट/क्वीन मेरी घाट/गांधी घाट (1911), पुष्कर मेला (कार्तिक पूर्णिमा, रंगीला मेला), ब्रह्मा मंदिर, वराह मंदिर, सावित्री मंदिर (रोप-वे), गायत्री मंदिर, जहाँगीर के महल |
| बीसलसर | बीसलदेव (1152-1162), दो टापुओं पर राजप्रसाद, जहाँगीर के महल (वर्तमान चर्च) |
| आनासागर | अणोराज/आनाजी (1135-1137), चन्द्रा व बांडी नदी, दौलतबाग (सुभाष उद्यान), गुलाब इत्र (नूरजहाँ की माँ अस्मत बेगम), बारहदरी (शाहजहाँ), चश्मा-ए-नूर |
| फॉयसागर/वरुण सागर | 1891-92, इंजिनियर फॉय, बांडी नदी, राजस्थान की दूसरी अकाल राहत में बनी |
नक्की झील
- माउंट आबू (सिरोही) — राजस्थान की सबसे ऊँची झील (1200 मी.)
- राजस्थान की सबसे गहरी (35 मीटर) एवं एकमात्र जमने वाली झील
- विवर्तनिका झील का उदाहरण
- गरासिया जनजाति की पवित्र झील
- एकमात्र हिल स्टेशन वाली झील, सनसेट पॉइंट प्रसिद्ध
- चट्टानें: नन्दी रॉक, टॉड रॉक, नन रॉक
- रामकुण्ड, रघुनाथ मंदिर, रामझरोखा, हाथी गुफा, चम्पा गुफा, विवेकानन्द गुफा
जोधपुर जिले की झीलें
| झील | विवरण |
| बालसमंद | 1159 ई., प्रतिहार शासक बालक राज, मंडोर, पेयजल आपूर्ति, आठ-खम्भा महल (महाराजा सुरसिंह), जनाना बाग, गुलाब सागर का पानी |
| कायलाना/प्रताप सागर/तख्त सागर | प्राकृतिक, 1872 ई. सर प्रताप, आधुनिक जोधपुर का निर्माता, देश का प्रथम वनस्पतिक उद्यान माचिया जैविक उद्यान, राजीव गांधी लिप्ट कैनाल से इंदिरा गांधी नहर का पानी |
| उम्मेद सागर | 1930-1933, महाराजा उम्मेद सिंह |
| गुलाब सागर | 1788, विजयसिंह की पासवान गुलाबराय |
जैसलमेर जिले की झीलें
- अमरसागर: महारावल अमरसिंह (1688), रूपसी गाँव
- बुझ झील: काकनी/मसूरदी का पानी, राज्य का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र
- घड़सीसर: महारावल घड़सिंह, जैसलमेर दुर्ग के पूर्वी प्रवेश द्वार के पास, टीलों की पोल, गजमंदिर/गजरूपेश्वर शिवालय, जैसलमेर लोक संस्कृति संग्रहालय
- रामदेवरा झील/रामसरोवर
बीकानेर जिले की झीलें
| झील | विवरण |
| कोलायत | शुष्क मरूस्थल का सुन्दर उद्यान, कपिल मुनि का आश्रम, 52 घाट, कार्तिक पूर्णिमा मेला (जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा), चारण जाति दर्शन नहीं करती (करणी माता का पुत्र लखन डूबा था) |
| गजनेर | 1920, महाराजा गंगासिंह (गंगा सरोवर), पानी का शुद्ध दर्पण, गजनेर महल |
महत्वपूर्ण तथ्य
| शब्द | अर्थ |
| जयपुर की जीवन रेखा | अमानीशाह नाला (द्रव्यवती नदी) |
| राजसमंद की जीवन रेखा | नंदसमंद झील |
| भरतपुर की जीवन रेखा | मोती झील |
| ब्यावर की जीवन रेखा | नारायण सागर बाँध |
| राजस्थान की जीवन रेखा | इंदिरा गाँधी नहर |
| बीकानेर की जीवन रेखा | लूणकरणसर लिप्ट नहर |
| जोधपुर की जीवन रेखा | राजीव गाँधी लिप्ट नहर |
| गंगानगर की जीवन रेखा | गंगनहर |
| मारवाड़ की जीवन रेखा | लूणी नहर |
अध्याय 9: राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ
राजस्थान सिंचाई विभाग: 14 दिसम्बर, 1949
प्रथम सिंचाई परियोजना: गंगनहर परियोजना
सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना: IGNP
सर्वाधिक सिंचित जिला: गंगानगर
सर्वाधिक सिंचाई परियोजना वाला जिला: झालावाड़
सबसे बड़ी पेयजल परियोजना: बीसलपुर बाँध परियोजना
सिंचाई के प्रमुख साधन
| साधन | प्रतिशत | सर्वाधिक |
| कुएँ एवं नलकूप | 69.39% | जयपुर |
| नहरें | ~28.39% | श्रीगंगानगर |
| तालाब | ~0.33% | भीलवाड़ा |
व्यास बहुउद्देशीय परियोजना
- व्यास नदी पर — पंजाब, हरियाणा, राजस्थान की संयुक्त
- राजस्थान को कुल विद्युत: 428 MW (198 देहर + 230 पोंग)
- पंडोह बांध (मंडी, हिमाचल): 990 MW, राजस्थान 20% = 198 MW
- पोंग बांध (कांगड़ा, हिमाचल): 390 MW, राजस्थान 59% = 230 MW
- राजीव गांधी लौंगेवाला समझौता (1985)
- ईराडी आयोग (1986): राजस्थान का हिस्सा 8.6 मिलियन एकड़ फीट
भाखड़ा-नांगल परियोजना
- सतलज नदी पर — भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय
- राजस्थान की हिस्सेदारी: 15.2%
- सर्वाधिक सिंचाई: हनुमानगढ़
- भाखड़ा बांध (1962): बिलासपुर (HP), भारत का सबसे ऊँचा गुरुत्वीय बाँध (226 मी.)
- नांगल बांध (1952): रोपड़ (पंजाब), बिस्त दोआब नहर, भाखड़ा नहर
- विद्युत: 1532.73 MW कुल, राजस्थान 233 MW
- सिंचाई: 14.6 लाख हेक्टेयर, राजस्थान 2.3 लाख हेक्टेयर
राजीव गांधी सिद्धमुख नहर परियोजना
- शिलान्यास: 1989, राजीव गांधी
- आर्थिक सहयोग: यूरोपियन आर्थिक समुदाय, नाबार्ड
- नदियाँ: रावी व व्यास का अतिरिक्त जल
- लाभान्वित: हनुमानगढ़, नोहर, सिद्धमुख, तारानगर, साहवा (चूरू)
चम्बल नदी घाटी परियोजना
- राजस्थान + मध्यप्रदेश (50:50)
- विद्युत: 386 MW (राजस्थान 193 MW, MP 193 MW)
- सिंचित भूमि: 4.50 लाख हेक्टेयर
- 1953 में शुरू, 3 चरण, 4 बाँध
माही बहुउद्देशीय परियोजना
- राजस्थान (45%) + गुजरात (55%)
- लाभान्वित: बाँसवाड़ा, डूंगरपुर
- माही बजाज सागर बाँध (बोरखेड़ा, बाँसवाड़ा): राजस्थान का सबसे लंबा (3109 मी.)
- 2 विद्युत गृह: लीलवाना (50 MW), हेगपुरा (90 MW) = 140 MW
- राजस्थान 100% विद्युत प्राप्त करता है
- कडाना बाँध (रामपुर, गुजरात) — संपूर्ण लाभ गुजरात
- कागदी पिकअप बाँध (बाँसवाड़ा): बायीं नहर (आनन्दपूर भूकिया, 26 किमी), दायीं नहर (भीखा भाई-सागवाड़ा, 125 किमी)
गंगनहर
- नदी: सतलज
- शुरुआत: हुसैनीवाला (पंजाब)
- 1920 में समझौता (बीकानेर, पंजाब, बहावलपुर)
- 1921 में नींव, 1927 में उद्घाटन (लॉर्ड इर्विन)
- निर्माणकर्ता: महाराजा गंगा सिंह — राजस्थान का भागीरथ
- लाभान्वित: गंगानगर
- कुल लम्बाई: 129 किमी (112 पंजाब, 17 राजस्थान)
- 4 लिप्ट नहरें: करणी, लालगढ़, समीजा, लक्ष्मीनारायण
- राजस्थान की सबसे पुरानी नहर, विश्व की प्रथम पक्की नहर (तल सीमेंटेड)
- राजस्थान की प्रथम बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना
गुड़गाँव नहर
- वर्तमान नाम: पश्चिमी यमुना लिंक नहर
- उद्गम: ओखला हेड (दिल्ली), यमुना नदी
- राजस्थान व हरियाणा
- राज्य में कुल लम्बाई: 53 किमी
- भरतपुर (वर्तमान डीग) में सिंचाई
भरतपुर नहर
- उद्गम: आगरा नहर (यमुना)
- राजस्थान व उत्तरप्रदेश
- लाभान्वित: भरतपुर (वर्तमान डीग)
- कुल लम्बाई: 28 किमी (राजस्थान 12 किमी, UP 16 किमी)
रामजल सेतु लिंक परियोजना (PKC-ERCP)
📌 नवीनतम अपडेट: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 22 जनवरी 2025 को पार्वती-कालीसिंध-चम्बल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP) का नाम परिवर्तित कर 'रामजल सेतु लिंक परियोजना' कर दिया है। 'रा' = राजस्थान, 'म' = मध्यप्रदेश।
- 17 दिसम्बर 2024 को दादिया गांव, जयपुर में राज्यस्तरीय समारोह (मुख्य अतिथि: PM नरेन्द्र मोदी)
- लाभान्वित जिले: राजस्थान के 17 + MP के 13
- कुल सिंचाई क्षेत्र: 4.03 लाख हेक्टेयर (राजस्थान 2.51 + MP 1.52)
- MOU के तहत पूर्व: 5.80 लाख हेक्टेयर (राजस्थान 2.80 + MP 3.00)
- ~25 लाख किसान परिवारों को लाभ, 17 जिलों की ~40% आबादी (3.25 करोड़) को पेयजल
- कुल लम्बाई: 1800 किमी (राजस्थान 1200 + MP 600)
- कुल अनुमानित लागत: 70 हजार करोड़
- वित्तीय: केन्द्र 90%, राज्य (MP + RJ) 5-5%
- जल आवंटन: राजस्थान 4103 MCM, MP ~3000 MCM
- राजस्थान में 158 बांध भरेंगे
- 28 जनवरी 2024: त्रिपक्षीय MOU
- 5 बैराज + 2 बांध: रामगढ़ बैराज (कूल नदी, किशनगंज, बारां), महलपुर बैराज (पार्वती, मांगरोल, बारां), नवनेरा बैराज (कालीसिंध, दीगोद, कोटा), मेज बैराज (मेज नदी, इन्द्रगढ़, बूँदी), नीमोद राठौड़ बैराज (बनास, चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर), डूंगरी बांध (बनास, सवाई माधोपुर), ईसरदा बांध (बनास, सवाई माधोपुर)
- नवनेरा बैराज का लोकार्पण: 17 दिसम्बर 2024, PM नरेन्द्र मोदी, 1069 करोड़, सर्वाधिक भराव क्षमता
इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP)
- पुराना नाम: राजस्थान नहर (1984 में IGNP)
- उपनाम: पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा, राजस्थान की मरूगंगा (गोविन्द वल्लभ पंत)
- शुरुआत: हिरके बैराज (फिरोजपुर, पंजाब) — सतलज-व्यास नदी संगम
- राजस्थान की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना
- आर्थिक सहयोग: विश्व बैंक
- सुझाव: 1948, इंजीनियर कैंवरसेन (बीकानेर)
- नींव: 31 मार्च 1958 — गोविन्द वल्लभ पंत
- प्रथम जल प्रवाह: 1961, नौरंगदेसर वितरिका — डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
- IGNP बोर्ड: 1958, जयपुर
- जीरो प्वाइंट: मोहनगढ़ (जैसलमेर)
- पूर्ण होने पर सिंचित क्षेत्र: 19.65 लाख हेक्टेयर
- वर्तमान सिंचित क्षेत्र: 16.17 लाख हेक्टेयर
- कुल लम्बाई: 649 किमी (फीडर 204 + मुख्य नहर 445)
- राजस्थान में कुल लम्बाई: 445 + 35 = 480 किमी
- प्रस्तावित नहर सहित कुल: 204+445+165 = 814 किमी
- 2 चरण: प्रथम (393 किमी, हिरके से पूगल), द्वितीय (256 किमी, पूगल से मोहनगढ़)
IGNP की 9 शाखाएँ
| क्र. | शाखा | लाभान्वित जिले |
| 1 | रावतसर (बायीं) | हनुमानगढ़ |
| 2 | सूरतगढ़ | गंगानगर |
| 3 | अनूपगढ़ | गंगानगर, बीकानेर |
| 4 | पूगल | बीकानेर |
| 5 | दातौर | बीकानेर |
| 6 | बीरसलपुर | बीकानेर |
| 7 | चारणवाला | बीकानेर, फलौदी, जैसलमेर |
| 8 | शहीद बीरबल | जैसलमेर |
| 9 | सागरमल गोपा | जैसलमेर |
2 उपशाखाएँ: लीलवा, दीघा
IGNP की 7 लिप्ट नहरें
| क्र. | नाम | लाभान्वित |
| 1 | चौधरी कुम्भाराम (गंधेली-नोहर-साहवा) | हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं — सर्वाधिक जिले |
| 2 | कैवरसेन (लूणकरणसर) | बीकानेर, गंगानगर — बीकानेर की जीवनरेखा |
| 3 | पन्नालाल बारूपाल (गजनेर) | बीकानेर, नागौर |
| 4 | तेजाजी (बाँगड़सर) | बीकानेर — सबसे छोटी |
| 5 | डॉ. करणी सिंह (कोलायत) | बीकानेर, फलौदी |
| 6 | गुरु जम्भेश्वर (फलौदी) | बीकानेर, फलौदी |
| 7 | जयनारायण व्यास (पोकरण) | जैसलमेर, फलौदी — एकमात्र जो बीकानेर में नहीं |
नर्मदा नहर परियोजना
- राजस्थान एवं गुजरात की संयुक्त
- कुल लम्बाई: 532 किमी, राजस्थान में 74 किमी (जालौर 65 + बाड़मेर 9)
- लाभान्वित: जालौर, बाड़मेर — सर्वाधिक: जालौर
- सिलू गांव (जालौर) से प्रवेश
- 3 लिप्ट नहरें: पनेरिया, भादरेड़ा, सांचौर
- भारत की पहली बड़ी सिंचाई परियोजना जिसमें स्प्रिंकलर व बूँद-बूँद सिंचाई अनिवार्य
राजस्थान की प्रमुख 8 वृहद सिंचाई परियोजनाएं
- नर्मदा नहर परियोजना
- परवन वृहद् परियोजना (झालावाड़) — 7,355.23 करोड़
- धौलपुर लिप्ट परियोजना — 39,980 हेक्टेयर, 30 MW सौर ऊर्जा
- RWSRPD (मरू क्षेत्र जल पुनर्गठन) — NDB 70% ऋण, 10 जिले
- नवनेरा बैराज (ERCP) — कालीसिंध, 1410 मी. लम्बाई
- अपर हाई लेवल केनाल (माही) — 338 गाँव, 41,903 हेक्टेयर
- पीपलखूट हाई लेवल केनाल (प्रतापगढ़) — 5,000 हेक्टेयर
- कालीतीर लिप्ट परियोजना (धौलपुर) — 483 गाँव, 98.60 MCM
अध्याय 10: भू-जल
- भू-जल विभाग कार्य: नलकूपों की सरंचना, पेयजल, रॉक ड्रिलिंग, विस्फोटन
- भू-जल आंकलन रिपोर्ट 2021: राज्य का 78% क्षेत्र अति-दोहित श्रेणी में
- कुल भू-जल दोहन दर: 150%
- वर्ष 2023-24: 160 नलकूप, 289 हैंडपंप बोरवेल, 7 विज्ञों मीटर स्थापित
- राजस्थान की नवीनतम भू-जल नीति: 18 फरवरी 2010
- विश्व जल दिवस: 22 मार्च, राष्ट्रीय जल दिवस: 14 अप्रैल
राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना
- 2016-17 से 2023-24, 8 वर्ष
- सहयोग: विश्व बैंक (100% भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित)
- राजस्थान का प्रथम बाँध जिसमें स्काडा: बीसलपुर बाँध (टोंक)
भू-जल संसाधनों का आकलन
- सतही जल: 1.16%, भू-जल: 1.72%
- चंबल और माही बेसिन में पर्याप्त वर्षा व जल
- वर्ष 2022: 302 ब्लॉक (7 शहरी ब्लॉक सहित)
- लवणीय जोन (3): तारानगर (चूरू), खाजुवाला (बीकानेर), रावतसर (हनुमानगढ़)
अटल भू-जल योजना
- भारत सरकार एवं विश्व बैंक (50:50), 1 अप्रैल 2020
- 16 जिलों के 38 पंचायत समितियों के 1,129 ग्राम पंचायतों में
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0
- प्रथम चरण: 27 जनवरी 2016, गंधेड़ी (झालावाड़)
- द्वितीय चरण: देवरी (झालावाड़)
- 5,000 से 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर जल संग्रहण
- 5,135 गाँवों में ~1.50 लाख कार्य, ₹3,500 करोड़
अन्य योजनाएँ
| योजना | विवरण |
| PM कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड 2.0) | 2021-22 व 2022-23, 1,858.86 करोड़, 7.51 लाख हेक्टेयर, 149 परियोजनाएँ |
| नीरांचल योजना | 2016-17, ग्रामीण विकास मंत्रालय, 9 राज्य, 18 जिले (राजस्थान: जोधपुर, उदयपुर) |
| जीवन धारा योजना | 1996-97, विश्व बैंक, BPL ST/SC लघु किसानों को 100% अनुदान |
| राजीव गांधी जल संचय योजना | 20 अगस्त 2019, प्रथम चरण 33 जिले 295 पंचायत समिति 3931 गाँव; द्वितीय चरण 1 सितम्बर 2022 |
| रिपेयर-रिनोवेशन रिस्टोरेशन | 2005, PMKSY में 2017-18, 60:40, 37 परियोजनाएँ |
| राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार | JICA, अप्रैल 2019, 137 सिंचाई परियोजनाएँ, 4.70 लाख हेक्टेयर |
| बाँध पुनर्वास और सुधार | विश्व बैंक + AIIB, 70:30, 212 बड़े बाँध |
अध्याय 11: राजस्थान जल संरक्षण एवं जल प्रबन्धन
परम्परागत जल स्रोत
- तालाब: वर्षा जल संग्रहण, धार्मिक तालाबों की सुरक्षा
- झील: राजस्थान में सर्वाधिक परम्परागत जल संरक्षण
- नाडी: भूसतह पर गड्ढा, 1520 ई. में राव जोधाजी द्वारा प्रथम, पश्चिमी राजस्थान में 3-12 मीटर गहरी, 10 महीने पानी
- टांका/कुण्ड: रेतीले क्षेत्र में वर्षा जल संग्रहण, पेयजल हेतु
- टोबा: नाडी से अधिक गहरा, ~20 परिवार
- बावड़ी: सीढ़ीदार कुआँ, अपराजितपृच्छा में 4 प्रकार (नंदा, भद्रा, जया, सर्वतोमुख)
- खड़ीन: 15वीं शताब्दी, जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मण, 500+ खड़ीनें, 1300 हेक्टेयर
- झालरा: ऊँचे तालाबों के रिसाव से, जोधपुर के प्रमुख झालरे
- कुई/बेरी: तालाब के पास, 10-12 मीटर गहरी
- रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग: छतों का पानी संग्रहण
प्रमुख बावड़ियाँ
| बावड़ी | स्थान | विवरण |
| चाँद बावड़ी | आभानेरी (दौसा) | 8वीं सदी, प्रतिहार राजा चाँद, 19.5 मी. गहरी, 13 मंजिली, 3506 सीढ़ियाँ, राजस्थान की सबसे गहरी व कलात्मक |
| पन्ना मीणा की बावड़ी | जयपुर | जयगढ़ दुर्ग के पास, 29 दिसम्बर 2017 को डाक टिकट |
| रानी जी की बावड़ी | बूँदी | 1699 ई., रानी लाड़ कंवर नाथावत, 29 दिसम्बर 2017 डाक टिकट |
| नीलखा बावड़ी | डूंगरपुर | 1856, आसकरण की चौहान रानी प्रेमल दे, शिल्पी लीलाधर |
| त्रिमुखी बावड़ी | देवारी (उदयपुर) | महाराणा राजसिंह की रानी रामरसदे |
| नागर-सागर कुण्ड | बूँदी | 1821, रानी चन्द्रभान कुंवरी, 29 दिसम्बर 2017 डाक टिकट |
वर्षा जल संरक्षण शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
| आगौर (पायतान) | वर्षा जल को नाडी/तालाब में उतारने के लिए चारों ओर मिट्टी दबाकर बनाया गया |
| टांका | वर्षा जल एकत्रित करने का हौद |
| नाडी | छोटी तलैया |
| नेहटा (नेष्टा) | अतिरिक्त जल की निकासी |
| पालर पाणी | नाडी/टांके में जमा वर्षा जल |
| बेरी | छोटा कुआँ (पश्चिमी राजस्थान) |
| मदार | जल आने की धरती की सीमा |
| चौतीना/चौलाना | चार चड़सों द्वारा पानी खींचने पर भी न टूटने वाला कुआँ |
| परस/हाथ | कुएँ की गहराई माप |
| ताकिया | तालाब का ऊँचा स्थान |
प्रमुख जल संसाधन योजनाएँ
| योजना | विवरण |
| राजस्थान ग्रामीण जलप्रदाय एवं फ्लोरोसिस निराकरण | 2013, JICA, नागौर के 968 ग्राम, 7 कस्बे |
| राजस्थान फ्लोरोसिस नियंत्रण | यूनीसेफ, 30 जिलों में |
| राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार | JICA 85% + राज्य 15%, 27 जिले, 137 परियोजनाएँ |
| राजस्थान मरू क्षेत्र जल पुनर्गठन | NDB, 10 जिले, IGNP जीर्णोद्धार |
| जलशक्ति अभियान | 1 जुलाई 2019, 29 जिले, अजमेर प्रथम |
| जल जीवन मिशन | 15 अगस्त 2019, 2024 तक हर घर नल, माण्डल (भीलवाड़ा) राज्य का पहला 100% ब्लॉक |
| राजस्थान नदी बेसिन व जल संसाधन | 8 अप्रैल 2015, नदियों को जोड़ने का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य |
| मुख्यमंत्री राजनीय योजना | 13 मार्च 2020, निःशुल्क पेयजल |
| जलमणि योजना | 100% केन्द्र, 300 से कम छात्रों वाले ग्रामीण स्कूलों में RO |
| मिशन अमृत सरोवर | 24 अप्रैल 2022, हर जिले में 75 अमृत सरोवर |
| जनता जल योजना | 31 जिले (जैसलमेर, बीकानेर छोड़कर) |
| जल जन अभियान | 16 फरवरी 2023, PM नरेन्द्र मोदी, आबू रोड, ब्रह्मकुमारी + जल शक्ति मंत्रालय |
🔹 विशेषज्ञ जोड़: बावड़ियों का शहर — बूँदी; सर्वाधिक बावड़ियाँ — जोधपुर, जालौर; बावड़ियों की स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध — शेखावाटी, बूँदी। 29 दिसम्बर 2017 को राजस्थान की 6 बावड़ियों पर 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया।
अध्याय 12: राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति
वन नीति
- प्रथम राष्ट्रीय वन नीति: 1952 (33% भू-भाग)
- द्वितीय राष्ट्रीय वन नीति: दिसम्बर 1988 (मैदानी 20%, पहाड़ी 60%)
- राजस्थान वन एवं पर्यावरण नीति: 18 फरवरी 2010 (20% लक्ष्य, देश का प्रथम राज्य)
- राजस्थान वन विभाग: 1949
- नवीनतम वन नीति: 5 जून 2023 (20% वनस्पति आवरण, 20 वर्ष)
वन रिपोर्ट 2023 (18वीं)
| श्रेणी | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) | प्रतिशत |
| वनावरण | 16,548.21 | 4.84% |
| वृक्षावरण | 10,841.12 | 3.16% |
| कुल | 27,389.33 | 8% |
| अभिलेखित वन | 32,869 | 9.60% |
- जारी: 21 दिसम्बर 2024, FSI देहरादून
- भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI): 1981, मुख्यालय देहरादून
- वनावरण में 83.80 वर्ग किमी की कमी, वृक्षावरण में 478.26 वर्ग किमी की वृद्धि
- कुल वृद्धि: 394.26 वर्ग किमी (देश में चौथा स्थान)
- अधिकतम वृद्धि वाले राज्य: छत्तीसगढ़ (684), उत्तरप्रदेश (559), ओडिशा (559), राजस्थान (394)
घनत्व के आधार पर वर्गीकरण
| प्रकार | केनोपी घनत्व | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) | प्रतिशत | सर्वाधिक जिले |
| अत्यधिक सघन (VDF) | 70%+ | 223.20 | 0.07% | अलवर, उदयपुर |
| मध्यम सघन (MDF) | 40-70% | 4237.41 | 1.24% | उदयपुर, प्रतापगढ़ |
| खुले वन (OF) | 10-40% | 12087.60 | 3.53% | उदयपुर, बारां |
प्रशासनिक वर्गीकरण
| प्रकार | प्रतिशत | क्षेत्रफल | सर्वाधिक |
| आरक्षित वन | 37.04% | 12,176 वर्ग किमी | उदयपुर |
| रक्षित/सुरक्षित वन | 56.56% | 18,588 वर्ग किमी | बारां |
| अवर्गीकृत वन | 6.40% | 2,105 वर्ग किमी | बीकानेर |
भौगोलिक वर्गीकरण
| प्रकार | क्षेत्र | वर्षा | विस्तार | वृक्ष |
| उपोष्ण कटिबंधीय सदावहार | 1% | 150 सेमी | माउंट आबू | डिकिल्पटेरा आबूएसिस, जामुन, बांस |
| उष्ण कटिबंधीय सागवान | 7% | 75-110 सेमी | डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, कोटा, बारां, झालावाड़ | गुलर, महुआ, तेंदू, सागवान |
| उष्ण कटिबंधीय मानसूनी पतझड़ | 28.38% | 50-80 सेमी | उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर | साल, सागवान, शीशम |
| उष्ण कटिबंधीय धोकड़ा | 58% | 30-60 सेमी | अर्द्ध शुष्क मरूस्थलीय जिले | खेजड़ी, रोहिड़ा, कैर, बैर, बबूल |
| उष्ण कटिबंधीय मरूस्थलीय कंटीले | 6.26% | 0-30 सेमी | शुष्क मरूस्थलीय जिले | नागफनी, कैक्टस |
प्रमुख वनस्पतियाँ
| वनस्पति | वैज्ञानिक नाम | विशेष |
| खेजड़ी | प्रोसोपिस सिनेरेरिया | राज्य वृक्ष (31 अक्टूबर 1983), पौराणिक: शमी, स्थानीय: जांटी, तिमल: पेयमेय, कन्नड़: बज्जी, सिंधी: धोकड़ो, सर्वाधिक: जोधपुर, खेजड़ली गाँव (1730, अमृता देवी, 363 बलिदान), चिपको आंदोलन (1974), खेजड़ी दिवस: 12 सितम्बर, ऑपरेशन खेजड़ा (1991) |
| रोहिड़ा | टेकोमेला एण्डलेटा | राज्य पुष्प (31 अक्टूबर 1983), सर्वाधिक: जोधपुर, मारवाड़ टीक/रेगिस्तान सागवान, मरु शोभा |
| पलाश/ढाक | ब्युटिया मोनोस्पर्मा | सर्वाधिक: राजसमंद, अजमेर, अलवर, वन/जंगल की आग/The Flame of Forest |
| खैर | अकेशिया/सेनेगलिया कैटेचू | सर्वाधिक: उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कत्था (कथौड़ी जनजाति) |
| महुआ | मधुका लॉगिफोलिया | सर्वाधिक: डूंगरपुर, आदिवासियों का कल्पवृक्ष, मोकड़ी (महूड़ी) शराब, डोरमा तेल |
| तेंदू | डाइपाइरस मैलेनोजाइलोन | सर्वाधिक: प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, हाड़ौती, 1976 राष्ट्रीयकरण, फल: टिमरू, वागड़ का चौक, बीड़ी उद्योग |
प्रमुख घास मैदान
| घास | विशेष |
| बांस | विश्व की सबसे लम्बी घास, आदिवासियों का हरा सोना, सर्वाधिक: बाँसवाड़ा, उदयपुर, सलूम्बर, चित्तौड़, कोटा, राष्ट्रीय बांस मिशन (2006-07), राष्ट्रीय कृषि वानिकी एवं बांस मिशन (2015-16) |
| सेवण | लेज्यूरस सिंडिकस, स्थानीय: लीलोण, लाठी सीरीज, घासों का राजा, गोडावण की शरणस्थली, सर्वाधिक: जैसलमेर |
| खस | भरतपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, इत्र |
| बूर | बीकानेर, सबसे सुगंधित |
| पामरोजा/पामरोशा | सुगंधित, इत्र |
| सुगनी | जैसलमेर, दवा निर्माण |
| मोचिया | तालछापर (चूरू) |
अध्याय 13: राजस्थान की मृदा
मृदा के प्रकार
| क्र. | मृदा | विस्तार | विशेष |
| 1 | जलोढ़ मृदा | अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, दौसा, टोंक | दोमट/कांप/कछारी, पोटाश अधिक, फास्फोरस व नाइट्रोजन कम, सर्वाधिक उपजाऊ |
| 2 | काली मृदा | हाड़ौती पठार (कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़) | बेसाल्ट लावा, रेगुर/कपास/ज्वालामुखी, लोहा, चूना, कैल्सियम, मैग्नीशियम, कपास |
| 3 | रेतीली/बलुई मृदा | पश्चिमी राजस्थान (बीकानेर, जैसलमेर, फलौदी, जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा) | ग्रेनाइट चट्टानों का अपरदन, बालू रेत, एन्टीसोल, मरूस्थलीय, सर्वाधिक विस्तार, नाइट्रोजन व ह्यूमस कम |
| 4 | पर्वतीय/वनीय (लिथोसॉल्स) | अरावली क्षेत्र | ह्यूमिक अम्ल, जीवांश, मक्का |
| 5 | भूरी-रेतीली (सिरोजेम/ग्रे-पेण्टेड) | अर्द्ध शुष्क प्रदेश (बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, पाली, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, झुंझुनूं) | मरूस्थलीय मिट्टी, फास्फेट कम, ज्वार, बाजरा, मूंग, मोठ |
| 6 | लाल लोमी/लेटराइट | उदयपुर, सलूम्बर, डूंगरपुर (माही नदी अपवाह) | कायान्तरित चट्टानों का अपरदन, लाल रंग लौह अंश, मक्का, कपास, अफीम |
| 7 | लाल-काली मृदा | भीलवाड़ा, बूँदी, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा | मालवा की काली मृदा का विस्तार, मक्का, चावल, गन्ना |
| 8 | लवणीय मृदा | बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर (IGNP + नर्मदा नहर) | रेह, खार, कल्लर, NaCl अधिक, गन्ना, अनार, ग्वार, जौ |
| 9 | लाल-पीली मृदा | बनास बेसिन (सवाई माधोपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, राजसमंद) | ग्रेनाइट/नाइस चट्टानों का अपक्षरण, मोटा अनाज, मूंगफली, कपास |
USDA द्वारा वैज्ञानिक वर्गीकरण
| क्र. | मृदा | विस्तार | विशेष |
| 1 | एरिडोसेल | पश्चिमी राजस्थान | शुष्क जलवायु, केम्बो ऑर्थिड्स, केल्सी ऑर्थिड्स |
| 2 | एण्टीसोल | पश्चिमी राजस्थान | शुष्क एवं अर्द्धशुष्क, टोरी सामेन्ट्स, डस्ट-फ्लूबेन्ट्स, राजस्थान में सर्वाधिक विस्तार |
| 3 | अल्फीसोल | पूर्वी मैदानी भाग | आर्द्र और उपआर्द्र, हेल्पुस्ताल्फस |
| 4 | वर्टीसोल | दक्षिणी पूर्वी राजस्थान, हाड़ौती | आर्द्र और अति आर्द्र, पेल्युस्टर्ट्स, क्रोमस्टर्ट्स, झालावाड़, कोटा, बूँदी, बारां |
| 5 | इन्सेप्टीसोल | दक्षिणी राजस्थान | अर्द्धशुष्क से आर्द्र, उस्टोकेट्स, भारत में सर्वाधिक विस्तार |
मृदा की समस्याएँ
- मृदा अपरदन: कृषि का प्रथम शत्रु, वायु द्वारा (सर्वाधिक: जैसलमेर), जल द्वारा चादरी अपरदन (सिरोही, राजसमंद), अवनालिका अपरदन (चम्बल बेसिन)
- लवणीयता: अधिक सिंचाई से सफेद परत, IGNP + नर्मदा नहर, जिप्सम व रॉक फॉस्फेट
- क्षारीयता: pH 8 से अधिक, ढेंचा व ग्वार, जिप्सम
- मृदा अवक्षयण: उर्वरता में कमी, रासायनिक खाद, जैविक खाद
- मरूस्थलीकरण: पवन क्षरण > वनस्पति क्षरण > जल कटाव, वृक्षारोपण
- सेम की समस्या: हनुमानगढ़, गंगानगर, सफेदा/यूकेलिप्टस, बडोदवल (हनुमानगढ़)
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
- 19 फरवरी 2015, सूरतगढ़ कृषि फार्म (गंगानगर), PM मोदी
- ध्येय वाक्य: स्वस्थ धरा — खेत हरा
- हिस्सेदारी: केन्द्र 75 : राज्य 25
- राजस्थान बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड: 22 दिसम्बर 2016
- सर्वाधिक बंजर भूमि: जैसलमेर
भूमि सुधार कानून
- राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीरदारी पुनर्ग्रहण अधिनियम — 1952
- राजस्थान जागीरदारी एवं विश्वेदारी उन्मूलन अधिनियम — 1959
- राजस्थान काश्तकारी अधिनियम — 15 अक्टूबर 1955
- राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम — 23 मई 1956
मृदा संरक्षण की विधियाँ
- मल्च बनाना, वेदिका निर्माण, समोच्च रेखीय रोधिकाएँ, समोच्च रेखीय जुताई
- भिन्न-भिन्न फसलें उगाना, रक्षक मेखलाएँ, वृक्षारोपण
भूमि शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
| माल भूमि | काली उपजाऊ भूमि |
| हकत-बहत | जोती जाने वाली भूमि |
| चाही भूमि | सिंचित भूमि |
| बारानी भूमि | असिंचित (वर्षा पर आधारित) |
| मगरा | पहाड़ी भूमि |
| खसरा | भूमि का क्रमांक |
| जमाबंदी | खेत का लेखा-जोखा |
अध्याय 14: राजस्थान की जैव विविधता
जैव विविधता संरक्षण
- जैव विविधता शब्द: वाल्टर जी. रोजेन (1985)
- प्रथम पृथ्वी सम्मेलन: 1992, रियो-डी-जेनोरियो
- जैव विविधता के जनक: एडवर्ड विल्सन
- IUCN: 1948, मुख्यालय ग्लांड (स्विट्जरलैंड)
- रेड डाटा बुक: IUCN, पहला संस्करण 1972
- वन्य जीव संरक्षण अधिनियम: 1972 (राजस्थान में 1973)
राजस्थान में जैव विविधता
| श्रेणी | संख्या |
| राष्ट्रीय पार्क | 3 |
| टाइगर रिजर्व | 5 |
| वन्य जीव अभयारण्य | 26 |
| जन्तुआलय | 5 |
| मृग वन | 7 |
| आर्द्रभूमि (रामसर) | 2 |
| कन्जर्वेशन रिजर्व | 37 |
| जैव विविधता स्थल | 5 |
| आखेट निषिद्ध क्षेत्र | 33 |
नेशनल पार्क
| क्र. | नेशनल पार्क | स्थापना | क्षेत्रफल (नवीन) |
| 1 | रणथम्भौर | 1980 | 289 वर्ग किमी |
| 2 | केवलादेव | 1981 | 28.73 वर्ग किमी |
| 3 | मुकुन्दरा हिल्स | 2012 | 200 वर्ग किमी |
1. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान
- जिला: सवाई माधोपुर, अभयारण्य दर्जा: 1955
- राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय पार्क व प्रथम बाघ संरक्षण परियोजना
- टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट: 1973, राष्ट्रीय पार्क दर्जा: 1980
- विश्व बैंक सहयोग से इको डवलपमेंट प्रोग्राम: 1996
- बाघ परियोजना के जनक: फतेह सिंह राठौड़
- उत्तर में बनास, दक्षिण में चम्बल नदी
- त्रिनेत्र गणेश मंदिर, झूमर बावड़ी, कुक्कर घाटी, रणथम्भौर दुर्ग
- काला गरुड़, लाल सिर वाले तोते
- राजस्थान की प्रथम STPF (स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स)
2. केवलादेव घना पक्षी विहार राष्ट्रीय उद्यान
- जिला: भरतपुर, पक्षियों का स्वर्ग
- राज्य की पहली वन्य जीव प्रयोगशाला
- सुनहरा त्रिकोण (जयपुर-दिल्ली-आगरा)
- अभयारण्य: 1956, राष्ट्रीय पार्क: 1981
- राजस्थान की पहली रामसर साइट (1981)
- राज्य की एकमात्र मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड साइट
- 1985 में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल
- राज्य का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान (28.73 वर्ग किमी)
- गंभीर व बाणगंगा नदी के संगम पर
- डॉ. सलीम अली की कार्यस्थली
- साइबेरियन क्रेन, चकौर, लाल गर्दन के तोते, अजगर, कदम्ब के पेड़
3. मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान
- जिले: कोटा, झालावाड़, चित्तौड़, बूँदी
- 9 जनवरी 2012 को राष्ट्रीय पार्क दर्जा
- राज्य का तीसरा नेशनल पार्क व तीसरी बाघ परियोजना (2013)
- पुराना नाम: दरा अभयारण्य
- गागरोनी तोतों (अलेक्जेण्ड्रीया पेराकिट) के लिए प्रसिद्ध
टाइगर रिजर्व (5)
| क्र. | टाइगर रिजर्व | स्थिति | क्षेत्रफल | घोषित |
| 1 | रणथम्भौर | सवाई माधोपुर, करौली, बूँदी | 1411.29 वर्ग किमी | 1973 (पहला) |
| 2 | सरिस्का | अलवर, कोटपूतली-बहरोड, जयपुर | 1213 वर्ग किमी | 1978 (दूसरा) |
| 3 | मुकुन्दरा हिल्स | कोटा, बूँदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ | 759.99 वर्ग किमी | 2013 (तीसरा) |
| 4 | रामगढ़ विषधारी | बूँदी, कोटा, भीलवाड़ा | 1501.89 वर्ग किमी | 2022 (चौथा), सबसे बड़ा, भारत का 52वाँ |
| 5 | धौलपुर-करौली | धौलपुर, करौली | 599.64 वर्ग किमी | 22 अगस्त 2023 (पाँचवाँ), सबसे छोटा, भारत का 54वाँ |
वन्य जीव अभयारण्य (26)
| क्र. | अभयारण्य | जिला | विशेष |
| 1 | सरिस्का | अलवर, कोटपूतली-बहरोड, जयपुर | 1955, राज्य की दूसरी बाघ परियोजना (1978), हरे कबूतर, जंगली सुअर |
| 2 | राष्ट्रीय मरू उद्यान | जैसलमेर, बाड़मेर | 1980, सबसे बड़ा (3162 वर्ग किमी), गोडावण, आकल वुड फॉसिल पार्क |
| 3 | राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल | कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर | 1978, एकमात्र नदी अभयारण्य |
| 4 | तालछापर | चूरू | 1971, कृष्ण मृग, मेथा घास, शेखावाटी का एकमात्र |
| 5 | सवाई मानसिंह | सवाई माधोपुर | रणथम्भौर से सटा |
| 6 | सवाई माधोपुर | सवाई माधोपुर | — |
| 7 | जवाहर सागर | कोटा, बूँदी, चित्तौड़गढ़ | जलीय जीव, घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुआ, गांगेय डॉल्फिन |
| 8 | शेरगढ़ | बारां | साँपों की शरणस्थली, परवन नदी, काला भेड़िया |
| 9 | भैंसरोड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ | घड़ियाल, मानदेसरा का पठार, चम्बल व बामनी |
| 10 | बस्सी | चित्तौड़गढ़ | चीतलों की चहल-पहल, अरावली व विध्यांचल मिलन, बामनी व औराई |
| 11 | सीतामाता | प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, सलूम्बर | सर्वाधिक जैव विविधता, जड़ी-बूटियाँ, बड़ी तालाब (जियान सागर) |
| 12 | सज्जनगढ़ | उदयपुर | सबसे छोटा (5.19 वर्ग किमी), उड़न गिलहरी, सागवान, चीतल की मातृ भूमि |
| 13 | जयसमंद | सलूम्बर | एन्टीलोप चौसिंगा, रूठी रानी का महल, जाखम बाँध, जलचरों की बस्ती |
| 14 | फुलवारी की नाल | उदयपुर | मानसी व वाकल नदी का उदगम, सर्वाधिक जंगली मूंग |
| 15 | टॉडगढ़ रावली | ब्यावर, राजसमंद, पाली | जेम्स टॉड के नाम पर, कमली घाट, गोरम घाट |
| 16 | कुम्भलगढ़ | राजसमंद, उदयपुर, पाली | सर्वाधिक भेड़िये, चौसिंगा (घंटेल), रणकपुर जैन मंदिर |
| 17 | माउण्ट आबू | सिरोही | सर्वाधिक ऊँचाई, डिकिल्पटेरा आबूएसिस, खमनौर की पहाड़ी (बनास उद्गम), प्रथम इको सेंसिटिव जोन |
| 18 | रामसागर | धौलपुर | 1955, मीठे पानी के मगरमच्छ, मछलियाँ, साँप, मूंगे |
| 19 | वन विहार | धौलपुर | सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सुअर, भालू, लकड़बग्घा, तेंदुआ |
| 20 | केसरबाग | धौलपुर | 1955, उदयभान सिंह, पक्षियों का घरौंदा |
| 21 | बंध बारेठा | भरतपुर | — |
| 22 | नाहरगढ़ | जयपुर | भालू रेस्क्यू सेंटर |
| 23 | जमवारामगढ़ | जयपुर | बाणगंगा नदी |
| 24 | दरा | कोटा, झालावाड़ | 1955, डांगलैंड, बघेरा, रीछ, चिंकारा, सांभर |
| 25 | केलादेवी | करौली, सवाई माधोपुर | 1982, 16 मई 2022 को टाइगर रिजर्व, पाइथन/अजगर की शरणस्थली, रणथम्भौर के बाघों का जच्चा घर |
| 26 | रामगढ़ विषधारी | बूँदी, भीलवाड़ा | — |
कन्जर्वेशन रिजर्व (37)
- राजस्थान का पहला: बीसलपुर कन्जर्वेशन रिजर्व (टोंक, 2008)
- सबसे बड़ा: बालेश्वर कन्जर्वेशन रिजर्व (221 km, नीम का थाना, सीकर)
- सबसे छोटा: बीड मुहाना कन्जर्वेशन रिजर्व B (जयपुर, 0.10 km)
- सर्वाधिक: बारां जिला (7)
- 37वां: आसोप-भीलवाड़ा (27-08-2024)
आर्द्रभूमि (रामसर स्थल)
- रामसर सम्मेलन: 2 फरवरी 1971, रामसर, ईरान
- भारत रामसर कन्वेंशन का पक्षकार:
1 फरवरी 1982
- भारत में वर्तमान रामसर स्थलों की संख्या:
101 (2026)
- राजस्थान में वर्तमान रामसर स्थलों की संख्या:
5 (2026)
- राजस्थान के रामसर स्थल:
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, सांभर झील,
मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स, खीचन वेटलैंड तथा सिलीसेढ़ झील
| क्रम |
रामसर स्थल |
जिला |
रामसर सूची में शामिल होने का वर्ष |
| 1 |
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान |
भरतपुर |
1981 |
| 2 |
सांभर झील |
जयपुर, अजमेर, नागौर क्षेत्र |
1990 |
| 3 |
मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स |
उदयपुर |
2025 |
| 4 |
खीचन वेटलैंड |
जोधपुर एवं फलोदी |
2025 |
| 5 |
सिलीसेढ़ झील |
अलवर |
2025 |
📌 परीक्षा अपडेट — 2026:
मेनार वेटलैंड कॉम्प्लेक्स को Ramsar Site No.
2567 तथा खीचन वेटलैंड को Ramsar Site No.
2568 के रूप में 19 फरवरी 2025 को नामित किया गया।
सिलीसेढ़ झील Ramsar Site No. 2581 है।
इस प्रकार राजस्थान में वर्तमान में कुल
5 Ramsar Sites हैं।
जिलों के शुभंकर
| जिला | शुभंकर | जिला | शुभंकर |
| श्रीगंगानगर | चिंकारा | हनुमानगढ़ | छोटा किलकिला |
| बीकानेर | भट तीतर | चूरू | काला हिरण |
| सीकर | शाहीन | झुंझुनूं | काला तीतर |
| जोधपुर | कुरजां | जैसलमेर | गोडावण |
| बाड़मेर | मरू लोमड़ी | नागौर | राजहंस |
| पाली | तेंदुआ | सिरोही | जंगली मुर्गा |
| जालौर | भालू | अजमेर | खड़मोर |
| भीलवाड़ा | मोर | उदयपुर | कव्व विष्णु |
| राजसमंद | भेड़िया | डूंगरपुर | जांघिल |
| बाँसवाड़ा | जलपीपी | प्रतापगढ़ | उड़न गिलहरी |
| चित्तौड़गढ़ | चौसिंगा | अलवर | सांभर |
| भरतपुर | सारस | करौली | घड़ियाल |
| धौलपुर | पंछीरा | सवाई माधोपुर | बाघ |
| जयपुर | चीतल | दौसा | खरगोश |
| टोंक | हंस | कोटा | उदबिलाव |
| बूँदी | सुखब | बारां | मगरमच्छ |
| झालावाड़ | गागरोनी तोता | — | — |
अध्याय 15: राजस्थान के पर्यावरणीय मुद्दे (आपदा प्रबन्धन)
सहायता विभाग
- स्थापना: 24 अक्टूबर 1951
- 30 अप्रैल 1962: अकाल सहिता
- 1964: खाद्य एवं सहायता विभाग से अलग
- 26 जनवरी 2001 (गुजरात भूकम्प) के बाद Crisis Management से Risk Management
- 30 अक्टूबर 2003: आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग
आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005
- पारित: 23 दिसम्बर 2005, लागू: जनवरी 2006
- नोडल एजेंसी: गृह मंत्रालय
- NDMA: अध्यक्ष प्रधानमंत्री, मुख्यालय नई दिल्ली
- SDMA: अध्यक्ष मुख्यमंत्री
- DDMA: अध्यक्ष कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट
भूकम्प
| क्षेत्र | तीव्रता | विस्तार |
| उच्च (Zone IV) | 6.0-6.9 | चौहटन (बाड़मेर), सांचौर (जालौर), तिजारा (खैरथल-तिजारा), नगर पहाड़ी (डीग) |
| मध्यम (Zone III) | 5.0-5.9 | पश्चिमी उदयपुर, डूंगरपुर, सिरोही, जालौर, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, फलौदी, बीकानेर, गंगानगर, झुंझुनूं, जोधपुर, सीकर, जयपुर, उत्तरी दौसा, भरतपुर |
| निम्न (Zone II) | 4.0 से कम | शेष राजस्थान |
प्रमुख भूकम्प:
- 15 अगस्त 1906: थार रेगिस्तान (M6.2) — सबसे बड़ा
- 18 मई 1974: पोखरण परमाणु परीक्षण
- 11 मई 1998: पोखरण परमाणु परीक्षण
- 26 जनवरी 2001: भुज (गुजरात) — सम्पूर्ण राजस्थान प्रभावित
- 10 अगस्त 2003: शाहपुरा (जयपुर)
- 2010: अलवर, अजमेर, राजसमंद
बाढ़
- प्रकार: भीषण (50%+ अधिक वर्षा), मध्यम (25-50% अधिक)
- प्रवण क्षेत्र: लूनी बेसिन, चम्बल बेसिन, बाणगंगा बेसिन, घग्घर बेसिन
- इतिहास: 1981 (जयपुर, टोंक, नागौर, सवाईमाधोपुर), 2006 कवास (बाड़मेर), 2012 (टोंक, सवाई माधोपुर, झुंझुनूं, सीकर, दौसा), 2014 (दौसा, नागौर, अजमेर), 2015 (जालौर, झालावाड़, बारां, डूंगरपुर), 2016 (मध्य, दक्षिण, पश्चिमी राजस्थान)
सूखा एवं अकाल
- तीजों कुरियों आठों काल: हर 3 वर्ष छोटा अकाल, हर 8वें वर्ष भयंकर अकाल
- प्रचंड सूखा: 50% कम वर्षा, सामान्य सूखा: 25% कम वर्षा
- अकाल प्रकार: अन्नकाल, जलकाल, तृणकाल, त्रिकाल
| आवृत्ति | जिले |
| 3 साल में 1 बार | जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जालौर, सिरोही (अधिकतम सूखा) |
| 4 साल में 1 बार | गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, नागौर, अजमेर, बूँदी, डूंगरपुर |
| 5 साल में 1 बार | झुंझुनूं, सीकर, अलवर, जयपुर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, पाली, भीलवाड़ा, बाँसवाड़ा |
| 6 साल में 1 बार | टोंक, कोटा, बारां, झालावाड़, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, प्रतापगढ़ |
| 8 साल में 1 बार | भरतपुर, धौलपुर (न्यूनतम सूखा) |
प्रमुख अकाल: चालीसा अकाल (1783), पंचकाल (1812-13), सहसा भदुसा (1843-44), छप्पिनया अकाल (1899-1900), 1987 का त्रिकाल, 2002-03 (100 वर्ष का भीषण)
मरुस्थलीकरण
- राजस्थान में मरुस्थलीकरण में योगदान: 62.06%
- कारण: वनोन्मूलन, सूखा, जलवायु, भू-क्षरण, जनसंख्या वृद्धि, वायु अपरदन, पशुचारण, भूजल गिरावट
- मरूस्थल का विस्तार: 12 जिले (नए 16 जिले)
- विश्व मरुस्थलीकरण रोकथाम दिवस: 17 जून
- 2019 में भारत ने COP-14 की मेजबानी की
आपदा प्रबंधन के सरकारी प्रयास
| कार्यक्रम/संस्था | विवरण |
| राजस्थान राहत कोष | 20 जनवरी 2006 |
| प्राकृतिक आपदा कोष | 1990-91, केन्द्र 31 करोड़ + राज्य 93 करोड़, अप्रैल 1995 |
| फूड स्टैम्प योजना | 15 अगस्त 2004, 10 क्विंटल गेहूं प्रति ग्राम पंचायत |
| सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP) | 1974-75, 75:25, 11 जिले, 32 खण्ड |
| मरू विकास कार्यक्रम (DDP) | 1977-78, 75:25, 16 जिले, 85 खण्ड |
| जलधारा कार्यक्रम | 1994, सीमान्त किसानों को पम्पसेट |
| काम के बदले अनाज | 14 नवम्बर 2014, मनमोहन सिंह, 150 जिले |
| चारा समर्थन मूल्य | 2 नवम्बर 2002, राजस्थान देश का एकमात्र राज्य |
| टिड्डी आक्रमण | 13 मार्च 2020, 8 जिले, 908 गाँव अभावग्रस्त |
| टिड्डी चेतावनी संगठन | मुख्यालय जोधपुर |
| CAZRI | 1959, जोधपुर, 5 उपकेन्द्र |
| AFRI | 1987, जोधपुर |
| ऑपरेशन खेजड़ा | 1991, मरूस्थल प्रसार रोकना |
| मरू गोचर योजना | 2003-04, 75:25, 10 जिले |
| बंजर भूमि व चारागाह विकास बोर्ड | 22 दिसम्बर 2016, पुनर्गठन 11 फरवरी 2022 |
| आपदा मित्र योजना | गृह मंत्रालय, 13 जिले, 4700 स्वयंसेवक |
| गवर्नर रिलीफ फण्ड | 14 मार्च 1973 |
अध्याय 16: राजस्थान की जनसंख्या
जनगणना 2011 (15वीं)
| विवरण | आँकड़े |
| राजस्थान की जनसंख्या | 6.85 करोड़ (68,548,437) |
| भारत की जनसंख्या का | 5.66% |
| विश्व की जनसंख्या का | 1.6% |
| जनसंख्या के आधार पर देश में स्थान | 7वाँ (2014 के बाद, तेलंगाना पृथक होने पर) |
| दशकीय वृद्धि दर | 21.3% (भारत: 17.7%) |
| जनसंख्या घनत्व | 200 व्यक्ति/वर्ग किमी (भारत: 382) |
| लिंगानुपात | 928 (भारत: 943) |
| बाल लिंगानुपात | 888 (भारत: 919) |
| साक्षरता | 66.1% (भारत: 74.04%) |
| पुरुष साक्षरता | 79.20% |
| महिला साक्षरता | 52.1% |
| शहरी जनसंख्या | 24.87% (भारत: 31.16%) |
| ग्रामीण जनसंख्या | 75.13% |
सर्वाधिक/न्यूनतम जिले (2011)
| श्रेणी | सर्वाधिक | न्यूनतम |
| जनसंख्या | जयपुर (66.36 लाख) | जैसलमेर (6.69 लाख) |
| जनघनत्व | जयपुर (595) | जैसलमेर (17) |
| लिंगानुपात | डूंगरपुर (994) | धौलपुर (846) |
| बाल लिंगानुपात | बाँसवाड़ा (934) | झुंझुनूं (837) |
| साक्षरता | कोटा (76.06%) | जालौर (54.9%) |
| पुरुष साक्षरता | झुंझुनूं (86.9%) | प्रतापगढ़ (66.5%) |
| महिला साक्षरता | कोटा (65.9%) | जालौर (38.5%) |
| दशकीय वृद्धि दर | बाड़मेर (32.5%) | श्रीगंगानगर (10%) |
| शहरीकरण | कोटा (60.31%) | डूंगरपुर (6.31%) |
अनुसूचित जाति व जनजाति (2011)
| विवरण | SC | ST |
| कुल जनसंख्या | 1.22 करोड़ | 0.92 करोड़ |
| राजस्थान में % | 17.83% | 13.48% |
| भारत में % | 16.6% | 8.6% |
| सर्वाधिक जनसंख्या | जयपुर (10.03 लाख) | उदयपुर (15.25 लाख) |
| सर्वाधिक % | गंगानगर (36.58%) | बाँसवाड़ा (76.38%) |
धर्म (2011)
| धर्म | प्रतिशत | सर्वाधिक जिला |
| हिन्दू | 88.49% | दौसा |
| मुस्लिम | 9.07% | जैसलमेर |
| सिक्ख | 1.27% | श्रीगंगानगर |
| जैन | 0.91% | उदयपुर |
| ईसाई | 0.14% | बाँसवाड़ा |
| बौद्ध | 0.02% | अलवर |
जनसंख्या नीति
- राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000: 15 फरवरी 2000, अध्यक्ष डॉ. M.S. स्वामीनाथन
- राजस्थान की प्रथम जनसंख्या नीति: 20 जनवरी 2000, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
- लक्ष्य: 2010 तक 2.1%, 2045 से 2070 तक स्थिर
- भारत की प्रथम जनसंख्या नीति: 16 अप्रैल 1976, डॉ. करणी सिंह
- राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग: 11 मई 2000, अध्यक्ष प्रधानमंत्री
जनगणना 2021 (16वीं)
- थीम: जन भागीदारी से जनकल्याण
- पहली डिजिटल जनगणना, स्व-गणना का प्रावधान
- महारजिस्ट्रार: श्री मृत्युंजय कुमार नारायण
- 31 प्रश्न, ट्रांसजेंडर मुखिया की जानकारी पहली बार
अध्याय 17: राजस्थान की खनिज सम्पदा
खनिज विविधता में राजस्थान का प्रथम स्थान — 'खनिजों का अजायबघर/संग्रहालय'
खनिज भण्डारण में द्वितीय — अरावली 'खनिजों का भण्डारगृह'
खनिज उत्पादन में तृतीय (ओडिशा, छत्तीसगढ़ के बाद)
81 प्रकार के खनिज, 58 का खनन
राजस्थान का स्थान
| श्रेणी | स्थान |
| खनिज विविधता | प्रथम |
| खनिज भण्डारण | द्वितीय |
| खनिज उत्पादन | तृतीय |
| अधात्विक खनिज उत्पादन | प्रथम |
| लौह खनिज उत्पादन | चतुर्थ |
| अप्रधान खनिज उत्पादन | प्रथम |
धात्विक खनिज
| खनिज | स्थान | प्रमुख क्षेत्र |
| लौह अयस्क | — | जयपुर (मोरिजा-बनोला), उदयपुर (नाथरा की पाल), भीलवाड़ा (जहाजपुर), दौसा (नीमला-रायसेला), बूँदी (लोहारपुर), झुंझुनूं (सिंघाना), डूंगरपुर (लौहारिया), सीकर (नीम का थाना), करौली (देवरोली) |
| तांबा | द्वितीय (MP प्रथम), भण्डार प्रथम (54%) | खेतड़ी (झुंझुनूं) — मदान-कुदान, कोलिहान, चाँदमारी; खो-दरीबा (अलवर); पादर की पाल (डूंगरपुर); गोलिया (सिरोही); अंजनी (उदयपुर); हनोतिया (अजमेर); रघुनाथगढ़ (सीकर) |
| सीसा-जस्ता | एकाधिकार (89% भण्डार) | जावर (उदयपुर) — सबसे पुरानी खान; राजपुरा-दरीबा (राजसमंद); रामपुरा आगुचा (भीलवाड़ा); कायड (अजमेर); चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर) |
| चांदी | प्रथम (86% भण्डार) | जावर (उदयपुर) — देश की सबसे बड़ी; रामपुरा आगुचा (भीलवाड़ा); राजपुरा-दरीबा (राजसमंद); कायड (अजमेर) |
| सोना | — | बाँसवाड़ा (आनन्दपुरा भूकिया), अजमेर (घुधरा घाटी), दौसा (सरपंच की ढाणी), अलवर (खेड़ा मुंडियावास) |
| मैगनीज | — | बाँसवाड़ा (सर्वाधिक), भीलवाड़ा (हम्मीरगढ़), उदयपुर, राजसमंद |
| टंगस्टन | — | नागौर (रैवत की पहाड़ी-डेगाना), सिरोही (वाल्दा), पाली (पादराला), जयपुर (डगनवाड़ा) |
अधात्विक खनिज
| खनिज | स्थान | प्रमुख क्षेत्र |
| अभ्रक (MICA) | — | भीलवाड़ा (सर्वाधिक, सबसे बड़ी मण्डी), अजमेर, जयपुर, उदयपुर, टोंक |
| जिप्सम | प्रथम (99% उत्पादन, 81% भण्डार) | बीकानेर (जामसर — सबसे बड़ी खान), नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर, गंगानगर |
| रॉक फॉस्फेट | प्रथम (93%) | उदयपुर (झामर कोटडा — सबसे बड़ा), जैसलमेर, बाँसवाड़ा, जयपुर, अलवर |
| पोटाश | — | हनुमानगढ़ (सतीपुरा), बीकानेर (लखासर), गंगानगर, चूरू, नागौर |
| एस्वेस्टॉस | प्रथम | उदयपुर (देवपुरा, ऋषभदेव), राजसमंद (देवगढ़, आमेट) |
| फेल्सपार | प्रथम | अजमेर (मकेररिया), भीलवाड़ा (आसींद), ब्यावर (मसूदा), जयपुर |
| फ्लोराइट | द्वितीय (गुजरात प्रथम) | डूंगरपुर (मांडो की पाल, काहिला), जालौर, सीकर, उदयपुर |
| चूना पत्थर | प्रथम (सीमेंट ग्रेड) | चित्तौड़गढ़ (सर्वाधिक), जोधपुर (केमिकल ग्रेड), नागौर, जैसलमेर (स्टील ग्रेड) |
| इमारती बलुआ पत्थर | प्रथम | जोधपुर (प्रथम), धौलपुर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, बूँदी, कोटा |
| संगमरमर | सबसे अमीर | राजसमंद (सर्वाधिक उत्पादन), मकराना (सर्वोत्तम — डीडवाना-कुचामन), केवड़ा (उदयपुर — गुलाबी), ऋषभदेव (हरा), भैंसलाना (काला), खादरा की पाल (सतरंगी), देसूरी (नीला), पीथला (पीला) |
ऊर्जा खनिज
कोयला
- राजस्थान में केवल लिग्नाइट प्रकार का कोयला
- प्रमुख क्षेत्र: बीकानेर (पलाना — सर्वश्रेष्ठ, बरसिंगसर, केसर-देसर), बाड़मेर (गिरल, जालिपा, कपूरडी), बालोतरा (सिणधारी, होइ, जोगेश्वर तला), नागौर (मेडतारोड, इन्दाबड़)
- भारत में सर्वाधिक लिग्नाइट: तमिलनाडु > गुजरात > राजस्थान
पेट्रोलियम
- राजस्थान भारत में कच्चे तेल का महत्वपूर्ण उत्पादक
- भारत के कुल उत्पादन (29.36 MMT) में ~14.95% (4.39 MMT)
- मंगला तेल क्षेत्र से व्यावसायिक उत्पादन: 29 अगस्त 2009
- केवर्न इंडिया लिमिटेड (बाड़मेर-सांचौर बेसिन)
- प्राकृतिक गैस: राजस्थान तृतीय स्थान (असम प्रथम)
- पहला गैस कुआँ: डांडेवाला (जैसलमेर)
- 4 प्रमुख बेसिन: बाड़मेर-सांचौर (सर्वाधिक), जैसलमेर, बीकानेर-नागौर, विध्यन
पचपदरा रिफाइनरी
- शिलान्यास: 23 सितम्बर 2013, शुभारम्भ: 16 जनवरी 2018
- स्थान: साजियाली (बालोतरा) — देश की 26वीं रिफाइनरी
- देश की प्रथम BS-6 मानकों पर आधारित
- उत्पादन: 9 MMT, हिस्सेदारी: HPCL 74% + राजस्थान सरकार 26%
- लागत: 72,937 करोड़ (वर्तमान)
राजस्थान के एकाधिकार वाले खनिज
- सीसा-जस्ता, वॉलस्टेनाइट, सेलेनाइट — 100% उत्पादन
- चांदी, कैल्साइट, जिप्सम — ~99%
- रॉक फॉस्फेट, एस्वेस्टॉस, टंगस्टन, संगमरमर, सोप स्टोन, सैंड स्टोन, बॉल क्ले — प्रथम स्थान
प्रमुख संस्थान
| संस्थान | स्थापना | मुख्यालय |
| खान एवं भू-विज्ञान विभाग | 1949 | उदयपुर |
| RSMML | 1974 | उदयपुर |
| राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम | 27 सितम्बर 1979 (2003 में विलय) | — |
| राजस्थान राज्य पेट्रोलियम कॉरपोरेशन | 2008 | जयपुर |
| RSMET | 15 सितम्बर 2020 | जयपुर |
| हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड | 1966 | देवारी (उदयपुर) |
| हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड | 1967 | खेतड़ी (नीम का थाना) |
खनिज नीतियाँ
- प्रथम: 1978, द्वितीय: 1990, तृतीय: 1994, चतुर्थ: 2011, पंचम: 4 जून 2015
- षष्ठम: 9 दिसम्बर 2024
- लक्ष्य: GDP में खनिज क्षेत्र का योगदान 3.4% से 2029-30 तक 5%, 2046-47 तक 8%
- राजस्व लक्ष्य: 2029-30 तक 3 गुना, 2047 तक 1 लाख करोड़
- रोजगार: 2029-30 तक 50 लाख, 2047 तक 1 करोड़
अध्याय 18: ऊर्जा संसाधन
विद्युत क्षमता — दिसम्बर 2025 तक
| श्रेणी |
क्षमता (MW) |
| तापीय | 7,830.00 |
| जल विद्युत | 1,017.29 |
| गैस | 600.50 |
| केंद्रीय क्षेत्र से तापीय आवंटन | 2,197.47 |
| केंद्रीय क्षेत्र से जल विद्युत आवंटन | 851.86 |
| परमाणु ऊर्जा आवंटन | 806.74 |
| पवन ऊर्जा | 4,416.12 |
| बायोमास | 196.45 |
| सौर ऊर्जा | 9,898.00 |
| अन्य तापीय/जल विद्युत | 3,742.00 |
| कुल अधिष्ठापित क्षमता |
31,556.43 MW |
📌 नवीनतम आधिकारिक डेटा:
राजस्थान की कुल स्थापित विद्युत क्षमता दिसम्बर 2025 तक
31,556.43 MW हो गई थी। यह आंकड़ा राजस्थान Economic Review 2025-26 पर आधारित है।
थर्मल पॉवर प्लांट
| प्रकार | संख्या | प्लांट |
| STPP (1000+ MW) | 6 | सूरतगढ़ (पहला), कोटा (दूसरा), छबडा (तीसरा), कालीसिंध (चौथा), कवई, भादेश |
| क्रिटिकल (500+ MW/यूनिट) | 4 | सूरतगढ़, कालीसिंध, छबड़ा, कवई |
| UMPP (4000+ MW) | 0 | — |
सूरतगढ़ सुपर थर्मल
- स्थापना: 1998, टुकराना गाँव, सूरतगढ़
- संचालन: RVUNL, पानी: IGNP से
- सर्वाधिक विद्युत उत्पादन
- 8 इकाई: 250×4 + 660×2 = 2320 MW
अन्य प्रमुख थर्मल
- कोटा थर्मल: 1240 MW (7 इकाई), राजस्थान का दूसरा सुपर, प्रथम कोयला आधारित
- छबड़ा: 1320 MW (2×660), राजस्थान का प्रथम क्रिटिकल तकनीक
- कालीसिंध: एशिया का सबसे ऊँचा कूलिंग टावर
- गिरल लिग्नाइट: 250 MW, प्रथम लिग्नाइट गैसीकरण
- बरसिंगसर: 250 MW (केन्द्र सरकार का प्रथम लिग्नाइट)
गैस आधारित पॉवर प्लांट
- रामगढ़ गैस (जैसलमेर): 273.5 MW, 15 नवम्बर 1994 — राज्य सरकार का प्रथम
- अन्ता (बारां): 420 MW, 1989, NTPC — राज्य का प्रथम गैस थर्मल
- धौलपुर कम्बाइंड साइकल: 330 MW, मार्च 2007
जल विद्युत
- अनास: 140 MW (बाँसवाड़ा)
- जाखम: 54 MW (प्रतापगढ़)
- इंदिरा गाँधी: 23 MW (IGNP)
- चम्बल घाटी: 386 MW (50:50)
- माही: 140 MW (45:55)
- भाखड़ा-नांगल: राजस्थान 227 MW (15.2%)
- व्यास: राजस्थान 408 MW
परमाणु ऊर्जा
- रावतभाटा (चित्तौड़गढ़): 1965 स्थापना, 1972 प्रथम इकाई, कुल 7 इकाई (1880 MW), भारत का दूसरा परमाणु संयंत्र, सबसे बड़ा
- नापला (बाँसवाड़ा): प्रस्तावित, 2800 MW (700×4)
- नरौरा (UP): राजस्थान का हिस्सा 44 MW (10%)
गैर-परम्परागत ऊर्जा
- RRECL: 9 अगस्त 2002 (REDA + RPCL का विलय)
- राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024: 2029-30 तक 1.25 लाख MW, 115 GW नवीकरणीय + 10 GW भंडारण
सौर ऊर्जा
- सौर ऊर्जा नीति बनाने वाला भारत का प्रथम राज्य: राजस्थान (2011)
- सौर दिवस: 325, सौर विकरण: 6-7 kWh/m²/दिन
- क्षमता: 142 GW, नीति लक्ष्य: 30 MW
- वर्तमान स्थापित: 5,482.66 MW
- सर्वाधिक सौर ऊर्जा संयंत्र: जोधपुर
- प्रथम सौर पार्क: भड़ला (जोधपुर)
- प्रथम सौर संयंत्र: मथानिया (जोधपुर)
- सोलर एनर्जी एंटरप्राइजिंग जोन (SEEZ): हम्मादा क्षेत्र — पोकरण, बायतु, फलौदी
- प्रथम सौर ऊर्जा से चलने वाली नाव: पिछोला झील
- प्रथम सौर ऊर्जा गाँव: नौख (जैसलमेर)
- पहला सौर ऊर्जा संचालित ATM: मेहंदीपुर बालाजी (दौसा)
- प्रथम सौर ऊर्जा विद्युतीकरण रेलवे स्टेशन: गोरमघाट
पवन ऊर्जा
- अनुमानित क्षमता (150 मी. हब): ~284 GW
- वर्तमान स्थापित: 4,414.12 MW
- प्रथम पवन ऊर्जा परियोजना: अमर सागर (जैसलमेर, अगस्त 1999)
- दूसरी: देवगढ़ (प्रतापगढ़, 2000)
- निजी क्षेत्र की प्रथम: बीठड़ी (फलौदी, 2001)
- प्रथम पवन ऊर्जा नीति: मार्च 2000
बायोमास
- प्रथम बायोमास संयंत्र: पदमपुरा (गंगानगर)
- सर्वाधिक बायोगैस संयंत्र: उदयपुर
- बायोडीजल: जोजोबा/होहोबा/रतनजोत/जेट्रोपा (इजरायली पद्धति)
- कोटा बायोगैस प्लांट: एशिया का सबसे बड़ा CBG (3000 किग्रा/दिन, 1200 घरों को बिजली)
राजस्थान राज्य विद्युत बोर्ड (RSEB)
- स्थापना: 1 जुलाई 1957
- 19 जुलाई 2000: 5 कंपनियाँ — RVUNL, RVPNL, JVVNL, JDVVNL, AVVNL
- बजट 2020-21: चौथी वितरण कंपनी "कृषि विद्युत वितरण निगम" की घोषणा
RERA (राजस्थान विद्युत विनियामक प्राधिकरण)
- स्थापना: 2 जनवरी 2000, जयपुर
- कार्य: लाइसेंस, नियंत्रण, दर निर्धारण
अध्याय 19: कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र
कृषि की मुख्य विशेषताएँ
- GSVA में योगदान: 26.92% (प्रचलित), 26.54% (स्थिर)
- 62% कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर
- 2024-25: कुल खाद्यान्न उत्पादन 267.67 लाख मीट्रिक टन
- बाजरा, सरसों, कुल तिलहन, खार में देश में प्रथम
- शुद्ध बोया गया क्षेत्र: 53.74%
- औसत जोत का आकार: 2.73 हेक्टेयर
- भारत का 11% कृषिगत क्षेत्रफल राजस्थान में
फसलें
| ऋतु | बुवाई | कटाई | फसलें |
| खरीफ | जून-जुलाई | सितम्बर-अक्टूबर | मूंगफली, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मोठ, तिल, कपास, गन्ना |
| रबी | अक्टूबर-नवम्बर | मार्च-अप्रैल | गेहूं, जौ, सरसों, चना, जीरा, मेथी, अलसी |
| जायद | मार्च | जून | खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, सब्जियाँ |
प्रमुख फसलें
| फसल | स्थान | उत्पादन (प्रथम) | विशेष |
| बाजरा | खरीफ | अलवर | देश में प्रथम (38.98%), सर्वाधिक बोया जाने वाला खाद्यान्न, अनुसंधान केन्द्र: बाड़मेर, उत्कृष्टता: जोधपुर |
| गेहूं | रबी | गंगानगर | देश में 5वाँ, सर्वाधिक बोया क्षेत्र: हनुमानगढ़ |
| सरसों | रबी | श्रीगंगानगर | देश में प्रथम (46.63%), अनुसंधान केन्द्र: सेवर (भरतपुर) |
| ग्वार | खरीफ | हनुमानगढ़ | देश में प्रथम (87.69%) |
| मूंगफली | खरीफ | बीकानेर | देश में द्वितीय |
| कपास | खरीफ | हनुमानगढ़ | देश में 4th (7.95%), सर्वाधिक संभाग: बीकानेर |
| मक्का | खरीफ | चित्तौड़गढ़ | देश में 10th, अनुसंधान केन्द्र: बाँसवाड़ा |
| ज्वार | खरीफ | अजमेर | देश में 3rd, अनुसंधान केन्द्र: वल्लभनगर (उदयपुर) |
| चावल | खरीफ | बूँदी | अनुसंधान केन्द्र: बाँसवाड़ा |
| दलहन | — | नागौर | देश में 3rd (13.88%) |
| तिलहन | — | बीकानेर | देश में प्रथम (22.78%) |
| गन्ना | — | गंगानगर | — |
कृषि जलवायु क्षेत्र (10)
| क्षेत्र | जिले | खरीफ | रबी |
| I A - शुष्क पश्चिमी मैदानी | जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा | बाजरा, मोठ, तिल | गेहूं, सरसों, जीरा |
| I B - उत्तरी-पश्चिमी सिंचित | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ | कपास-ग्वार | गेहूं, सरसों, चना |
| I C - अति शुष्क आंशिक सिंचित | बीकानेर, जैसलमेर, चूरू आंशिक | बाजरा, मोठ, ग्वार | गेहूं, सरसों, चना |
| II A - अंतःस्थलीय जलोत्सरण | सीकर, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना-कुचामन | बाजरा, ग्वार, दलहन | सरसों, चना |
| II B - लूणी नदी अन्तर्वर्ती | जालौर, सिरोही, पाली, ब्यावर आंशिक | बाजरा, ग्वार, तिल | गेहूं, सरसों |
| III A - अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदानी | जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड, ब्यावर | बाजरा, ग्वार, ज्वार | गेहूं, सरसों, चना |
| III B - बाढ़ संभाव्य पूर्वी मैदानी | अलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर | बाजरा, ग्वार, मूंगफली | गेहूं, सरसों, जौ, चना |
| IV A - अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी मैदानी | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, सिरोही आंशिक | मक्का, दलहन, ज्वार | गेहूं, चना |
| IV B - आर्द्र दक्षिणी मैदानी | बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़ | मक्का, चावल, ज्वार, उड़द | गेहूं, चना |
| V - आर्द्र दक्षिणी पूर्वी मैदानी | कोटा, बारां, बूँदी, झालावाड़ | ज्वार, सोयाबीन | गेहूं, सरसों |
कृषि अनुसंधान केन्द्र
| केन्द्र | स्थान |
| राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र | सेवर (भरतपुर), 20 अक्टूबर 1993 |
| बाजरा अनुसंधान केन्द्र | बाड़मेर (उत्कृष्टता: जोधपुर) |
| मक्का अनुसंधान केन्द्र | बाँसवाड़ा |
| चावल अनुसंधान केन्द्र | बाँसवाड़ा |
| ज्वार अनुसंधान केन्द्र | वल्लभनगर (उदयपुर) |
| ईसबगोल अनुसंधान केन्द्र | जोधपुर |
| CAZRI | जोधपुर (1959) |
| AFRI | जोधपुर (1987) |
| चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्था | जयपुर (8 अगस्त 1998) |
| केन्द्रीय बैर एवं खजूर अनुसंधान केन्द्र | जोहड़बीड़ (बीकानेर) |
| केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्था (CIAH) | बीछावाल (बीकानेर, 1993) |
| केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र | तबीजी (अजमेर, 2000) |
| राजस्थान ऑलिव कल्टीवेशन लिमिटेड | दुगापुरा (जयपुर, 2007) |
जैविक कृषि
- भारत का प्रथम जैविक राज्य: सिक्किम (2016)
- राजस्थान का एकमात्र जैविक जिला: डूंगरपुर
- एकमात्र जैविक गाँव: घाटी गाँव (उदयपुर)
- जैविक उत्कृष्टता केन्द्र: झालावाड़
- जैविक अनुसंधान केन्द्र: जाखोड़ा (कोटा)
- प्रथम ऑर्गेनिक फूड फेस्टिवल: 5-7 मई 2023, जवाहर कला केन्द्र (जयपुर)
E-NAM
- शुरू: 14 अप्रैल 2016, अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल
- राजस्थान में 145 मण्डियाँ
- राज्य की प्रथम ई-नाम मण्डी: रामगंज (कोटा)
कृषक उपहार योजना
- प्रारम्भ: 1 अक्टूबर 2021
- राज्य स्तर: 2.5 लाख/1.5 लाख/1 लाख
- खण्ड स्तर: 50/30/20 हजार
- मण्डी स्तर: 25/15/10 हजार
अध्याय 20: पशुपालन
पशुगणना 2019 (20वीं)
| विवरण | आँकड़े |
| कुल पशुधन | 568.01 लाख |
| कुक्कुट | 146.23 लाख (82.23% वृद्धि) |
| देश के कुल पशुधन का | 10.60% |
| देश में स्थान | द्वितीय (UP के बाद) |
| प्रति हजार व्यक्तियों पर पशुधन | 829 |
| पशु धनत्व | 166 |
पशुधन विवरण
| पशु | संख्या | देश में स्थान | देश का % | सर्वाधिक जिला | न्यूनतम जिला |
| बकरी | 2.08 करोड़ | प्रथम | 14% | बाड़मेर | धौलपुर |
| ऊँट | 2.13 लाख | प्रथम | 84.43% | जैसलमेर | प्रतापगढ़ |
| गधा | 23 हजार | प्रथम | 18.91% | बाड़मेर | टोंक |
| भैंस | 1.37 करोड़ | द्वितीय | 12.47% | जयपुर | जैसलमेर |
| घोड़ा | 34 हजार | तृतीय | 9.84% | जालौर | डूंगरपुर |
| भेड़ | 79 लाख | चतुर्थ | 10.64% | बाड़मेर | बाँसवाड़ा |
| गाय | 1.39 करोड़ | छठा | 7.24% | बीकानेर | धौलपुर |
गाय की नस्लें
| नस्ल | क्षेत्र | प्रजनन केन्द्र | विशेष |
| नागौरी | नागौर, जोधपुर, बीकानेर, अजमेर | नागौर | सुहालक प्रदेश, मजबूत बैल, परबतसर पशु मेला |
| हरियाणवी | हरियाणा सीमावर्ती | कुम्हेर (डीग) | — |
| कांकरेज | सिरोही, सांचौर, पाली, नागौर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौर | चौहटन (बाड़मेर) | कच्छ का रन, सबसे भारी, द्विप्रयोजनीय |
| थारपारकर | बाड़मेर, फलौदी, जैसलमेर, बालोतरा, जोधपुर, जालौर | चांदन (जैसलमेर) | सर्वाधिक रोग प्रतिरोधक, थारी |
| मालवी | बाँसवाड़ा, कोटा, झालावाड़, डूंगरपुर | डग (झालावाड़) | चन्द्रभागा व गोमती सागर पशु मेले |
| गिर | अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा | रामसर (अजमेर) | चितकबरी, अजमेरा/रैंडा |
| राठी | श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़, जैसलमेर | नोहर (हनुमानगढ़) | राजस्थान की कामधेनु, सर्वाधिक दूध |
भैंस की नस्लें
| नस्ल | क्षेत्र | विशेष |
| मुर्रा/खुण्डी | जयपुर, अलवर, कोटपूतली-बहरोड, खैरथल-तिजारा, भरतपुर, डीग, दौसा | मोटगुमरी (पाकिस्तान), सर्वाधिक दूध, सर्वाधिक वसा |
| भदावरी | करौली, धौलपुर, भरतपुर | भदावरी क्षेत्र (UP), भूरा (तांबे जैसा) |
| मेहसाना | सिरोही, जालौर, बाड़मेर, बालोतरा | मेहसाना (गुजरात) |
| जाफराबादी | डूंगरपुर, उदयपुर, सलूम्बर, सिरोही, जालौर, झालावाड़ | काठियावाड़ (गुजरात), सबसे शक्तिशाली मादा |
बकरी की नस्लें
| नस्ल | क्षेत्र | विशेष |
| अलवरी/जखराना | जखराना (अलवर) | सर्वश्रेष्ठ, सर्वाधिक दूध |
| बरबरी/बड़वारी | अलवर, डीग, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर | सर्वाधिक सुन्दर |
| जमनापरी | हाड़ौती | सबसे बड़ी |
| शेखावाटी | सीकर, चूरू, झुंझुनूं | काजरी द्वारा 1959, बिना सींग |
| मारवाड़ी | पश्चिम राजस्थान | सबसे प्राचीन, सर्वाधिक |
| सिरोही | सिरोही (सर्वाधिक) | — |
| लोही | बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, बीकानेर | सर्वाधिक मांस |
| झरवाड़ी | पूर्वी राजस्थान | — |
| परबतसरी | नागौर, डीडवाना-कुचामन, अजमेर, जयपुर | हरियाणा बीटल + सिरोही |
ऊँट की नस्लें
| नस्ल | क्षेत्र | विशेष |
| नाचना | सम (जैसलमेर) | सबसे सुन्दर एवं सर्वश्रेष्ठ, BSF सेना |
| जैसलमेरी | जोधपुर, जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा | तेज दौड़, मतवाली चाल |
| गोमठ | जोधपुर, जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा | तेज दौड़ |
| बीकानेरी | बीकानेर, हनुमानगढ़, गंगानगर | भारी, बोझा ढोने, सर्वाधिक |
घोड़ों की नस्लें
- काठियावाड़ी: काठियावाड़ (गुजरात), युद्ध, अरबी जैसी
- मालानी: सर्वश्रेष्ठ, सिंधी + काठियावाड़ी, पोलो
- मारवाड़ी: सर्वाधिक, स्वामीभक्त
डेयरी विकास
- डेयरी विभाग: 1973
- RSDDC: 1975
- RCDF: 1977, जयपुर, 'सरस' ब्रांड
- त्रिस्तरीय ढांचा: RCDF (शीर्ष), जिला दुग्ध संघ, प्राथमिक दुग्ध समिति
- सबसे बड़ी डेयरी: रानीवाड़ा (जालौर)
- गंगमूल: हनुमानगढ़, उम्मूल: बीकानेर, वरमूल: जोधपुर
- पद्मा डेयरी: अजमेर (सबसे पुरानी, 1971)
- श्वेत क्रांति/ऑपरेशन फ्लड: 1970, वर्गीज कुरियन
- विश्व दुग्ध दिवस: 1 जून, राष्ट्रीय दुग्ध दिवस: 26 नवम्बर
- सबसे बड़ा दुग्ध पैकिंग केन्द्र: कोटपूतली
- प्रथम डेयरी एवं फूड साइंस महाविद्यालय: उदयपुर
प्रमुख पशु मेले
| मेला | स्थान |
| मल्लीनाथ पशु मेला | तिलवाड़ा (बालोतरा) — प्राचीनतम |
| बलदेव पशु मेला | मेड़ता |
| गोमती सागर पशु मेला | झालावाड़ |
| वीर तेजाजी पशु मेला | परबतसर (डीडवाना-कुचामन) |
| गोगाजी पशु मेला | हनुमानगढ़ |
| जसवंत पशु मेला | भरतपुर |
| पुष्कर पशु मेला | अजमेर |
| चंद्रभागा पशु मेला | झालरापाटन |
| रामदेव पशु मेला | मानासर (नागौर) |
मत्स्य पालन
- सर्वाधिक मछली उत्पादन: उदयपुर, बूँदी
- सबसे बड़ा मछली उत्पादक बांध: कानोता (जयपुर)
- राजस्थान का पहला मछली अभयारण्य: बड़ी तालाब (उदयपुर)
- मत्स्य परीक्षण महाविद्यालय: उदयपुर
- मत्स्य उत्पादन 2023-24: 91,349.43 मैट्रिक टन
अध्याय 21: औद्योगिक विकास
औद्योगिक क्षेत्र का महत्व
- GSDP में योगदान: 28.21% (प्रचलित), 29.84% (स्थिर)
- खनन: 11.99%, विनिर्माण: 42.27% (प्रचलित)
- राज्य में 424 औद्योगिक क्षेत्र, 44,560+ इकाइयाँ
उद्योगों का वर्गीकरण
| आधार | प्रकार | उदाहरण |
| कच्चा माल | कृषि, खनिज, रसायन, पशु, इंजीनियरिंग, वन | सूती वस्त्र, सीमेंट, उर्वरक, ऊन, मीटर, बीड़ी |
| उपयोग | आधारभूत, पूँजीगत, मध्यवर्ती, उपभोक्ता | इस्पात, मशीनरी, रंग, मोटर गाड़ियाँ |
| स्वामित्व | सार्वजनिक, निजी, संयुक्त, सहकारी | गंगानगर शुगर मिल्स, सीमेंट, पचपदरा, स्पिनफेड |
| पूँजी निवेश | सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद | — |
प्रमुख उद्योग
सूती वस्त्र उद्योग
- राजस्थान का प्रथम कृषि आधारित उद्योग, सबसे प्राचीन
- राजस्थान का मैनचेस्टर: भीलवाड़ा
- प्रथम सूती वस्त्र मिल: द कृष्णा मिल्स (1889, ब्यावर)
- सार्वजनिक क्षेत्र: एडवर्ड मिल्स (1906), महालक्ष्मी मिल्स (1925), विजयनगर कॉटन मिल्स (1932)
- सहकारी: गुलाबपुरा (1965), श्रीगंगानगर (1978), गंगापुर (1981)
- स्पिनफेड: 7 मार्च 1992, संचालन 1 अप्रैल 1993
चीनी उद्योग
- राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग
- प्रथम शुगर मिल: द मेवाड़ शुगर मिल्स (1932, भोपालसागर, चित्तौड़गढ़)
- श्रीगंगानगर शुगर मिल्स (1945, बीकानेर) — बहुउद्देशीय
सीमेंट उद्योग
- भारत में सीमेंट उत्पादन में प्रथम: राजस्थान
- सर्वाधिक कारखाने: चित्तौड़गढ़ जिला
- प्रथम: ACC (1915, लाखेरी, बूँदी)
- सबसे बड़ा व्हाइट सीमेंट: अल्ट्राटेक (खारिया खंगार, जोधपुर)
- प्रथम व्हाइट सीमेंट: जे.के. व्हाइट (गोटन, नागौर, 1984)
रसायन उद्योग
- उर्वरक: श्रीराम फर्टिलाइजर (रामनगर, कोटा) — सबसे बड़ा, चम्बल फर्टिलाइजर (गढेपान, कोटा)
- नमक: सांभर साल्ट लिमिटेड (जयपुर), राजस्थान स्टेट केमिकल (डीडवाना), पंचभरा साल्ट (1960, बालोतरा)
- आयोडीन: राजस्थान देश में द्वितीय
- सर्वाधिक शुद्ध नमक: पचपदरा
- नमक की सबसे बड़ी मण्डी: नावां (डीडवाना-कुचामन)
काँच उद्योग
- सर्वाधिक काँच उत्पादन: धौलपुर
- द हाईटेक प्रिसिजन ग्लास फैक्ट्री (1964, धौलपुर)
- सेमकोर ग्लास इण्डस्ट्रीज (कोटा) — दक्षिण कोरिया सहयोग, TV पिक्चर ट्यूब
- फ्लोर ग्लास सिंटर: भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा), सेंट गोबेन (फ्रांस)
सिरेमिक उद्योग
- राजस्थान का पहला सिरेमिक जोन: 2014, खिलोट, नीमराना (कोटपूतली-बहरोड)
- सिरेमिक कॉम्पलेक्स/पार्क: खारा (बीकानेर)
ऊन उद्योग
- देश के कुल ऊन उत्पादन में प्रथम (47.89%)
- एशिया की सबसे बड़ी ऊन मण्डी: बीकानेर
- प्रमुख इकाइयाँ: स्टेट वूलन मिल्स (बीकानेर), विस्टेड स्पिनिंग मिल्स (चूरू, लाडनूं)
- केन्द्रीय ऊन विकास बोर्ड: जोधपुर (1987)
- केन्द्रीय भेड़ एवं अनुसंधान केन्द्र: मालपुरा (टोंक)
चमड़ा उद्योग
- मुख्यतः जयपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, टोंक, जोधपुर
- कशीदे वाली जूतियाँ: भीनमाल (जालौर)
- UNO द्वारा चमड़ा उद्योग विकास: बडू गाँव (नागौर)
- लेदर कॉम्पलेक्स: मानपुरा, माचेड़ी (जयपुर)
इंजीनियरिंग उद्योग
- हिन्दुस्तान मशीन टूल्स (1967, अजमेर) — चेकोस्लोवाकिया सहयोग
- हिन्दुस्तान इन्स्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (1964, कोटा)
- होंडा मोटर कार: खुशखेड़ा (खैरथल-तिजारा)
- होंडा मोटरसाइकिल: टपूकड़ा (अलवर)
- जे.के. टायर: कांकरौली (राजसमंद)
- श्रीराम टायर: कोटा
वन उपज आधारित उद्योग
| उद्योग | स्थान |
| लकड़ी का सामान | बस्सी (चित्तौड़गढ़), उदयपुर, सवाई माधोपुर, जोधपुर, बाड़मेर |
| अगरबत्ती | जयपुर, अजमेर, अलवर |
| बीड़ी | जोधपुर, कोटा, टोंक, चित्तौड़गढ़ (मयूर छाप बीड़ी — टोंक) |
| रेशम | उदयपुर, बाँसवाड़ा, कोटा |
| तेंदू पत्ता | प्रतापगढ़, उदयपुर, चित्तौड़, कोटा, झालावाड़ |
| खस | भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक |
| महुआ | डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, माही क्षेत्र |
| गोंद | चौहटन (बाड़मेर), जोधपुर |
| कत्था | उदयपुर, चित्तौड़गढ़ |
| बांस | बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर |
RIICO (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम)
- स्थापना: 1980 (पूर्व में RIMDC, 1969)
- राज्य में औद्योगिक विकास की शीर्ष संस्था
- 2023-24: 10 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित
- सबसे बड़ा: कुंज बहारीपुरा (जयपुर, 491.04 हेक्टेयर)
- सबसे छोटा: माल की टूस (उदयपुर, 11.76 हेक्टेयर)
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)
- SEZ अधिनियम: 2005, लागू: 10 फरवरी 2006
- राजस्थान में नया SEZ एक्ट: 2015
- प्रथम एवं द्वितीय: जेम्स एंड ज्वैलरी SEZ (सीतापुरा, जयपुर)
- महिन्द्रा मल्टी सेक्टोरल SEZ: अजमेर रोड (जयपुर)
- 5 SEZ अधिसूचित/निर्माणाधीन: सोमानी (खुशखेड़ा), वास्टका (जयपुर), जेनपेक्ट (जयपुर), मानसरोवर (जोधपुर), RNB Infrastructure (बीकानेर)
DMIC (दिल्ली-मुंबई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर)
- दादरी (UP) से जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (महाराष्ट्र)
- कुल लम्बाई: 1504 किमी, 6 राज्य
- राजस्थान का 38% हिस्सा, ~60% क्षेत्रफल प्रभावित
- राजस्थान में 5 नोड: खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना, जयपुर-दौसा, अजमेर-किशनगढ़, राजसमंद-भीलवाड़ा, पाली-मारवाड़
- प्रथम चरण: 2 नोड विकसित (खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना, जोधपुर-पाली-मारवाड़)
राजस्थान लघु उद्योग निगम (RajSICO)
- स्थापना: 3 जून 1961, मुख्यालय जयपुर
- कार्य: लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता, प्रोत्साहन, विपणन
- हाडवेयर टेकपार्क: कुकस (जयपुर)
- हेण्डीक्राफ्ट पार्क: जोधपुर व जैसलमेर
- मसाला पार्क: रामपुराभाटियान मथानिया (जोधपुर)
- साइबर पार्क: जोधपुर
- 4 EPIP: मानसरोवर (जयपुर), भिवाड़ी, बासनी (जोधपुर), भीलवाड़ा
- 4 कंटेनर डिपो: सीतापुरा (जयपुर), बोरनाडा (जोधपुर), नीमराना (कोटपूतली-बहरोड)
राजस्थान वित्त निगम (RFC)
- स्थापना: 1955, जयपुर
- 31 मार्च 2024 तक: 84,595 इकाइयों को ₹8,918 करोड़ का ऋण
- योजनाएँ: शिल्पबाड़ी, सेमफैक्स, टेक्नोशिल्प, गुडबोरोवर, युवा उद्यमिता प्रोत्साहन, सरल
राजस्थान हस्तशिल्प नीति 2022
- जारी: 17 सितम्बर 2022, प्रभावी: 31 मार्च 2026
- प्रदेश की पहली हस्तशिल्प नीति
- लक्ष्य: 5 वर्षों में 50,000 नए रोजगार
- ₹3 लाख तक ऋण पर 100% ब्याज राज्य सरकार
GI Tag (भौगोलिक संकेतक)
| क्र. | नाम | स्थान |
| 1 | बगरू प्रिंट | जयपुर |
| 2 | बीकानेरी भुजिया | बीकानेर |
| 3 | ब्लू पॉटरी | जयपुर |
| 4 | ब्लू पॉटरी (लोगो) | जयपुर |
| 5 | कठपुतली | राजस्थान |
| 6 | कठपुतली (लोगो) | राजस्थान |
| 7 | कोटा डोरिया | कोटा |
| 8 | कोटा डोरिया (लोगो) | कोटा |
| 9 | मकराना संगमरमर | नागौर |
| 10 | मोलेला मिट्टी कला | नाथद्वारा (राजसमंद) |
| 11 | मोलेला मिट्टी कला (लोगो) | नाथद्वारा (राजसमंद) |
| 12 | फुलकारी | राजस्थान, पंजाब, हरियाणा |
| 13 | सांगानेरी प्रिंट | जयपुर |
| 14 | थेवा कला | प्रतापगढ़ |
| 15 | पोकरण पॉटरी | जैसलमेर |
| 16 | सोजत मेहंदी | पाली (सितम्बर 2021) |
| 17 | पिछवाई कला | नाथद्वारा (अगस्त 2023) |
| 18 | जोधपुरी बंधेज | जोधपुर (अगस्त 2023) |
| 19 | कोफ्तगरी | उदयपुर (अगस्त 2023) |
| 20 | उस्ता कला | बीकानेर (अगस्त 2023) |
| 21 | कशीदाकारी शाफ्ट | बीकानेर (अगस्त 2023) |
अध्याय 22: सहकारिता
सहकारिता का इतिहास
- विश्व में सहकारिता की शुरुआत: 1844, इंग्लैण्ड के लिंकाशायर मिल में रॉबर्ट ऑवन द्वारा — 'विश्व में सहकारिता के जनक'
- भारत में सहकारिता के जनक: लॉर्ड कर्जन (1904, प्रथम सहकारी साख अधिनियम)
- राजस्थान में सहकारिता आंदोलन: 1904, अजमेर
- राजस्थान की प्रथम सहकारी समिति: अक्टूबर 1905, भिनाय (अजमेर)
- 1910: केन्द्रीय सहकारी बैंक, अजमेर
- 1915: सर्वप्रथम भरतपुर राज्य में सहकारी कानून
- 1965: राज्य सहकारी समिति अधिनियम
- 14 नवम्बर 2002: नया राज्य सहकारी समिति अधिनियम 2001 लागू
- 97वां संविधान संशोधन 2011 (15 फरवरी 2012 से लागू)
संवैधानिक प्रावधान
| भाग | अनुच्छेद | प्रावधान |
| भाग-3 | 19(1)(ग) | सहकारी समिति बनाने का अधिकार |
| भाग-4 | 43B | राज्य सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करें |
| भाग-9B | 243ZH-243ZT | सहकारी समितियों का गठन, नियंत्रण |
ग्रामीण सहकारी बैंक (त्रिस्तरीय)
- शीर्ष: राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक, 14 अक्टूबर 1953)
- जिला स्तर: 29 जिला सहकारी बैंक
- प्राथमिक स्तर: प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ (कुल 8273)
- अल्पकालीन साख: 5 वर्ष तक
- दीर्घकालीन साख: 5-15 वर्ष (राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक, 26 मार्च 1957)
शहरी सहकारी बैंक
- कुल 41 शहरी सहकारी बैंक
- 6 महिला शहरी सहकारी बैंक (उदयपुर-2, जयपुर-2, कोटा-1, भीलवाड़ा-1)
- 3 रेलवे शहरी सहकारी बैंक: जयपुर, जोधपुर, बीकानेर
राजफेड (राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ)
- स्थापना: 26 नवम्बर 1957
- कार्य: MSP पर खरीद, गोदाम, भण्डारण, PDS
- झोटवाड़ा (जयपुर): पशु आहार फैक्ट्री, कीटनाशक दवाई फैक्ट्री
अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना
- 2023-24: ~1 करोड़ परिवारों को मुफ्त राशन के साथ अन्नपूर्णा फूड पैकेट
- 1-1 किलो दालें, चीनी, नमक, 1 लीटर तेल, मसाले (मिर्च 100g, धनिया 100g, हल्दी 50g)
कॉनफेड (राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड)
- स्थापना: 27 मार्च 1967 — उपभोक्ता क्षेत्र की शीर्ष संस्था
- 38 जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार पंजीकृत, 33 कार्यरत
महिला सहकारिता
- राजपुताना महिला नागरिक सहकारी बैंक: 30 अगस्त 1995 (प्रथम महिला सहकारी बैंक)
- मुख्यालय: जयपुर
- वर्तमान में 6 महिला नागरिक सहकारी बैंक
- अपना घर बचत योजना: 2001, प्रथम मिनी बैंक — अकोली ग्राम (जालौर)
- 947 राजीविका महिला स्वांगीय विकास सहकारी समितियाँ पंजीकृत
- 8.70 लाख+ महिलाएं लाभान्वित
प्रमुख योजनाएँ
| योजना | विवरण |
| राजस्थान ग्रामीण आजीविका ऋण योजना | 10 अक्टूबर 2022, ग्रामीण दस्तकार, अकृषि कार्य, लघु-सीमांत कृषक |
| कृषि उपज रहन ऋण योजना | 1 जून 2020, लघु-सीमांत 1.5 लाख, अन्य 3 लाख, 3% ब्याज, 3 माह |
| स्वरोजगार क्रेडिट योजना | गैर-कृषि गतिविधियों हेतु ₹50,000 तक, 5 वर्ष |
| महिला विकास ऋण योजना | 2020, 2 व्यक्तियों की गारंटी, ₹50,000, 5 वर्ष, 3% ब्याज |
| कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) | 15 मई 2020, ₹1 लाख करोड़, 3% ब्याज अनुदान |
| मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सरबल योजना | 1 फरवरी 2019, ₹5/लीटर अनुदान |
| राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना | 1 जनवरी 2019, अष्टम चरण 1 फरवरी 2024, ₹5 लाख/₹2.50 लाख |
| राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना | 2019, 30 नवम्बर 2018 तक के बकाया, 2 लाख तक, 20.84 लाख किसान, ₹7888.20 करोड़ |
| ज्ञान सागर ऋण योजना | 2002, 18-30 आयु, भारत 6 लाख, विदेश 10 लाख |
सहकारिता में महत्वपूर्ण तथ्य
| संस्था | संख्या |
| संघ (फेडरेशन) | 23 |
| मिल्क यूनियन | 24 |
| जिला सहकारी बैंक | 29 |
| प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक | 36 |
| उपभोक्ता होलसेल भण्डार | 38 |
| प्राथमिक कृषि ऋण दायी सहकारी समितियाँ | 8592 |
| सहकारी समितियाँ | 42,283 |
अध्याय 23: परिवहन
सड़क परिवहन
- 1949: 13,553 किमी, मार्च 2024: 3,17,121 किमी
- सड़क घनत्व: 92.66 किमी/100 वर्ग किमी
- 39,408 गाँव सड़क से जुड़े (91.09%)
- सर्वाधिक सड़क घनत्व: डूंगरपुर, न्यूनतम: जैसलमेर
| सड़क वर्गीकरण | लम्बाई (किमी) |
| राष्ट्रीय राजमार्ग | 10,790 |
| राज्य राजमार्ग | 17,376 |
| मुख्य जिला सड़क | 14,372 |
| अन्य जिला सड़क | 68,265 |
| ग्रामीण सड़क | 2,06,318 |
| कुल | 3,17,121 |
राष्ट्रीय राजमार्ग (52)
| NH | मार्ग | राजस्थान में लम्बाई | विशेष |
| NH-44 | श्रीनगर-कन्याकुमारी | 27 किमी (धौलपुर) | सबसे लम्बा, केवल 1 जिला |
| NH-48 | दिल्ली-मुंबई | 709.91 किमी | स्वर्णिम चतुर्भुज, 8 जिले |
| NH-52 | संगरूर-अकोरा | 793.55 किमी | राजस्थान का सबसे लंबा NH |
| NH-11 | म्याजलार-रेवाड़ी | 763.60 किमी | दूसरा सबसे लंबा |
| NH-62 | पिंडवाड़ा-अबोहर | 726.57 किमी | तीसरा सबसे लंबा |
| NH-25 | ब्यावर-मुनाबाव | 481.17 किमी | पूर्णतः राजस्थान में सबसे बड़ा |
| NH-919 | रेवाड़ी-सोहाना | 5 किमी | सबसे छोटा |
एक्सप्रेस-वे
- देश का प्रथम: गुड़गाँव-जयपुर एक्सप्रेस-वे
- राजस्थान का प्रथम 6 लेन: जयपुर-किशनगढ़
- 9 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित (कुल 2750 किमी)
- सबसे बड़ा: जालौर-झालावाड़ (402 किमी)
- सबसे छोटा: कोटपूतली-किशनगढ़ (181 किमी)
- जयपुर-जोधपुर-पचपदरा (350 किमी): NHAI द्वारा
रेल परिवहन
- राजस्थान में प्रथम रेल: अप्रैल 1874, बांदीकुई-दौसा से आगरा
- प्रथम रेलवे कारखाना: 1879, अजमेर
- बजट आवंटन 2024-25: ₹9,959 करोड़
- विद्युतीकरण: 5,703 रेल किमी (97% ब्रॉडगेज)
- अमृत स्टेशन योजना: 85 स्टेशन
- 4 वंदे भारत: अजमेर-चंडीगढ़, जोधपुर-साबरमती, उदयपुर-जयपुर, उदयपुर-आगरा
रेलवे ज़ोन व मण्डल
- 2 ज़ोन: उत्तर-पश्चिमी (जयपुर, 1 अप्रैल 2003), पश्चिमी-मध्य (जबलपुर)
- 5 मण्डल: जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा
प्रमुख रेल सेवाएँ
| सेवा | विवरण |
| पैलेस ऑन व्हील्स | 26 जनवरी 1982, RTDC + भारतीय रेलवे, 2013 में उत्तर भारत की श्रेष्ठ लग्जरी रेन |
| रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स | 17 जनवरी 2009, RTDC + भारतीय रेलवे |
| हेरिटेज ऑन व्हील्स | 2003, शेखावटी, मीटर गेज, भाप इंजन |
| फैरी क्वीन | — |
रेलवे के उपक्रम
- सिमको वैगन फैक्ट्री: भरतपुर (31 जनवरी 1957)
- पश्चिमी रेलवे क्षेत्रीय प्रबंधन केन्द्र: उदयपुर (भारत का सबसे बड़ा रेलवे मॉडल किट)
- भारतीय रेलवे अनुसंधान एवं परीक्षण केन्द्र: पंचपदरा (बाड़मेर)
- रेलवे विद्युत लोकोशेड: कोटा
- रेलवे परीक्षण रैक: नावां (नागौर)
- रेलवे प्रशिक्षण स्कूल: उदयपुर
- रेलवे भर्ती मण्डल: अजमेर
महत्वपूर्ण तथ्य
- एशिया का सबसे बड़ा मीटर गेज यार्ड: फुलेरा (जयपुर)
- सौर ऊर्जा संचालित प्रथम रेलवे स्टेशन: गोरमघाट (राजसमंद)
- राजस्थान का प्रथम महिला संचालित रेलवे स्टेशन: गांधीनगर (जयपुर)
- भारत के सबसे स्वच्छ रेलवे स्टेशन: जयपुर, जोधपुर, दुगारपुर (WB)
- राजस्थान का प्रथम Cash Less Railway Station: जयपुर
- सबसे बड़ा रेलवे एलिवेटर: जोधपुर (भगत की कोठी)
- रेलवे विहीन जिले: प्रतापगढ़
- नैरोगेज: केवल धौलपुर जिले में
- थार एक्सप्रेस: मुनाबाव (भारत) से खोखरापार (पाक), 1899 में शुरू, 1965 युद्ध के बाद बंद, 17 फरवरी 2006 को पुनः प्रारम्भ, 2019 में पुनः बंद
वायु परिवहन
- शुरुआत: 1959, महाराजा उम्मेदसिंह, जोधपुर फ्लाइंग क्लब
- ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट: नीमराना (प्रथम, 74% निजी + 26% राज्य/AAI)
- अन्य ग्रीनफील्ड: शिवदासपुरा (जयपुर), गंगारी (जोधपुर), किशनगढ़ (अजमेर), कोटकासिम (अलवर-प्रस्तावित)
नागरिक हवाई अड्डे
| हवाई अड्डा | स्थान | विशेष |
| सांगानेर अंतर्राष्ट्रीय | जयपुर | राजस्थान का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय (29 सितम्बर 2005), देश का 14वां, अडानी ग्रुप को 50 वर्ष के लिए |
| महाराणा प्रताप | डबोक (उदयपुर) | प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय |
| जोधपुर | जोधपुर | — |
| कोटा | कोटा | — |
| बीकानेर | बीकानेर | — |
| किशनगढ़ | अजमेर | ग्रीनफील्ड |
सैन्य हवाई अड्डे (7)
- नाल (बीकानेर) — एशिया का सबसे अच्छा भूमिगत एयरपोर्ट
- सूरतगढ़, जैसलमेर, फलौदी, रातानाडा (जोधपुर), उत्तरलाई (बाड़मेर), ख्यार (अजमेर)
हवाई पट्टियाँ (22)
- 18 सरकारी, 4 निजी
- निजी: निवाई (टोंक, वनस्थली विद्यापीठ), बारां (अडानी), कांकरोली (राजसमंद, JK), पिलानी (झुंझुनूं, बिड़ला)
पाइपलाइन परिवहन
| पाइपलाइन | विवरण |
| HBJ गैस पाइपलाइन | हजीरा (गुजरात) — बीजापुर (MP) — जगदीशपुर (UP), GAIL द्वारा; राजस्थान में: अन्ता (बारां), चम्बल फर्टिलाइजर (कोटा), सेमकोर ग्लास (कोटा) |
| जामनगर-लोनी LPG | 630 किमी, GAIL; राजस्थान में: आबू रोड, पाली, अजमेर, जयपुर, अलवर; 2 बस्टर: गांदेरी (अजमेर), जयपुर |
| सलाया-मथुरा क्रूड | 10 C, IOC; आबू रोड, अजमेर |
| विजयनगर-कोटा गैस | गुना (MP) से गढ़ेपान (कोटा), केशोरायपाटन विद्युत संयंत्र |
| कांडला-भटिंडा | HPCL, 1014 किमी |
| मुंदड़ा-भटिंडा | HPCL + समस्त एनर्जी लिमिटेड |
जयपुर मेट्रो
- निर्माण शिलान्यास: 14 फरवरी 2011, संचालन: 3 जून 2015
- ADB ऋण सहायता (फेज-1B)
- फेज-1: मानसरोवर से बड़ी चौपड़ (फेज-1A: मानसरोवर-चांदपोल, फेज-1B: चांदपोल-बड़ी चौपड़, फेज-1C: बड़ी चौपड़-रामसपोर्ट नगर, फेज-1D: मानसरोवर-200 फीट बायपास)
अध्याय 24: पर्यटन
पर्यटन विभाग
- स्थापना: 1956 (एक स्वतंत्र विभाग के रूप में)
- उद्देश्य: पर्यटन नीतियों, कार्यक्रमों का क्रियान्वयन
RTDC (राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड)
- गठन: 24 नवम्बर 1978
- 74 आवास इकाइयाँ, 28 भोजन इकाइयाँ, 22 बार, 29 IMFL शॉप्स
- परिवहन: पिंक सिटी बाई नाईट टूर (2006), 15 पैकेज टूर
- नौकायन: सिलीसेढ़ (अलवर), कायलाना (जोधपुर), जयसमंद (सलूम्बर)
- लाइट एंड साउंड शो: कुम्भलगढ़, चित्तौड़गढ़, गढ़सीसर, मीराबाई स्मारक, मचकुंड, जयनिवास उद्यान
RSHCL (राजस्थान राज्य होटल निगम लिमिटेड)
- स्थापना: 7 जून 1965
- 3 होटल: खासाकोठी (जयपुर), आनंदभवन (उदयपुर), अशोक (जयपुर)
RITMAN (राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट)
- स्थापना: 29 अक्टूबर 1996, मुख्यालय जयपुर
- कार्य: मानव संसाधन विकास, गाइड प्रशिक्षण
REXCO (राजस्थान एक्स-सर्विसमेन कॉर्पोरेशन)
- पर्यटन विभाग की भर्तियाँ, पर्यटक सहायता बल
पर्यटन के उद्योग का दर्जा
- 4 मार्च 1989: पर्यटन को उद्योग का दर्जा
- राजस्थान: पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने वाला प्रथम राज्य
- 2004-05: पर्यटन को जन उद्योग का दर्जा
- 18 मई 2022: पर्यटन का पूर्ण उद्योग का दर्जा
पर्यटक आँकड़े (2024)
| श्रेणी | संख्या (लाख) |
| घरेलू पर्यटक | 2280.12 |
| अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक | 20.72 |
| कुल | 2300.84 |
पर्यटन नीतियाँ
- प्रथम पर्यटन नीति: 27 सितम्बर 2001
- राजस्थान पर्यटन नीति 2020: 9 सितम्बर 2020
- राजस्थान इको टूरिज्म पॉलिसी 2021: 15 जुलाई 2021
- राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति 2022: 18 अप्रैल 2022
- राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना 2022: 30 नवम्बर 2022
- राजस्थान पर्यटन इकाई नीति 2024: 4 दिसम्बर 2024
राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण
- गठन: मार्च 2011
- अध्यक्ष: पर्यटन मंत्री (दया कुमारी)
- 102 मेले चिन्हित, 42 पंजीकृत
UNESCO विश्व धरोहर स्थल
| स्थल | वर्ष | प्रकार |
| केवलादेव घना पक्षी विहार | 1985 | प्राकृतिक (प्रथम) |
| जंतर-मंतर, जयपुर | 2010 | सांस्कृतिक (प्रथम) |
| कालबेलिया नृत्य | 2010 | अमूर्त सांस्कृतिक (प्रथम) |
| 6 पहाड़ी किले | 2013 | जैसलमेर, गागरोन, रणथम्भौर, चित्तौड़, आमेर, कुम्भलगढ़ |
| जयपुर परकोटा | 6 जुलाई 2019 | सांस्कृतिक |
प्रमुख पर्यटन सर्किट
- मरू सर्किट (डेजर्ट रायंग्ल/मरू त्रिकोण): जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर
- शेखावाटी सर्किट: झुंझुनूं, सीकर, चूरू
- हाड़ौती सर्किट: कोटा, बूँदी, झालावाड़, बारां
- ढूंढाड़ सर्किट: जयपुर, दौसा
- मेवाड़ सर्किट: उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा
- मेरवाड़ा सर्किट: अजमेर, नागौर
- बृज-मेवात सर्किट: अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक
- वागड़ सर्किट: डूंगरपुर, बाँसवाड़ा
- गोडवाड़ सर्किट: जालौर, पाली, सिरोही
प्रमुख मेले व उत्सव
| मेला/उत्सव | स्थान | समय |
| पुष्कर पशु मेला | अजमेर | कार्तिक पूर्णिमा |
| ऊँट उत्सव | बीकानेर | जनवरी |
| मरू महोत्सव | जैसलमेर | जनवरी-फरवरी |
| डीग महोत्सव | डीग | फरवरी |
| गणगौर उत्सव | जयपुर | मार्च-अप्रैल |
| मेवाड़ उत्सव | उदयपुर | मार्च-अप्रैल |
| तीज उत्सव | जयपुर | जुलाई-अगस्त |
| पुष्कर मेला | अजमेर | नवम्बर |
| कजली तीज मेला | बूँदी | अगस्त |
| भृतहरि मेला | अलवर | सितम्बर |
नवीन पर्यटन पहल
- Rising Rajasthan Summit: 9-11 दिसम्बर 2024, जयपुर, 1,320 MoU, ₹96,967.61 करोड़ निवेश, 2,02,607 रोजगार
- ICONIC Destinations: आमेर-नाहरगढ़ (₹49.31 करोड़), जलमहल (₹96.61 करोड़)
- राजस्थान डोमेस्टिक ट्रेवल मार्ट: 13-15 सितम्बर 2024
- वेड इन इंडिया एक्सपो: 5 मई 2024 (देश में प्रथम)
- थीमेटिक टूरिज्म: हेरिटेज, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, एडवेंचर, वन्यजीव, मरूस्थल, MICE
पर्यटन पुरस्कार
| पुरस्कार | तिथि |
| बेस्ट डेकोरिन एवं डिजाइन पुरस्कार | 10 फरवरी 2024, मुंबई |
| MICE टूरिज्म पुरस्कार | 30 अप्रैल 2024 |
| सर्वश्रेष्ठ हेरिटेज डेस्टिनेशन | 19 जुलाई 2024, अहमदाबाद |
| सर्वश्रेष्ठ वाइल्ड लाइफ होटल (कैसल झूमर बावड़ी) | 19 जुलाई 2024 |
| पिल्ग्रिमेज डेस्टिनेशन ऑफ द ईयर | 27 जुलाई 2024, बेंगलुरु |
| बेस्ट बजटल मार्केटिंग बाई स्टेट | 31 अगस्त 2024, भोपाल |
| द मोस्ट प्रॉमिसिंग वेडिंग डेस्टिनेशन | 23 अक्टूबर 2024, पटना |
| ब्रांड कैरेवेन ऑफ द ईयर | 1 दिसम्बर 2024, पुणे |
| वेडिंग डेस्टिनेशन ऑफ द ईयर | 8 दिसम्बर 2024, हैदराबाद |
अध्याय 25: राजस्थान की संस्कृति
राज्य के प्रतीक
| प्रतीक | विवरण | दिनांक |
| राज्य वृक्ष | खेजड़ी (प्रोसोपिस सिनेरेरिया) | 31 अक्टूबर 1983 |
| राज्य पुष्प | रोहिड़ा (टेकोमेला एण्डलेटा) | 31 अक्टूबर 1983 |
| राज्य पक्षी | गोडावण (क्रायोटिस नाइग्रिसेप्स) | 21 मई 1981 |
| राज्य पशु | चिंकारा (गजेला बेनेटी) | 22 मई 1981 |
| राज्य पालतू पशु | ऊँट (केमेलस ड्रोमेडेरियस) | 19 सितम्बर 2014 |
| राज्य गीत | केसरिया बालम आवोनी पधारों म्हारे देश | 22 जून 2017 |
| राज्य नृत्य | घूमर | — |
| राज्य शास्त्रीय नृत्य | कथक | — |
| राज्य कवि | सूर्यमल्ल मिश्रण | — |
| राज्य खेल | बास्केटबॉल | 1948 |
| राज्य वाद्य यंत्र | अलगोजा | — |
| राज्य मिठाई | घेवर | — |
लोक नृत्य
- घूमर: राजस्थान का प्रमुख लोक नृत्य (महिलाओं द्वारा), शुभ अवसरों पर, शहनाई, ढोल, नगाड़ा
- प्रकार: घूमर (महिलाएँ), घूमरिया (बालिकाएँ), लूर (गरासिया स्त्रियाँ)
हस्तशिल्प
| हस्तशिल्प | स्थान | विशेष |
| बगरू प्रिंट | जयपुर | — |
| सांगानेरी प्रिंट | जयपुर | — |
| अजरख व मलीर प्रिंट | बाड़मेर | — |
| आकोला का आजम प्रिंट | चित्तौड़गढ़ | — |
| बंधेज | जोधपुर, जयपुर, बीकानेर, शेखावाटी | लहरिया, पोमचा |
| कशीदाकारी | सीकर, झुंझुनूं | जरी, गोटे का काम (खण्डेला) |
| गलीचे | जयपुर, टोंक, ब्यावर | — |
| नमदे | मालपुरा (टोंक), लवाण (दौसा) | — |
| दरिया | टांकला (नागौर) | — |
| फड़ चित्र | शाहपुरा (भीलवाड़ा) | जोशी परिवार |
| पिछवाईयाँ | नाथद्वारा | कृष्ण लीलाओं का चित्रण |
| ब्लू पॉटरी | जयपुर | मानसिंह प्रथम (लाहौर से), सवाई रामसिंह द्वितीय (विकास), कृपाल सिंह शेखावत |
| टैराकोटा | मौलेला (नाथद्वारा), अलवर, बीकानेर | कागजी (अलवर), सुनहरी (बीकानेर) |
| मीनाकारी | जयपुर | कुदरत सिंह |
| रमकड़ा उद्योग | डूंगरपुर | सोपस्टोन खिलौने |
| थेवा कला | प्रतापगढ़ | नाथूजी सोनी, महेश सोनी, जगदीश सोनी |
| उस्ता कला | बीकानेर | ऊँट की खाल पर चित्रकारी |
| कोफ्तगरी | जयपुर, अलवर, उदयपुर | लोहे पर सोने की तारकशी |
| कठपुतली | उदयपुर | — |
| पाव रजाई | जयपुर | — |
प्रमुख संस्कृतिक संस्थान
- जवाहर कला केन्द्र (JKK): 1993, जयपुर
- रवीन्द्र मंच: जयपुर (600 सीट मुख्य थिएटर, 3500 ओपन एयर, 125 मिनी थिएटर)
महत्वपूर्ण तथ्य
- विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी: बागोर हवेली (उदयपुर)
- विश्व का सबसे बड़ा चाँदी का पात्र: सिटी पैलेस (जयपुर)
- सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय पन्ना मण्डी: जयपुर
- कृषि रेशम/टसर उत्पादन: उदयपुर, बाँसवाड़ा, कोटा
अध्याय 26: यूनेस्को भू-पार्क एवं भू-धरोहर स्थल
भू-पार्क संकल्पना
यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क — एकल, एकीकृत भौगोलिक क्षेत्र जहाँ संरक्षण, शिक्षा और सतत विकास की समग्र अवधारणा के साथ अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक महत्व के स्थलों और परिदृश्यों का प्रबंधन किया जाता है।
राजस्थान में 12 भू-विरासत स्थल (GSI द्वारा)
| क्र. | स्थल | विशेषताएँ |
| 1 | जावर (उदयपुर) | खनिज व जीवाश्म संपदा, टूरिज्म साइट |
| 2 | रामगढ़ क्रेटर (बारां) | 165 मिलियन वर्ष पूर्व उल्कापिंड प्रभाव, 3 किमी व्यास, राजस्थान का प्रथम भू-विरासत स्थल |
| 3 | आकल फॉसिल वुड पार्क (जैसलमेर) | टेरोसोरस (डायनासोर) जीवाश्म, जुरासिक काल की द्विबीजपत्री लकड़ी |
| 4 | जोधपुर ग्रुप मालाणी आग्नेय चट्टानें (जोधपुर) | प्रीकैम्ब्रियन युग की आग्नेय गतिविधि |
| 5 | वेल्डेड टफ (जोधपुर) | मालानी ज्वालामुखीजैसे टीले, कांच, स्फटिक, फेल्डस्पार |
| 6 | स्ट्रोमेटोलाइट पार्क (झामरकोटडा, उदयपुर) | 180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानें |
| 7 | स्ट्रोमेटोलाइट पार्क (भोजुंडा, चित्तौड़गढ़) | नीले-हरे शैवाल व कार्बोनेट चट्टानें |
| 8 | ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट (सातूर, बूँदी) | दक्षिण-पूर्वी राजस्थान, टेक्टोनिक रेखा, अरावली व हाड़ौती को अलग करता है |
| 9 | गोसाण राजपुरा दरीबा (राजसमंद) | नेशनल जियो हेरिटेज साइट, अरल उदासीन कार्बोनेट चट्टानें |
| 10 | सैंड्रा ग्रेनाइट (पाली) | 900 मिलियन वर्ष पूर्व के विपुल आग्नेय शैल |
| 11 | बरवा कांग्लोमरेट (पाली) | क्लास्टिक तलछटी चट्टान, क्वाटर्जाइट व ग्रेनाइट नाइस कंकड़ |
| 12 | नेफेलाइन साइनाइट (किशनगढ़, अजमेर) | होलोक्रिस्टलाइन प्लूटोनिक चट्टान, नेशनल जियो हेरिटेज साइट |
राजस्थान में भू-विरासत संभावनाएँ
- चंबल के बीहड़ स्थलाकृतियाँ
- बैथोलिथ संरचना (आबू पर्वत)
- जल पट्टी (सरस्वती नदी के भूगर्भिक अवशेष)
- माइकाशिष्ट चट्टानें
- लूनी व घग्घर नदियों का पाट
- काली बेरी के चट्टानी भू-खण्ड
- जयपुर व अजमेर के चट्टानी क्षेत्र
UNESCO विश्व धरोहर स्थल (राजस्थान)
- 1985: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (प्राकृतिक)
- 2010: जंतर-मंतर, जयपुर (सांस्कृतिक)
- 2013: 6 पहाड़ी किले — गागरोन, आमेर, चित्तौड़, कुम्भलगढ़, रणथम्भौर, जैसलमेर
- 6 जुलाई 2019: जयपुर परकोटा (सांस्कृतिक) — भारत का दूसरा शहर (अहमदाबाद के बाद)
- 29 सितम्बर 2016: जयपुर को यूनेस्को द्वारा क्रिएटिव सिटी का दर्जा
🔹 विशेषज्ञ जोड़: जंतर-मंतर के यंत्र — वृत सम्राट यंत्र, लघु सम्राट यंत्र, राम यंत्र, जयप्रकाश यंत्र, सम्राट यंत्र, दिशा यंत्र, रुवदिशिक यंत्र, शांत वृत।
📊 नवीनतम डेटा एवं महत्वपूर्ण अपडेट (2024-25)
📌 राजस्थान 2025 — महत्वपूर्ण तथ्य:
- मुख्यमंत्री: भजनलाल शर्मा
- राज्यपाल: हरिभाऊ बागडे
- जिले: 41, संभाग: 7
- कुल क्षेत्रफल: 3,42,239 वर्ग किमी
- जनसंख्या (2011): 6.85 करोड़
- साक्षरता: 66.1%
- लिंगानुपात: 928
- वन क्षेत्र: 9.60% (अभिलेखित)
- वनावरण: 4.84%
- खनिज: 81 प्रकार, 58 का खनन
- कुल विद्युत क्षमता: 26,325.19 MW
- सौर ऊर्जा: 5,482.66 MW
- पवन ऊर्जा: 4,414.12 MW
- IGNP कुल लम्बाई: 649 किमी
- सर्वाधिक वर्षा: झालावाड़
- न्यूनतम वर्षा: जैसलमेर
- सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल): जैसलमेर
- सबसे छोटा जिला (क्षेत्रफल): धौलपुर
- सर्वाधिक जनसंख्या: जयपुर
- न्यूनतम जनसंख्या: जैसलमेर
🔹 परीक्षा हेतु अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
- राजस्थान का सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल): जैसलमेर (38,401 वर्ग किमी)
- सबसे छोटा जिला: धौलपुर (3,033 वर्ग किमी)
- सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व: जयपुर (595)
- न्यूनतम जनसंख्या घनत्व: जैसलमेर (17)
- सर्वाधिक लिंगानुपात: डूंगरपुर (994)
- न्यूनतम लिंगानुपात: धौलपुर (846)
- सर्वाधिक साक्षरता: कोटा (76.06%)
- न्यूनतम साक्षरता: जालौर (54.9%)
- राजस्थान का राज्य पक्षी: गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
- राज्य वृक्ष: खेजड़ी
- राज्य पुष्प: रोहिड़ा
- राज्य पशु: चिंकारा
- राज्य पालतू पशु: ऊँट
⚠️ महत्वपूर्ण सूचना: यह HTML संस्करण पुस्तक "राजस्थान का भूगोल" (बूस्टर एकेडमी) की सम्पूर्ण सामग्री पर आधारित है। सभी अध्याय, तालिकाएँ, एवं महत्वपूर्ण तथ्य सम्मिलित हैं। नवीनतम डेटा एवं विशेषज्ञ जोड़ को अलग से चिह्नित किया गया है।