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⚖️ जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म ☸️

Complete Notes with PYQ | RAS Pre + Mains दोनों के लिए
☸️
बौद्ध धर्म — परिचय एवं महात्मा बुद्ध
563–483 BCE
👶 जीवन परिचय — Timeline
जन्म — 563 BCE
लुम्बिनी (नेपाल) | पिता: शुद्धोधन (शाक्य कुल) | माता: महामाया (मृत्यु) → महाप्रजापति गौतमी (माँसी) ने पाला | पत्नी: यशोधरा | पुत्र: राहुल
गृह त्याग — 29 वर्ष (महाभिनिष्क्रमण)
चार दृश्य देखे → वृद्ध, रोगी, शव, संन्यासी | गृह छोड़ा → "महाभिनिष्क्रमण"
गुरु
आलार-कलाम (सांख्य/वेदांत) — वैशाली में | ② उद्रक रामपुत | फिर 5 ब्राह्मण ब्राह्मणों के साथ तपस्या (उरुवेला में)
ज्ञान प्राप्ति — 35 वर्ष (528 BCE)
बोधगया → पीपल वृक्ष के नीचे → निरंजना नदी के किनारे | ज्ञान के बाद → "बुद्ध" / "तथागत" कहलाए | "सुजाता" (कन्या) ने खीर खिलाई | "मध्यम भार्गे" का उपदेश
प्रथम उपदेश — सारनाथ
धर्मचक्र प्रवर्तन → वाराणसी के सारनाथ में → 5 ब्राह्मणों को | 360° घुमाया | निरंजना नदी के किनारे
महापरिनिर्वाण — 483 BCE (80 वर्ष)
कुशीनगर (UP) | "मल्ल" क्षेत्र में | "सालवन" में | बुनाता कन्या से खीर खिलाई
🗺️ बुद्ध के महत्वपूर्ण स्थान
लुम्बिनी
जन्म स्थान — नेपाल (563 BCE)
कपिलवस्तु
बचपन का घर
बोधगया
ज्ञान प्राप्ति — पीपल वृक्ष (बोधि वृक्ष)
सारनाथ
प्रथम उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन)
कुशीनगर
महापरिनिर्वाण (483 BCE, UP)
वाराणसी
सर्वाधिक प्रचार — कोसल/नरेश प्रसेनजित शिष्य
गांधार-अवंति
कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं
TRICK — 4 महास्थान: लुम्बिनी (जन्म) → बोधगया (ज्ञान) → सारनाथ (उपदेश) → कुशीनगर (मृत्यु) = "लुबोसाकु"
📚 ललितविस्तर
महायान बौद्ध सूत्र — बुद्ध की पूर्ण जीवनी
📖 मिलिन्द पन्हो
राजा मिलिन्द (मिनांडर) + बुद्ध भिक्षु नागसेन का संवाद
📝 सारिपुत्र-प्रकरण
गौतम बुद्ध के प्रमुख शिष्य सारिपुत्र से संबंधित
📜 अवदानशतक
बौद्ध धर्म से संबंधित 100 चरित्र संबंधी कहानियों का संकलन
🧠
बौद्ध दर्शन — सिद्धांत एवं विचार
PHILOSOPHY
☯️ चार आर्य सत्य (4 Noble Truths)
दुःख है — जीवन में दुःख है
दुःख का कारण है — तृष्णा/अविद्या
निवारण है — दुःख का अंत संभव
मार्ग है — अष्टांगिक मार्ग
🔄 प्रतीत्यसमुत्पाद
"दुःखों के कारण का सिलसिला है"
"ऐसा होने पर वैसा होना"
"देस" इच्छा निदान चक्र भी कहते हैं
दुःख का मूल कारण "अविद्या" माना
ज्ञान प्राप्ति से अविद्या का अंत
🌀 अनित्यवाद / क्षणिकवाद
दुनिया में कोई भी वस्तु नित्य नहीं
(परिवर्तनशील है)
प्रत्येक छण सभी वस्तुएं परिवर्तित होती हैं
"क्षणिकवाद" भी कहलाता
🧘 अनात्मवाद (Anatta)
नित्य आत्मा की सत्ता को स्वीकार नहीं करते
परिवर्तनशील हैं
बौद्ध "पुनर्जन्म" में विश्वास करते हैं
ईश्वर और आत्मा दोनों को नकारते हैं
बौद्ध धर्म दार्शनिक वाद-विवादों में नहीं पड़ा — व्यावहारिक दुखों को दूर करना ही उद्देश्य
🛤️ अष्टांगिक मार्ग (8-fold Path)
सम्यक् दृष्टि
सम्यक् संकल्प
सम्यक् वाणी
सम्यक् कर्म
सम्यक् आजीव
सम्यक् व्यायाम
सम्यक् स्मृति
सम्यक् समाधि
मध्यम प्रतिपदा = मध्यम मार्ग | निर्वाण = अंतिम लक्ष्य "मोक्ष" | वर्ग बौद्ध स्तूप = "जौरी बुटर"
🏛️
त्रिपिटक एवं बौद्ध संघ
TRIPITAKA
📚 सुत्तपिटक
बुद्ध के उपदेशों का संग्रह
5 निकाय: खुद्दक निकाय → जातक कथाएं (बुद्ध के पूर्वजन्म की कहानियाँ)
बुद्ध के पूर्वजन्म की कहानियाँ
TRICK: सूत = वचन व उपदेश
📖 विनय पिटक
भिक्षुओं के लिए आचार संहिता का उल्लेख
संघ के नियम
TRICK: संघ = सदस्यों के अनुशासन / नियम
🧠 अभिधम्म पिटक
लोगों के दार्शनिक सिद्धांतों का संग्रह
बौद्ध दर्शन का विश्वकोश
TRICK: धम्म = दार्शनिक विवेचन
👥 बौद्ध संघ — महिलाओं का प्रवेश
आनंद के कहने पर बुद्ध ने महिलाओं को संघ में प्रवेश की अनुमति दी
पहली भिक्षुणी: महाप्रजापति गौतमी (बुद्ध की माँसी)
संघ में प्रवेश पाने वाली पहली भिक्षुणी बनीं
बुद्ध ने आत्मज्ञान और निर्वाण के लिए व्यक्ति केंद्रित हस्तक्षेप और सम्यक् कर्म की कल्पना की
निर्वाण का अर्थ: इच्छा का शमन हो जाना → गृहत्याग करने वाले भी निर्वाण पा सकते हैं
पाली भाषा में साहित्य रचा
🌟 तारा एवं अवलोकितेश्वर
तारा (महायान) — "तो" को "प्रजा की देवी" माना
अवलोकितेश्वर → बोधिसत्व हैं, इन्हें "पद्मपाणि" नाम से जाना जाता है (हाथ में कमल का फूल लिये — चित्रभाषा चाया)
📋 शासनकाल तालिका — बौद्ध काल
कालशासकप्रमुख घटना
1. 488 BCEअजातशत्रु→ सागुप्त → 1st संगीति, राजगृह
2. 383 BCEकालाशोक→ शैशुनाग → बौद्धिसत्व → 2nd संगीति, वैशाली
3. 252 BCEअशोक→ पाटलिपुत्र → अभिषिक्त → 3rd संगीति
4. ईसा प्रथम शताब्दीकनिष्क→ कुण्डलवन (कश्मीर) → 4th संगीति
🌿
बौद्ध धर्म के संप्रदाय
SECTS
🔵 हीनयान (थेरवाद)
अर्थ
छोटा रास्ता / यान
मूल उपदेश
मूल उपदेशों पर चलता
बुद्ध को
"महापुरुष" मानते
भाषा
पाली में साहित्य
बोधिसत्व
नहीं मानते
परम पद
"अर्हत" है (वह जिसने निर्वाण प्राप्त कर लिया)
प्रसार
श्रीलंका, वर्मा, थाईलैंड → दो शाखाओं में: वैत्सालिक + लोकोत्तरिक
🟠 महायान
प्रवर्तक
कुशान/कनिष्क काल में स्वीकार
बदलाव
साम्य के साथ बदलाव स्वीकार
ईश्वर
"ईश्वर" मानते
भाषा
कालांतर में संस्कृत
बोधिसत्व
मानते हैं — (निर्वाण प्राप्ति के बाद दूसरों की निर्वाण प्राप्ति में सहायता के लिए रुके)
प्रसार
चीन, जापान, तिब्बत (जीवन, जापान, कोरिया, तिब्बत)
दो शाखाएं
शून्यवाद + विज्ञानवाद
🟣 शून्यवाद (माध्यमिकवाद)
प्रणेता: नागार्जुन (भारत का आइंस्टीन)
"सापेक्षता का सिद्धांत दिया"
शंकराचार्य को "प्रच्छन्न बौद्ध" कहते हैं — इन्होंने "शून्यवाद" की नकल की है (जनश्रुति)
मुख्य रचना: "माध्यमिककारिका"
🔷 विज्ञानवाद (योगाचार)
प्रणेता: मैत्रेयनाथ
योगाचार = योग + आचार
महायान बौद्ध संप्रदाय के दो प्रमुख भाग: शून्यवाद (माध्यमिक) तथा विज्ञानवाद (योगाचार)
💜 वज्रयान (तांत्रिक बौद्ध धर्म)
बौद्ध धर्म की "तांत्रिक सम्प्रदाय" है
7वीं-8वीं सदी में अस्तित्व में
कालचक्रयान: 11-12वीं सदी में
प्रतिवादी (गांधारमार्गियों के महंत के महत्व)
वज्रयान की प्रमुख दिव्यशक्ति देवी तारा है
जादुई शक्तियों की प्राप्ति से निर्वाण की कल्पना = "वज्र" नाम दिया
📅
बौद्ध संगीतियाँ (TRICK याद करें)
COUNCILS
⚡ TRICK — "रत्न रत्न तेज राज तेज कृति स्थमा अग्नि हिमा"
क्रम: 483 > 383 > 252 BCE > प्रथम सदी
स्थान: अजा.अज | राज वैशाली पाट कुण्ड | अध्यक्ष: महा.काश.भोगली.मिज | राजा: स्थविर.संम.अभि.हिमा
संगीति स्थान शासनकाल अवधि अध्यक्ष परिणाम
प्रथम राजगृह अजातशत्रु 483 BCE महाकश्यप सुत्त व विनय पिटक संकलन
द्वितीय वैशाली कालाशोक 383 BCE साबकमीर भिक्षुओं में मतभेद — बौद्ध संप्रदाय दो में विभाजित: स्थविरवादी + महासांघिक
तृतीय पाटलिपुत्र अशोक 252 BCE मोग्गलिपुत्ततिस्स अभिधम्मपिटक संकलन — हीनयान + महायान विभाजन के बीज
चतुर्थ कुण्डलवन (कश्मीर) कनिष्क प्रथम शताब्दी ई. वसुमित्र (अश्वघोष सहभागी) "महाविभाष सूत्र" — हीनयान एवं महायान में विभाजन पक्का
⚠️
बौद्ध धर्म के पतन के कारण
DECLINE
📉 पतन के कारण
ब्राह्मण धर्म से वापस आत्मसात — पाल पाति → नैतिकतावाद
संस्कारों और संस्कृति का नवीकरण
वैष्णव धर्म का उत्थान — बौद्ध धर्म के नए संप्रदाय का उदय — हड़जगन, काल-चक्रयान
महिलाओं के प्रवेश → नैतिकता का पतन
सामंती संरचना का उत्थान
शंकराचार्य एवं कुमारिल भट्ट की भूमिका → ब्राह्मण धर्म को पुनः स्थापित
राजाश्रय में काभि दुश्शाह → राजाओं का समर्थन हटना
सांप्रदायिक सेवाओं का अभाव (संस्कारों की स्थापना नहीं की)
तुर्की आक्रमण — नालंदा और विक्रमशिला का नष्ट होना
📖 पेँकुया सूत्र
बुद्ध के विस्तारित उपदेश (पेँकुया सूत्र)
वज्रयान बौद्धों का "तांत्रिक सम्प्रदाय" है — 7वीं शताब्दी
शैव सम्प्रदाय — 12वीं सदी में: पाशुपत, कापालिक, कालामुख, लिंगायत (4 शैव सम्प्रदाय)
लिंगायत → दक्षिण में प्रचलित — बासवन्ना (कर्नाटक, 12वीं सदी) ने नेतृत्व किया
लिंगायत — वे शिव की पूजा करते, दाह संस्कार नहीं करते, शराद अनुष्ठान नहीं
⚖️
जैन धर्म — परिचय एवं महावीर स्वामी
540–468 BCE
👑 जैन धर्म के तीर्थंकर
24 तीर्थंकर
जैन धर्म के परंपरा के अनुसार 24 तीर्थंकर हुए हैं
प्रथम
ऋषभदेव (आदिनाथ) — पहले तीर्थंकर
23वें
पार्श्वनाथ — काशी के इक्ष्वाकु वंशीय राजा अश्वसेन के पुत्र | अनुयायियों को "निर्ग्रंथ" कहते थे
24वें (अंतिम)
महावीर स्वामी (वर्धमान) — वास्तविक संस्थापक
जैन मान्यता
जैन अनुश्रुतियों और परंपराओं के अनुसार — ऋषभदेव प्रथम तीर्थंकर एवं 24वें व अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी थे
📋 महावीर स्वामी — जीवन परिचय
जन्म
540 BCE — कुण्डग्राम (वैशाली, बिहार) | पिता: सिद्धार्थ | माता: त्रिशला (लिच्छवी) — नरेश चेतक की बहन थी | वे क्षत्रिय कुल के प्रधान थे
पत्नी
यशोदा — पुत्री: प्रियदर्शना
गृह त्याग
30 वर्ष — 12 वर्ष भ्रमण
ज्ञान प्राप्ति
42 वर्ष — कैवल्य ज्ञान | जृम्भिका ग्राम, ऋजुपालिका नदी, साल वृक्ष
30 वर्ष तक
ज्ञान प्राप्ति के बाद 30 वर्ष उपदेश दिए → "जिन" (जीतने वाला) → "महावीर""निर्ग्रंथ"
मृत्यु (निर्वाण)
468 BCE — पावापुरी में | बल समग — 1 गणधर जार्विन चा (स्कुधर्मन)
प्रारम्भ में 11 शिष्य
→ जैन संघ → "अनाचार्य" कहते हैं
⚔️ जैन धर्म का इतिहास — शासनकाल
क्रमकालशासकघटना
1488 BCEअजातशत्रु → सागुप्त→ महाक्षत्रप → जनभिनिर्गत की रूचि
2323 BCEकालाशोक → शैशुनाग→ बौद्धिसत्व → भौगोलिक पुरातत्त्व → अभिज्ञाता मित्रक → रूचि
3252 BCEचंद्रगुप्त → पाटलिपुत्र→ वधूमित्र → (डा. अश्वबोध) → चीन व मंगमान में विभाजन
4ई.द्वादकनिष्क → कुण्डलवन(श्री. कश्मीर, तिब्बत, विदेश)
💡
जैन दर्शन — सिद्धांत एवं तत्त्वज्ञान
JAIN PHILOSOPHY
🌀 अनेकांतवाद (Syadvada)
"तत्त्व मीमांसित सिद्धांत" (जगत, आत्मा, ईश्वर के बारे में)
विश्व में अनेक वस्तुएं हैं, प्रत्येक में अनेक गुण होते हैं
एक पत्रकारों से: "नित्यत्व" रखेंगे, व "परिवर्तनशील" रहेगी
इस एकांत ज्ञान = "दीमति" है
ज्ञान—वस्तु, रूप व परिस्थियों के साथ देवताओं के हमारे ज्ञान की प्राप्ति — परिवर्तनशील
🌊 स्यादुवाद (Relativism)
"ज्ञान मीमांसीय सिद्धांत" (ज्ञान की प्रकृति, सीमा आदि)
विश्व में अनेक वस्तुएं → प्रत्येक में अनेक गुण — "हम प्रत्येक को पूरी तरह नहीं जान सकते"
इसी दुराग्रह ज्ञान = "दीमति" है
ज्ञान — "देश, काल व परिस्थितियों के साथ देवताओं के हमारे ज्ञान की प्राप्ति — परिवर्तनशील होता है"
📦 जैन तत्त्वज्ञान — पुद्गल, आस्रव, संवर, निर्जरा
पुद्गल
जड़ पदार्थ को "पुद्गल" कहते हैं — एक भौतिक सत्ता पुद्गल | "हमारा शरीर भी पुद्गल" | एक आत्मा से पुद्गल निकलकर मिलता है तो आत्मा जोड़न से पट जाती है | "और" अलग से चले जाते हैं, तो आत्मा की मुक्ति हो जाती
आस्रव
पुद्गल का आत्मा की ओर प्रवाह = "आस्रव" कहलाता है
संवर
जब पुद्गलों का जीव/आत्मा की ओर आने वाला प्रवाह रोकने वाला अवरोधक अवस्था को संवर कहते हैं
निर्जरा
जीव से पुद्गलों का झड़ना = निर्जरा कहलाती है
🧠 ज्ञान के 5 प्रकार (by जैन)
①मति
बुद्धि से प्राप्त ज्ञान — यह पशुओं में भी होती है
②श्रुति
कान से सुनकर शब्दों का अर्थ समझना (काल ज्ञान) (पशुओं में नहीं)
③अवधि
दूरे-दूर काल से परे ज्ञान होना
④मनपर्यय
दूसरे के मन की बात जान लेना
⑤कैवल्य
जो सर्वज्ञ होता है, पूरे विश्व का ज्ञान हो, दश दिशाओं से भी ऊपर देता है | केवल "तीर्थंकरों" को होता है
💎 त्रिरत्न
सम्यक् ज्ञान (ज्ञान मार्ग)
दर्शन (श्रद्धा → भावना मार्ग)
चरित्र (कर्म मार्ग) = आचरण करना
📜 पंचव्रत
सत्य
अहिंसा
अस्तेय
अपरिग्रह
ब्रह्मचर्य
अनुव्रत (गृहस्थों के लिए) | महाव्रत (भिक्षुओं के लिए)
🏘️ जैन समाज (4 वर्ग)
साधु (भिक्षु)
साध्वी (भिक्षुणी)
श्रावक (पुरुष उपासक)
श्राविका (महिला उपासक)
📜
जैन संगीतियाँ एवं संप्रदाय
SANGITI
📚 जैन संगीतियाँ
प्रथम — 298 BCE — पाटलिपुत्र
चंद्रगुप्त मौर्य → स्थूल भद्र → श्वेतांबर (स्थुलभद्र)
द्वितीय — 512 AD — वल्लभी
नय राजा → देवर्धि क्षमाश्रमण → ग्रंथों का लिपिबद्ध लेखन, साहित्य को "आगम" कहते हैं
⚔️ श्वेतांबर vs दिगंबर
श्वेतांबरदिगंबर
सफेद वस्त्र पहनतेनग्न (दिगंबर = दिशाएं ही वस्त्र)
स्थूलभद्र के अनुयायीभद्रबाहु के अनुयायी
महिला मोक्ष मानतेमहिला मोक्ष नहीं मानते (अगले जन्म में)
वल्लभी संगीति मान्यवल्लभी संगीति मान्य नहीं
⚖️ जैन — "स्वांतत्रवादी" हो (वागी वस्तुओं से आत्मा की सत्ता को मानते हैं)
मानते हैं कि — एक जीव में एक से अधिक आत्माएं रह सकती हैं
जैन धर्म ईश्वर के अस्तित्व को तो स्वीकार करता है, किंतु उसे "जिन" से नीचे स्थान देता है
महावीर के अनुसार — कोई भी व्यक्ति अपने पूर्व जन्म में किए गए पाप व पुण्य के आधार पर उच्च या निम्न वर्ण में जन्म लेता है
पूर्ण ज्ञान, कर्म और मुक्ति — जैन धर्म के "तीन रत्न" माने जाते हैं
⚖️
जैन vs बौद्ध — तुलनात्मक अध्ययन
COMPARISON
विषय ⚖️ जैन धर्म ☸️ बौद्ध धर्म
संस्थापकमहावीर स्वामी (24वें तीर्थंकर)गौतम बुद्ध
आत्मानित्य आत्मा मानते हैं (जीव)अनात्मवाद — नित्य आत्मा नहीं
ईश्वरईश्वर मानते हैं (पर "जिन" से नीचे)ईश्वर का अस्तित्व स्वीकार नहीं
अहिंसाअत्यंत कठोर — सूक्ष्म जीव भी न मारेंमध्यम — व्यावहारिक
वर्ण व्यवस्थानिंदा नहीं की (जन्म आधारित वर्ण मानते)वर्ण व्यवस्था पर वार किया
भाषाप्राकृत (अर्धमागधी)पाली (बाद में संस्कृत)
महिलादिगंबर: नहीं; श्वेतांबर: हाँसंघ में प्रवेश दिया
तपकठोर तप — मोक्ष मार्गमध्यम मार्ग — अत्यधिक तप नहीं
पूर्वजन्मपूर्वजन्म स्वीकार — कर्म आधारितपुनर्जन्म स्वीकार (आत्मा बिना)
राजनीतिक संरक्षणचंद्रगुप्त मौर्य, खारवेलअशोक, हर्षवर्धन
✅ प्रमुख समानताएं:
दोनों ने वैदिक धर्म और ब्राह्मण सत्ता को चुनौती दी
दोनों ने यज्ञ और पशु बलि का विरोध किया
दोनों ने जाति प्रथा का विरोध किया (जन्म आधारित)
दोनों ने कर्म और पुनर्जन्म माना
दोनों 6ठी-5वीं शताब्दी BCE में श्रमण परंपरा से उभरे
दोनों ने अहिंसा पर बल दिया
दोनों ने लोकभाषाओं (पाली/प्राकृत) का प्रयोग किया
दोनों का उदय नई कृषि अर्थव्यवस्था के विस्तार से जुड़ा
🎯
PYQ — RAS + UPSC + PCS (व्याख्या सहित)
PREVIOUS YEAR Q.
🏆 RAS / RPSC PYQ
RAS Pre 2023
Q1. बौद्ध संप्रदाय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) हीनयान में बुद्ध महापुरुष के रूप में हैं, जबकि महायान में देवता के रूप में स्थापित हो गए। (2) हीनयान में बुद्ध के प्रतीकों के रूप में दर्शाया गया है, जबकि महायान में मूर्तियाँ शुरू हो गईं।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ उत्तर: (d) — दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं और कथन II, कथन I का सही स्पष्टीकरण है
बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए चार बौद्ध संगीतियों का आयोजन किया गया। महायान में बुद्ध देवता के रूप में स्थापित हो गए और मूर्तियाँ शुरू हुईं। हीनयान में बुद्ध के प्रतीकों के रूप में दर्शाया जाता था।
RAS Pre 2021
Q2. बुद्ध की जीवनी की रचना बौद्ध साहित्य में विशेष स्थान रखती है। निम्नलिखित में से कौन-सी एक बुद्ध की पूर्ण जीवनी है?
(a) ललितविस्तर (b) मिलिन्द पन्हो (c) सारिपुत्र-प्रकरण (d) अवदानशतक
✅ उत्तर: (a) ललितविस्तर
ललितविस्तर एक महायान बौद्ध सूत्र है जिसमें गौतम बुद्ध की पूर्ण जीवनी है। मिलिन्द पन्हो का संबंध बौद्ध भिक्षु नागसेन व इंडो-ग्रीक राजा मिनांडर के मध्य संवाद से है। सारिपुत्र-प्रकरण गौतम बुद्ध के एक प्रमुख शिष्य सारिपुत्र के विषय में है।
RAS Pre 2018
Q3. जैन और बौद्ध धर्म के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) दोनों ने आरंभिक अवस्था में वर्ण व्यवस्था की निंदा की। (2) दोनों धर्मों ने अहिंसा का उपदेश दिया था। (3) दोनों धर्म सरल संयमित जीवन के पक्षधर थे।
कौन-से सही हैं?
✅ उत्तर: (d) 1, 2 और 3 — तीनों सही
दोनों धर्मों का उदय तात्कालिक जन्ममूलक वर्ण व्यवस्था पर आधारित समाज की प्रतिक्रिया-स्वरूप हुआ था। दोनों ने अहिंसा को विशेष स्थान दिया। दोनों धर्मों के भिक्षुओं को सादा व संयमित जीवन जीने का आदेश था।
RAS Pre 2022
Q4. जैन धर्म के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) इसके सिद्धांतों के उपदेष्टा तीर्थंकर कहलाते थे। (2) इस धर्म के संस्थापक पार्श्वनाथ माने जाते हैं। (3) वर्धमान महावीर की माता लिच्छवी-नरेश चेतक की बहन थी।
कौन-से सही हैं?
✅ उत्तर: (c) केवल 1 और 3
जैन धर्म में 24 तीर्थंकर हुए थे। महावीर को 24वें व अंतिम तीर्थंकर माना गया है — कथन 1 सही। जैन धर्म के संस्थापक पार्श्वनाथ को मानना सही नहीं है — महावीर स्वामी वास्तविक संस्थापक। महावीर की माता त्रिशला, लिच्छवी-नरेश चेतक की बहन थी — कथन 3 सही।
RAS Pre 2024
Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा एक जैन धर्म का असत्य है?
(a) जैन दर्शन के अनुसार संसार का वास्तविक कारण ईश्वर नहीं है, संसार वास्तविक और सत्य है तथा अनेक चक्रों में बँटा हुआ है।
(b) संसार जीव तथा अजीव से मिलकर बना है जिसमें जीव चेतन जबकि अजीव अचेतन (जड़) तत्त्व हैं।
(c) अज्ञानता के कारण कर्म के जीव की ओर आकर्षित होने को 'आस्रव' कहते हैं।
(d) त्रिरत्नों के अनुसरण से कर्मों का जीव की ओर बहाव रुक जाता है। इस अवस्था को 'निर्जरा' कहा जाता है।
✅ उत्तर: (d) — 'निर्जरा' नहीं, यह 'संवर' है
त्रिरत्नों के अनुसरण से कर्मों का जीव की ओर बहाव रुकना = संवर। जीव से पुद्गलों का झड़ना = निर्जरा। ये दोनों अलग अवस्थाएं हैं। बाकी तीनों कथन सही हैं।
🇮🇳 UPSC PYQ
UPSC Pre 2020
Q6. राजगृह, वैशाली और पाटलिपुत्र में निम्नलिखित में से कौन-सी एक समानता है?
(a) स्थविरवादियों का पालि धर्मसूत्र वहाँ संकलित हुआ था।
(b) अशोक के प्रमुख शिलालेख वहाँ पाए गए।
(c) ये वे स्थान हैं जहाँ बौद्ध संगीति हुई थी।
(d) ये स्थान महासांघिकाओं के बौद्ध धर्मसूत्रों के संकलन से संबंधित हैं।
✅ उत्तर: (c) — ये वे स्थान हैं जहाँ बौद्ध संगीति हुई थी
बौद्ध संगीतियाँ: प्रथम — राजगृह (483 BCE), द्वितीय — वैशाली (383 BCE), तृतीय — पाटलिपुत्र (252 BCE), चतुर्थ — कुण्डलवन/कश्मीर (कनिष्क काल)।
UPSC Pre 2019
Q7. महायान बौद्धमत के मूल विचारों के निरूपण से संबद्ध था?
(a) नागार्जुन (b) कश्यप मातंग (c) मिनांडर (d) कनिष्क
✅ उत्तर: (a) नागार्जुन
महायान बौद्ध संप्रदाय के दो प्रमुख भाग हैं — शून्यवाद (माध्यमिक) तथा विज्ञानवाद (योगाचार)। नागार्जुन 'माध्यमिक शून्यवाद' के प्रवर्तक माने जाते हैं जिनकी प्रमुख रचना 'माध्यमिककारिका' है।
UPSC Pre 2022
Q8. बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के विषय में: (1) उन्होंने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ, वाराणसी में दिया था। (2) उन्होंने आत्मा एवं ब्रह्म से संबंधित वाद-विवादों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। (3) उन्होंने संघ (धार्मिक क्रम) का निर्माण किया जिसमें महिला एवं पुरुष दोनों को प्रवेश की अनुमति थी।
कौन-से सही हैं?
✅ उत्तर: (c) केवल 1 और 3
बुद्ध ने वाराणसी के सारनाथ में अपना पहला धर्मोपदेश दिया — सत्य। बुद्ध एक व्यावहारिक सुधारक साबित हुए — उन्होंने आत्मा (आत्मन) और ब्रह्म जैसे व्यर्थ के विवादों में स्वयं को शामिल नहीं किया — कथन 2 असत्य। संघ में महिला भी शामिल हुईं — सत्य।
UPSC Pre 2021
Q9. बुद्ध के जीवन से जुड़ी निम्नलिखित घटनाओं पर — सारनाथ, बोधगया, लुंबिनी, कुशीनगर — के महत्व पर विचार कीजिए?
✅ उत्तर: लुंबिनी (जन्म) → बोधगया (ज्ञानबोध) → सारनाथ (प्रथम उपदेश) → कुशीनगर (मृत्यु)
लुंबिनी (जहाँ उनका जन्म हुआ) → बोध गया (जहाँ उन्होंने ज्ञान बोध प्राप्त किया) → सारनाथ में हिरण उद्यान (जहाँ उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया जिसे 'धर्म या विधि' भी कहा जाता है) → कुशीनगर (जहाँ उनकी मृत्यु हुई)।
UPSC Pre 2018
Q10. बौद्ध धर्म के संदर्भ में: (1) भारत में पूजित पहली मानव प्रतिमाएं महात्मा बुद्ध की हैं। (2) बुद्ध की प्रतिमाएं 'गांधार कला' बनने नहीं। (3) गया की बराबर की पहाड़ियों को तराश कर बौद्ध स्तूपों का निर्माण किया गया है।
✅ उत्तर: (a) केवल 1 और 2
प्राचीन भारत की कला पर बौद्ध धर्म का स्पष्ट प्रभाव है। भारत में पूजित पहली मानव प्रतिमाएं बुद्ध की हैं — सत्य। भारत के पश्चिमोत्तर सीमांत में यूनान और भारत की मूर्तिकारों ने एक नई बुद्ध कला की सृष्टि करने के लिए मिलकर प्रयास किया, जिसका परिणाम 'गांधार कला शैली' के नाम से जाना जाता है।
📋 State PCS (MPPSC/UPPSC/BPSC) PYQ
BPSC 2021
Q11. निम्नलिखित सिद्धांतों पर विचार कीजिए: 1. संपूर्ण विश्व प्राणवान है। 2. जन्म और पुनर्जन्म का चक्र कर्म द्वारा निर्धारित होता है। 3. कर्म के चक्र से मुक्ति के लिए त्याग और तपस्या की आवश्यकता होती है। — उपर्युक्त सिद्धांत किस धर्म/संप्रदाय से संबंधित हैं?
✅ उत्तर: (a) जैन धर्म
उपर्युक्त सिद्धांत जैन धर्म से संबंधित हैं। इसकी सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा यह है कि संपूर्ण विश्व प्राणवान है — अहिंसा इस धर्म का केंद्र बिंदु है। जन्म और पुनर्जन्म का चक्र कर्म के द्वारा निर्धारित होता है, कर्म के चक्र से मुक्ति के लिए त्याग और तपस्या जरूरी है।
UPPSC 2022
Q12. जैन धर्म के संदर्भ में कौन-सा एक असत्य है?
(a) पाँचवीं सदी में कर्नाटक में स्थापित जैन मठ 'बसदि' कहलाते थे।
(b) देवताओं का अस्तित्व स्वीकार नहीं किया गया।
(c) जैन धर्म में कृषि और युद्ध दोनों वर्जित हैं।
(d) चंद्रगुप्त मौर्य ने जीवन के अंतिम वर्षों में जैन धर्म अपनाकर कर्नाटक में जैन धर्म का प्रचार-प्रसार किया।
✅ उत्तर: (b) — जैन धर्म ने देवताओं का अस्तित्व स्वीकार किया है
जैन धर्म ने देवताओं का अस्तित्व स्वीकार किया है, परंतु उनका स्थान 'जिन' से नीचे रखा गया है — अत: (b) असत्य है जबकि अन्य तीनों कथन सत्य हैं।
MPPSC 2023
Q13. बौद्ध धर्म के पतन के संदर्भ में: (1) इस काल के अंतिम दौर में, पुरोहितों के प्रभुत्व के विरुद्ध प्रबल प्रतिक्रिया शुरू हुई थी। (2) उपनिषद ग्रंथों का विषय दर्शन था, उसमें कर्मकाण्डों को महत्व दिया गया था।
✅ उत्तर: (a) केवल 1
इस काल के अंतिम दौर में, पुरोहितों के प्रभुत्व और कर्मकाण्डों के विरुद्ध प्रबल प्रतिक्रिया शुरू हुई — पांचाल और विदेह के राज्य में विशेषकर। उपनिषद ग्रंथों का विषय दर्शन था, इनमें कर्मकाण्ड की निंदा की गई है — अत: कथन 2 सही नहीं।
RPSC 2024 (Expected)
Q14. बौद्ध धर्म के त्रिपिटकों के संदर्भ में: (विनय पिटक) → (विषय): 1. विनय पिटक — दर्शन के कोटि; 2. सुत्त पिटक — बुद्ध की शिक्षाएं; 3. अभिधम्म पिटक — नियमों का संग्रह — कौन-से सुमेलित हैं?
✅ उत्तर: (b) केवल 2
बुद्ध की शिक्षाओं के संग्रह को 'त्रिपिटक' कहा जाता है। विनय पिटक में संघ या बौद्ध मठों में रहने वाले लोगों के लिए नियमों का संग्रह था। बुद्ध की शिक्षाएं सुत्त पिटक में रखी गई तथा दर्शन से जुड़े विषय अभिधम्म पिटक में। अत: युग्म (2) सुमेलित है।
RAS Mains Level
Q15. भारत में छठी शताब्दी ई.पू. में जैन धर्म के उदय के कारणों के संदर्भ में: (1) जैन धर्म ईश्वर के अस्तित्व को तो स्वीकार करता है किंतु उसे 'जिन' से नीचे स्थान देता है। (2) महावीर के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अपने पूर्व जन्म में किए गए पाप व पुण्य के आधार पर उच्च या निम्न वर्ण में जन्म लेता है।
✅ उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों
वर्धमान महावीर ने 30 साल की आयु में अपना घर छोड़ दिया था। वह 12 साल तक भ्रमण करते रहे और अंततः 42 वर्ष की आयु में पूर्ण ज्ञान या 'कैवल्य' प्राप्त किया। जैन धर्म ने ईश्वर के अस्तित्व को मान्यता दी, लेकिन उन्हें 'जिन' से कमतर रखा — कथन 1 सही। महावीर के अनुसार किसी व्यक्ति का जन्म उच्च या निम्न वर्णों में उसके पिछले जन्म के पापों व पुण्यों की परिणामस्वरूप होता है — कथन 2 सही।
⚡ EXAM One-Liners — सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं
बुद्ध का जन्म = लुम्बिनी (563 BCE)
प्रथम उपदेश = सारनाथ (धर्मचक्र प्रवर्तन)
ज्ञान प्राप्ति = बोधगया
महापरिनिर्वाण = कुशीनगर (483 BCE)
शून्यवाद = नागार्जुन
विज्ञानवाद = मैत्रेयनाथ
बुद्ध की पूर्ण जीवनी = ललितविस्तर
पाली भाषा = हीनयान
महावीर का जन्म = कुण्डग्राम (540 BCE)
महावीर की माँ = त्रिशला (चेतक की बहन)
महावीर का निर्वाण = पावापुरी (468 BCE)
जैन त्रिरत्न = ज्ञान + दर्शन + चरित्र
सत्यमेव जयते = मुण्डकोपनिषद
3rd बौद्ध संगीति अध्यक्ष = मोग्गलिपुत्ततिस्स
4th बौद्ध संगीति अध्यक्ष = वसुमित्र
जैन बसदि = कर्नाटक में जैन मठ
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