📌 पृष्ठभूमि — अधिनियम लाने के कारण
📅 1927-1935 — महत्वपूर्ण घटनाएँ
- 1927: साइमन कमीशन का गठन (8 नवंबर)
- 1928: नेहरू रिपोर्ट प्रस्तुत (अगस्त)
- 1929: लाहौर अधिवेशन — पूर्ण स्वराज की घोषणा
- 1930: साइमन कमीशन रिपोर्ट प्रकाशित
- 1930-32: तीन गोलमेज सम्मेलन
- 1933: श्वेत पत्र (White Paper) प्रकाशित
- 1934: संयुक्त चयन समिति (Joint Select Committee) की रिपोर्ट
- 24 जुलाई 1935: भारत शासन अधिनियम, 1935 को शाही स्वीकृति (Royal Assent)
- 1937: अधिनियम लागू — प्रांतीय चुनाव
📜 अधिनियम लाने के 5 मुख्य कारण
- साइमन कमीशन (1927-1930): आयोग ने संवैधानिक सुधारों की सिफारिशें दीं
- तीन गोलमेज सम्मेलन (1930-32): कांग्रेस की भागीदारी के बिना, लेकिन भारतीय माँगों को समझने का मंच
- नेहरू रिपोर्ट (1928) का दबाव: भारतीयों ने स्वयं संविधान का प्रारूप बनाया — ब्रिटिश सरकार पर दबाव
- प्रांतीय स्वायत्तता की माँग: 1919 की द्वैध शासन (Diarchy) व्यवस्था विफल सिद्ध हुई
- रियासतों को शामिल करने की आवश्यकता: ब्रिटिश सरकार एक अखिल भारतीय संघ (All India Federation) बनाना चाहती थी
🔍 'श्वेत पत्र' (White Paper) — 1933
ब्रिटिश सरकार ने 1933 में एक 'श्वेत पत्र' (White Paper) प्रकाशित किया, जिसमें साइमन कमीशन और गोलमेज सम्मेलनों की सिफारिशों का सारांश था। इसी श्वेत पत्र के आधार पर संयुक्त चयन समिति (Joint Select Committee) ने 1934 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जो अधिनियम का आधार बनी ।
इस समिति के सदस्यों में क्लेमेंट एटली (बाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री) भी शामिल थे, जिन्होंने रिपोर्ट में "राष्ट्रवादी ताकतों पर अविश्वास" की टिप्पणी की थी ।
⚠️ सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
भारत शासन अधिनियम, 1935 ब्रिटिश संसद का अब तक का दूसरा सबसे लंबा अधिनियम था — 321 धाराएँ (Sections) और 10 अनुसूचियाँ (Schedules) । इसकी लंबाई के कारण इसे दो भागों में विभाजित किया गया:
- भारत शासन अधिनियम, 1935 — 321 Sections
- बर्मा शासन अधिनियम, 1935 — 159 Sections
1999 में ग्रेटर लंदन अथॉरिटी अधिनियम ने इसे पीछे छोड़ा, लेकिन तब तक यह सबसे लंबा ब्रिटिश अधिनियम था।
📋 अधिनियम की संरचना — 11 भाग (Parts)
📜 11 भागों का विवरण
| भाग | विषय |
| भाग I | प्रारंभिक (Preliminary) |
| भाग II | संघीय कार्यपालिका (Federal Executive) |
| भाग III | संघीय विधानमंडल (Federal Legislature) |
| भाग IV | प्रांतीय कार्यपालिका (Provincial Executive) |
| भाग V | प्रांतीय विधानमंडल (Provincial Legislature) |
| भाग VI | प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy) |
| भाग VII | संघीय न्यायालय (Federal Court) |
| भाग VIII | संघीय लोक सेवा आयोग (Federal Public Service Commission) |
| भाग IX | आरबीआई (Reserve Bank of India) |
| भाग X | अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Areas) |
| भाग XI | अन्य प्रावधान (Miscellaneous) |
🏛️ संघीय व्यवस्था (Federal System)
⚠️ अखिल भारतीय संघ (All-India Federation)
- ब्रिटिश भारत + रियासतें: संघ में ब्रिटिश भारत और देशी रियासतें दोनों शामिल होनी थीं
- रियासतों का स्वैच्छिक प्रवेश: रियासतें अपनी इच्छा से संघ में शामिल हो सकती थीं
- संघीय योजना कभी लागू नहीं हुई: रियासतों ने शामिल होने से इनकार कर दिया — वे अपनी संप्रभुता को खतरे में नहीं डालना चाहती थीं [citation:13]
- रियासतों की चिंता: उन्हें डर था कि संघीय सरकार उनके "ब्रिटिश क्राउन से सीधे संबंध" को नष्ट कर देगी [citation:13]
🔍 रियासतों का विरोध — 'बार-बार' का प्रभाव
रियासतों ने गोलमेज सम्मेलनों में संघीय योजना का समर्थन किया था, लेकिन जब वास्तविक समय आया तो उन्होंने स्वैच्छिक प्रवेश से इनकार कर दिया ।
कारण: वे डरते थे कि संघीय सरकार उनके राजनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता पर हस्तक्षेप करेगी [citation:13]।
📋 तीन सूचियाँ (Three Lists) — पहली बार
📜 शक्तियों का विभाजन
| सूची | विषयों की संख्या | उदाहरण |
| संघीय सूची (Federal List) | 59 | रक्षा, विदेशी मामले, रेलवे, संचार, मुद्रा |
| प्रांतीय सूची (Provincial List) | 54 | कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय स्वशासन |
| समवर्ती सूची (Concurrent List) | 36 | आपराधिक कानून, वन, जनसंख्या नियंत्रण |
अवशिष्ट शक्तियाँ: गवर्नर जनरल को दी गईं — जो विषय किसी सूची में नहीं थे, वे गवर्नर जनरल के अधीन थे ।
🔍 भारतीय संविधान का सबसे बड़ा स्रोत
भारतीय संविधान के लगभग 65% से अधिक प्रशासनिक प्रावधान 1935 के अधिनियम से हूबहू या आंशिक संशोधनों के साथ लिए गए हैं ।
- संघीय ढाँचा → भारतीय संविधान का संघीय ढाँचा
- तीन सूचियाँ → संघ, राज्य, समवती सूचियाँ
- लोक सेवा आयोग → UPSC, SPSC
- संघीय न्यायालय → सर्वोच्च न्यायालय
- राज्यपाल → राज्यपाल की शक्तियाँ
- आपातकालीन शक्तियाँ → अनुच्छेद 352, 356
🏛️ प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy)
⚠️ 1919 की Diarchy समाप्त
- 1919 की द्वैध शासन (Diarchy) समाप्त: प्रांतों में विषय अब दो भागों में नहीं बँटे थे
- प्रांतीय स्वायत्तता: प्रांतों को स्वतंत्र बजटीय और प्रशासनिक अधिकार मिले
- मंत्रिमंडल उत्तरदायी: प्रांतीय मंत्रिमंडल विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी था
- 1937 के चुनाव: पहले प्रांतीय चुनाव — कांग्रेस ने 11 में से 8 प्रांतों में सरकार बनाई
- गवर्नर की विशेष शक्तियाँ: गवर्नर के पास वीटो शक्ति और सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार था [citation:7]
🔍 गवर्नर का 'तनावपूर्ण' सह-अस्तित्व
गवर्नर और मुख्यमंत्री (तब 'प्रीमियर' कहलाते थे) के बीच तनाव स्पष्ट था। 1937 में कांग्रेस ने इस शर्त पर सरकार बनाई कि गवर्नर प्रांत के राजनीतिक प्रशासन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे ।
जब 1939 में कांग्रेस ने युद्ध के विरोध में इस्तीफा दिया, तो औपनिवेशिक सरकार प्रसन्न थी क्योंकि अब वे बिना किसी हस्तक्षेप के युद्ध का संचालन कर सकते थे — प्रांतों पर गवर्नर शासन (राष्ट्रपति शासन का औपनिवेशिक संस्करण) लागू कर दिया गया [citation:4]।
🏛️ केंद्र में द्वैध शासन (Diarchy at Centre)
⚠️ केंद्र में Diarchy
- प्रांतों में Diarchy समाप्त: लेकिन केंद्र में Diarchy प्रस्तावित
- Reserved Subjects: रक्षा, विदेशी मामले, धार्मिक मामले — गवर्नर जनरल के अधीन
- Transferred Subjects: स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि — भारतीय मंत्रियों के अधीन
- केंद्र में Diarchy कभी लागू नहीं हुई: क्योंकि संघीय योजना विफल हो गई
🔍 केंद्र में Diarchy — एक विसंगति
इतिहासकार आर्थर बेरिडेल कीथ ने लिखा कि प्रांतों में Diarchy समाप्त करना एक सकारात्मक कदम था, लेकिन केंद्र में Diarchy शुरू करना 1919 की उसी विफलता को दोहराना था [citation:8]।
⚖️ संघीय न्यायालय (Federal Court) — 1937
⚠️ संघीय न्यायालय — स्थापना
- स्थापना: 1937 — संघीय योजना लागू नहीं होने के बावजूद [citation:6]
- धारा 318: अधिनियम के अनुसार संघीय न्यायालय और संघीय लोक सेवा आयोग का गठन संघीय योजना से स्वतंत्र रूप से किया गया [citation:6]
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: Maurice Gwyer (1937-1943)
- यह वर्तमान सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का पूर्ववर्ती था
🏦 Reserve Bank of India (RBI) — 1935
⚠️ RBI की स्थापना
- स्थापना: 1935 (Hilton Young Commission की सिफारिश पर)
- मुख्य उद्देश्य: भारतीय मुद्रा और ऋण प्रणाली को ब्रिटिश नियंत्रण से बाहर लाना (हालाँकि व्यवहार में नियंत्रण बना रहा)
- मुख्यालय: कलकत्ता (बाद में मुंबई)
- प्रथम गवर्नर: Sir Osborne Smith (1935-1937)
🏛️ लोक सेवा आयोग (Public Service Commissions)
📜 तीन प्रकार के आयोग
- संघीय लोक सेवा आयोग (FPSC): केंद्रीय सेवाओं के लिए
- प्रांतीय लोक सेवा आयोग (PPSC): प्रत्येक प्रांत के लिए
- संयुक्त लोक सेवा आयोग (JPSC): दो या अधिक प्रांतों के लिए
🗳️ निर्वाचन व्यवस्था
⚠️ मताधिकार का विस्तार
- मताधिकार: लगभग 10-14% जनसंख्या को वोट का अधिकार — 7 मिलियन से 35 मिलियन तक [citation:3]
- प्रत्यक्ष चुनाव: पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव की व्यवस्था
- पृथक निर्वाचन (Separate Electorate): जारी — मुस्लिम, सिख, यूरोपीयन, एंग्लो-इंडियन, भारतीय ईसाई, व्यापारिक हित समूह
- द्विसदनीयता: 6 प्रांतों (बॉम्बे, मद्रास, बंगाल, बिहार, असम, संयुक्त प्रांत) में द्विसदनीय विधानमंडल [citation:3]
📌 अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
🔍 बर्मा, बेरार और एडन का अलगाव
- बर्मा: भारत से अलग कर दिया गया — एक अलग क्राउन कॉलोनी बना [citation:5]
- एडन: भारत से अलग — ब्रिटिश औपनिवेशिक कार्यालय को सौंप दिया गया [citation:5]
- बेरार: हैदराबाद राज्य का हिस्सा रहा, लेकिन प्रशासनिक रूप से मध्य प्रांतों के साथ विलय [citation:5]
🔍 इंडिया काउंसिल (India Council) समाप्त
अधिनियम ने India Council को समाप्त कर दिया और सचिव राज्य (Secretary of State) के सलाहकारों की संख्या 3 से 6 तय की [citation:5]।
📌 अधिनियम की सीमाएँ
⚠️ 5 प्रमुख सीमाएँ
- संघीय योजना विफल: रियासतों ने शामिल होने से इनकार — यह "कागजों पर ही रही" [citation:3]
- गवर्नर जनरल/गवर्नर की निरंकुश शक्तियाँ: वीटो शक्ति, सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार, आपातकालीन शक्तियाँ [citation:7]
- ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता: भारतीय विधानमंडल अधिनियम में संशोधन नहीं कर सकता था — केवल ब्रिटिश संसद को यह अधिकार था [citation:5]
- पृथक निर्वाचन (Separate Electorate): जारी — राष्ट्रीय एकता को कमजोर किया
- पूर्ण उत्तरदायी सरकार नहीं: केंद्र में उत्तरदायी सरकार नहीं बनी
🗣️ भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया
📜 कांग्रेस — "दासता का नया चार्टर"
कांग्रेस ने इसे "दासता का नया चार्टर" (New Charter of Slavery) कहा — जो "अनेक ब्रेकों वाली परंतु इंजन-रहित कार" थी [citation:10]।
पंडित नेहरू ने इसे "बिना किसी उद्देश्य के सभी संरचनाओं का ढाँचा" कहा ।
📜 जिन्ना — "पूरी तरह सड़ा हुआ"
मुहम्मद अली जिन्ना ने इसे "पूरी तरह सड़ा हुआ" (thoroughly rotten) कहा, लेकिन प्रांतीय सरकारों में भाग लेने पर सहमत हुए [citation:10]।
📌 अध्याय निष्कर्ष
भारत शासन अधिनियम, 1935 ब्रिटिश भारत का सबसे व्यापक संवैधानिक दस्तावेज था। इसने:
- प्रांतीय स्वायत्तता दी — 1919 की Diarchy समाप्त
- तीन सूचियाँ — संघीय, प्रांतीय, समवर्ती — पहली बार
- संघीय न्यायालय (1937) और RBI (1935) की स्थापना
- भारतीय संविधान का सबसे बड़ा स्रोत बना — 65% से अधिक प्रावधान
- कांग्रेस और लीग दोनों ने इसकी आलोचना की, लेकिन 1937 के चुनावों में भाग लिया
यद्यपि संघीय योजना विफल रही और गवर्नर की शक्तियाँ निरंकुश रहीं, फिर भी यह अधिनियम आधुनिक भारतीय राजव्यवस्था की आधारशिला है ।
📌 Background — Reasons for the Act
📅 1927-1935 — Key Events
- 1927: Simon Commission formed (8 November)
- 1928: Nehru Report presented (August)
- 1929: Lahore Session — Purna Swaraj declaration
- 1930: Simon Commission Report published
- 1930-32: Three Round Table Conferences
- 1933: White Paper published
- 1934: Joint Select Committee Report
- 24 July 1935: Government of India Act, 1935 received Royal Assent
- 1937: Act implemented — provincial elections
⚠️ Most Important Fact
The Government of India Act, 1935 was the second longest Act of the British Parliament — 321 Sections and 10 Schedules . It was split into two parts due to its length:
- Government of India Act, 1935 — 321 Sections
- Government of Burma Act, 1935 — 159 Sections
🏛️ Federal System
⚠️ All-India Federation
- British India + Princely States: Both were to be included
- Voluntary entry of princely states: They could join at their will
- Federal scheme never implemented: Princes refused to join [citation:13]
📋 Three Lists — First Time
📜 Division of Powers
| List | Subjects | Examples |
| Federal List | 59 | Defence, Foreign Affairs, Railways, Currency |
| Provincial List | 54 | Agriculture, Education, Health, Local Self-Government |
| Concurrent List | 36 | Criminal Law, Forests, Population Control |
🔍 Biggest Source of Indian Constitution
More than 65% of the Indian Constitution's administrative provisions were taken from the 1935 Act .
🏛️ Provincial Autonomy
⚠️ Diarchy of 1919 Abolished
- 1919 Diarchy abolished: Subjects no longer divided in provinces
- Provincial Autonomy: Provinces got independent budgetary and administrative powers
- Cabinet accountable: Provincial cabinet accountable to the legislature
- 1937 elections: Congress won 8 out of 11 provinces
- Governor's special powers: Veto power and authority to dismiss government [citation:7]
🏛️ Diarchy at Centre
⚠️ Diarchy at Centre
- Diarchy abolished in provinces: But proposed at the Centre
- Reserved Subjects: Defence, Foreign Affairs — under Governor General
- Transferred Subjects: Health, Education, Agriculture — under Indian ministers
- Centre Diarchy never implemented: Due to failure of the federal scheme
⚖️ Federal Court — 1937
⚠️ Federal Court — Establishment
- Established: 1937 — despite the federal scheme not being implemented [citation:6]
- Section 318: Federal Court and Federal Public Service Commission were established independent of the federal scheme [citation:6]
- First Chief Justice: Maurice Gwyer (1937-1943)
🏦 Reserve Bank of India — 1935
⚠️ RBI Establishment
- Established: 1935 (on the recommendation of the Hilton Young Commission)
- First Governor: Sir Osborne Smith (1935-1937)
📌 Limitations
⚠️ 5 Major Limitations
- Federal scheme failed: Princely states refused to join
- Governor General/Governor's autocratic powers: Veto power, authority to dismiss government, emergency powers [citation:7]
- British Parliament's supremacy: Indian legislature could not amend the Act
- Separate Electorate continued: Weakened national unity
- No fully responsible government: At the Centre
📌 Chapter Conclusion
The Government of India Act, 1935 was the most comprehensive constitutional document of British India. It:
- Gave Provincial Autonomy — ended Diarchy of 1919
- Introduced Three Lists — Federal, Provincial, Concurrent — for the first time
- Established Federal Court (1937) and RBI (1935)
- Became the biggest source of the Indian Constitution — more than 65% provisions
- Both Congress and League criticized it but participated in 1937 elections
Although the federal scheme failed and Governor's powers remained autocratic, this Act remains the foundation of modern Indian polity .