1885 से 1950 तक — कांग्रेस की स्थापना से गणतंत्र स्थापना तक
9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा (सबसे वरिष्ठ सदस्य) ने अस्थायी अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए ।
13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution) प्रस्तुत किया — जो बाद में संविधान की प्रस्तावना का आधार बना ।
गठन: 29 अगस्त 1947
कार्य: संविधान का प्रारूप तैयार करना
कार्यकाल: 29 अगस्त 1947 से 26 नवंबर 1949 तक
| सदस्य | राज्य/रियासत | भूमिका एवं योगदान |
|---|---|---|
| डॉ. भीमराव आंबेडकर (अध्यक्ष) | बंबई (मूल रूप से बंगाल) | संविधान के मुख्य प्रवर्तक, 2.67 लाख शब्द बोले, 395 अनुच्छेदों को अंतिम रूप दिया, संविधान की सबसे लंबी बहस की अगुआई की |
| अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर | मद्रास | संघीय ढाँचे और न्यायिक स्वतंत्रता के प्रमुख समर्थक, लोकसभा और राज्यसभा की अवधारणा को अंतिम रूप देने में योगदान |
| एन. गोपालस्वामी अय्यंगार | मद्रास | अनुच्छेद 370 के प्रारूपकार, संसदीय संरचना के विशेषज्ञ, जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के वास्तुकार |
| के.एम. मुंशी | बंबई | निर्देशक सिद्धांतों और सांस्कृतिक अधिकारों के प्रमुख समर्थक, "मौलिक कर्तव्य" की अवधारणा के प्रवर्तक |
| सैयद मोहम्मद सादुल्ला | असम | अल्पसंख्यक अधिकारों और बहिष्कृत क्षेत्रों के विशेषज्ञ, उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष प्रावधानों के समर्थक |
| बी.एल. मित्तर | बंगाल | कानूनी विशेषज्ञ (स्वास्थ्य कारणों से 1948 में इस्तीफा दिया), रियासतों के एकीकरण में प्रारंभिक योगदान |
| देवी प्रसाद खैतान | बंगाल | 1948 में निधन, कानूनी मुद्दों पर सक्रिय सदस्य |
| टी.टी. कृष्णमाचारी | मद्रास | जनवरी 1948 में खैतान की जगह शामिल, वित्तीय संघवाद और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों के विशेषज्ञ |
| एन. माधव राव | मैसूर | बाद में जोड़े गए, प्रशासनिक सुधारों के विशेषज्ञ, लोक सेवा आयोगों के ढाँचे को अंतिम रूप देने में योगदान |
गठन: 1947
अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू
कार्य: केंद्र सरकार की शक्तियों का निर्धारण — संघ सूची तैयार करना
| सदस्य | राज्य/रियासत | भूमिका एवं योगदान |
|---|---|---|
| जवाहरलाल नेहरू (अध्यक्ष) | संयुक्त प्रांत | संघ सूची का प्रारूप तैयार किया, केंद्र को 59 विषयों पर शक्ति दी |
| वल्लभभाई पटेल | बंबई | संघीय ढाँचे को मजबूत करने में सहायक |
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद | बिहार | केंद्र की शक्तियों पर बहस में योगदान |
| मौलाना अबुल कलाम आज़ाद | बंगाल | धर्मनिरपेक्षता और केंद्र की तटस्थता के समर्थक |
गठन: 1947
अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू
कार्य: संघीय ढाँचे का प्रारूप — राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल की संरचना
| सदस्य | राज्य/रियासत | भूमिका एवं योगदान |
|---|---|---|
| जवाहरलाल नेहरू (अध्यक्ष) | संयुक्त प्रांत | संसदीय प्रणाली का प्रारूप तैयार किया, ब्रिटिश मॉडल को भारतीय संदर्भ में ढाला |
| वल्लभभाई पटेल | बंबई | राष्ट्रपति की भूमिका को स्पष्ट करने में योगदान |
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद | बिहार | संसदीय प्रक्रियाओं पर बहस |
| डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी | बंगाल | राष्ट्रपति की शक्तियों पर वैकल्पिक विचारों को उठाया |
गठन: 1947
अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू
कार्य: रियासतों और प्रांतों के बीच संबंधों का निर्धारण — रियासतों के एकीकरण का ढाँचा
| सदस्य | राज्य/रियासत | भूमिका एवं योगदान |
|---|---|---|
| जवाहरलाल नेहरू (अध्यक्ष) | संयुक्त प्रांत | रियासतों के एकीकरण की नीति का नेतृत्व किया |
| वल्लभभाई पटेल | बंबई | रियासतों को भारत में विलय करने की रणनीति बनाई |
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद | बिहार | प्रांतों और रियासतों के संतुलन पर जोर दिया |
गठन: 1947
अध्यक्ष: वल्लभभाई पटेल
कार्य: प्रांतीय सरकारों के ढाँचे का निर्धारण — राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभाओं की संरचना
| सदस्य | राज्य/रियासत | भूमिका एवं योगदान |
|---|---|---|
| वल्लभभाई पटेल (अध्यक्ष) | बंबई | प्रांतीय स्वायत्तता को सुनिश्चित किया, राज्यपाल की भूमिका को परिभाषित किया |
| जवाहरलाल नेहरू | संयुक्त प्रांत | प्रांतीय सरकारों की संसदीय प्रणाली का समर्थन किया |
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद | बिहार | प्रांतीय विधानसभाओं की भूमिका पर बहस में योगदान |
| गोपीनाथ बोरदोलोई | असम | उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष प्रावधानों का सुझाव दिया |
गठन: 1947
अध्यक्ष: वल्लभभाई पटेल
कार्य: मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का प्रारूप
| सदस्य | राज्य/रियासत | भूमिका एवं योगदान |
|---|---|---|
| वल्लभभाई पटेल (अध्यक्ष) | बंबई | मौलिक अधिकारों को अंतिम रूप दिया, अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षा प्रावधानों का नेतृत्व किया |
| जवाहरलाल नेहरू | संयुक्त प्रांत | धर्मनिरपेक्षता और समानता के सिद्धांतों को आगे बढ़ाया |
| मौलाना अबुल कलाम आज़ाद | बंगाल | अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर बल दिया |
| डॉ. बी.आर. आंबेडकर | बंबई | अस्पृश्यता उन्मूलन और दलित अधिकारों के लिए प्रावधान सुझाए |
| हंसा जीवराज मेहता | बंबई | महिलाओं के लिए आरक्षण के विरोध में, समानता के पक्ष में |
| दक्षायानी वेलायुधन | मद्रास | अस्पृश्यता उन्मूलन की प्रबल समर्थक |
| राजकुमारी अमृत कौर | कपूरथला | धर्मनिरपेक्षता और महिला अधिकारों के पक्ष में |
गठन: 1946
अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
कार्य: संविधान सभा की कार्यविधि का निर्धारण — बहस, मतदान, प्रस्तावों की प्रक्रिया
| सदस्य | राज्य/रियासत | भूमिका एवं योगदान |
|---|---|---|
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद (अध्यक्ष) | बिहार | संविधान सभा की कार्यविधि को सुनिश्चित किया |
| जी.वी. मावलंकर | बंबई | कार्यविधि के विस्तृत नियमों का प्रारूप तैयार किया |
| एच.सी. मुखर्जी | बंगाल | बहस और मतदान प्रक्रिया में योगदान |
गठन: 1946
अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
कार्य: संविधान सभा के कार्यों का संचालन — सत्रों की योजना, एजेंडा तय करना
| सदस्य | राज्य/रियासत | भूमिका एवं योगदान |
|---|---|---|
| डॉ. राजेंद्र प्रसाद (अध्यक्ष) | बिहार | संविधान सभा के सुचारू संचालन का नेतृत्व किया |
| जवाहरलाल नेहरू | संयुक्त प्रांत | महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्रों का निर्धारण |
| वल्लभभाई पटेल | बंबई | आपातकालीन सत्रों के आयोजन में योगदान |
| जी.वी. मावलंकर | बंबई | कार्यसूची की योजना बनाना |
अध्यक्ष: अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
कार्य: सदस्यों की साख और योग्यता की जाँच
योगदान: सभी 389 सदस्यों के चुनावी प्रमाण-पत्रों की जाँच की गई
अध्यक्ष: बी. पट्टाभि सीतारमैय्या
कार्य: सदन के आंतरिक प्रबंधन — बैठक कक्षों, सुविधाओं का प्रबंधन
योगदान: संविधान सभा की 165 बैठकों के लिए व्यवस्था सुनिश्चित की
अध्यक्ष: के.एम. मुंशी
कार्य: प्रत्येक सत्र की कार्यसूची निर्धारित करना
योगदान: 11 सत्रों के लिए विस्तृत कार्यसूची तैयार की
अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
कार्य: राष्ट्रीय ध्वज का स्वरूप तय करना
परिणाम: 22 जुलाई 1947 — तिरंगा (केसरिया, सफेद, हरा) अशोक चक्र के साथ स्वीकृत
अध्यक्ष: जी.वी. मावलंकर
कार्य: संविधान सभा के कार्यों की परिभाषा और विभाजन
योगदान: संविधान सभा को अस्थायी संसद के रूप में कार्य करने की व्यवस्था
अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
कार्य: वित्तीय प्रबंधन और स्टाफ की नियुक्ति
योगदान: ₹64 लाख के व्यय का प्रबंधन किया
अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू
कार्य: मौलिक अधिकारों का विस्तृत अध्ययन
योगदान: 6 मौलिक अधिकारों की सूची तैयार की
अध्यक्ष: बी. पट्टाभि सीतारमैय्या
कार्य: अल्पसंख्यकों के अधिकारों का अध्ययन
योगदान: धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षा प्रावधानों की सिफारिश
अध्यक्ष: गोपीनाथ बोरदोलोई
कार्य: असम के जनजातीय क्षेत्रों का अध्ययन
योगदान: नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश के लिए विशेष प्रावधानों का सुझाव
अध्यक्ष: जी.वी. मावलंकर
कार्य: अस्पृश्यता उन्मूलन के उपाय
योगदान: अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का उन्मूलन
अध्यक्ष: ए.वी. ठक्कर
कार्य: व्यतिरिक्त क्षेत्रों का अध्ययन
योगदान: अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों के लिए प्रावधान
अध्यक्ष: वल्लभभाई पटेल
कार्य: प्रांतीय संविधान का विस्तृत अध्ययन
योगदान: राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अधिकारों को परिभाषित किया
अध्यक्ष: जे.बी. कृपलानी
कार्य: बहिष्कृत और अर्ध-बहिष्कृत क्षेत्रों का अध्ययन
योगदान: अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए प्रावधान
अध्यक्ष: एच.सी. मुखर्जी
कार्य: विभिन्न समितियों के कार्यों का समन्वय
योगदान: 22 समितियों के कार्यों को एकीकृत किया
| सदस्य | रियासत/क्षेत्र | योगदान |
|---|---|---|
| वी.टी. कृष्णमाचारी | रियासतों से नामित (मैसूर से थे, राजस्थान का प्रतिनिधित्व) | रियासतों के एकीकरण में सहायक, वित्तीय संघवाद के विशेषज्ञ |
| हीरा लाल शास्त्री | जयपुर रियासत | राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री (1949-1951), ग्रामीण विकास के समर्थक |
| राज बहादुर | जोधपुर रियासत | कानूनी मामलों में योगदान, संविधान की अंतिम प्रति पर हस्ताक्षर |
| माणिक्य लाल वर्मा | कोटा रियासत | सामाजिक सुधारों में रुचि, हरिजन उत्थान के समर्थक |
| लौ. कर्नल अपजी दलेल सिंह | बीकानेर रियासत | सैन्य मामलों में योगदान, रियासतों की सेना के एकीकरण में सहायक |
| जय नारायण व्यास | उदयपुर रियासत | बाद में राजस्थान के मुख्यमंत्री (1951-1954), शिक्षा सुधारों के समर्थक |
| मुकट बिहारी लाल भार्गव | अलवर रियासत | वित्तीय मामलों में योगदान, राज्य के बजट पर चर्चा |
| गोकुलभाई भट्ट | बूंदी रियासत | सामाजिक सुधारक, गांधीवादी, खादी और ग्रामोद्योग के समर्थक |
| बलवंत सिंह मेहता | उदयपुर रियासत | 1948 में संविधान सभा में शामिल, 1 भाषण दिया, स्थानीय स्वशासन के समर्थक |
नोट: राजस्थान की रियासतें 'संयुक्त राजस्थान' के रूप में संविधान सभा में प्रतिनिधित्व करती थीं। सभी 9 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान पर हस्ताक्षर किए।
| सदस्य | क्षेत्र/राज्य | योगदान |
|---|---|---|
| राजकुमारी अमृत कौर | कपूरथला (पंजाब) | स्वास्थ्य मंत्री (बाद में), AIIMS की संस्थापक, धर्मनिरपेक्षता और महिला अधिकारों की समर्थक, 27 भाषण, 8,258 शब्द बोले |
| सरोजिनी नायडू | संयुक्त प्रांत (UP) | कवयित्री, 'भारत कोकिला', स्वतंत्रता सेनानी, संविधान सभा में 2 भाषण, 1,200 शब्द, महिलाओं के अधिकारों की समर्थक |
| सुचेता कृपलानी | संयुक्त प्रांत (UP) | बाद में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री (1963-67), संविधान सभा में 4 भाषण, 3,400 शब्द, महिला अधिकारों की समर्थक |
| हंसा जीवराज मेहता | बंबई | UN महिला आयोग की अध्यक्ष, 1948 में, संविधान सभा में 8 भाषण, 6,700 शब्द, महिलाओं के लिए आरक्षण की विरोधी (समानता के पक्ष में) |
| दुर्गाबाई देशमुख | मद्रास | सामाजिक सुधारक, संविधान सभा में 8 भाषण, 7,400 शब्द, न्यायपालिका पर बहस में सक्रिय |
| अम्मू स्वामीनाथन | मद्रास | सामाजिक कार्यकर्ता, जातिवाद विरोधी, संविधान सभा में 14 भाषण, 7,800 शब्द, अस्पृश्यता उन्मूलन की समर्थक |
| दक्षायानी वेलायुधन | मद्रास | पुलाया समुदाय से पहली महिला, गांधीवादी, संविधान सभा में 4 भाषण, 5,300 शब्द, अस्पृश्यता उन्मूलन की प्रबल समर्थक |
| रेनुका राय | बंगाल | महिला अधिकार कार्यकर्ता, संविधान सभा में 5 भाषण, 4,200 शब्द, न्याय और समानता की समर्थक |
| बेगम आज़ियाज़ रसूल | संयुक्त प्रांत (UP) | मुस्लिम महिला, आरक्षण की विरोधी, संविधान सभा में 3 भाषण, 2,800 शब्द |
| कमलादेवी चट्टोपाध्याय | बंबई | सामाजिक सुधारक, संस्कृति मंत्री (बाद में), संविधान सभा में 2 भाषण, 1,900 शब्द |
| जी. दुर्गाबाई | मद्रास | सबसे अधिक बोलने वाली महिला सदस्य — 23,000 शब्द, 15 भाषण, न्यायपालिका और मौलिक अधिकारों पर गहन बहस |
| पूर्णिमा बनर्जी | बंगाल | सामाजिक कार्यकर्ता, संविधान सभा में 1 भाषण, 800 शब्द |
| कमला चौधरी | राजस्थान | संविधान सभा में 2 भाषण, 1,200 शब्द |
| मालती चौधरी | उड़ीसा | संविधान सभा में 1 भाषण, 900 शब्द |
| अन्य एक महिला सदस्य | — | — |
"भारत एक संप्रभु स्वतंत्र गणराज्य होगा। उसके सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व प्राप्त होगा।"
| योगदान | व्यक्ति | विवरण |
|---|---|---|
| अंग्रेजी हस्तलिपि | प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा | नि:शुल्क हस्तलिपिकार (calligrapher), 234 पृष्ठ, 1000 वर्षों का जीवनकाल, केवल अनुरोध — "हर पृष्ठ पर मेरा नाम दिखाई दे" |
| हिंदी हस्तलिपि | वसंत कृष्ण वैद्य | हिंदी संस्करण के हस्तलिपिकार |
| चित्रण एवं कला (Illumination) | नंदलाल बोस (प्रसिद्ध कलाकार, शांतिनिकेतन) | संविधान के प्रत्येक पृष्ठ का कलात्मक चित्रण, भारतीय कला और संस्कृति का अद्वितीय मिश्रण |
| प्रस्तावना चित्रण | बेओहार राममनोहर सिन्हा | प्रस्तावना पृष्ठ का विशेष चित्रण |
| राष्ट्रीय चिन्ह (Emblem) | दीनानाथ भार्गव | अशोक स्तंभ का चित्रण |
| अन्य कलाकार | कृपाल सिंह शेखावत, ए. पेरुमल, विनायक शिवराम मासोजी, बिस्वरूप बोस, गौरी भांजा, जमुना सेन | विभिन्न पृष्ठों का चित्रण, भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब |
संविधान निर्माण (1946-1950) भारतीय इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय था।
यह संविधान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम परिणाम था — जिसने गणतंत्र की नींव रखी ।
The first meeting of the Constituent Assembly was held on 9 December 1946. Dr. Sachchidananda Sinha served as the temporary Chairman. On 11 December 1946, Dr. Rajendra Prasad was elected permanent Chairman .
On 13 December 1946, Pandit Jawaharlal Nehru moved the Objective Resolution — which later became the basis of the Preamble .
| Committee | Chairman |
|---|---|
| Drafting Committee | Dr. B.R. Ambedkar |
| Union Power Committee | Jawaharlal Nehru |
| Union Constitution Committee | Jawaharlal Nehru |
| States Committee | Jawaharlal Nehru |
| Provincial Constitution Committee | Vallabhbhai Patel |
| Fundamental Rights & Minority Committee | Vallabhbhai Patel |
| Rules of Procedure Committee | Rajendra Prasad |
| Steering Committee | Rajendra Prasad |
Constitution-making (1946-1950) was the most important chapter of Indian history.