1885 से 1956 तक — कांग्रेस की स्थापना से राज्य पुनर्गठन तक
संकलन एवं विश्लेषण : RAS A2Z Senior Faculty
RAS A2Z
📖 विषय-सूची
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📚 अध्याय 25 — राज्य पुनर्गठन (1947-1956)📚 Chapter 25 — State Reorganisation (1947-1956)
अध्याय 25
राज्य पुनर्गठन — 1947 से 1956 तक की संपूर्ण यात्राState Reorganisation — The Complete Journey from 1947 to 1956
"1947 में स्वतंत्रता के समय भारत 500 से अधिक रियासतों और ब्रिटिश प्रांतों का एक जटिल संघ था। 1950 के संविधान ने Part A, B, C, D राज्यों की व्यवस्था बनाई। लेकिन भाषायी आंदोलनों के दबाव में 1956 का राज्य पुनर्गठन अधिनियम भारत के नक्शे को पूरी तरह बदलने वाला सबसे बड़ा प्रशासनिक फैसला था।""At independence in 1947, India was a complex union of over 500 princely states and British provinces. The 1950 Constitution created the system of Part A, B, C, D states. But under pressure from linguistic movements, the 1956 States Reorganisation Act became the single biggest administrative decision that completely redrew India's map."
📅 स्वतंत्रता : 15 अगस्त 1947📅 संविधान : 26 जनवरी 1950📅 अंध्र राज्य : 1 अक्टूबर 1953📅 राज्य पुनर्गठन : 31 अगस्त 1956🎯 परीक्षा :PREMAINSIMPORTANT
📌 प्रारंभिक स्थिति — 1947-1950
📅 1947-1956 — महत्वपूर्ण तिथियाँ
15 अगस्त 1947: भारत स्वतंत्र — 500+ रियासतें + ब्रिटिश प्रांत
26 जनवरी 1950: संविधान लागू — Part A, B, C, D राज्य
अक्टूबर 1952: पोट्टी श्रीरामुलु का आमरण अनशन (56 दिन)
15 दिसंबर 1952: श्रीरामुलु की मृत्यु — आंध्र आंदोलन तीव्र
दिसंबर 1953: राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) का गठन
अक्टूबर 1953: अंध्र राज्य का गठन — पहला भाषायी राज्य
31 अगस्त 1956: राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू
📜 1947 की स्थिति
ब्रिटिश प्रांत (Provinces): 9 Part A राज्य — गवर्नर और निर्वाचित विधानमंडल
रियासतों के समूह (Princely States): 8 Part B राज्य — राजप्रमुख (शासक)
मुख्य आयुक्त क्षेत्र (Chief Commissioner Areas): 10 Part C राज्य — केंद्र द्वारा प्रशासित
जम्मू-कश्मीर: विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) — 1957 तक अलग वर्गीकरण
अंडमान-निकोबार: Part D क्षेत्र — उपराज्यपाल द्वारा प्रशासित
⚠️ सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
1950 के संविधान ने 4 प्रकार के राज्यों की व्यवस्था की [citation:5]:
Part A (9): Assam, West Bengal, Bihar, Bombay, Madhya Pradesh, Madras, Orissa, Punjab, Uttar Pradesh
Part B (8): Hyderabad, Saurashtra, Mysore, Travancore-Cochin, Madhya Bharat, Vindhya Pradesh, PEPSU, Rajasthan
Part C (10): Delhi, Kutch, Himachal Pradesh, Bilaspur, Coorg, Bhopal, Manipur, Ajmer-Merwara, Tripura
Part D (1): Andaman and Nicobar Islands
यह व्यवस्था अस्थायी थी — भाषायी पहचान जल्द ही बदलाव की माँग उठाएगी [citation:3][citation:5].
चरण 2 (1952-1953): पोट्टी श्रीरामुलु का आमरण अनशन — 56 दिन, 15 दिसंबर 1952 को मृत्यु
चरण 3 (1953-1956): राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) — 1953 में गठन, 1955 में रिपोर्ट, 1956 में लागू
⚠️ पोट्टी श्रीरामुलु — आंध्र आंदोलन के शहीद
नाम: पोट्टी श्रीरामुलु (Potti Sreeramulu)
आंदोलन: तेलुगु भाषी क्षेत्रों के लिए अलग आंध्र राज्य की माँग
अनशन: 19 अक्टूबर 1952 से — 56 दिन
मृत्यु: 15 दिसंबर 1952 — उनकी मृत्यु के बाद पूरे आंध्र क्षेत्र में हिंसक विरोध
परिणाम: 1 अक्टूबर 1953 — अंध्र राज्य का गठन
प्रभाव: इस आंदोलन ने पूरे देश में भाषायी राज्यों की माँग को बल दिया [citation:3]
🔍 श्रीरामुलु की मृत्यु का प्रभाव
श्रीरामुलु की मृत्यु के बाद आंध्र क्षेत्र में हिंसक विरोध हुआ — सड़कों पर प्रदर्शन, पुलिस मुठभेड़। पंडित नेहरू ने 19 दिसंबर 1952 को अलग आंध्र राज्य बनाने की घोषणा की [citation:3][citation:5].
🎯 परीक्षा ट्रिक — आंध्र राज्य
गठन: 1 अक्टूबर 1953
क्षेत्र: मद्रास राज्य के 16 तेलुगु-भाषी जिले
राजधानी: कुर्नूल
प्रथम मुख्यमंत्री: टी. प्रकाशम
महत्व:भारत का पहला भाषायी राज्य — इसने पूरे देश में भाषायी राज्यों की माँग को जन्म दिया [citation:3][citation:5]
"स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने राज्यों के पुनर्गठन की सबसे बड़ी चुनौती थी। 1948 से 1956 के बीच तीन प्रमुख आयोग/समितियाँ बनीं — धार आयोग (1948), जे.वी.पी. समिति (1948-49), और फजल अली आयोग (1953-55)। इन तीनों ने भारत के राज्यों के स्वरूप को अंतिम रूप दिया।""After independence, the biggest challenge before India was the reorganisation of states. Between 1948 and 1956, three major commissions/committees were formed — the Dhar Commission (1948), the JVP Committee (1948-49), and the Fazal Ali Commission (1953-55). These three gave the final shape to India's states."
📅 धार आयोग : जून 1948📅 जे.वी.पी. समिति : दिसंबर 1948📅 फजल अली आयोग : दिसंबर 1953🎯 परीक्षा :PREMAINSIMPORTANT
📋 धार आयोग (Linguistic Provinces Commission) — 1948
📜 आयोग का गठन एवं सदस्य
गठन:जून 1948 — संविधान सभा द्वारा भाषायी प्रांतों की व्यवहार्यता की जाँच के लिए [citation:12][citation:14]
अध्यक्ष:एस.के. धार (S.K. Dhar) — इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश [citation:5][citation:14]
सदस्य:जे.एन. लाल (J.N. Lal) — वकील; पन्ना लाल (Panna Lall) — सेवानिवृत्त नौकरशाह [citation:14]
कार्य: देश भर में भ्रमण, साक्ष्य संग्रह, सार्वजनिक बैठकें और निजी साक्षात्कार [citation:14]
रिपोर्ट:दिसंबर 1948 — प्रकाशित [citation:12]
⚠️ धार आयोग की सिफारिशें
भाषा को आधार न बनाना: "पूरी तरह या मुख्य रूप से भाषाई विचारों पर प्रांतों का गठन भारतीय राष्ट्र के व्यापक हितों में नहीं है" [citation:14]
प्रशासनिक सुविधा: राज्यों का पुनर्गठन भाषा के बजाय प्रशासनिक सुविधा, ऐतिहासिक और भौगोलिक विचारों पर आधारित होना चाहिए [citation:5][citation:15]
देरी की सलाह: राज्यों के पुनर्गठन को 20-25 वर्षों के लिए स्थगित करने की सिफारिश [citation:1]
आर्थिक प्राथमिकता: राष्ट्र की आर्थिक प्रगति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए [citation:1]
🔍 धार आयोग की सीमाएँ एवं प्रतिक्रिया
आलोचना: आयोग की रिपोर्ट ने सामान्य निराशा पैदा की [citation:12]
कारण: कांग्रेस ने 1920 के दशक में भाषायी प्रांतों का वादा किया था, लेकिन अब इसकी अनदेखी की जा रही थी [citation:14]
परिणाम: आयोग की रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर कांग्रेस ने दिसंबर 1948 में जे.वी.पी. समिति का गठन किया [citation:5][citation:6]
📋 जे.वी.पी. समिति (JVP Committee) — 1948-49
📜 समिति का गठन एवं सदस्य
गठन:दिसंबर 1948 — जयपुर कांग्रेस अधिवेशन में [citation:6][citation:14]
सदस्य:
जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)
वल्लभभाई पटेल (Vallabhbhai Patel)
पट्टाभि सीतारमैय्या (Pattabhi Sitaramayya) — तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष [citation:6]
उद्देश्य: धार आयोग की सिफारिशों का अध्ययन करना और भाषायी प्रांतों के मुद्दे पर पुनर्विचार करना [citation:5][citation:12]
रिपोर्ट:1 अप्रैल 1949 — प्रकाशित [citation:6]
⚠️ जे.वी.पी. समिति की सिफारिशें
धार आयोग का समर्थन: समिति ने धार आयोग की सिफारिशों को पुनः पुष्ट किया [citation:12]
10 वर्ष स्थगन: "नए प्रांतों के गठन को 10 वर्षों के लिए स्थगित कर दिया जाए" [citation:6]
लोकतांत्रिक स्वीकृति: "यदि जनता की भावना अत्यधिक प्रबल और अप्रतिरोध्य है, तो हम, लोकतंत्रवादी होने के नाते, इसे स्वीकार करेंगे" — लेकिन पूरे भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए [citation:12][citation:14]
व्यक्तिगत मामलों में छूट: यदि संबंधित पक्षों के बीच सहमति हो तो व्यक्तिगत मामलों में कदम उठाए जा सकते हैं [citation:6]
🔍 जे.वी.पी. समिति की विशेष टिप्पणियाँ
आंध्र, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र: इन चारों प्रस्तावों के पीछे मजबूत भावना और योग्यता स्वीकार की [citation:2]
बंबई शहर: "बंबई एक बहुभाषी महानगर है — इसे किसी एक भाषायी राज्य से नहीं जोड़ा जा सकता" [citation:2]
विदर्भ/नागपुर: महाराष्ट्र में विलय का निर्णय विदर्भ और नागपुर की पसंद पर छोड़ा गया [citation:2]
राज्यों की समस्या: रियासतों के एकीकरण के बिना केरल और कर्नाटक का गठन संभव नहीं [citation:2]
हृदय नाथ कुंजरू (H.N. Kunzru) — समाज सुधारक, संसद सदस्य
सचिव:आर.वी. नायडू (R.V. Naidu)
उद्देश्य:"भारत के राज्यों के पुनर्गठन का उद्देश्य, निष्पक्ष और अध्ययनपूर्ण" अध्ययन
पर्यवेक्षक:गोविंद बल्लभ पंत — गृह मंत्री (दिसंबर 1954 से) [citation:8]
रिपोर्ट:30 सितंबर 1955 — प्रस्तुत [citation:8]
🔍 SRC — रोचक तथ्य
आयोग ने 2 वर्षों तक काम किया — देश के सभी हिस्सों का दौरा किया, 1.5 लाख से अधिक ज्ञापन प्राप्त किए
📜 SRC की रिपोर्ट — 1955
📜 रिपोर्ट के 5 मुख्य सिद्धांत
भाषाई और सामाजिक समरूपता: राज्यों के पुनर्गठन का मुख्य आधार भाषा होगी
अर्थव्यवस्था: व्यवहार्यता और आर्थिक दक्षता — राज्य आत्मनिर्भर हों
प्रशासन: प्रशासनिक सुविधा और सरलता
राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा: राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा — किसी भी राज्य को अलगाव का अवसर नहीं
सर्वसम्मति: यथासंभव स्थानीय जनता की भावनाओं का सम्मान
📜 आयोग की प्रमुख सिफारिशें (1955)
Part A, B, C, D समाप्त: सभी राज्यों को एक समान दर्जा
राजप्रमुख व्यवस्था समाप्त: रियासतों के शासकों की विशेष स्थिति समाप्त
अनुच्छेद 371 समाप्त: रियासतों पर केंद्र का विशेष नियंत्रण समाप्त
16 राज्य + 3 केंद्र शासित प्रदेश: प्रस्तावि
भाषाई अल्पसंख्यकों की सुरक्षा:
70% से अधिक एक भाषा वाले राज्य → एकभाषी
30% से अधिक अन्य भाषा वाले राज्य → द्विभाषी
अल्पसंख्यक भाषा को जिला स्तर पर प्रशासनिक कार्यों में प्रयोग करने की अनुमति
बहुभाषी क्षेत्रों में: दोनों भाषाओं में सरकारी सूचनाएँ प्रकाशित करने की सिफारिश,
द्विभाषी राज्य: मुंबई (मराठी+गुजराती) और पंजाब (हिंदी+पंजाबी) — द्विभाषी राज्यों को स्वीकार किया
विरोध: कुछ क्षेत्रों में सिफारिशों का विरोध — विशेषकर मुंबई (संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन)
रियासतों का एकीकरण: सभी Part B राज्यों को भाषायी आधार पर विलय
🔍 SRC की रिपोर्ट — विवाद
आयोग ने बंबई को द्विभाषी (मराठी+गुजराती) राज्य बनाने की सिफारिश की — जिससे संयुक्त महाराष्ट्र और महागुजरात आंदोलन तीव्र हो गए
📊 तीनों आयोग/समितियों की तुलना
पैरामीटर
धार आयोग (1948)
जे.वी.पी. समिति (1948-49)
फजल अली आयोग (1953-55)
अध्यक्ष
एस.के. धार
जवाहरलाल नेहरू
फजल अली
सदस्य
जे.एन. लाल, पन्ना लाल
पटेल, सीतारमैय्या
पणिक्कर, कुंजरू
रिपोर्ट
दिसंबर 1948
1 अप्रैल 1949
30 सितंबर 1955
भाषा को आधार
❌ नहीं
❌ नहीं (10 वर्ष स्थगन)
✅ हाँ (मुख्य आधार)
प्रशासनिक सुविधा
✅ प्राथमिकता
✅ प्राथमिकता
⚠️ माध्यमिक
परिणाम
निराशा, JVP का गठन
10 वर्ष स्थगन, आलोचना
1956 अधिनियम — 14 राज्य
📌 अध्याय निष्कर्ष
राज्य पुनर्गठन की यात्रा तीन आयोगों/समितियों से होकर गुज़री :
धार आयोग (1948): भाषा के बजाय प्रशासनिक सुविधा — असफल
जे.वी.पी. समिति (1948-49): 10 वर्ष स्थगन — आलोचना का सामना []
फजल अली आयोग (1953-55): भाषा को आधार — 1956 अधिनियम [c
पोट्टी श्रीरामुलु (1952): 58 दिन का अनशन — आंध्र राज्य का जन्म ]
इन तीनों आयोगों के माध्यम से आधुनिक भारत के राज्यों का स्वरूप निर्धारित हुआ — जो भाषाई पहचान को राजनीतिक अस्तित्व प्रदान करता है ।
📋 राज्य पुनर्गठन अधिनियम — 1956
⚠️ 31 अगस्त 1956 — ऐतिहासिक क्षण
अधिनियम: States Reorganisation Act, 1956 — 31 अगस्त 1956 को लागू [citation:3][citation:6]
Part A, B, C, D समाप्त: सभी राज्यों को एक समान दर्जा दिया गया
कुल राज्य:14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश [citation:6]
📜 14 नए राज्य (1956)
राज्य
क्षेत्र (पूर्व घटक)
आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh)
अंध्र राज्य + तेलंगाना (हैदराबाद राज्य का)
असम (Assam)
कोई क्षेत्रीय परिवर्तन नहीं
बिहार (Bihar)
कुछ क्षेत्र पश्चिम बंगाल को हस्तांतरित
बंबई (Bombay)
कच्छ, सौराष्ट्र, मराठी भाषी क्षेत्र (हैदराबाद+मध्य प्रदेश) + पुराना बंबई — कन्नड़ क्षेत्र मैसूर को
केरल (Kerala)
त्रावणकोर-कोचीन + मद्रास के कुछ क्षेत्र
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)
पुराना मध्य प्रदेश + मध्य भारत + भोपाल + विन्ध्य प्रदेश (8 जिले छोड़कर)
मद्रास (Madras)
क्षेत्रीय समायोजन (कुछ क्षेत्र केरल और आंध्र को)
मैसूर (Mysore)
पुराना मैसूर + कूर्ग + कन्नड़ भाषी क्षेत्र (बंबई, हैदराबाद, मद्रास से)
उड़ीसा (Orissa)
कोई क्षेत्रीय परिवर्तन नहीं
पंजाब (Punjab)
पुराना पंजाब + PEPSU (पटियाला ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन)
राजस्थान (Rajasthan)
पुराना राजस्थान + अजमेर
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)
कोई क्षेत्रीय परिवर्तन नहीं
पश्चिम बंगाल (West Bengal)
बिहार से कुछ क्षेत्र (उत्तरी और दक्षिणी भागों को जोड़ने के लिए)
जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir)
विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) — कोई क्षेत्रीय परिवर्तन नहीं
स्रोत: Sansad परिषद की रिपोर्ट, 1956 [citation:6]
📜 6 केंद्र शासित प्रदेश (1956)
केंद्र शासित प्रदेश
विवरण
दिल्ली (Delhi)
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)
पहाड़ी क्षेत्र (बिलासपुर का विलय)
मणिपुर (Manipur)
पूर्वोत्तर क्षेत्र
त्रिपुरा (Tripura)
पूर्वोत्तर क्षेत्र
अंडमान और निकोबार (Andaman & Nicobar)
द्वीप समूह
लक्षद्वीप (Laccadive, Minicoy & Amindivi)
द्वीप समूह (मद्रास से अलग)
📋 7वाँ संविधान संशोधन — 1956
⚠️ 7वाँ संशोधन — 1956
Part A, B, C, D समाप्त: 4 प्रकार के राज्यों को समाप्त कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एकसमान व्यवस्था [citation:4][citation:5]
लोकसभा और राज्यसभा सीटों का पुनर्वितरण: राज्यों के पुनर्गठन के अनुसार सीटों में बदलाव [citation:4]
उच्च न्यायालयों में सुधार: नए राज्यों के लिए उच्च न्यायालयों की व्यवस्था
कार्यकारी शक्तियों का विस्तार: केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का पुनर्वितरण
केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नया ढाँचा: केंद्र द्वारा सीधे प्रशासन [citation:4]
🏛️ जोनल परिषदें (Zonal Councils) — 1956
📜 जोनल परिषदें — 5 क्षेत्र
गठन: राज्य पुनर्गठन अधिनियम (1956) के तहत [citation:2]
उद्देश्य: क्षेत्रीय समस्याओं पर चर्चा और सलाह — सलाहकार निकाय [citation:2]
सदस्य: केंद्रीय मंत्री (अध्यक्ष) + राज्यों के मुख्यमंत्री
जोन:
उत्तरी: पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली
मध्य: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश
पूर्वी: बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम, त्रिपुरा, मणिपुर
पश्चिमी: बंबई (बाद में गुजरात+महाराष्ट्र), राजस्थान (कुछ भाग)
दक्षिणी: आंध्र प्रदेश, मद्रास (तमिलनाडु), मैसूर (कर्नाटक), केरल
📌 1956 के बाद — आगे के परिवर्तन
📅 1956-2026 — प्रमुख घटनाएँ
1960: बंबई राज्य का विभाजन — महाराष्ट्र और गुजरात [citation:3]
1963:नागालैंड — 1962 का अधिनियम, 1963 में लागू [citation:3]
1966: पंजाब पुनर्गठन — हरियाणा और चंडीगढ़ (केंद्र शासित) [citation:3]
1970: उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम — मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश [citation:3]
2000:छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड — 3 नए राज्य [citation:1]
2014:तेलंगाना — आंध्र प्रदेश से अलग [citation:1]
2019:जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — 2 केंद्र शासित प्रदेश [citation:3]
📌 अध्याय निष्कर्ष
1956 का राज्य पुनर्गठन भारत के नक्शे का सबसे बड़ा पुनर्निर्माण था।
भाषायी राज्य: पहली बार भाषा को राज्यों का आधार बनाया गया
Part A, B, C, D समाप्त: सभी राज्यों को एक समान दर्जा
14 राज्य + 6 केंद्र शासित प्रदेश: 28 इकाइयाँ → 20 इकाइयाँ
आधुनिक भारत की नींव: यह पुनर्गठन आज के भारत के राज्यों का आधार है
श्रीरामुलु का बलिदान: एक व्यक्ति के बलिदान ने पूरे देश के नक्शे को बदल दिया
यह अधिनियम आधुनिक भारतीय संघवाद की आधारशिला है — जिसने भाषायी पहचान को राजनीतिक स्वरूप दिया ।
📌 Initial Situation — 1947-1950
⚠️ Most Important Fact
The 1950 Constitution created 4 types of states [citation:5]:
Part A (9): Assam, West Bengal, Bihar, Bombay, Madhya Pradesh, Madras, Orissa, Punjab, Uttar Pradesh
Part B (8): Hyderabad, Saurashtra, Mysore, Travancore-Cochin, Madhya Bharat, Vindhya Pradesh, PEPSU, Rajasthan
Part C (10): Delhi, Kutch, Himachal Pradesh, Bilaspur, Coorg, Bhopal, Manipur, Ajmer-Merwara, Tripura
Part D (1): Andaman and Nicobar Islands
This arrangement was temporary — linguistic identity soon demanded change [citation:3][citation:5].
🔥 Linguistic State Movements
⚠️ Potti Sreeramulu — Martyr of Andhra Movement
Name: Potti Sreeramulu
Movement: Separate Andhra state for Telugu-speaking areas
Fast: 56 days (19 October to 15 December 1952)
Death: 15 December 1952 — triggered violent protests
Result: Andhra State formed on 1 October 1953 [citation:3]
📋 Dhar Commission (Linguistic Provinces Commission) — 1948
📜 Formation & Members
Formed:June 1948 — by the Constituent Assembly
Chairman:S.K. Dhar — retired judge of Allahabad High Court
Members:J.N. Lal (lawyer), Panna Lall (retired bureaucrat)
Report:December 1948 — published
⚠️ Recommendations
No linguistic basis: "Formation of provinces on exclusively or even mainly linguistic considerations is not in the larger interests of the Indian nation"
Administrative convenience: Reorganisation should be based on administrative convenience, historical and geographical considerations
Delay: Recommended postponing reorganisation for 20-25 years
📋 JVP Committee — 1948-49
📜 Formation & Members
Formed:December 1948 — at Jaipur Congress session
Members:
Jawaharlal Nehru
Vallabhbhai Patel
Pattabhi Sitaramayya — then Congress President
Report:1 April 1949 — published
⚠️ Recommendations
Reaffirmed Dhar Commission: Supported the Dhar Commission's recommendations
10-year postponement: "Formation of new provinces should be postponed for 10 years"
Democratic acceptance: "If public sentiment is insistent and overwhelming, we, as democrats, have to submit to it"
🔥 Potti Sreeramulu — Andhra Movement (1952)
⚠️ Sreeramulu's Fast
Name:Potti Sreeramulu
Demand: Separate Andhra state for Telugu-speaking areas
Fast:19 October 1952 — 58 days
Death:15 December 1952 — triggered violent protests
Result:1 October 1953 — Andhra State formed
📋 States Reorganisation Commission (SRC) — 1953-55
📜 Formation & Members
Formed:December 1953 — announced by PM Nehru
Chairman:Fazal Ali — former Chief Justice
Members:
K.M. Panikkar — historian, diplomat
H.N. Kunzru — social reformer, MP
Supervisor:Govind Ballabh Pant — Home Minister (from December 1954)
Report:30 September 1955 — submitted
⚠️ Key Recommendations
Part A, B, C, D abolished: Equal status to all states
Rajapramukh abolished: Special status of princely state rulers ended
Article 371 abolished: Special control over princely states ended
16 states + 3 Union Territories: Proposed
Linguistic minority protection:
>70% one language → monolingual
>30% other language → bilingual
Minority language to be used in district administration
📌 Chapter Conclusion
The journey of state reorganisation passed through three commissions/committees :
Dhar Commission (1948): Administrative convenience over language — failed