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📿 वैदिक काल — सम्पूर्ण नोट्स

ऋग्वैदिक काल (1500–1000 BCE) • उत्तर वैदिक काल (1000–600 BCE) • वेद • आरण्यक • उपनिषद
📿
वैदिक काल — परिचय एवं कालखंड
1500–600 BCE
📅 कालखंड एवं मूल परिचय
वैदिक काल
1500 BCE – 600 BCE
वैदिक साहित्य
वेद, ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक, उपनिषद — रचना 1500–600 BC के बीच
वेद अर्थ
"ज्ञान" — सुनकर परंपरागत एक पीढ़ी से दूसरी तक ले जाते → So Called "श्रुति"
वेदों की भाषा
"अपौरुषेय" भाषा (ईश्वर द्वारा रचित) — रचयिता = "द्रष्टा" कहलाते
साहित्य संकलन
कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास ने किया
ऋग्वैदिक काल
1500–1000 BCE — आर्यों का भारत में आगमन, सप्त सिंधु क्षेत्र
उत्तर वैदिक काल
1000–600 BCE — गंगा-यमुना दोआब तक विस्तार
🌍 आर्यों का आगमन
आर्य
यदु, अनु, पुरु, द्रुहु, तुर्वश — पाँच प्रमुख जन
अनार्य
किरात, विषाणिन, अलासस, अग्नि, पक्ष
प्रवेश मार्ग
खैबर दर्रा (Khyber Pass) → मुख्य मार्ग
मूल निवास
मध्य एशिया (Bactria-Caspian Sea) — बाल गंगाधर तिलक → आर्कटिक प्रदेश का मत
भाषा
संस्कृत — इंडो-यूरोपियन भाषा परिवार
प्रारंभिक क्षेत्र
सप्त सिंधु — सात नदियों का क्षेत्र (सिंधु, वितस्ता/झेलम, असिक्नी/चिनाब, परुष्णी/रावी, विपाशा/व्यास, शुतुद्रि/सतलज, सरस्वती)
📌 TRICK: आर्यों के आगमन का सबसे अच्छा प्रमाण → भाषाई साम्य | Boghazkoi (Turkey) अभिलेख में वैदिक देवताओं (इंद्र, मित्र, वरुण, नासत्य) का उल्लेख → 1400 BCE → आर्यों के मध्य एशिया से आने का प्रमाण
📚
चारों वेद — विस्तृत विवरण
FOUR VEDAS
🔆 ऋग्वेद
प्राचीनतम वेद
1500–1000 BC
10 मण्डल/अध्याय
1028 सूक्त
10,552 मंत्र
1st व 10वाँ बाद में जोड़े गए
2nd-7th मण्डल = परिवार मण्डल
ऋषि: वशिष्ठ, विश्वामित्र, वामदेव, अत्रि, गोर्त्सल (भारद्वाज), बशिष्ठ
9वाँ मण्डल → सोम को समर्पित (मुजंवत पर्वत पर लिखा)
"दशराज युद्ध" का वर्णन (सरस्वती नदी तट पर)
भरत वंश → 10 कबीले + विश्वामित्र (राजा: सुदास, 5 आर्य + 5 अनार्य) — त्रित्सु वंश
ऋ.वे. → गायत्री मंत्र (रचना: विश्वामित्र)
10वें में → वर्ण व्यवस्था (पुरुष सूक्त में)
"यज्ञ" वेद — यजुर्वेद
"यज्" शब्द → "यजन" = यज्ञ
यज्ञ अनुष्ठान के संगठन का अभिलेख
प्राय व पशु दोनों में
दो भागों में: कृष्ण यजुर्वेद (बुक्कल — पद्य में) + शुक्ल यजुर्वेद
उच्चारण करने वाले = "अध्वर्यु"
उपवेद: धनुर्वेद
ब्राह्मण ग्रंथ: तैत्तरीय, शतपथ
🎵 सामवेद
"साम" = गान (संगीत वेद)
ऋग्वेद के मंत्रों को संगीतबद्ध किया
वे मंत्र जो मजबूत/कान के मध्य उच्च स्वर में गाये जाते थे
पढ़ने वाला = "उद्गाता"
भारतीय संगीत का प्राचीनतम स्रोत
उपवेद: गन्धर्ववेद
ब्राह्मण ग्रंथ: पञ्चविंश, षड्विंश, जैमिनी (पञ्चम जैमि)
उपनिषद: छान्दोग्य, केन
🌀 अथर्ववेद
रचना: अथर्वा-अंगिरस ऋषि
ओझाओं-अंगिरों ज्ञान का संकलन
"अथर्वागिरस" कहते हैं
देर/बाद में वेद में शामिल
जादू-टोने, रोग, वशीकरण व उनके उपायों का उल्लेख
विषमबल्ड — आतंकवादी
"शोत्र" शब्द का उल्लेख
उपवेद: शिल्पवेद / स्थापत्यवेद
उपनिषद: मुण्डक, माण्डूक्य, प्रश्न
📖 वेद — उपवेद — पुरोहित — ब्राह्मण ग्रंथ — उपनिषद (एकसाथ)
वेद उपवेद पुरोहित ब्राह्मण ग्रंथ प्रमुख उपनिषद
ऋग्वेदआयुर्वेदहोता (Hotr)ऐतरेय, कौषीतकीऐतरेय, कौषीतकी
यजुर्वेदधनुर्वेदअध्वर्युशतपथ, तैत्तिरीयबृहदारण्यक, ईशा, कठ, श्वेताश्वर, मैत्रायणी
सामवेदगन्धर्ववेदउद्गातापञ्चविंश, षड्विंश, जैमिनीछान्दोग्य, केन
अथर्ववेदस्थापत्यवेदब्रह्मागोपथमुण्डक, माण्डूक्य, प्रश्न, अथर्वशीर्ष
🔱
ब्राह्मण ग्रंथ
BRAHMANA TEXTS
📋 ब्राह्मण ग्रंथ — परिचय
रचना काल
उत्तर वैदिक काल में
विषय
यज्ञों के प्रकार, विधि-विधान, ऋचाओं-भजनों व उनके परिणाम आदि की व्याख्या
भाषा
विस्तार के दृष्टिकोण से उदाहरण सहित व्याख्या लोगों को समझाने का प्रयास
ट्रिक (ब्राह्मण ग्रंथ)
ऋक्-एकों | सणु-तैश | साम-पँचम जैमि | अर्थि-गो
📝 वेद-अनुसार ब्राह्मण ग्रंथ
ऋग्वेद के
ऐतरेय (A. Kaushitaki), कौषीतकी
यजुर्वेद के
शतपथ (सबसे विशाल व महत्वपूर्ण), तैत्तरीय
सामवेद के
पञ्चविंश, षड्विंश, जैमिनी (पञ्चम जैमि)
अथर्ववेद के
गोपथ
शतपथ ब्राह्मण
सबसे बड़ा, यजुर्वेद का — विदेह माधव की कथा, राजसूय/अश्वमेध यज्ञ का वर्णन
🌿
आरण्यक ग्रंथ
ARANYAKA
🌳 आरण्यक — परिचय
अर्थ
"वन" — वनों में लिखे जाने योग्य, वनों में बैठकर पढ़े जाने चाहिए
विषय
दार्शनिक व रहस्यात्मक — ज्ञान पर बल, कर्मकांड की आलोचना
श्रेणी
उपनिषद और ब्राह्मण ग्रंथों के बीच की कड़ी
प्रमुख
ऐतरेय, तैत्तरीय, जैमिनी आरण्यक
📖 वेद-अनुसार आरण्यक
ऋग्वेद के
ऐतरेय आरण्यक (A. Kaushitaki)
यजुर्वेद के
तैत्तरीय, बृहदारण्यक
सामवेद के
छान्दोग्य, जैमिनी
आरण्यक → उपनिषद
आरण्यक उपनिषद = "ज्ञान" पर बल देते हैं
🧘
उपनिषद — वेदांत
UPANISHAD
🔑 उपनिषद — परिचय
व्युत्पत्ति
उप + नि + षद = निकट (सिकोड़) + निष्ठापूर्वक (बैठना) → "गुरु के निकट निष्ठापूर्वक बैठना" ज्ञान प्राप्ति के लिए
वेदांत
वेदांत भी कहते हैं — वैदिक साहित्य का अंतिम भाग
कुल संख्या
108 उपनिषद (मुक्तिकोपनिषद के अनुसार)
प्रमुख उपनिषद
ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, ऐतरेय, तैत्तरेय, उपनिषद, मैत्रायणी, कौषीतकी, श्वेताश्वर
भाषा
संस्कृत गद्य व पद्य दोनों
📋 प्रमुख उपनिषद — वेद अनुसार
ऋग्वेदयजुर्वेदसामवेदअथर्ववेद
ऐतरेय
कौषीतकी
बृहदारण्यक
ईशा/ईशावास्य
कठ
श्वेताश्वर
मैत्रायणी
तैत्तरीय
छान्दोग्य
केन
मुण्डक
माण्डूक्य
प्रश्न
अथर्वशीर्ष
बृहदारण्यक — सबसे बड़ा उपनिषद, याज्ञवल्क्य-गार्गी संवाद
छान्दोग्य — कृष्ण का पहला उल्लेख (घोर अंगिरस के शिष्य), सत्यकाम जाबाल की कहानी
कठोपनिषद — नचिकेता-यम संवाद (नचिकेता-धेता संवाद)
मुण्डकोपनिषद — कर्मकाण्ड की जली हुई नाव (व्यंग्य)
🌟 विशेष उपनिषद — RPSC/UPSC हेतु
कठोपनिषद — नचिकेता-यम संवाद, "नेति-नेति" = (न यह होगा, न वह होगा)
बृहदारण्यक — भाष्यवाचार्य = शांकराचार्य | याज्ञवल्क्य-गार्गी संवाद
मुण्डकोपनिषद — सत्यमेव जयते का स्रोत
छान्दोग्य — "तत्त्वमसि" (वह तू ही है), कृष्ण का उल्लेख
माण्डूक्य — सबसे छोटा उपनिषद (12 श्लोक)
ईशावास्य — सबसे छोटा गद्य उपनिषद, यजुर्वेद का पहला अध्याय
श्वेताश्वर — शिव की सर्वश्रेष्ठता, भक्ति का आरंभिक उल्लेख
केन — "किसके द्वारा" — ब्रह्म ज्ञान
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वेदांत दर्शन — अद्वैत एवं शाखाएँ
VEDANTA
🔑 TRICK: "अश विरा सुब हैतानी हैतम"
अश = अद्वैत → शांकराचार्य | विरा = विशिष्टाद्वैत = रामानुज | सुव = शुद्ध अद्वैत = वल्लभाचार्य | हैतानि = द्वैताद्वैत → निम्बार्काचार्य | हैतम = द्वैतवाद → माध्वाचार्य
① अद्वैत — शांकराचार्य
आत्मा-परमात्मा एक हैं
"नेति-नेति" — न यह होगा, न वह होगा
ब्रह्म ही एकमात्र सत्य, जगत मिथ्या
माया का सिद्धांत
② द्वैतवाद — माध्वाचार्य
आत्मा-परमात्मा एक नहीं हैं
ईश्वर और जीव दोनों अलग-अलग तत्त्वों में स्थित
तथा लिखित: एक हैं
③ विशिष्टाद्वैत — रामानुज
आत्मा ईश्वरजगत दोनों ईश्वर के ही स्वरूप हैं
चित्, अचित्, ईश्वर से पुष्ट-जगत बना है
भक्ति मार्ग पर बल
④ शुद्ध अद्वैत — वल्लभाचार्य
आत्मा ईश्वर-जगत एक हैं, लेकिन वे ईश्वरजगत के ही स्वरूप हैं
पुष्टि मार्ग का प्रतिपादन
⑤ द्वैताद्वैत — निम्बार्काचार्य
एक भी हैं, अनेक भी हैं
ईश्वर व जीव दोनों स्तर पर एक हैं तथा लिखित: एक हैं
पूर्व मीमांसा
जैमिनी रचित
कर्मकांड और यज्ञ पर बल
प्रभाकर + कुमारिल भट्ट → ब्राह्मण धर्म को पुनः स्थापित किया, बौद्धों से शास्त्रार्थ किया
उत्तर मीमांसा (वेदांत)
बादरायण → ब्रह्मसूत्र लिखता है
छान्दोग्य उपनिषद — कृष्ण का पहला उल्लेख (घोर अंगिरस के शिष्य)
Real Name: वासुदेव | गुरु: आंगिरस
🏕️
ऋग्वैदिक काल (1500–1000 BCE)
RIGVEDIC AGE
🌍 भौगोलिक क्षेत्र
मुख्य क्षेत्र
सप्त सिंधु — सात नदियों का क्षेत्र
वितस्ता
झेलम
असिक्नी
चिनाब
परुष्णी
रावी
विपाशा
व्यास
शुतुद्रि
सतलज
पश्चिम
काबुल (कुभा), स्वात (सुवास्तु), कुर्रम (कुरुम), गोमल (गोमती)
कागल (कुंगा)
हिंडालय (मुजंवत)
🏛️ राजनीतिक जीवन
राजनीतिक संगठन: जन → विश → ग्राम → कुल
जन (जनपति) — 25 बार उल्लेख
विश (विशपति) — 170 बार उल्लेख
ग्राम (ग्रामणी)
राजा = पुरोहित का मुख्य पदाधिकारी
सेना प्रमुख → "सेनानी"
सहायक प्रतिनिधि → "ग्रस्तनी"
चार भूमि प्रमुख → "ग्रामपति"
Regular Army → नहीं थी
सभा व समिति — दो प्रकार की संसद — अथर्ववेद में इनकी "प्रजापति की पुत्रियाँ"
👥 सामाजिक जीवन
समाज = पशुपालक (श्रमाशील) + मुद्रविद्य (कारण-पशु)
सभा की → "पशुओं का रक्षक"
बाहशी की → पशुदान
कृषि शब्द → 3 बार, भाग → अनेक बार
देव कुल में → पुरुष देवताओं का महत्व
पुरुष प्रधान समाज
3 वर्णों में क्षुद्र का अस्तित्व नहीं (बाद में कर्म आधारित)
वर्ण व्यवस्था = कर्म आधारित (जन्म नहीं)
सामाजिक वेदगाव → कार्य व्यवस्था
समतामूलक व्यवस्था — कुलगोत्र — NO
जाति व्यवस्था — कुलगोत्र — NO
संयुक्त परिवार, पुरुष पधान
⚖️ महिलाओं की स्थिति
मिश्रवर्ण, ज्ञान अधिकार समाप्त
महिला की शब व पुरुष के समान पुरांड चलतागला (मैत्रायणी संहिता)
स्त्री की सात दुर्बलों का कारण बताया (ऐतरेय ब्राह्मण)
ज्ञान प्राप्ति का अधिकार था
धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेना अनिवार्य
सम्पत्ति का अधिकार था
दास प्रथा चलती थी (घरेलू)
शूद्र को "उपवेद (साधू)" व अधिकार नहीं
गायत्री मंत्र का उच्चारण का "" (अधिकार नहीं)
💰 आर्थिक जीवन
पशुपालन मुख्य व्यवसाय — गाय सर्वाधिक महत्वपूर्ण
निर्माण साधारण — पर्वतीय मकान — NO
लोहा → अपरिचित
ताँबे के हथियार ←
मुद्रा प्रणाली — NO
व्यापार: वस्तु विनिमय — "निष्क" का उपयोग
कपड़े का उपयोग (ताकली पर धागा), कपास की खेती
साम व निष्क → मुद्रा के रूप में
औद्योगिक विकाश — सीमित था
लौह क्रांति का आगाज
⚔️
उत्तर वैदिक काल (1000–600 BCE)
LATER VEDIC
📌 भौगोलिक विस्तार: सप्त सिंधु से गंगा-यमुना दोआब तक — उत्तर प्रदेश, बिहार की ओर — शतपथ ब्राह्मण में विदेह (जनक) नदी तक पहुँचने का उल्लेख — मैत्रो-विशालेय, कैन, जैनक का भी उल्लेख
🏛️ राजनीतिक व्यवस्था
वैसानुगत साम्प्रतिक व्यवस्था पूरी तरह व्याप्त
राजत्व का "दैवीय विश्वत" स्वीकार → सम्राट, विराट, स्वराट, एकराट
राजा इपाधियाँ ↑ → ऐतरेय ब्राह्मण
राजसूय यज्ञ → राजाभिषेक समय → प्रतिवर्ष यज्ञ
अश्वमेध यज्ञ — साम्राज्य विस्तार का
वाजपेय यज्ञ — रथ दौड़, राजा भी शामिल, राजा की विजय होती थी
रत्नियों (भाँजियों) के घर जाकर खानपान
सभा व समिति के आधिकारों में ↓
विधान का उल्लेख नहीं ⑧
राजा की सेना → अनिवार्य हो गई
लोहे के हथनों का प्रचलन → युद्ध निर्णायक हो गया
📖 उत्तर वैदिक विशेष ग्रंथ
मैत्रो विशाले
वार्त्ता भिहार की स्थापना (जनक नदी तक) — शतपथ ब्राह्मण में
पाणिनी
संस्कृत व्याकरण — Many Names
गंगा-यमुना
कुरुक्षेत्र, पंचाल, केकय, जनक क्षेत्रों में बसे
जात + पुरु
→ कुरु, तुर्विश + निकेती → पंचाल
16 महाजनपद
उत्तर वैदिक काल के बाद (600 BCE) — 16 जनपदों का उदय
अथर्ववेद — जादू टोने, रोग, वशीकरण
शतपथ ब्राह्मण — कृषि की भारी विधाओं का उल्लेख
24 ठेलों से बोने का उल्लेख (काठक संहिता) में
मुद्रा प्रणाली — NO, ग्राम व निष्क → मुद्रा के रूप में
कापड़ — बर्तन/विनिमय से
लौह क्रांति का आगाज
👥
वर्ण व्यवस्था एवं सामाजिक संरचना
SOCIETY
📊 वर्ण व्यवस्था — उत्तर वैदिक काल
अनुलोम व प्रतिलोम — सवर्ण विवाह, निचली जाति विवाह ←
पु.-उच्च / म.-निम्न | कु.-निम्न / स्त्री-उच्च — नियोग प्रथा
ब्राह्मण व क्षत्रिय (कर्मपादक), वैश्य व शूद्र (उत्पादक वर्ग)
इनके पात्रक शिक्षता प्रदान
ब्राह्मण — विशेषाधिकार आर्थिक व कानूनाकित कर — अत्यधिक
वैश्य व शूद्र — विशेषाधिकार NO → उत्पादनात्मक अधिक था
वर्ण आधारित जन्म → कठोर (उत्तर वैदिक में)
🏠 आश्रम व्यवस्था
ब्रह्मचर्य
विद्याध्ययन काल — गुरु के पास रहकर शिक्षा
गृहस्थ
गृहस्थ जीवन — परिवार पालन
वानप्रस्थ
वन में रहकर साधना — सन्यासाश्रम का उल्लेख नहीं, बाकी उजागर हैं
नोट
सन्यासाश्रम का उल्लेख नहीं ← बाकी उजागर हैं
लाठित्वलन → स्थाई (जन्म आधारित) जो अन्य
कुणी → दादी का धर्म (गणनपीण दासत्व)
कर्मकाण्ड, लोटियाव, अध्यात्मराव ↑
मूर्ति-पूजा व मंदिर → NO
🙏
वैदिक धार्मिक जीवन
RELIGIOUS LIFE
⚡ ऋग्वैदिक — प्राकृतिक शक्तियों का पूजन
इंद्र
250 बार उल्लेख — सर्वाधिक — वर्षा, युद्ध के देवता — मुख्य देवता
अग्नि
200 बार — द्वितीय स्थान — पुजारी के रूप में (देवताओं और मनुष्यों के बीच)
वरुण
जल व नैतिक व्यवस्था के आधार पर "ऋत" — ऋतावाद
हेलोशीला की व्याख्या मिलती है (by मैक्समूलर) = (जिस समय जिस देवता की पूजा — उसे ही सर्वश्रेष्ठ मानकर पूजना)
एकेश्वरवाद के भी क्रय — तदा को → यूनानी देवता (ओरनेज), ईरानी देवता (अहुरमज्दा) के समान
"निर्गुण काल" का उल्लेख (नासादीय सूक्त — ऋग्वेद)
मूर्ति-पूजा → NO, मंदिर → NO
"अनुसंशन" का प्रचलन
फल प्राप्ति के लिए "प्रार्थना" करते
जादू-हेनों-नौरकों का भी प्रचलन
🔥 उत्तर वैदिक — धार्मिक जीवन
बहुदेवाद ← — सह-वैदिक देवताओं का महत्व कम (इंद्र, विष्णु, मेघा (लोकिपुरुष))
नदार → केंद्र ध्यान (पुजापति के रूप में) — ब्रह्मा, विष्णु, महेशत्रिमूर्ति
सहानुष्ठान → कठाधीष जातिस (मासनगी करावस्यात)
कर्मकाण्ड, लोटियाव, अध्यात्मिकराव ↑
मूर्ति-पूजा व मंदिर → NO
"मोक्ष" की अवधारणा प्रतिपादित (उपनिषद साहित्य का सर्जन)
कर्मकाण्डों की निंदा → ज्ञान की मछली का महत्व
वेदों में "पशुपालि" का महत्व ↑
यज्ञ में बलि प्रथा का प्रचलन
गायत्री मंत्र → वरुण के रूप में महत्वपूर्ण
🎯
PYQ — पूर्व वर्षों के प्रश्न (RAS + UPSC + PCS)
PREVIOUS YEAR Q.
🏆 RAS / RPSC Previous Year Questions
RAS Pre 2018
Q1. सामवेद में कुल कितने मंत्र हैं?
(A) 1028 (B) 1549 (C) 10,552 (D) 731
✅ उत्तर: (B) 1549 मंत्र
सामवेद में 1549 मंत्र हैं जिनमें से अधिकांश ऋग्वेद से लिए गए हैं। इसे संगीत का वेद कहा जाता है। उद्गाता पुरोहित सामवेद के मंत्र गाते थे।
RAS Pre 2016
Q2. 'सत्यमेव जयते' किस उपनिषद से लिया गया है?
(A) कठोपनिषद (B) ईशावास्योपनिषद (C) मुण्डकोपनिषद (D) छान्दोग्योपनिषद
✅ उत्तर: (C) मुण्डकोपनिषद
'सत्यमेव जयते' अथर्ववेद के मुण्डकोपनिषद से लिया गया है। यह भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है।
RAS Pre 2023
Q3. गायत्री मंत्र किस वेद में है और किसने लिखा?
(A) यजुर्वेद — वशिष्ठ (B) ऋग्वेद — विश्वामित्र (C) सामवेद — उद्गाता (D) अथर्ववेद — भृगु
✅ उत्तर: (B) ऋग्वेद — विश्वामित्र
गायत्री मंत्र ऋग्वेद (3.62.10) में है और इसकी रचना ऋषि विश्वामित्र ने की। यह सावित्री देवी (सूर्य देव) को समर्पित है। "ऋग्वेद के 10वें मंडल" में वर्णव्यवस्था का उल्लेख है।
RAS Pre 2021
Q4. ऋग्वेद में इंद्र का कितनी बार उल्लेख है?
(A) 100 बार (B) 150 बार (C) 250 बार (D) 300 बार
✅ उत्तर: (C) 250 बार
ऋग्वेद में इंद्र को सर्वाधिक 250 बार और अग्नि को 200 बार उल्लेख किया गया है। इंद्र युद्ध व वर्षा के देवता थे — "पुरन्दर" भी कहलाते थे।
RAS Mains 2018
Q5. वैदिक काल में 'सभा' और 'समिति' में क्या अंतर था? (5 अंक)
✅ उत्तर: सभा — बड़े-बुजुर्गों/अभिजात वर्ग की संस्था | समिति — सामान्य जनप्रतिनिधित्व की राष्ट्रीय सभा
सभा: कुछ विशिष्ट लोगों की संस्था — न्यायिक और सामाजिक कार्य। समिति: जनसाधारण की प्रतिनिधि — राजा का चुनाव और नीति-निर्माण। अथर्ववेद में दोनों को 'प्रजापति की दो पुत्रियाँ' कहा गया है। उत्तर वैदिक काल में दोनों का महत्व घटा।
RAS Pre 2022
Q6. 'दशराज युद्ध' किस नदी के तट पर हुआ?
(A) गंगा (B) सरस्वती (C) परुष्णी (रावी) (D) सिंधु
✅ उत्तर: (C) परुष्णी (रावी) नदी
दशराज युद्ध ऋग्वेद में वर्णित एक महत्वपूर्ण युद्ध है जो परुष्णी (रावी) नदी के तट पर हुआ। इसमें भरत जन के राजा सुदास ने 10 कबीलों के गठबंधन को पराजित किया।
🇮🇳 UPSC Previous Year Questions
UPSC Pre 2020
Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा वेद गद्य और पद्य दोनों में है?
(A) ऋग्वेद (B) यजुर्वेद (C) सामवेद (D) अथर्ववेद
✅ उत्तर: (B) यजुर्वेद
यजुर्वेद गद्य (Prose) और पद्य (Poetry) दोनों रूपों में है। इसके दो भाग हैं — शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद।
UPSC Pre 2019
Q8. 'अश्वमेध यज्ञ' का उद्देश्य क्या था?
(A) वर्षा के लिए (B) साम्राज्य विस्तार (C) धन-प्राप्ति (D) संतान प्राप्ति
✅ उत्तर: (B) साम्राज्य विस्तार
अश्वमेध यज्ञ में एक घोड़ा छोड़ा जाता था — जहाँ भी वह जाता, वह क्षेत्र राजा के अधिकार में माना जाता। शतपथ ब्राह्मण में इसका विस्तृत वर्णन है।
UPSC Pre 2018
Q9. वैदिक काल में 'निष्क' का उपयोग किस रूप में होता था?
(A) औजार (B) मुद्रा/सोने का आभूषण (C) लिपि (D) अस्त्र
✅ उत्तर: (B) मुद्रा/सोने का आभूषण (विनिमय माध्यम)
ऋग्वेद में निष्क और शतमान का उल्लेख है जो विनिमय माध्यम के रूप में प्रयुक्त होते थे। मुद्रा अर्थ में इनका प्रयोग होता था।
UPSC Pre 2017
Q10. उपनिषदों को 'वेदांत' क्यों कहते हैं?
(A) ये वेद के बाद लिखे (B) ये वेद का अंतिम भाग हैं (C) ये वेद से अलग हैं (D) इनमें अंत का वर्णन है
✅ उत्तर: (B) ये वेद का अंतिम भाग हैं
वेद + अंत = वेदांत। उपनिषद वैदिक साहित्य का अंतिम और दार्शनिक भाग है। ये ज्ञान पर बल देते हैं, कर्मकाण्ड की आलोचना करते हैं।
UPSC Pre 2022
Q11. शांकराचार्य के 'अद्वैत वेदांत' का मूल सिद्धांत क्या है?
(A) आत्मा और परमात्मा अलग हैं (B) जगत सत्य है (C) ब्रह्म एकमात्र सत्य, जगत मिथ्या (D) भक्ति सर्वश्रेष्ठ
✅ उत्तर: (C) ब्रह्म एकमात्र सत्य, जगत मिथ्या
शांकराचार्य ने अद्वैत वेदांत में कहा — "ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव न अपरः"। माया का सिद्धांत — जगत माया है।
UPSC Mains 2021
Q12. ऋग्वैदिक और उत्तर-वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति में क्या परिवर्तन आया? (विश्लेषण करें)
✅ उत्तर: ऋग्वैदिक काल में बेहतर स्थिति → उत्तर वैदिक काल में गिरावट
ऋग्वैदिक काल: विदुषी महिलाएं — घोषा, विश्ववारा, अपाला। शिक्षा का अधिकार। सह-अनुष्ठान में भागीदारी। बाल विवाह नहीं। विधवा पुनर्विवाह संभव। स्वतंत्र संपत्ति अधिकार।
उत्तर वैदिक काल: बालविवाह प्रारंभ। पुनर्विवाह सीमित। सती प्रथा के संकेत। शिक्षा पर प्रतिबंध बढ़ा। पर्दा प्रथा का आरंभ। ऐतरेय ब्राह्मण में "स्त्री की सात दुर्बलताएं"।
📋 अन्य राज्य PCS (MPPSC/UPPSC/BPSC)
UPPSC 2019
Q13. सबसे बड़ा ब्राह्मण ग्रंथ कौन-सा है?
(A) ऐतरेय (B) गोपथ (C) शतपथ (D) जैमिनी
✅ उत्तर: (C) शतपथ ब्राह्मण
शतपथ ब्राह्मण यजुर्वेद से संबंधित सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ब्राह्मण ग्रंथ है। इसमें राजसूय और अश्वमेध यज्ञ का विस्तृत वर्णन है।
MPPSC 2021
Q14. 'हेलोथेइज्म' या 'कथेनोथेइज्म' अवधारणा किसने दी?
(A) ग्रिफिथ (B) मैक्समूलर (C) विल्सन (D) कीथ
✅ उत्तर: (B) मैक्समूलर
मैक्समूलर ने वैदिक धर्म को "हेलोथेइज्म" कहा = जिस देवता की उपासना उस समय हो रही हो, उसे सर्वश्रेष्ठ मान लेते हैं।
BPSC 2022
Q15. 'नचिकेता' की कहानी किस उपनिषद में है?
(A) मुण्डकोपनिषद (B) कठोपनिषद (C) ईशावास्य (D) केन
✅ उत्तर: (B) कठोपनिषद
कठोपनिषद में नचिकेता और यम देव का प्रसिद्ध संवाद है। नचिकेता ने मृत्यु के देवता यम से आत्मा के रहस्य की जानकारी प्राप्त की। यह यजुर्वेद का उपनिषद है।
UPPSC Mains 2020
Q16. वैदिक काल में 'बलि' और 'भाग' क्या थे?
✅ उत्तर: बलि = धार्मिक कर/उपहार | भाग = उपज का हिस्सा (राजा को)
ऋग्वैदिक काल में राजा को "बलि" (धार्मिक कर) और "भाग" (उपज का हिस्सा) दिए जाते थे। यह कर स्वैच्छिक था। उत्तर वैदिक काल में कर अनिवार्य हो गए।
RPSC 2024
Q17. 'वाजपेय यज्ञ' का संबंध किससे है?
(A) वर्षा से (B) राजा के अभिषेक से (C) रथदौड़ और राजा की विजय (D) पुत्र प्राप्ति से
✅ उत्तर: (C) रथदौड़ और राजा की विजय
वाजपेय यज्ञ में रथ दौड़ होती थी जिसमें राजा भी भाग लेता था और राजा की विजय सुनिश्चित होती थी। यह साम्राज्य की समृद्धि के लिए आयोजित होता था।
RPSC 2019
Q18. शांकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठ कौन-से हैं?
✅ उत्तर: शारदापीठ (द्वारका), ज्योतिर्पीठ (बदरीनाथ), पुरीपीठ (पुरी), श्रृंगेरी पीठ (मैसूर)
शांकराचार्य (788–820 CE) ने भारत के चार कोनों में चार मठ स्थापित किए — पूर्व: गोवर्धन पीठ (पुरी), पश्चिम: शारदापीठ (द्वारका), उत्तर: ज्योतिर्पीठ (बद्रीनाथ), दक्षिण: श्रृंगेरी पीठ (कर्नाटक)।
⚡ EXAM में सबसे अधिक पूछे जाने वाले POINTS — One Liner
प्राचीनतम वेद = ऋग्वेद
सामवेद = संगीत का वेद
गायत्री मंत्र = ऋग्वेद, विश्वामित्र
सत्यमेव जयते = मुण्डकोपनिषद
अद्वैत वेदांत = शांकराचार्य
विशिष्टाद्वैत = रामानुज
ऋग्वेद में इंद्र = 250 बार
सभा व समिति = अथर्ववेद में पुत्रियाँ
दशराज युद्ध = परुष्णी (रावी)
नचिकेता = कठोपनिषद
शतपथ = यजुर्वेद का ब्राह्मण
छान्दोग्य = कृष्ण का पहला उल्लेख
बृहदारण्यक = सबसे बड़ा उपनिषद
माण्डूक्य = सबसे छोटा (12 श्लोक)
मूर्ति पूजा = वैदिक काल में नहीं
लोहे का प्रयोग = उत्तर वैदिक काल
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वैदिक काल Complete Notes | RAS + UPSC + PCS | GS-I | Ancient India
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