RAS Pre+Mains | GS-I | Rajasthan History | rasa2z.com

🏰 पाषाण काल से राजपूतों की उत्पत्ति तक का इतिहास

मौर्य • गुप्त • हूण • विदेशी जातियाँ • राजपूत उत्पत्ति • जनपद | 50 Hard MCQ
🏛️
मौर्य काल — राजस्थान में
322–185 BCE
🗺️ मौर्य काल की व्यापकता
मौर्य साम्राज्य — इस काल की तत्कालीन राजनीति तथा वहाँ फैल गयी थी
उनसागर शिलालेख (बैराठ से)
बड़े मार्ग पर "शकल" का भाण था | बैराठ से — अशोक के 2 अभिलेख
राजस्थान, सिंध, गुजरात, कोंकण
"अपर जनपद / पिंचम जनपद" कहलाता था
अशोक के बैराठ के अभिलेख
6 प्रादेशिक उपाधियाँ "कुणाल" के पुत्र "सम्प्रति" द्वारा | साथ मंदिर मेनों के प्रभाव की पुष्टि करते हैं
चितौड़, किला + चितौड़ तालाब
→ मौर्याग चितौड़ धरा निर्मित (by कुमारपाल पंथेर + भड्डन जैन गृह)
मानसरोवर तालाब
मानसरोवर तालाब पर "पाशुपान मौर्य" का 770 AD का शिलालेख → कर्नल टॉड ने मिला | (जिसमें — महेश्वर, भीम, ओज और मान ये 4 नाम कुमाड़ के हैं)
🌍
विदेशी जातियाँ — शक, कुषाण, यूनानी
2nd BCE – 3rd CE
🏹 विदेशी जातियों का आक्रमण
मौर्य का पतन → राज्य में मौत के बाद जगह-जगह में देर-अपा
यूनानी राजा मिनेण्डर
150 BCE में → मध्यमिका (नगरी) पर अधिकार | "शारि सौत्रा, महाभाष्य, महाभारत में न्याय" → कि यवन पहले (यूनानी) | कुसुमपुर (पाटलिपुत्र) पर आक्रमण करेंगे, विनाश करके → साकेत व मध्यमिका पर धावा मारेंगे। इनकी शक्ति का अंत "शुंग" शासक करेंगे।
यूनानी भाषाओं के लिखड़े
"नालेयाचार जील" से प्राप्त हुए हैं | कुछ नैराह से, कुछ नगरी से!
1st सदी BCE
पश्चिम भारत पर सीथियनो (कुषाण+शक) के आक्रमण | 90 BCE से पहले शकों ने यूनानियों का शासन समाप्त + सीथियनों ने अपने पाव जमा लिए
नालेयाचत्रसे
हुविष्क (कुषाण+शक) की मुद्रा प्राप्त हुई | उसका शासन काल (95–127 AD) माना जाता है
📜 कनिष्क के अभिलेख
कनिष्क के अभिलेखों से → 83–119 AD तक कुषाण लोग राजस्थान के पूर्वी भाग पर शासन करते रहे
रुद्रोनंदील अभिलेख (150 AD) → "कुषाणों" का राज्य मरुप्रदेश से सामरमती कैसे पासथा"
⚔️ विदेशी जातियों का पतन — नागों का उदय
130–150 AD
मगध का शासक "रुद्रदामन 2" (शक शासक) ने यौधेयों के साथ होनमोर क्षेत्र में योद्धेय पराजित
150 AD
कालान्तर नागा का "आर्जिल-आ भारश" ने बातित बहानी शुरू | विदेशियों को भारत से खदेड़ना आरम्भ किया
नागों ने
यौधेय, मालव, सर्पुनायन, वाकाटक, कुणिंद, मघ आदि की सहायता की | Ph, Raj, IMP की कुषाणों से मुक्ति कराया
नागों की विजय
उपलक्ष्य में → वाराणसी में "अश्वमेध यज्ञ" करेंगे | यह ध्यान → जो "दशाश्वमेध घाट" कहलाता है
📌 महत्वपूर्ण: शक, कुषाण, हूणों की सत्ता समाप्त होते ही वे भारतीय संस्कृति में रच-बस गए | भारत की मूल धारा में पूरी तरह घुल-मिल गए।
📖 विदेशी उत्पत्ति के लेखक (इतिहासकार)
शाक, कुषाण, हूणा आदि की संतान
कर्नल टॉड, डॉ ईश्वरी प्रसाद, विलियम क्रुक, डी.आर. भाण्डारकर
शाक-सीथियन की सेताप → टॉड
टॉड की Book के लम्पादक — विलियम कुक
शाक-यूची = गुर्जर-हूण
वी.ए. स्मिथ
गुर्जर वंशीय मत
डी.आर. भाण्डारकर, ईश्वरी प्रसाद (ये गुर्जरों को विदेशी मानते हैं)
यू-ची (कुषाण) जाति के वंशज
ब्रोचग्राफ्र ताम्रपत्र (378 AD) के आधार पर "फिनबम"
सर्वाधिक मान्य मत
डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा का मत — गुर्जर — Dr. ईश्वरी प्रसाद
👑
गुप्त काल — राजस्थान में (320–550 AD)
GUPTA ERA
📋 गुप्त काल — परिचय
स्थापना
गुप्त काल — पूर्वी भारत के गंगा मैदानों पर प्रमुख स्थापित किया। (नागों ने आक्षिणता — स्वीकार करनी)
22वाँ पोलिटेय
पुराण (सीमावर्ती) शाखों की एक लंबी सूची मिलती है (जो 501 की घूर्ती, उ.पू. + पाँच पीमार्थ) | सह-स्थित श्री — लिना लोड, अमीदता स्वीकार लीधी
गुप्त
के दल — आधा का पाल करते थे | पाई + उ.पर सीमा पर → 9 महागाराज्यों में था: मालव, अर्जुनायन, संहिल, सपुक, आभीर, पार्जन, सनकानिम, कुरु, खरपारेख → मालवा (1), अर्जुनायन (2), संहिल (3), सपुक (4), आभीर (5), पार्जन (6), सनकानीम (7), कुरु (8), खरपारेख (9)
📜 गुप्त काल के अभिलेख
पूर्व-गुप्त II
→ गंगाराज्यों को नष्ट करके अपने गण में भौतिव लगापत के आगे | आक्रमणों से शक छापे का भौतित्व लगापत के आगे
मुद्राएं
लखाना → गुप्त शासकों की लगभीष-स्तरी मुद्राएं मिलीं (2000 तक) | सर्वाधिक चेतन्ती (विक्रमादित्य) की है | रैंद (टोंक), अजहेड (अजमेर) — गुप्तकालीन मुद्राएं मिलीं
गुप्त-कालीन भवन
गुप्त-काल: भवनों + मंदिरों के अवशेष — भीनमाल से मिले
पारी. शब्द
गुप्त-काल के नाथ शासत — गुणों के दामंत के उनसे थे
4 सदी तक — मालव, अर्जुनायन, यौधेयों की प्रभुता
4 सदी तक — मालव, अर्जुनायन, यौधेयों की प्रभुता का काल है। पारि/जनपद — राजसपुर कालीन जाति-गणों के तरकालीन वर्गीय हित ने जाति/जनपद —
मालव — जयपुर के भाग में | टोंक, जयपुर (टोंक, जयपुर, टोंक + अजमेर) में फैला | जापानी चेत्रा राजतंत्रकाल स्थान रखती | अभिजात 10 अ. के दार्जिनायन के साथ मिलकर कुणालों की लड़ाई
अर्जुनायन — जगतपुर, भालभ में
यौधेय — साभ के उत्तरी देश में → कुषाणों की सत्ता उखाड़ फेंकी
मगध → (जगतपुर) — मगध का प्रभाव जयपुर, टोंक, जयपुर, बेबा में फैला | जापानी चेत्रा राजतंत्रकाल स्थान रखती
यौधेय — मगध जनपद की उत्तरी ओर में | कुषाणों की सत्ता उखाड़ फेंकी।
⚔️
हूण आक्रमण — राजस्थान में
503 AD+
🔴 हूण का आक्रमण — गुप्त काल में
तोरमाण
तोरमाण ने 503 AD में गुणों से राजस्थान छीन लिया
मिहिरकुल
मिहिरकुल ने → 6ठीं सदी में राजस्थान पर भयंकर आक्रमण किया | 6वीं सदी के शासकाल 'हूणों' ने सभी जगतेलाट्मक तथा अर्द्ध राजकीयात्मक संस्थाओं की सभी केड नष्ट कर दिए | (विकसित संस्कृताओं के सभी केड नष्ट कर दिए) | (जैसे: धौसाच, रंगमहल, नड़यापल, पीर-सुल्तान की थड़ी आदि)
मालवा राजा यशोवर्मन
"यशोवर्मन" ने 532 AD में हूणों को पराजित कर शाप में शांति स्थापित की — इसके मरने के बाद पुनः अशांति
मिहिरकुल ने
नांदोली में "शिवमंदिर" (नागर शैली) बनवाया
🏯 पूरु (पोरस वंश) — राजवंश वृक्ष
पूरु (पोरस वंश)
राजधानी: हस्तिनापुर नाम (चंद्रवंशी क्षत्रिय)
दुष्यन्त
भरत — के नाम पर देश का नाम "भारत" पड़ा
कुरु
"श्री"
शान्तनु (आदि पर्सिनो नमेया हुए) — राजधानी → हस्तिनापुर

देवव्रत (भीष्म) विचित्रवार्ग चित्रांगद
↓ (विचित्रवार्ग)
धृतराष्ट्र + पाण्डु
↓ (पाण्डु)
"कौरव" & "पाण्डव"
"महाभारत युद्ध" — पाण्डवों की विजय → युधिष्ठिर हस्तिनापुर का शासक
(पुराणों में कलियुग का प्रारंभ मूलत: महाभारत युद्ध से माना गया है)
↓ (उत्तराधिकारी)
परीक्षित (अभिमन्यु का पुत्र) — दर्जन का पाँव

जनमेजय → सर्पिला विजय — सर्पसत्र में महाभारत पाठ (वैशम्पायन द्वारा)
📌 राजस्थान का भाटी (जैसलमेर) जपनों को "चन्द्रवंशी" मानते हैं।
🦁
राजपूतों की उत्पत्ति — मत एवं सिद्धांत
RAJPUT ORIGIN
👑 यादव वंशी / यदुवंशी वंश-वृक्ष
मनु
इला (इल) — ये भू-लुब्ध
पुरुरवा (चन्द्रवंशी)
सांभाती

यदु | तुर्वस | ⊕ वृष्णु | अनु | पूरु (पोरस वंश)
(ऋषि जमदाग्नि के पुत्र — परशुराम ने इसका वध किया)
↓ (यदु से)
भरतअजन (भरत-पत्र)
↓ (यदु से)
ऋषि जमदाग्नि ने दी गायी 'कपिला + कामधेनु' — सिंचन का प्रयास में साथ
अद्भुत शाखाहृष्टि शाखानादेव-कृष्ण
बिदर्भ शाखा | सात्वत शाखा
↓ (पूरु से)
अद्भुतदुष्यन्त (जोड़वत) → भरत (उत्तर) → धृतराष्ट्र + पाण्डुकौरव + पाण्डव
🔥 अग्निवंशी — देशीय उत्पत्ति का सिद्धांत
अग्निवंशी
जनजाति — पन्द्रहाड़ के क्षत्रियों का वैभव कर दिया तब वध ऐसे — वशिष्ठ + विश्वामित्र | तब — अबू पर्वत पर विशाल अग्निकुंड का यज्ञ — वशिष्ठ + विश्वामित्र ने | 8 शोहाओं → अग्निपतित्वचलत्वन (पोलखी) | वाडमान | पशभार
by चंदबरदाई
"पृथ्वीराज रासो" | समनके → गुर्जर-प्रतिहार, चाहमान, चालुक्य (वल्लभी), परमार, भाड़ी, शित्रण4 क्षत्रिय वंश को (चन्दबरदाई ने → लगभग = मेनाबी, शित्रण)
📚 उत्पत्ति के विभिन्न मत — इतिहासकार
मतइतिहासकार / वर्गसिद्धांत
विदेशी उत्पत्तिकर्नल टॉड, डॉ. ईश्वरी प्रसाद, डी.आर. भाण्डारकर, विलियम कुकशाक, कुषाण, हूणों की सन्तान
गुर्जर-प्रतिहारवी.ए. स्मिथ, डी.आर. भाण्डारकर, ईश्वरी प्रसादये गुर्जरों को विदेशी मानते हैं
क्षत्रिय आर्य उत्पत्तिडॉ.सी.वी. वैद्यविदेशी आर्यों की वंश
ब्राह्मण वंशीयडॉ. डी. आर. गान्धारकर, डॉ. गोपीनाथ शर्माब्राह्मण वंश से उत्पत्ति
देशीय मत (सर्वाधिक मान्य)⭐ डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा का मतराजपूत = क्षत्रिय आर्यों की शुद्ध संतान
आर्थिक परिवर्तन की उपजक्ष्माणदलाल चट्टोपाध्याय
मिश्रित अवधारणादेवीप्रसाद चट्टोपाध्याय
जाचीन आदिम जातियाँ (डोड, खोखर, मर आदि)→ सिमधराजपूत इन्हीं से उत्पन्न
⭐ सर्वाधिक मान्य मत: डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा का मत = राजपूत क्षत्रिय आर्यों की शुद्ध संतान हैं।
📜 अग्निकुण्ड से — अग्निवंशीय कुल
अग्निकुण्ड से (अग्निवंशीय कुल)
गुर्जर-प्रतिहार, चाहमान, चालुक्य, परमार (−चन्दबरदाई → लगभग = मेनाबी, शित्रण)
प्राचीन क्षत्रियों की लेखन में
→ आधे सर्वमान्य मत हैं: जी.एन.ओझा, सी.वी.वैद्य
सूर्यवंशी + चन्द्रवंशी
डॉ.ऑरीशंकर हीराचन्द ओझा, डॉ दशरथ शर्मा
वैदिक आर्यों की संतान
→ बिशुल आर्यीय संबंधी 2 सीवी.वैद्य
पृथ्वीराज रासो में
राजपूतों के 36 कुलों का उल्लेख
🔔 अग्निवंशी — अबू पर्वत की घटना
अग्निवंशी : जनजाति — पन्द्रहाड़ के क्षत्रियों का वैभव कर दिया तब वध ऐसे वशिष्ठ + विश्वामित्र ने
तब — अबू पर्वत पर विशाल अग्निकुंड का यज्ञ (वशिष्ठ + विश्वामित्र ने) किया। 8 शोहाओं → अग्निपतित्व
By चन्दबरदाई → "पृथ्वीराज रासो" | समनके → गुर्जर-प्रतिहार, चाहमान, चालुक्य (वल्लभी), परमार
भाड़ी, शित्रण → 4 क्षत्रिय वंश (चन्दबरदाई → लगभग = मेनाबी, शित्रण)
एकल सत्ता: हर्ष की मृत्यु बाद — कोई केंद्रीय सत्ता नहीं → अरब (राजपुताना के जिलों) का परीक्षण करने के लिए
नेहुल — आबू पर्वत पर एक (सम्मेलन किया) | गुर्जर-प्रतिहार, चालुक्य, चाहगान, + परमार नाम के वीरों ने | तथा सत्ता करले अग्नि के समस्त शत्रु की स्वतंत्रता से घर की रक्षा के बाजीवन सौंधे की बाध्य रहना की (छह जनिक जहाँ जान पड़ता है)
इन राजपूतों ने 6सदियों तक (1206 तक) अपने बाहुबलों + पराक्रम से अरबों का टक्कर सामना किया | देश की उनसे रक्षा की
🗺️
राजस्थान के महत्वपूर्ण जनपदों का विकास एवं वर्तमान स्थिति
JANPADAS
जनपदराजधानी / मुख्य स्थानवर्तमान क्षेत्रविशेष तथ्य
मत्स्य जनपद विराटनगर या शैराट (जनपद) जयपुर (दक्षिण), अलवर, भरतपुर का तत्कालीन भूभाग पहले "मत्री राज्य" का क्षेत्र | बाद में "माडपत" का क्षेत्र बन गया
कुरु अलवर का दक्षिण पर्वती क्षेत्र अलवर का दक्षिणपर्वती क्षेत्र
शिवि जनपद मीलपुरी → नगरी (चितौड़) उदयपुर, चितौड़, देव | बेट (मल जगाली) के नगर प्रभाव → देशेगृह से ले इदे "देश-राजों" (महाभारत-कालीन सीताव-शाखा) के युद्ध में परिचित हिस्त्री | शिवि जाने (7-9% ई.) → राजपूत संख्याबद्धी | राजधानी — तन्सापी (चितौड़ के पास) | चंदौर से शूलालेख → किसी जनपद का प्रचार पश्चिम की बैठकर दे-नू-नकथा
मालव जनपद नगर (टोंक) → (मंगपला गुप्त अभिलेख) झालावाड़, टोंक एवं अजमेर — पुंड नालीकर (टोंक) में | मंगल जनपद के सम्पर्क स्कोडिभ
जांगल जनपद अहिच्छत्रपुर (नागौर) (वर्तमान नागौर=नागौर) बीकानेर + जोधपुर का उत्तरी क्षेत्र बीकानेर के साथ सिकला में "जाँगलायशाद" ऊँचे भी | सेज जाँगलक्ष की जापाशाद किसला जाता था
सूरसेन जनपद "मथुरा" आधुनिक बृज क्षेत्र — भरतपुर, धौलपुर, करौली का आधिकांश भाग | अलवर का पूर्वी भाग महाभारत भाव का आधार (महू) देश का आयतस्था | कुरु का लचेंध = उसी जनपद देश
यौधेय जनपद (डकैन-उत्तरी) राज्य की कुषाण शक्ति को नाश किया था — by रुद्रदामन लेख | राजस्थान का उत्तरी भाग बीकानेर, गंगानगर-हनुमानगढ़ का सीमाँत क्षेत्र (जोहियावाड़ी क्षेत्र) शक्तिशाली-शक्तिशाला था (जांगलबेस)
अपादलब्ध बीकाणे तरन तक 'शकालपत' आलेने जाकर "एकापदलब" (गावतस + नागौर का राजकर्षी जनपद) → शूरजपी ने संख्याओं का आधिपत्य का
मरु जाजन का दक्षिभाग — 'कुरु' → दो पोका "भराष जनपद"
मरुप्रदेश जोधपुर का क्षेत्र (रुद्रदामन के नुमाठ जिलालेख (150 ई.) के 'उच्छेदना' का कार्य)
राज्य प्रदेश जासपुर, मेबा, टोंक
गुर्जर प्रदेश (राजधानी — भीनमाल) जालोर का क्षेत्र
गुहिलज्या (जगन — मंडोर) — जोधपुर का दक्षिणी भाग
नागद (बाड़मेर) जुरपुर + बोखड़ाड
अर्बुद आम (विरोही)
📍 विशेष क्षेत्रीय जानकारी
हड़ोती
K-B OR (हाड़ारह)
केंथल
PG — माही नदी के कोरे / किनारे स्थित होने के कारण
खांज़न
PG – BM सेनमध्यवर्ती (56 गाँमों का समूह)
मेलक
DP –136 मेहल
जिरना
U के शावणाश का पहाड़ी क्षेत्र
उपरमाल
सेलरोड़गढ़ + बिजोलिया तक का पहाड़ी क्षेत्र (पहाड़ी-ऊचा सुफर क्षेत्र होने के कारण)
भादनक
अलवर + भरतपुर की समाना क्षेत्र
जांपलिपुर
जालोर
वालाकु
→ बाड़मेर | मालव: दक्षिणी झालावाड
पालना/पखाफ
झालरपाटन, शूलो → शूरूप सागर बाहर
🔗 उमाधिमिका
उत्तरम महाभारत में → राजप्राचिन में नाकुल की विविधता शाखा के पंक्षिमे में मिलता है | जिनपद का विषय दो "जनपद" कहा
पाश्चिमी की राजधानियों से — "मागधी" लाप विपनता है
(अगलप् + अलवर के अग्निनागव अपनी विशनों के लिए प्रसिद्ध है) दोनों शहरपुर के 'झालस', अलवर के 'चुलक्ता' + "धावल" जनपदों की तिराशन क्षेत्र)
🎯
50 Hard Level MCQ — PYQ + Expected
RPSC + RSSB
📊 आपका Score
0
/ 50 प्रश्न हल करें
✅ सही: 0 ❌ गलत: 0 📊 0%
rasa2z.com
पाषाण काल से राजपूत उत्पत्ति | Complete Notes + 50 MCQ | RAS Pre+Mains