| मत्स्य जनपद |
विराटनगर या शैराट (जनपद) |
जयपुर (दक्षिण), अलवर, भरतपुर का तत्कालीन भूभाग |
पहले "मत्री राज्य" का क्षेत्र | बाद में "माडपत" का क्षेत्र बन गया |
| कुरु |
— |
अलवर का दक्षिण पर्वती क्षेत्र |
अलवर का दक्षिणपर्वती क्षेत्र |
| शिवि जनपद |
मीलपुरी → नगरी (चितौड़) |
उदयपुर, चितौड़, देव | बेट (मल जगाली) के |
नगर प्रभाव → देशेगृह से ले इदे "देश-राजों" (महाभारत-कालीन सीताव-शाखा) के युद्ध में परिचित हिस्त्री | शिवि जाने (7-9% ई.) → राजपूत संख्याबद्धी | राजधानी — तन्सापी (चितौड़ के पास) | चंदौर से शूलालेख → किसी जनपद का प्रचार पश्चिम की बैठकर दे-नू-नकथा |
| मालव जनपद |
नगर (टोंक) → (मंगपला गुप्त अभिलेख) |
झालावाड़, टोंक एवं अजमेर — पुंड नालीकर (टोंक) में | मंगल जनपद के सम्पर्क स्कोडिभ |
— |
| जांगल जनपद |
अहिच्छत्रपुर (नागौर) (वर्तमान नागौर=नागौर) |
बीकानेर + जोधपुर का उत्तरी क्षेत्र |
बीकानेर के साथ सिकला में "जाँगलायशाद" ऊँचे भी | सेज जाँगलक्ष की जापाशाद किसला जाता था |
| सूरसेन जनपद |
"मथुरा" |
आधुनिक बृज क्षेत्र — भरतपुर, धौलपुर, करौली का आधिकांश भाग | अलवर का पूर्वी भाग |
महाभारत भाव का आधार (महू) देश का आयतस्था | कुरु का लचेंध = उसी जनपद देश |
| यौधेय जनपद |
— |
(डकैन-उत्तरी) राज्य की कुषाण शक्ति को नाश किया था — by रुद्रदामन लेख | राजस्थान का उत्तरी भाग बीकानेर, गंगानगर-हनुमानगढ़ का सीमाँत क्षेत्र (जोहियावाड़ी क्षेत्र) |
शक्तिशाली-शक्तिशाला था (जांगलबेस) |
| अपादलब्ध |
— |
बीकाणे तरन तक 'शकालपत' आलेने जाकर "एकापदलब" (गावतस + नागौर का राजकर्षी जनपद) → शूरजपी ने संख्याओं का आधिपत्य का |
— |
| मरु |
जाजन का दक्षिभाग — 'कुरु' → दो पोका "भराष जनपद" |
— |
— |
| मरुप्रदेश |
जोधपुर का क्षेत्र (रुद्रदामन के नुमाठ जिलालेख (150 ई.) के 'उच्छेदना' का कार्य) |
— |
— |
| राज्य प्रदेश |
— |
जासपुर, मेबा, टोंक |
— |
| गुर्जर प्रदेश |
(राजधानी — भीनमाल) |
जालोर का क्षेत्र |
— |
| गुहिलज्या |
(जगन — मंडोर) — जोधपुर का दक्षिणी भाग |
— |
— |
| नागद (बाड़मेर) |
जुरपुर + बोखड़ाड |
— |
— |
| अर्बुद |
आम (विरोही) |
— |
— |