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#Nanotechnology2026

नैनो प्रौद्योगिकी पूर्ण ज्ञान एवं संदर्भ पुस्तिका – 2026

NANOTECHNOLOGY · NANO-SCIENCE · INDIA 2026
2026
📘 सिद्धांत · विकास · नीतियाँ · अनुप्रयोग · चुनौतियाँ

1. नैनो प्रौद्योगिकी क्या है? – मूल अवधारणा

परिभाषा: नैनो प्रौद्योगिकी (Nanotechnology) विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पदार्थों का अध्ययन, हेरफेर और अनुप्रयोग 1 से 100 नैनोमीटर (1 nm = 10⁻⁹ मीटर) के पैमाने पर किया जाता है। इस स्तर पर पदार्थों के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में आमूल-चूल परिवर्तन आ जाता है।

शब्द-व्युत्पत्ति: "Nano" ग्रीक भाषा के शब्द 'Nanos' से बना है, जिसका अर्थ 'बौना' या 'अत्यंत सूक्ष्म' होता है।

नैनो पैमाने पर गुणों में परिवर्तन क्यों?

  • सतह-आयतन अनुपात (Surface-to-Volume Ratio): जैसे-जैसे कण का आकार घटता है, सतह-आयतन अनुपात बढ़ता है, जिससे रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता में वृद्धि होती है।
  • क्वांटम प्रभाव (Quantum Effects): नैनो स्तर पर क्वांटम यांत्रिकी के प्रभाव प्रमुख हो जाते हैं, जिससे ऑप्टिकल, विद्युत एवं चुंबकीय गुण बदल जाते हैं।
  • उदाहरण: सोना (Gold) बल्क रूप में पीला होता है, किन्तु नैनो-सोना (2-5 nm) लाल या नीले रंग का हो जाता है।
📌 मूल सिद्धांत: "नैनो प्रौद्योगिकी परमाणुओं और अणुओं को एक-एक करके व्यवस्थित करके नई सामग्री और उपकरण बनाने की कला है।" – नोरियो तनिगुची (1974)

2. नैनो प्रौद्योगिकी का इतिहास – पूरी यात्रा

नैनो प्रौद्योगिकी की यात्रा सैद्धांतिक विचारों से प्रारंभ होकर वर्तमान में व्यावहारिक अनुप्रयोगों तक पहुँच चुकी है।

1959
रिचर्ड फाइनमैन (Richard Feynman): अमेरिकी भौतिक विज्ञानी ने अपने ऐतिहासिक व्याख्यान "There's Plenty of Room at the Bottom" में परमाणु स्तर पर पदार्थों को नियंत्रित करने की संभावना व्यक्त की। इसे नैनो तकनीक का सैद्धांतिक जन्म माना जाता है।
1974
नोरियो तनिगुची (Norio Taniguchi): टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने सर्वप्रथम "Nanotechnology" शब्द का प्रयोग किया।
1981
STM (Scanning Tunneling Microscope): गेर्ड बिनिंग और हेनरिक रोहरर ने STM का आविष्कार किया – इससे परमाणुओं को देखा और हेरफेर किया जा सका। (1986 में नोबेल पुरस्कार)
1985
बकमिन्स्टरफुलरीन (C₆₀) की खोज: हैरोल्ड क्रोटो, रॉबर्ट कर्ल और रिचर्ड स्मैली ने C₆₀ (बकीबॉल) की खोज की – कार्बन का एक नया अपरूप। (1996 में नोबेल पुरस्कार)
1991
कार्बन नैनोट्यूब (CNT): जापानी वैज्ञानिक सुमियो इइजिमा ने कार्बन नैनोट्यूब का निर्माण किया – अब तक का सबसे मजबूत और चालक पदार्थ।
2000-2010
नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स, नैनो-मेडिसिन, नैनो-सेंसर: नैनो प्रौद्योगिकी का तीव्र विकास; दवा वितरण, कैंसर उपचार, सेंसर, सौर ऊर्जा में अनुप्रयोग।
2020-2026
नैनो-उर्वरक, नैनो-दवाएँ, नैनो-कोटिंग, स्वदेशी चिप्स: भारत ने IFFCO Nano Urea, स्वदेशी नैनो-मेडिसिन, नैनो-सेंसर विकसित किए। Latest
📌 महत्वपूर्ण: नैनो प्रौद्योगिकी को "अगली औद्योगिक क्रांति" (Industry 4.0 का आधार) कहा जाता है। यह भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा का एकीकरण है।

3. नैनो प्रौद्योगिकी कैसे काम करती है?

3.1. नैनो स्तर पर गुणों में परिवर्तन

जब पदार्थ को नैनोमीटर स्तर तक छोटा किया जाता है, तो उसके गुणों में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:

  • बढ़ी हुई प्रतिक्रियाशीलता: सतह-आयतन अनुपात बढ़ने से रासायनिक प्रतिक्रियाएँ तीव्र हो जाती हैं।
  • प्रकाशीय गुणों में परिवर्तन: सोना, चाँदी, एल्युमिनियम के नैनो-कण विभिन्न रंगों में दिखाई देते हैं।
  • विद्युत चालकता में परिवर्तन: कुछ पदार्थ (जैसे सिलिकॉन) नैनो स्तर पर अधिक चालक हो जाते हैं।
  • यांत्रिक शक्ति में वृद्धि: कार्बन नैनोट्यूब स्टील से 100 गुना अधिक मजबूत हैं।

3.2. नैनो-निर्माण की दो विधियाँ (Top-down & Bottom-up)

विधिविवरणउदाहरण
Top-down बड़ी सामग्री को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ना (काटना, पीसना, एचिंग) लिथोग्राफी (चिप निर्माण), मिलिंग
Bottom-up परमाणुओं/अणुओं को एक-एक करके जोड़कर नैनो-संरचना बनाना सोल-जेल, CVD (Chemical Vapor Deposition)

3.3. प्रमुख उपकरण एवं तकनीकें

  • STM (Scanning Tunneling Microscope): परमाणुओं को देखने एवं हेरफेर करने हेतु।
  • AFM (Atomic Force Microscope): सतह के नैनो-स्तरीय मानचित्रण हेतु।
  • SEM (Scanning Electron Microscope): उच्च-रिजॉल्यूशन इमेजिंग।
  • XRD (X-Ray Diffraction): नैनो-कणों की क्रिस्टलीय संरचना विश्लेषण।
  • Laser Ablation: नैनो-कणों के उत्पादन हेतु।

4. नैनो-सामग्री के प्रकार

🔹 कार्बन नैनोट्यूब (CNT)
ग्रेफीन की एक परत को बेलनाकार आकार में लपेटा गया।
गुण: स्टील से 100x मजबूत, तांबे से बेहतर चालक।
उपयोग: इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्पोजिट, बैटरी, सेंसर।
🔹 ग्रेफीन (Graphene)
कार्बन परमाणुओं की एक-परत (2D) संरचना।
गुण: विश्व का सबसे पतला एवं मजबूत पदार्थ।
उपयोग: फ्लेक्सिबल डिस्प्ले, सुपरकैपेसिटर, सेंसर।
🔹 नैनो-कण (Nanoparticles)
1-100 nm आकार के कण (सोना, चाँदी, टाइटेनियम डाइऑक्साइड)।
गुण: उच्च प्रतिक्रियाशीलता, ऑप्टिकल गुण।
उपयोग: दवा वितरण, सनस्क्रीन, उत्प्रेरक।
🔹 नैनो-कम्पोजिट (Nanocomposites)
नैनो-कणों को अन्य सामग्रियों के साथ मिलाया गया।
गुण: हल्के, मजबूत, टिकाऊ।
उपयोग: ऑटोमोबाइल, विमान, खेल उपकरण।
🔹 क्वांटम डॉट्स (Quantum Dots)
अर्धचालक नैनो-कण (2-10 nm)।
गुण: आकार के अनुसार अलग-अलग रंग उत्सर्जित करते हैं।
उपयोग: QLED डिस्प्ले, बायोइमेजिंग, सौर सेल।
🔹 नैनो-पोरस सामग्री
नैनो-आकार के छिद्रों वाली सामग्री।
गुण: उच्च सतह क्षेत्र, चयनात्मक अवशोषण।
उपयोग: उत्प्रेरक, जल शोधन, गैस भंडारण।

5. नैनो प्रौद्योगिकी के प्रमुख अनुप्रयोग

5.1. कृषि एवं खाद्य सुरक्षा

  • नैनो-उर्वरक (Nano-fertilizers): फसलों को सटीक मात्रा में पोषक तत्व, उत्पादन बढ़ता है और लागत घटती है।
  • IFFCO Nano Urea (2023): भारत का पहला स्वदेशी नैनो-उर्वरक। पारंपरिक यूरिया की तुलना में 50% कम उपयोग, पर्यावरण हितैषी। Latest
  • नैनो-सेंसर: मृदा की नमी, pH, पोषक तत्वों की वास्तविक समय में निगरानी।
  • नैनो-कीटनाशक: कम मात्रा में अधिक प्रभावी, पर्यावरण पर कम दुष्प्रभाव।
  • सरकारी योजना: National Mission on Sustainable Agriculture (NMSA) में नैनो-तकनीक को शामिल किया गया।

5.2. स्वास्थ्य एवं चिकित्सा

  • नैनो-ड्रग डिलीवरी सिस्टम: कैंसर, ट्यूमर जैसी बीमारियों में दवा को सीधे लक्षित कोशिकाओं तक पहुँचाना।
  • Nano Mission Health Program: Department of Biotechnology (DBT) द्वारा संचालित, स्वदेशी नैनो-मेडिसिन विकास हेतु। Latest
  • COVID-19: नैनो-आधारित वैक्सीन डिलीवरी सिस्टम पर अनुसंधान।
  • नैनो-सेंसर: रक्त में रोग मार्करों का शीघ्र पता लगाना।
  • नैनो-रोबोट्स: भविष्य में सर्जरी एवं दवा वितरण के लिए।

5.3. ऊर्जा क्षेत्र

  • नैनो-सोलर सेल्स: सौर ऊर्जा दक्षता बढ़ाना (क्वांटम डॉट्स, पेरोव्स्काइट)।
  • हाइड्रोजन भंडारण: नैनो-संरचनाओं में हाइड्रोजन संग्रहण।
  • लिथियम-आयन बैटरी: नैनो-सामग्री (सिलिकॉन नैनोकण) से बैटरी क्षमता बढ़ाना।
  • राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (2021): नैनो-कैटेलिस्ट का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में। Latest

5.4. पर्यावरण संरक्षण

  • नैनो-फिल्टर: जल एवं वायु शुद्धि के लिए (नैनो-सेल्युलोज, कार्बन नैनोट्यूब)।
  • TiO₂ नैनोकण: प्रदूषक गैसों के अपघटन में।
  • National Clean Air Programme (NCAP): नैनो-आधारित वायु शोधन तकनीकों को प्रोत्साहन। Latest
  • नैनो-कैटेलिस्ट: औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार में।

5.5. उद्योग एवं रक्षा

  • हल्के एवं मजबूत नैनो-कम्पोजिट — रक्षा उपकरणों, विमानों, ऑटोमोबाइल में उपयोग।
  • नैनो-कोटिंग — संक्षारण प्रतिरोध, स्व-सफाई सतह, UV प्रतिरोध।
  • नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स: छोटे, अधिक कुशल चिप्स (जैसे 2nm, 3nm प्रौद्योगिकी)।
  • नैनो-सेंसर: रासायनिक, जैविक एवं भौतिक मापन में।

6. विश्व में नैनो प्रौद्योगिकी – वैश्विक परिदृश्य

प्रमुख देश एवं उनकी स्थिति

देशप्रमुख योगदानप्रमुख संस्थान
अमेरिका NNI (National Nanotechnology Initiative) 2000; अग्रणी अनुसंधान MIT, Stanford, Berkeley, NIST
चीन सबसे अधिक नैनो-पेटेंट्स; ग्रेफीन, CNT उत्पादन में अग्रणी CAS, Tsinghua, Peking
जापान नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स, नैनो-सामग्री में अग्रणी NIMS, RIKEN, Tokyo University
यूरोप NMBP (Nanotechnologies, Advanced Materials, Biotechnology) EMPA, Fraunhofer, CEA
भारत Nano Mission (2007); Nano Urea, स्वदेशी दवाएँ IITs, IISc, CSIR, DST
दक्षिण कोरिया नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स, नैनो-मेडिसिन में उन्नत KAIST, KIST, SNU

वैश्विक नैनो बाजार (2026)

  • वैश्विक नैनो प्रौद्योगिकी बाजार: 2026 में $125 बिलियन (अनुमान) – 2030 तक $250 बिलियन तक पहुँचने की संभावना। Latest
  • प्रमुख क्षेत्र: नैनो-मेडिसिन (30%), नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स (25%), नैनो-सामग्री (20%), नैनो-कोटिंग (10%), अन्य (15%)।
  • अग्रणी देश: अमेरिका (35%), चीन (20%), जापान (12%), यूरोप (10%), दक्षिण कोरिया (8%), भारत (3%)।
📌 वैश्विक प्रतिस्पर्धा: अमेरिका, चीन, जापान, यूरोप – सभी नैनो तकनीक में अग्रणी बनने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

7. भारत में नैनो प्रौद्योगिकी – विकास, नीतियाँ एवं योजनाएँ

7.1. राष्ट्रीय नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मिशन (Nano Mission)

  • प्रारंभ: 2007 में भारत सरकार ने Department of Science & Technology (DST) के अंतर्गत इस मिशन की शुरुआत की।
  • उद्देश्य: भारत को नैनो अनुसंधान, विकास एवं अनुप्रयोगों में विश्व स्तर पर अग्रणी बनाना।
  • दो प्रमुख सलाहकार समितियाँ: (i) नैनो विज्ञान सलाहकार समूह (ii) नैनो अनुप्रयोग एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार समूह।

7.2. Nano Mission Phase-II (2020-2025)

  • 14 से अधिक Centres of Excellence स्थापित – IIT-Bombay, IIT-Kanpur, IISc-Bangalore, CSIR-NPL (New Delhi) आदि।
  • अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र: nano-materials, nano-electronics, nano-fabrication, drug delivery systems, nano-sensors, nano-energy systems।
  • INCONSAT-2020: International Conference on Nanoscience & Technology का आयोजन – वैश्विक सहयोग को बढ़ावा।
  • नैनो मिशन की उपलब्धियाँ: स्वदेशी नैनो-उत्पाद (Nano Urea, Nano-drugs, Nano-coatings) का विकास।

7.3. IndiaAI Mission के साथ समन्वय

  • AI + नैनो तकनीक – AI-संचालित नैनो-मटेरियल डिज़ाइन पर अनुसंधान।
  • नैनो-चिप्स एवं सेमीकंडक्टर विकास में AI का उपयोग।
  • IndiaAI Mission (2024): ₹10,000 करोड़ निवेश – AI + नैनो तकनीक के अभिसरण को प्रोत्साहन। Latest

7.4. भारत सरकार की अन्य नीतियाँ एवं योजनाएँ

  • National Mission on Sustainable Agriculture (NMSA): नैनो-उर्वरक एवं नैनो-सेंसर को कृषि में अपनाना।
  • National Clean Air Programme (NCAP): नैनो-आधारित वायु शोधन तकनीकों को प्रोत्साहन।
  • National Hydrogen Mission (2021): नैनो-कैटेलिस्ट का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में।
  • Deep Tech Mission (2024): AI, Quantum, Semiconductors, Biotechnology में स्वदेशी क्षमता – नैनो तकनीक इन सभी का आधार।
  • Semiconductor Mission (2022): नैनो-फैब्रिकेशन एवं नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भरता।
  • Atmanirbhar Bharat: स्वदेशी नैनो-उत्पादों के विकास एवं व्यावसायीकरण को प्रोत्साहन।
🇮🇳 भारत की नैनो दृष्टि: "नैनो प्रौद्योगिकी को 'Make in India' और 'Atmanirbhar Bharat' का तकनीकी आधार बनाना। वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।"

8. राजस्थान में नैनो प्रौद्योगिकी – स्थिति, पहल एवं योजनाएँ

8.1. शैक्षणिक संस्थान एवं अनुसंधान

  • MNIT Jaipur: नैनो-सामग्री, नैनो-कोटिंग, नैनो-सेंसर पर अनुसंधान।
  • IISER Ajmer: नैनो-जैव प्रौद्योगिकी, नैनो-दवा वितरण पर अनुसंधान।
  • Banasthali Vidyapeeth: नैनो-कम्पोजिट, नैनो-ऊर्जा पर अनुसंधान।
  • JNVU Jodhpur: नैनो-कण संश्लेषण, नैनो-सेंसर विकास।
  • IIT Jodhpur: नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स, नैनो-फैब्रिकेशन पर अनुसंधान।

8.2. राज्य सरकार की पहल

  • Rajasthan Science & Technology Promotion Programme (RSTPP): नैनो-प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन।
  • Rajasthan STI Policy (2023): District Innovation Hubs, Rajasthan Research & Innovation Fund (RRIF), उद्योग-शिक्षा सहयोग, Green Technology & E-Mobility। Latest
  • iStart Rajasthan (2017): 7000+ स्टार्टअप्स; नैनो-आधारित स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन सहायता।
  • Bhamashah Techno Hub (Jaipur): भारत का सबसे बड़ा co-working & incubation center; नैनो-स्टार्टअप्स के लिए विशेष सुविधाएँ।
  • Rajasthan Renewable Energy Policy: नैनो-सोलर सेल्स, नैनो-बैटरी, हाइड्रोजन भंडारण पर अनुसंधान।

8.3. राजस्थान में नैनो तकनीक के अनुप्रयोग

  • सिरामिक एवं खनिज उद्योग: नैनो-कोटिंग्स एवं नैनो-मटेरियल्स का उपयोग बढ़ रहा है।
  • सौर ऊर्जा: Bhadla Solar Park (2245 MW) – विश्व का सबसे बड़ा; नैनो-सोलर सेल्स पर अनुसंधान।
  • जल संरक्षण: नैनो-फिल्टर एवं नैनो-सेंसर का उपयोग जल गुणवत्ता निगरानी में।
  • कृषि: नैनो-उर्वरक एवं नैनो-कीटनाशक का परीक्षण (कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से)।
  • रक्षा: DRDO प्रयोगशालाओं में नैनो-कम्पोजिट एवं नैनो-कोटिंग पर अनुसंधान।
🏜️ राजस्थान की नैनो विज़न: "राजस्थान को नैनो-तकनीक में अनुसंधान एवं नवाचार का केंद्र बनाना। सौर ऊर्जा, खनिज, कृषि एवं जल संरक्षण में नैनो-अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना।"

9. नैनो प्रौद्योगिकी से उत्पन्न चुनौतियाँ एवं समाधान

⚠️ चुनौतियाँ (Challenges)

  • स्वास्थ्य जोखिम (Nanotoxicology): नैनो-कण शरीर के ऊतकों, फेफड़ों, रक्त में प्रवेश कर जैविक असंतुलन पैदा कर सकते हैं।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: नैनो-कण मृदा, जल एवं खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर पारिस्थितिकी को प्रभावित कर सकते हैं।
  • नैतिक एवं सामाजिक मुद्दे: मानव प्रयोगों में सुरक्षा मानकों की कमी; संवर्धन (enhancement) और चिकित्सा के बीच की रेखा धुंधली।
  • नियमन एवं मानकीकरण का अभाव: नैनो-उत्पादों के परीक्षण, प्रमाणीकरण एवं लेबलिंग के लिए स्पष्ट नियमावली नहीं।
  • कुशल मानव संसाधन की कमी: नैनो तकनीक में प्रशिक्षित वैज्ञानिकों, इंजीनियरों की संख्या अपर्याप्त।
  • उच्च अनुसंधान लागत: नैनो-प्रयोगशालाएँ एवं उपकरण अत्यंत महंगे हैं।

✅ समाधान (Solutions)

  • नियामक ढाँचा: DST, DBT, CSIR, ICMR की संयुक्त पहल – Nano Regulatory Framework तैयार किया जा रहा है।
  • सुरक्षा अध्ययन: nanotoxicology और bio-safety पर शोध को बढ़ावा।
  • शिक्षा एवं प्रशिक्षण: NEP-2020 में interdisciplinary research पर जोर; नैनो तकनीक को स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया।
  • Centres of Excellence: IITs, NITs, IISc में नैनो-अनुसंधान केंद्रों का विस्तार।
  • उद्योग-अकादमिक सहयोग: टाटा, रिलायंस, IFFCO, डॉ. रेड्डीज जैसी कंपनियों के साथ सहयोग।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: USA, Japan, Germany, Israel के साथ नैनो-अनुसंधान समझौते।
  • सार्वजनिक जागरूकता: Vigyan Prasar, Vigyan Pathshala Abhiyan के माध्यम से नैनो तकनीक के लाभ एवं सुरक्षा के बारे में जागरूकता।
🔑 मुख्य निष्कर्ष: "सुरक्षित एवं सतत नैनो-विकास" – जहाँ नवाचार के साथ सुरक्षा एवं नैतिकता का संतुलन हो। भारत की रणनीति नवाचार, विनियमन एवं शिक्षा के त्रि-आयामी दृष्टिकोण पर आधारित है।

10. नैनो प्रौद्योगिकी का भविष्य – 2030 तक का रोडमैप

वैश्विक रुझान

  • नैनो-मेडिसिन: व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine), नैनो-रोबोट्स, कैंसर का शीघ्र निदान एवं उपचार।
  • नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स: 1nm से नीचे की चिप्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, फ्लेक्सिबल डिस्प्ले।
  • नैनो-ऊर्जा: अत्यधिक कुशल सौर सेल, नैनो-बैटरी, हाइड्रोजन भंडारण।
  • नैनो-सामग्री: स्व-उपचार (self-healing) सामग्री, स्मार्ट कोटिंग्स, अल्ट्रा-लाइट मिश्र धातुएँ।
  • AI + नैनो: AI-संचालित नैनो-मटेरियल डिज़ाइन, नैनो-सेंसर नेटवर्क।

भारत के लक्ष्य (2030)

  • नैनो-आधारित कृषि: सभी किसानों तक नैनो-उर्वरक एवं नैनो-कीटनाशक की पहुँच।
  • स्वदेशी नैनो-दवाएँ: 50+ नैनो-दवाओं का व्यावसायिक उत्पादन।
  • नैनो-चिप्स: भारत में 5nm/3nm चिप निर्माण।
  • नैनो-सेंसर नेटवर्क: पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा में नैनो-सेंसर का व्यापक उपयोग।
  • ग्रीन नैनो-प्रौद्योगिकी: पर्यावरण अनुकूल नैनो-सामग्री एवं प्रक्रियाएँ।
  • वैश्विक नेतृत्व: 2030 तक नैनो-अनुसंधान एवं पेटेंट्स में शीर्ष 5 देशों में शामिल होना।
🇮🇳 भारत की नैनो विज़न 2030: "नैनो प्रौद्योगिकी को 'Viksit Bharat @2047' का तकनीकी आधार बनाना। स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण एवं रक्षा में नैनो-समाधान के माध्यम से आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।"

11. नैनो प्रौद्योगिकी तकनीकी शब्दावली (ग्लोसरी)

नैनोमीटर (nm) – 10⁻⁹ मीटर (एक मीटर का अरबवाँ भाग)।
नैनो-कण (Nanoparticle) – 1-100 nm आकार का कण।
कार्बन नैनोट्यूब (CNT) – ग्रेफीन की बेलनाकार संरचना, अत्यंत मजबूत एवं चालक।
ग्रेफीन (Graphene) – कार्बन की एक-परत (2D) संरचना, विश्व का सबसे पतला पदार्थ।
क्वांटम डॉट्स – अर्धचालक नैनो-कण, आकार के अनुसार रंग बदलते हैं।
नैनो-कम्पोजिट – नैनो-कणों को अन्य सामग्रियों में मिलाकर बनाई गई सामग्री।
सोल-जेल – Bottom-up विधि से नैनो-कण निर्माण।
Top-down – बड़ी सामग्री को छोटा करके नैनो-संरचना बनाना।
Bottom-up – परमाणुओं को जोड़कर नैनो-संरचना बनाना।
Nanotoxicology – नैनो-कणों के स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन।
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