🚀 RAS A2Z

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी • Mains Paper-II (Unit-II) • उन्नत विस्तृत नोट्स

🔬 RPSC EXAMINER
📌 परीक्षक की दृष्टि: ये नोट्स RPSC के पूर्व परीक्षक, तकनीकी विशेषज्ञ एवं विषय-विशेषज्ञ की टीम द्वारा तैयार किए गए हैं। RASA2Z.COM
🔹 निर्देश: प्रत्येक विषय को पूर्णता, गहराई एवं समसामयिक सरकारी योजनाओं सहित समझाया गया है। कोई भी महत्वपूर्ण बिंदु छूटा नहीं है।
🧬 नैनो प्रौद्योगिकी (Nanotechnology) विस्तृत RAS Mains

🔹 1.1 परिभाषा, ऐतिहासिक विकास एवं महत्व Core

नैनो प्रौद्योगिकी (Nanotechnology) विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पदार्थों का अध्ययन, हेरफेर और अनुप्रयोग 1 से 100 नैनोमीटर (1 nm = 10⁻⁹ मीटर) के पैमाने पर किया जाता है। इस स्तर पर पदार्थों के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में आमूल-चूल परिवर्तन आ जाता है, जिससे वे अधिक मजबूत, हल्के, प्रतिक्रियाशील या चालक बन जाते हैं।

शब्द-व्युत्पत्ति: "Nano" ग्रीक भाषा के शब्द 'Nanos' से बना है, जिसका अर्थ 'बौना' या 'अत्यंत सूक्ष्म' होता है।

ऐतिहासिक विकास (कालक्रम):

  • 1959: अमेरिकी वैज्ञानिक रिचर्ड फाइनमैन ने अपने ऐतिहासिक व्याख्यान "There's Plenty of Room at the Bottom" में परमाणु स्तर पर पदार्थों को नियंत्रित करने की संभावना व्यक्त की। इसे नैनो तकनीक का सैद्धांतिक जन्म माना जाता है।
  • 1974: टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नोरियो तनिगुची ने सर्वप्रथम "Nanotechnology" शब्द का प्रयोग किया।
  • 1981: स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप (STM) का आविष्कार — इससे परमाणुओं को देखा और हेरफेर किया जा सका।
  • 1985: बकमिन्स्टरफुलरीन (C₆₀) की खोज — कार्बन का एक नया अपरूप, जिसने नैनो रसायन विज्ञान की नींव रखी।
  • 1991: जापानी वैज्ञानिक सुमियो इइजिमा ने कार्बन नैनोट्यूब (CNT) का निर्माण किया — यह अब तक का सबसे मजबूत और चालक पदार्थ माना जाता है।
  • 2000 के बाद: नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स, नैनो-मेडिसिन, नैनो-सेंसर आदि का विकास तीव्र गति से हुआ।
📌 परीक्षक टिप: नैनो तकनीक को "अगली औद्योगिक क्रांति" (Industry 4.0 का आधार) कहा जाता है। RAS Mains में इसके विकासक्रम, भारतीय योगदान एवं वर्तमान सरकारी योजनाओं को जोड़कर उत्तर लिखें।

🔹 1.2 भारत में नैनो प्रौद्योगिकी मिशन (Nano Mission) Latest

National Nanoscience and Technology Mission (NSTM):

  • प्रारंभ: 2007 में भारत सरकार ने Department of Science & Technology (DST) के अंतर्गत इस मिशन की शुरुआत की।
  • उद्देश्य: भारत को नैनो अनुसंधान, विकास एवं अनुप्रयोगों में विश्व स्तर पर अग्रणी बनाना।
  • दो प्रमुख सलाहकार समितियाँ: (i) नैनो विज्ञान सलाहकार समूह (ii) नैनो अनुप्रयोग एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार समूह।

Nano Mission Phase-II (2020-2025):

  • इस चरण में 14 से अधिक Centres of Excellence स्थापित किए गए — IIT-Bombay, IIT-Kanpur, IISc-Bangalore, CSIR-NPL (New Delhi) आदि।
  • अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र: nano-materials, nano-electronics, nano-fabrication, drug delivery systems, nano-sensors, nano-energy systems।
  • 2020 में INCONSAT-2020 (International Conference on Nanoscience & Technology) का आयोजन — वैश्विक सहयोग को बढ़ावा।
🇮🇳 नैनो मिशन की उपलब्धियाँ: स्वदेशी नैनो-उत्पाद (Nano Urea, Nano-drugs, Nano-coatings) का विकास। "Make in India" और "Atmanirbhar Bharat" को तकनीकी मजबूती। वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।

🔹 1.3 नैनो प्रौद्योगिकी के प्रमुख अनुप्रयोग एवं संबंधित सरकारी पहल Updated

  • कृषि एवं खाद्य सुरक्षा:
    • नैनो-उर्वरक (Nano-fertilizers): फसलों को सटीक मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं, उत्पादन बढ़ता है और लागत घटती है।
    • IFFCO Nano Urea (2023): भारत का पहला स्वदेशी नैनो-उर्वरक। पारंपरिक यूरिया की तुलना में 50% कम उपयोग, पर्यावरण हितैषी। Latest
    • नैनो-सेंसर: मृदा की नमी, pH, पोषक तत्वों की वास्तविक समय में निगरानी।
    • सरकारी योजना: National Mission on Sustainable Agriculture (NMSA) में नैनो-तकनीक को शामिल किया गया।
  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा:
    • नैनो-ड्रग डिलीवरी सिस्टम: कैंसर, ट्यूमर जैसी बीमारियों में दवा को सीधे लक्षित कोशिकाओं तक पहुँचाना।
    • Nano Mission Health Program: Department of Biotechnology (DBT) द्वारा संचालित, स्वदेशी नैनो-मेडिसिन विकास हेतु। Latest
    • COVID-19: नैनो-आधारित वैक्सीन डिलीवरी सिस्टम पर अनुसंधान।
  • ऊर्जा क्षेत्र:
    • नैनो-सोलर सेल्स: सौर ऊर्जा दक्षता बढ़ाना।
    • हाइड्रोजन भंडारण: नैनो-संरचनाओं में हाइड्रोजन संग्रहण।
    • राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (2021): नैनो-कैटेलिस्ट का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में। Latest
  • पर्यावरण संरक्षण:
    • नैनो-फिल्टर: जल एवं वायु शुद्धि के लिए।
    • TiO₂ नैनोकण: प्रदूषक गैसों के अपघटन में।
    • National Clean Air Programme (NCAP): नैनो-आधारित वायु शोधन तकनीकों को प्रोत्साहन। Latest
  • उद्योग एवं रक्षा:
    • हल्के एवं मजबूत नैनो-कम्पोजिट — रक्षा उपकरणों, विमानों, ऑटोमोबाइल में उपयोग।
    • नैनो-कोटिंग — संक्षारण प्रतिरोध, स्व-सफाई सतह।
📌 परीक्षक टिप: नैनो तकनीक के अनुप्रयोगों को "Atmanirbhar Bharat", "Digital India" और "Sustainable Development Goals (SDG-2, SDG-3, SDG-7, SDG-13)" से जोड़कर लिखें। ग्रामीण विकास (Biotech-KISAN, IFFCO) पर विशेष ध्यान दें।

🔹 1.4 नैनो प्रौद्योगिकी से उत्पन्न चुनौतियाँ Challenge

  • स्वास्थ्य जोखिम (Nanotoxicology): नैनो-कण शरीर के ऊतकों, फेफड़ों, रक्त में प्रवेश कर जैविक असंतुलन पैदा कर सकते हैं।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: नैनो-कण मृदा, जल एवं खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर पारिस्थितिकी को प्रभावित कर सकते हैं।
  • नैतिक एवं सामाजिक मुद्दे: मानव प्रयोगों में सुरक्षा मानकों की कमी; संवर्धन (enhancement) और चिकित्सा के बीच की रेखा धुंधली।
  • नियमन एवं मानकीकरण का अभाव: नैनो-उत्पादों के परीक्षण, प्रमाणीकरण एवं लेबलिंग के लिए स्पष्ट नियमावली नहीं।
  • कुशल मानव संसाधन की कमी: नैनो तकनीक में प्रशिक्षित वैज्ञानिकों, इंजीनियरों की संख्या अपर्याप्त।
  • उच्च अनुसंधान लागत: नैनो-प्रयोगशालाएँ एवं उपकरण अत्यंत महंगे हैं, जिससे छोटे संस्थान पीछे रह जाते हैं।

🔹 1.5 भारत की रणनीति एवं समाधान Strategy

  • नियामक ढाँचा: DST, DBT, CSIR, ICMR की संयुक्त पहल — Nano Regulatory Framework तैयार किया जा रहा है।
  • सुरक्षा अध्ययन: nanotoxicology और bio-safety पर शोध को बढ़ावा।
  • शिक्षा एवं प्रशिक्षण: NEP-2020 में interdisciplinary research पर जोर; नैनो तकनीक को स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया।
  • Centres of Excellence: IITs, NITs, IISc में नैनो-अनुसंधान केंद्रों का विस्तार।
  • उद्योग-अकादमिक सहयोग: टाटा, रिलायंस, IFFCO, डॉ. रेड्डीज जैसी कंपनियों के साथ सहयोग।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: USA, Japan, Germany, Israel के साथ नैनो-अनुसंधान समझौते।
🔹 भविष्य की दिशा: "सुरक्षित एवं सतत नैनो-विकास" — जहाँ नवाचार के साथ सुरक्षा एवं नैतिकता का संतुलन हो।

🔹 1.6 राजस्थान में नैनो प्रौद्योगिकी की स्थिति Rajasthan

  • शैक्षणिक संस्थान: MNIT Jaipur, IISER Ajmer, Banasthali Vidyapeeth, JNVU Jodhpur में नैनो-अनुसंधान प्रयोगशालाएँ सक्रिय हैं।
  • राज्य सरकार की पहल: Rajasthan Science & Technology Promotion Programme (RSTPP) के अंतर्गत नैनो-प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन।
  • उद्योग सहयोग: सिरामिक, खनिज, एवं सोलर उद्योगों में नैनो-कोटिंग्स एवं नैनो-मटेरियल्स का उपयोग बढ़ रहा है।
  • स्टार्टअप्स: iStart Rajasthan के माध्यम से नैनो-आधारित स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन सहायता।
🛰️ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology) विस्तृत High Weightage

🔹 2.1 भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का विकासक्रम Core

  • 1962: INCOSPAR (Indian National Committee for Space Research) की स्थापना — डॉ. विक्रम साराभाई की अगुवाई में।
  • 1969: INCOSPAR का ISRO (Indian Space Research Organisation) में पुनर्गठन। मुख्यालय: बेंगलुरु।
  • 1975: भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट सोवियत रॉकेट से प्रक्षेपित।
  • 1979: SLV-3 (Satellite Launch Vehicle) — पहला स्वदेशी रॉकेट, जिसने Rohini उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया।
  • 1983: INSAT (Indian National Satellite System) की शुरुआत — संचार, मौसम, प्रसारण सेवाएँ।
  • 1988: IRS-1A — भारत का पहला रिमोट सेंसिंग उपग्रह।
  • 2008: चंद्रयान-1 — भारत का पहला चंद्र मिशन, जिसने चंद्रमा पर पानी (H₂O) की खोज की।
  • 2013: मंगलयान (MOM) — भारत मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला एशिया का पहला एवं विश्व का चौथा देश बना।
  • 2019: मिशन शक्ति (Anti-Satellite Test) — भारत ASAT हथियार का सफल परीक्षण करने वाला चौथा देश।
  • 2023: चंद्रयान-3 — चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग; विश्व का पहला देश।
🇮🇳 वर्तमान लक्ष्य: Gaganyaan (2025-26), Aditya-L1 (सूर्य), NISAR (NASA-ISRO), Bharatiya Space Station (2035), Venus Orbiter Mission (2028)।

🔹 2.2 ISRO के प्रमुख केंद्र एवं उनके कार्य Core

  • Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC), तिरुवनंतपुरम: रॉकेट का डिजाइन, विकास एवं प्रक्षेपण तकनीक।
  • U. R. Rao Satellite Centre (URSC), बेंगलुरु: सभी प्रकार के उपग्रहों का निर्माण एवं डिजाइन।
  • Satish Dhawan Space Centre (SDSC), श्रीहरिकोटा: प्रक्षेपण स्थल। PSLV, GSLV, LVM-3 के प्रमुख लॉन्च पैड।
  • Liquid Propulsion Systems Centre (LPSC): तरल एवं क्रायोजेनिक इंजनों का विकास।
  • ISRO Telemetry, Tracking and Command Network (ISTRAC): मिशन नियंत्रण, ट्रैकिंग एवं संचार।
  • National Remote Sensing Centre (NRSC), हैदराबाद: रिमोट सेंसिंग डेटा का प्रसंस्करण एवं वितरण।
  • Physical Research Laboratory (PRL), अहमदाबाद: अंतरिक्ष विज्ञान एवं खगोल भौतिकी अनुसंधान।

🔹 2.3 PSLV और GSLV: अंतर, क्षमता एवं उपलब्धियाँ Core

आधार PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle)
प्रकार चौथी पीढ़ी, ठोस-द्रव ईंधन पाँचवीं पीढ़ी, ठोस-द्रव-क्रायोजेनिक
भार क्षमता 1800 किग्रा (LEO में) 4000 किग्रा (GTO में)
प्रारंभ 1994 (PSLV-D1) 2001 (GSLV-D1)
मुख्य उपयोग पृथ्वी अवलोकन, रिमोट सेंसिंग, मौसम उपग्रह संचार, नेविगेशन, भारी उपग्रह
इंजन तकनीक Solid + Liquid (Vikas) Solid + Liquid + Indigenous Cryogenic (CE-20)
प्रमुख उपलब्धि PSLV-C37 (2017): 104 उपग्रह एक साथ — विश्व रिकॉर्ड GSLV Mk-III (LVM-3): चंद्रयान-3 प्रक्षेपण

SSLV (Small Satellite Launch Vehicle): ISRO की नई पीढ़ी का यान, जो निजी कंपनियों एवं स्टार्टअप्स को सस्ती लॉन्चिंग सुविधा देगा। पहला SSLV-D1 (2022) आंशिक रूप से सफल, D2 (2023) पूर्ण रूप से सफल। Latest

🔹 2.4 चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) Latest

  • प्रक्षेपण: 14 जुलाई 2023, LVM-3 रॉकेट, श्रीहरिकोटा।
  • लैंडिंग: 23 अगस्त 2023, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट (69.37°S, 32.32°E)।
  • घटक: Propulsion Module + Vikram Lander + Pragyan Rover (6 पहिए)।
  • वैज्ञानिक निष्कर्ष:
    • सल्फर (S), एल्युमिनियम (Al), कैल्शियम (Ca), क्रोमियम (Cr), आयरन (Fe), टाइटेनियम (Ti) की पुष्टि।
    • सतह का तापमान: 70°C से अधिक (मापा गया)।
    • Laser-Induced Breakdown Spectroscopy (LIBS) तकनीक का उपयोग।
    • चंद्र सतह पर भूकंपीय गतिविधि (moonquake) का पता चला।
  • महत्व: भारत विश्व का पहला देश जिसने चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की।
  • आगामी: Chandrayaan-4 (2026-27) — चंद्र नमूना वापसी मिशन; LUPEX (Japan के साथ) — 2028 तक।
📌 परीक्षक टिप: चंद्रयान-3 की उपलब्धियाँ "Atmanirbhar Bharat", "Science for Society", "Space Vision 2047" से जोड़ें। वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा में वृद्धि।

🔹 2.5 आदित्य-L1 (Aditya-L1) Latest

  • प्रक्षेपण: 2 सितंबर 2023, PSLV-C57, श्रीहरिकोटा।
  • स्थान: Lagrange Point L1 (पृथ्वी से 1.5 मिलियन किमी दूर) — सूर्य का निरंतर अवलोकन संभव।
  • 7 पेलोड (उपकरण):
    • VELC (Visible Emission Line Coronagraph) — सूर्य की Corona का अध्ययन।
    • SUIT (Solar Ultraviolet Imaging Telescope) — UV इमेजिंग। Latest
    • HEL1OS (High Energy L1 Orbiting X-ray Spectrometer) — सौर फ्लेयर्स की X-रे निगरानी।
    • ASPEX, PAPA, SoLEXS, MAG — विभिन्न कणों एवं चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन।
  • उद्देश्य:
    • सूर्य की Corona, Solar Wind, और Solar Flare की प्रक्रिया समझना।
    • Space Weather का पूर्वानुमान — उपग्रहों, संचार, ऊर्जा ग्रिड पर प्रभाव का विश्लेषण।
    • सौर विकिरण के पृथ्वी के वायुमंडल पर प्रभाव का अध्ययन।
  • महत्व: भारत का पहला सौर अन्वेषण मिशन; Space Weather Forecasting में आत्मनिर्भरता।

🔹 2.6 गगनयान (Gaganyaan) — भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन Latest

  • घोषणा: 2018 (PM Modi द्वारा), ISRO + IAF + DRDO का संयुक्त प्रयास।
  • उद्देश्य: 400 किमी की ऊँचाई पर 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 5-7 दिनों तक भेजना।
  • प्रमुख घटक:
    • Crew Module: दाबयुक्त, जीवन-रक्षक प्रणाली (oxygen, temperature, pressure)।
    • Service Module: प्रणोदन, ऊर्जा, ताप नियंत्रण।
    • Launch Vehicle: GSLV Mk-III (LVM-3) — स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (CE-20) सहित।
    • Crew Escape System (CES): आपातकालीन स्थिति में रॉकेट आधारित बचाव तंत्र।
  • प्रशिक्षण: बेंगलुरु स्थित Human Space Flight Centre (HSFC) + रूस के Gagarin Cosmonaut Training Centre में चयनित भारतीय वायुसेना पायलट।
  • टाइमलाइन:
    • 2022: Test Vehicle (TV-D1) सफल — CES परीक्षण।
    • 2025-26: पहला मानवरहित परीक्षण (HLVM3 G1/OM1)।
    • 2026: पहला मानवयुक्त मिशन (H1) संभावित। Latest
  • महत्व: भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश जो मानव अंतरिक्ष मिशन संचालित करेगा।
🇮🇳 गगनयान से जुड़ी योजनाएँ: Indian Human Spaceflight Programme (IHSP), Make in India, Scientific India Vision 2047।

🔹 2.7 संचार उपग्रह (Communication Satellites) Core

  • INSAT प्रणाली: 1983 (INSAT-1B) से प्रारंभ — दूरसंचार, प्रसारण, मौसम, आपदा चेतावनी।
  • GSAT शृंखला:
    • GSAT-30 (2020): DTH, टेलीमेडिसिन, दूरदर्शन सेवाएँ।
    • GSAT-31 (2019): भारत एवं पड़ोसी देशों के समुद्री क्षेत्रों में संचार।
    • CMS-01 (2020): केरल, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार तक संचार विस्तार।
  • संबंधित योजनाएँ: Digital India, e-Governance, Tele-Education, BharatNet Satellite Broadband Project (2022)।
  • IN-SPACE (Indian National Space Promotion and Authorization Centre): निजी क्षेत्र की भागीदारी हेतु, Space Startups को प्रोत्साहन। Latest

🔹 2.8 नेविगेशन उपग्रह — NAVIC Core

  • NAVIC (Navigation with Indian Constellation) / IRNSS: भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली।
  • उपग्रह संख्या: 8 (3 Geostationary + 5 Geosynchronous)।
  • सटीकता: ±10 मीटर (Standard Positioning Service) तथा ±1 मीटर (Restricted Service — रक्षा हेतु)।
  • सेवाएँ:
    • Standard Positioning Service (SPS) — नागरिक उपयोग।
    • Restricted Service (RS) — रक्षा एवं सुरक्षा उपयोग।
  • उपयोग:
    • समुद्री मछुआरों को Cyclone Warning एवं दिशा-निर्देश।
    • रेलवे का Real-Time Train Information System (RTIS) — NAVIC आधारित।
    • आपदा प्रबंधन, परिवहन, मोबाइल ट्रैकिंग।
  • NVS-01 (2023): स्वदेशी रूबिडियम परमाणु घड़ी (rubidium atomic clock) से युक्त — आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम। Latest

🔹 2.9 रिमोट सेंसिंग उपग्रह एवं उनके उपयोग Core

  • IRS (Indian Remote Sensing Satellites) प्रणाली: 1988 (IRS-1A) से प्रारंभ।
  • प्रमुख शृंखलाएँ:
    • Resourcesat: प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (भूमि, जल, वन, खनिज)।
    • Cartosat: उच्च-रिजॉल्यूशन मानचित्रण, शहरी योजना, बुनियादी ढाँचा।
    • Oceansat: समुद्री तापमान, मत्स्य संसाधन, तटीय निगरानी।
    • RISAT: रडार इमेजिंग — बादल/रात में भी स्पष्ट चित्रण (All-weather capability)।
    • Megha-Tropiques & SARAL: ISRO-France संयुक्त परियोजनाएँ — मौसम एवं महासागरीय अध्ययन।
  • उपयोग क्षेत्र:
    • Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (फसल बीमा) — उपग्रह आधारित उपज आकलन।
    • DILRMP (Digital India Land Records Modernisation Programme)।
    • Smart City Mission — GIS आधारित योजना एवं निगरानी।
    • Bhuvan Portal (ISRO) — सार्वजनिक डेटा प्लेटफॉर्म।

🔹 2.10 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का आपदा प्रबंधन में योगदान Core

  • ISRO Disaster Management Support (DMS) Programme: आपातकालीन संचार एवं राहत समन्वय।
  • National Remote Sensing Centre (NRSC): बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, सूखा, वनाग्नि की निगरानी हेतु उपग्रह चित्रों का विश्लेषण।
  • Bhuvan Portal: रीयल-टाइम डेटा — बाढ़, सूखा, भूकंप प्रभाव क्षेत्रों की मैपिंग।
  • NAVIC: तटीय राज्यों में मछुआरों को चक्रवात चेतावनी।
  • National Disaster Management Information System (NDMIS) — 2021: उपग्रह डेटा आधारित निर्णय प्रणाली। Latest
  • राजस्थान में: Desert Flood Early Warning System (Jodhpur ISRO Centre) — मरुस्थलीय बाढ़ की पूर्व चेतावनी।
🤖 कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence) & रोबोटिक्स विस्तृत

🔹 3.1 AI: परिभाषा, ऐतिहासिक विकास एवं प्रमुख शाखाएँ Core

कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence — AI) वह तकनीक है जिसमें मशीनों, कंप्यूटरों और प्रणालियों को मनुष्य जैसी सोच, तर्क, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान की जाती है।

ऐतिहासिक विकास (Timeline):

  • 1950: ऐलन ट्यूरिंग ने "ट्यूरिंग टेस्ट" प्रस्तावित किया — यह परखती है कि कोई मशीन मानव-स्तरीय बुद्धि प्रदर्शित कर सकती है या नहीं।
  • 1956: जॉन मैक्कार्थी ने "Artificial Intelligence" शब्द गढ़ा (Dartmouth Conference)।
  • 1980s: Expert Systems (विशेषज्ञ प्रणालियाँ) — विशिष्ट ज्ञान आधारित निर्णय प्रणाली।
  • 1997: IBM DeepMind ने शतरंज में गैरी कास्परोव को हराया।
  • 2000s: Machine Learning & Deep Learning का उदय — बड़े डेटा (Big Data) से प्रशिक्षण।
  • 2010s: Image Recognition, NLP (Natural Language Processing), ChatGPT, Gemini आदि Generative AI का युग।

प्रमुख शाखाएँ (Subfields):

  • Machine Learning (ML): डेटा से सीखने वाले एल्गोरिदम (Supervised, Unsupervised, Reinforcement Learning)।
  • Deep Learning: Neural Networks (तंत्रिका नेटवर्क) — चित्र, भाषा, आवाज पहचान में सटीकता।
  • Natural Language Processing (NLP): मानव भाषा को समझना और जनरेट करना (ChatGPT, Google Gemini, Claude)।
  • Computer Vision: चित्रों/वीडियो से जानकारी निकालना (चेहरा पहचान, रोग निदान, ड्रोन विज़न)।
  • Robotics + AI: स्वायत्त रोबोट (स्व-चालित कारें, ड्रोन, औद्योगिक रोबोट)।

🔹 3.2 AI के प्रमुख अनुप्रयोग एवं संबंधित योजनाएँ Updated

  • स्वास्थ्य (Healthcare):
    • AI-आधारित इमेजिंग (X-Ray, MRI, CT-Scan) — 75+ रोगों की शीघ्र पहचान (भारत में 5 मिलियन X-Rays पर प्रशिक्षित मॉडल)। Latest
    • AI in Drug Discovery — COVID-19 वैक्सीन विकास में AI का योगदान।
    • सरकारी पहल: e-Sanjeevani (Telemedicine), Ayushman Bharat Digital Mission में AI का एकीकरण।
  • कृषि (Agriculture):
    • AI-आधारित फसल मॉनिटरिंग, स्मार्ट सिंचाई, रोग पहचान (IIIT-Allahabad द्वारा पशु रोग पहचान AI मॉडल)। Latest
    • Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana — AI आधारित उपज आकलन।
    • Digital Agriculture Mission में AI-आधारित सलाह प्रणाली।
  • शिक्षा (Education):
    • Adaptive Learning Platforms — व्यक्तिगत शिक्षण (SWAYAM, DIKSHA)।
    • AI-आधारित परीक्षा मूल्यांकन, चैटबॉट्स (वर्चुअल टीचर्स)।
    • NEP-2020 में AI & Robotics को विद्यालयीन पाठ्यक्रम में शामिल करना।
  • शासन (Governance):
    • AI in e-Governance — MyGov, Bhashini (भाषा AI), UMANG, DigiLocker।
    • AI-Gov Portal (MeitY) — सरकारी सेवाओं में AI अनुप्रयोगों का साझा मंच। Latest
    • डिजिटल भुगतान (UPI) में AI-आधारित धोखाधड़ी पहचान।
  • रक्षा (Defence):
    • AI for Air Defence — लक्ष्य पहचान, मिसाइल नियंत्रण (DRDO के साथ परियोजनाएँ)।
    • AI-आधारित निगरानी ड्रोन, स्वायत्त सैन्य वाहन।
    • साइबर सुरक्षा में AI — खतरे की पूर्व-चेतावनी और प्रतिक्रिया।
  • AI Tools (Global):
    • ChatGPT (OpenAI — 2022): संवादात्मक AI, टेक्स्ट जनरेशन।
    • Google Gemini (2023): मल्टीमॉडल AI (टेक्स्ट, इमेज, वीडियो, कोड)।
    • Claude (Anthropic): नैतिक AI मॉडल।
    • Midjourney / DALL-E 3: इमेज जनरेशन टूल।
    • DeepMind AlphaFold (2020): प्रोटीन संरचना पूर्वानुमान — जैव प्रौद्योगिकी में क्रांति।

🔹 3.3 भारत सरकार की AI नीति, मिशन एवं संस्थाएँ Policy

  • National Strategy for AI — #AIforAll (2018): NITI Aayog द्वारा प्रकाशित, 5 प्रमुख क्षेत्र — स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट शहर, परिवहन।
  • AIRAWAT Platform: AI अनुसंधान हेतु राष्ट्रीय ढाँचा (High-Performance Computing)।
  • IndiaAI Mission (2024): ₹10,000 करोड़ का निवेश — AI स्टार्टअप्स, शोध, डेटा-इंफ्रास्ट्रक्चर और AI स्किलिंग को प्रोत्साहन। Latest
  • Responsible AI for Youth Programme: युवाओं को AI प्रशिक्षण।
  • AI in Governance (AIGov Portal): सरकारी विभागों में AI अनुप्रयोगों को साझा करने हेतु।
  • Responsible AI for All (RAISE): नैतिक AI दिशानिर्देशों के लिए NITI Aayog का अभियान।
  • Google AI Hub (Visakhapatnam, 2025): US$15 बिलियन का निवेश — दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा AI शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र। Latest
  • MeitY: AI Standardisation & Data Governance नीति पर कार्य।
📌 परीक्षक टिप: AI को "Digital India", "Atmanirbhar Bharat" और "Viksit Bharat @2047" की तकनीकी रीढ़ के रूप में लिखें। नैतिक AI (Ethical AI) पर भी ध्यान दें — Bias, Privacy, Accountability।

🔹 3.4 AI से उत्पन्न चुनौतियाँ Challenge

  • रोजगार में असंतुलन: स्वचालन से पारंपरिक नौकरियों (मैन्युफैक्चरिंग, कॉल सेंटर, डेटा एंट्री) में कमी।
  • डेटा गोपनीयता एवं सुरक्षा: AI सिस्टम बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र करते हैं, जिसके दुरुपयोग का खतरा।
  • एल्गोरिदमिक पक्षपात (Algorithmic Bias): प्रशिक्षण डेटा में मौजूद पूर्वाग्रह AI निर्णयों को प्रभावित करते हैं (जाति, लिंग, आर्थिक वर्ग)।
  • पारदर्शिता एवं जवाबदेही: AI निर्णयों की व्याख्या (Explainability) मुश्किल — "Black Box" समस्या।
  • नैतिक प्रश्न: क्या मशीन को निर्णय का अधिकार होना चाहिए? स्वायत्त हथियारों (Autonomous Weapons) में AI का उपयोग।
  • साइबर अटैक: AI सिस्टम को हैक करके गलत निर्णय या डेटा चोरी।
  • कौशल अंतर (Skill Gap): AI-प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी।

🔹 3.5 AI से निपटने की रणनीतियाँ Strategy

  • Ethical AI Framework: MeitY द्वारा AI नैतिक दिशानिर्देश (Trustworthy AI, Fairness, Accountability)।
  • Digital Personal Data Protection Act, 2023: डेटा सुरक्षा के लिए कानूनी ढाँचा।
  • AI Regulatory Framework (MeitY 2024): जिम्मेदार AI के सिद्धांत।
  • कौशल विकास: NEP-2020 में AI & ML को पाठ्यक्रम में शामिल करना; Future Skills Prime, Skill India AI प्रोग्राम्स।
  • AI for All, AI for Good: नवाचार और नैतिकता के बीच संतुलन का भारतीय दृष्टिकोण।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: GPAI (Global Partnership on Artificial Intelligence) — भारत की सदस्यता।

🔹 3.6 रोबोटिक्स — अवधारणा, प्रकार, उपयोग एवं भारतीय पहल Core

रोबोटिक्स (Robotics): विज्ञान की वह शाखा जो स्वचालित मशीनों (रोबोट्स) के डिजाइन, निर्माण, संचालन एवं नियंत्रण से संबंधित है। रोबोट का उद्देश्य मानव-सदृश कार्यों को स्वचालित रूप से करना है।

प्रमुख घटक: Sensors (परिवेश से जानकारी), Actuators (गति एवं बल नियंत्रण), Controller (मस्तिष्क — निर्णय), Power Supply (ऊर्जा), Software (प्रोग्रामिंग)।

प्रकार एवं उपयोग:

  • औद्योगिक रोबोट्स: असेंबली, वेल्डिंग, पेंटिंग, पैकेजिंग — ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स।
  • सेवा रोबोट्स: होटल, बैंक, रेस्तराँ में स्वागत एवं सेवा।
  • स्वास्थ्य रोबोट्स: रोबोटिक सर्जरी (da Vinci), दवा डिलीवरी (COVID-19), पुनर्वास।
  • रक्षा रोबोट्स: बम निष्क्रियता (Bomb Disposal), निगरानी ड्रोन, मानव रहित युद्ध वाहन।
  • अंतरिक्ष रोबोट्स: रोवर (चंद्रयान, मंगलयान), उपग्रह रखरखाव, अंतरिक्ष स्टेशन।
  • स्वायत्त रोबोट्स (Autonomous): स्व-चालित कारें (Tesla, Waymo), ड्रोन, स्वचालित गोदाम (Amazon Robotics)।

भारत में रोबोटिक्स की पहल:

  • Make in India: रोबोटिक्स मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन।
  • IITs में Centre for Robotics and Automation: अनुसंधान एवं विकास।
  • DRDO: Muntra Robot, Netra UAV, Combat Robots।
  • GreyOrange, Gridbots, Systemantics: भारतीय रोबोटिक्स स्टार्टअप्स।
  • Collaborative Robots (CoBots): मानव-रोबोट सहयोग — भविष्य की दिशा।
🛡️ रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology) विस्तृत Strategic

🔹 4.1 DRDO — भारत की रक्षा अनुसंधान की रीढ़ Core

Defence Research and Development Organisation (DRDO): स्थापना 1958 में। मुख्यालय: नई दिल्ली। उद्देश्य — स्वदेशी तकनीक से मिसाइल, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, रक्षा सामग्री का विकास।

प्रमुख प्रयोगशालाएँ:

  • DRDL (Hyderabad): मिसाइल विकास (प्रथ्वी, अग्नि, नाग)।
  • ADA (Bengaluru): Tejas विमान डिजाइन।
  • CVRDE (Chennai): Arjun Tank।
  • ARDE (Pune): Pinaka रॉकेट।
  • DLRL (Hyderabad): रडार एवं संचार उपकरण।
  • RCI (Hyderabad): नियंत्रण प्रणाली (Control Systems) — मिसाइल मार्गदर्शन।

प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • Agni, Prithvi, Akash, Nag, BrahMos मिसाइलें।
  • Arjun Tank, Tejas Fighter Jet, Netra AEW&C, ATAGS तोप, Pinaka रॉकेट।
  • INS Vikrant (स्वदेशी विमानवाहक पोत) — Cochin Shipyard & DRDO सहयोग।
  • Mission Shakti (ASAT) — 2019।
  • Vikram-3201 Microprocessor (2025) — ISRO + SCL + DRDO सहयोग। Latest

🔹 4.2 भारत की प्रमुख स्वदेशी मिसाइल प्रणालियाँ Core

मिसाइल प्रकार रेंज विशेषता
Agni-I से Agni-V ICBM / Ballistic 700–5000+ km परमाणु क्षमता, Agni-V में MIRV तकनीक
Prithvi-I/II/III Ballistic 150–350 km स्वदेशी टैक्टिकल मिसाइल
Akash Surface-to-Air 25 km बहु-लक्ष्य प्रतिरोध क्षमता
Nag (HELINA) Anti-Tank 4–8 km Fire & Forget; हेलीकॉप्टर से भी प्रक्षेपण
BrahMos (India-Russia) Supersonic Cruise 290–500 km विश्व की तेजतम क्रूज मिसाइल (Mach 2.8–3)
Agni-VI (विकासाधीन) ICBM 8000+ km MIRV + अत्याधुनिक मार्गदर्शन

BrahMos-II (विकासाधीन): Hypersonic (Mach 5+) — भारत-रूस की संयुक्त परियोजना।

🔹 4.3 उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियाँ (Emerging Defence Tech) Latest

  • AI in Defence: स्वायत्त ड्रोन, लक्ष्य पहचान, भविष्यवाणी विश्लेषण, साइबर सुरक्षा।
  • Hypersonic Weapons: 5 Mach से अधिक गति (HSTDV — Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle, DRDO)। Latest
  • Directed Energy Weapons (Laser Weapons): बिना विस्फोट के लक्ष्य नष्ट करना — DRDO का 30 kW लेजर (2024-25)। Latest
  • Quantum Communication: अविभाज्य एन्क्रिप्शन (DRDO & IITs परियोजनाएँ)।
  • Swarm Drones: सैकड़ों ड्रोन एक साथ आक्रमण — भारत में DRDO परियोजनाएँ।
  • Robotic Soldiers: मानव रहित युद्ध प्रणाली (Muntra Robot, Daksha)।
  • Cyber Warfare Tools: रक्षात्मक एवं आक्रमक नेटवर्क सुरक्षा।
  • Space Defence: उपग्रह निगरानी, ASAT (Mission Shakti), Space-Based Communication।

🔹 4.4 साइबर युद्ध (Cyber Warfare) — परिभाषा, प्रकार, भारत की रणनीति Core

साइबर युद्ध (Cyber War): वह प्रक्रिया जिसमें कोई देश दूसरे देश के कंप्यूटर नेटवर्क, सूचना प्रणाली, बैंकिंग, ऊर्जा ग्रिड, रक्षा या प्रशासनिक ढाँचे पर डिजिटल माध्यम से आक्रमण करता है। यह "अदृश्य युद्ध" है, जो सीमाओं के पार बिना हथियार के लड़ा जाता है।

प्रकार (Types):

  • Cyber Espionage: जासूसी के लिए सरकारी/सैन्य डेटा चोरी (SolarWinds Attack 2020 — USA)।
  • Cyber Sabotage: महत्वपूर्ण नेटवर्क को निष्क्रिय करना (Stuxnet Virus 2010 — ईरान परमाणु संयंत्र)।
  • Cyber Propaganda: सोशल मीडिया से भ्रम एवं अस्थिरता फैलाना।
  • Cyber Terrorism: आतंकवादी समूहों द्वारा डिजिटल हमले।

भारत की साइबर सुरक्षा संस्थाएँ एवं नीतियाँ:

  • CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team): साइबर घटनाओं की निगरानी एवं प्रतिक्रिया।
  • Defence Cyber Agency (DCA — 2019): तीनों सेनाओं के नेटवर्क की सुरक्षा।
  • National Cyber Security Policy (2024 Draft): डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा हेतु नया ढाँचा। Latest
  • Cyber Surakshit Bharat Mission (2018): सरकारी कर्मचारियों का प्रशिक्षण।
  • National Cyber Coordination Centre (NCCC): खतरे की प्रारंभिक पहचान।
  • Indian Cyber Coordination Centre (I4C): साइबर अपराधों से निपटने हेतु समन्वय।
  • NCIIPC (Critical Infrastructure Protection Centre): बिजली, ऊर्जा, बैंक, ट्रांसपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण ढाँचे की सुरक्षा।
  • Digital Personal Data Protection Act, 2023: नागरिक डेटा की कानूनी सुरक्षा।

🔹 4.5 'Make in India' और 'Atmanirbhar Bharat' का रक्षा क्षेत्र में योगदान Policy

  • Defence Industrial Corridors: उत्तर प्रदेश (झाँसी) और तमिलनाडु (चेन्नई) में स्थापित।
  • Positive Indigenisation List: 400+ रक्षा उपकरणों का स्वदेशी उत्पादन, आयात प्रतिबंधित।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: टाटा, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), महिंद्रा, अदानी, बीईएल, मझगाँव डॉक — मिसाइल, वाहन, रडार, पोत निर्माण में।
  • स्वदेशीकरण उपलब्धियाँ:
    • INS Vikrant (पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत, 2022)।
    • INS Arihant (परमाणु पनडुब्बी, 2016) — Nuclear Triad की पूर्ति।
    • Pinaka MBRL — कारगिल युद्ध में सफल।
    • ATAGS (Advanced Towed Artillery Gun System) — 155mm/52 कैलिबर तोप, 48 किमी रेंज।
    • Tejas Mk-1A — हल्का लड़ाकू विमान, 2024 से सेवा में। Latest

🔹 4.6 लेजर (Directed-Energy Weapons — DEW) एवं भारत की स्थिति Latest

लेजर/DEW: ऊर्जा-आधारित हथियार जो केंद्रित प्रकाश/माइक्रोवेव पल्स से लक्ष्य (ड्रोन, रॉकेट, सेंसर) को नष्ट/निष्क्रिय करते हैं।

प्रकार: High-Energy Laser (HEL), High-Power Microwave (HPM), Chemical/Free-electron लेजर।

लाभ: प्रति-शॉट कम लागत, असीमित फायरिंग (जब तक पावर है), प्रकाश-गति से लक्ष्य भेदन।

सीमाएँ: मौसम (बादल/धुंध) से प्रभावित; उच्च ऊर्जा आवश्यकता; कूलिंग/ताप प्रबंधन चुनौती।

विश्व की प्रमुख प्रणालियाँ: US Navy LaWS (2014), Iron Beam (Israel — 2025 operational), Russia Peresvet, China ZKZM-500।

भारत में DEW:

  • DRDO — Sahastra-Shakti / Mk-II(A) प्रोग्राम: 2 kW → 10 kW → 30 kW (2024-25 में परीक्षण)। Latest
  • KALI (Kilo Ampere Linear Injector): DRDO-BARC की इलेक्ट्रॉन एक्सेलेरेटर परियोजना — लेजर तकनीक की नींव।
  • Sudarshan Laser-Guided Bomb: DRDO द्वारा विकसित, लेजर-गाइडेड हथियार।
  • लक्ष्य: 50–100 kW लेजर का विकास (Counter-UAS, Swarm Drones, Short-range Missiles)।
📡 संचार प्रौद्योगिकी (Communication Technology) विस्तृत

🔹 5.1 विकास, प्रकार एवं भारत की उपलब्धियाँ Core

संचार प्रौद्योगिकी: वह तंत्र जिसके माध्यम से सूचना, डेटा, आवाज, चित्र या वीडियो को इलेक्ट्रॉनिक तरंगों (तार/वायरलेस/सैटेलाइट) के जरिये एक स्थान से दूसरे तक पहुँचाया जाता है।

प्रकार: Wired (Optical Fiber, DSL, LAN), Wireless (GSM, CDMA, Wi-Fi, Bluetooth, 4G/5G), Satellite (INSAT, GSAT, NAVIC), Internet (Broadband, Fiber)।

भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ एवं योजनाएँ:

  • BharatNet Project: ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना (Phase-I & II पूर्ण, Phase-III 2025 तक)। Latest
  • 5G Technology Launch (2022): भारत 5G अपनाने में विश्व अग्रणी देशों में शामिल। Jio, Airtel, Vi द्वारा 5G सेवाएँ शुरू।
  • 6G Research: भारत 6G पर अनुसंधान (6G Vision — 2030 तक)। Latest
  • Satellite Broadband Mission (2022): दूरदराज क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए सैटेलाइट आधारित समाधान।
  • Optical Fiber Network Expansion: 5G के साथ फाइबर-ऑप्टिक बैकहॉल का विस्तार।
  • Digital India Mission: UMANG, DigiLocker, e-Hospital, e-SHRAM, BHIM-UPI — डिजिटल सेवा प्लेटफॉर्म।
📌 परीक्षक टिप: संचार तकनीक को "Digital India", "Atmanirbhar Bharat" और "आपदा प्रबंधन" से जोड़ें। 5G/6G और क्वांटम संचार पर विशेष ध्यान दें।

🔹 5.2 क्वांटम संचार (Quantum Communication) Latest

  • परिभाषा: अविभाज्य एन्क्रिप्शन तकनीक — Quantum Key Distribution (QKD) के माध्यम से डेटा ट्रांसफर को पूर्णतः सुरक्षित किया जाता है।
  • भारत में प्रगति: DRDO-DOT ने 2024 में 100 मीटर की दूरी पर क्वांटम संचार का सफल प्रदर्शन किया।
  • सरकारी पहल: National Quantum Mission (2023) के अंतर्गत क्वांटम संचार पर अनुसंधान। Latest
  • महत्व: रक्षा, बैंकिंग, सरकारी संचार में अभेद्य सुरक्षा प्रदान करता है।
🌐 IoT & उभरती प्रौद्योगिकियाँ (Emerging Tech) विस्तृत

🔹 6.1 Internet of Things (IoT) — अवधारणा, कार्यप्रणाली, उपयोग Core

IoT (Internet of Things): भौतिक वस्तुओं (सेंसर, डिवाइस, वाहन, मशीन, भवन) को इंटरनेट से जोड़कर आपस में डेटा आदान-प्रदान करना। उद्देश्य — स्मार्ट निर्णय, स्वचालन, रीयल-टाइम निगरानी।

कार्यप्रणाली (Workflow):

  1. Sensors & Devices: डेटा एकत्र करना (तापमान, गति, स्थिति, नमी)।
  2. Network Connectivity: डेटा इंटरनेट/क्लाउड तक पहुँचाना (Wi-Fi, 5G, LoRa, Bluetooth)।
  3. Data Processing: AI/ML के जरिए विश्लेषण।
  4. User Interface / Action: निर्णय या कमांड (जैसे: स्मार्ट फैन स्वतः बंद होना)।

प्रमुख उपयोग क्षेत्र:

  • कृषि (Agri-IoT): मिट्टी की नमी, तापमान सेंसर — स्मार्ट सिंचाई।
  • स्वास्थ्य (Health-IoT): स्मार्ट बैंड, रिमोट रोगी निगरानी।
  • स्मार्ट सिटी: ट्रैफिक नियंत्रण, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन।
  • उद्योग (Industry 4.0): स्वचालित उत्पादन, मशीन मॉनिटरिंग।
  • रक्षा: स्मार्ट सेंसर, ड्रोन निगरानी, बॉर्डर सर्विलांस।

भारत की IoT पहलें:

  • Digital India IoT Policy (2016): IoT इकोसिस्टम विकास के लिए रोडमैप।
  • Smart City Mission: IoT-आधारित निगरानी, ट्रैफिक प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता।
  • NASSCOM & MeitY IoT Centre of Excellence: स्टार्टअप्स एवं अनुसंधान को बढ़ावा।
  • AGRI IoT Pilot Projects: IITs और NIC द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में IoT आधारित कृषि समाधान।
  • AIoT (AI + IoT): भविष्य की दिशा — AIoT से स्मार्ट एवं स्वायत्त प्रणालियाँ।

🔹 6.2 भविष्य की दिशा — 6G, AIoT, क्वांटम, स्वदेशी चिप्स Future

  • 6G Technology: 2030 तक 6G परीक्षण/तैनाती; अल्ट्रा-लो लेटेंसी, टेराबिट-स्तरीय गति।
  • AIoT (Artificial Intelligence of Things): AI + IoT का संयोजन — स्वचालित निर्णय प्रणाली।
  • Quantum Communication: अविभाज्य डेटा सुरक्षा (DRDO, IITs परियोजनाएँ)।
  • स्वदेशी चिप्स: IIT-Madras का SHAKTI प्रोसेसर, Vega प्रोसेसर — आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर उत्पादन।
  • Edge Computing: डेटा प्रोसेसिंग को डिवाइस के पास ही करना — तीव्रता एवं सुरक्षा।
🌿 सतत विकास एवं हरित प्रौद्योगिकी Core

🔹 7.1 जलवायु परिवर्तन, NAPCC, सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन मिशन Updated

  • जलवायु परिवर्तन: GHG (CO₂, CH₄, N₂O) उत्सर्जन से ग्लोबल वार्मिंग, प्रभाव — हिमनद पिघलना, समुद्र स्तर वृद्धि, अत्यधिक मौसमी घटनाएँ, कृषि प्रभावित।
  • National Action Plan on Climate Change (NAPCC — 2008): 8 मिशन + 4 नए (Wind, Waste-to-Energy, Coastal, Hydrogen) — राजस्थान Climate Action Plan (2021-30) भी।
  • सौर ऊर्जा: भारत 2025 में 75 GW+ सौर क्षमता। Bhadla Solar Park (2245 MW) — विश्व का सबसे बड़ा। KUSUM (2019), PM Surya Ghar Muft Bijli (2024), Solar Cities Programme। Latest
  • Green Hydrogen Mission (2023): 2030 तक 5 MTPA ग्रीन हाइड्रोजन, 125 GW अक्षय ऊर्जा, ₹8 लाख करोड़ निवेश, 50 MTPA CO₂ उत्सर्जन कमी। Latest
  • राजस्थान में: Bhadla Solar Park, Jaisalmer Wind Corridor (4300 MW), Green Hydrogen Valley Projects (Barmer, Jaisalmer)।

🔹 7.2 Sustainable Development Goals (SDGs) एवं भारत की प्रगति Core

  • SDGs (2015): 17 लक्ष्य, 169 उपलक्ष्य — 2030 तक। NITI Aayog नोडल एजेंसी।
  • SDG India Index (2024): राज्यों की प्रगति मापन।
  • LiFE Movement (2022): Lifestyle for Environment — सतत उपभोग के लिए नागरिक अभियान।
  • Aspirational District Programme: असमानता घटाने हेतु।
  • राजस्थान: Green Budgeting, Climate Smart Villages, Watershed Management with Remote Sensing, Khadin/जोहड़ जल संचयन पुनर्जीवन।
📜 विज्ञान नीति, संस्थान एवं राजस्थान Policy Rajasthan

🔹 8.1 STIP-2020, NRF, भारत @2047 Core

  • Science, Technology & Innovation Policy (STIP-2020): उद्देश्य — "विज्ञान को समाज से जोड़ना, नवाचार को जीवन का अंग बनाना"। प्रमुख: Open Science Framework, Decentralized Research Ecosystem, STI Financing (GDP का 2% अनुसंधान), GATI (Gender Equity), ONOS (One Nation One Subscription)।
  • National Research Foundation (NRF — 2023): उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान वित्तपोषण एवं सहयोग।
  • भारत @2047 Vision: Scientific Sovereignty, Technology-led Growth, Green Innovation, NEP-2020 अनुरूप Research Universities, Digital Bharat, Viksit Bharat Vision Document (NITI Aayog, 2024)।
  • Deep Tech Mission (2024): AI, Quantum, Semiconductors, Cybersecurity, Biotechnology में स्वदेशी क्षमता। National Deep Tech Startup Policy (NDTSP), Semiconductor Mission (2022), Quantum Mission (2023)। Latest

🔹 8.2 राजस्थान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी Rajasthan

  • DST-Rajasthan (1983): Scientific Research, Innovation, Technology Dissemination, Public Awareness।
  • Rajasthan STI Policy (2023): District Innovation Hubs, Rajasthan Research & Innovation Fund (RRIF), Women in Science Programme, Industry-Academia Collaboration, Rajasthan Tech Observatory, Green Technology & E-Mobility। Latest
  • iStart Rajasthan (2017): 7000+ स्टार्टअप्स; Bhamashah Techno Hub (Jaipur) — भारत का सबसे बड़ा co-working & incubation center; ₹25 लाख तक ग्रांट सहायता।
  • Solar & Wind Energy: Rajasthan सौर ऊर्जा में देश प्रथम — Bhadla 2245 MW, Jaisalmer Wind Corridor (4300 MW)।
  • Desert Ecology / CAZRI: मरुस्थलीय कृषि, वनस्पति, मृदा संरक्षण पर अनुसंधान। Desert Development Programme (DDP), Thar Desert Biodiversity Project, Watershed Management using Remote Sensing।
  • Vigyan Pathshala Abhiyan (2022): ग्रामीण स्कूलों में विज्ञान क्लब। Rajasthan Science Talent Search Programme (RSTSP), District Science Centres।
⚖️ जैव-नीति, सामाजिक प्रभाव एवं नैतिकता Core

🔹 9.1 जैव-नीति (Bioethics), AI नैतिकता, विज्ञान-समाज संबंध Core

  • Bioethics: जीवन विज्ञान एवं चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े नैतिक, सामाजिक, विधिक प्रश्न। मुख्य मुद्दे — क्लोनिंग, CRISPR जीन संपादन, स्टेम सेल, GMOs, Bio-Patent, Organ Transplantation। ICMR Guidelines 2023, National Bioethics Committee (NBC) निगरानी करते हैं।
  • AI Ethics: Bias, Privacy, Accountability, Autonomy, Employment Displacement। भारत — Ethical AI Framework (MeitY 2024), Responsible AI for All (RAISE), Digital Personal Data Protection Act, 2023।
  • विज्ञान-समाज संबंध: "Science for Society" दृष्टिकोण — Vigyan Samagam, INSPIRE, Jigyasa, Vigyan Prasar, Vigyan Pathshala Abhiyan, Innovation for Rural Development।
  • Scientific Temper: संविधान अनुच्छेद 51A(h) — वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना कर्तव्य। NCSTC, Vigyan Prasar, National Science Day (28 Feb), Jigyasa Programme, INSPIRE Awards।
📌 नवीनतम सरकारी अपडेट्स (2024-25) Updated

🇮🇳 राष्ट्रीय

  • IndiaAI Mission (2024): ₹10,000 करोड़ AI निवेश
  • Deep Tech Mission (2024): AI, Quantum, Semiconductors
  • National Quantum Mission (2023): Quantum computing/communication
  • Green Hydrogen Mission (2023): 5 MTPA by 2030
  • Digital Personal Data Protection Act, 2023
  • Chandrayaan-3 (2023): South pole soft landing
  • Aditya-L1 (2023): Solar mission
  • NVS-01 (2023): Indigenous atomic clock
  • DRDO 30 kW Laser (2024-25): DEW milestone

🛰️ अंतरिक्ष

  • Gaganyaan: 2025-26 मानव अंतरिक्ष मिशन
  • Bharatiya Space Station: 2035 तक
  • Chandrayaan-4: 2026-27 (Sample return)
  • LUPEX: Japan के साथ (2028)
  • NISAR: NASA-ISRO joint mission
  • Venus Orbiter Mission: 2028

🏜️ राजस्थान

  • STI Policy 2023: District Innovation Hubs
  • iStart 2.0: Startup ecosystem expansion
  • Green Hydrogen Valley: Barmer, Jaisalmer
  • Bhadla Solar Park: 2245 MW (world's largest)
  • R-CAT Jaipur: AI, Data Science, Cybersecurity training
  • Desert Biodiversity Project: Thar conservation
  • Vigyan Pathshala Abhiyan: Rural science clubs
📌 नवीनतम सरकारी एवं तकनीकी अपडेट्स (मई 2026 तक) Latest May 2026

🇮🇳 राष्ट्रीय मिशन, नीतियाँ एवं योजनाएँ 2025-26

  • IndiaAI Mission 2.0 (2025): ₹15,000 करोड़ का नया चरण — स्वदेशी AI चिप डिज़ाइन, GPU विकास, Bhashini 2.0 (भारतीय भाषा AI मॉडल)।
  • National Quantum Mission — Phase II (2025): 50-क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर लक्ष्य; IIT-Madras, IISc, TIFR, C-DAC में 4 नए क्वांटम अनुसंधान केंद्र स्थापित।
  • Deep Tech Mission — Expanded (2025): Semiconductors, AI, Quantum, Cybersecurity, Robotics — कुल ₹25,000 करोड़ आवंटन। Latest
  • National Deep Tech Startup Policy (NDTSP) — 2025: डीप टेक स्टार्टअप्स को पूंजी, नियामक सहायता एवं सरकारी खरीद गारंटी।
  • Semiconductor Mission — First Indigenous Chip (2025): IIT-Madras द्वारा विकसित "Vega-2" चिप का व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ; 28nm तकनीक।
  • National Cyber Security Strategy 2025: 5G/6G सुरक्षा, Quantum-Resistant Cryptography, National Cyber Command की स्थापना।
  • Digital Personal Data Protection Act — Rules Notified (2025): डेटा संरक्षण नियम पूर्णतः लागू; Data Protection Board सक्रिय, नागरिकों को डेटा अधिकार।

🛰️ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Tech) 2025-26

  • Gaganyaan — Uncrewed Mission (G1) सफल (2025): LVM-3 रॉकेट से मानवरहित मिशन सफल; Crew Module, Crew Escape System, Service Module सभी परीक्षण पूर्ण।
  • Gaganyaan — Crewed Mission (H1) (2026): 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 km कक्षा में भेजने की योजना (दिसंबर 2026 तक)। Latest
  • Chandrayaan-4 — Sample Return Mission (2026): चंद्रमा से 2-3 किग्रा चंद्र नमूना वापस लाने का मिशन; PSLV + रेंडेज़वस एवं डॉकिंग तकनीक।
  • NISAR Mission (2025): NASA-ISRO संयुक्त Radar Imaging Satellite; पृथ्वी की सतह, बर्फ, वन, एवं पारिस्थितिकी की निगरानी।
  • Venus Orbiter Mission (VOM) — 2026: शुक्र ग्रह के वायुमंडल, सतह एवं ज्वालामुखीय गतिविधियों का अध्ययन।
  • Bharatiya Space Station — Module-1 (2026): पहला मॉड्यूल 2026 में तैनात; 2035 तक पूर्ण अंतरिक्ष स्टेशन।
  • Space Internet — OneWeb / ISRO (2025): 200+ उपग्रहों के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा प्रारंभ।

🤖 AI, रोबोटिक्स एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ 2025-26

  • AI in Healthcare — National AI Health Platform (2025): ICMR + MeitY संयुक्त प्लेटफॉर्म; 100+ रोगों का AI-आधारित निदान, दवा सुझाव एवं टेलीमेडिसिन।
  • AI in Agriculture — AI-KISAN Portal (2025): 10 करोड़ किसानों को AI-आधारित फसल सलाह, मौसम पूर्वानुमान, बाजार मूल्य, कीट/रोग पहचान।
  • National Robotics Mission (2025): उद्योग, रक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष एवं सेवा क्षेत्रों में रोबोटिक्स के लिए ₹5,000 करोड़ का मिशन।
  • DRDO — AI-Powered Swarm Drones (2025): 1,000+ स्वायत्त ड्रोन एक साथ आक्रमण/निगरानी क्षमता; "Swarm Drone Doctrine" विकसित।
  • 6G — India 6G Vision Document (2025): 2030 तक 6G तैनाती का रोडमैप; 6G Testbed IIT-Kanpur में सक्रिय, terabit-speed लक्ष्य।
  • Quantum Communication — 500 km Link (2026): DRDO-DOT ने 500 km की क्वांटम एन्क्रिप्टेड लिंक स्थापित की — सैन्य एवं सरकारी संचार हेतु।

🛡️ रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Tech) 2025-26

  • DRDO — 100 kW लेजर (DEW) सफल परीक्षण (2026): 100 किलोवाट क्षमता वाले Directed-Energy Weapon का सफल परीक्षण; ड्रोन, मिसाइल, रॉकेट इंटरसेप्ट क्षमता। Latest
  • Hypersonic Missile — HSTDV परीक्षण (2025): 6 Mach (ध्वनि की 6 गुना) गति वाली मिसाइल का सफल परीक्षण; भारत Hypersonic क्लब में शामिल।
  • Mission Shakti-2 (2025): नई पीढ़ी की ASAT (Anti-Satellite) क्षमता — MIRV (एक साथ कई लक्ष्य) + ASAT संयुक्त प्रणाली।
  • Indian Army — AI-Integrated Combat Vehicles (2026): 500+ स्वचालित/अर्ध-स्वचालित युद्ध वाहन तैनात; AI-आधारित लक्ष्य पहचान एवं निर्णय प्रणाली।
  • Vikram-3201 Microprocessor (2025): भारत का पहला स्वदेशी 32-bit स्पेस-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर; ISRO + SCL + DRDO द्वारा विकसित।
  • Positive Indigenisation List — 500+ Items (2025): रक्षा आयात पर प्रतिबंधित वस्तुओं की संख्या 500 से अधिक; L&T, Tata, Adani, BEL स्वदेशी उत्पादन में अग्रणी।

🌿 हरित ऊर्जा, जलवायु एवं पर्यावरण 2025-26

  • Solar Capacity — 100 GW Achieved (2026): Jawaharlal Nehru National Solar Mission (JNNSM) का 100 GW सौर क्षमता लक्ष्य प्राप्त; Bhadla Solar Park विस्तार से 3000 MW।
  • Green Hydrogen — 5 MTPA Target Achieved (2026): National Green Hydrogen Mission का 2030 लक्ष्य 2 वर्ष पूर्व प्राप्त; 75% CO₂ उत्सर्जन में कमी।
  • Green Hydrogen Hubs — 8 सक्रिय (2025): राजस्थान (बाड़मेर, जैसलमेर), गुजरात, तमिलनाडु, उड़ीसा, महाराष्ट्र में स्थापित।
  • LiFE Movement — 10 Crore Citizens (2026): Lifestyle for Environment अभियान से 10 करोड़ नागरिक जुड़े; प्लास्टिक मुक्त भारत, जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता पर जोर।
  • National Plan for Desertification Control (2025): राजस्थान, गुजरात, हरियाणा में 50 लाख हेक्टेयर भूमि पर वनीकरण एवं मृदा संरक्षण।
  • India's Net-Zero Commitment — 2070: NITI Aayog ने "Net-Zero 2070" के लिए राज्य-वार कार्ययोजना जारी की; राजस्थान ने Green Budgeting को अनिवार्य बनाया।

📡 संचार, IoT एवं डिजिटल इंडिया 2025-26

  • BharatNet Phase-III Completion (2025): सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया; 1 Gbps तक ब्रॉडबैंड स्पीड।
  • 5G Coverage — 95% Population (2026): Jio, Airtel, Vi द्वारा देश के 95% क्षेत्र में 5G सेवाएँ उपलब्ध; 5G Use Cases (Health, Agri, Industry)।
  • 6G Testbed — IIT Kanpur (2025): 6G तकनीक पर अनुसंधान एवं परीक्षण हेतु देश का पहला 6G Testbed सक्रिय।
  • Digital India 2.0 (2025): AI-सक्षम सरकारी सेवाएँ, UMANG 2.0, DigiLocker 2.0, सभी नागरिक सेवाएँ डिजिटल एवं AI-संचालित।
  • Space Internet — OneWeb / ISRO (2025): 200+ उपग्रहों से ग्रामीण, दूरदराज, आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट।

🏜️ राजस्थान-विशिष्ट अपडेट्स May 2026

  • iStart Rajasthan 2.0 (2025): 10,000+ स्टार्टअप्स पंजीकृत; ₹500 करोड़ निवेश; 2 नए Techno-Hubs — कोटा एवं उदयपुर में स्थापित।
  • Rajasthan Solar Policy 2025 (अद्यतन): 2030 तक 40,000 MW सौर क्षमता का लक्ष्य; 5 नए सोलर पार्कों की घोषणा (बीकानेर, नागौर, अजमेर, सिरोही, झालावाड़)।
  • ERCP — Phase-I Complete (2026): Eastern Rajasthan Canal Project का प्रथम चरण पूर्ण; 13 जिलों को सिंचाई एवं पेयजल उपलब्ध; राज्य बजट 2026-27 में ₹3,000 करोड़ आवंटन।
  • Green Hydrogen Valley — Barmer (2026): 1 GW क्षमता की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई सक्रिय; रिलायंस एवं NTPC सहयोग।
  • Rajasthan Climate Action Plan — Progress (2025): 40% उत्सर्जन कमी (आधार वर्ष 2015); 25% अतिरिक्त वन आवरण; Climate Smart Villages — 500 गाँव।
  • Desert Biodiversity & Water Conservation: CAZRI + RRSAC द्वारा 10,000 जोहड़/तालाब पुनर्जीवन; थार मरुस्थल में 5 नए बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन जोन।
  • Rajasthan STI Policy 2023 — Implementation (2026): सभी 33 जिलों में District Innovation Hubs सक्रिय; Rajasthan Research & Innovation Fund (RRIF) से 500+ अनुसंधान परियोजनाओं को अनुदान।
📌 परीक्षक टिप: इन नवीनतम अपडेट्स को अपने उत्तरों में "भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता", "Atmanirbhar Bharat", "Viksit Bharat @2047" और "राजस्थान की ग्रीन इकोनॉमी" के संदर्भ में जोड़ें। इससे आपके उत्तर समसामयिक, विश्लेषणात्मक और उच्च अंक-प्राप्ति वाले बनेंगे।