विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी • Mains Paper-II (Unit-II) • उन्नत विस्तृत नोट्स
नैनो प्रौद्योगिकी (Nanotechnology) विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पदार्थों का अध्ययन, हेरफेर और अनुप्रयोग 1 से 100 नैनोमीटर (1 nm = 10⁻⁹ मीटर) के पैमाने पर किया जाता है। इस स्तर पर पदार्थों के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में आमूल-चूल परिवर्तन आ जाता है, जिससे वे अधिक मजबूत, हल्के, प्रतिक्रियाशील या चालक बन जाते हैं।
शब्द-व्युत्पत्ति: "Nano" ग्रीक भाषा के शब्द 'Nanos' से बना है, जिसका अर्थ 'बौना' या 'अत्यंत सूक्ष्म' होता है।
ऐतिहासिक विकास (कालक्रम):
National Nanoscience and Technology Mission (NSTM):
Nano Mission Phase-II (2020-2025):
| आधार | PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) | GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) |
|---|---|---|
| प्रकार | चौथी पीढ़ी, ठोस-द्रव ईंधन | पाँचवीं पीढ़ी, ठोस-द्रव-क्रायोजेनिक |
| भार क्षमता | 1800 किग्रा (LEO में) | 4000 किग्रा (GTO में) |
| प्रारंभ | 1994 (PSLV-D1) | 2001 (GSLV-D1) |
| मुख्य उपयोग | पृथ्वी अवलोकन, रिमोट सेंसिंग, मौसम उपग्रह | संचार, नेविगेशन, भारी उपग्रह |
| इंजन तकनीक | Solid + Liquid (Vikas) | Solid + Liquid + Indigenous Cryogenic (CE-20) |
| प्रमुख उपलब्धि | PSLV-C37 (2017): 104 उपग्रह एक साथ — विश्व रिकॉर्ड | GSLV Mk-III (LVM-3): चंद्रयान-3 प्रक्षेपण |
SSLV (Small Satellite Launch Vehicle): ISRO की नई पीढ़ी का यान, जो निजी कंपनियों एवं स्टार्टअप्स को सस्ती लॉन्चिंग सुविधा देगा। पहला SSLV-D1 (2022) आंशिक रूप से सफल, D2 (2023) पूर्ण रूप से सफल। Latest
कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence — AI) वह तकनीक है जिसमें मशीनों, कंप्यूटरों और प्रणालियों को मनुष्य जैसी सोच, तर्क, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान की जाती है।
ऐतिहासिक विकास (Timeline):
प्रमुख शाखाएँ (Subfields):
रोबोटिक्स (Robotics): विज्ञान की वह शाखा जो स्वचालित मशीनों (रोबोट्स) के डिजाइन, निर्माण, संचालन एवं नियंत्रण से संबंधित है। रोबोट का उद्देश्य मानव-सदृश कार्यों को स्वचालित रूप से करना है।
प्रमुख घटक: Sensors (परिवेश से जानकारी), Actuators (गति एवं बल नियंत्रण), Controller (मस्तिष्क — निर्णय), Power Supply (ऊर्जा), Software (प्रोग्रामिंग)।
प्रकार एवं उपयोग:
भारत में रोबोटिक्स की पहल:
Defence Research and Development Organisation (DRDO): स्थापना 1958 में। मुख्यालय: नई दिल्ली। उद्देश्य — स्वदेशी तकनीक से मिसाइल, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, रक्षा सामग्री का विकास।
प्रमुख प्रयोगशालाएँ:
प्रमुख उपलब्धियाँ:
| मिसाइल | प्रकार | रेंज | विशेषता |
|---|---|---|---|
| Agni-I से Agni-V | ICBM / Ballistic | 700–5000+ km | परमाणु क्षमता, Agni-V में MIRV तकनीक |
| Prithvi-I/II/III | Ballistic | 150–350 km | स्वदेशी टैक्टिकल मिसाइल |
| Akash | Surface-to-Air | 25 km | बहु-लक्ष्य प्रतिरोध क्षमता |
| Nag (HELINA) | Anti-Tank | 4–8 km | Fire & Forget; हेलीकॉप्टर से भी प्रक्षेपण |
| BrahMos (India-Russia) | Supersonic Cruise | 290–500 km | विश्व की तेजतम क्रूज मिसाइल (Mach 2.8–3) |
| Agni-VI (विकासाधीन) | ICBM | 8000+ km | MIRV + अत्याधुनिक मार्गदर्शन |
BrahMos-II (विकासाधीन): Hypersonic (Mach 5+) — भारत-रूस की संयुक्त परियोजना।
साइबर युद्ध (Cyber War): वह प्रक्रिया जिसमें कोई देश दूसरे देश के कंप्यूटर नेटवर्क, सूचना प्रणाली, बैंकिंग, ऊर्जा ग्रिड, रक्षा या प्रशासनिक ढाँचे पर डिजिटल माध्यम से आक्रमण करता है। यह "अदृश्य युद्ध" है, जो सीमाओं के पार बिना हथियार के लड़ा जाता है।
प्रकार (Types):
भारत की साइबर सुरक्षा संस्थाएँ एवं नीतियाँ:
लेजर/DEW: ऊर्जा-आधारित हथियार जो केंद्रित प्रकाश/माइक्रोवेव पल्स से लक्ष्य (ड्रोन, रॉकेट, सेंसर) को नष्ट/निष्क्रिय करते हैं।
प्रकार: High-Energy Laser (HEL), High-Power Microwave (HPM), Chemical/Free-electron लेजर।
लाभ: प्रति-शॉट कम लागत, असीमित फायरिंग (जब तक पावर है), प्रकाश-गति से लक्ष्य भेदन।
सीमाएँ: मौसम (बादल/धुंध) से प्रभावित; उच्च ऊर्जा आवश्यकता; कूलिंग/ताप प्रबंधन चुनौती।
विश्व की प्रमुख प्रणालियाँ: US Navy LaWS (2014), Iron Beam (Israel — 2025 operational), Russia Peresvet, China ZKZM-500।
भारत में DEW:
संचार प्रौद्योगिकी: वह तंत्र जिसके माध्यम से सूचना, डेटा, आवाज, चित्र या वीडियो को इलेक्ट्रॉनिक तरंगों (तार/वायरलेस/सैटेलाइट) के जरिये एक स्थान से दूसरे तक पहुँचाया जाता है।
प्रकार: Wired (Optical Fiber, DSL, LAN), Wireless (GSM, CDMA, Wi-Fi, Bluetooth, 4G/5G), Satellite (INSAT, GSAT, NAVIC), Internet (Broadband, Fiber)।
भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ एवं योजनाएँ:
IoT (Internet of Things): भौतिक वस्तुओं (सेंसर, डिवाइस, वाहन, मशीन, भवन) को इंटरनेट से जोड़कर आपस में डेटा आदान-प्रदान करना। उद्देश्य — स्मार्ट निर्णय, स्वचालन, रीयल-टाइम निगरानी।
कार्यप्रणाली (Workflow):
प्रमुख उपयोग क्षेत्र:
भारत की IoT पहलें: