ISRO (Indian Space Research Organisation) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है। ISRO का उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास करना और इसका उपयोग राष्ट्रीय विकास के लिए करना है।
ISRO के 15+ केंद्र पूरे भारत में फैले हुए हैं। प्रत्येक केंद्र की अपनी विशिष्ट भूमिका है।
📌 क्या काम करता है?
वर्तमान निदेशक: एस. उन्नीकृष्णन नायर (2026 तक)
📌 क्या काम करता है?
वर्तमान निदेशक: एम. शंकरन (2026 तक)
📌 क्या काम करता है?
वर्तमान निदेशक: ए. राजकुमार (2026 तक)
📌 क्या काम करता है?
वर्तमान निदेशक: वी. जी. नारायणन (2026 तक)
📌 क्या काम करता है?
वर्तमान निदेशक: एन. राघवेंद्र (2026 तक)
📌 क्या काम करता है?
वर्तमान निदेशक: डॉ. प. विजयकुमार (2026 तक)
📌 क्या काम करता है?
वर्तमान निदेशक: प्रो. आनंद एन. श्रीनिवास (2026 तक)
📌 क्या काम करता है?
वर्तमान निदेशक: वी. आर. ललितम्बिका (2026 तक)
ISRO के अध्यक्ष (Chairman) ही Space Commission के अध्यक्ष भी होते हैं। अब तक 13 अध्यक्ष हो चुके हैं।
| क्र. | नाम | कार्यकाल | प्रमुख उपलब्धियाँ |
|---|---|---|---|
| 1 | डॉ. विक्रम साराभाई | 1962-1971 | INCOSPAR की स्थापना, ISRO की नींव, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक |
| 2 | प्रो. एम. जी. के. मेनन | 1972-1975 | ISRO का पुनर्गठन, पहला उपग्रह आर्यभट्ट (1975) का निर्माण |
| 3 | डॉ. सतीश धवन | 1975-1979 | SLV-3 विकास, INSAT प्रणाली की नींव |
| 4 | प्रो. एस. धवन (दूसरी बार) | 1979-1980 | SLV-3 का पहला सफल प्रक्षेपण (1980) – Rohini उपग्रह |
| 5 | डॉ. वी. आर. गोवाल | 1980-1984 | SLV-3, INSAT-1A का प्रक्षेपण |
| 6 | डॉ. सतीश धवन (तीसरी बार) | 1984-1985 | INSAT-1B, रिमोट सेंसिंग कार्यक्रम |
| 7 | डॉ. एस. सोमनाथ | 1985-1994 | ASLV, PSLV का विकास, INSAT-2 श्रृंखला |
| 8 | डॉ. के. कस्तूरीरंगन | 1994-2003 | PSLV का सफल प्रक्षेपण (1994), GSLV विकास, IRS उपग्रह श्रृंखला |
| 9 | डॉ. जी. माधवन नायर | 2003-2009 | चंद्रयान-1 (2008), PSLV-C7 (Space Recovery Experiment), INSAT-4 |
| 10 | डॉ. के. राधाकृष्णन | 2009-2014 | चंद्रयान-2 (2019 का आधार), मंगलयान (MOM – 2013), स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (CE-7.5) |
| 11 | डॉ. ए. एस. किरण कुमार | 2014-2018 | PSLV-C37 (104 उपग्रह – विश्व रिकॉर्ड), GSLV Mk-III (LVM-3), GSAT-19, NAVIC |
| 12 | डॉ. के. सिवन | 2018-2022 | चंद्रयान-2 (2019), गगनयान की शुरुआत, SSLV विकास, आदित्य-L1 योजना |
| 13 | डॉ. एस. सोमनाथ | 2022-2025 | चंद्रयान-3 (2023 – सफल), आदित्य-L1 (2023), गगनयान प्रगति, NISAR |
| 14 | वी. नारायणन | 2025-वर्तमान | गगनयान (2026), चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (2035), निजी क्षेत्र विस्तार Latest |
| पैरामीटर | PSLV | GSLV Mk-II | GSLV Mk-III (LVM-3) | SSLV |
|---|---|---|---|---|
| पूरा नाम | Polar Satellite Launch Vehicle | Geosynchronous Satellite Launch Vehicle | Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mk-III | Small Satellite Launch Vehicle |
| पीढ़ी | चौथी पीढ़ी | पाँचवीं पीढ़ी | छठी पीढ़ी | नई पीढ़ी (2022) |
| ईंधन प्रकार | ठोस + तरल (Vikas) | ठोस + तरल (Vikas) + क्रायोजेनिक (स्वदेशी CE-7.5) | ठोस (S200) + तरल (L110) + क्रायोजेनिक (CE-20) | ठोस + तरल (चौथी स्टेज) |
| प्रक्षेपण क्षमता (LEO) | 3,200 kg | 4,000 kg (SSO) | 8,000 kg | 500 kg |
| प्रक्षेपण क्षमता (GTO) | 1,800 kg | 2,500 kg | 4,000 kg | – (GTO नहीं) |
| प्रथम प्रक्षेपण | 20 सितंबर 1994 (PSLV-D1) | 18 अप्रैल 2001 (GSLV-D1) | 5 जून 2017 (GSLV Mk-III D1) | 7 अगस्त 2022 (SSLV-D1) |
| स्टेज (Stages) | 4 स्टेज (PSLV-CA, PSLV-XL) | 3 स्टेज | 3 स्टेज | 4 स्टेज |
| उपयोग | रिमोट सेंसिंग, मौसम, नेविगेशन, ध्रुवीय कक्षा | संचार, नेविगेशन (GTO) | भारी उपग्रह, चंद्र/सौर मिशन, गगनयान | छोटे उपग्रह, निजी क्षेत्र |
| प्रमुख उपलब्धि | PSLV-C37 – 104 उपग्रह (विश्व रिकॉर्ड) | स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (CE-7.5) | चंद्रयान-3, गगनयान, LVM-3 | SSLV-D2 (2023) – पूर्ण सफल |
| लागत (अनुमान) | ~₹200 करोड़ | ~₹300 करोड़ | ~₹400 करोड़ | ~₹100 करोड़ |
| विशेषता | सबसे भरोसेमंद (99% सफलता) | भारत का पहला क्रायोजेनिक यान | सबसे शक्तिशाली – "बाहुबली" | सबसे सस्ता, तेज़ी से लॉन्च |
ISRO की यात्रा बिना असफलताओं की नहीं रही। इन असफलताओं से ISRO ने सीखा और आगे बढ़ा।
| क्र. | मिशन/प्रक्षेपण | तिथि | कारण | सीख / परिणाम |
|---|---|---|---|---|
| 1 | SLV-3 (पहला प्रयास) | 1979 | तीसरे स्टेज में तकनीकी खराबी | ISRO ने नया रॉकेट डिज़ाइन किया – 1980 में सफल |
| 2 | ASLV (पहला प्रयास) | 1987 | पहले स्टेज में विस्फोट | सुरक्षा प्रणाली बेहतर की – ASLV 1992 में सफल |
| 3 | PSLV-D1 (पहला PSLV) | 1993 | नियंत्रण प्रणाली में त्रुटि | PSLV-D2 (1994) में सफल – PSLV विश्व का भरोसेमंद रॉकेट बना |
| 4 | GSLV-D1 (पहला GSLV) | 2001 | क्रायोजेनिक इंजन की खराबी (रूसी) | ISRO ने स्वदेशी क्रायोजेनिक पर काम तेज किया – CE-7.5 (2008) |
| 5 | GSLV-F02 (INSAT-4C) | 2006 | तरल इंजन में रिसाव | इंजन विश्वसनीयता में सुधार |
| 6 | GSLV-F04 (INSAT-4CR) | 2007 | क्रायोजेनिक इंजन में समस्या – उपग्रह निचली कक्षा में | उपग्रह का अपने ईंधन से कक्षा बदलना – आंशिक सफलता |
| 7 | GSLV-D3 (स्वदेशी क्रायोजेनिक) | 2010 | स्वदेशी CE-7.5 क्रायोजेनिक इंजन में विफलता | ISRO ने इंजन को फिर से डिज़ाइन किया – 2014 में CE-7.5 सफल |
| 8 | GSLV-F10 (EOS-03) | 2021 | क्रायोजेनिक स्टेज में दबाव की समस्या | CE-20 (GSLV Mk-III) पर ध्यान केंद्रित |
| 9 | SSLV-D1 (पहला SSLV) | 2022 | अंतिम स्टेज में इनर्शियल नेविगेशन सेंसर की विफलता | SSLV-D2 (2023) पूर्ण सफल – सिस्टम में सुधार |
| 10 | चंद्रयान-2 (विक्रम लैंडर) | 2019 | लैंडिंग के अंतिम 2.1 किमी में नियंत्रण खोना | चंद्रयान-3 में 5,000+ सुधार – 2023 में सफल लैंडिंग |
| वर्ष | ISRO बजट (₹ करोड़) | प्रमुख मद |
|---|---|---|
| 2020-21 | 13,479 | PSLV, GSLV, चंद्रयान-2 |
| 2021-22 | 14,862 | गगनयान, आदित्य-L1 |
| 2022-23 | 15,700 | गगनयान, चंद्रयान-3 |
| 2023-24 | 16,500 | चंद्रयान-3, आदित्य-L1, गगनयान |
| 2024-25 | 18,500 | गगनयान, चंद्रयान-4, अंतरिक्ष स्टेशन |
| 2025-26 | 21,000 | गगनयान, चंद्रयान-4, NISAR, शुक्र मिशन Latest |