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#ISRO2026

इसरो (ISRO) विशेषज्ञ नोट्स एवं संदर्भ पुस्तिका – 2026

INDIAN SPACE RESEARCH ORGANISATION • CENTRES • ROCKETS • MISSIONS
2026
📘 केंद्र · चेयरमैन · रॉकेट · मिशन · निजी क्षेत्र · नीतियाँ

1. ISRO क्या है? – भारत का अंतरिक्ष संगठन

ISRO (Indian Space Research Organisation) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है। ISRO का उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास करना और इसका उपयोग राष्ट्रीय विकास के लिए करना है।

1962
INCOSPAR (Indian National Committee for Space Research) की स्थापना – डॉ. विक्रम साराभाई की अगुवाई में।
1969
ISRO का गठन – INCOSPAR का पुनर्गठन।
1972
Space Commission और Department of Space (DoS) की स्थापना – ISRO DoS के अधीन आया।
📌 ISRO का आदर्श वाक्य: "अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का राष्ट्रीय विकास के लिए उपयोग"
मुख्यालय: बेंगलुरु, कर्नाटक
अध्यक्ष: वी. नारायणन (V. Narayanan) – 2026 तक Latest

2. ISRO के सभी केंद्र (Centres) – पूर्ण जानकारी

ISRO के 15+ केंद्र पूरे भारत में फैले हुए हैं। प्रत्येक केंद्र की अपनी विशिष्ट भूमिका है।

🔹 VSSC – Vikram Sarabhai Space Centre

पूरा नाम: विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र • स्थान: तिरुवनंतपुरम, केरल • स्थापना: 1962 (जब INCOSPAR था)

📌 क्या काम करता है?

  • रॉकेट और प्रक्षेपण यानों का डिज़ाइन एवं विकास (PSLV, GSLV, SSLV, LVM-3)
  • प्रणोदन प्रणाली (Propulsion Systems) – ठोस, तरल एवं क्रायोजेनिक इंजन
  • वायुगतिकी (Aerodynamics), संरचना एवं सामग्री अनुसंधान
  • प्रक्षेपण यानों का एकीकरण (Integration) एवं परीक्षण

वर्तमान निदेशक: एस. उन्नीकृष्णन नायर (2026 तक)

💡 विद्यार्थी के लिए: VSSC ISRO का "हृदय" है – यहाँ रॉकेट बनते हैं। यदि रॉकेट का इंजन बनाना है, तो यह VSSC का काम है।

🔹 URSC – U. R. Rao Satellite Centre

पूरा नाम: यू. आर. राव उपग्रह केंद्र • स्थान: बेंगलुरु, कर्नाटक • स्थापना: 1972 (पहले ISAC के रूप में)

📌 क्या काम करता है?

  • सभी प्रकार के उपग्रहों (Satellites) का निर्माण एवं डिज़ाइन
  • संचार, रिमोट सेंसिंग, नेविगेशन, वैज्ञानिक उपग्रह
  • उपग्रह एकीकरण, परीक्षण एवं अंतरिक्ष यान उप-प्रणालियाँ

वर्तमान निदेशक: एम. शंकरन (2026 तक)

💡 विद्यार्थी के लिए: URSC ISRO का "मस्तिष्क" है – यहाँ उपग्रह बनते हैं। चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-L1 सभी के उपग्रह यहाँ बने हैं।

🔹 SDSC – Satish Dhawan Space Centre

पूरा नाम: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र • स्थान: श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश • स्थापना: 1971 (SHAR के रूप में)

📌 क्या काम करता है?

  • ISRO का मुख्य प्रक्षेपण स्थल (Launch Pad) – PSLV, GSLV, SSLV, LVM-3 सभी यहाँ से लॉन्च होते हैं
  • प्रक्षेपण से पहले रॉकेट का एकीकरण (Assembly) एवं परीक्षण
  • उड़ान सुरक्षा एवं रेंज संचालन (Range Operations)

वर्तमान निदेशक: ए. राजकुमार (2026 तक)

💡 विद्यार्थी के लिए: SDSC ISRO का "प्रक्षेपण मंच" है – रॉकेट यहाँ से उड़ान भरते हैं। इसे "स्पेसपोर्ट" भी कहा जाता है।

🔹 LPSC – Liquid Propulsion Systems Centre

पूरा नाम: तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र • स्थान: तिरुवनंतपुरम, केरल (मुख्य) • स्थापना: 1987

📌 क्या काम करता है?

  • तरल एवं क्रायोजेनिक इंजनों का विकास (Vikas Engine, CE-20 Cryogenic)
  • प्रणोदन प्रणालियों का परीक्षण – IPRC (Mahendragiri) में परीक्षण सुविधाएँ
  • ईंधन प्रणाली (Fuel Systems) – पृथक्करण, नियंत्रण

वर्तमान निदेशक: वी. जी. नारायणन (2026 तक)

💡 विद्यार्थी के लिए: LPSC ISRO का "इंजन कारखाना" है – यहाँ रॉकेट के लिए इंजन और ईंधन प्रणाली बनती है। CE-20 (स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन) यहीं बना है।

🔹 ISTRAC – ISRO Telemetry, Tracking and Command Network

पूरा नाम: इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एवं कमांड नेटवर्क • स्थान: बेंगलुरु, कर्नाटक • स्थापना: 1976

📌 क्या काम करता है?

  • उपग्रहों/अंतरिक्ष यानों का ट्रैकिंग (Tracking) एवं संचार
  • उड़ान के दौरान टेलीमेट्री डेटा (स्थिति, तापमान, गति) का संग्रहण
  • कमांड (Command) भेजना – उपग्रह को निर्देश देना
  • विश्व भर में फैले ग्राउंड स्टेशनों (Ground Stations) का संचालन

वर्तमान निदेशक: एन. राघवेंद्र (2026 तक)

💡 विद्यार्थी के लिए: ISTRAC ISRO का "कान" है – यह अंतरिक्ष यानों को सुनता है और उनसे बात करता है। "मिशन कंट्रोल" यहीं होता है।

🔹 NRSC – National Remote Sensing Centre

पूरा नाम: राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र • स्थान: हैदराबाद, तेलंगाना • स्थापना: 1974

📌 क्या काम करता है?

  • रिमोट सेंसिंग डेटा का प्रसंस्करण (Processing) एवं वितरण
  • उपग्रह चित्रों का विश्लेषण – कृषि, जल, वन, खनिज, आपदा प्रबंधन
  • Bhuvan पोर्टल का संचालन – सार्वजनिक डेटा प्लेटफॉर्म

वर्तमान निदेशक: डॉ. प. विजयकुमार (2026 तक)

💡 विद्यार्थी के लिए: NRSC ISRO का "आँख" है – यह अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों को समझता है। यदि आप कृषि, मौसम, आपदा का अध्ययन करते हैं तो यहाँ का डेटा उपयोगी है।

🔹 PRL – Physical Research Laboratory

पूरा नाम: भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला • स्थान: अहमदाबाद, गुजरात • स्थापना: 1947 (ISRO से पहले)

📌 क्या काम करता है?

  • अंतरिक्ष विज्ञान एवं खगोल भौतिकी (Astrophysics) अनुसंधान
  • सौर प्रणाली, ब्रह्मांडीय विकिरण, उल्का पिंडों का अध्ययन
  • ISRO मिशनों के लिए वैज्ञानिक पेलोड (जैसे आदित्य-L1 के लिए SUIT, ASPEX)

वर्तमान निदेशक: प्रो. आनंद एन. श्रीनिवास (2026 तक)

💡 विद्यार्थी के लिए: PRL ISRO का "शोध प्रयोगशाला" है – यहाँ अंतरिक्ष विज्ञान के गहरे सवालों का अध्ययन होता है।

🔹 HSFC – Human Space Flight Centre

पूरा नाम: मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र • स्थान: बेंगलुरु, कर्नाटक • स्थापना: 2019

📌 क्या काम करता है?

  • गगनयान (Gaganyaan) मिशन का नेतृत्व – भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन
  • Crew Module, Service Module, Crew Escape System का विकास
  • अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण एवं जीवन-रक्षक प्रणालियाँ

वर्तमान निदेशक: वी. आर. ललितम्बिका (2026 तक)

💡 विद्यार्थी के लिए: HSFC ISRO का "नया केंद्र" है – यह मानव को अंतरिक्ष में भेजने का काम करता है। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का अगला बड़ा कदम है।

🔹 ISRO के अन्य महत्वपूर्ण केंद्र

  • DECU (Development and Educational Communication Unit): अहमदाबाद – शैक्षिक एवं विकासात्मक संचार, EDUSAT, GSAT
  • IPRC (ISRO Propulsion Complex): महेंद्रगिरि, तमिलनाडु – प्रणोदन इंजनों का परीक्षण
  • MCF (Master Control Facility): हसन (कर्नाटक) – GEO उपग्रहों का नियंत्रण
  • NAVIS (Navigation Centre): बेंगलुरु – NAVIC प्रणाली का संचालन
  • RRSC (Regional Remote Sensing Centres): 5 केंद्र – जोधपुर, नई दिल्ली, कोलकाता, नागपुर, बेंगलुरु
📌 सारांश: ISRO के 15+ केंद्र मिलकर एक पूरा इकोसिस्टम बनाते हैं – रॉकेट बनाना (VSSC, LPSC) → उपग्रह बनाना (URSC) → प्रक्षेपण (SDSC) → ट्रैकिंग एवं नियंत्रण (ISTRAC) → डेटा विश्लेषण (NRSC, PRL) → मानव मिशन (HSFC)

3. ISRO के अध्यक्ष (Chairmen) – पूरी सूची एवं उपलब्धियाँ

ISRO के अध्यक्ष (Chairman) ही Space Commission के अध्यक्ष भी होते हैं। अब तक 13 अध्यक्ष हो चुके हैं।

क्र.नामकार्यकालप्रमुख उपलब्धियाँ
1 डॉ. विक्रम साराभाई 1962-1971 INCOSPAR की स्थापना, ISRO की नींव, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक
2 प्रो. एम. जी. के. मेनन 1972-1975 ISRO का पुनर्गठन, पहला उपग्रह आर्यभट्ट (1975) का निर्माण
3 डॉ. सतीश धवन 1975-1979 SLV-3 विकास, INSAT प्रणाली की नींव
4 प्रो. एस. धवन (दूसरी बार) 1979-1980 SLV-3 का पहला सफल प्रक्षेपण (1980) – Rohini उपग्रह
5 डॉ. वी. आर. गोवाल 1980-1984 SLV-3, INSAT-1A का प्रक्षेपण
6 डॉ. सतीश धवन (तीसरी बार) 1984-1985 INSAT-1B, रिमोट सेंसिंग कार्यक्रम
7 डॉ. एस. सोमनाथ 1985-1994 ASLV, PSLV का विकास, INSAT-2 श्रृंखला
8 डॉ. के. कस्तूरीरंगन 1994-2003 PSLV का सफल प्रक्षेपण (1994), GSLV विकास, IRS उपग्रह श्रृंखला
9 डॉ. जी. माधवन नायर 2003-2009 चंद्रयान-1 (2008), PSLV-C7 (Space Recovery Experiment), INSAT-4
10 डॉ. के. राधाकृष्णन 2009-2014 चंद्रयान-2 (2019 का आधार), मंगलयान (MOM – 2013), स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (CE-7.5)
11 डॉ. ए. एस. किरण कुमार 2014-2018 PSLV-C37 (104 उपग्रह – विश्व रिकॉर्ड), GSLV Mk-III (LVM-3), GSAT-19, NAVIC
12 डॉ. के. सिवन 2018-2022 चंद्रयान-2 (2019), गगनयान की शुरुआत, SSLV विकास, आदित्य-L1 योजना
13 डॉ. एस. सोमनाथ 2022-2025 चंद्रयान-3 (2023 – सफल), आदित्य-L1 (2023), गगनयान प्रगति, NISAR
14 वी. नारायणन 2025-वर्तमान गगनयान (2026), चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (2035), निजी क्षेत्र विस्तार Latest
📌 महत्वपूर्ण: ISRO के अध्यक्षों को "अंतरिक्ष कार्यक्रम के स्तंभ" कहा जाता है। प्रत्येक अध्यक्ष ने एक नई ऊँचाई दी है – साराभाई (नींव) → सोमनाथ (PSLV) → नायर (चंद्रयान-1) → राधाकृष्णन (मंगलयान) → सिवन/सोमनाथ (चंद्रयान-3, आदित्य) → नारायणन (गगनयान)।

4. प्रक्षेपण यान (Rockets) – PSLV, GSLV, SSLV का पूर्ण तुलनात्मक विश्लेषण

पैरामीटर PSLV GSLV Mk-II GSLV Mk-III (LVM-3) SSLV
पूरा नाम Polar Satellite Launch Vehicle Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mk-III Small Satellite Launch Vehicle
पीढ़ी चौथी पीढ़ी पाँचवीं पीढ़ी छठी पीढ़ी नई पीढ़ी (2022)
ईंधन प्रकार ठोस + तरल (Vikas) ठोस + तरल (Vikas) + क्रायोजेनिक (स्वदेशी CE-7.5) ठोस (S200) + तरल (L110) + क्रायोजेनिक (CE-20) ठोस + तरल (चौथी स्टेज)
प्रक्षेपण क्षमता (LEO) 3,200 kg 4,000 kg (SSO) 8,000 kg 500 kg
प्रक्षेपण क्षमता (GTO) 1,800 kg 2,500 kg 4,000 kg – (GTO नहीं)
प्रथम प्रक्षेपण 20 सितंबर 1994 (PSLV-D1) 18 अप्रैल 2001 (GSLV-D1) 5 जून 2017 (GSLV Mk-III D1) 7 अगस्त 2022 (SSLV-D1)
स्टेज (Stages) 4 स्टेज (PSLV-CA, PSLV-XL) 3 स्टेज 3 स्टेज 4 स्टेज
उपयोग रिमोट सेंसिंग, मौसम, नेविगेशन, ध्रुवीय कक्षा संचार, नेविगेशन (GTO) भारी उपग्रह, चंद्र/सौर मिशन, गगनयान छोटे उपग्रह, निजी क्षेत्र
प्रमुख उपलब्धि PSLV-C37 – 104 उपग्रह (विश्व रिकॉर्ड) स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन (CE-7.5) चंद्रयान-3, गगनयान, LVM-3 SSLV-D2 (2023) – पूर्ण सफल
लागत (अनुमान) ~₹200 करोड़ ~₹300 करोड़ ~₹400 करोड़ ~₹100 करोड़
विशेषता सबसे भरोसेमंद (99% सफलता) भारत का पहला क्रायोजेनिक यान सबसे शक्तिशाली – "बाहुबली" सबसे सस्ता, तेज़ी से लॉन्च
📌 सरल शब्दों में समझें:
  • PSLV – "सबसे भरोसेमंद रॉकेट" – अधिकांश मिशनों का काम इसी से होता है।
  • GSLV Mk-II – "पहला स्वदेशी क्रायोजेनिक" – संचार उपग्रहों के लिए।
  • GSLV Mk-III (LVM-3) – "बाहुबली" – सबसे भारी उपग्रह और चंद्र/सौर मिशनों के लिए।
  • SSLV – "नया सस्ता रॉकेट" – निजी कंपनियों और छोटे उपग्रहों के लिए।

क्रायोजेनिक इंजन – क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?

  • क्रायोजेनिक इंजन वह इंजन है जो तरल हाइड्रोजन (LH2) और तरल ऑक्सीजन (LOX) को -253°C पर रखकर जलाता है।
  • महत्व: यह GSLV को अधिक भार उठाने की क्षमता देता है।
  • ISRO का CE-20: स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन – GSLV Mk-III (LVM-3) में लगा है।
  • CE-7.5: GSLV Mk-II में लगा है – 2001 में पहली बार उपयोग किया गया (स्वदेशी नहीं, रूस से मदद ली गई)।
💡 विद्यार्थी के लिए: क्रायोजेनिक इंजन को "अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का 'क्वीन'" कहा जाता है। इसे बनाना सबसे कठिन है। ISRO ने 2014 में स्वदेशी CE-20 से GSLV Mk-III का सफल परीक्षण किया – यह एक बड़ी उपलब्धि थी।

5. ISRO के प्रमुख मिशन एवं उपलब्धियाँ

🔹 आर्यभट्ट (1975)
भारत का पहला उपग्रह
सोवियत रॉकेट से प्रक्षेपित
X-ray खगोल विज्ञान के लिए
🔹 SLV-3 (1980)
भारत का पहला स्वदेशी रॉकेट
Rohini उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में
ISRO का आत्मविश्वास बढ़ा
🔹 INSAT प्रणाली (1983-वर्तमान)
संचार, मौसम, प्रसारण उपग्रह
25+ उपग्रह
आपदा चेतावनी में उपयोग
🔹 PSLV (1994-वर्तमान)
100+ सफल मिशन
104 उपग्रह (2017) – विश्व रिकॉर्ड
अब तक 400+ विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित
🔹 चंद्रयान-1 (2008)
भारत का पहला चंद्र मिशन
चंद्रमा पर जल (H₂O) की खोज
वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध
🔹 मंगलयान (MOM – 2013)
एशिया का पहला मंगल मिशन
पहले ही प्रयास में सफल
सबसे कम लागत वाला मंगल मिशन ($74M)
🔹 NAVIC (2016-वर्तमान)
भारत की स्वदेशी GPS प्रणाली
8 उपग्रह
±10 मीटर सटीकता
🔹 PSLV-C37 (2017)
104 उपग्रह एक साथ
विश्व रिकॉर्ड
96 विदेशी + 8 भारतीय
🔹 मिशन शक्ति (2019)
Anti-Satellite (ASAT) परीक्षण
भारत चौथा देश बना
सैन्य क्षमता प्रदर्शन
🔹 चंद्रयान-3 (2023)
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग
विश्व का पहला देश
रोवर (Pragyan) ने सतह पर चलकर डेटा भेजा Latest
🔹 आदित्य-L1 (2023)
भारत का पहला सौर मिशन
L1 बिंदु पर स्थापित
सौर Corona, Solar Wind का अध्ययन Latest
🔹 Gaganyaan (2026)
भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन
3 अंतरिक्ष यात्री, 400 km कक्षा
5-7 दिन का मिशन Latest
🇮🇳 ISRO की कुल उपलब्धियाँ (2026 तक):
  • 100+ उपग्रह प्रक्षेपण (भारतीय)
  • 400+ विदेशी उपग्रहों का व्यावसायिक प्रक्षेपण
  • PSLV की 99% सफलता दर
  • चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला विश्व का पहला देश
  • मंगल कक्षा में पहुँचने वाला एशिया का पहला देश
  • स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन CE-20

6. ISRO की असफलताएँ (Failures) – जीत के पीछे का सबक

ISRO की यात्रा बिना असफलताओं की नहीं रही। इन असफलताओं से ISRO ने सीखा और आगे बढ़ा।

क्र.मिशन/प्रक्षेपणतिथिकारणसीख / परिणाम
1 SLV-3 (पहला प्रयास) 1979 तीसरे स्टेज में तकनीकी खराबी ISRO ने नया रॉकेट डिज़ाइन किया – 1980 में सफल
2 ASLV (पहला प्रयास) 1987 पहले स्टेज में विस्फोट सुरक्षा प्रणाली बेहतर की – ASLV 1992 में सफल
3 PSLV-D1 (पहला PSLV) 1993 नियंत्रण प्रणाली में त्रुटि PSLV-D2 (1994) में सफल – PSLV विश्व का भरोसेमंद रॉकेट बना
4 GSLV-D1 (पहला GSLV) 2001 क्रायोजेनिक इंजन की खराबी (रूसी) ISRO ने स्वदेशी क्रायोजेनिक पर काम तेज किया – CE-7.5 (2008)
5 GSLV-F02 (INSAT-4C) 2006 तरल इंजन में रिसाव इंजन विश्वसनीयता में सुधार
6 GSLV-F04 (INSAT-4CR) 2007 क्रायोजेनिक इंजन में समस्या – उपग्रह निचली कक्षा में उपग्रह का अपने ईंधन से कक्षा बदलना – आंशिक सफलता
7 GSLV-D3 (स्वदेशी क्रायोजेनिक) 2010 स्वदेशी CE-7.5 क्रायोजेनिक इंजन में विफलता ISRO ने इंजन को फिर से डिज़ाइन किया – 2014 में CE-7.5 सफल
8 GSLV-F10 (EOS-03) 2021 क्रायोजेनिक स्टेज में दबाव की समस्या CE-20 (GSLV Mk-III) पर ध्यान केंद्रित
9 SSLV-D1 (पहला SSLV) 2022 अंतिम स्टेज में इनर्शियल नेविगेशन सेंसर की विफलता SSLV-D2 (2023) पूर्ण सफल – सिस्टम में सुधार
10 चंद्रयान-2 (विक्रम लैंडर) 2019 लैंडिंग के अंतिम 2.1 किमी में नियंत्रण खोना चंद्रयान-3 में 5,000+ सुधार – 2023 में सफल लैंडिंग
📌 महत्वपूर्ण सबक: ISRO ने अपनी असफलताओं से सीखा – "असफलता अंत नहीं, सीखने का अवसर है।" चंद्रयान-2 की असफलता के 4 वर्षों बाद चंद्रयान-3 ने सफलता हासिल की – यह ISRO की दृढ़ता का प्रमाण है।

7. अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र एवं स्टार्टअप्स

IN-SPACE – भारत की अंतरिक्ष नियामक एजेंसी

  • IN-SPACE (Indian National Space Promotion and Authorization Centre): 2020 में स्थापित – निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु।
  • कार्य: निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए अनुमति देना, सहयोग को बढ़ावा देना।

प्रमुख भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स

🚀 Skyroot Aerospace
स्थापना: 2018, हैदराबाद
पहला निजी रॉकेट – "Vikram-S" (2022) – ISRO के SDSC से प्रक्षेपित
अगला मिशन: Vikram-I (2026)
🛰️ Pixxel
स्थापना: 2019, बेंगलुरु
अंतरिक्ष-आधारित पर्यावरण निगरानी
उपग्रह: "Shakuntala", "Anand" – हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग
🛰️ Dhruva Space
स्थापना: 2012, हैदराबाद
उपग्रह घटकों का निर्माण
उपग्रह: "Thybolt-1" (2022) – ISRO के PSLV से प्रक्षेपित
🛰️ Digantara
स्थापना: 2019, बेंगलुरु
अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता (Space Situational Awareness)
निगरानी प्रणाली – SCOT (Space-based Observational Telescope)
🚀 Agnikul Cosmos
स्थापना: 2017, चेन्नई
स्वदेशी रॉकेट इंजन "Agnilet" – 2023 में सफल परीक्षण
पहला प्रक्षेपण: 2026 (लक्षित)
🛰️ Bellatrix Aerospace
स्थापना: 2015, बेंगलुरु
प्रणोदन प्रणाली – हॉल एफेक्ट थ्रस्टर
अंतरिक्ष यान के लिए हरित प्रणोदक
🛰️ SatSure
स्थापना: 2017, बेंगलुरु
कृषि, जल, वन के लिए उपग्रह डेटा विश्लेषण
AI + Satellite डेटा – फसल उपज पूर्वानुमान
🛰️ Azista Aerospace
स्थान: हैदराबाद
निगरानी एवं सुरक्षा उपग्रह
रक्षा क्षेत्र के लिए समाधान
📌 निजी क्षेत्र का योगदान:
  • स्टार्टअप्स अब रॉकेट इंजन, उपग्रह निर्माण, डेटा विश्लेषण में सक्रिय हैं।
  • ISRO अब ग्राहक की भूमिका में भी है – स्टार्टअप्स से सेवाएँ खरीदता है।
  • स्टार्टअप्स लागत कम और गति तेज़ करते हैं – अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
  • 2030 तक भारत का अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था $100 बिलियन तक पहुँचने का लक्ष्य – जिसमें निजी क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी होगी।

8. भारत सरकार की अंतरिक्ष नीतियाँ एवं फंडिंग

प्रमुख नीतियाँ (Policies)

  • Space Activities Bill (प्रस्तावित): निजी क्षेत्र के लिए कानूनी ढाँचा – अनुमति, दायित्व, सुरक्षा।
  • IN-SPACE (2020): निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्र नियामक निकाय।
  • NSIL (NewSpace India Limited): ISRO की व्यावसायिक शाखा – विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण, व्यावसायिक सेवाएँ।
  • भारतीय अंतरिक्ष मिशन (2022): गगनयान, चंद्रयान-4, अंतरिक्ष स्टेशन के लिए दीर्घकालिक योजना।
  • राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति (2023): अंतरिक्ष क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा।

फंडिंग (Funding)

वर्षISRO बजट (₹ करोड़)प्रमुख मद
2020-2113,479PSLV, GSLV, चंद्रयान-2
2021-2214,862गगनयान, आदित्य-L1
2022-2315,700गगनयान, चंद्रयान-3
2023-2416,500चंद्रयान-3, आदित्य-L1, गगनयान
2024-2518,500गगनयान, चंद्रयान-4, अंतरिक्ष स्टेशन
2025-2621,000गगनयान, चंद्रयान-4, NISAR, शुक्र मिशन Latest

NSIL (NewSpace India Limited)

  • स्थापना: 2019 – ISRO की व्यावसायिक शाखा।
  • कार्य: विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण, अंतरिक्ष-आधारित सेवाएँ, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।
  • उपलब्धि: 2025 तक 50+ विदेशी उपग्रहों का व्यावसायिक प्रक्षेपण।
📌 सरकारी समर्थन:
  • ISRO को वित्तीय स्वायत्तता – बजट में लगातार वृद्धि।
  • निजी कंपनियों को अनुदान एवं प्रौद्योगिकी साझाकरण
  • अंतरिक्ष क्षेत्र को प्राथमिकता – "Atmanirbhar Bharat" एवं "Make in India" का हिस्सा।

9. ISRO तकनीकी शब्दावली (ग्लोसरी)

ISRO – Indian Space Research Organisation
PSLV – Polar Satellite Launch Vehicle
GSLV – Geosynchronous Satellite Launch Vehicle
SSLV – Small Satellite Launch Vehicle
LVM-3 – Launch Vehicle Mark-3 (GSLV Mk-III)
LEO – Low Earth Orbit (200-2000 km)
GTO – Geostationary Transfer Orbit
GEO – Geostationary Earth Orbit (35,786 km)
NAVIC – Navigation with Indian Constellation
ASAT – Anti-Satellite Weapon
Cryogenic Engine – Liquid Hydrogen (LH2) + Liquid Oxygen (LOX) at -253°C
CE-20 – Indigenous Cryogenic Engine (GSLV Mk-III)
Vikas Engine – ISRO's Liquid Engine (PSLV, GSLV)
IN-SPACE – Indian National Space Promotion and Authorization Centre
NSIL – NewSpace India Limited (Commercial arm of ISRO)
HSFC – Human Space Flight Centre (Gaganyaan)
RAS A2Z • EXPERT SERIES