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#Biotech2026

जैव प्रौद्योगिकी पूर्ण ज्ञान एवं संदर्भ पुस्तिका – 2026

BIOTECHNOLOGY • GENETICS • CRISPR • INDIA 2026
2026
📘 इतिहास · कार्यप्रणाली · जीन संपादन · भारत · राजस्थान

1. जैव प्रौद्योगिकी क्या है? – मूल अवधारणा

जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) विज्ञान की वह शाखा है जो जीवों, जीवित कोशिकाओं, एंजाइमों और जैविक प्रणालियों का उपयोग करके उत्पाद, प्रक्रियाएँ और सेवाएँ विकसित करती है। यह जीव विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण है।

मूल सिद्धांत: जैव प्रौद्योगिकी DNA, RNA, प्रोटीन, एंजाइम, कोशिकाएँ – इन जैविक अणुओं और संरचनाओं का उपयोग करके नए उत्पाद या प्रक्रियाएँ बनाती है।

📌 महत्व: जैव प्रौद्योगिकी चिकित्सा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण, ऊर्जा, उद्योग – हर क्षेत्र में क्रांति ला रही है। इसे "21वीं सदी की प्रौद्योगिकी" कहा जाता है।

2. जैव प्रौद्योगिकी का इतिहास – पूरी यात्रा

~5000 BC
प्राचीन काल: दही, पनीर, रोटी, बीयर जैसे किण्वित (Fermented) खाद्य पदार्थ – यह जैव प्रौद्योगिकी का सबसे पुराना रूप था।
1859
चार्ल्स डार्विन: "Origin of Species" – विकासवाद का सिद्धांत – आनुवंशिकी की नींव।
1865
ग्रेगोर मेंडल: आनुवंशिकता के नियम (Mendelian Genetics) – आधुनिक आनुवंशिकी का जन्म।
1953
जेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक: DNA के दोहरे हेलिक्स (Double Helix) संरचना की खोज – आणविक जीव विज्ञान की शुरुआत।
1973
पहला आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (GMO): कोहेन और बॉयर ने बैक्टीरिया में DNA का पुनर्संयोजन किया – आनुवंशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering) की शुरुआत।
1983
पहला GMO पौधा: ट्रांसजेनिक (Transgenic) पौधे का निर्माण – एंटीबायोटिक प्रतिरोधी तम्बाकू।
1996
डॉली द भेड़ (Dolly the Sheep): पहला स्तनपायी जो क्लोनिंग (Cloning) द्वारा बनाया गया – जैव प्रौद्योगिकी का ऐतिहासिक क्षण।
2000
मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project): मानव DNA का पूरा अनुक्रम (Sequence) – जैव प्रौद्योगिकी का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट।
2012
CRISPR-Cas9: जीन संपादन (Gene Editing) तकनीक – जैव प्रौद्योगिकी में एक क्रांति। (2020 में नोबेल पुरस्कार)
2020-2026
mRNA वैक्सीन, जीन थेरेपी, AI + बायोटेक: COVID-19 के लिए mRNA वैक्सीन (Pfizer, Moderna); भारत में स्वदेशी जीन थेरेपी; AI-संचालित दवा खोज (Chai Discovery, AlphaFold)। Latest
📌 महत्वपूर्ण: जैव प्रौद्योगिकी का इतिहास प्राचीन किण्वन → मेंडल → DNA → GMO → CRISPR तक पहुँच चुका है। यह विज्ञान की सबसे तेज़ी से विकसित होने वाली शाखाओं में से एक है।

3. जैव प्रौद्योगिकी के प्रकार (Types of Biotechnology)

जैव प्रौद्योगिकी को उसके अनुप्रयोग के आधार पर रंगों (Colors) के माध्यम से वर्गीकृत किया जाता है:

🔴 रेड बायोटेक्नोलॉजी (Red Biotechnology) – चिकित्सा

Medical / Healthcare Biotechnology
  • अनुप्रयोग: दवाएँ, वैक्सीन, जीन थेरेपी, स्टेम सेल, कैंसर अनुसंधान, एंटीबायोटिक्स
  • उदाहरण: COVID-19 वैक्सीन, इंसुलिन, कैंसर की इम्यूनोथेरेपी
  • प्रमुख संस्थान: ICMR, DBT, NIBMG, सीरम इंस्टीट्यूट

🟢 ग्रीन बायोटेक्नोलॉजी (Green Biotechnology) – कृषि

Agricultural Biotechnology
  • अनुप्रयोग: GMO फसलें, जैव-उर्वरक, बायो-पेस्टिसाइड, फसल सुधार, जलवायु-अनुकूल बीज
  • उदाहरण: Bt कपास, हरित क्रांति, बायोफर्टिलाइज़र, जैव-कीटनाशक
  • प्रमुख संस्थान: ICAR, IARI, CISH, जैव प्रौद्योगिकी विभाग

🔵 ब्लू बायोटेक्नोलॉजी (Blue Biotechnology) – समुद्री

Marine / Aquatic Biotechnology
  • अनुप्रयोग: समुद्री जीवों से दवाएँ, समुद्री जैव ईंधन, एक्वाकल्चर, जल प्रदूषण उपचार
  • उदाहरण: समुद्री जीवों से कैंसर-रोधी दवाएँ, समुद्री मछली पालन

🟡 येलो बायोटेक्नोलॉजी (Yellow Biotechnology) – खाद्य

Food / Nutritional Biotechnology
  • अनुप्रयोग: खाद्य प्रसंस्करण, पोषण में सुधार, खाद्य सुरक्षा, एंजाइम-आधारित उत्पाद
  • उदाहरण: जैव-संवर्धित खाद्य पदार्थ (Biofortified foods), एंजाइम-आधारित खाद्य प्रसंस्करण

🟣 पर्पल बायोटेक्नोलॉजी (Purple Biotechnology) – कानूनी/नैतिक

Legal, Ethical, and IPR aspects
  • अनुप्रयोग: जैव-नीति (Bioethics), पेटेंट, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), जैव सुरक्षा
  • उदाहरण: जीन संपादन पर नैतिक नियम, GMO पर लेबलिंग

⚪ व्हाइट बायोटेक्नोलॉजी (White Biotechnology) – औद्योगिक

Industrial / Environmental Biotechnology
  • अनुप्रयोग: जैव-ईंधन, जैव-प्लास्टिक, अपशिष्ट उपचार, एंजाइम-आधारित उत्पादन
  • उदाहरण: इथेनॉल उत्पादन, बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक, अपशिष्ट जल उपचार
📌 भारत में प्रमुख बायोटेक क्षेत्र:
  • रेड (चिकित्सा) – सबसे बड़ा क्षेत्र (~40%)
  • ग्रीन (कृषि) – ~20%
  • व्हाइट (औद्योगिक) – ~20%
  • बायोफार्मास्यूटिकल्स – सबसे तेज़ी से बढ़ता क्षेत्र

4. जीन संपादन – CRISPR तकनीक (Gene Editing with CRISPR)

CRISPR (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats) एक क्रांतिकारी जीन संपादन तकनीक है जो DNA को अत्यंत सटीकता से काटने, बदलने या हटाने में सक्षम है।

4.1. CRISPR कैसे काम करता है?

  • CRISPR-Cas9 प्रणाली: एक RNA अणु (Guide RNA) DNA के एक विशिष्ट हिस्से (Target Sequence) को पहचानता है और Cas9 एंजाइम उसे काट देता है।
  • परिणाम: DNA में कट (Break) बनने के बाद, कोशिका स्वयं उसे ठीक करती है – इस दौरान हम नया जीन डाल सकते हैं या दोषपूर्ण जीन को हटा सकते हैं।
  • सटीकता: CRISPR "आनुवंशिक कैंची" (Genetic Scissors) की तरह काम करता है – अत्यंत सटीक, कम लागत और सरल।

4.2. CRISPR के अनुप्रयोग

  • चिकित्सा: आनुवंशिक रोगों (जैसे सिकल सेल एनीमिया, सिस्टिक फाइब्रोसिस) का उपचार, कैंसर थेरेपी
  • कृषि: उन्नत फसलें, रोग-प्रतिरोधी पौधे, पोषण-संवर्धित भोजन
  • जैव ईंधन: अधिक कुशल जैव-ईंधन उत्पादन
  • अनुसंधान: जीन फंक्शन का अध्ययन, रोग मॉडल बनाना

4.3. CRISPR की चुनौतियाँ और नैतिक मुद्दे

  • ऑफ-टारगेट प्रभाव (Off-target effects): CRISPR गलत जीन को काट सकता है – जिसके अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं।
  • नैतिक चिंताएँ: क्या मानव भ्रूण के जीन को संपादित किया जाना चाहिए? "डिज़ाइनर बेबी" (Designer Baby) का खतरा।
  • गेमेट संपादन: यदि जीन संपादन अंडाणु/शुक्राणु में किया जाए, तो परिवर्तन अगली पीढ़ी में भी जाएगा – गंभीर नैतिक प्रश्न।
  • भारत में नियम: ICMR, DBT, जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने CRISPR अनुसंधान के लिए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं – जिसमें नैतिकता, सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर दिया गया है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य: CRISPR तकनीक के लिए 2020 का नोबेल पुरस्कार इमैनुएल शार्पेंटियर (Emmanuelle Charpentier) और जेनिफर डूडना (Jennifer Doudna) को दिया गया। भारत में भी CRISPR पर सक्रिय अनुसंधान हो रहा है।

5. जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग – क्षेत्रवार

5.1. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य

  • बायोफार्मास्यूटिकल्स: जैविक दवाएँ (Biologicals) – इंसुलिन, हार्मोन, एंटीबॉडी, वैक्सीन
  • जीन थेरेपी: आनुवंशिक रोगों का इलाज – CAR-T कैंसर थेरेपी, CRISPR आधारित उपचार
  • स्टेम सेल थेरेपी: पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) – हृदय, तंत्रिका, अंग पुनर्निर्माण
  • टीके (Vaccines): mRNA वैक्सीन (COVID-19), रिकॉम्बिनेंट वैक्सीन
  • नैदानिक (Diagnostics): PCR, ELISA, रैपिड टेस्ट किट – COVID-19, डेंगू, HIV
  • भारत में: सीरम इंस्टीट्यूट (वैक्सीन), बायोकॉन (इंसुलिन), डॉ. रेड्डीज (बायोसिमिलर), क्वॉलिस (डायग्नोस्टिक्स)

5.2. कृषि एवं खाद्य सुरक्षा

  • GMO फसलें: Bt कपास, Bt बैंगन, हर्बिसाइड-प्रतिरोधी सोयाबीन – उत्पादन बढ़ाना, कीटों से बचाव
  • जैव-उर्वरक (Biofertilizers): नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाले बैक्टीरिया – रासायनिक उर्वरकों का विकल्प
  • जैव-कीटनाशक (Bio-pesticides): प्राकृतिक शत्रुओं से कीट नियंत्रण – नीम, बैसिलस थुरिंजिएन्सिस
  • पोषण-संवर्धन: जैव-संवर्धित (Biofortified) फसलें – गोल्डन राइस (विटामिन A), प्रोटीन-युक्त गेहूँ
  • जलवायु-अनुकूल बीज: सूखा, बाढ़, लवणता सहन करने वाली फसलें
  • सरकारी योजनाएँ: राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) में बायोटेक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, जैव प्रौद्योगिकी किसान हस्तक्षेप (Biotech-KISAN) Latest

5.3. औद्योगिक एवं पर्यावरण

  • जैव-ईंधन (Biofuels): इथेनॉल, बायोडीजल, बायोगैस – पेट्रोल/डीज़ल का विकल्प
  • जैव-प्लास्टिक (Bioplastics): बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक – पर्यावरण अनुकूल
  • अपशिष्ट उपचार (Waste Treatment): औद्योगिक अपशिष्ट, नगर निगम अपशिष्ट का जैविक उपचार
  • जैव-संवर्धन (Bioremediation): प्रदूषकों (तेल, भारी धातु) को जैविक रूप से हटाना

5.4. जैव सूचना विज्ञान (Bioinformatics)

  • जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing): DNA/RNA अनुक्रम (Sequence) का विश्लेषण
  • प्रोटीन संरचना पूर्वानुमान: DeepMind AlphaFold – AI-संचालित प्रोटीन संरचना विश्लेषण
  • दवा खोज (Drug Discovery): AI-संचालित दवा विकास – Chai Discovery, Recursion Pharmaceuticals
  • वैयक्तिक चिकित्सा (Personalized Medicine): रोगी के जीनोम के आधार पर उपचार
📌 भारत में बायोटेक के प्रमुख उत्पाद:
  • इंसुलिन: बायोकॉन – स्वदेशी इंसुलिन
  • COVID-19 वैक्सीन: कोविशील्ड (सीरम), कोवैक्सिन (भारत बायोटेक)
  • GMO फसल: Bt कपास – देश में 95% से अधिक कपास Bt किस्म की है
  • जैव-उर्वरक: राइजोबियम, एज़ोस्पिरिलम – किसानों के लिए सस्ता विकल्प

6. विश्व में जैव प्रौद्योगिकी – वैश्विक परिदृश्य

प्रमुख देश एवं उनकी स्थिति

देशप्रमुख योगदानप्रमुख संस्थान/कंपनियाँ
अमेरिकाजीनोमिक्स, CRISPR, बायोफार्मास्यूटिकल्स, AI+बायोटेकModerna, Pfizer, CRISPR Therapeutics, Illumina
यूरोपCRISPR अनुसंधान, वैक्सीन, जैव-नीति, कृषि बायोटेकNovo Nordisk, Bayer, AstraZeneca, GSK
चीनजीन संपादन (CRISPR), GMO फसलें, कोविड-19 वैक्सीन, किण्वनSinovac, BGI Group, ICGEB
भारतवैक्सीन उत्पादन, बायोसिमिलर, GMO कपास, जैव उर्वरकसीरम, बायोकॉन, भारत बायोटेक, डॉ. रेड्डीज
जापानजैव प्रौद्योगिकी, फर्मेंटेशन, जीनोमिक्सEisai, Takeda, Japan Bioindustry Association

वैश्विक बाजार (2026)

  • वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी बाजार: $1.5+ ट्रिलियन (2026) – 2030 तक $2.5 ट्रिलियन तक पहुँचने की संभावना।
  • प्रमुख क्षेत्र: बायोफार्मा (~50%), कृषि (~20%), जैव सूचना विज्ञान (~10%), औद्योगिक (~15%)।
  • अग्रणी देश: अमेरिका (40%), चीन (15%), यूरोप (12%), भारत (8%), जापान (5%)।
📌 वैश्विक प्रतिस्पर्धा: अमेरिका, चीन, यूरोप – सभी जैव प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। भारत वैक्सीन और बायोसिमिलर में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

7. भारत में जैव प्रौद्योगिकी – विकास, नीतियाँ एवं योजनाएँ

7.1. Department of Biotechnology (DBT)

  • स्थापना: 1986 – भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत।
  • उद्देश्य: भारत में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान, विकास एवं व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना।
  • प्रमुख कार्य: जैव प्रौद्योगिकी नीति, वित्तपोषण, पार्कों का विकास, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।

7.2. प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान

  • ICMR (Indian Council of Medical Research): चिकित्सा अनुसंधान, वैक्सीन, रोग नियंत्रण
  • ICAR (Indian Council of Agricultural Research): कृषि अनुसंधान, GMO फसलें, जैव उर्वरक
  • NIBMG (National Institute of Biomedical Genomics): जीनोमिक्स, जीन थेरेपी, कैंसर अनुसंधान
  • DBT के अंतर्गत राष्ट्रीय केंद्र: NII (Delhi), CDFD (Hyderabad), IBAB (Bengaluru), IBSD (Manipur)
  • CSIR संस्थान: CCMB (Hyderabad), IGIB (Delhi), IMT (Chandigarh)

7.3. सरकारी नीतियाँ एवं योजनाएँ

  • राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी नीति (2024-25): 2030 तक भारत को बायोटेक में विश्व अग्रणी बनाना। Latest
  • Biotech-PRIDE (2020): जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ₹500 करोड़ का कार्यक्रम।
  • Biotech-KISAN (2020): किसानों को जैव प्रौद्योगिकी आधारित समाधान प्रदान करना – फसल सुधार, जैव उर्वरक, जलवायु-अनुकूल बीज। Updated
  • आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat): टेलीमेडिसिन, डिजिटल स्वास्थ्य, जीनोमिक डेटा का उपयोग।
  • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (2018): इथेनॉल, बायोडीजल, बायोगैस उत्पादन को प्रोत्साहन।
  • GMO नियम: GEAC (Genetic Engineering Appraisal Committee) – GMO उत्पादों के लिए नियामक निकाय।
  • राष्ट्रीय मिशन ऑन सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (NMSA): जैव प्रौद्योगिकी आधारित कृषि समाधान।
🇮🇳 भारत की बायोटेक विज़न: "2030 तक भारत को बायोटेक में $150 बिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना। वैक्सीन, बायोसिमिलर, कृषि बायोटेक और जीनोमिक्स में वैश्विक नेतृत्व।"

8. राजस्थान में जैव प्रौद्योगिकी

8.1. शैक्षणिक संस्थान एवं अनुसंधान

  • Rajasthan University (जयपुर): जैव प्रौद्योगिकी विभाग – जीनोमिक्स, कृषि बायोटेक, जैव सूचना विज्ञान
  • MNIT Jaipur: जैव प्रौद्योगिकी, बायो-रिसर्च, जीन संपादन, बायोसेंसर
  • IIT Jodhpur: जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स, बायो-इंफॉर्मेटिक्स, दवा विकास
  • Banasthali Vidyapeeth: प्लांट बायोटेक्नोलॉजी, जैव उर्वरक, कृषि बायोटेक
  • CAZRI (Jodhpur): मरुस्थलीय कृषि बायोटेक, जलवायु-अनुकूल फसलें, जैव उर्वरक
  • Rajasthan Agricultural University (Bikaner): कृषि बायोटेक, पशु बायोटेक, जैव उर्वरक

8.2. राज्य सरकार की पहल

  • Rajasthan STI Policy (2023): जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान को प्रोत्साहन, उद्योग-शिक्षा सहयोग, Green Technology & E-Mobility।
  • Rajasthan Bio-Energy Policy (प्रस्तावित): जैव ईंधन, बायोगैस, बायोडीजल उत्पादन को प्रोत्साहन।
  • iStart Rajasthan: बायोटेक स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन एवं फंडिंग सहायता।
  • कृषि बायोटेक: राज्य के किसानों को जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक, बायोफर्टिलाइज़र उपलब्ध कराना।
  • पशु बायोटेक: पशुपालन में जैव प्रौद्योगिकी – बीमारी पहचान, उन्नत नस्ल, दुग्ध उत्पादन बढ़ाना।

8.3. राजस्थान में बायोटेक के अनुप्रयोग

  • कृषि: जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक, जलवायु-अनुकूल फसलें – राज्य के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए
  • पशुपालन: पशु रोगों का जैविक निदान, उन्नत नस्ल, दुग्ध उत्पादन बढ़ाना
  • जल संरक्षण: जैविक जल उपचार, जल गुणवत्ता निगरानी के लिए बायोसेंसर
  • औद्योगिक: खनिज उद्योग में बायो-लीचिंग, अपशिष्ट प्रबंधन, जैव ईंधन
  • स्वास्थ्य: टेलीमेडिसिन, जीनोमिक रोग निदान, जैविक औषधियाँ (Biologics)
🏜️ राजस्थान की बायोटेक विज़न: "राजस्थान को कृषि एवं पशु बायोटेक का केंद्र बनाना। शुष्क क्षेत्रों के लिए जलवायु-अनुकूल बीज, जैव उर्वरक, और पशुपालन में जैविक समाधान विकसित करना।"

9. जैव प्रौद्योगिकी से उत्पन्न चुनौतियाँ एवं भविष्य

⚠️ चुनौतियाँ

  • नैतिक मुद्दे (Bioethics): जीन संपादन, क्लोनिंग, स्टेम सेल – क्या सीमा होनी चाहिए?
  • जैव सुरक्षा (Biosafety): GMO उत्पादों के पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव
  • नियामक ढाँचा: जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों के परीक्षण, प्रमाणीकरण एवं लेबलिंग के लिए स्पष्ट नियमों की कमी
  • जैव-आतंकवाद (Bioterrorism): जैव हथियारों के विकास का खतरा
  • बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): जैव प्रौद्योगिकी आविष्कारों के पेटेंट पर विवाद
  • उच्च अनुसंधान लागत: आधुनिक बायोटेक प्रयोगशालाएँ अत्यंत महंगी
  • कुशल मानव संसाधन की कमी: बायोटेक में प्रशिक्षित वैज्ञानिकों/इंजीनियरों की कमी

✅ भविष्य एवं समाधान

  • नैतिक दिशा-निर्देश: ICMR, DBT, UNESCO की बायो-नीति (Bioethics) – जिम्मेदार अनुसंधान
  • जैव सुरक्षा नियम: GEAC, कृषि मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय – सख्त नियामक ढाँचा
  • AI + बायोटेक: AI-संचालित दवा खोज, जीनोम विश्लेषण, वैयक्तिक चिकित्सा
  • स्टेम सेल एवं पुनर्योजी चिकित्सा: अंग पुनर्निर्माण, कैंसर, तंत्रिका रोगों का उपचार
  • जीन थेरेपी: आनुवंशिक रोगों का इलाज – सिकल सेल, सिस्टिक फाइब्रोसिस, एचआईवी
  • कृषि जैव प्रौद्योगिकी: जलवायु-अनुकूल फसलें, जैव उर्वरक, पोषण-संवर्धित भोजन
  • भारत का लक्ष्य: 2030 तक $150 बिलियन बायोटेक अर्थव्यवस्था, वैश्विक बायोटेक में शीर्ष 5 देश
🔑 मुख्य निष्कर्ष: जैव प्रौद्योगिकी इंसान की सबसे बड़ी समस्याओं (बीमारी, भूख, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा) का समाधान दे सकती है – लेकिन नैतिकता, सुरक्षा और नियमन का संतुलन आवश्यक है।

10. जैव प्रौद्योगिकी तकनीकी शब्दावली (ग्लोसरी)

DNA – Deoxyribonucleic Acid (आनुवंशिक पदार्थ)
RNA – Ribonucleic Acid (प्रोटीन संश्लेषण)
CRISPR – Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats (जीन संपादन)
GMO – Genetically Modified Organism (आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव)
Gene Therapy – जीन चिकित्सा (आनुवंशिक रोगों का उपचार)
Stem Cell – स्टेम कोशिका (पुनर्योजी चिकित्सा)
Bioinformatics – जैव सूचना विज्ञान (जैविक डेटा विश्लेषण)
Biofertilizer – जैव उर्वरक (जैविक खाद)
Bioremediation – जैव संवर्धन (प्रदूषकों को जैविक रूप से हटाना)
Biopharmaceutical – जैव औषधि (जैविक दवा)
mRNA Vaccine – mRNA वैक्सीन (आनुवंशिक टीका)
Genomics – जीनोमिक्स (जीनोम का अध्ययन)
Proteomics – प्रोटीओमिक्स (प्रोटीन का अध्ययन)
Bioethics – जैव नीति (जैविक अनुसंधान की नैतिकता)
IPR – Intellectual Property Rights (बौद्धिक संपदा अधिकार)
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