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#DefenceTech2026

रक्षा प्रौद्योगिकी पूर्ण ज्ञान एवं संदर्भ पुस्तिका – 2026

DEFENCE TECHNOLOGY • DRDO • MISSILES • INDIA 2026
2026
📘 DRDO · मिसाइलें · रडार · साइबर युद्ध · आत्मनिर्भरता

1. रक्षा प्रौद्योगिकी क्या है? – मूल अवधारणा

रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology) विज्ञान एवं इंजीनियरिंग की वह शाखा है जो सैन्य उपकरणों, हथियार प्रणालियों, रडार, मिसाइलों, संचार प्रणालियों, कवच, विमान, नौसैनिक पोतों एवं साइबर सुरक्षा के डिज़ाइन, निर्माण एवं विकास से संबंधित है।

प्रमुख क्षेत्र:

  • हथियार प्रणालियाँ: मिसाइलें, टैंक, राइफलें, तोपें, बम, लेजर हथियार
  • रडार एवं संचार: प्रारंभिक चेतावनी, निगरानी, मार्गदर्शन
  • साइबर सुरक्षा: सैन्य नेटवर्क, क्रिप्टोग्राफी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध
  • अंतरिक्ष रक्षा: उपग्रह निगरानी, ASAT, अंतरिक्ष-आधारित संचार
  • रक्षा उत्पादन: स्वदेशी उपकरण, आयात प्रतिस्थापन
📌 महत्व: रक्षा प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार है। एक मजबूत रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र देश को आक्रमणों से बचाता है, सीमाओं की सुरक्षा करता है, और वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाता है।

2. DRDO – भारत की रक्षा अनुसंधान की रीढ़

Defence Research and Development Organisation (DRDO) भारत का प्रमुख रक्षा अनुसंधान संगठन है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

1958
DRDO की स्थापना: तत्कालीन रक्षा मंत्री वी.के. कृष्ण मेनन ने DRDO का गठन किया।
1970-80
मिसाइल विकास: प्रथ्वी, अग्नि, पिनाका जैसी मिसाइलों का विकास शुरू हुआ।
1998
पोखरण-2 (न्यूक्लियर टेस्ट): DRDO ने परमाणु परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2001
प्रथ्वी मिसाइल: भारत की पहली स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल।
2019
Mission Shakti (ASAT): DRDO ने Anti-Satellite Weapon का सफल परीक्षण किया।
2026
हाइपरसोनिक मिसाइल, लेजर DEW, स्वायत्त ड्रोन: DRDO ने 2025-26 में कई अत्याधुनिक तकनीकों का सफल परीक्षण किया। Latest
📌 DRDO का उद्देश्य: "भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाना और सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक हथियार प्रदान करना।"

3. DRDO की प्रमुख प्रयोगशालाएँ

🔹 DRDL – Defence Research & Development Laboratory

स्थान: हैदराबाद, तेलंगाना • स्थापना: 1961

📌 क्या काम करता है?

  • मिसाइल विकास – प्रथ्वी, अग्नि, नाग, ब्रह्मोस का मुख्य केंद्र
  • प्रणोदन प्रणाली (Propulsion Systems) – ठोस, तरल, रैमजेट
  • मार्गदर्शन प्रणाली (Guidance Systems) – इनर्शियल, GPS, लेजर

वर्तमान निदेशक: डॉ. ए. एस. राजू (2026 तक)

🔹 ADA – Aeronautical Development Agency

स्थान: बेंगलुरु, कर्नाटक • स्थापना: 1984

📌 क्या काम करता है?

  • तेजस (Tejas) लड़ाकू विमान का डिज़ाइन एवं विकास
  • हल्के एवं मध्यम लड़ाकू विमानों (LCA, MWF) का निर्माण
  • वायुगतिकी (Aerodynamics), एवियोनिक्स, सामग्री अनुसंधान

वर्तमान निदेशक: डॉ. के. शिवकुमार (2026 तक)

🔹 CVRDE – Combat Vehicles Research & Development Establishment

स्थान: चेन्नई, तमिलनाडु • स्थापना: 1973

📌 क्या काम करता है?

  • अर्जुन (Arjun) टैंक का विकास
  • बख्तरबंद वाहन (Armoured Vehicles), युद्ध इंजीनियरिंग उपकरण
  • हाइड्रोलिक्स, पावरपैक, चेसिस डिज़ाइन

वर्तमान निदेशक: डॉ. एन. रघुपति (2026 तक)

🔹 ARDE – Armament Research & Development Establishment

स्थान: पुणे, महाराष्ट्र • स्थापना: 1959

📌 क्या काम करता है?

  • पिनाका (Pinaka) रॉकेट प्रणाली का विकास
  • तोपखाना (Artillery), गोला-बारूद (Ammunition), उच्च-विस्फोटक
  • मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL)

वर्तमान निदेशक: डॉ. एस. आर. साठे (2026 तक)

🔹 DLRL – Defence Electronics Research Laboratory

स्थान: हैदराबाद, तेलंगाना • स्थापना: 1965

📌 क्या काम करता है?

  • रडार एवं संचार उपकरण – अकाश, राजेंद्र, स्वाति रडार
  • इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare), सिग्नल प्रोसेसिंग
  • ट्रांसमीटर, रिसीवर, एंटीना

वर्तमान निदेशक: डॉ. एम. रविकुमार (2026 तक)

🔹 RCI – Research Centre Imarat

स्थान: हैदराबाद, तेलंगाना • स्थापना: 1990

📌 क्या काम करता है?

  • नियंत्रण प्रणाली (Control Systems) – मिसाइल मार्गदर्शन के लिए
  • जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली (INS), इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स
  • एक्ट्यूएटर्स, सेंसर, सर्वो मैकेनिज्म

वर्तमान निदेशक: डॉ. पी. राजा (2026 तक)

📌 DRDO की अन्य प्रमुख प्रयोगशालाएँ:
  • DFRL (देहरादून): खाद्य प्रौद्योगिकी (राशन, आपातकालीन भोजन)
  • DIPL (गाजियाबाद): प्रणोदन, रॉकेट ईंधन
  • DMSRDE (कानपुर): रबर, प्लास्टिक, कम्पोजिट सामग्री
  • NSTL (विशाखापत्तनम): नौसैनिक प्रौद्योगिकी (पनडुब्बियाँ, टारपीडो)
  • LRDE (बेंगलुरु): रडार अनुसंधान

4. स्वदेशी मिसाइल प्रणालियाँ

मिसाइलप्रकाररेंजविशेषता
प्रथ्वी-I/II/III बैलिस्टिक (Ballistic) 150–350 किमी स्वदेशी टैक्टिकल मिसाइल, परमाणु क्षमता
अग्नि-I से अग्नि-V ICBM / बैलिस्टिक 700–5000+ किमी परमाणु क्षमता, Agni-V में MIRV तकनीक
अग्नि-VI (विकासाधीन) ICBM 8000+ किमी MIRV + अत्याधुनिक मार्गदर्शन
अकाश (Akash) सतह-से-हवा (Surface-to-Air) 25–30 किमी बहु-लक्ष्य प्रतिरोध क्षमता
नाग (Nag) / HELINA टैंक-रोधी (Anti-Tank) 4–8 किमी Fire & Forget; हेलीकॉप्टर से भी प्रक्षेपण
ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज (Supersonic Cruise) 290–500 किमी विश्व की तेजतम क्रूज मिसाइल (Mach 2.8–3)
ब्रह्मोस-II (विकासाधीन) हाइपरसोनिक (Hypersonic) 1000+ किमी Mach 5+ – भारत-रूस संयुक्त परियोजना
पिनाका (Pinaka) मल्टी-बैरल रॉकेट (MBRL) 40–75 किमी तोपखाने के लिए, तीव्र हमला क्षमता
HSTDV (हाइपरसोनिक) टेक्नोलॉजी डेमोन्सट्रेटर Mach 6+ – 2025 में सफल परीक्षण Latest
📌 मिसाइल प्रणालियों का महत्व:
  • प्रथ्वी और अग्नि – भारत की परमाणु निवारण (Nuclear Deterrence) की रीढ़।
  • ब्रह्मोस – भारत-रूस सहयोग, वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ क्रूज मिसाइल।
  • अकाश, नाग, पिनाका – सेना की टैक्टिकल आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
  • HSTDV – भारत को हाइपरसोनिक क्लब में शामिल करता है।

5. उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियाँ (Emerging Defence Tech)

🔹 हाइपरसोनिक हथियार
5 Mach से अधिक गति
HSTDV – DRDO (2025 सफल)
ब्रह्मोस-II (Mach 5+) Latest
🔹 AI in Defence
स्वायत्त ड्रोन, लक्ष्य पहचान
भविष्यवाणी विश्लेषण
साइबर सुरक्षा
🔹 लेजर / DEW
Directed-Energy Weapons
DRDO 30 kW (2024-25)
100 kW लेजर परीक्षण (2026) Latest
🔹 स्वार्म ड्रोन (Swarm Drones)
सैकड़ों ड्रोन एक साथ
DRDO – 2025 में परीक्षण
"Swarm Drone Doctrine" Latest
🔹 क्वांटम संचार
अविभाज्य एन्क्रिप्शन
DRDO & IITs परियोजनाएँ
500 km लिंक (2026) Latest
🔹 रोबोटिक सैनिक
मानव रहित युद्ध प्रणाली
Muntra Robot, Daksha
AI-संचालित युद्ध वाहन
🔹 अंतरिक्ष रक्षा
उपग्रह निगरानी
ASAT (Mission Shakti)
अंतरिक्ष-आधारित संचार
🔹 साइबर युद्ध
Defence Cyber Agency (DCA)
National Cyber Security Policy
AI-आधारित साइबर सुरक्षा
⚡ भविष्य की दिशा: AI + रोबोटिक्स + क्वांटम + हाइपरसोनिक – ये चार तकनीकें आने वाले दशक में युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल देंगी। भारत DRDO के माध्यम से इन सभी पर काम कर रहा है।

6. साइबर युद्ध (Cyber Warfare)

साइबर युद्ध (Cyber Warfare) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई देश दूसरे देश के कंप्यूटर नेटवर्क, सूचना प्रणाली, बैंकिंग, ऊर्जा ग्रिड, रक्षा या प्रशासनिक ढाँचे पर डिजिटल माध्यम से आक्रमण करता है। यह "अदृश्य युद्ध" है।

साइबर युद्ध के प्रकार

  • Cyber Espionage: जासूसी के लिए सरकारी/सैन्य डेटा चोरी (SolarWinds Attack 2020 – USA)
  • Cyber Sabotage: महत्वपूर्ण नेटवर्क को निष्क्रिय करना (Stuxnet Virus 2010 – ईरान परमाणु संयंत्र)
  • Cyber Propaganda: सोशल मीडिया से भ्रम एवं अस्थिरता फैलाना
  • Cyber Terrorism: आतंकवादी समूहों द्वारा डिजिटल हमले

भारत की साइबर सुरक्षा संस्थाएँ एवं नीतियाँ

  • CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team): साइबर घटनाओं की निगरानी एवं प्रतिक्रिया
  • Defence Cyber Agency (DCA – 2019): तीनों सेनाओं के नेटवर्क की सुरक्षा
  • National Cyber Security Policy (2024 Draft): डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा हेतु नया ढाँचा Latest
  • Cyber Surakshit Bharat Mission (2018): सरकारी कर्मचारियों का प्रशिक्षण
  • National Cyber Coordination Centre (NCCC): खतरे की प्रारंभिक पहचान
  • Indian Cyber Coordination Centre (I4C): साइबर अपराधों से निपटने हेतु समन्वय
  • NCIIPC: बिजली, ऊर्जा, बैंक, ट्रांसपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण ढाँचे की सुरक्षा
  • Digital Personal Data Protection Act, 2023: नागरिक डेटा की कानूनी सुरक्षा
📌 भारत की साइबर रणनीति: "साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग बनाना। AI, क्वांटम और ब्लॉकचेन का उपयोग कर साइबर हमलों से बचाव।"

7. आत्मनिर्भरता – 'Make in India' और रक्षा क्षेत्र

Defence Industrial Corridors

  • उत्तर प्रदेश (झाँसी): रक्षा उपकरण निर्माण हेतु औद्योगिक गलियारा
  • तमिलनाडु (चेन्नई): रक्षा प्रौद्योगिकी पार्क

Positive Indigenisation List

  • 400+ रक्षा उपकरणों का स्वदेशी उत्पादन, आयात प्रतिबंधित
  • 2025 तक 500+ वस्तुओं की सूची Latest

निजी क्षेत्र की भागीदारी

  • टाटा, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), महिंद्रा, अदानी, बीईएल, मझगाँव डॉक – मिसाइल, वाहन, रडार, पोत निर्माण में
  • स्वदेशीकरण उपलब्धियाँ:
    • INS Vikrant (पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत, 2022)
    • INS Arihant (परमाणु पनडुब्बी, 2016) – Nuclear Triad की पूर्ति
    • पिनाका MBRL – कारगिल युद्ध में सफल
    • ATAGS (Advanced Towed Artillery Gun System) – 155mm/52 कैलिबर तोप, 48 किमी रेंज
    • तेजस Mk-1A – हल्का लड़ाकू विमान, 2024 से सेवा में Latest
🇮🇳 आत्मनिर्भरता का लक्ष्य: "2030 तक 80% रक्षा उपकरण स्वदेशी में निर्मित करने का लक्ष्य। 'Make in India' और 'Atmanirbhar Bharat' के माध्यम से भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाना।"

8. राजस्थान में रक्षा प्रौद्योगिकी

8.1. राजस्थान में सैन्य उपस्थिति

  • सीमा सुरक्षा: राजस्थान की पाकिस्तान से अंतर्राष्ट्रीय सीमा (1,070 किमी) – BSF द्वारा संरक्षित
  • सैन्य छावनियाँ: जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, बाड़मेर में सैन्य स्टेशन
  • वायुसेना: जोधपुर, बीकानेर, जयपुर, फलोदी, सूरतगढ़, उत्तरलाई में वायुसेना केंद्र
  • Army Area: सूरतगढ़, बीकानेर, जैसलमेर में भारतीय सेना की महत्वपूर्ण चौकियाँ

8.2. राजस्थान में DRDO / रक्षा अनुसंधान

  • Rajasthan Atomic Power Plant (रावतभाटा): परमाणु ऊर्जा संयंत्र – रक्षा प्रौद्योगिकी से संबंधित
  • Defence Laboratory (Jodhpur): राजस्थान में DRDO की प्रयोगशाला – रक्षा अनुसंधान एवं विकास
  • मिसाइल परीक्षण: राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में मिसाइल परीक्षण होते हैं
  • Maharana Pratap Airport (Udaipur): रक्षा संचालन हेतु

8.3. राज्य सरकार की पहल

  • राजस्थान रक्षा और एयरोस्पेस नीति (प्रस्तावित): रक्षा विनिर्माण एवं एयरोस्पेस उद्योग को प्रोत्साहन
  • राजस्थान इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (RIICO): रक्षा उद्योगों के लिए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास
  • MSME Sector: राजस्थान में रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में MSMEs की भागीदारी
  • स्टार्टअप्स: iStart Rajasthan के माध्यम से रक्षा तकनीकी स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन सहायता
🏜️ राजस्थान की रक्षा विज़न: "राजस्थान को रक्षा उत्पादन एवं एयरोस्पेस का हब बनाना। सीमा सुरक्षा, वायुसेना आधारों एवं रक्षा अनुसंधान के माध्यम से राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देना।"

9. रक्षा प्रौद्योगिकी तकनीकी शब्दावली (ग्लोसरी)

DRDO – Defence Research and Development Organisation
ICBM – Intercontinental Ballistic Missile
MIRV – Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle
ASAT – Anti-Satellite Weapon
MBRL – Multi-Barrel Rocket Launcher
DEW – Directed-Energy Weapon (लेजर/माइक्रोवेव)
Hypersonic – Mach 5 से अधिक गति
Supermach – ध्वनि की गति से अधिक
INS – Inertial Navigation System
Electronic Warfare (EW) – रडार/संचार को जाम/धोखा देना
CERT-In – Indian Computer Emergency Response Team
DCA – Defence Cyber Agency
NCCC – National Cyber Coordination Centre
I4C – Indian Cyber Coordination Centre
NCIIPC – National Critical Infrastructure Protection Centre
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