1. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राज्य के भूमि-उपयोग (2024-25, अनंतिम) में निम्नलिखित वर्गों के हिस्से को घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. वन
2. कृषि योग्य बंजर (culturable waste) भूमि
3. स्थायी चरागाह एवं अन्य गोचर भूमि
4. शुद्ध बोया गया क्षेत्र
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही क्रम: शुद्ध बोया क्षेत्र (53.02%) > कृषि योग्य बंजर (10.11%) > वन (8.30%) > स्थायी चरागाह (4.81%)।
📘 विस्तार से समझें: प्रतिवेदित क्षेत्र लगभग 343.43 लाख हेक्टेयर (राज्य का भौगोलिक क्षेत्र 342.39 लाख हेक्टेयर; भू-अभिलेख व सर्वेक्षण के अंतर से मामूली भिन्नता)। नौ-वर्गीय भूमि-उपयोग (2024-25): शुद्ध बोया 53.02%; कृषि योग्य बंजर 10.11%; वन 8.30%; बंजर व अकृषि योग्य 6.85%; गैर-कृषि उपयोग 5.96%; चालू पड़त के अतिरिक्त अन्य पड़त 5.62%; चालू पड़त 5.22%; स्थायी चरागाह 4.81%; विविध वृक्ष-फसलें व उपवन 0.11%। ध्यान दें: भूमि-अभिलेखों में 'वन' (8.30%) और ISFR में उपग्रह-आधारित 'वनावरण' (लगभग 5%) भिन्न अवधारणाएँ हैं। कृषि योग्य बंजर भूमि का लगभग 10% होना कृषि-विस्तार की संभावना दर्शाता है, किंतु अधिकतर भूमि पश्चिमी मरुस्थल में जल-अभाव से ग्रस्त है। राज्य में कृषि का लगभग 83% वर्षा-आधारित है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 2024-25 में शुद्ध बोया क्षेत्र का प्रतिशत? – 53.02%
• भूमि-उपयोग वर्गीकरण में कितने वर्ग? – नौ
• भू-अभिलेख में वन का प्रतिशत? – 8.30%
2. कृषि गणना 2015-16 (आर्थिक समीक्षा 2025-26 में उद्धृत) के अनुसार राजस्थान की प्रचालनात्मक जोतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जोतों की कुल संख्या 2010-11 के 68.88 लाख से बढ़कर 76.55 लाख हो गई, जबकि औसत जोत का आकार 3.07 हेक्टेयर से घटकर 2.73 हेक्टेयर रह गया।
2. जोतों की संख्या में सर्वाधिक हिस्सा सीमांत जोतों (लगभग 40%) का है, जबकि बड़ी जोतें केवल लगभग 4.7% हैं।
3. महिलाओं द्वारा प्रचालित जोतों की संख्या 2010-11 की तुलना में लगभग 42% बढ़ी।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: तीनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: जोत-वर्ग (आकार): सीमांत <1 हे., लघु 1-2 हे., अर्ध-मध्यम 2-4 हे., मध्यम 4-10 हे., बड़ी ≥10 हे.। संख्या में हिस्सा (2015-16): सीमांत 40.12%, लघु 21.90%, अर्ध-मध्यम 18.50%, मध्यम 14.79%, बड़ी 4.69%। परिवर्तन: जोतें +11.14%, कुल प्रचालित क्षेत्र 211.36 से घटकर 208.73 लाख हे. (−1.24%), औसत आकार −11.07%; केवल बड़ी जोतों की संख्या घटी, शेष सभी वर्ग बढ़े (उत्तराधिकार में भूमि-विखंडन)। महिला जोतें 5.46 लाख → 7.75 लाख (+41.94%), क्षेत्र 13.30 → 16.55 लाख हे. (+24.44%); महिला जोतों में लगभग आधी सीमांत। राजस्थान की औसत जोत (2.73 हे.) राष्ट्रीय औसत (लगभग 1.08 हे.) से कहीं बड़ी है – मरुस्थलीय, कम उत्पादक भूमि के कारण। कृषि गणना प्रत्येक 5 वर्ष में होती है; 11वीं कृषि गणना (2021-22) डिजिटल रूप में संचालित।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 2015-16 में राजस्थान का औसत जोत-आकार? – 2.73 हेक्टेयर
• किस जोत-वर्ग की संख्या घटी? – बड़ी (≥10 हे.)
• महिला प्रचालित जोतें (2015-16)? – 7.75 लाख
3. सूची-I (फसल) को सूची-II (वर्ष 2023-24 में राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I: (अ) ग्वार (ब) रेपसीड एवं सरसों (स) बाजरा (द) मूँगफली
सूची-II: (1) लगभग 88.8% (2) लगभग 41.3% (3) लगभग 19.9% (द्वितीय स्थान) (4) लगभग 43.4%
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही सुमेल: ग्वार – 88.80%; सरसों – 43.43%; बाजरा – 41.34%; मूँगफली – 19.91% (द्वितीय)।
📘 विस्तार से समझें: आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार 2023-24 में राजस्थान का राष्ट्रीय स्थान: प्रथम – ग्वार (88.80%), रेपसीड-सरसों (43.43%), बाजरा (41.34%), कुल तिलहन (23.61%), मोटे अनाज (14.21%); द्वितीय – मूँगफली (19.91%, प्रथम गुजरात); तृतीय – चना (17.39%), कुल दलहन (13.76%), सोयाबीन (8.96%)। इनके अतिरिक्त राजस्थान ईसबगोल, जीरा (क्षेत्रफल), धनिया, मेथी, मोठ आदि में अग्रणी है। ग्वार का लगभग 90% उत्पादन होने से ग्वार गम (तेल-गैस 'फ्रैकिंग', खाद्य उद्योग में प्रयुक्त) के निर्यात में राजस्थान (जोधपुर प्रसंस्करण केंद्र) की केंद्रीय भूमिका है। बाजरा उत्पादन के आधार पर राज्य को 'मिलेट बाउल' कहा जाता है; 'राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन' इसी को आगे बढ़ाता है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• कुल दलहन उत्पादन में राजस्थान का स्थान (2023-24)? – तृतीय
• मूँगफली उत्पादन में प्रथम राज्य? – गुजरात
• कुल तिलहन में राजस्थान का हिस्सा? – 23.61%
4. राजस्थान के किसानों को मिलने वाली प्रत्यक्ष आय-सहायता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: राज्य की 'मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि' के अंतर्गत PM-किसान लाभार्थियों को अतिरिक्त राशि दी जाती है, जिसे बजट 2025-26 में ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति वर्ष किया गया।
कथन II: इस प्रकार PM-किसान (₹6,000) सहित राजस्थान के पात्र किसान को कुल ₹9,000 प्रति वर्ष की प्रत्यक्ष आय-सहायता मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: PM-किसान (केंद्र, फरवरी 2019 से): भूमिधारक कृषक परिवारों को ₹6,000 प्रति वर्ष, ₹2,000 की तीन किस्तों में DBT से; अपवर्जन – आयकरदाता, संवैधानिक पदधारी, ₹10,000+ पेंशनभोगी, पेशेवर आदि। मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि (राजस्थान): भजनलाल सरकार ने 2024-25 के बजट में PM-किसान लाभार्थियों को ₹2,000 अतिरिक्त देना आरंभ किया; बजट 2025-26 में यह ₹3,000 हुआ – कुल ₹9,000। पात्रता हेतु भूमि-सत्यापन, e-KYC व आधार-सीडेड बैंक खाता आवश्यक। आर्थिक समीक्षा 2025-26: PM-किसान पोर्टल पर 75.17 लाख किसानों का भूमि-सत्यापन (दिसंबर 2025); लाभार्थियों की संख्या में राजस्थान देश में पाँचवें स्थान पर। संबंधित: गेहूँ पर MSP के ऊपर राज्य का बोनस (रबी विपणन 2025-26 में ₹150 प्रति क्विंटल; MSP ₹2,425 → किसान को ₹2,575)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• PM-किसान की वार्षिक राशि? – ₹6,000 (तीन किस्त)
• PM-किसान लाभार्थियों में राजस्थान का स्थान? – पाँचवाँ
• 2025-26 में गेहूँ MSP व राज्य बोनस? – ₹2,425 + ₹150
5. अभिकथन (A): राजस्थान में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के मूल्य-वर्धन में पशुधन उप-क्षेत्र का हिस्सा फसल उप-क्षेत्र से अधिक है।
कारण (R): राज्य की शुष्क-अर्द्धशुष्क जलवायु और अनियमित वर्षा में फसल-उत्पादन अत्यधिक जोखिमपूर्ण है, जबकि पशुपालन (दूध, ऊन, मांस) अपेक्षाकृत स्थिर आय देता है।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: 2025-26 (प्रचलित) में पशुधन GVA लगभग ₹2.17 लाख करोड़ (49.35%) बनाम फसल GVA लगभग ₹1.88 लाख करोड़ (42.61%)। स्थिर मूल्यों पर पशुधन +5.20% बढ़ा जबकि फसल −5.01% घटी – यही 'जोखिम-विविधीकरण' का प्रमाण है। राज्य का देश के दूध में हिस्सा लगभग 14.51% (2023-24) और ऊन में 47.53%; पशुगणना 2019 में देश के 10.60% पशुधन, 84.43% ऊँट, 14% बकरियाँ। 83% वर्षा-आधारित खेती, बार-बार सूखा और कम सिंचाई के कारण पशुपालन ग्रामीण परिवारों की 'चलती-फिरती बचत' व अकाल-बीमा है। नीतिगत प्रभाव: मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा (राज्य 100% प्रीमियम), गोपाल क्रेडिट कार्ड, दुग्ध उत्पादक संबल (₹5/लीटर) जैसी योजनाएँ।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 2025-26 में पशुधन GVA (प्रचलित)? – लगभग ₹2.17 लाख करोड़
• देश के ऊन उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा? – 47.53%
• पशुगणना 2019 में देश के ऊँटों का हिस्सा? – 84.43%
6. कृषि-आदानों से संबंधित योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना में किसान अपने ही खेत पर उन्नत किस्मों का प्रमाणित बीज उत्पादित करते हैं।
2. गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना में प्रति ब्लॉक 50 किसानों को वर्मी-कम्पोस्ट इकाई हेतु ₹10,000 तक की सहायता दी जाती है।
3. राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का शुभारंभ 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) से हुआ।
4. 'नमो ड्रोन दीदी' योजना में ड्रोन व्यक्तिगत पुरुष किसानों को निःशुल्क दिए जाते हैं।
5. राज्य में बीज उत्पादन, प्रसंस्करण व आपूर्ति हेतु नोडल एजेंसी राजस्थान राज्य बीज निगम (RSSCL) है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: केवल चार कथन (1, 2, 3 और 5) सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 4 गलत – नमो ड्रोन दीदी (केंद्र प्रायोजित) महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) हेतु है: ड्रोन लागत का 80% (अधिकतम ₹8 लाख) केंद्रीय सहायता, शेष हेतु AIF से ऋण पर 3% ब्याज-अनुदान; ड्रोन से नैनो-यूरिया/कीटनाशक छिड़काव की किराया-सेवा देकर SHG आय अर्जित करते हैं; राजस्थान में 1,070 ड्रोन/वाहन हेतु प्रावधान। अन्य: बीज स्वावलंबन (2017 से) – गेहूँ, जौ, चना, ज्वार, सोयाबीन, सरसों, मूँग, मोठ, उड़द के उन्नत बीज किसानों द्वारा स्व-उत्पादन (10 वर्ष तक की नई किस्में), बीज मिनीकिट निःशुल्क। गोवर्धन जैविक उर्वरक – पशु-अपशिष्ट से वर्मी-कम्पोस्ट। एग्री क्लिनिक – सभी जिला मुख्यालयों पर मृदा-परीक्षण, फसल-परामर्श। एकीकृत किसान सहायता के 6 स्तंभ: बीज, मृदा स्वास्थ्य, ऋण, बीमा, प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण। राजीविका के अंतर्गत कृषि सखी (36,787) व पशु सखी (37,369)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• नमो ड्रोन दीदी में केंद्रीय सहायता? – ड्रोन लागत का 80% (अधिकतम ₹8 लाख)
• राज्य में बीज की नोडल एजेंसी? – RSSCL
• मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना कहाँ से शुरू? – सूरतगढ़ (2015)
7. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: इसमें किसान द्वारा देय प्रीमियम खरीफ खाद्यान्न-तिलहन हेतु 2%, रबी हेतु 1.5% तथा वाणिज्यिक/बागवानी फसलों हेतु 5% है।
कथन II: योजना के अंतर्गत शेष प्रीमियम का पूरा भार केवल केंद्र सरकार वहन करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: PMFBY (खरीफ 2016 से): शेष प्रीमियम केंद्र व राज्य 50:50 अनुपात में वहन करते हैं (पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों में 90:10) – अतः कथन II गलत। जोखिम-आवरण: बुवाई-विफलता, खड़ी फसल (सूखा, बाढ़, कीट), फसलोत्तर हानि (कटाई के 14 दिन तक), स्थानीय आपदा (ओलावृष्टि, जलभराव)। 2020 से योजना किसानों हेतु स्वैच्छिक। राजस्थान की स्थिति: पॉलिसियों की संख्या में देश में प्रथम (लगभग 2.19 करोड़ पॉलिसी – नीति आयोग बैठक 2026 में प्रस्तुत); आर्थिक समीक्षा के अनुसार लगभग ₹6,206 करोड़ के दावे वितरित; बजट 2026-27 में कृषि बीमा हेतु लगभग ₹5,988 करोड़। फसल-कटाई प्रयोग (CCE) से उपज-आकलन; तकनीक – YES-TECH (रिमोट सेंसिंग), CROPIC। राज्य का 'स्टेट फंड' प्रीमियम-अंश व CCE प्रोत्साहन हेतु।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• PMFBY का आरंभ? – खरीफ 2016
• केंद्र-राज्य प्रीमियम अनुपात (सामान्य राज्य)? – 50:50
• PMFBY पॉलिसियों में राजस्थान का स्थान? – प्रथम
8. राजस्थान में प्राकृतिक/जैविक खेती के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत राज्य में सभी 2,000 क्लस्टर पूर्णतः राज्य निधि से संचालित हैं।
2. इस मिशन में राज्य में लगभग 2.5 लाख किसानों व 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित करने का लक्ष्य है।
3. परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) क्लस्टर-आधारित जैविक खेती की योजना है, जिसमें प्रमाणीकरण 'सहभागी गारंटी प्रणाली' (PGS) से होता है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन 2 और 3 सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF, केंद्र प्रायोजित, 2025-26 से राज्य में): 2,000 क्लस्टर – 1,800 केंद्र-प्रायोजित ढाँचे में और 200 राज्य द्वारा; अतः कथन 1 गलत। लक्ष्य लगभग 2.5 लाख किसान, 1 लाख हेक्टेयर; किसानों को प्रति एकड़ प्रोत्साहन (लगभग ₹4,000), जैव-आदान संसाधन केंद्र (BRC), कृषि सखियाँ/CRP द्वारा प्रशिक्षण; घटक – जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, आच्छादन (mulching), बहुफसली। PKVY: 20 हेक्टेयर (लगभग 50 एकड़) के क्लस्टर, PGS-India प्रमाणीकरण। राजस्थान जैविक खेती नीति 2017। विकसित राजस्थान 2047 का लक्ष्य – 25% क्षेत्र जैविक/प्राकृतिक खेती में, 95% सूक्ष्म सिंचाई। अंतर याद रखें: प्राकृतिक खेती में बाहरी आदान (जैविक खाद भी) न्यूनतम; जैविक खेती में प्रमाणित जैविक आदान अनुमत।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• NMNF में राज्य द्वारा संचालित क्लस्टर? – 200
• राजस्थान जैविक खेती नीति? – 2017
• PKVY में प्रमाणीकरण प्रणाली? – PGS-India
9. कृषि मिशन/योजना और राजस्थान में उसकी स्थिति (आर्थिक समीक्षा 2025-26) के संबंध में:
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: युग्म (D) सही सुमेलित नहीं है।
📘 विस्तार से समझें: आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राष्ट्रीय बाँस मिशन (केंद्र प्रायोजित) राजस्थान में अभी लागू नहीं है। अन्य मिशन: (1) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन – रबी 2007-08 से; 2025-26 में गेहूँ घटक 18 जिलों में, दलहन सभी 41 जिलों में (रबी 2025-26 से दलहन घटक 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' 2025-26 से 2030-31 में समाहित)। (2) मोटे अनाज (मक्का व जौ – 2018-19 से; 2025-26 में 9-9 जिले); श्री अन्न (बाजरा 28 जिले, ज्वार 11 जिले)। (3) वाणिज्यिक फसल – कपास 18 जिलों में (फेरोमोन ट्रैप)। (4) राष्ट्रीय बागवानी मिशन – 41 जिले। (5) NMSA-वर्षा-आधारित क्षेत्र विकास – 60:40, एकीकृत कृषि प्रणाली। (6) RKVY – उत्कृष्टता केंद्र: झालावाड़, धौलपुर, टोंक, बूंदी, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, बस्सी (जयपुर), नांता (कोटा)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• रबी 2025-26 में गेहूँ घटक कितने जिलों में? – 18
• NFSM कब आरंभ? – रबी 2007-08
• श्री अन्न में बाजरा घटक के जिले (2025-26)? – 28
10. प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: यह योजना कम कृषि-उत्पादकता वाले जिलों के लिए है और इसमें राजस्थान के जयपुर, अलवर व भरतपुर जिले चयनित हैं।
कथन II: यह योजना 2025-26 से छह वर्षों हेतु है और इसमें अनेक मंत्रालयों की योजनाओं का अभिसरण (convergence) किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है।
📘 विस्तार से समझें: PM धन-धान्य कृषि योजना (केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित; जुलाई 2025 में मंत्रिमंडल-स्वीकृत): देश के 100 जिलों – जिनमें कम उत्पादकता, कम फसल-सघनता और कम ऋण-उपलब्धता – हेतु; 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं का अभिसरण; 'आकांक्षी जिला कार्यक्रम' मॉडल पर। राजस्थान के चयनित जिले (आर्थिक समीक्षा 2025-26): बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, जालौर – सभी पश्चिमी शुष्क जिले; अतः कथन I गलत (जयपुर-अलवर-भरतपुर अपेक्षाकृत उत्पादक पूर्वी जिले हैं)। उद्देश्य: उत्पादकता वृद्धि, फसल विविधीकरण, सिंचाई, पंचायत/ब्लॉक स्तर पर फसलोत्तर भंडारण, अल्प व दीर्घावधि ऋण उपलब्धता। प्रत्येक जिले में 'जिला धन-धान्य समिति' द्वारा कृषि योजना; प्रगति का मासिक 117 संकेतकों पर अनुश्रवण।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• PM धन-धान्य कृषि योजना में देश के कितने जिले? – 100
• योजना में अभिसरित योजनाएँ? – 11 मंत्रालयों की 36 योजनाएँ
• राजस्थान के चयनित जिलों की संख्या? – 8
11. सूची-I (सहकारी ऋण योजना) को सूची-II (मुख्य प्रावधान) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I: (अ) सहकार किसान कल्याण योजना (ब) कृषि उपज रहन (गिरवी) ऋण योजना (स) स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड (द) राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड
सूची-II: (1) पशुपालक परिवारों को ₹1 लाख तक ब्याज-मुक्त अल्पकालीन ऋण (2) कृषि व संबद्ध गतिविधियों हेतु ₹10 लाख तक ऋण (3) गैर-कृषि गतिविधियों हेतु ₹50,000 तक, 5 वर्ष हेतु (4) उपज गिरवी रखकर 3% ब्याज पर ऋण
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही सुमेल: सहकार किसान कल्याण – ₹10 लाख; रहन ऋण – 3%; स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड – ₹50,000; गोपाल क्रेडिट कार्ड – ₹1 लाख ब्याज-मुक्त।
📘 विस्तार से समझें: राजस्थान का सहकारी ऋण ढाँचा (आर्थिक समीक्षा 2025-26): कुल 42,858 पंजीकृत सहकारी संस्थाएँ; 9,086 प्राथमिक कृषि साख समितियाँ (PACS/GSS); 29 केंद्रीय सहकारी बैंक (अल्पकालीन फसली ऋण); 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंक (दीर्घकालीन ऋण); शीर्ष – राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक)। प्रमुख योजनाएँ: (1) ब्याज-मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण – समय पर चुकाने पर राज्य ब्याज-अनुदान देता है (बजट 2026-27: ₹25,000 करोड़, 35 लाख+ किसान); (2) गोपाल क्रेडिट कार्ड – 2.5 लाख पशुपालक परिवार, बजट 2026-27 में ₹150 करोड़; (3) राजस्थान ग्रामीण आजीविका ऋण योजना – ग्रामीण कारीगरों, गैर-कृषि परिवारों को; (4) सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड; (5) SHG को CCB से ऋण। राजीविका महिला सर्वांगीण विकास सहकारी समितियाँ – 1,035। PACS को 'बहुउद्देशीय सेवा केंद्र' के रूप में कृषि अवसंरचना कोष (AIF) से जोड़ा गया।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राज्य में PACS की संख्या? – 9,086
• दीर्घकालीन कृषि ऋण देने वाली संस्था? – प्राथमिक भूमि विकास बैंक (36)
• गोपाल क्रेडिट कार्ड हेतु बजट 2026-27 प्रावधान? – ₹150 करोड़
12. कृषि अवसंरचना व खाद्य प्रसंस्करण संबंधी योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: कृषि अवसंरचना कोष (AIF) में ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 3% वार्षिक ब्याज-अनुदान दिया जाता है।
कथन II: PM-FME योजना में व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाई को परियोजना लागत का 35% (अधिकतम ₹10 लाख) क्रेडिट-लिंक्ड अनुदान मिलता है और राजस्थान में इसकी नोडल एजेंसी राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: AIF (15 मई 2020 को घोषित; ₹1 लाख करोड़ का कोष): फार्म-गेट व सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियाँ – गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, छँटाई-ग्रेडिंग, पैक-हाउस, प्राथमिक प्रसंस्करण; 3% ब्याज-अनुदान (7 वर्ष तक) व CGTMSE से ऋण-गारंटी; लाभार्थी – किसान, FPO, PACS, स्टार्टअप। PM-FME (2020-21 से 2025-26; केंद्र:राज्य 60:40) – 'एक जिला एक उत्पाद' दृष्टिकोण; SHG सदस्यों को ₹40,000 बीज-पूँजी; 8 जिलों में इन्क्यूबेशन केंद्र। राज्य की नीतियाँ: राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019; फूड पार्क विकास एवं भूमि आवंटन नीति 2024। राइजिंग राजस्थान (दिसंबर 2024) में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 2,524 MoU (₹43,794.84 करोड़)। भंडारण – राजस्थान राज्य भंडार व्यवस्था निगम (RSWC): 36 जिलों में 97 गोदाम, क्षमता लगभग 17.25 लाख टन (दिसंबर 2025)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• AIF की घोषणा? – 15 मई 2020
• राइजिंग राजस्थान में खाद्य प्रसंस्करण MoU? – 2,524 (₹43,794.84 करोड़)
• RSWC की भंडारण क्षमता? – लगभग 17.25 लाख टन
13. कृषि विपणन से जुड़ी राज्य योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कृषक उपहार योजना' में मंडी में उपज बेचने पर किसानों को उपहार-कूपन दिए जाते हैं, जिनसे पुरस्कार हेतु लॉटरी निकलती है; इसे ई-नाम (e-NAM) से जोड़ा गया है।
2. 'किसान कलेवा योजना' में किसानों को खरीफ बुवाई हेतु निःशुल्क बीज-किट दी जाती है।
3. 'महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना' (2015) अनुज्ञप्तिधारी मंडी श्रमिकों के लिए है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: किसान कलेवा योजना: मंडियों ('सुपर', 'अ', 'ब' श्रेणी) में उपज बेचने आए किसानों/हम्मालों को रियायती दर पर भरपेट भोजन – बीज-किट से संबंधित नहीं; अतः कथन 2 गलत। कृषक उपहार योजना: ई-नाम/ऑनलाइन भुगतान से बिक्री पर डिजिटल कूपन, विक्रय-मूल्य के अनुपात में अतिरिक्त कूपन; संभाग/राज्य स्तर पर पुरस्कार-लॉटरी। महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना (2015): प्रसूति सहायता – दो प्रसवों तक 45 दिन की अकुशल मजदूरी के बराबर (पिता को 15 दिन), विवाह सहायता (स्वयं व दो पुत्रियों हेतु), 60%+ अंक पर बच्चों को छात्रवृत्ति, गंभीर बीमारी पर ₹20,000 सहायता। मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना: खेत/मंडी में कार्य करते हुए मृत्यु/दुर्घटना पर किसान, खेतिहर मजदूर, हम्माल को सहायता। नियामक: राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961; राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड (1974)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम? – 1961
• राज्य कृषि विपणन बोर्ड का गठन? – 1974
• खेत/मंडी दुर्घटना पर सहायता योजना? – मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना
14. कृषि शिक्षा में अध्ययनरत बालिकाओं हेतु राज्य की प्रोत्साहन योजना में B.Sc./M.Sc. (कृषि) छात्रा को प्रति वर्ष कितनी प्रोत्साहन राशि देय है?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर ₹25,000 प्रति वर्ष है।
📘 विस्तार से समझें: कृषि शिक्षा में बालिकाओं हेतु प्रोत्साहन (आर्थिक समीक्षा 2025-26): उच्च माध्यमिक (कृषि विषय) – ₹15,000 प्रति वर्ष; B.Sc./M.Sc. (कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, कृषि अभियांत्रिकी, खाद्य प्रौद्योगिकी) – ₹25,000 प्रति वर्ष; Ph.D. – ₹40,000 प्रति वर्ष। उद्देश्य – कृषि में महिलाओं की तकनीकी भागीदारी बढ़ाना, क्योंकि कृषि-कार्यबल में महिलाएँ बड़ी संख्या में हैं (महिला प्रचालित जोतें 7.75 लाख)। महिला किसानों हेतु: ग्राम पंचायत स्तर पर एक-दिवसीय प्रशिक्षण (₹3,000 प्रति प्रशिक्षण), कृषि सखियाँ (राजीविका), नमो ड्रोन दीदी। राज्य के कृषि विश्वविद्यालय: स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर (1987, पहला), महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर, श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर, कृषि विश्वविद्यालय कोटा व जोधपुर।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• कृषि विषय में उच्च माध्यमिक छात्रा को प्रोत्साहन? – ₹15,000 प्रति वर्ष
• Ph.D. (कृषि) छात्रा को? – ₹40,000 प्रति वर्ष
• राज्य का पहला कृषि विश्वविद्यालय? – SKRAU बीकानेर (1987)
15. अभिकथन (A): रबी विपणन वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने गेहूँ के न्यूनतम समर्थन मूल्य (₹2,425 प्रति क्विंटल) के ऊपर ₹150 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया।
कारण (R): रबी 2025-26 में राज्य में गेहूँ की सरकारी खरीद 10 मार्च से 30 जून 2025 तक चली, जिसमें लगभग 21.37 लाख टन गेहूँ खरीदा गया।
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
📘 विस्तार से समझें: दोनों तथ्य आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार सही हैं, किंतु खरीद-अवधि या मात्रा, बोनस देने का कारण नहीं है – बोनस किसानों की आय बढ़ाने और सरकारी केंद्रों पर बिक्री को प्रोत्साहित करने का नीतिगत निर्णय है। अतः R, A की व्याख्या नहीं करता। विवरण: MSP ₹2,425 + बोनस ₹150 = किसान को ₹2,575 प्रति क्विंटल (2024-25 में बोनस ₹125 था); 327 क्रय केंद्र; भुगतान सीधे बैंक खाते में (DBT)। केंद्रीय पूल हेतु खरीद FCI व राज्य एजेंसियाँ (राजफेड, तिलम संघ, NAFED) करती हैं। दलहन-तिलहन की खरीद PM-AASHA (मूल्य समर्थन योजना) से; 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' में तुअर, उड़द, मसूर की 100% खरीद का प्रावधान। राजस्थान सरसों, चना, मूँग, मूँगफली की MSP-खरीद के प्रमुख राज्यों में है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 2025-26 में गेहूँ पर किसान को कुल मूल्य? – ₹2,575 प्रति क्विंटल
• रबी 2025-26 में क्रय केंद्र? – 327
• दलहन-तिलहन की MSP खरीद की केंद्रीय योजना? – PM-AASHA
16. बजट/कृषि बजट 2026-27 की निम्नलिखित घोषणाओं पर विचार कीजिए:
1. 50,000 सौर कृषि पंप (लगभग ₹1,500 करोड़)।
2. 20,000 किमी तारबंदी हेतु ₹228 करोड़, लगभग 50,000 किसान लाभान्वित।
3. 5,000 नए कस्टम हायरिंग केंद्र।
4. उत्कृष्टता केंद्र – किन्नू हेतु बाँसवाड़ा और आम हेतु श्रीगंगानगर।
5. अलवर में ₹200 करोड़ का दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल तीन कथन (1, 2 और 5) सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 3 गलत – 500 कस्टम हायरिंग केंद्र (लगभग ₹96 करोड़) घोषित हुए, 5,000 नहीं। कथन 4 उलटा – किन्नू उत्कृष्टता केंद्र श्रीगंगानगर (किन्नू-क्षेत्र) में और आम का बाँसवाड़ा में; प्याज/सब्ज़ी का अलवर में। अन्य कृषि-घोषणाएँ: सिंचाई कार्यों हेतु ₹11,300 करोड़+; कृषि उपकरण अनुदान ₹160 करोड़; दुग्ध उत्पादक संबल हेतु ₹700 करोड़ (लगभग 5 लाख पशुपालक); सहकारी डेयरी अवसंरचना कोष ₹2,000 करोड़; उपनिवेशन (colonisation) क्षेत्र के किसानों के बकाया पर 100% ब्याज-माफ़ी (मूलधन 1 अप्रैल – 30 सितंबर 2026 में जमा करने पर); गोपाल क्रेडिट कार्ड ₹150 करोड़। तारबंदी योजना – नीलगाय/आवारा पशुओं से फसल-सुरक्षा हेतु अनुदान; खेत-तलाई, डिग्गी, पाइपलाइन, फव्वारा/बूँद-बूँद सिंचाई पर भी अनुदान।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 2026-27 में घोषित कस्टम हायरिंग केंद्र? – 500
• किन्नू उत्कृष्टता केंद्र? – श्रीगंगानगर
• कृषि उपकरण अनुदान प्रावधान? – ₹160 करोड़
17. आर्थिक समीक्षा 2025-26 में दिए गए कृषि-जलवायु खंडों (नए जिलों सहित) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: खंड IA (शुष्क पश्चिमी मैदान) में जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर व बालोतरा जिले हैं।
कथन II: खंड IIIB (बाढ़-प्रवण पूर्वी मैदान) में खैरथल-तिजारा व कोटपूतली-बहरोड़ जिले सम्मिलित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: राज्य के 10 कृषि-जलवायु खंड (नए जिलों सहित): IA शुष्क पश्चिमी मैदान – जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा; IB सिंचित उत्तर-पश्चिमी मैदान – श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़; IC अति-शुष्क आंशिक सिंचित – बीकानेर, जैसलमेर, चूरू का भाग; IIA आंतरिक अपवाह संक्रमणीय मैदान – नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, झुंझुनूं, चूरू का भाग; IIB लूनी बेसिन संक्रमणीय मैदान – जालोर, पाली, सिरोही का भाग, ब्यावर का भाग; IIIA अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदान – जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़; IIIB बाढ़-प्रवण पूर्वी मैदान – अलवर, धौलपुर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, डीग; IVA उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान – उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ व सिरोही के भाग; IVB आर्द्र दक्षिणी मैदान – डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, सलूम्बर; V आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदान – कोटा, बूंदी, बाराँ, झालावाड़। अतः खैरथल-तिजारा व कोटपूतली-बहरोड़ IIIA में हैं, IIIB में नहीं (भले ही उनका मूल जिला अलवर IIIB में है)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• सलूम्बर किस कृषि-जलवायु खंड में? – IVB
• डीडवाना-कुचामन किस खंड में? – IIA
• डीग किस खंड में? – IIIB
18. राजस्थान में लघु एवं सीमांत कृषक वृद्धजन सम्मान पेंशन हेतु न्यूनतम आयु-पात्रता क्या है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर: महिला 55 वर्ष, पुरुष 58 वर्ष।
📘 विस्तार से समझें: मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन (सामान्य) में भी आयु-सीमा महिला 55 वर्ष व पुरुष 58 वर्ष है; लघु एवं सीमांत कृषक वृद्धजन सम्मान पेंशन इसी आयु-ढाँचे पर आधारित है, बशर्ते कृषक लघु (1-2 हे.) या सीमांत (<1 हे.) भूमिधारक हो। पेंशन राशि: राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा पेंशनों की मासिक राशि चरणबद्ध रूप से बढ़ाती रही है (₹1,000 से आगे क्रमिक वृद्धि); परीक्षा से पूर्व नवीनतम राशि अधिसूचना से अवश्य जाँचें। पेंशन का भुगतान जन आधार से जुड़े बैंक खाते में DBT द्वारा; वार्षिक भौतिक सत्यापन आवश्यक। बजट 2026-27 में मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन हेतु लगभग ₹10,411 करोड़। अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशनें: एकल नारी, विशेष योग्यजन, लघु-सीमांत कृषक – सभी 'राजस्थान सामाजिक सुरक्षा पेंशन नियम' के अंतर्गत (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• लघु कृषक की जोत-सीमा? – 1-2 हेक्टेयर
• सामाजिक सुरक्षा पेंशनों का नोडल विभाग? – सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
• वृद्धजन पेंशन हेतु बजट 2026-27? – लगभग ₹10,411 करोड़
19. कृषि योजनाओं (सूची-I) को उनके शुभारंभ/आरंभ (सूची-II) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I: (अ) मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (ब) पीएम-किसान (स) ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाज़ार) (द) किसान क्रेडिट कार्ड
सूची-II: (1) 14 अप्रैल 2016 (2) 19 फरवरी 2015, सूरतगढ़ (राजस्थान) (3) 24 फरवरी 2019, गोरखपुर (4) 1998
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही सुमेल: मृदा स्वास्थ्य कार्ड – 19 फरवरी 2015, सूरतगढ़; पीएम-किसान – 24 फरवरी 2019, गोरखपुर; ई-नाम – 14 अप्रैल 2016; KCC – 1998।
📘 विस्तार से समझें: मृदा स्वास्थ्य कार्ड – प्रधानमंत्री ने सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) से शुभारंभ; 12 मानकों (N, P, K, S, Zn, Fe, Cu, Mn, B, pH, EC, जैविक कार्बन) पर परीक्षण; 19 फरवरी – मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिवस। पीएम-किसान – ₹6,000 वार्षिक, 3 किस्तों में DBT; राजस्थान में 75.17 लाख किसान; राज्य की मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि से अतिरिक्त ₹3,000 (कुल ₹9,000)। ई-नाम – APMC मंडियों का ऑनलाइन एकीकृत मंच; राज्य में कृषक उपहार योजना। KCC (1998, NABARD) – ₹2 लाख तक बिना संपार्श्विक (जनवरी 2025 से); पशुपालन व मत्स्य पालन हेतु भी (2018-19)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिवस? – 19 फरवरी
• मृदा परीक्षण के मानक? – 12
• KCC पर बिना संपार्श्विक ऋण सीमा? – ₹2 लाख
20. आर्थिक समीक्षा 2025-26 (अग्रिम अनुमान) के फसल उत्पादन आँकड़ों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: कुल खाद्यान्न उत्पादन घटने के बावजूद रबी दलहन उत्पादन में लगभग 22.34% की वृद्धि अनुमानित है।
कथन II: तिलहन उत्पादन लगभग 100.46 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष से लगभग 7.18% अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: 2025-26 AE: खाद्यान्न 283.98 लाख टन (−8.28%; खरीफ अनाज में कमी प्रमुख कारण); खरीफ दलहन +2.34%; रबी दलहन +22.34%; तिलहन 100.46 लाख टन (+7.18%); गन्ना 3.61 लाख टन; कपास 17.94 लाख गाँठ। राष्ट्रीय स्थान (2023-24): बाजरा (41.34%), सरसों-राई (43.43%), कुल तिलहन (23.61%), मोटे अनाज (14.21%), ग्वार (88.80%) में प्रथम; मूँगफली द्वितीय; चना व दलहन तृतीय। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2025-26 से 2030-31) – तुअर, उड़द, मसूर की 100% ख़रीद NAFED/NCCF से; NMEO-तिलहन (60:40)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 2023-24 में ग्वार में राष्ट्रीय हिस्सा? – 88.80%
• सरसों-राई में राष्ट्रीय हिस्सा (2023-24)? – 43.43%
• दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की अवधि? – 2025-26 से 2030-31
21. जैविक/प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना में वर्मी-कम्पोस्ट इकाई हेतु ₹10,000 की सहायता, प्रति ब्लॉक 50 किसानों हेतु है।
2. परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) में जैविक उत्पादों का प्रमाणन केवल तृतीय-पक्ष (NPOP) प्रणाली से होता है।
3. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (2025-26) में राज्य में 2,000 क्लस्टर, 2.5 लाख किसान व 1 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 2 गलत – PKVY (2015) में क्लस्टर आधारित जैविक खेती व भागीदारी गारंटी प्रणाली (PGS-India) से प्रमाणन (समूह-आधारित, कम लागत); NPOP – निर्यात हेतु तृतीय-पक्ष प्रमाणन (APEDA)। प्राकृतिक खेती मिशन के 2,000 क्लस्टर – 1,800 केंद्र + 200 राज्य वित्तपोषित; कृषि सखी (36,787) सहायक। जैविक खेती नीति 2017 (राज्य)। जिला मुख्यालयों पर कृषि क्लिनिक – किसानों को परामर्श। राष्ट्रीय बाँस मिशन राजस्थान में लागू नहीं; राष्ट्रीय बागवानी मिशन 41 जिलों में।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• PKVY का आरंभ? – 2015
• PGS का पूर्ण रूप? – भागीदारी गारंटी प्रणाली
• राज्य की जैविक खेती नीति? – 2017
22. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार बागवानी से जुड़े मिशनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: राष्ट्रीय बागवानी मिशन राज्य के सभी 41 जिलों में लागू है।
कथन II: राष्ट्रीय बाँस मिशन राज्य के दक्षिणी जनजातीय जिलों में विशेष रूप से लागू है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – आर्थिक समीक्षा के अनुसार राष्ट्रीय बाँस मिशन राजस्थान में लागू नहीं है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन (MIDH का घटक; 60:40) – फल-सब्ज़ी-मसाला-फूल क्षेत्र विस्तार, उच्च-घनत्व बाग, संरक्षित खेती (पॉलीहाउस/शेडनेट), सूक्ष्म सिंचाई, कटाई-उपरांत प्रबंधन (पैक-हाउस, शीत-गृह), मधुमक्खी पालन। भारत-इज़रायल सहयोग से उत्कृष्टता केंद्र (आर्थिक समीक्षा में स्थान – झालावाड़, धौलपुर, टोंक, बूंदी, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, बस्सी, नांता-कोटा) – उन्नत नर्सरी, तकनीक प्रदर्शन, किसान प्रशिक्षण। राज्य की प्रमुख बागवानी फसलें – संतरा (झालावाड़), मसाले (जीरा, धनिया, मेथी – राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी), खजूर (पश्चिमी जिले), अनार, किन्नू (श्रीगंगानगर)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• MIDH में केंद्र-राज्य भागीदारी? – 60:40
• किन्नू उत्पादन क्षेत्र? – श्रीगंगानगर
• उत्कृष्टता केंद्र किस देश के सहयोग से? – इज़रायल
23. अभिकथन (A): राजस्थान में कृषि उत्पादन और कृषि GVA वृद्धि दर में वर्ष-दर-वर्ष भारी उतार-चढ़ाव देखे जाते हैं।
कारण (R): राज्य का अधिकांश कृषि क्षेत्र (लगभग 83%) वर्षा-आधारित है, और मानसून की अनियमितता सीधे उत्पादन को प्रभावित करती है।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: उदाहरण – खाद्यान्न 2023-24 में 240.92 → 2024-25 में 309.62 (रिकॉर्ड) → 2025-26 में 283.98 लाख टन; कृषि GVA वृद्धि 7.56% → 0.22%। वर्षा-निर्भरता व सूखा-प्रवणता (राज्य में देश के जल संसाधनों का मात्र ~1.16%) अस्थिरता के मूल कारण – R, A की व्याख्या है। समाधान – सूक्ष्म सिंचाई (PMKSY), फसल बीमा (PMFBY – खरीफ 2%, रबी 1.5%, वाणिज्यिक/बागवानी 5% प्रीमियम), सूखा-सहिष्णु बीज (बीज स्वावलंबन), पशुधन-आधारित विविधीकरण, जल संरक्षण (MJSA 2.0, अमृत सरोवर), रामजल सेतु व यमुना जल परियोजनाएँ।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• PMFBY में रबी प्रीमियम? – 1.5%
• 2024-25 का रिकॉर्ड खाद्यान्न? – 309.62 लाख टन
• राज्य का राष्ट्रीय जल-संसाधन हिस्सा? – ~1.16%
24. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार फसल बीमा (PMFBY) के अंतर्गत भुगतान किए गए दावों की राशि लगभग कितनी है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – लगभग ₹6,206 करोड़।
📘 विस्तार से समझें: अन्य कृषि आँकड़े (आर्थिक समीक्षा 2025-26): बीज वितरण ~1.12 लाख क्विंटल; मिनी-किट 31.5 लाख; पशुधन बीमा ~10.63 लाख पशु। मुख्यमंत्री के अनुसार इस वित्त वर्ष PMFBY में 73.49 लाख पॉलिसियाँ व ₹6,415 करोड़ के दावे भुगतान; 2022-24 के लंबित बीमा प्रीमियम का भुगतान। अन्य विकल्प: ₹2,245 करोड़ – MAA योजना के भुगतान दावे; ₹14,612 करोड़ – किसानों को विद्युत टैरिफ़ अनुदान (नवंबर 2025 तक); ₹29,432 करोड़ – बजट 2026-27 में विद्युत टैरिफ़ अनुदान। बजट 2026-27 में कृषि बीमा ₹5,988 करोड़।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• बजट 2026-27 में कृषि बीमा प्रावधान? – ₹5,988 करोड़
• मिनी-किट वितरण? – 31.5 लाख
• पशुधन बीमा आवरण? – ~10.63 लाख पशु
25. राजस्थान के कृषि विश्वविद्यालयों (सूची-I) को उनके स्थान (सूची-II) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I: (अ) स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (ब) महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स) श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय (द) राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (RAJUVAS)
सूची-II: (1) बीकानेर (SKRAU) (2) बीकानेर (RAJUVAS) (3) जोबनेर (जयपुर) (4) उदयपुर
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही सुमेल: SKRAU – बीकानेर; MPUAT – उदयपुर; SKNAU – जोबनेर; RAJUVAS – बीकानेर।
📘 विस्तार से समझें: SKRAU, बीकानेर (1987; राज्य का प्रथम कृषि विश्वविद्यालय – पूर्व 'राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय'); MPUAT, उदयपुर (1999); SKNAU, जोबनेर (2013); कृषि विश्वविद्यालय कोटा व जोधपुर (2013); RAJUVAS, बीकानेर (2010; पशु चिकित्सा); पशुपालन व कृषि अनुसंधान से राज्य की 'जोखिम-विविध' कृषि (पशुधन GVA 49.35%) को बल। कृषि शिक्षा प्रोत्साहन – कृषि अध्ययन करने वाली छात्राओं को प्रोत्साहन राशि (₹15,000/₹25,000/₹40,000 – स्तर अनुसार)। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) – जिलों में तकनीक-प्रसार।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राज्य का प्रथम कृषि विश्वविद्यालय? – SKRAU बीकानेर (1987)
• RAJUVAS की स्थापना? – 2010
• जिला स्तरीय कृषि तकनीक केंद्र? – कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
26. विधानसभा (फरवरी 2026) में मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत किसान-कल्याण उपलब्धियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: किसान सम्मान निधि के अंतर्गत लगभग ₹10,508 करोड़ सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित किए गए।
कथन II: अल्पकालीन ब्याज-मुक्त फ़सली ऋण के रूप में लगभग ₹48,325 करोड़ वितरित किए गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: अन्य दावे – PMFBY में इस वर्ष 73.49 लाख पॉलिसियाँ, ₹6,415 करोड़ के दावे; 22 जिलों में दिन में बिजली; विद्युत बिल अनुदान ₹48,591 करोड़; 2 लाख+ नए कृषि कनेक्शन; रबी 2025-26 में उर्वरक आपूर्ति माँग से अधिक। ब्याज-मुक्त फ़सली ऋण – सहकारी बैंकों/PACS के माध्यम से समय पर चुकाने वाले किसानों को (केंद्र की संशोधित ब्याज अनुदान योजना + राज्य अनुदान)। मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि – PM-किसान के ₹6,000 के अतिरिक्त ₹3,000 (कुल ₹9,000)। ध्यान दें – ये प्रशासनिक/राजनीतिक दावे हैं; आधिकारिक आँकड़ों हेतु आर्थिक समीक्षा।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• PM-किसान + राज्य सम्मान निधि का कुल? – ₹9,000 वार्षिक
• PMFBY पॉलिसियाँ (दावा)? – 73.49 लाख
• ब्याज-मुक्त फ़सली ऋण किस माध्यम से? – सहकारी बैंक/PACS
27. अभिकथन (A): राजस्थान बाजरा उत्पादन में देश में प्रथम है और इसे 'मिलेट बाउल' कहा जाता है।
कारण (R): बाजरा कम वर्षा, उच्च तापमान व रेतीली मृदा में भी अच्छी उपज देने वाली सूखा-सहिष्णु फ़सल है, जो पश्चिमी व उत्तरी राजस्थान की जलवायु के अनुकूल है।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: कृषि-जलवायु अनुकूलता ही बाजरा में प्रथम स्थान का कारण – R, A की व्याख्या है। 2023-24 में बाजरा का राष्ट्रीय हिस्सा 41.34%; मोटे अनाज में 14.21%। श्री अन्न प्रोत्साहन – अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष 2023 (भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र), राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन, श्री अन्नपूर्णा रसोई में मिलेट्स, बीज मिनी-किट। जोधपुर – ICAR-अखिल भारतीय समन्वित मोती बाजरा अनुसंधान परियोजना का मुख्यालय।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 2023-24 में बाजरा का राष्ट्रीय हिस्सा? – 41.34%
• अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष? – 2023
• मोती बाजरा समन्वित अनुसंधान परियोजना मुख्यालय? – जोधपुर
28. राजस्थान में कृषि विपणन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 मंडियों के विनियमन का आधार है।
2. राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड (RSAMB) का गठन 2010 में हुआ।
3. ई-नाम मंडियों में ऑनलाइन भुगतान/बिक्री को प्रोत्साहन हेतु राज्य में कृषक उपहार योजना संचालित है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 2 गलत – RSAMB का गठन 1974 में हुआ (मंडी विकास, सड़कें, किसान कल्याण कोष, कृषि प्रसंस्करण नीति/PM-FME की नोडल)। अन्य – किसान कलेवा योजना (मंडी में किसानों को रियायती भोजन), महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना, गौण मंडियाँ, फल-सब्ज़ी मंडियाँ। ई-नाम (14 अप्रैल 2016) – ऑनलाइन व्यापार, गुणवत्ता परीक्षण, प्रत्यक्ष भुगतान। कृषक उपहार – ई-नाम पर बिक्री/ई-भुगतान करने वाले किसानों को लकी-ड्रॉ से पुरस्कार।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• RSAMB का गठन? – 1974
• मंडी में किसानों को रियायती भोजन? – किसान कलेवा योजना
• PM-FME की राज्य नोडल एजेंसी? – RSAMB
29. संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत के प्रस्ताव पर 'अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज (मिलेट्स) वर्ष' किस वर्ष मनाया गया?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 2023।
📘 विस्तार से समझें: भारत ने 2018 को 'राष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष' के रूप में मनाया और मिलेट्स को 'पोषक-अनाज' घोषित किया; केंद्रीय बजट 2023-24 में 'श्री अन्न' नाम; हैदराबाद का भारतीय मिलेट्स अनुसंधान संस्थान (IIMR) – 'वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र'। राजस्थान – बाजरा (41.34%) व मोटे अनाज में प्रथम; ज्वार, रागी नहीं बल्कि बाजरा प्रमुख; राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (पोषक-अनाज घटक), बीज मिनी-किट, श्री अन्नपूर्णा रसोई थाली में मिलेट्स।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• भारत का राष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष? – 2018
• 'श्री अन्न' नाम किस बजट में? – केंद्रीय बजट 2023-24
• IIMR कहाँ? – हैदराबाद
30. केंद्र की संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: इसमें किसानों को ₹3 लाख तक के अल्पकालीन फ़सली ऋण 7% ब्याज पर मिलते हैं; समय पर चुकाने पर 3% अतिरिक्त प्रोत्साहन से प्रभावी दर 4% रह जाती है।
कथन II: यह योजना केवल सहकारी बैंकों हेतु है; वाणिज्यिक बैंक व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इसमें सम्मिलित नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – MISS सार्वजनिक/निजी वाणिज्यिक बैंकों, RRB, लघु वित्त बैंकों व सहकारी बैंकों सभी पर लागू (बैंकों को 1.5% ब्याज अनुदान)। KCC – पशुपालन व मत्स्य पालन हेतु भी; ₹2 लाख तक बिना संपार्श्विक (जनवरी 2025 से)। केंद्रीय बजट 2025-26 – KCC ऋण सीमा ₹3 लाख से ₹5 लाख (संशोधित योजना हेतु) की घोषणा। राज्य – सहकारी बैंकों से ब्याज-मुक्त फ़सली ऋण (राज्य अतिरिक्त अनुदान वहन करता है); गोपाल क्रेडिट कार्ड (पशुपालकों को ₹1 लाख तक ब्याज-मुक्त)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• MISS में बैंकों को ब्याज अनुदान? – 1.5%
• समय पर चुकाने पर प्रभावी दर? – 4%
• पशुपालकों हेतु राज्य का ब्याज-मुक्त ऋण कार्ड? – गोपाल क्रेडिट कार्ड
31. सूची-I (राजस्थान का कृषि-जलवायु खंड) को सूची-II (उसका प्रतिनिधि जिला) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I: (अ) IB – सिंचित उत्तर-पश्चिमी मैदान (ब) IIA – आंतरिक प्रवाह का संक्रमणीय मैदान (स) IVB – आर्द्र दक्षिणी मैदान (द) V – आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदान
सूची-II: (1) सीकर (2) बाँसवाड़ा (3) श्रीगंगानगर (4) कोटा
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – IB: श्रीगंगानगर; IIA: सीकर; IVB: बाँसवाड़ा; V: कोटा।
📘 विस्तार से समझें: राजस्थान को राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परियोजना (NARP) के अंतर्गत 10 कृषि-जलवायु खंडों में बाँटा गया है – IA शुष्क पश्चिमी मैदान (बाड़मेर, जोधपुर; अब फलौदी, बालोतरा भी), IB सिंचित उत्तर-पश्चिमी मैदान (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ – गंग नहर व इंदिरा गांधी नहर; गेहूँ, कपास, किन्नू), IC अति-शुष्क आंशिक सिंचित (बीकानेर, जैसलमेर, चूरू), IIA आंतरिक प्रवाह का संक्रमणीय मैदान (नागौर, सीकर, झुंझुनूं), IIB लूनी बेसिन का संक्रमणीय मैदान (जालोर, पाली, सिरोही), IIIA अर्ध-शुष्क पूर्वी मैदान (जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक; अब खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़), IIIB बाढ़ प्रवण पूर्वी मैदान (अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर), IVA उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान व अरावली पहाड़ियाँ (भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़), IVB आर्द्र दक्षिणी मैदान (डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़ – मक्का, धान), V आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदान (कोटा, बूंदी, बाराँ, झालावाड़ – हाड़ौती; सोयाबीन, धनिया, संतरा)। इन खंडों पर कृषि अनुसंधान केंद्र व फ़सल-किस्म अनुशंसाएँ आधारित।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• कृषि-जलवायु खंडों की संख्या? – 10
• हाड़ौती किस खंड में? – V
• अति-शुष्क आंशिक सिंचित खंड? – IC
32. आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार वर्ष 2023-24 में राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान के स्थान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: राजस्थान कुल तिलहन (23.61%) तथा मोटे अनाज (14.21%) के उत्पादन में देश में प्रथम रहा।
कथन II: राजस्थान चने के उत्पादन में देश में प्रथम रहा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – चने में राजस्थान तृतीय (17.39%) रहा; कुल दलहन में भी तृतीय (13.76%) व सोयाबीन में तृतीय (8.96%)। प्रथम स्थान – बाजरा (41.34%), रेपसीड-सरसों (43.43%), कुल तिलहन, मोटे अनाज, ग्वार (88.80%); द्वितीय – मूँगफली (19.91%)। चने में मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र अग्रणी हैं। तिलहन में प्रथम स्थान मुख्यतः सरसों के कारण (भरतपुर, अलवर, श्रीगंगानगर, टोंक आदि क्षेत्र) – इसलिए 'पीली क्रांति' व राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन में राजस्थान की केंद्रीय भूमिका। मोटे अनाज में प्रथम स्थान बाजरा के कारण (पश्चिमी शुष्क जिले)। 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में तिलहन उत्पादन 100.46 लाख टन (+7.18%)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• चने में राजस्थान का स्थान? – तृतीय
• सोयाबीन में हिस्सा? – 8.96%
• मूँगफली में स्थान? – द्वितीय
33. कृषि गणना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: 11वीं कृषि गणना (संदर्भ वर्ष 2021-22) का शुभारंभ 28 जुलाई 2022 को हुआ, जिसमें पहली बार आँकड़ा संग्रह स्मार्टफ़ोन/टैबलेट से किया गया।
कथन II: 10वीं कृषि गणना (2015-16) के अनुसार राजस्थान में महिलाओं के स्वामित्व वाली क्रियाशील जोतें लगभग 7.75 लाख थीं, जो 2010-11 की तुलना में लगभग 41.94% अधिक थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कृषि गणना हर पाँच वर्ष (पहली 1970-71) – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय; राजस्थान में राजस्व मंडल/भू-अभिलेख तंत्र के माध्यम से। 10वीं गणना (2015-16) के राजस्थान आँकड़े – कुल क्रियाशील जोतें 76.55 लाख (2010-11: 68.88 लाख); औसत आकार 2.73 हेक्टेयर (3.07 से घटा; राष्ट्रीय 1.08 हेक्टेयर); सीमांत 40.12%, लघु 21.90%, अर्ध-मध्यम 18.50%, मध्यम 14.79%, बड़ी 4.69%। महिला जोतों में वृद्धि के कारण – उत्तराधिकार में नाम दर्ज होना, संयुक्त खातेदारी, महिला-नामित योजनाओं के लाभ। जोतों का बढ़ता विखंडन मशीनीकरण व निवेश घटाता है – इसलिए कस्टम हायरिंग केंद्र (बजट 2026-27 में 500), FPO व सहकारी खेती को बढ़ावा। श्रेणियाँ – सीमांत <1, लघु 1-2, अर्ध-मध्यम 2-4, मध्यम 4-10, बड़ी >10 हेक्टेयर।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• पहली कृषि गणना? – 1970-71
• राष्ट्रीय औसत जोत 2015-16? – 1.08 हेक्टेयर
• सीमांत जोत की सीमा? – 1 हेक्टेयर से कम
34. सूची-I (फल) को सूची-II (राजस्थान में उसका प्रमुख उत्पादक जिला) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I: (अ) किन्नू (ब) संतरा (स) अमरूद (द) अनार
सूची-II: (1) श्रीगंगानगर (2) सवाई माधोपुर (3) झालावाड़ (4) बाड़मेर
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – किन्नू: श्रीगंगानगर; संतरा: झालावाड़; अमरूद: सवाई माधोपुर; अनार: बाड़मेर।
📘 विस्तार से समझें: किन्नू – श्रीगंगानगर (नहरी सिंचाई; संकर नारंगी); संतरा – झालावाड़ (भवानी मंडी क्षेत्र – 'राजस्थान का नागपुर'); अमरूद – सवाई माधोपुर (बड़े बाग़ान); अनार – बाड़मेर-जालोर (शुष्क जलवायु व ड्रिप सिंचाई से नया केंद्र)। अन्य – खजूर (बीकानेर, जैसलमेर – टिश्यू कल्चर पौधे), आँवला (अजमेर, चित्तौड़गढ़), आम (बाँसवाड़ा, भीलवाड़ा), मौसमी (श्रीगंगानगर)। उद्यानिकी योजनाएँ – एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के अंतर्गत राष्ट्रीय बागवानी मिशन सभी 41 जिलों में; इंडो-इज़रायल सहयोग से फल-सब्ज़ी उत्कृष्टता केंद्र। बजट 2026-27 में किन्नू, आम, प्याज़ आदि हेतु उत्कृष्टता केंद्र की घोषणा।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• 'राजस्थान का नागपुर'? – झालावाड़
• किन्नू किस नहरी क्षेत्र में? – श्रीगंगानगर
• राष्ट्रीय बागवानी मिशन जिले? – 41
35. सूची-I (ICAR संस्थान) को सूची-II (स्थान) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I: (अ) रेपसीड-सरसों अनुसंधान निदेशालय (ब) राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (स) केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (द) केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI)
सूची-II: (1) जोधपुर (2) सेवर (भरतपुर) (3) तबीजी (अजमेर) (4) बीकानेर
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – सरसों: सेवर (भरतपुर); बीजीय मसाले: तबीजी (अजमेर); शुष्क बागवानी: बीकानेर; CAZRI: जोधपुर।
📘 विस्तार से समझें: रेपसीड-सरसों अनुसंधान निदेशालय (DRMR), सेवर-भरतपुर – सरसों की उन्नत किस्में; भरतपुर संभाग सरसों का प्रमुख क्षेत्र। राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (NRCSS), तबीजी-अजमेर – जीरा, धनिया, मेथी, सौंफ, अजवाइन पर शोध; राजस्थान व गुजरात बीजीय मसालों के प्रमुख उत्पादक। केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH), बीकानेर – खजूर, बेर, अनार, कैर-सांगरी जैसी शुष्क फ़सलें। CAZRI, जोधपुर (1959) – मरुस्थलीकरण नियंत्रण, शुष्क खेती, बालू टिब्बा स्थिरीकरण। अन्य ICAR संस्थान राजस्थान में – केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (अविकानगर, टोंक), राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (बीकानेर)। राज्य कृषि विश्वविद्यालय – SKRAU बीकानेर, MPUAT उदयपुर, SKNAU जोबनेर, कृषि विश्वविद्यालय कोटा व जोधपुर।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• CAZRI स्थापना? – 1959
• जीरा-धनिया शोध केंद्र? – तबीजी (अजमेर)
• राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र? – बीकानेर
36. राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (NMEO-Oilseeds) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे अक्टूबर 2024 में 2024-25 से 2030-31 की अवधि हेतु स्वीकृति दी।
कथन II: इसका लक्ष्य प्राथमिक तिलहन उत्पादन को 2022-23 के लगभग 39 मिलियन टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: परिव्यय लगभग ₹10,103 करोड़; फ़सलें – सरसों, मूँगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल आदि; साथ ही कपास-बीज, धान की भूसी जैसे द्वितीयक स्रोतों से तेल निष्कर्षण बढ़ाना। उपाय – उच्च गुणवत्ता बीज ('बीज ग्राम', 'साथी' पोर्टल से बीज की ट्रेसबिलिटी), मूल्य-शृंखला क्लस्टर, धान-परती भूमि में तिलहन, FPO। पहले – NMEO-ऑयल पाम (अगस्त 2021; पूर्वोत्तर व अंडमान पर फ़ोकस)। भारत अपनी खाद्य तेल आवश्यकता का लगभग 55-60% आयात करता है (पाम – इंडोनेशिया/मलेशिया, सोयाबीन व सूरजमुखी तेल)। राजस्थान – रेपसीड-सरसों में 43.43% राष्ट्रीय हिस्सा, कुल तिलहन में प्रथम (23.61%); 2025-26 में तिलहन उत्पादन 100.46 लाख टन; केंद्र-राज्य अंश 60:40।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• NMEO-ऑयल पाम? – अगस्त 2021
• NMEO-तिलहन परिव्यय? – लगभग ₹10,103 करोड़
• राजस्थान हेतु केंद्र-राज्य अंश? – 60:40
37. प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) का कौन-सा घटक बाज़ार मूल्य MSP से कम होने पर, फ़सल की भौतिक ख़रीद किए बिना, किसानों को अंतर-राशि का भुगतान करता है?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS)।
📘 विस्तार से समझें: PM-AASHA (2018) – दलहन, तिलहन व खोपरा के किसानों को MSP सुनिश्चित करने हेतु। घटक – (1) PSS: केंद्रीय नोडल एजेंसियाँ (NAFED, NCCF) राज्य एजेंसियों (राजस्थान में RAJFED) के साथ MSP पर भौतिक ख़रीद; राजस्थान में सरसों, चना, मूँग, मूँगफली, उड़द की ख़रीद इसी से। (2) PDPS: तिलहन हेतु – MSP व मॉडल/विक्रय मूल्य का अंतर सीधे खाते में (मध्य प्रदेश की भावांतर योजना जैसा मॉडल)। (3) निजी ख़रीद एवं स्टॉकिस्ट योजना (PPSS) – पायलट। 2024 में मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) व बाज़ार हस्तक्षेप योजना (MIS) को भी PM-AASHA में सम्मिलित किया गया; MIS शीघ्र नष्ट होने वाली उपज (टमाटर, प्याज़, आलू) हेतु। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2025-26 से) में तुअर, उड़द, मसूर की 100% ख़रीद का प्रावधान।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• भावांतर मॉडल किस राज्य का? – मध्य प्रदेश
• राजस्थान में राज्य ख़रीद एजेंसी? – RAJFED
• MIS किस उपज हेतु? – शीघ्र नष्ट होने वाली
38. 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन एवं संवर्धन की केंद्रीय योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: इस योजना का शुभारंभ 29 फ़रवरी 2020 को चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) से हुआ।
कथन II: इसके अंतर्गत प्रत्येक FPO को ₹20 करोड़ तक के ऋण पर क्रेडिट गारंटी दी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – क्रेडिट गारंटी ₹2 करोड़ तक के परियोजना ऋण पर (NABARD व NCDC के क्रेडिट गारंटी कोष से)। अन्य प्रावधान – परिव्यय ₹6,865 करोड़; प्रत्येक FPO को 3 वर्षों हेतु ₹18 लाख तक प्रबंधन सहायता; प्रति किसान-सदस्य ₹2,000 (अधिकतम ₹15 लाख प्रति FPO) इक्विटी अनुदान; क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठन (CBBO) गठन में सहायता; मैदानी क्षेत्र में न्यूनतम 300 तथा पहाड़ी/पूर्वोत्तर में 100 सदस्य; 'एक जिला एक उत्पाद' से जुड़ाव। FPO के लाभ – सामूहिक सौदेबाज़ी, सस्ता इनपुट, भंडारण-प्रसंस्करण, सीधा विपणन; सीमांत-लघु किसानों (राजस्थान में 62%) के लिए विशेष उपयोगी। राजस्थान में राजीविका से जुड़े महिला FPO (जैसे हाड़ौती महिला किसान उत्पादक कंपनी) भी सक्रिय।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• योजना परिव्यय? – ₹6,865 करोड़
• अधिकतम इक्विटी अनुदान प्रति FPO? – ₹15 लाख
• मैदानी क्षेत्र में न्यूनतम सदस्य? – 300
39. राजस्थान में सिंचाई के स्रोतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: राज्य में शुद्ध सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा भाग नहरों से सिंचित होता है।
कथन II: कुएँ और नलकूप राज्य में सिंचाई का सबसे बड़ा स्रोत हैं, जिसके कारण अनेक ब्लॉकों में भू-जल का अति-दोहन हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन I गलत – कुएँ व नलकूप (भू-जल) शुद्ध सिंचित क्षेत्र के लगभग दो-तिहाई से अधिक भाग की सिंचाई करते हैं; नहरें (इंदिरा गांधी नहर, गंग नहर, भाखड़ा, चंबल, माही आदि) दूसरे स्थान पर; तालाब बहुत कम। प्रभाव – केंद्रीय भू-जल बोर्ड के आकलन में राजस्थान के अधिकांश ब्लॉक 'अति-दोहित' श्रेणी में; भू-जल दोहन का स्तर 140% से भी अधिक (पुनर्भरण से अधिक निकासी)। मुफ़्त/सस्ती कृषि बिजली (बजट में कृषि हेतु विद्युत दर अनुदान) से नलकूप सिंचाई बढ़ी। उपाय – सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप/फव्वारा – PMKSY 'प्रति बूँद अधिक फ़सल'), मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0, अटल भू-जल योजना (राजस्थान के चयनित जल-संकटग्रस्त ब्लॉक), फार्म पॉन्ड/डिग्गी, सौर पंप (कुसुम), फ़सल विविधीकरण (कम पानी वाली फ़सलें – बाजरा, ग्वार)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• राजस्थान में सिंचाई का सबसे बड़ा स्रोत? – कुएँ व नलकूप
• भू-जल हेतु केंद्रीय योजना? – अटल भू-जल योजना
• सूक्ष्म सिंचाई घटक? – प्रति बूँद अधिक फ़सल
40. अभिकथन (A): राजस्थान के ग्वार उत्पादकों की आय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार, विशेषकर अमेरिका के तेल-गैस उद्योग की माँग से गहराई से प्रभावित होती है।
कारण (R): ग्वार गम का प्रयोग शेल तेल/गैस निष्कर्षण की हाइड्रॉलिक फ्रैक्चरिंग (फ्रैकिंग) में गाढ़ा करने वाले पदार्थ के रूप में होता है।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: राजस्थान देश के ग्वार उत्पादन का लगभग 88.80% (2023-24) देता है – बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, बाड़मेर, जोधपुर जैसे शुष्क जिलों में खरीफ़ की वर्षा-आधारित फ़सल। ग्वार के बीज के भ्रूणपोष (endosperm) से ग्वार गम बनता है। 2011-12 में अमेरिकी शेल गैस उछाल के समय ग्वार बीज की क़ीमतें कई गुना बढ़ीं ('ग्वार बूम'), फिर गिरावट से किसानों को नुकसान – यह वैश्विक माँग पर निर्भर कृषि-निर्यात के मूल्य-जोखिम का उदाहरण है। अन्य उपयोग – खाद्य (आइसक्रीम, सॉस में स्थिरक), कागज़, वस्त्र, औषधि, पशु आहार (चूरी)। ग्वार दलहनी फ़सल है – मृदा में नाइट्रोजन स्थिरीकरण, कम पानी में उपज। जोधपुर में ग्वार गम प्रसंस्करण इकाइयों का समूह; भारत विश्व का सबसे बड़ा ग्वार गम निर्यातक।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• ग्वार गम किस भाग से? – बीज का भ्रूणपोष
• ग्वार गम प्रसंस्करण केंद्र? – जोधपुर
• ग्वार में राजस्थान का हिस्सा 2023-24? – 88.80%
41. भारत सरकार के टिड्डी चेतावनी संगठन (Locust Warning Organisation) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – जोधपुर।
📘 विस्तार से समझें: टिड्डी चेतावनी संगठन (LWO) – 1939 में स्थापित; वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय (DPPQS, फ़रीदाबाद – इसलिए फ़रीदाबाद विकल्प भ्रामक) के अधीन; मुख्यालय जोधपुर तथा राजस्थान-गुजरात के अनुसूचित मरुस्थलीय क्षेत्र (लगभग 2 लाख वर्ग किमी) में सर्कल कार्यालय (जैसे बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, फलौदी, चूरू, नागौर, सूरतगढ़, पालनपुर, भुज)। रेगिस्तानी टिड्डी (Schistocerca gregaria) के प्रजनन-स्थल – थार मरुस्थल, पाकिस्तान, ईरान, अरब प्रायद्वीप; FAO की डेज़र्ट लोकस्ट सूचना सेवा से समन्वय। 2019-20 में राजस्थान में दशकों का सबसे बड़ा टिड्डी हमला – कई जिलों की फ़सलें प्रभावित; ड्रोन व हेलीकॉप्टर से छिड़काव, फ़सल नुकसान पर SDRF से आदान-अनुदान। भारत-पाकिस्तान सीमा पर टिड्डी नियंत्रण हेतु द्विपक्षीय बैठकें भी होती रही हैं।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• LWO स्थापना? – 1939
• LWO किस निदेशालय के अधीन? – DPPQS (फ़रीदाबाद)
• रेगिस्तानी टिड्डी का वैज्ञानिक नाम? – Schistocerca gregaria
42. डिजिटल कृषि मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे सितंबर 2024 में स्वीकृति दी।
2. इसके 'एग्रीस्टैक' घटक में किसान रजिस्ट्री, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और फ़सल बुआई रजिस्ट्री सम्मिलित हैं।
3. 'कृषि निर्णय समर्थन प्रणाली' (Krishi DSS) एग्रीस्टैक की तीन रजिस्ट्रियों में से एक है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: कथन 3 गलत – कृषि DSS एग्रीस्टैक से अलग, मिशन का दूसरा स्तंभ है – इसमें रिमोट सेंसिंग, मौसम, मृदा, भू-जल, फ़सल उपज मॉडल को एकीकृत कर सूखा/बाढ़ निगरानी, बीमा दावों व फ़सल आकलन में सहायता। मिशन परिव्यय लगभग ₹2,817 करोड़; तीसरा तत्व – विस्तृत मृदा प्रोफ़ाइल मानचित्रण, डिजिटल सामान्य फ़सल अनुमान सर्वेक्षण (DGCES)। किसान रजिस्ट्री से प्रत्येक किसान को आधार-लिंक्ड 'किसान ID' – PM-किसान, फ़सल बीमा, KCC, MSP ख़रीद में बिना बार-बार दस्तावेज़ सत्यापन के लाभ। राजस्थान में किसान रजिस्ट्री हेतु विशेष शिविर (फ़ार्मर रजिस्ट्री अभियान) चलाए गए; डिजिटल फ़सल सर्वेक्षण (गिरदावरी) से फ़सल बुआई रजिस्ट्री तैयार। यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल – आधार, UPI की तरह – कृषि में।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• मिशन परिव्यय? – लगभग ₹2,817 करोड़
• किसान रजिस्ट्री से क्या मिलता है? – किसान ID
• फ़सल बुआई रजिस्ट्री का आधार? – डिजिटल फ़सल सर्वेक्षण
43. यदि किसी राज्य में शुद्ध बोया गया क्षेत्र 180 लाख हेक्टेयर और सकल फ़सली क्षेत्र 270 लाख हेक्टेयर हो, तो फ़सल गहनता (cropping intensity) कितनी होगी?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 150% (270 ÷ 180 × 100)।
📘 विस्तार से समझें: फ़सल गहनता = सकल फ़सली क्षेत्र ÷ शुद्ध बोया गया क्षेत्र × 100; यह बताती है कि एक ही भूमि पर वर्ष में औसतन कितनी बार फ़सल ली जाती है (100% = केवल एक फ़सल)। सकल फ़सली क्षेत्र – एक से अधिक बार बोए गए क्षेत्र को उतनी बार गिनना; 'एक से अधिक बार बोया गया क्षेत्र' = सकल − शुद्ध (यहाँ 90 लाख हेक्टेयर – विकल्प 90% भ्रामक)। राजस्थान में शुद्ध बोया गया क्षेत्र 2024-25 में प्रतिवेदित क्षेत्र (343.43 लाख हेक्टेयर) का 53.02% (लगभग 182 लाख हेक्टेयर)। फ़सल गहनता बढ़ाने के साधन – सुनिश्चित सिंचाई (रबी फ़सल हेतु), अल्पावधि किस्में, मशीनीकरण, जायद फ़सलें। राजस्थान की सीमा – 83% वर्षा-आधारित कृषि; इसलिए पश्चिमी जिलों में प्रायः एक ही (खरीफ़) फ़सल, जबकि नहरी/नलकूप सिंचित उत्तर-पश्चिम व पूर्वी जिलों में दो फ़सलें।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• फ़सल गहनता सूत्र? – सकल फ़सली ÷ शुद्ध बोया × 100
• राजस्थान शुद्ध बोया क्षेत्र 2024-25? – 53.02%
• वर्षा-आधारित कृषि हिस्सा? – लगभग 83%
44. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: इसे 1 जुलाई 2015 को स्वीकृति दी गई, जिसका आदर्श वाक्य 'हर खेत को पानी' और 'प्रति बूँद अधिक फ़सल' है।
कथन II: 'प्रति बूँद अधिक फ़सल' घटक में ड्रिप/फव्वारा सिंचाई हेतु लघु व सीमांत किसानों को 55% तथा अन्य किसानों को 45% सहायता का प्रावधान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: दोनों कथन सही हैं।
📘 विस्तार से समझें: PMKSY के घटक – (1) त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) – अधूरी बड़ी-मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ पूरी करना; (2) हर खेत को पानी (HKKP) – कमांड क्षेत्र विकास, सतही लघु सिंचाई, जल निकायों की मरम्मत-जीर्णोद्धार (RRR); (3) प्रति बूँद अधिक फ़सल (PDMC) – सूक्ष्म सिंचाई; (4) वाटरशेड विकास (WDC-PMKSY, भूमि संसाधन विभाग)। सहायता की ऊपर बताई दरें केंद्र-राज्य मिलकर इकाई लागत पर; राजस्थान अतिरिक्त राज्य अनुदान से कई श्रेणियों में सहायता बढ़ाता है। राजस्थान में सूक्ष्म सिंचाई अत्यंत महत्त्वपूर्ण – 83% वर्षा-आधारित कृषि, भू-जल अति-दोहन; ड्रिप से 30-50% जल बचत व उपज वृद्धि; अनार, किन्नू, सब्ज़ियों व जीरा जैसी फ़सलों में इसका व्यापक प्रयोग। सौर पंप (कुसुम-B) के साथ ड्रिप/फव्वारा जोड़ना 'जल-ऊर्जा' दक्षता का मॉडल है।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• PMKSY में वाटरशेड घटक किस विभाग के अधीन? – भूमि संसाधन विभाग
• AIBP का उद्देश्य? – अधूरी बड़ी-मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ
• ड्रिप से जल बचत लगभग? – 30-50%
45. गन्ने के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित 'उचित एवं लाभकारी मूल्य' (FRP) किस वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत निर्धारित होता है?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – गन्ना (नियंत्रण) आदेश 1966।
📘 विस्तार से समझें: FRP – 2009-10 से वैधानिक न्यूनतम मूल्य (पूर्व 'वैधानिक न्यूनतम मूल्य' SMP के स्थान पर); CACP की अनुशंसा पर आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति घोषित करती है; चीनी मिलें FRP से कम भुगतान नहीं कर सकतीं। गन्ना (नियंत्रण) आदेश स्वयं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत जारी आदेश है – इसलिए सबसे सटीक उत्तर यही आदेश है। कुछ राज्य (उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) इससे ऊपर 'राज्य परामर्शित मूल्य' (SAP) देते हैं। FRP निर्धारण के आधार – उत्पादन लागत, चीनी की रिकवरी दर, उपभोक्ता हित, वैकल्पिक फ़सलों का प्रतिफल। MSP वाली 22 फ़सलें गन्ने के अतिरिक्त हैं। राजस्थान में गन्ना सीमित (मुख्यतः श्रीगंगानगर, बूंदी, चित्तौड़गढ़ क्षेत्र); राष्ट्रीय स्तर पर नगण्य हिस्सा।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• FRP किस वर्ष से? – 2009-10
• FRP से पहले गन्ने का मूल्य? – SMP
• राज्य द्वारा अतिरिक्त गन्ना मूल्य? – SAP
46. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत मिट्टी के कितने मानकों (parameters) का परीक्षण कर किसान को कार्ड दिया जाता है?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 12 मानक।
📘 विस्तार से समझें: 12 मानक – मुख्य पोषक तत्व: नाइट्रोजन (N), फ़ॉस्फ़ोरस (P), पोटैशियम (K); द्वितीयक: सल्फ़र (S); सूक्ष्म पोषक: ज़िंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज़, बोरॉन; भौतिक-रासायनिक: pH (अम्लीयता/क्षारीयता), EC (विद्युत चालकता – लवणता), OC (जैविक कार्बन)। योजना का शुभारंभ – 19 फ़रवरी 2015, सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर); 2022-23 से यह RKVY के 'मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता' घटक में। कार्ड में फ़सलवार उर्वरक-मात्रा की सिफ़ारिश – असंतुलित उर्वरक प्रयोग (विशेषकर यूरिया का अधिक प्रयोग, N:P:K अनुपात बिगड़ना) रोकना उद्देश्य। राजस्थान की मिट्टियों में सामान्य समस्याएँ – जैविक कार्बन की कमी, क्षारीयता/लवणता (पश्चिमी व नहरी क्षेत्रों में), ज़िंक की कमी; इसके लिए जिप्सम वितरण, गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना, प्राकृतिक खेती मिशन।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• SHC शुभारंभ स्थल? – सूरतगढ़
• EC किसका माप? – लवणता
• क्षारीय मिट्टी सुधारक? – जिप्सम
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही सुमेलन – पीली: तिलहन; नीली: मत्स्य; रजत: अंडा/मुर्गीपालन; धूसर: उर्वरक।
📘 विस्तार से समझें: पीली क्रांति – 1986 में तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन (सैम पित्रोदा से जुड़ा); राजस्थान सरसों में अग्रणी होने से इसका प्रमुख लाभार्थी। नीली क्रांति – मत्स्य उत्पादन (अब PMMSY 2020 – 'नीली क्रांति 2.0'); राजस्थान में 4.30 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र। रजत क्रांति – अंडा उत्पादन; श्वेत क्रांति – दूध (ऑपरेशन फ़्लड, डॉ. वर्गीज़ कुरियन, 1970); हरित क्रांति – खाद्यान्न (डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन, 1966-67 HYV बीज); स्वर्ण क्रांति – बागवानी/शहद; गुलाबी क्रांति – प्याज़/झींगा/दवा (संदर्भ-भेद); भूरी क्रांति – चमड़ा/कोको; गोल क्रांति – आलू; लाल क्रांति – मांस/टमाटर। राजस्थान का विशेष योगदान – दूध (देश में द्वितीय, 14.51%), ऊन (47.53%), तिलहन (प्रथम)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन? – 1986
• श्वेत क्रांति के जनक? – डॉ. वर्गीज़ कुरियन
• राजस्थान का राष्ट्रीय दूध हिस्सा? – 14.51%
48. पीएम-कुसुम योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: यह योजना 2019 में तीन घटकों (A, B, C) के साथ आरंभ की गई।
कथन II: घटक B मौजूदा ग्रिड-संबद्ध कृषि पंपों के सौरकरण से संबंधित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – घटक B स्वतंत्र (स्टैंडअलोन, ऑफ़-ग्रिड) सौर कृषि पंपों की स्थापना है, जहाँ ग्रिड नहीं; ग्रिड-संबद्ध पंपों का सौरकरण घटक C है (अब फ़ीडर-स्तरीय सौरकरण – FLS भी)। घटक A – बंजर/परती भूमि पर 500 kW से 2 MW के विकेंद्रीकृत ग्रिड-संबद्ध संयंत्र (उपकेंद्र से 5 किमी के भीतर)। घटक B में केंद्रीय वित्तीय सहायता बेंचमार्क लागत का 30% (7.5 HP तक की क्षमता के लिए सीमित), राज्य कम से कम 30%, शेष किसान (बैंक ऋण संभव)। लाभ – डीज़ल व्यय समाप्त, दिन में सिंचाई, अतिरिक्त बिजली बेचकर आय (घटक A व C), डिस्कॉम्स का कृषि सब्सिडी भार घटना। राजस्थान – घटक A में 5,250 MW स्वीकृत; बजट 2026-27 में 50,000 सौर पंप (₹1,500 करोड़); 22 जिलों में किसानों को दिन में बिजली का दावा। जोखिम – मुफ़्त/सस्ती सौर ऊर्जा से भू-जल दोहन बढ़ने की आशंका, इसलिए ड्रिप/फव्वारा के साथ जोड़ना आवश्यक।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• घटक C? – ग्रिड-संबद्ध पंपों का सौरकरण
• घटक B में केंद्रीय सहायता? – 30%
• बजट 2026-27 सौर पंप लक्ष्य? – 50,000
49. राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (e-NAM) का शुभारंभ कब हुआ?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 14 अप्रैल 2016।
📘 विस्तार से समझें: e-NAM – मौजूदा APMC मंडियों को जोड़ने वाला अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल ('एक राष्ट्र, एक बाज़ार'); लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (SFAC) प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी। सुविधाएँ – ऑनलाइन बोली, गुणवत्ता परख (assaying), सीधे बैंक खाते में भुगतान, अंतर-मंडी व अंतर-राज्यीय व्यापार, FPO व गोदाम (e-NWR) से व्यापार। अन्य विकल्प – 1 जुलाई 2015: PMKSY स्वीकृति; 19 फ़रवरी 2015: मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सूरतगढ़); 24 फ़रवरी 2019: पीएम-किसान (गोरखपुर)। राजस्थान – कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 के अंतर्गत मंडियाँ e-NAM से जुड़ी; राज्य की 'कृषक उपहार योजना' e-NAM/ऑनलाइन भुगतान को प्रोत्साहित करती है। राज्य विपणन बोर्ड (RSAMB, 1974) मंडी अवसंरचना देखता है। चुनौती – राज्य-भीतर एकल लाइसेंस, गुणवत्ता मानक और अंतर-राज्यीय व्यापार अभी सीमित।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• e-NAM कार्यान्वयन एजेंसी? – SFAC
• कृषक उपहार योजना किससे जुड़ी? – e-NAM/ऑनलाइन भुगतान
• राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड? – 1974
50. राजस्थान की निम्नलिखित फ़सलों पर विचार कीजिए और बताइए कि इनमें से कितनी रबी फ़सलें हैं:
1. गेहूँ
2. सरसों
3. चना
4. जीरा
5. ग्वार
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
✅ सही उत्तर: (C)
📌 विश्लेषण: केवल चार (गेहूँ, सरसों, चना, जीरा) रबी फ़सलें हैं।
📘 विस्तार से समझें: ग्वार खरीफ़ (वर्षा ऋतु, जून-जुलाई बुआई) की फ़सल है। रबी – अक्टूबर-नवंबर बुआई, मार्च-अप्रैल कटाई; शीत ऋतु व कम तापमान आवश्यक; सिंचाई (कुएँ, नलकूप, नहर) या संरक्षित नमी पर निर्भर – गेहूँ, जौ, सरसों, चना, तारामीरा, जीरा, धनिया, मेथी, इसबगोल, सौंफ। खरीफ़ – बाजरा, ज्वार, मक्का, मूँग, मोठ, उड़द, ग्वार, तिल, मूँगफली, सोयाबीन, कपास, धान। जायद – मार्च-जून (तरबूज़, ख़रबूज़ा, ककड़ी, चारा)। राजस्थान में पश्चिमी जिलों में खरीफ़ का क्षेत्र अधिक, पूर्वी व उत्तर-पश्चिमी सिंचित जिलों में रबी का। बीजीय मसाले (जीरा, धनिया, मेथी, सौंफ) रबी में – राजस्थान-गुजरात देश के प्रमुख उत्पादक; जीरे में पाला (frost) व झुलसा रोग प्रमुख जोखिम।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• ग्वार किस ऋतु की फ़सल? – खरीफ़
• रबी बुआई काल? – अक्टूबर-नवंबर
• जायद फ़सल उदाहरण? – तरबूज़
51. पीएम-किसान सम्मान निधि की पात्रता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: पिछले कर-निर्धारण वर्ष में आयकर देने वाले तथा पूर्व/वर्तमान संवैधानिक पदधारकों के परिवार योजना से बाहर रखे गए हैं।
कथन II: पेशेवर निकायों में पंजीकृत डॉक्टर, इंजीनियर, वकील व चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशेवर इस योजना के पात्र हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: केवल कथन I सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन II गलत – पंजीकृत पेशेवर (डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, CA, वास्तुकार) अपवर्जित हैं। अन्य अपवर्जन – संस्थागत भूधारक; मंत्री, सांसद, विधायक, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष (पूर्व/वर्तमान); केंद्र/राज्य के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी (बहु-कार्य कर्मचारी/चतुर्थ श्रेणी/समूह D को छोड़कर); ₹10,000 या अधिक मासिक पेंशन वाले सेवानिवृत्त (चतुर्थ श्रेणी आदि को छोड़कर)। लाभ – ₹6,000 वार्षिक, तीन किस्तों में ₹2,000-2,000, DBT से; e-KYC, भूमि अभिलेख सत्यापन व आधार-लिंक्ड खाता अनिवार्य। आरंभ – 24 फ़रवरी 2019, गोरखपुर (1 दिसंबर 2018 से प्रभावी)। राजस्थान – लगभग 75.17 लाख किसान, देश में 5वाँ; राज्य की मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि से अतिरिक्त ₹3,000 (कुल ₹9,000)।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• पीएम-किसान प्रभावी तिथि? – 1 दिसंबर 2018
• पेंशन अपवर्जन सीमा? – ₹10,000 मासिक
• राजस्थान में लाभार्थी किसान? – लगभग 75.17 लाख
52. उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: यूरिया पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) व्यवस्था के अंतर्गत आता है और उसका अधिकतम खुदरा मूल्य बाज़ार द्वारा तय होता है।
कथन II: फ़ॉस्फ़ेटिक व पोटैशिक (P&K) उर्वरकों पर 1 अप्रैल 2010 से NBS व्यवस्था लागू है, जिसमें प्रति किलोग्राम पोषक तत्व के आधार पर निश्चित सब्सिडी दी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: केवल कथन II सही है।
📘 विस्तार से समझें: कथन I गलत – यूरिया NBS से बाहर है; इसका MRP सरकार वैधानिक रूप से नियत करती है (45 किग्रा बोरी लगभग ₹242) और उत्पादन लागत व MRP के अंतर की भरपाई सब्सिडी से होती है – इसी कारण यूरिया सस्ता रहता है और अति-प्रयोग होता है (N:P:K अनुपात आदर्श 4:2:1 से बहुत अधिक N की ओर)। NBS (P&K) – सरकार प्रतिवर्ष (खरीफ़/रबी) N, P, K, S की प्रति किग्रा सब्सिडी दर घोषित करती है; DAP, MOP, NPK मिश्रण इसमें; MRP कंपनियाँ तय करती हैं (व्यवहार में सरकार निगरानी रखती है)। अन्य सुधार – 100% नीम-लेपित यूरिया (2015), एक राष्ट्र एक उर्वरक – 'भारत' ब्रांड (2022), PM-PRANAM (रासायनिक उर्वरक घटाने वाले राज्यों को प्रोत्साहन, 2023), नैनो यूरिया/नैनो DAP, उर्वरक सब्सिडी का DBT (बिक्री-बिंदु पर PoS मशीन से)। राजस्थान – मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित संतुलित उर्वरक प्रयोग व गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• यूरिया की 45 किग्रा बोरी MRP लगभग? – ₹242
• आदर्श N:P:K अनुपात? – 4:2:1
• रासायनिक उर्वरक घटाने हेतु राज्य प्रोत्साहन योजना? – PM-PRANAM
53. राष्ट्रीय किसान आयोग (अध्यक्ष – डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन) ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) किस लागत के ऊपर कम से कम 50% रखने की सिफ़ारिश की थी?
✅ सही उत्तर: (D)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – C2 लागत (व्यापक लागत) + 50%।
📘 विस्तार से समझें: CACP की लागत अवधारणाएँ – A1: किसान द्वारा नकद व वस्तु रूप में किए वास्तविक व्यय (बीज, खाद, मज़दूरी, सिंचाई, मशीन, ब्याज आदि); A2: A1 + पट्टे पर ली गई भूमि का किराया; A2+FL: A2 + पारिवारिक श्रम का आरोपित मूल्य; C2: A2+FL + स्वयं की भूमि का आरोपित किराया व स्वयं की स्थायी पूँजी पर ब्याज (सबसे व्यापक); C2* में श्रम का मूल्य बाज़ार/न्यूनतम मज़दूरी पर। केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2018-19 से MSP को 'A2+FL' का कम से कम 1.5 गुना रखा है – किसान संगठन C2 + 50% की माँग करते हैं। आयोग – 18 नवंबर 2004 को गठित, 2004-06 में पाँच प्रतिवेदन; इसके आधार पर 'राष्ट्रीय किसान नीति 2007'। डॉ. स्वामीनाथन (हरित क्रांति के जनक) को 2024 में मरणोपरांत भारत रत्न। राजस्थान में गेहूँ पर MSP (₹2,425) के ऊपर ₹150 बोनस – राज्य स्तर पर लाभकारी मूल्य का प्रयास।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• वर्तमान MSP का लागत आधार? – A2+FL का 1.5 गुना
• राष्ट्रीय किसान नीति? – 2007
• स्वामीनाथन को भारत रत्न? – 2024
54. अभिकथन (A): पिछले कुछ वर्षों में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के Bt कपास क्षेत्रों में गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) का गंभीर प्रकोप देखा गया है।
कारण (R): गुलाबी सुंडी ने Bt कपास (बॉलगार्ड-II) में प्रयुक्त Cry प्रोटीन के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लिया है।
✅ सही उत्तर: (A)
📌 विश्लेषण: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
📘 विस्तार से समझें: Bt कपास – बैसिलस थुरिंजिएंसिस जीवाणु के जीन (Cry1Ac; बॉलगार्ड-II में Cry1Ac + Cry2Ab) से युक्त GM फ़सल; भारत में 2002 में स्वीकृत – देश की एकमात्र व्यावसायिक GM फ़सल। प्रतिरोध के कारण – 'रिफ़्यूज' (गैर-Bt कपास की बाहरी पंक्तियाँ) न लगाना, लंबी अवधि की किस्में, अवैध बीज, सुंडी के जीवन-चक्र में अनेक पीढ़ियाँ। पहले यह समस्या गुजरात-महाराष्ट्र (2015 के आसपास) में, फिर उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) में फैली। उपाय – फ़ेरोमोन ट्रैप, समय पर बुआई व अल्पावधि किस्में, फ़सल अवशेष (बनछटियों) का प्रबंधन, IPM। राजस्थान में कपास 2025-26 (अग्रिम अनुमान) – 17.94 लाख गाँठ; क्षेत्र – श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ (नहरी, अमेरिकन/Bt), भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़। HTBt (शाकनाशी सहिष्णु) कपास अभी स्वीकृत नहीं।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• भारत की एकमात्र व्यावसायिक GM फ़सल? – Bt कपास
• Bt कपास स्वीकृति? – 2002
• बॉलगार्ड-II के प्रोटीन? – Cry1Ac + Cry2Ab
55. देश में उत्पादित व आयातित सम्पूर्ण यूरिया को नीम-लेपित (neem coated) करना किस वर्ष से अनिवार्य किया गया?
✅ सही उत्तर: (B)
📌 विश्लेषण: सही उत्तर – 2015।
📘 विस्तार से समझें: मई 2015 में केंद्र ने 100% यूरिया को नीम-लेपित करने का निर्णय लिया (पहले केवल आंशिक अनुमति)। लाभ – (1) नाइट्रोजन धीरे-धीरे मुक्त होता है (नाइट्रीकरण अवरोधक), जिससे पौधे द्वारा उपयोग-दक्षता बढ़ती है और लीचिंग/वाष्पीकरण से हानि घटती है; (2) सब्सिडी वाले यूरिया का औद्योगिक (प्लाईवुड, रसायन, पशु-आहार) उपयोग की ओर अवैध विपथन रुका; (3) उर्वरक की कुल माँग व सब्सिडी भार पर नियंत्रण। आगे के कदम – 45 किग्रा बोरी (50 किग्रा के स्थान पर, 2018), नैनो यूरिया (IFFCO, 2021 – 500 मिली बोतल ≈ 45 किग्रा बोरी का प्रभाव), 'भारत यूरिया' एकल ब्रांड। राजस्थान – रबी में गेहूँ-सरसों हेतु यूरिया की भारी माँग; सहकारी समितियों (PACS, क्रय-विक्रय सहकारी समितियाँ) व RAJFED के माध्यम से वितरण।
🎯 इस प्रश्न से बनने वाले अन्य प्रश्न:
• नीम लेपन से क्या रुका? – यूरिया का औद्योगिक विपथन
• नैनो यूरिया? – IFFCO, 2021
• यूरिया बोरी का नया आकार? – 45 किग्रा