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🏺 राजस्थान प्राचीन इतिहास — Part 1

ऐतिहासिक काल • पाषाण काल • कालीबंगा • आहड़ • गिलूण्ड • अन्य सभ्यताएं
📜
राजस्थान का इतिहास — परिचय एवं स्रोत
SOURCES
📅 ऐतिहासिक कालखंड — तीन भाग
प्रागैतिहासिक काल
मानव इतिहास की कोई लिखित जानकारी नहीं है। केवल पुरातात्विक साक्ष्य ही स्रोत। "पुरातात्विक काल/संस्कृति ""प्रागैतिहासिक काल" कहते हैं।
आद्य-ऐतिहासिक काल
लिखित साक्ष्य मिलते हैं पर अभी तक पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका। इसे "आद्य-ऐतिहासिक काल" कहते हैं। उदाहरण: सिंधु/हड़प्पा सभ्यता
ऐतिहासिक काल
लिखित जानकारी पूरी तरह पढ़ी जा सकती है। नैतिक रूप से सत्यापित।
📚 प्रमुख साहित्यिक स्रोत
वीर विनोद
by कवि श्यामलदास
राजपुताने का प्राचीन इतिहास
by गौरीशंकर हीराचंद ओझा
Annals & Antiquities of Rajasthan
by कर्नल जेम्स टॉड
ऑरेब स्टेन
घाघर की वैदिक कालीन सरस्वती नाम संवेदना के लिए माध्यम | 1942 में "दी जियोग्राफिकल जर्नल" में प्रकाशित
🔭 राजस्थान में पुरातात्विक सर्वेक्षण
राजस्थान में पुरातात्विक सर्वेक्षण कार्य सर्वप्रथम शुरू करने का श्रेय 1871, में A.C.L. Carlael (ए.सी एल. कार्लाइल) को दिया जाता है ,इन्होंने दौसा से कठोर पाषाण व मानव अस्थियों की प्राप्ति की सूचना दी थी । द्वारा
बाद में: D.R. Bhandarkar, Dayaram Sahni,H.D.Sankaliya, B.B. Lal, Jeevan Khrakball, R.C. Aggarwal
प्रागैतिहासिक शेलश्रयों स्थलों की प्राप्ति → अरावली श्रेणियों व चम्बल नदी घाटी क्षेत्रों से मानव निर्मित शेलचित्र "आखेट द्रश्य सर्वाधिक " बूंदी में "छाजा नदी" & कोटा में चम्बल नदी घाटी क्षेत्र से प्राप्त हुए है और विराटनगर (जयपुर) & हरसौरा (अलवर ) से भी मिले है
"राजपुताना" नाम — जॉर्ज थॉमस द्वारा (1800 में)
"राजस्थान" नाम — कर्नल टॉड द्वारा
जान के इति: "विविधता और निरन्तरता के साथ जोड़ेजाणी बागीरव रहा है।"
जनपद काल एवं राजस्थान का नामकरण
1000 BCE – 300 CE
🗺️ राजस्थान के जनपद
मत्स्य जनपद
राजधानी: विराटनगर | अलवर, भरतपुर, जयपुर क्षेत्र
शिवि जनपद
राजधानी: मध्यमिका (नगरी) | चितौड़गढ़
शाल्व जनपद
अलवर क्षेत्र | भीणमाल, सांचोर, सिरोही के निकट
कुरु
महाभारतकालीन — बीकानेर (मरु) | राजधानी: इंद्रप्रस्थ
सूरसेन
राजधानी: मथुरा | जयपुर, धौलपुर, करौली
📌 1908 एवं पुरातत्व सर्वेक्षण
1908 ई. में सेटनकर को झालावाड़ जिले में पुराणपाषाण काल के उपकरण मिले
इस सांस्कृति को उद्घाटित करने में — भा. पुरात. सर्वेक्षण (New Delhi) | डेक्कन कॉलेज पुना: V.N. Mishra
पुरातत्व & संग्रहालय विभाग राजस्थान के : R.C. Agarwal, Vijay Kumar, हरिशचन्द मिश्रा आदि का योगदान तथा इस संस्कृति का प्रसार मुख्यत : चम्बल व बनास तथा इसकी सहायक नदियों के किनारे हुआ
B Olchin (ऑलचिन) ने जालोर जिले के बालूटीलों में पाषाणयुगीन उपकरण खोज निकाले
1870 में P.N. Hake ने जयपुर व इंदरगढ़ से आर्यों की भारत शाखा के प्रमाण खोज निकाले
🪨
पाषाण काल — राजस्थान
STONE AGE
🏔️ पुरापाषाण काल
काल
10 लाख BCE – 10,000 BCE
प्रमुख स्थल
भींवर नगर (जोधपुर), आनासागर (अजमेर), डीडवाना (नागौर), इंद्राणी (कोटा), जागल (नागौर)
विशेषता
शिकार; कंद-मूल-फल | मानव → आग जलाना सीखा | पॉलिश से अपरिचित
औजार
कुल्हाड़ी, नापर, हैंडएक्स
⛰️ मध्यपाषाण काल
काल
10,000 BCE – 5,000 BCE | Microlithic
स्थल
तीलवाड़ा (बाड़मेर), विराट नगर, लाघोन
ओझार
चंबल, लूनी, बाँणप, भैंरच | लघु उपकरण
विशेषता
पशुपालन + रहस्य संग्रहता (Homo Sapiens)
🌿 नव पाषाण काल
काल
5,000 BCE से | "जाइन-टाइल्ड" = "पाषाण कालीन क्रांति"
स्थल
बागोर (भीलवाड़ा), आहड़, गिलूण्ड, कालीबंगा
उपलब्धियाँ
कृषि क्रांति, मृदभांड, स्थायी बस्तियाँ, पहिये का आविष्कार, कुल्हाड़ी, बछुला, छेनी
🥉 ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic — 3000 BCE)
स्थल
तिलवाड़, गणेश्वर (सीकर), आहड़ (उदयपुर), कालीबंगा (हनुमानगढ़), बागोर, बैराठ
ताँस्यग
= ताम्र युग + काँस्य युग (Bronze) | हड़प्पा/सिंधु वाली तकनीकी पर
खाद्य उपादक + कृषि + मृदभांड कला
ताम्र से परिचय
स्थायी घर
🏛️
राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं — वर्गीकरण
CIVILIZATIONS
📊 तीन प्रकार का वर्गीकरण
काँस्ययुगीनताम्रयुगीनलौहयुगीन
कालीबंगा (हनुमानगढ़)
तरबान बलाड़ेया (अनागरमर)
कालीबंगा (ताम्र+काँस दोनों)
गणेश्वर (सीकर)
आहड़ (उदयपुर)
कालाथल (उदयपुर)
नालथन, सोथी, रैनागढ़
नैराह, रेंद, नगर (टोंक)
ईसवाल (उदयपुर)
सुनारी (झुंझुनू)
नोह (भरतपुर)
नगरी (चितौड़)
भीनमाल (जालोर)
⭐ TRICK — पाषाण काल स्थल
पुरापाषाण
भींवर नगर (जोधपुर)
आनासागर (अजमेर)
डीडवाना (नागौर)
इंद्राणी (कोटा)
मध्यपाषाण
तीलवाड़ा (बाड़मेर)
विराटनगर (जयपुर)
बागोर (भीलवाड़ा)
ताम्रपाषाण
गणेश्वर (सीकर)
आहड़ (उदयपुर)
कालीबंगा (हनुमानगढ़)
🔶
कालीबंगा सभ्यता (हनुमानगढ़ | H)
4000 BCE
📍 परिचय
अर्थ
काली चूड़ियाँ (ताम्र + काँच दोनों)
स्थान
हनुमानगढ़ | घग्घर (सरस्वती) नदी के तट पर
खोज (1952)
अमलानंद घोष द्वारा
उत्खनन (1961-69)
B.K. Thapar, J.V. Joshi, B.B. Lal के नेतृत्व में
काल
4,000 BCE — सिंधु व सरस्वती नदी के 25 स्थलों में से एक
🏙️ विशेषताएं
विश्व के प्राचीनतम जुते हुए खेत यहाँ से प्राप्त
7 अग्नि वेदियाँ मिलीं + 4 बच्चों की कंकालें (6 डेड)
नगर योजना: दो टीले — पूर्वी (शाजनरात) + पश्चिमी (दुर्ग)
पानी निकासी → "लकड़ी व ईंटों की नालियाँ"
नगर योजना → सिंधुबाही के अनुरूप
सेहव लिपि (हड़प्पा लिपि) अंकित मिट्टी के बर्तन व मुहरें
फर्श में "अलंकृत ईंटों का उपयोग" — एकमात्र उदाहरण
"वहुधान्सदक्षाल" भी कहते हैं (जुते खेत के लिए)
काँस्ययुग = ताम्र + काँस्य (Bronze) दोनों
🔷
आहड़ सभ्यता — ताम्रवती / बनास संस्कृति (उदयपुर | U)
4000 BCE
📍 परिचय
स्थान
आहड़ (बेड़च) नदी के तट पर | उदयपुर से 3 km | 500 मी. लंबी
अन्य नाम
धूलकोट (धूल के टिले), ताम्रवती भगरी
काल
4000 BC पुरानी संस्कृति के अवशेष
उत्खनन
1953 → R.K. व्यास | 1956 → R.C. Aggarwal, V.N. Mishra | 1961-62 → H.D. Sankllya
🏺 प्रमुख अवशेष
मकानों में एक से अधिक चूल्हे (संयुक्त परिवार प्रणाली)
कुचला लोहित मृदभांड (लाल-काले वाली संस्कृति)
ताम्र की वस्तुएँ, चाकत
टेराकोटा वृषभ आकृतियाँ — "बनासियन कुल" कहा जाता है
अनाज के बड़े मृदभांड — "गोरेवन्टोठ" कहलाते हैं
दो मुँह का चूल्हा | सिलनक्षत्र व पेन
दीवारों व नींवों को सजाने हेतु मिट्टी के बुनावट के रुड़े
🔸
गिलूण्ड (राजसमंद | R) + कालाथल (उदयपुर | U)
SITES
📍 गिलूण्ड (राजसमंद)
स्थान
बनास नदी किनारे, दो टेकड़ियों पर (मोडिया, भंजरी)
उत्खनन
B.B. Lal (1957-58)
अवशेष
2000 BC पुरानी ताम्र युगीन सभ्यता | दलान भरने की कोठी | हाथी दाँत की पुड़ियाँ | पत्थर की डेलियाँ | पकी ईंटों के प्रयोग के लक्षण | आहड़ समरूश मृदपात्र
📍 कालाथल सभ्यता (उदयपुर)
स्थान
तलकानगर तहसील, नावणेल ग्राम (उदयपुर)
काल
3030–2500 BCE
उत्खनन
1993 → V.N. Mishra | 1994-2000 → B.S. Singh
विशेषता
लोहे गलाने की मेड़ियाँ | 5वीं शताब्दी BC से लोहा गालने का कार्य (मौर्य, शुंग-कुषाण काल में जारी) | ताम्र ओजारों पर सिंधुबाही बगड़ | लोहे की मेड़ियों के अवशेष
🗺️
अन्य प्रमुख पुरातात्विक स्थल
KEY SITES
बैराठ / विराटनगर (जयपुर)
📍 जयपुर | मत्स्य जनपद की राजधानी
प्राचीन नाम: विराटनगर — लोह धर्म का प्रमुख केंद्र
"बीजकपहाड़ी" से लोह-विहार के अवशेष
अशोक का "भाणु अभिलेख" — अनुवाद: कैप्टन किरफी
"अशोक स्तंभ + एकशूल मंदिर" के अवशेष
ताम्बे व लोहे की कलाकृतियाँ नहीं मिलीं
गणेश्वर (सीकर)
📍 सीकर | काँत्ली नदी का उद्भव | 2800 BCE
"भारत की ताम्र सभ्यताओं की जननी"
उत्खनन: R.C. Agarwal (1977)
2000 ताम्र आयुध + उपकरण
99% नाका पाषाण
तांबा हड़प्पा व मोहनजोदड़ो भेजा जाता था
"कृपाणवर्णी मृदपात्र" (व्याले तरस्तरसों, कुड़ियाँ)
रंगमहल (हनुमानगढ़)
📍 हनुमानगढ़ | प्राचीन घाघरा एवं सरस्वती क्षेत्र
नाम: लाल रंग पर काले डिजाइन से
उत्खनन: श्रीमती हन्नारिड (स्वीडन) के निर्देशन में (1952-54)
कुषाणकालीन 105 ताम्र मुद्राएं
पाषाण युग से 6ठी सदी BC तक आनाद
कांटियों के ऊधार बसाने के संकेत
रैंद (टोंक)
📍 टोंक | "बीलनारी के किनारे" / "कांकरेव नगर"
1st: D.R. Sahni (1938) | उत्खनन K.N. Puri
यूनानी "अपेलोदोरस" का स्वर्णित सिक्का
"स्त्री की मुहर" पर ब्राह्मी में "मालव जनपद स"
"सेलखड़ी की डिनिया" (विच्छू के अवशेष)
लोहे के ओजार अत्याधिक → "प्राचीन राजस्थान का रायनगर"
3075 पंचमार्ची विक्रमे | 300 मालव जनपद विक्रमे
नगर (टोंक)
📍 टोंक | गुप्तोत्तरकालीन
उत्खनन: गृत्स्मदेव + K.V. सौन्दरयण
गुप्तोत्तरकालीन: मातृशावमर्दिनी, एकमुखी शिवलिंग, गणेश, दुर्गा, लक्ष्मी
6000 मालव सिक्के
मृदभांड "मद्यों Red"
बागोर (भीलवाड़ा)
📍 भीलवाड़ा | बेशरी नदी | 5000–3000 BCE
उत्खनन: Dr. V.N. Mishra, Dr. L.S. Leshnik (1967-68)
कृषि + पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य
मृत शरीर → पू-पू. दिशा में दफन | 10-40 cm सूई (ताम्बे)
"तागोर 27" = लघु पाषाण उपकरणों का कब्र
पाषाण + लोहे के उपकरण साथ में मिले
नगसी (चितौड़गढ़)
📍 चितौड़ | प्राचीन: मध्यमिका | शिवि जनपद की राजधानी
उत्खनन: 1904 डॉ. भाण्डारकर | 1915-16 सौन्दर्यापन
खोज: कार्लाइल (1872)
दो गुप्तकालीन संस्कृत स्तम्भ — बाल+लिंह उड़ाई
शुंग + गुप्त मेनों की मृण्मूर्तियाँ
~400 BC में उत्पन्न | 3 काल निर्धारित
सुनारी (झुंझुनू)
📍 झुंझुनू | काँपील नदी | 1100–700 BC
उत्खनन: R.C. Agarwal (1963-64)
5 सांस्कृतिक युगों के अवशेष
ब्राह्मी में "मालव जनपद स" अंकित
⭐ BC 12वीं सदी में लोहे का प्रयोग होने के साक्ष्य
माछड़ों: Black + Red | 16 रिंग बेल
ईसवाल (उदयपुर)
📍 उदयपुर | प्राचीन औद्योगिक बस्ती
2000 वर्षों तक निरन्तर लोहा जलाने के प्रमाण
5 स्तरों पर भाटियों के प्रमाण
5वीं शताब्दी BC से लोहा गालने का कार्य
मकान: प्रस्तर खण्डों से निर्मित
नोह (भरतपुर)
📍 भरतपुर | 1100–700 BC
उत्खनन: R.C. Agarwal (1963-64)
देश की प्राचीनतम लोह-भिरेओं
जीवनयों में चावल का उपयोग
लोहे के तीर, कशेरा, मौर्ययुगीन औजार
जीशरत चुड़ियाँ + मृणामूर्तियाँ (मातृदेवी)
ओझियाना (भीलवाड़ा)
📍 भीलवाड़ा | 3000–1500 BC
पुरातत्व: आहड़-संस्कृति से Related
"ओझियाना बुल" (श्वेत-चित्रित वृषभ) से प्रसिद्ध
उत्खनन: 2000 BP | व्यास-सर्वे विभाग
"त्रिचरणीय संस्कृताओं" के प्रमाण
जाड़ोल (भीलवाड़ा)
📍 भीलवाड़ा | 1998-99 उत्खनन
उत्खनन: B.R. Meena → S.C. भूरन, कुवरलाड़, B.R. Singh
1100 BC – 200 AD | पूर्वी NBP, NBP, शुंग, कुषाण
ललितालान में नारी की मुख्य भूर्ति
लोहे का चाकू | ताले की चुड़ियाँ
भीनमाल (जालोर)
📍 जालोर | उत्खनन (1953-54) R.C. Agarwal
0 लदी BC से शकों की संस्कृति
यूनानी "दुह्त्सरी सुराही" मिली
कृदपात्री पर विदेशी प्रगत
कोरियर (सावाईमाधोपुर)
📍 सावाईमाधोपुर | 2003 से उत्खनन जारी
सरस्वती नदी के तट पर
वर्तनों में काली मिट्टी — Only यहीं पर
सलखड़ी के 3000 मनके
प्राक्-पारम्परिक तैक्षित हड़प्पा काल से जुड़ा
जोधपुरा (जयपुर)
📍 जयपुर | साबी नदी | 1972-75
लोहे के गहने, तीरों के अग्रभाग, छीले
लोहा जलाने की अस्थियाँ
जुनाखेड़ा (पाली)
📍 पाली | नाडोल रखीब | 1863-84
उत्खनन: H.W.B.K. यंत्रिक (1863-84)
4 सांस्कृतिक स्तर: I. 1800 BC → काले-लाख अलंकृत मृदपात्र | II. 1st-5th सदी → ब्राह्मणलिकों का अंकन | III. 6th-9वीं सदी → काले अंपदार कोरे
🏰
जनपद काल — राजस्थान
1000 BCE
🗺️ प्राचीन नदियाँ एवं आर्य
दृषद्वती + सरस्वती नदियाँ → आर्यों की शरणस्थली
पौराणिक साक्ष्य → जोगनदेश (Bikaner + Jaisalmer) से नलसाक्ष + कृष्ण — आरबाना का सैनेधाभी प्राप्त
1870 में P.N. Hake → "हिडेयस, अग्युलियन, धलिवर" → जयपुर व इंदरगढ़ से
राजस्थान पुरातात्विक सर्वेक्षण: 1871 → A.S.L. Carlisle
इन्होंने पैरा से केहोर पाषाण व मानव कांकियों की खोज की
⚔️
राजपूत काल — उत्पत्ति एवं विकास
RAJPUT ERA
👑 राजपूतों की उत्पत्ति
पूर्व मध्यकाल में अनेक जातियाँ भारत पर विदेशी आक्रमणों के विरोधस्वरूप 'राजपूत' जातियों के रूप में उदित हुईं
राजवंशों का इतिहास → गुहिल, प्रतिहार, परमार, चौहान, भाड़ी (सोलंकी) आदि
मध्यकाल में: राजपूत शासकों की हार का कारण — आपमी संघर्षों का जाल + गुटों की खांमतवाद
डावी काल के प्रमुख साहित्यकार: माघा, हरिभद्रसूरि, चंदबरदाई, सुरचमलल भीलण, कवि करकीन, दुरसा जाढ़ा, मेघाली आदि
धार्मिक आंदोलन: लोकधर्म संस्कृतेन का उदय राजपूत/डावी काल में
📅 महत्वपूर्ण तथ्य
"राजपुताना" — जॉर्ज थॉमस (1800)
"राजस्थान" — कर्नल टॉड
1908 में झालावाड़ में पुराणपाषाण उपकरण
1857 की क्रांति में राजस्थान — लामा, धार्मिक शिक्षान व जनजाति आंदोलन
18वीं सदी आंग्र-राजस्थान — काफी उत्तर-जदात वाली रही
→ Part 2 देखें — 100 MCQ (Quiz Mode) →
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राजस्थान प्राचीन इतिहास Part 1 | RAS Pre+Mains | Expert Notes